15/04/2021.            Thursday

          TODAY CLASS…

    सामाजिक अधिगम का सिद्धांत

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प्रतिपादक :—अल्बर्ट बंडूरा

अमेरिका ( मनोवैज्ञानिक)

अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार:—किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण करके उनके जैसा व्यवहार अपने स्वभाव में लाने की प्रक्रिया को इन्होंने सामाजिक अधिगम बोला है *सीखने* को सशक्त माध्यम है

➖ मॉडलिंग :—दूसरे के व्यवहार को निरीक्षण द्वारा सीखना मॉडलिंग कहलाता है 

सीखने में जो निरीक्षण के महत्व को स्वीकार करते हुए बंडूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत प्रतिपादित किया।

 *अल्बर्ट बंडूरा* :— हम पर्यावरण में उपलब्ध किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे समझे अनुक्रिया नहीं करते हैं हम हमारे चारों और विद्वान पर्यावरणीय तत्व सूझ और पूर्व अनुभूति के आधार पर चयन करते हैं और यह कार्य हम हमारे चारों ओर रहने वाले व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण कर उसका अनुकरण करते हैं इस प्रकार हम पर प्रक्षेपण द्वारा अधिगम की प्रक्रिया पूरी करते हैं

➖ बंडूरा के अनुसार मानव व्यवहार/ क्रिया तीन चीजों पर निर्भर करता है

(1) बाहय वातावरण

(2) संज्ञानात्मक या आंतरिक क्रियाएं

(3) व्यवहार

सामाजिक अधिगम सिद्धांत को व्यवहारवाद और संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत के बीच की योजक कड़ी कहा जाता है क्योंकि यह सिद्धांत ध्यान, स्मृति और प्रेरणा तीनों को समायोजित करता है

➖ बाहय वातावरण में उपस्थित उद्दीपक (अन्य व्यक्ति के व्यवहार) और इसके साथ व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार के मध्य आंतरिक संज्ञानात्मक चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

              बंडूरा का प्रयोग

➖➖➖➖➖➖➖➖➖ बंडूरा ने एक व्यस्क आदमी द्वारा कुछ बच्चों के सामने एक 3 से 4 फीट की लंबी गुड़िया जिसको उन्होंने (बॉब गुड़िया) का नाम दिया उसको उछलते हुए, मारते हुए, एवं उसके प्रति आक्रामकता को दिखाते हुए चले गए और बाद में बच्चे और गुड़िया को अकेला छोड़ दिया गया उसके बाद बच्चे ने भी उस बेबी डॉल के साथ उसी प्रकार का आक्रामकता वाला व्यवहार किया।

 *दूसरा प्रयोग टीवी में अकर्मक मूवी को दिखाकर* 

➖ प्रथम मूवी सामाजिक मूल्य आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ सामाजिक व्यवहार दर्शाता है

➖ दूसरे मूवी प्रेम पर आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ में स्नेह से रहता है

➖ तीसरी मूवी हिंसात्मक दृश्य युक्त थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ आक्रमक व्यवहार दिखाया

  *मॉडल में तीन कारक महत्वपूर्ण है* 

(1) मॉडल की विशेषता

(2) प्रेक्षक की विशेषता

(3) व्यवहार का पुरस्कार परिणाम

 *जैसे* :— हम सब एक क्लास में जुड़े हैं हमारे अंदर क्या गुण जाएगा यह कई चीजों पर निर्भर करता है कि आपको क्या बताया जा रहा है,या आपको इस वातावरण से क्या मिल रहा है ,या आप क्या कर रहे है, यह सब महत्वपूर्ण है यह एक मॉडल की विशेषता है दूसरी बात आप खुद महत्वपूर्ण है प्रेक्षक सबके अंदर अलग-अलग होती है आपकी समझ क्या है ,आपका ध्यान कैसा है, आप क्या सोचते हैं, क्या समझते हैं, उसके बेसिक पर आपके अंदर यह समझ विकसित आयेगी,आपने क्या व्यवहार किया ,उसका क्या रिजल्ट होगा उस पर भी निर्भर करता है

