🌟 *भाषा और विचार ( Languagae and Thought )* 🌟

💫 *भाषा(Languagae):–* भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है। मनुष्य पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है, क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है, जिससे लोग समझ सके।

🌟 *भाषा को प्रभावित करने वाले कारक:-* भाषा को प्रभावित करने वाले निम्नलिखित कारक है–

💫 *१. पारिवारिक परिस्थितियां:–* बालक जिस परिवार में जन्म लेता है, उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है।

✨ बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है, उसी का नाम “मां की भाषा या मातृभाषा” है।

✨ और माता जो अपने बालक से जो बातचीत करती है, उससे “ Baby Talk” कहते हैं।

💫 *२. पड़ोस:-* चार से पांच साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है, सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है और बालक पड़ोस का अनुकरण करने लगता है।
इसी के संबंध में हरलॉक ने एक कथन दिया है–

🌟 *हरलॉक के अनुसार:-* “विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है, तुतलाना, हकलाना इत्यादि बच्चे पड़ोस से सीखते हैं।”

💫 *३. खेल और खेल के साथी:-* बच्चों का समय खेल में भी बीतता है , तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल या खेल के साथी होंगे ,बालक भाषा भी उसी प्रकार से सीखेंगे।

💫 *४.भाषा की संख्या:-* कई भाषा का प्रयोग करना ठीक है, लेकिन बच्चे के समुचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए।

💫 *५. विद्यालय और शिक्षक:-* शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं, जिससे बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है ।

🌟 *भाषा विकास का सिद्धांत:-* भाषा विकास के सिद्धांत में कुल तीन सिद्धांत आते हैं–

✨ *१. पावलव का सिद्धांत*
✨ *२. स्किनर का सिद्धांत*
✨ *३. बंडूरा का सिद्धांत*

💫 *१. पावलव का सिद्धांत:-* “बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखते हैं ,इसे भाषा अनुबंध का सिद्धांत भी कहते हैं।”

💫 *२. स्किनर का सिद्धांत:* “बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखते हैं।”

💫 *३. बंडूरा का सिद्धांत:-*“ बालक अनुकरण से सीखते हैं।”

💫 *४. चोमस्की का सिद्धांत:-* “बालक जिस भाषा को सुनता है, अपने आप सीख जाता है ।”

✨ भाषा ग्रहण करने की प्रवृति जन्मजात होती है । इससे भाषा का अर्जन तंत्र ( LAD) भी कहते है।
👉🏻 LAD = Language Acqisition Device

✨ व्याकरण भी अपने आप सीख जाते हैं , इसे हम “Generative Grammar Theory’s” भी कहते हैं।

🌟 *बालक की आयु और उनके शब्द भंडार* 🌟

✨ *0 से 8 माह – 0 शब्द*
✨ *9 से 12 माह – 3-4 शब्द*
✨ *18 माह – 10-12 शब्द*
✨ *2 वर्ष तक – 272 शब्द*
✨ *2,1/2 वर्ष तक – 450 शब्द*
✨ *3 वर्ष तक – 1000 शब्द*
✨ *3,1/2 वर्ष तक – 1250 शब्द*
✨ *4 वर्ष तक –1600 शब्द*
✨ *5 वर्ष तक – 2100 शब्द*
✨ *11 वर्ष तक – 50,000 शब्द*
✨ *14 वर्ष तक – 80,000 शब्द*
✨ *16 वर्ष से आगे तक – 1लाख से अधिक शब्द*

