➖व्यक्तित्व विभिन्नता➖

👉 किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या विभिन्नता व्यक्ति भिन्नता कहलाती है

➖ स्वभाव
➖बुद्धि
➖शारीरिक
➖ सामाजिक
➖मानसिक
➖संवेगात्मक
👉 वैसे जुड़वा बच्चे एक तरह दिखते हैं लेकिन उनमें भी विभिन्नता पाए जाते हैं

👉 स्किनर➖
व्यक्तित्व विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलू से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है

👉 हेडलर➖
रूप ,रंग, कार्य, ज्ञान, बुद्धि ,अभिरुचि, आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्न नेता को ही व्यक्तित्व विनता कहते है

1)👉 शारीरिक आधार पर व्यक्तित्व विभिन्नता

➖ गोरे ,काले, लंबे ,छोटे, मोटे ,पतले
➖ रंग ,शरीर ,ढांचा ,परिपक्वता
➖ शिक्षक का दायित्व है कि बालकों को शिक्षण अधिगम देने में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य देखें
➖ अगर सारी भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें

2)👉 योग्यता के आधार पर व्यक्तित्व भिन्नता

➖ सभी बच्चों में किसी न किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है

3)👉 लिंग के आधार पर व्यक्तित्व भिन्नता➖
पुरुष ,महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं
➖ सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता

4)👉 समुदाय के आधार पर व्यक्तित्व विभिन्नता➖ समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है
➖ कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते कुछ बात करने से भी कतराते हैं
➖ जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती उन परिवार के बच्चे सामान्यता निम्न अस्तर के पाए जाते हैं

5)👉 व्यक्तित्व के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता➖ हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है
➖ बच्चा जैसा अनुसरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रमाणित करते है इसलिए व्यक्ति के तौर पर शिक्षक की individuals difference को समझने की जरूरत है

💢व्यक्तिक विभिन्नता के कारण➖

👉 इसके 4 कारण है
1) वंशानुक्रम
2) वातावरण या पर्यावरण
3) परिपक्वता
4) जाति, देश ,प्रजाति

1) वंशानुक्रम➖ वंशानुक्रम के द्वारा अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के गुणों का स्थानांतरण होता है

2) वातावरण➖ आर्थिक सामाजिक भौगोलिक तथा सांस्कृतिक सभी प्रकार के वातावरण का प्रभाव बालक पर पड़ता है

3) परिपक्वता➖ परिपक्वता सीखने के लिए आवश्यक होती है या कुछ बच्चों में जल्दी आ जाती है और कुछ बच्चों में देर से आती है

4) जाति देश प्रजाति➖ प्रजाति भी व्यक्तित्व भिन्नता को जन्म देती है अलग-अलग देशों के लोगों में व्यक्तित्व भिन्नता पाई जाती है

💢💢💢💢💢💢💢💢💢

Notes by:—sangita bharti✍🙏

वैयक्तिक विभिन्नता (individual difference) 🔥🔥

किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या विभिन्नता, ”वैयक्तिक विभिन्नता” कहलाती है।

परिभाषाएं 👉

स्किनर के अनुसार,”वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।”

हैडलर के अनुसार,” रंग रूप कार्य ज्ञान बुद्धि अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही व्यक्तिगत विभिन्नता कहते हैं।”

वैयक्तिक भिन्नता के प्रकार (type of individual differences)

1. शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🔥🔥

रंग ,शरीर ढांचा ,परिपक्वता (काले, गोरे , लंबे , छोटे , मोटे , पतले) आदि के आधार पर शारिरिक विभिन्नताएं।

शिक्षक का दायित्व है कि बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें।

👉 अगर शारीरिक विभिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

2. योग्यता के आधार पर वैयक्तिगत विभिन्नता 🔥🔥

👉सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होती है।
👉 उनकी विशिष्ट योग्यताओं का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।।

3. लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🔥🔥

👉 पुरुष, महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।
👉 सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है।

4. समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🔥🔥

👉 समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखने लगता है।
👉 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते हैं तो कुछ बात करने से भी कतराते हैं।
👉 जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती हैं उन परिवार के बच्चे निम्न स्तर के सोच के पाए जाते हैं।

5. व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🔥🔥

हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है। उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है। बच्चा जैसा अनुकरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं। बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर एक शिक्षक को भी बच्चों में विभिन्नताओं को समझने की जरूरत है।

व्यक्तिगत विभिन्नता के कारण (cause of individual differences)🔥🔥

व्यक्तिक विभिन्नता कोमलता दो बातें प्रभावित करती हैं –
1.अनुवांशिकता (heredity) और 2.वातावरण (environment)।