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Notes by:—✍ संगीता भारती✍

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🌲⚜️🔅सामाजिक अधिगम का सिद्धांत🔅⚜️🌲

🔅प्रतिपादक ➖️अल्बर्ट बंडूरा

🔅अमेरिका ( मनोवैज्ञानिक)

🔅✏️अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार ➖️किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण करके उनके जैसा व्यवहार अपने स्वभाव में लाने की प्रक्रिया को इन्होंने सामाजिक अधिगम बोला है सीखने का सशक्त माध्यम है

🔅 मॉडलिंग —दूसरे के व्यवहार को निरीक्षण द्वारा यादेखकर सीखना मॉडलिंग कहलाता है 

सीखने में जो निरीक्षण के महत्व को स्वीकार करते हुए बंडूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत प्रतिपादित किया।

 अल्बर्ट बंडूरा➖️ हम पर्यावरण में उपलब्ध किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे समझे अनुक्रिया नहीं करते हैं हम हमारे चारों और विद्वान पर्यावरणीय तत्व सूझ(दिमाक )और पूर्व अनुभूति के आधार पर चयन करते हैं और यह कार्य हम हमारे चारों ओर रहने वाले व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण कर उसका अनुकरण करते हैं इस प्रकार हम प्रक्षेपण द्वारा अधिगम की प्रक्रिया पूरी करते हैं

🔅 ✏️बंडूरा के अनुसार➖️ मानव व्यवहार/ क्रिया तीन चीजों पर निर्भर करता है🔅

⚡️(1) बाहय वातावरण

⚡️(2) संज्ञानात्मक या आंतरिक क्रियाएं

⚡️(3) व्यवहार

सामाजिक अधिगम सिद्धांत को व्यवहारवाद और संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत के बीच की योजक कड़ी कहा जाता है

क्योंकि यह सिद्धांत ध्यान, स्मृति और प्रेरणा तीनों को समायोजित करता है

⚡️बाहय वातावरण में ➖️उपस्थित उद्दीपक (अन्य व्यक्ति के व्यवहार) और इसके साथ व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार के मध्य आंतरिक संज्ञानात्मक चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

      🔅🌲बंडूरा का प्रयोग ➖️बंडूरा ने एक व्यस्क आदमी द्वारा कुछ बच्चों के सामने एक 3 से 4 फीट की लंबी गुड़िया जिसको उन्होंने (बॉब गुड़िया) का नाम दिया उसको उछलते हुए, मारते हुए, एवं उसके प्रति आक्रामकता को दिखाते हुए चले गए और बाद में बच्चे और गुड़िया को अकेला छोड़ दिया गया उसके बाद बच्चे ने भी उस बेबी डॉल के साथ उसी प्रकार का आक्रामकता वाला व्यवहार किया।जो उन्होंने किया था 

 🔅🌲दूसरा प्रयोग टीवी में अकर्मक मूवी को दिखाकर➖️ 

🔅प्रथम मूवी ➖️सामाजिक मूल्य आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ सामाजिक व्यवहार दर्शाता है

🔅 दूसरे मूवी ➖️प्रेम पर आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ में स्नेह से रहता है

🔅तीसरी मूवी➖️ हिंसात्मक दृश्य युक्त थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ आक्रमक व्यवहार दिखाया

 🔅🔅मॉडल में तीन कारक महत्वपूर्ण है➖️ 

(1) मॉडल की विशेषता

(2) प्रेक्षक की विशेषता

(3) व्यवहार का पुरस्कार परिणाम

⚜️मॉडल की विशेषता➖️ किस प्रकार के कारक दिखा रहे हैं जैसे गुड़िया को किस प्रकार खिलाते दिखा रहा है यह इसकी विशेषता होती हैं