✍🏻✍🏻✍🏻 *Notes By – Pooja* ✍🏻✍🏻✍🏻

⛳भाषा और विचार⛳
( language and thought)
भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है।
👉🏻मनुष्य,पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सके।
★ भाषा को प्रभावित करने वाले कारक—
१. पारिवारिक परिस्थिति—
👉🏻 बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस पर,उस परिवार का विशेष प्रभाव पड़ता है।
👉🏻 बालक अपने माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम मां की भाषा या मातृभाषा कहलाता है।
👉🏻मां अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे baby talk कहते हैं.
२. पड़ोस—
👉🏻 चार-पांच साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है तथा सामाजिक अनुक्रिंया तीव्र कर देता है।
👉🏻 बालक पड़ोस का अनुसरण करने लगता है।
★ हरलॉक के अनुसार—” भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुतलाना,हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से ही सीखता है।”
३. खेल और खेल के साथी—
👉🏻 बच्चों का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार, बच्चे के खेल या खेल के साथी होंगे वह भाषा उसी प्रकार से सीखेंगा।
४. भाषा की संख्या—
👉🏻 कई भाषाओं का प्रयोग एक साथ कराना ठीक नहीं है, बच्चे के समुचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए।
५. विद्यालय और शिक्षक—
👉🏻 शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं, बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है।
★ भाषा विकास के सिद्धांत★
भाषा विकास के सिद्धांत निम्नलिखित है—
१. पावलव का सिद्धांत—” बालक,भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है”।
👉🏻 इसे पावलव भाषा अनुबंध का नाम दिया है।
२.स्किनर का सिद्धांत—” बालक, भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है”।
३. बंडूरा का सिद्धांत—” बालक अनुकरण से सीखता है”।
👉🏻 बंडूरा पुनर्बलन को बल नहीं देता है।
★चॉमत्स्की—” बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है”.
👉🏻 भाषा ग्रहण करने की शक्ति जन्मजात होती है इसे भाषा अर्जन तंत्रण (LAD) कहा जाता है।
LAD— language acquisition divide
👉🏻 बच्चा व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है ( Generative grammar theory)
★बच्चे की आयु के अनुसार शब्द भंडार—
0-8 माह तक— 0 शब्द
9-12 माह तक— 3 से 4 शब्द
18 माह — 10-12 शब्द
2 वर्ष तक — 272 शब्द
2+1/2 वर्ष तक— 450 शब्द
3 वर्ष तक — 1000 शब्द
3+1/2 वर्ष तक — 1250 शब्द
4 वर्ष तक — 1600 शब्द
5 वर्ष तक — 2100 शब्द
11 वर्ष तक — 50,000 शब्द
14 वर्ष तक — 80,000 शब्द
16 वर्ष के आगे — 1 लाख से अधिक शब्द
🌸🌸व्यक्तित्व🌸🌸
( Personality)
👉🏻 व्यक्तित्व किसी भी व्यक्ति के प्रभाव या आकर्षण को दिखाता है।
👉🏻 व्यक्तित्व अनेक प्रकार के गुण व अवगुण को समाहित किया रहता है व्यक्तित्व का वर्गीकरण किसी एक वस्तु ,अनुशासन, तथ्य इत्यादि के आधार पर नहीं किया जा सकता।
★ व्यक्तित्व का वर्गीकरण— 👉🏻व्यक्तित्व का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया जा सकता है—
१. सामाजिक अंतः क्रिया के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण—
🔸युंग या जुंग(yung/jung) — युंग ने व्यक्तित्व को तीन भागों में विभाजित किया है—
१. अंतर्मुखी व्यक्तित्व— अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग मनन, चिंतन, आत्म केंद्रित, आत्मचिंतन, संवेदनशील, मितभाषी, कर्तव्यनिष्ठ,संकोची, होते हैं तथा सामाजिक व्यवहार में अच्छा प्रदर्शन नहीं करते है।
२. बहिर्मुखी व्यक्तित्व— बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले लोग समाज केंद्रित,व्यवहारिक, साहसिक, चिंता मुक्त, आशावादी, सामाजिक कार्य में रुचि लेने वाले, लोकप्रिय तथा कुशल वक्ता होते हैं।
३.उभयमुखी व्यक्तित्व— जिसमें अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनों लक्षण लगभग समान रूप से विद्यमान रहते हैं उन्हें उधर मुख्य व्यक्तित्व कहते हैं।
🔸 फ्रॉयड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत— फ्रायड ने व्यक्तित्व को तीन भागों में विभाजित किया है—
१. Id (इदम्) — इदम् को अचेतन मन से जुड़ा है।
यह अचेतन मन मूल प्रवृत्ति, नैतिकता से संबंधित है जिसे शीघ्र तृप्ति चाहिए होती है
२. Ego(अहम्) — यह चेतन मन से जुड़ा होता है।
चेतना, इच्छाशक्ति, बुद्धि यह अहम के अंतर्गत आता है।
इसमें व्यक्ति की दमित इच्छाएं होती है।
३. Super ego (परमअहम्) —इसे आदर्शवादी माना गया है।
🔸 शेल्डन का रचना सिद्धांत—
👉🏻 शेल्डन ने व्यक्तित्व को तीन भागों में विभाजित किया है—
१. गोलाकृति— ऐसे व्यक्तियों की गर्दन गोल,मांस पेशियों से पूर्ण, चर्बी का बढ़ना आदि इसके अंतर्गत होता है।
२. आयताकृति—इसमें हड्डी और मांसपेशी का विकास दिखता है।
३. लंबाकृति— केंद्रीय स्नायु संस्थान के मांस पेशी तंतु विकसित होते हैं।
🔸क्रेश्मर का सिद्धांत—
👉🏻क्रश्मर ने व्यक्तित्व को चार भागों में विभाजित किया है—
१.लम्बकाय ( एस्थेनिक) — ऐसे व्यक्तित्व वाला व्यक्ति दुबला, पतला और लंबा होता है।
२. खिलाड़ी (एथलेटिक) — ऐसे लोगों का शरीर अच्छा, फुर्तीला,और खिलाड़ी होते हैं।
३.नाटा (पिकनिक) — ऐसे व्यक्ति मोटे और नाटे होते हैं।
४. मिश्रित— इसमें उपरोक्त तीनों प्रकार के व्यक्ति आते हैं.
🔸आर. बी. कैटल का सिद्धांत—
👉🏻 आर.बी.कैटल का सिद्धांत, प्रतिकारक प्रणाली सिद्धांत (repulsion system theory) के नाम से जाना जाता है.
👉🏻व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में जो कार्य करता है उसका प्रतिफल ही व्यक्तित्व है।
👉🏻चरित्र की सुंदरता, कल्पनाशीलता, उत्सुकता, भावनात्मक एकता, सामाजिकता, अभिप्रेरक उत्सुकता) इन सभी कारकों से दर्शायी जाती है.
🔸ऑल्पोर्ट का सिद्धांत—
👉🏻ऑल्पोर्ट के सिद्धांत को शीलगुण सिद्धांत/ विशेषक सिद्धांत ( Trait theory) के नाम से भी जाना जाता है.
👉🏻 व्यवहार,विचार,भावना को शीलगुण कहते हैं ।
यह लंबी अवधि में भी बहुत समय तक अपरिवर्तित रहती है।
यह अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग होती है।
🔸मुर्रे का सिद्धांत—
👉🏻 व्यक्तित्व कार्यात्मक व शक्तियों की निरंतरता है जो संगठित प्रक्रिया के रूप में जन्म से मृत्यु तक बहिर्मुखी होकर प्रकट होती है।
Notes by Shivee Kumari😊
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

🗣️ भाषा एवं चिंतन 🗣️

*भाषा*
भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है। मनुष्य पशु से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझते हैं।

⭐ *भाषा को प्रभावित करने वाले कारक:-*

✍️ पारिवारिक परिस्थिति
बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है। बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम मां की भाषा या ‘ *मातृभाषा* ‘ कहते हैं और माता अपनी बालक से जो बातचीत करती है उसे *बेबी टॉक* (Baby Tolk) कहते हैं।