1. वंशानुक्रम /अनुवांशिकता (heredity)👉

बच्चे की रंग, रूप, बुद्धि,शारीरिक बनावट,वंशानुक्रम से प्रभावित होते हैं। माता-पिता का जो रंग , रूप होता है वैसे ही बच्चों में भी आ जाता है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि माता- पिता के समान गुण बच्चे में भी आए । कई बार बच्चे माता-पिता के गुण नहीं प्राप्त करते बल्कि अपने दादा – दादी ,नाना- नानी के गुण का प्रभाव उनमें दिखाई देता है । एक ही माता-पिता के सभी बच्चे, यहां तक की जुड़वा बच्चे भी समान नहीं होते। उनमें भी विभिन्नताएं होती हैं। कुछ बच्चे में मां का गुण अधिक आता है तो कुछ में पिता का कभी-कभी माता-पिता लंगड़े हो तो जरूरी नहीं कि बच्चा भी लंगड़ा हो।

2. वातावरण / पर्यावरण (environment) 👉

शारीरिक एवं बौद्धिक विभिन्नताओं के अलावा जो सामाजिक, संवेगात्मक ,नैतिक, धार्मिक प्रकार की विभिन्नताएं होती हैं उन पर वातावरण का प्रभाव अधिक होता है।

नोट- इन सभी पर आयु ,परिपक्वता,जाति, देश, प्रजाति इत्यादि का भी प्रभाव पड़ता है।

✍️Notes by “Shreya Rai”🙏

🌱🌱व्यक्तिक विभिन्नता ,🌱🌱

🌴स्किनर के अनुसार-वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से हैं जिसका मापन एवं मूल्यांकन किया जा सकता है।

हैडलर के अनुसार-रूप, रंग, कार्य, ज्ञान ,बुद्धि अभिरुचि ,आदि लक्षणों में पाए जाने वाली विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहते हैं।

🌱🌱 आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता

🌴काले ,गोरे, लंबे -छोटे ,मोटे -पतले आदि आकार वा रुप का होना भी वैयक्तिक विभिन्नता कहलाता है;

🌴रंग, शरीर , व परिपक्वता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता;

🌴शिक्षक का दायित्व है कि बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके सहायक विकास का ध्यान अवश्य रखें;

🌴अगर शारीरिक भिन्नता अधिक होता है तो उचित निर्देशन करें;

🌱🌱योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता

🌴सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होती है;

🌴उनकी विशिष्ट योग्यता को पता लगाने के लिए शिक्षक को चाहिए कि उनकी रूचि वा क्रियाओं का मूल्यांकन करे ।

🌱🌱लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता

🌴पुरुषो में महिलाओं की अपेक्षा कम कोमलता होती हैं;

🌴शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में बालक एवं बालिकाओं में विभिन्नता नहीं होती है;

🌱🌱समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता

🌴समाज ,परिवार ,तथा समुदाय का मानव के व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है;

🌴जिन परिवार में बात चीत करने भाषा का प्रयोग अच्छे से नहीं किया जाता , उन परिवार के बच्चे भी निम्न स्तर की सोच के पाए जाते हैं;

🌱अच्छे परिवार के बच्चे का व्यवहार अच्छा होता है तथा अपराधिक परिवार के बच्चों का व्यवहार भी कुप्रभावित हो जाता है;

🌱🌱 के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता

🌴हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है;
उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है (जैसे बच्चा अनुसरण अनुकरण कहता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं;
बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर एक शिक्षक को भी जरूरी होता है कि वैक्तिक विभिन्नता को भी समझने की जरूरत है;

🌱🌱वैकक्तिक विभिन्नता के कारण-
🌀वंशानुक्रम
🌀वातावरण
🌀परिपक्वता
🌀जाति, देश, प्रजाति, धर्म इत्यादि

धन्यवाद
Written by – Shikhar Pande

📝वैयक्तिक विभिन्नता individual differences

🌸किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या विभिन्नता वैयक्तिक विभिन्नता कहलाती है

🔵परिभाषाएं ➖

👉🏻स्किनर के अनुसार ➖

🔵वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है किसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है

👉🏻हैंडलर के अनुसार➖

🔴वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य रंग, रूप ,कार्य,ज्ञान बुद्धि ,अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहते है

🥀🥀🥀प्रकार➖

1️⃣शारीरिक आधार पर➖

🌸वैयक्तिक विभिन्नता रंग , शरीर ,मचान/ढांचा ,परिपक्वता आदि के आधार पर शारीरिक विभिन्नता

🌸शिक्षक का दायित्व है के बालको के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान रखे

🌸अगर शारीरिक विभिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करे

2️⃣योग्यता के आधार पर➖

🍁वैयक्तिक विभिन्नता सभी बच्चो में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होती है
🍁उसकी विशिष्ट योग्यता को पता लगाने के लिए शिक्षक उनकी रुचि व क्रियाओं का मूल्यांकन करे