⚜️ प्रेक्षक की विशेषता➖️ इसमें सभी व्यक्तियों में प्रेक्षक अलग अलग होता है अपनी अपनी समझ गए होती हैं आपकी समझ गया है आपका मन क्या है यह सब  की विशेषता होती प्रेक्षक किस प्रकार का सोच रहा है यह उसी पर निर्भर करता है

⚜️व्यवहार का पुरस्कार परिणाम ➖️जो हम व्यापार करते हैं उसका कैसा परिणाम मिलता है उसका व्यवहार कितना पसंद आया यह सब व्यापार के पुरस्कार परिणाम पर निर्भर करता है

Notes by Sapna yadav📝📝📝📝📝📝📝

सामाजिक अधिगम का सिद्धांत

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प्रतिपादक –  अल्बर्ट बंडूरा

 निवासी –  कनाडा

सिद्धांत दिया –  1977 में

प्रयोग-  बॉर्बी डॉल, जीवित जोकर ( फिल्म)

अमेरिका ( मनोवैज्ञानिक)

अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार÷,”किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण करके उनके जैसा व्यवहार अपने स्वभाव में लाने की प्रक्रिया को इन्होंने सामाजिक अधिगम बोला है सीखने को सशक्त माध्यम है।”

🌸 मॉडलिंग ÷ दूसरे के व्यवहार को निरीक्षण द्वारा सीखना मॉडलिंग कहलाता है 

सीखने में जो निरीक्षण के महत्व को स्वीकार करते हुए बंडूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत प्रतिपादित किया।

 🟢अल्बर्ट बंडूरा÷  हम पर्यावरण में उपलब्ध किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे समझे अनुक्रिया नहीं करते हैं हम हमारे चारों और विद्वान पर्यावरणीय तत्व सूझ और पूर्व अनुभूति के आधार पर चयन करते हैं और यह कार्य हम हमारे चारों ओर रहने वाले व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण कर उसका अनुकरण करते हैं इस प्रकार हम पर प्रक्षेपण द्वारा अधिगम की प्रक्रिया पूरी करते हैं

🟢 बंडूरा के अनुसार मानव व्यवहार/ क्रिया तीन चीजों पर निर्भर करता है।

(1) बाहय वातावरण

(2) संज्ञानात्मक या आंतरिक क्रियाएं

(3) व्यवहार

सामाजिक अधिगम सिद्धांत को व्यवहारवाद और संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत के बीच की योजक कड़ी कहा जाता है क्योंकि यह सिद्धांत ध्यान, स्मृति और प्रेरणा तीनों को समायोजित करता है

🌸 बाहय वातावरण में उपस्थित उद्दीपक (अन्य व्यक्ति के व्यवहार) और इसके साथ व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार के मध्य आंतरिक संज्ञानात्मक चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

              🟢बंडूरा का प्रयोग

 बंडूरा ने एक व्यस्क आदमी द्वारा कुछ बच्चों के सामने एक 3 से 4 फीट की लंबी गुड़िया जिसको उन्होंने (बॉब गुड़िया) का नाम दिया उसको उछलते हुए, मारते हुए, एवं उसके प्रति अक्रामकता को दिखाते हुए चले गए और बाद में बच्चे और गुड़िया को अकेला छोड़ दिया गया उसके बाद बच्चे ने भी उस बेबी डॉल के साथ उसी प्रकार का आक्रामकता वाला व्यवहार किया।

 🟢दूसरा प्रयोग टीवी में अकर्मक मूवी को दिखाकर

👉🏻प्रथम मूवी सामाजिक मूल्य आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ सामाजिक व्यवहार दर्शाता है

👉🏻 दूसरे मूवी प्रेम पर आधारित थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ में स्नेह से रहता है।

👉🏻तीसरी मूवी हिंसात्मक दृश्य युक्त थी जिसे देखकर बालक अन्य के साथ आक्रमक व्यवहार दिखाया।