✍️ *पड़ोस*
4 से 5 साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है। इस अवस्था में बालक सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है और पड़ोस का अनुसरण करने लगता है।

हरलॉक के अनुसार, “भाषा के विकास में अनुसरण का विशेष प्रभाव पड़ता है। तुतलाना, हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से ही सीखता है।”

✍️ *खेल और खेल के साथी*

बच्चों का समय खेल में भी बितता है तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल या खेल के साथ ही होंगे भाषा उसी प्रकार के सीखेंगे।

उदाहरणार्थ बालक अपने दोस्तों के साथ जैसा खेल (जैसे कबड्डी, गुल्ली-डंडा, कंचा या पिट्ठो) खेलता है तो उसकी भाषा भी वैसे ही होगी जैसे कि बाकी साथी बोलते हैं।

✍️ *भाषा की संख्या*

बच्चे के भाषा के विकास में भाषा की संख्या भी प्रभावित करती है। अतः कई भाषा का प्रयोग करना ठीक नहीं है बच्चे की समुचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

उदाहरणार्थ यदि बच्चा घर में मैथिली बोलता हूं विद्यालय में अंग्रेजी और पास पड़ोस में बंगाली भाषा बोली जाती हो तो बच्चे का भाषा विकास संपूर्ण रूप से नहीं हो पाएगा ऐसी परिस्थिति में बच्चा अपनी बातों को सही तरीके से नहीं कह पाएगा।

✍️ *विद्यालय और शिक्षक*

शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं इसलिए बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है।

*भाषा विकास के सिद्धांत*

🐕 पावलाव के अनुसार, “बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है इसको भाषा अनुबंध कहा गया।”

🕊️ स्किनर के अनुसार, “बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है।”

⭐बण्डुरा के अनुसार, “बालक अनुकरण से सीखता है।” इन्होंने पुनर्बलन को महत्व नहीं दिया।

⭐चॉम्स्की के अनुसार, ” बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है।” भाषा ग्रहण की प्रवृत्ति जन्मजात होती है, जिसे *भाषा अर्जन यंत्र* (Language Acquisition Device) कहते हैं।

*बालक की आयु* *शब्द भण्डार*
0 से 8 माह तक – 0 शब्द
09 से 12 माह तक – 3 से 4 शब्द
18 माह – 10 से 12 शब्द
2 वर्ष तक – 272 शब्द
2½ वर्ष तक – 450 शब्द
3 वर्ष तक – 1000 शब्द
3½ वर्ष तक – 1250 शब्द
4 वर्ष तक – 1600 शब्द
5 वर्ष तक – 2100 शब्द
11 वर्ष तक – 50000 शब्द
14 वर्ष तक – 80000 शब्द
16 वर्ष तक – 1 लाख से अधिक

⭐⭐⭐
_____________________________

👔 *व्यक्तित्व* (Personality)👔

व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के प्रभाव या आकर्षण को दिखाता है। व्यक्तित्व अनेक गुण, अवगुण को समाहित किया रहता है। व्यक्तित्व का वर्गीकरण किसी एक गुण, वस्तु, अनुशासन, तथ्य आदि के आधार पर नहीं किया जा सकता है।

⭐व्यक्तित्व का वर्गीकरण:-

👨‍👩‍👦‍👦 सामाजिक अंतः क्रिया के आधार पर वर्गीकरण :-

जुंग (Jung) या युंग (Yung) ने सामाजिक अंतः क्रिया के आधार पर व्यक्तित्व को 3 वर्गों में विभाजित किया। जो निम्नलिखित हैं-

1️⃣ *अंतर्मुखी व्यक्तित्व*

मनन, चिंतन, आत्मचिंतन, आत्मकेंद्रित, संवेदनशील, मितभाषी, कर्तव्यनिष्ठ, संकोची होते हैं तथा इनका सामाजिक व्यवहार में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

2️⃣ *बहिर्मुखी व्यक्तित्व*

समाज केंद्रित व्यवहारिक साहसिक चिंता मुक्त आशावादी, सामाजिक कार्य में रुचि लेने वाले, लोकप्रिय तथा कुशल वक्ता होते हैं।

3️⃣ *उभय मुखी व्यक्तित्व*

इस व्यक्तित्व के लोगों में अंतर्मुखी एवं बहिर्मुखी दोनों व्यक्तित्व के लक्षण सामान्य रूप से विद्यमान रहते हैं।

⭐फ्रॉयड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत

1️⃣इदम्(Id) – इसका संबंध अचेतन से है। इसमें व्यक्ति की मूल प्रवृत्ति नैसर्गिक इच्छाएं तथा शीघ्र तृप्ति के लिए होती है ।

2️⃣अहम् (Ego) – इसका संबंध चेतना से है। इसमें व्यक्ति चेतना, इच्छाशक्ति, बुद्धि, तथा तर्क शक्ति का प्रयोग करता है।

3️⃣ परम अहम् (Super Ego)
इसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व आदर्शवादी होता है।

⭐शेल्डन का रचना सिद्धांत

1️⃣ गोलाकृति – इसमें व्यक्ति गर्दन गोलाकार, शरीर मांसपेशियों से पूर्ण तथा पेट की चर्बी का बढ़ने लगता है।

2️⃣ आयताकृति – हड्डी और मांसपेशी का विकास

3️⃣ लंबाकृति – केंद्रीय स्नायु मंडल के मांसपेशी तंतु विकसित होते हैं।

⭐R.B. कैटल का प्रतिकारक प्रणाली सिध्दांत
(RB Cattle’s Repulsive System Theory)

व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में जो कार्य करता है उसी का प्रतिरूप ही व्यक्तित्व है। व्यक्ति के चरित्र की सुंदरता भावनात्मक एकता, सामाजिकता, कल्पनाशीलता, अभिप्रेरक, उत्सुकता इन सभी कारकों से दर्शाई जाती है।