3️⃣लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖

🍁पुरुषों में महिलाओं को अपेक्षा काम कोमलता होती है
शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में बालक एवं बालिकाओं में विभिन्नता नहीं होती है

4️⃣समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖

🍁समाज, परिवार तथा समुदाय का मानव के व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है
🍁जिन परिवार में बात चीत करने में भाषा का प्रयोग अच्छे से नहीं किया जाता उन परिवारों के बच्चे भी निम्न स्तर की सोच के पाए जाते है

5️⃣व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

🍁हर बच्चे का अपना व्यक्तित्व होय है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति करके व्यवहार को दर्शाता है बच्चा जैसा अनुकरण करता है वह उसके व्यवहार को प्रभावित करता है बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए एक व्यक्तिगत तौर पर एक शिक्षक को भी बच्चो में विभिन्नताओं को समझने की जरूरत है

🟡वैयक्तिक विभिन्नता के कारण➖
🥀वांशनुक्रम ➖बच्चे का रंग ,रूप बुद्धि ,शारीरिक बनावट वंशनुक्रम के कारण होते है

🥀वातावरण ➖ सामाजिक , संवेगात्मक ,नैतिक धार्मिक प्रका र की विभिन्नताएं होती है उन पर वातावरण का प्रभाव अधिक पड़ता है और परिपक्वता ,
जाति ,देश प्रजाति इत्यादि पर भी इसका प्रभाव पड़ता है

📒notes by

📝Arti savita

🔆 वैयक्तिक विभिन्नता( individual difference) 🔆

कोई भी व्यक्ति या बालक सभी प्रकार से एक जैसे नहीं होते यहां तक कि दो जुड़वा भाई बहनों में भी पूर्ण रूप से समानता नहीं पाई जाती इनमें रूप रंग शारीरिक गठन विशिष्ट योग्यताओं बुद्धि स्वभाव आदि परस्पर एक दूसरे से कुछ न कुछ अवश्य होते हैं।

एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से रूप रंग शारीरिक गठन बुद्धि विशिष्ट योग्यताओं रुचियां उपलब्धियों स्वभाव व्यक्तित्व के गुणों आदि में भिन्नता ही वैयक्तिक भिन्नता कहलाती हैं।
दो व्यक्तियों की बुद्धि समायोजन अभिक्षमता एवं व्यवहार में जो अंतर होते हैं उन्हें ही वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।

💫 स्किनर के अनुसार ➖
वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।

💫 हैंडलर के अनुसार ➖
रूप रंग कार्य ज्ञान बुद्धि अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहते हैं।

💞 वैयक्तिक विभिन्नता के प्रकार➖

1️⃣ शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖
काले गोरे लंबे छोटे मोटे पतले ।
👉रंग शरीर ढांचा परिपक्वता।
👉 शिक्षक का दायित्व है कि बालक को शिक्षण अधिगम देते समय उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रूप से रखना चाहिए।
👉 अगर शारीरिक विभिनता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

2️⃣ योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖
सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी ।
👉उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

3️⃣ लिगं के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖
पुरुष महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।
👉 सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है।

4️⃣ समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖
समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है।👉 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते हैं कुछ बात करने से भी कतराते हैं।
👉 जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती है उनके परिवार के बच्चे निम्न स्तर के सोच कर पाए जाते हैं।

5️⃣ व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖
हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है।
👉 बच्चा जैसा अनुसरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
👉 बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर शिक्षक को वैयक्तिक विभिन्नता समझना जरूरी है।

🌀 वैयक्तिक विभिन्नता के कारण ➖

1️⃣ वंशानुक्रम➖
वंशानुक्रम व्यक्ति के शरीर अंतः स्रावी ग्रंथियों केंद्रीय स्नायु मंडल एवं उसकी बुद्धि को निर्धारित करते हैं जो निरंतर गतिशील एवं परिवर्तनशील वातावरण में अपने निराले ढंग से परस्पर क्रिया में संलग्न रहता है। बच्चे के रंग रूप बुद्धि शारीरिक बनावट वंशानुक्रम से प्रभावित होते हैं माता-पिता का जो रंग रूप है वैसे ही बच्चे में भी आ जाता है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि माता पिता के समान गुण बच्चे में भी आए कई बार बच्चे माता-पिता के गुण प्राप्त नहीं करते बल्कि अपने दादा दादी नाना नानी के गुणों का प्रभाव उनमें दिखाई देता है एक ही माता-पिता के सभी बच्चे यहां तक की जुड़वा बच्चे भी समान नहीं होते उनमें भी विभिन्न विधाएं होती हैं कुछ बच्चे में मां का गुण अधिक आता है तो कुछ में पिता का कभी-कभी माता पिता जैसे हैं बच्चे वैसे नहीं होते हैं।