  🟢मॉडल में तीन कारक महत्वपूर्ण है।

(1) मॉडल की विशेषता

(2) प्रेक्षक की विशेषता

(3) व्यवहार का पुरस्कार परिणाम

Notes by shikha tripathi

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💫 *सामाजिक अधिगम सिद्धांत* 💫

सामाजिक अधिगम का सिद्धांत अल्बर्ट बंडूरा के द्वारा प्रतिपादित किया गया था। अल्बर्ट बंडूरा अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे।

अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण करके उनके जैसा व्यवहार अपने स्वभाव में लाने की प्रक्रिया को इन्होंने सामाजिक अधिगम बोला है सीखने का सशक्त माध्यम है।

*मॉडलिंग*  ➡️

दूसरे के व्यवहार को निरीक्षण द्वारा सीखना मॉडलिंग कहलाता है।

सीखने में जो निरीक्षण के महत्व को स्वीकार करते हुए बंडूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत प्रतिपादित किया।

*अल्बर्ट बंडूरा* ➡️

हम पर्यावरण में उपलब्ध किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे समझे अनुक्रिया नहीं करते हैं। हम हमारे चारों ओर विद्यमान पर्यावरण के तत्व , सूझ और पूर्व अनुभूति के आधार पर चयन करते हैं और यह कार्य हम चारों ओर रहने वाले व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण कर उसका अनुकरण करते हैं इस प्रकार हम प्रक्षेपण द्वारा अधिगम की प्रक्रिया पूरी करते हैं।

*बंडूरा के अनुसार*,  मानव व्यवहार/ क्रिया तीन चीजों पर निर्भर करती है …….

1. बाह्य वातावरण( external environment)

2.  संज्ञानात्मक या आंतरिक क्रियाएं(cognitive or internal activities)

 3. व्यवहार( behaviour)

 यह तीनों एक दूसरे पर निर्भर करते हैं बाह्य वातावरण में उपस्थित उद्दीपक (अन्य व्यक्ति का व्यवहार)  और व्यक्ति के वास्तविक  व्यवहार के मध्य आंतरिक संज्ञानात्मक चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

सामाजिक अधिगम सिद्धांत को व्यवहारवाद और संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत के बीच की योजक कड़ी कहा जाता है क्योंकि यह सिद्धांत ध्यान (attention), स्मृति (memory) और प्रेरणा ( motivation) तीनों को समायोजित करता है।

*बंडूरा का प्रयोग*  ➡️

इन्होंने एक बालक पर बेबीडॉल प्रयोग किया बंडूरा ने एक बालक को तीन तरह की मूवी दिखाई।

💫प्रथम मूवी, सामाजिक मूल्य आधारित थी जिसे देखकर बालक बेबी डॉल के साथ सामाजिक व्यवहार दर्शाता है।

💫दूसरी मूवी प्रेम पर आधारित थी जिसे देखकर बालक ने बेबीडॉल के साथ में प्रेम/ स्नेह वाला व्यवहार दर्शाया।

💫तीसरी मूवी  हिंसात्मक दृश्य युक्त थी जिसे देखकर बालक बेबीडॉल के साथ आक्रामक व्यवहार दिखाया।

*निष्कर्ष*  ➡️

इस प्रयोग के आधार पर बंडूरा ने यह निष्कर्ष निकाला कि छोटे बच्चों को यह नहीं पता होता है कि उनको क्या सीखना चाहिए और क्या नहीं । इसलिए बच्चों के सामने हमेशा आदर्श व्यवहार के प्रतिमान ( ideal model) को प्रस्तुत करना चाहिए। 

*मॉडल के तीन कारक*

 1. मॉडल की विशेषता

 2. प्रेक्षक की विशेषता 

 3.  व्यवहार का पुरस्कार परिणाम

Notes by Shreya Rai✍🏻👏

*सामाजिक अधिगम सिद्धांत* ➡️

▪️सामाजिक अधिगम का सिद्धांत अल्बर्ट बंडूरा के द्वारा प्रतिपादित किया गया था। 

अल्बर्ट बंडूरा अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे।

अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण करके उनके जैसा व्यवहार अपने व्यवहार में लाने की प्रक्रिया को इन्होंने *सामाजिक अधिगम* बताया  है । सीखने का सशक्त माध्यम है।