⭐आलपोर्ट का शीलगुण या विशेषक सिद्धांत

व्यवहार, विचार, भावना को ‘शीलगुण(Trait)’ कहते हैं। यह लंबी अवधि में भी बहुत सीमा तक अपरिवर्तित रहती है। यह अलग अलग व्यक्ति में अलग-अलग होती है।

⭐मूर्रे का सिद्धांत

व्यक्तित्व कार्यात्मक एवं शक्तियों की निरंतरता है जो संगठित प्रक्रिया के रूप में जन्म से मृत्यु तक बहिर्मुखी होकर प्रकट होते हैं।

⭐क्रेश्मर का सिद्धांत

क्रेशमर ने व्यक्तित्व को चार भागों में वर्गीकृत किया है-

1️⃣ लंबकाय – दुबला, पतला, लंबा
2️⃣ खिलाड़ी एथलेटिक – शरीर अच्छा, फुर्तीला, खिलाड़ी
3️⃣ नाटा(पिकनिक) – मोटा और नाटा
4️⃣ मिश्रित – सभी प्रकार के व्यक्तित्व

⭐⭐⭐

——Awadhesh Kumar——

🔥भाषा और विचार🔥

भाषा हमारे भाव या विचारो को व्यक्त करने का एक माध्यम है

मनुष्य पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा है जिसे लोग समझ सके ।

🌸भाषा को प्रभावित करने वाले कारक ➖
1️⃣पारिवारिक स्तिथि ➖बालक जिस परिवार में जन्म लेता है । उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है

🔥बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सिखाया है ।उसी का नाम मातृभाषा है ।

🔥माता अपने बालक से को बात चीत करती है उसे बेबी talk कहते है।

2️⃣ पड़ोस ➖4-5 में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है । सामाजिक अनिक्रिया तीव्र कर देता है। बालक पड़ोस का अनुसरण करने लगता है

🔥 हरलॉक के अनुसार ➖भाषा के विकाश में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है । तुतलाना,हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से सीखता है।

3️⃣ खेल और खेल के साथी ➖बच्चो का समय खेल में भी बीतता है। जिस प्रकार के बच्चे के खेल या खेल के साथी होगे भाषा उसी प्रकार की सीखेगे ।

4️⃣ भाषा की संख्या ➖कई भाषा का प्रयोग एक साथ करना ठीक नहीं है ।
5️⃣ विद्यालय और शिक्षक ➖ शिक्षक बालक के लिए आदर्श होता है बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है

🔥भाषा का सिद्धांत ➖
🎯 पावलव➖बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच सम्बन्ध स्थापित करके सीखता है।
🎯 स्किनर ➖बालक भाषा अनुकरण के माध्यम से सीखता है
🎯 बंडुरा ➖ बालक अनुकरण से सीखता है पुनरबलन को बल नहीं देता
🎯चोमास्की ➖ बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है
🔥भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात होती है
🔥भाषा अर्जन तंत्र है
🔥बच्चा व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है ।

🍁बालक की आयु और शब्द भंडार ➖
0-8 माह में 0 शब्द

9-12 माह में 3-4शब्द
18 माह तक 10-12 शब्द
2वर्ष तक 272 शब्द
2 1/2वर्ष तक। 450 शब्द
3 वर्ष 1000 शब्द
3 1/2 वर्ष। 1250 शब्द
4 वर्ष 1600 शब्द
5 वर्ष तक 2100 शब्द
11 वर्ष तक 50000शब्द
14वर्ष तक 80000 शब्द
16 वर्ष से आगे। 100000शब्द

📒Notes by
📝 Arti savita

🔆 भाषा और विचार ( Language & Thought )

⭕ भाषा (Language) ➖

भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है भाषा के माध्यम से हम अपने विचारों को अपने हाव-भाव के द्वारा प्रकट करते हैं |

🍀 मनुष्य पशु से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसको लोग समझ सकते हैं |

🍀 यदि हमारे विचार सकारात्मक या नकारात्मक होंगे तो वैसे ही हमारी भाषा भी होगी |

🍀 भाषा और विचार परस्पर एक दूसरे को प्रभावित करते हैं जिनको व्यक्ति स्वयं कंट्रोल कर सकता है |

🎯 भाषा को प्रभावित करने वाले कारक ➖

⭕ पारिवारिक परिस्थिति ➖

बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है |
बालक अपनी मां की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम ” माता की भाषा या मातृभाषा” है |
माता अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे ” बेबी टॉक (Baby talk)” कहते हैं |

⭕ पड़ोस ➖

4 – 5 साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है बालक पड़ोस का अनुसरण करने लगता है |

🍀 हरलॉक के अनुसार ➖

” भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुतलाना ,हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से ही सीखता है ” |

⭕ खेल और खेल के साथी ➖

बच्चों का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार की बच्चे की खेल या खेल की साथियों के भाषा होगी बच्चे उसी प्रकार की भाषा सीखेंगे |

⭕ भाषा की संख्या ➖

कई भाषा का प्रयोग करना ठीक नहीं है बच्चे का समुचित विकास तभी संभव है जब मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित किया जाए |

⭕ विद्यालय और शिक्षक ➖

शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का बहुत प्रभाव पड़ता है यदि शिक्षक भाषा में निपुण है तो बच्चे भी निपुण होंगे |

🎯 भाषा विकास के सिद्धांत ➖

🍀 पावलव का सिद्धांत ➖

बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है इसको भाषा अनुबंध का सिद्धांत भी कहते हैं |

🍀 स्किनर का सिद्धांत ➖

बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है |

🍀 बंडूरा का सिद्धांत ➖

बालक अनुकरण से सीखता है |

🍀 चोमस्की का सिद्धांत➖

बालक जिस भाषा को सुनता है वह अपने आप सीख जाता है | भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात होती है इसे LAD ( Language Acquisition Device) या “भाषा अर्जन तंत्र” कहते हैं |
व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है इसको ” Generative Grammar Theory” कहते हैं |