2️⃣ वातावरण ➖
वातावरण के अंतर्गत सभी कारक आते हैं जो एक प्राणी को प्रभावित करते हैं इन सभी सामाजिक नैतिक आर्थिक राजनीतिक भौतिक कारक से है जो व्यक्ति की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करते हैं एक व्यक्ति में पर्यावरणीय निर्धारकों में माता-पिता घर और परिवार आस-पड़ोस विद्यालय समाज और उनकी संस्कृति आते
हैं।

3️⃣ परिपक्वता

4️⃣ जाति देश प्रजाति इत्यादि

✨ इन सभी पर आयु , परिपक्वता,जाति ,देश, प्रजाति इत्यादि का भी प्रभाव पड़ता है।

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

💥 वैयक्तिक विभिन्नता💥🌺 (Individual Difference)

👉🏼 दो व्यक्तियों की आदत, शीलगुण बुद्धि एवं अन्य व्यवहारों में जो अंतर होता है उसे वैयक्तिक विभिन्नता कहा जाता है।

👉🏼 इस ढंग की वैयक्तिक विभिन्नता शारीरिक एवं मानसिक गुणों में तो स्पष्टत: झलकती है, परंतु अन्य क्षेत्रों या गुणों में भी वैयक्तिक विभिन्नता परोक्ष रूप से पाई जाती है।

🌀 स्किनर के अनुसार➖
व्यक्तिगत विभिन्नता का ताज पर उन सभी पहलू से है जिस समापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।

🌀 टायलर के अनुसार➖ शरीर के आकार संरचना, मापक, क्षमता ,वृद्धि ,रुचि ,अभि वृत्ति तथा व्यक्तित्व के लक्षणों में माफ की जा सकने वाली भिन्नता को व्यक्तिगत भिन्नता कहते हैं।

1️⃣ वैयक्तिक विभिन्नता के प्रकार➖
⚡ शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

👉🏼 रंग शरीर ढांचा परिपक्वता
👉🏼शिक्षक का दायित्व है बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें।
👉🏼 अगर शरीर भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

2️⃣ योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

👉🏼 सभी बच्चों में किसी न किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी।
👉🏼उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

3️⃣ लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

👉🏼 पुरुष, महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।
👉🏼 सीखने के स्तरीय क्षमता पर अंतर नहीं होता है।

4️⃣ समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖

👉🏼 समुदाय का प्रभाव बचपन से दिखने लगता है।
👉🏼 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बातें करते हैं कुछ बच्चे करने से कतराते हैं।
👉🏼जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती है समानता निम्न स्तर के सोच के पाए जाते हैं।

5️⃣ व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖
👉🏼हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है बच्चा जैसे अनुसरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करता है।
👉🏼 बच्चा एक शिक्षक जैसे बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर शिक्षक को वैयक्तिक विभिन्नता समझना जरूरी है।

🌺 वैयक्तिक विभिन्नता के कारण➖

⚡ वंशानुक्रम
⚡ वातावरण या परिवेश
⚡ परिपक्वता
⚡ जाति प्रथा एवं राष्ट्र का प्रभाव

1️⃣ वंशानुक्रम➖
प्राय: देखा गया है कि बुद्धिमान एवं उत्तम शीलगुणों वाले माता-पिता के बच्चे भी उत्तम शील गुण होते हैं, तथा उनका भी बुद्धि स्तर श्रेष्ठ होता है। जबकि सामान्य माता-पिता के बालक भी सामान नहीं होते हैं इन बच्चों में विभिन्नता का कारण वंशानुक्रम ही है।

2️⃣ वातावरण या परिवेश➖व्यक्तिगत भिन्नता का कारण वातावरण भी है एक ही मां बाप के सभी संतान एक समान नहीं होते क्योंकि बच्चों के भौतिक वातावरण (physical environment) तथा सामाजिक वातावरण(social environment) का प्रभाव व्यक्तिगत भेदों पर सर्वाधिक पड़ता है।

3️⃣ परिपक्वता➖
व्यक्तिगत भिन्नता का एक स्रोत परिपक्वता में अंतर है कुछ बालक मानसिक एवं शारीरिक रूप से अधिक परिपक्व होते हैं तो उसी आयु के दूसरे बालक मानसिक एवं शारीरिक रूप से कम परिपक्व होते हैं।

4️⃣ जाति प्रथा एवं राष्ट् का प्रभाव➖
व्यक्तिगत भिन्नता का एक स्रोत राष्ट्रीयता है विभिन्न प्रजाति के बालकों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक, विकास में कुछ ना कुछ विभिन्नता अवश्य देखने को मिलती है।
एक राष्ट्र के बालक दूसरे राष्ट्र के बालक से किसी न किसी प्रकार से भिन्न होते हैं।

🖊️🖊️📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚🖊️🖊️

🌼🌼व्यैक्तिक भिन्नता🌼🌼
(Individual difference)