*मॉडलिंग*  ➡️

दूसरे के व्यवहार को निरीक्षण द्वारा सीखना मॉडलिंग कहलाता है।

सीखने में जो निरीक्षण के महत्व को स्वीकार करते हुए बंडूरा ने सामाजिक अधिगम सिद्धांत प्रतिपादित किया।

*अल्बर्ट बंडूरा सामाजिक अधिगम सिद्धान्त* ➡️

हम पर्यावरण में उपलब्ध किसी *उद्दीपन* के प्रति बिना सोचे समझे अनुक्रिया नहीं करते हैं। हम हमारे चारों ओर विद्यमान पर्यावरण के तत्व , सूझ और पूर्व अनुभूति के आधार पर चयन करते हैं और यह कार्य हम चारों ओर रहने वाले व्यक्तियों के व्यवहार का निरीक्षण कर उनका अनुकरण करते है। इस प्रकार हम प्रेक्षण द्वारा अधिगम की प्रक्रिया पूरी करते है।

*अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार मानव/क्रिया तीन चीजों पर निर्भर करता है*➡️

1.बाह्य वातावरण ।(EXTERNAL ENVIRONMENT)

2. संज्ञानात्मक वातावरण या आंतरिक क्रियाएं।(COGNITIVE OR INTERNAL ACTIVITIES)

3.व्यवहार।(BEHAVIOR)

*उपरोक्त तीनों एक – दूसरे से जुड़े हुए है।*

बाह्य वातावरण में उपस्थित *उद्दीपक (अन्य  व्यक्ति का व्यवहार)* और व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार के मध्य आन्तरिक *संज्ञानात्मक चरो* की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

*बंडूरा का प्रयोग*

*पहला प्रयोग* ⬇️

बंडूराने एक बॉब नाम की गुड़िया ली जिसकी लंबाई 3 से 4 फ़ुट थी। 

उस गुड़िया को उछाला व  उसके आक्रामक व्यवहार और मारपीट की यह सब क्रिया बच्चे देख रहे थे।

बंदुरा के बाहर जाने के बाद बच्चो ने वो ही व्यवहार किया उस गुड़िया के साथ जो बंडूरा ने किया था गुडिया के साथ  जैसे उछालना मारपीट व आक्रामक व्यवहार आदि।

*दूसरा प्रयोग*⬇️ 

 कुछ बच्चों को 3 ग्रुप में बांटा गया व उनको टीवी पर के फिल्मो के कुछ दृश्य  दिखाए गए।

▪️पहले ग्रुप वाले बच्चों को फ़िल्म के दृश्य दिखाए गए जिसमे आक्रामक ,मारपीट व अभद्रतापूर्ण भाषा का प्रयोग दिखाया गया । इन बच्चों ने इस फ़िल्म से अपने व्यवहार में यही सब सीख लिया।

▪️दूसरे ग्रुप वाले बच्चों को फिल्मो के कुछ दृश्य दिखाए गए जिसमे चारित्रिक गुणों ,संस्कारो व सम्मान से परिपूर्ण वाले दृश्य दिखाये गए। ऐसे दृश्यों से बच्चो ने सीखा व अपने व्यवहार में शामिल किया।

▪️तीसरे ग्रुप के बच्चों को साधारण दृश्य वाली फिल्म दिखाई गई तो बच्चों ने साधारण व्यवहार अपने व्यवहार में शामिल किया।

*मॉडल के तीन कारक महत्वपूर्ण है*

1 मॉडल की विशेषता ।

2 प्रेक्षक की विशेषता।

3 व्यवहार का पुरस्कार परिणाम।

✒️✒️ आनंद चौधरी📋📋

15/04/2021

By admin

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