🎯 बालक की आयु के अनुसार शब्द भंडार ➖

1) 0 – 8 माह ➖0

2) 9 – 12 माह ➖3 – 4 शब्द

3) 18 माह तक ➖ 10 – 12 शब्द

4) 2 वर्ष तक ➖ 272 शब्द

5) ढाई वर्ष तक ➖450 शब्द

6) 3 वर्ष तक ➖1000 शब्द

7) 3× 1/2वर्ष तक 1250 शब्द |

8) 4 वर्ष तक ➖1600 शब्द

9) 11 वर्ष तक ➖50 ,000

10) 14 वर्ष तक ➖ 80,000 शब्द

16 से आगे ➖एक लाख से अधिक शब्द |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

, 🍀🌻🌼🌺🌸🍀🌻🌼🌺🌸🍀🌻🌼🤔🌸🌻

🌼🌼🌼भाषा और विचार🌼🌼🌼
🌼 भाषा हमारे भाव, विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है मनुष्य पशुओं मनुष्य पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सके ।।

🌼भाषा को प्रभावित करने वाले कारक🌼
🌼1. पारिवारिक परिस्थितियां — बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम ” मां की भाषा या मातृभाषा “है
🌼माता अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे” baby talking”कहते हैं

🌼2. पड़ोस — चार-पांच साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है
🌼बालक पड़ोस के का अनुकरण करने लगता है

🌼🌼हरलॉक के अनुसार — भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुत्लाना ,हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोसी से सीखता है

🌼3. खेल और खेल के साथी — बच्चों का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल और साथ खेल के साथी होंगे भाषा उसी प्रकार की सीखेंगे.।।

🌼4.भाषा की संख्या –कई भाषा का प्रयोग करना ठीक नहीं है बच्चे के समूचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए

🌼5. विद्यालय और शिक्षक — शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है

🌼🌼भाषा विकास का सिद्धांत🌼🌼

🌼 पावलव के अनुसार – बालक,भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित कर के सीखता है ( भाषा अनुबंधन)

🌼स्किनर के अनुसार – बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है

🌼 बंडूरा के अनुसार –बालक अनुकरण से सीखता है

🌼चोम्स्की के अनुसार- बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है, भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात है,
🌼भाषा अर्जन तंत्र( LAD – language acquisition device)
🌼व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है

बालक की आयु ——–शब्द भंडार
🌼0-15 माह तक— 0 शब्द
🌼9-12 माह तक– 3-4 शब्द
🌼18 माह तक– 10-12 शब्द
🌼2 वर्ष तक— 272 शब्द
🌼 ढाई वर्ष तक – 450 शब्द
🌼 3 वर्ष तक– 1100 शब्द
🌼 साढ़े 3 वर्ष तक– 1250 शब्द
🌼 4 वर्ष तक– 1600 शब्द
🌼 5 वर्ष तक– 2100 शब्द
🌼 11 वर्ष तक– 50000 शब्द
🌼 14 वर्ष तक — 80000 शब्द
🌼 16 वर्ष तक – 1 लाख से अधिक

🌼🌼 व्यक्तित्व( personality) 🌼🌼

🌼व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के प्रभाव या आकर्षण को दिखाता है व्यक्तित्व अनेक गुण, अवगुण को समाहित किया रहता है व्यक्तित्व का वर्गीकरण किसी एक गुण ,वस्तु ,अनुशासन, तत्व इत्यादि के आधार पर नहीं किया जा सकता हैं ।।

🌼🌼सामाजिक अंत:क्रिया के आधार पर वर्गीकरण 🌼🌼
🌼प्रवर्तक – कर्ल जुंग ( युंग)

🌼🌼🌼अंतर्मुखी व्यक्तित्व 🌼🌼🌼
🌼मनन, चिंतन, आत्मचिंतन ,आत्म केंद्रित ,संवेदना शील , मितभाषी , कर्तव्यनिष्ठ सामाजिक व्यवहार मे अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं

🌼🌼🌼बहिर्मुखी व्यक्तित्व🌼🌼🌼
🌼 बहुमुखी व्यक्तित्व के लोग समाज केंद्रित, व्यवहारिक, साहसिक, चिंता मुक्त ,आशावादी होते है
🌼 सामाजिक कार्य में रुचि लेते हैं
🌼 लोकप्रिय होते हैं
🌼 कुशल वक्ता होते हैं

🌼🌼 उभय मुखी 🌼🌼🌼
🌼अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनो लक्षण, लगभग समान रूप से विद्यमान होते हैं

🌼फ्रायड का विश्लेषणात्मक सिद्धांत🌼🌼
🌼 इदम् (I’d) – अचेतन, मूल प्रव्रति, शीघ्र तृप्ति
🌼 अहम (ego) – चेतना, इच्छाशक्ति और बुद्धि ,तर्क
🌼 परम् अहम् ( super ego) – आशावादी होते हैं

🌼🌼 शैलडान का रचना सिद्धांत🌼🌼
🌼 गोलाकृति – गोल गर्दन ,मांसपेशियां से पूर्ण , चर्बी का बढ़ना
🌼आयताकृति -हड्डी और मांस पेशी का विकास
🌼लंबा कृति — केंद्रीय स्नायु संस्थान के मांसपेशी ,तंतु विपरीत होते हैं

🌼🌼आर.बी कैटल का प्रतिपादक प्रणाली सिद्धांत 🌼🌼🌼
🌼व्यक्ति किसी परिस्थिति में जो कार्य करता है उसी का प्रतिरूप ही व्यक्तित्व है
🌼 चरित्र की सुंदरता -भावनात्मक एकता, सामाजिकता ,क्षमता ,कल्पनाशीलता, अभिप्रेरक, उत्सुकता इन सभी कार्यों से दर्शाई जाती है