🌼स्वभाव
🌼 बुद्धि
🌼 शारीरिक
🌼 सामाजिक
🌼 मानसिक
🌼संवेगात्मक
🌼🌼 किसी व्यक्ति ने दूसरों की तुलना मे किसी भी पक्ष में अंतर या विभिन्नता वैयाक्तिक विभिन्नता कहलाती है
जुड़वा बच्चे एक तरह देखते हैं उनमें भी विभिन्नता एक तरह देखते हैं उनमें भी विभिन्नता हैं उनमें भी विभिन्नता होती है

🌼🌼स्किनर के अनुसार — वैयक्तिक भिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिसका मापन एवं मूल्यांकन किया जा सकता है

🌼🌼 हैडलर के अनुसार— रूप, रंग ,कार्य, ज्ञान, बुद्धि ,अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही व्यक्तिक विभिन्नता कहते हैं

🌼🌼1. शारीरिक आधार पर व्यक्तिक भिन्नता–
🌼 काले गोरे लंबे छोटे मोटे पतले इयादि के आधार पर! ।
🌼 रंग, शरीर ,ढांचा ,परिपक्वता के आधार पर!!
🌼शिक्षक का दायित्व है कि बालकों की शिक्षा अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें
🌼अगर शारीरिक विभिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशित करें

🌼🌼2. योग्यता के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता —
🌼सभी बच्चों में किसी न किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होती है
🌼उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है

🌼🌼3. लिंग के आधार पर वैयक्तिक भिन्नता —
🌼 पुरुष,महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं
🌼 सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है

🌼🌼4.समुदाय के आधार पर वैयक्तिक भिन्नता–
🌼 समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है
🌼 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बातें करते हैं कुछ बातें करने से भी कतराते हैं
🌼परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती और परिवार में बच्चे की सोच निम्न स्तर की पाई जाती हैं

🌼🌼5.व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता —
🌼 हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है
🌼बच्चा जैसा अनुकरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करता है
🌼बच्चा एक शिक्षिक जैसा बनता है इसलिए बच्चे व्यक्तिगत तौर पर शिक्षक को ही Individual different समझने की जरूरत है

🌼व्यक्तिक विभिन्नताओं के कारण🌼
🌼 वंशानुक्रम -बच्चे मे कुछ विभिन्नता वंशानुक्रम से आती है..
🌼वातावरण – बच्चों मे वातावरण का प्रभाव पड़ता है..
🌼परिपक्वता – बच्चे परिपक्वता के आधार पर भी भिन्न होते है!
🌼जाति ,देश ,प्रजाति– बच्चे जाति, धर्म, प्रजाति आदि के आधार पर भी भिन्न होता है…
🌼🌼🌼🌼🌼manjari soni 🌼

🏵️ वैयक्तिक विभिन्नता (individual difference)
👉 स्वभाव, बुद्धि, शारीरिक, सामाजिक, मानसिक, संवेगात्मक आदि रूप से अंतर होता है किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या भिन्नता व्यक्तिक भिन्नता कहलाती है।
👉 जुड़वा बच्चे एक तरह दिखते हैं लेकिन उनमें भी भिन्नता होती हैं।
◾ स्किनर के अनुसार~वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलू से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।
◾ हैंडलर के अनुसार~रूप, रंग, कार्य, ज्ञान, बुद्धि, अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही व्यक्तिक भिन्नता कहते हैं।
1️⃣ शारीरिक आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता:~
👉 काले, गोरे, लंबे, छोटे ,मोटे ,पतले आदि प्रकार से भी व्यक्तिक विभिन्नता होती है।
👉 रंग, शरीर, ढांचा, परिपक्वता इस आधार पर भी व्यक्तिक विभिन्नता होती है।
👉 शिक्षक का दायित्व होता है की बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें।
👉 अगर शारीरिक भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।
2️⃣ योग्यता के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता:~
👉 सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी।
👉 उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।
3️⃣ लिंग के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता:~
👉 पुरुष महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।
👉 सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है।
4️⃣ समुदाय के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता:~
👉 समुदाय का प्रभाव बचपन से दिखता है।
👉 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते हैं और कुछ बात करने से भी कतराते हैं।
👉जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती है उन परिवार के बच्चे निम्न स्तर के सोच के पाए जाते हैं।
5️⃣ व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नताएं:~
👉हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है बच्चा जैसा अनुसरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर शिक्षक को व्यक्तिक भिन्नता को समझने की जरूरत है।
◾ व्यक्तिक विभिन्नता के कारण:~
▪️ वंशानुक्रम:~बच्चों में वंशानुक्रम के आधार पर भी विभिन्नता पाई जाती है। अगर माता-पिता उच्च बुद्धि वाले हैं तो जरूरी नहीं उनके बच्चे भी उच्च बुद्धि वाले होंगे, निम्न बुद्धि के भी हो सकते हैं और यदि एक बच्चा लंबा है तो हो सकता दूसरा बच्चा नाटा हो।
▪️ वातावरण:~बच्चों में वातावरण के आधार पर भी भिन्नता होती है।जहां जैसा बच्चों को वातावरण मिलता है बच्चे उसी प्रकार से अपने आप को ढाल लेते हैं। अगर बच्चों को अच्छा वातावरण मिलेगा तो उस वातावरण के बच्चे भी अच्छे होंगे अगर बच्चों को वातावरण ही खराब मिलेगा तो बच्चे भी खराब होंगे।
▪️ परिपक्वता:~व्यक्तिगत विभिन्नता का एक आधार परिपक्वता भी है कुछ बालक शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक परिपक्व होते हैं और कुछ बालक शारीरिक और मानसिक रूप से कम परिपक्व होते हैं।
▪️ जाति,देश, प्रजाति :~व्यक्तिगत विभिन्नता का एक माध्यम जाति, देश, प्रजाति भी है संसार में अनेकों प्रकार की जाति, तथा प्रजाति और देश भी है और सभी जाति, प्रजाति तथा देश में अनेक अलग-अलग प्रकार के व्यक्ति पाए जाते हैं कोई काला है, तो कोई गोरा है, कोई लंबा है, तो कोई नाटा है, आदि प्रकार से विभिन्नता पाई जाती हैं।
🔹🔸🔹
🏵️🌸🏵️✍️ Notes by •ᴗ•Vinay Singh Thakur🏵️🌸🏵️

