🌸🌸 Date -17/04/2021.🌸 🌸
💞 ( Batch-Super Tet-2021)💞 🕵️शिक्षण कौशल🕵️

🔬( Teaching skill)🔬

🥀शिक्षण कौशल के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण प्रश्नों का उद्भव होता है,जो निम्नलिखित हैं÷

🗣️प्रथम- क्या पढ़ाना है?

🧠🌻इसके अंतर्गत विषय का ज्ञान होना आवश्यक है,
अर्थात शिक्षक जिस भी विषय वस्तु को विद्यार्थी के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा है या उन्हें पढ़ाने जा रहा है ,उस विषय में अच्छी समझ व उस विषय के बारे में अच्छी सूझबूझ भी होनी चाहिए, जिससे वह विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देकर संतुष्ट कर सके साथ ही साथ उन्हें उस विषय में पारंगत कर सकें।

🗣️दूसरा कैसे पढ़ाना है?

🧠🌻इसके अंतर्गत ज्ञान को उपयोग करने का तरीका आना आवश्यक है,
अर्थात जिस भी विषय वस्तु को हम विद्यार्थी के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहे हैं उसको पढ़ाने का तरीका बहुत ही महत्वपूर्ण है वा आवश्यक है, क्योंकि प्राथमिक कक्षा पूर्व प्राथमिक कक्षा के बच्चे कई माध्यमों व शिक्षण विधियों व शिक्षण कौशलों से सीखते हैं जो कि पाठ्यक्रम या पुस्तक के ज्ञान के माध्यम से ज्ञान सीधा उन्हें सिखाया नहीं जा सकता है।

🌻अर्थात् अपने ज्ञान का उपयोग कैसे करें यह हमें शिक्षण कौशल सिखाता है।

✍️शिक्षा शास्त्री व मनोवैज्ञानिक के विचार÷शिक्षा शास्त्री का मनोवैज्ञानिक का मत है कि वह शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों का मिश्रण मानते हैं।

🌊मनुष्य में विभिन्न कौशल अपने उचित स्थान पर ही उचित शिक्षण विधि के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं।

⛄गेज के अनुसार⛄

✍️शिक्षण कौशल व विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जो अध्यापक द्वारा अपनी कक्षा शिक्षण की स्थिति में प्रयोग किया जाता है, यह शिक्षण क्रम की विभिन्न कक्षाओं से संबंधित होता है जिसे शिक्षक अपनी कक्षीय अंतः क्रिया में प्रयोग करता है।

🌷🌷Written by 🔬Shikhar pandey🌷🌷

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📛 शिक्षण कौशल ➖

एक अध्यापक को शिक्षण करवाने के लिए शिक्षण कौशल या जीवन कौशल की बहुत अधिक आवश्यकता होती है |
क्योंकि शिक्षण कौशल वे विधियां हैं या फिर वह कला है जिसके माध्यम से शिक्षक अपने ज्ञान को प्रदर्शित करता है |
यदि व्यक्ति के पास ज्ञान है लेकिन उस ज्ञान को व्यक्त करने का या प्रदर्शित करने का तरीका नहीं है तो उसके ज्ञान का कोई अर्थ नहीं है | शिक्षा शास्त्री और मनोवैज्ञानिकों ने शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों का स्वरूप माना है |

उन्होंने कहा है कि यदि विज्ञान, ज्ञान की अवधारणा है तो कला उस अवधारणा को व्यक्त करने का तरीका है |

शिक्षण कला तब ही स्वीकार किया जाएगा जब योग्यता और क्षमता दोनों हों |जहाँ योग्यता की तुलना विज्ञान से की गई है और क्षमता उस ज्ञान को प्रदर्शित करने की एक कला है |

शिक्षण कौशल के संबंध में कहा जाता है कि

” कौन सी बात कहां कही जाती है ये हुनर हो तो हर बात सही जाती है |” अर्थात शिक्षक के पास अपने ज्ञान को व्यक्त करने का तरीका है तो उसके पास ज्ञान कम होगा तब भी वह अपने ज्ञान को एक बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकता है और यदि शिक्षक के पास कला नहीं है या उसको अपनी बात कहने का तरीका ज्ञात नहीं है तो उसके ज्ञान का कोई अर्थ नहीं है अर्थात उसके पास जितना भी ज्ञान है वह उस ज्ञान को प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं हो पाएगा | मनुष्य में विभिन्न कौशल अपने उचित स्थान पर ही उचित शिक्षण विधि के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं |

गेज के अनुसार➖

” शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जो अध्यापक द्वारा अपनी कक्षा शिक्षण की स्थिति में प्रयोग किया जाता है यह शिक्षण क्रम की विभिन्न कक्षाओं से संबंधित होता है जिसे शिक्षक अपनी कक्षीय अंतः क्रियाओं में निरंतर प्रयोग होता है | “

अर्थात शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन की प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी कक्षा के में एक ऐसी परिस्थिति उत्पन्न कर सकता है जो एक निश्चित क्रम में उसकी कक्षा से संबंधित होती है और जिसके माध्यम से शिक्षक कक्षा में बच्चों के साथ परस्पर अंत: क्रिया करके अपने शिक्षण को रोचक और कक्षा को रुचिकर बना सकता है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

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☘️🌼 शिक्षण कौशल🌼☘️
(Teaching skills)

🔸 शिक्षण कौशल है क्या?