🌼🌼ऑलपोर्ट का सिद्धांत -( शील गुण सिद्धांत )(विशेषक सिद्धांत )

🌼व्यवहार ,विचार ,भावना को शील गुण कहते हैं यह लंबी अवधि में बहुत सीमा तक अपरिवर्तित रहती है यह अलग अलग व्यक्ति मे अलग अलग होती है

🌼🌼 मुर्रे का सिद्धांत ( H. A. Murray)
🌼 व्यक्तित्व कार्यात्मक एवं शक्तिओ की निरंतरता है जो संगठित प्रक्रिया के रूप में जन्म से मृत्यु तक बहिर्मुखी होकर प्रकट होती है

🌼🌼 क्रेशमर का सिद्धांत 🌼🌼
🌼🌼4 प्रकार🌼🌼
🌼1. लंबकायॅ – दुबला, पतला लंबा ,
🌼2. खिलाड़ी स्थेलिटिक – शरीर अच्छा, फुर्तीला ,खिलाड़ी जैसा
🌼3. नाटा ( पिकनिक) – मोटा और नाटा
🌼4. मिश्रित – सभी प्रकार के व्यक्तित्व आते है

🌼🌼🌼notes by manjari soni 🌼

☄️ 💞🎤 भाषा और चिंतन 🎤💞☄️

🎻भाषा और विचार
🎻भाषा विकास
🎻 भाषा-विकास

☄️भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है;
☄️ मनुष्य पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सकते हैं;

📯📯भाषा और विचार📯📯

☄️यदि भाषा हमारी सकारात्मक विचार भी सकारात्मक होगा;

☄️हमारा विचार सकारात्मक है तो भाषा भी सकारात्मक होगी;

🎶 🎶भाषा को प्रभावित करने वाले कारक🎶🎶

👨‍👩‍👧‍👧🎶1. पारिवारिक परिस्थितियां — बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम ” मां की भाषा या मातृभाषा “है

🎶माता अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे” बेबी टाकिंग”कहते हैं ।

🎺उदाहरण÷रोहन और सोहन दो बच्चे हैं; रोहन के परिवार के लोग पढ़े लिखे हैं व सोहन के परिवार के लोग कम पढ़े लिखे हैं रोहन अधिक शुद्ध हिंदी व सार्थक शब्द वाक्यों का प्रयोग करता है; वही सोहन अशुद्ध व निरर्थक वा कम सार्थक शब्दों वाक्यों का प्रयोग कर पाता है।

👥👥2. पड़ोस — चार से पांच साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है ;

🎶बालक पड़ोस का अनुकरण करने लगता है ;

👨🏻‍🏫🎶हरलॉक के अनुसार — भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुत्लाना ,हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोसी से सीखता है ।

🤽🎶3. खेल और खेल के साथी — बच्चों का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल और साथ खेल के साथी होंगे भाषा उसी प्रकार की सीखेंगे.।

🔈🔉🔊 4.भाषा की संख्या –कई भाषा का प्रयोग करना ठीक नहीं है बच्चे के समूचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए

🏘️👨🏻‍🏫5. विद्यालय और शिक्षक — शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है।

🎺उदाहरण÷शिक्षक विद्यालय में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग करता है छात्र भी उसका अनुकरण करके उसी प्रकार की भाषा का प्रयोग करने लगता है इसलिए शिक्षक को हमेशा सार्थक शब्दो , वाक्यों वा मितभाषी होना चाहिए।

🌱🌱भाषा विकास का सिद्धांत🌱🌱

👨🏻‍🏫🎶पावलव के अनुसार – बालक,भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित कर के सीखता है। ( भाषा अनुबंधन का सिद्धांत)

👨🏻‍🏫🎶स्किनर के अनुसार – बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है।

👨🏻‍🏫🎶 बंडूरा के अनुसार –बालक अनुकरण से सीखता है।

👨🏻‍🏫🎶चोम्स्की के अनुसार- बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है,

🎶🎻भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात है, इसी को भाषा अर्जन तंत्र कहते‌ है ( LAD – Language Acquisition Device)