🌻🌾 वैयक्तिक विभिन्नता 🌾🌻

🍁 स्वभाव
🐥शुद्धि
☃️शारीरिक
🌾सामाजिक
🌿मानसिक
🌺सवेगात्मक
किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अन्तर या भिन्नता करना वैयक्तिक विभिन्नता कहलाती है।
जुड़वां बच्चे देखने में एक जैसे ही लगते हैं परन्तु उनमें भी वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है।

🌹🌸स्किनर के अनुसार ÷ वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलु से है, जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।

☃️🌾हैडलर के अनुसार ÷ रूप, रंग, कार्य, ज्ञान , बुध्दि,अभिरूचि इत्यादि में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहते हैं।

🎃☃️ शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ☃️🎃

🍂काले ,गोरे, लंबे, छोटे,मोटे ,पतले इत्यादि के आधार पर।

🐤 रंग,शरीर, ढांचा, परिपक्वता के आधार पर।

🌼 शिक्षक का दायित्व है कि बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान रखें।

🌾 अगर शारीरिक भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

🍃🌻 योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🌻🍃

🍂सभी बच्चों में किसी न किसी क्षेत्र में विशिष्ट योग्यता जरूर होगी।

🌸 उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

🌲🌷 लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🌷🌲

🌻पुरूष महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।

🍀 सीखने के स्तर या क्षमता पर अतंर नहीं होता है।

☃️🎃 समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 🎃☃️

🐤 समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है।

🐥 कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते हैं, कुछ करने से भी कतराते हैं।

🍁जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती है,उन परिवारों में बच्चे निम्न स्तर के सोच के पाए जाते हैं।

💫💥 व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता 💥💫

🎃हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है बच्चा जैसा अनुसरण करता है। वह उनके व्यवहार को प्रभावित करता है।
बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तित्व तौर पर शिक्षक Individual Difference समझने की जरूरत है।

🍂🌷 व्यक्तिगत विभिन्नताओं के कारण 🌷🌹

🌾 वंशानुक्रम ÷ बच्चों में वैयक्तिक विभिन्नता वंशानुक्रम के माध्यम से आती है।

🌺 वातावरण ÷ वातावरण का बच्चों की वैयक्तिक विभिन्नता पर असर पड़ता है।

🌻 परिपक्वता ÷ परिपक्वता के आधार पर भी वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है।

🐿️जाति ÷ जाति के आधार पर बच्चों में वैयक्तिक विभिन्नता देखने को मिलती है।

☃️ देश ÷ देशों के आधार पर भी विभिन्न प्रकार की वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है।

🐤प्रजाति ÷ प्रजाति वैयक्तिक विभिन्नता को बढ़ाता है।

🌺🌺🌺 Notes by ÷ Babita yadav 🌸🍁🌷

🌺वैयक्तिक विभिन्नता Individual Difference🌺

प्रत्येक व्यक्तियों में अनेक प्रकार की वैयक्तिक भिन्नता पायी जातीं हैं , जैसे :-

🌻 स्वभाव

( Nature! ) स्वभाव के आधार पर भिन्नता।

🌻 बुद्धि

(Intelligence) बुद्धि / ज्ञान के आधार पर भिन्नता।

🌻 शारीरिक

(Physical ) शारीरिक बनावट के आधार पर भिन्नता।

🌻 सामाजिक

(Social) सामाजिक आधार पर भिन्नता।

🌻 मानसिक

(Mental) मानसिक आधार पर भिन्नता।

🌻 संवेगात्मक

(Emotional) संवेगात्मक आधार पर भिन्नता।

ऐसी अनेक विभिन्नता के आधार पर प्रत्येक व्यक्तियों में भिन्नतायें पाई जाती हैं , यहां तक कि जुड़वा व्यक्तियों में भी कुछ-कुछ भिन्नतायें पाई जाती हैं।