शिक्षक अपने शिक्षण को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जो भी कक्षा गत व्यवहार हेतु व्यूह रचना अपनाता है वह शिक्षण कौशल कहलाता है।

🔸शिक्षा शास्त्री और मनोवैज्ञानिक शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों को स्वरूप माना है।

🔸 शिक्षण कला है तब ही स्वीकार किया जाएगा जब योग्यता और क्षमता दोनों हो।

🔸 मनुष्य में विभिन्न कौशल अपनी उचित स्थान पर ही उचित शिक्षण विधि के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं।

🔸 शिक्षण कौशल के संबंध में कहा जाता है कि—

“कौन सी बात कहां कहे जाती है यह हुनर हो तो हर बात सही जाती है”।

☘️🌼शिक्षण कौशल की परिभाषा——

गेज के अनुसार➖शिक्षण कौशल व विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जो अध्यापक द्वारा अपनी कक्षा शिक्षण की स्थिति में प्रयोग किए जाते हैं यह शिक्षण क्रम की विभिन्न कक्षाओं से संबंधित होते हैं जिसे शिक्षक अपनी कक्षिप अंतः क्रिया में निरंतर प्रयोग करता है।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻
शिक्षण कौशल(Teaching skill)
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★शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक के द्वारा प्रश्न पूछना, व्याख्यान देना, सहायक सामग्री का प्रदर्शन करना, पुनर्बलन देना, उदाहरण प्रस्तुत करना आदि कार्य करने होते हैं जिसके लिए शिक्षक को अपने शिक्षण प्रक्रिया को सरल सुगम वह रुचि पूर्व बनाने के लिए शिक्षण कौशल का ज्ञान होना चाहिए।

अर्थात शिक्षक द्वारा शिक्षण कार्य करते हुए अपने शिक्षण को प्रभावपूर्ण और रुचिकर व उद्देश्य पूर्ण बनाने के लिए जो कुछ भी किया जाता है उसे शिक्षण कौशल कहते हैं।

अतः शिक्षक प्रशिक्षण में इन कौशलों का विकास महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

स्टोंस और मॉरिस के अनुसार
“शिक्षण कौशल की योजना पाठ योजना का सामान्य रूप होता है इसमें वांछित व्यवहार परिवर्तन के लिए अनुदेशन योजना सम्मिलित होती है इसमें युक्तियों की योजना भी तैयार की जाती है पाठ योजना का कौशल आयोजन संपूर्ण पाठ्यक्रम का ही अंग होता है।”

अर्थात शिक्षण प्रारंभ करने के पूर्व उसकी योजना बनानी पड़ती है। शिक्षण का पूर्व अनुभव शिक्षण कौशल की योजना के निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग देता है। शिक्षण कौशल का विकास सूक्ष्म शिक्षण द्वारा किया जाता है।

★शिक्षा शास्त्री और मनोवैज्ञानिक ने शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों का स्वरूप माना है।

★शिक्षण कला तब ही स्वीकार किया जाएगा जब योग्यता और क्षमता हो।

★मनुष्य में विभिन्न में कौशल अपने उचित स्थान पर उचित शिक्षण विधि के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं।

परिभाषा

गेज़ के अनुसार,”शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जो अध्यापक द्वारा अपनी कक्षा शिक्षण की स्थिति में प्रयोग किया जाता है यह शिक्षण क्रम की विभिन्न कक्षाओं से संबंधित होता है जिससे शिक्षक अपने कक्ष अंत: क्रियाओं में निरंतर प्रयोग करता है।”

✒️Notes By✒️आनंद चौधरी📋📋
(Supertet)

शिक्षण कौशल(Teaching skill)

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🌸शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक के द्वारा प्रश्न पूछना, व्याख्यान देना, सहायक सामग्री का प्रदर्शन करना, पुनर्बलन देना, उदाहरण प्रस्तुत करना आदि कार्य करने होते हैं जिसके लिए शिक्षक को अपने शिक्षण प्रक्रिया को सरल सुगम वह रुचि पूर्व बनाने के लिए शिक्षण कौशल का ज्ञान होना चाहिए।

अर्थात शिक्षक द्वारा शिक्षण कार्य करते हुए अपने शिक्षण को प्रभावपूर्ण और रुचिकर व उद्देश्य पूर्ण बनाने के लिए जो कुछ भी किया जाता है उसे शिक्षण कौशल कहते हैं।

अतः शिक्षक प्रशिक्षण में इन कौशलों का विकास महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

स्टोंस और मॉरिस के अनुसार,
“शिक्षण कौशल की योजना पाठ योजना का सामान्य रूप होता है इसमें वांछित व्यवहार परिवर्तन के लिए अनुदेशन योजना सम्मिलित होती है इसमें युक्तियों की योजना भी तैयार की जाती है पाठ योजना का कौशल आयोजन संपूर्ण पाठ्यक्रम का ही अंग होता है।”

अर्थात शिक्षण प्रारंभ करने के पूर्व उसकी योजना बनानी पड़ती है। शिक्षण का पूर्व अनुभव शिक्षण कौशल की योजना के निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग देता है। शिक्षण कौशल का विकास सूक्ष्म शिक्षण द्वारा किया जाता है।

➡️शिक्षा शास्त्री और मनोवैज्ञानिक ने शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों का स्वरूप माना है।

➡️शिक्षण कला तब ही स्वीकार किया जाएगा जब योग्यता और क्षमता हो।

➡️मनुष्य में विभिन्न में कौशल अपने उचित स्थान पर उचित शिक्षण विधि के माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं।

परिभाषा✍️

गेज़ के अनुसार,”शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जो अध्यापक द्वारा अपनी कक्षा शिक्षण की स्थिति में प्रयोग किया जाता है यह शिक्षण क्रम की विभिन्न कक्षाओं से संबंधित होता है जिससे शिक्षक अपने कक्ष अंत: क्रियाओं में निरंतर प्रयोग करता है।”

Notes by Shreya Rai ✍️🙏

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