☄️व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है।

🌱🌱बालक की आयु शब्द भंडार🌱🌱

💞0-15 माह तक— 0 शब्द💞

💞9-12 माह तक– 3-4 शब्द💞

💞18 माह तक– 10-12 शब्द💞

💞2 वर्ष तक— 272 शब्द💞

💞ढाई वर्ष तक – 450 शब्द💞

💞3 वर्ष तक– 1100 शब्द💞

💞साढ़े 3 वर्ष तक– 1250 शब्द

💞4 वर्ष तक– 1600 शब्द💞

💞 5 वर्ष तक– 2100 शब्द💞

💞 11 वर्ष तक– 50,000 शब्द

💞 14 वर्ष तक — 80,000 शब्द💞

💞 16 वर्ष तक – 1 लाख से अधिक💞

💞हस्तलिखित-शिखर पाण्डेय 💞

🏵️ भाषा और विचार 🏵️(language and thought)
भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है।
👉 मनुष्य, पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सके।
◾ भाषा को प्रभावित करने वाले कारक:—
1–पारिवारिक परिस्थिति:—
👉 बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है।
👉 बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम मां की भाषा या मातृभाषा है।
👉 माता अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे बेबी टाक कहते हैं।
2-पड़ोस:—
👉4 से 5 साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है बालक पड़ोस का अनुसरण करने लगता है।
⚜️ हरलॉक के अनुसार:—भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुतलाना, हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से ही सीखता है।
3-खेल और खेल के साथी:—
👉 बच्चों का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार के बच्चों के खेल या खेल के साथी होंगे भाषा उसी प्रकार की सीखेंगे।
4-भाषा की संख्या:—
👉 कई भाषा का प्रयोग करना ठीक नहीं है बच्ची के समुचित विकास के लिए मातृभाषा की पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए।
5-विद्यालय और शिक्षक:—
👉 शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है।
◾ भाषा विकास के सिद्धांत:—
⚜️ पावलव के अनुसार:—बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है।
इन्होंने इसको भाषा अनुबंध का भी नाम दिया।
⚜️ स्किनर के अनुसार:—बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है।
⚜️ बंडूरा के अनुसार:—बालक अनुकरण से सीखता है।
⚜️ चोम्स्की के अनुसार:—बालक जिस भाषा को सुनता है उसे अपने आप सीख जाता है।
भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात होती है।
▪️ भाषा अर्जन तंत्र (LAD)
language acquisition device
▪️ व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है।
⭐ बालक की आयु———शब्द भंडार
🔹0-8 माह तक—0 शब्द
🔸9-12 माह तक—3-4 शब्द
🔹12 माह तक—10-12 शब्द
🔸 2 वर्ष तक—272 शब्द
🔹 ढाई वर्ष तक—450 शब्द
🔸 3 वर्ष तक—1000 शब्द
🔹 साढ़े 3 वर्ष तक—1250 शब्द
🔸 4 वर्ष तक—1600 शब्द
🔹 5 वर्ष तक—2100 शब्द
🔸 11 वर्ष तक—50000 शब्द
🔹 14 वर्ष तक—80000 शब्द
🔸 16 वर्ष से आगे—एक लाख से अधिक
🏵️ व्यक्तित्व 🏵️ (personality)
व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के प्रभाव या आकर्षण को दिखाता है व्यक्तित्व अनेक प्रकार के गुण, अवगुण, को समाहित किया हुआ रहता है व्यक्तित्व का वर्गीकरण किसी एक गुण, वस्तु अनुशासन, तथ्य इत्यादि के आधार पर नहीं किया जा सकता है।
⭐ सामाजिक अंतः क्रिया के आधार पर वर्गीकरण ⭐
▪️ प्रवर्तक-कर्ल जुंग (युंग)
👉 इन्होंने सामाजिक अंतः क्रिया के आधार पर तीन भागों में विभाजित किया:—
1-अंतर्मुखी व्यक्तित्व:—
मनन, चिंतन, आत्मचिंतन, आत्म केंद्रित, संवेदना शील,मितभाषी, कर्तव्यनिष्ठ, सामाजिक व्यवहार में अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं।
2-बहिर्मुखी व्यक्तित्व:—
समाज केंद्रित, व्यवहारिक, साहसिक, चिंता मुक्त, आशावादी, सामाजिक कार्य में रुचि लेते हैं, लोकप्रिय भी होते हैं, कुशल वक्ता होते हैं।
3-अभय मुखी व्यक्तित्व:—
अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनों लक्षण लगभग समान रूप से विद्यमान रहते हैं।
🌸 फ्रायड का विश्लेषणात्मक सिद्धांत 🌸
🔸 इदम (Id)-अचेतन, मूल प्रवृत्ति, नैसर्गिक, शीघ्र तृप्ति
🔹 अहम (ego)-चेतना, इच्छा शक्ति, बुद्धि, तर्क
🔸 परा अहम (superego)-आदर्शवादी होते हैं
🌸 शेलड़ान का रचना सिद्धांत 🌸
🔸 गोलाकृति -गोल गर्दन, मांसपेशियों से पूर्ण, चर्बी का बढ़ना
🔹 आयताकृति-हड्डी और मांस पेशी का विकास
🔸 लंबा कृति-केंद्रीय स्नायु संस्थान की मांसपेशी तंतु विकसित होते हैं।
🌺 आरबी कैटल का प्रतिकारक प्रणाली सिद्धांत 🌺
⭐ व्यक्ति किसी परिस्थिति में जो कार्य करता है उसी का प्रतिरूप ही व्यक्तित्व है।
⭐ चरित्र की सुंदरता, भावनात्मक एकता, सामाजिकता, कल्पनाशीलता, अभि प्रेरक, उत्सुकता इन सभी कार्यों से दर्शाई जाती है।
🌼 आलपोर्ट का सिद्धांत 🌼
⭐ शीलगुण सिद्धांत/विशेषक सिद्धांत
⭐ व्यवहार, विचार, भावना को शीलगुण कहते हैं यह लंबी अवधि में भी बहुत सीमा तक अपरिवर्तित रहती है यह अलग अलग व्यक्ति में अलग अलग होती है।
🌹 मुर्रे का सिद्धांत (H.A murray)
⭐ व्यक्तित्व कार्यात्मक एवं शक्तियों की निरंतरता है जो संगठित प्रक्रिया के रूप में जन्म से मृत्यु तक बहिर्मुखी होकर प्रकट होती है।
🌻 क्रेशमर का सिद्धांत 🌻
इन्होंने इस सिद्धांत के चार प्रकार बताए हैं—
🔸 लंबकाय (एस्थेनिक)—दुबला, पतला, लंबा
🔹 खिलाड़ी (एथलेटिक)—शरीर अच्छा, फुर्तीला
🔸 नाटा ( पिकनिक )—मोटा और नाटा
🔹 मिश्रित—सभी प्रकार के व्यक्तित्व
🏵️Thank You🏵️
🏵️🌸🏵️✍️ Notes by~🌹Vinay Singh Thakur🌹

🔆भाषा और विचार🔆
( Language & Thought )

भाषा ➖ भाषा हमारे भाव या विचारो को व्यक्त करने का माध्यम है भाषा हमारे हाव भाव या विचारो को अभिव्यक्ति करने का माध्यम है |
मनुष्य पशुओ से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सकते है |