” किसी व्यक्ति में दूसरों की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या भिन्नता , वैयक्तिक भिन्नता कहलाती है। ”

🌲 मनोवैज्ञानिकों के द्वारा वैयक्तिक विभिन्नता के आधार पर कथन निम्नलिखित हैं :-

🌺 स्किनर के अनुसार :-

” वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है। ”

🌺 हैडलर के अनुसार :-

” रूप , रंग , कार्य , ज्ञान , बुद्धि , अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहते हैं। ”

🌲 वैयक्तिक विभिन्नता के प्रकार 🌲

1.🍁 शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता :-

👉काले -गोरे , लंबे -ठिगने , मोटे – पतले

अर्थात कुछ बच्चे/ व्यक्तियों में उपर्युक्त लक्षणों के आधार पर वैयक्तिक भिन्नता पायी जाती।

👉रंग , शरीर , ढांचा , परिपक्वता ।

👉शिक्षक का दायित्व है कि बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान रखें।

👉अगर शारीरिक विभिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

2.🍁 योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता :-

👉सभी बच्चों में किसी न किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी।

👉उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है ।

3.🍁 लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता :-

👉पुरूष , महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं।

👉सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है।

अर्थात शारीरिक कोमलता और शरीरिक ताकत में पुरूष और महिलाओं में ऐसी कुछ भिन्नतायें जरूर पायी जाती हैं परंतु उनके ज्ञान/ बुद्धि, सोचने समझने , विचार/ तर्क आदि में कोई भिन्नता नहीं पाई जाती, अतः हम ये नही कह सकते हैं कि पुरुषों की अपेक्षा अधिक शारीरिक कोमल होने के कारण महिलाएँ बाकी क्षमताओं में भी भिन्न होती हैं।, इस तथ्य में सभी समान हैं।

4.🍁 समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता :-

👉समुदाय / समाज का प्रभाव बच्चों में बचपन से ही दिखता है।

👉कुछ बच्चे बहुत प्रभावी तौर पर बात करते हैं तथा कुछ बच्चे बात करने से कतराते हैं।

👉जिन परिवारों में अच्छी भाषा का प्रयोग नहीं होता है उन परिवारों के बच्चे निम्न स्तर की सोच के पाए जाते हैं।

अर्थात बच्चों पर अपने समुदाय/ परिवेश का बहुत प्रभाव पड़ता है। अतः सकारात्मक और नकारात्मक परिवेश के आधार पर ही बच्चों में वैयक्तिक विभन्नता पायी जाती हैं।

5.🍁 व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नतायें :-

👉प्रत्येक बच्चे का अपना – अपना व्यक्तित्व होता है , उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है।

👉बच्चे जैसा अनुसरण करते हैं उसी प्रकार से उनका व्यवहार भी प्रभावित होता है।

👉बच्चा एक शिक्षक के जैसा बनता है , अतः इसीलिए व्यक्तित्व तौर पर शिक्षा की वैयक्तिक विभिन्नता को समझने की जरूरत है।

🌲 वैयक्तिक विभिन्नता के कारण 🌲

प्रत्येक व्यक्ति में आनुवंशिकता, वंशानुक्रम, परिवार, वातावरण, अपने परिवेश/समूह , बढ़ती उम्र परिपक्वता, ज्ञान/समझ, देश, जाति, प्रजाति आदि वैयक्तिक विभिन्नता के निम्नलिखित कारण हैं :-

१. वंशानुक्रम
२. वातावरण
३. परिपक्वता
४. देश , जाति , प्रजाति इत्यादि।

🌺✒️ Notes by- जूही श्रीवास्तव ✒️🌺

🔆 वैयक्तिक विभिन्नता ( Individual Difference)

प्रत्येक व्यक्ति में स्वभाव ,बुद्धि, शारीरिक ,,सामाजिक,,मानसिक,,संवेगात्मक ,,या इनमें से किसी भी रूप में एक दूसरे व्यक्ति की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर भिन्नता वैयक्तिकक्तिक भिन्नता कहलाती है |

यहां तक की जुड़वा बच्चों में भी किसी ना किसी प्रकार से व्यक्तिक भिन्नता पाई जाती है वर्तमान में वैयक्तिक भिन्नता का महत्व कहीं अधिक बढ़ गया है जिसका संबंध हमारी शिक्षा से है |