🌀भाषा को प्रभावित करने वाले कारक ➖

1. पारिवारिक परिस्थिति :- बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है |
बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का “माँ की भाषा या मातृभाषा” कहते है |
माता अपने बालक में जो बातचीत करती है उसे “बेबी टाॅक Baby talk” कहते है |
2. पडो़स :- बालक जब 4-5 साल का होता है तब वह बच्चा पडो़स में जाने लगता है और सामाजिक अनुक्रिया तीव्र कर देता है |
बालक पडो़स का अनुसरण करने लगता है |
◼हरलाॅक के अनुसार – भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुतलाना , हकलाना , इत्यादि बच्चा पडो़स से ही सीखता है |
3. खेल और खेल के साथी :- बच्चो का समय खेल में भी बीतता है तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल या खेल के साथी होगे ,भाषा उसी प्रकार के सीखेगे |
4. भाषा की संख्या :- इसमें कई भाषा का प्रयोग कराना ठीक नही है बच्चे के समुचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए तभी बच्चों का पूर्ण विकास होगा |
5. विद्यालय और शिक्षक :- शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है |
भाषा विकास का सिद्धांत ➖
⭐पावलव के अनुसार :- बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है |(भाषा अनुबंध)
⭐ स्किनर के अनुसार :- बालक भाषा अनुकरण पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है |
⭐बडुरा के अनुसार :- बालक अनुकरण से सीखता है |
⭐चौमस्की के अनुसार :- बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप सीख जाता है |
◼भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति जन्मजात होती है |
◼भाषा अर्जन तंत्र (LAD) (Language Acquisition Device)
◼व्याकरण भी अपने आप सीख जाता है (Genrative Grammar theory )

बालक की आयु शब्द भंडार
0 – 8 माह तक 0
9 – 12 माह तक. 3-4 शब्द
18 माह तक 10-12शब्द
2 वर्ष तक 272 शब्द
ढाई वर्ष तक 450 शब्द
3 वर्ष तक 1100 शब्द
साढे़ तीन वर्ष तक 1250शब्द
4 वर्ष तक 1600 शब्द
5 वर्ष तक 2100 शब्द
11 वर्ष तक 50,000 शब्द
14 वर्ष तक 80,000 शब्द
16. से आगे 1 लाख से अधिक

Notes by ➖Ranjana Sen

🏵️ भाषा विचार 🏵️

🔹भाषा — भाषा हमारे भाव या विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है।

🔹मनुष्य पशु से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि मनुष्य के पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसी भाषा होती है जिसे लोग समझ सके।

✳️ भाषा को प्रभावित करने वाले कारक —

1️⃣ परिवारिक परिस्थिति —
– बालक जिस परिवार में जन्म लेता है उस परिवार की भाषा का विशेष प्रभाव पड़ता है।
– बालक अपनी माता की गोद में जिस भाषा को सीखता है उसी का नाम मातृभाषा या मां की भाषा कहते हैं।
– माता अपने बालक से जो बातचीत करती है उसे भी बेबी टॉक ( baby talk ) कहते हैं।

2️⃣ पड़ोस —
— 4 से 5 साल में बच्चा पड़ोस में जाने लगता है सामाजिक अभिक्रिया तीव्र कर देता है।
— बालक पड़ोस का अनुसरण करने लगता है।

🔹हरलॉक -: भाषा के विकास में अनुकरण का विशेष प्रभाव पड़ता है तुतलाना हकलाना इत्यादि बच्चा पड़ोस से सीखता है।

3️⃣ खेल और खेल के साथी —
— बच्चों का समय खेल में भी बितता है तो जिस प्रकार के बच्चे के खेल या खेल के साथी होंगे भाषा उसी प्रकार के सीखेंगे।

4️⃣ भाषा की संख्या —
— कई भाषा का प्रयोग कराना ठीक नहीं है।
— बच्चे के समुचित विकास के लिए मातृभाषा के पूर्ण होने पर ही दूसरी भाषा को प्रेरित करना चाहिए।

5️⃣ विद्यालय और शिक्षक —
— शिक्षक बालक के लिए आदर्श होते हैं ।
— बालक की भाषा में शिक्षक की भाषा का प्रभाव पड़ता है।

✳️ भाषा विकास का सिद्धांत

🌸 पावलाव -: बालक भाषा के शब्द और अर्थ के बीच संबंध स्थापित करके सीखता है। ( भाषा अनुबंध )

🌸 स्किनर –: बालक भाषा अनुकरण या पुनर्बलन के माध्यम से सीखता है।

🌸 बंडूरा –: बालक अनुकरण से सीखता है ।
— इन्होंने पुनर्बलन पर महत्व नहीं दिया।

🌸 चोम्स्की –: बालक जिस भाषा को सुनता है अपने आप उस भाषा को सीख जाता है।
— भाषा ग्रहण करने की प्रवृत्ति बालकों में जन्मजात होती है इसी को भाषा अर्जनतंत्र या एलइडी ( LAD ) कहते हैं।
LAD –language acquisition device

✳️ बालक की आयु और शब्द भंडार

बालक की आयु। शब्द भंडार

🔅 0 से 8 माह तक 0

🔅 9 से 12 माह तक 3 से 4 शब्द

🔅 18 माह तक 10 से 12 शब्द

🔅 2 वर्ष 272 शब्द

🔅 2.5 वर्ष तक 450 शब्द

🔅 3 वर्ष तक 1000 शब्द

🔅 3 .5 वर्ष तक 1250 शब्द

🔅 4 वर्ष तक 1600 शब्द

🔅 5 वर्ष तक 2100 शब्द

🔅11 वर्ष तक 50000 शब्द

🔅14 वर्ष तक। 80000 शब्द

🔅 16 वर्ष से आगे 100000 शब्द

धन्यवाद
द्वारा वंदना शुक्ला

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