वैयक्तिक विभिन्नता किसी भी रूप में हो सकती है चाहे वह व्यक्ति के रंग,,रूप ,,सामाजिक,,मानसिक,,या किसी भी कारण से उनमें व्यक्तिक विभिन्नता पाई जाती है |

🔆 वैयक्तिक विभिन्नता की परिभाषाएं ➖

☀ स्किनर के अनुसार➖

” वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिनका मापन एवं मूल्यांकन किया जा सकता है |”

☀ हैलडलर के अनुसार➖

” रूप , रंग, का ज्ञान, बुद्धि, अभिरुचि, इत्यादि लक्षणों में पाई जाने वाली जो विभिन्नता है उसको ही व्यक्तिक विभिन्नता कहते हैं |”

💫 वैयक्तिक विभिन्नता के आधार ➖

🎯 शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

1) शरीर के आधार पर कुछ लोग काले , गोरे, लंबे, छोटे, मोटे, पतले, आदि होते हैं जिनके कारण उनमें भिन्नता पाई जाती है |

2) वैयक्तिक भिन्नता रंग, शरीर, ढांचा, परिपक्वता के आधार पर भी पाई जाती है |

3) शारीरिक विभिन्नता के आधार पर कई तरह की परेशानियां उत्पन्न होती है इसके लिए शिक्षक का दायित्व है कि बालकों को दी जाने वाली शिक्षा जिस से कि उनकाे शिक्षण अधिगम प्रदान करते समय उनमें शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें |

4) यदि शारीरिक भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें, क्योंकि यदि ऐसा नहीं होगा तो वहाँ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है |

🎯 योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

योग्यता के आधार पर हम देखते हैं कि सभी बच्चों में अलग-अलग क्षमता पाई जाती है जिसको हम अलग नहीं कर सकते हैं जिससे उनकी योग्यताओं का पता लगाना जरूरी है | इसके लिए

1) सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होती है |

2) उनकी विशिष्ट योग्यताओं का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है |

🎯 लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

1) पुरुष महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं |

2) उनमें सीखने या क्षमता का स्तर उस में अंतर नहीं होता है | इसलिए एक शिक्षक को समझना चाहिए कि लिंग के आधार पर सीखने के स्तर या क्षमता में अंतर नहीं होता है |

🎯 समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

1) कुछ बच्चों का ऐसा सामाजिक विकास होता है जो आपसी तालमेल से बहुत घबराते हैं और कई बहुत अच्छे से साझेदारी करते हैं इसलिए उस समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है इसलिए उस समुदाय को समझना बहुत आवश्यक है |

2) कुछ बच्चे बहुत प्रभावी रूप से बात करते हैं और कुछ बात करने से भी घबराते हैं |

3) जिन परिवार की भाषा अच्छी नहीं होती है उन परिवारों के बच्चे निम्न स्तर की सोच वाले होते हैं |

🎯 व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता➖

1) व्यक्ति की विभिन्नताएं उसके व्यक्तित्व पर निर्भर करती हैं बालक जिस अध्यापक अनुकरण करता है उसके जैसा ही व्यवहार करता है |

2) हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनकी व्यवहार को दर्शाती है |

3) बच्चा जैसा अनुसरण करता है उसका व्यवहार उनके व्यवहार को भी प्रभावित करता हैं बच्चा एक शिक्षक बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर शिक्षकों को वैयक्तिक विभिन्नता को समझना अति आवश्यक है |

🌟 व्यक्तिक विभिन्नता के कारण ➖

1) वंशानुक्रम ➖

वंशानुक्रम भी वैयक्तिक विभिन्नता का एक महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि इसी से व्यक्ति के रंग ,रूप, और शारीरिक बनावट में विभिन्नता पाई जाती है |

2) वातावरण ➖

वातावरण के द्वारा व्यक्ति को एक समुदाय प्राप्त होता है जो व्यक्तिक विभिन्नता को प्रभावित करता है इसी के कारण व्यक्ति में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं जैसे भाषा के आधार पर और उनकी शिक्षा के आधार पर उनमें वैयक्तिक भिन्नता पाई जाती है |

3) देश जाति या प्रजाति ➖

सभी बच्चे कि अपनी अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होती है और उसके अनुसार वह अपना व्यवहार प्रदर्शित करता है जिस बच्चे की जाति या भाषा जिस प्रकार की होगी उसका व्यक्तित्व भी उसी प्रकार से निर्मित होगा |

नोट्स बाॅय➖ रश्मि सावले

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🌀🔥वैयक्तिक विभिन्नता (Individual differences)🔥🌀

स्वभाव बुद्धि शारीरिक सामाजिक मानसिक संवेगात्मक ये वैयक्तिक विभिन्नता से संबंधित है|
व्यक्तिगत भेद कई प्रकार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है एक समय था जब व्यक्ति की आवश्यकता सीमित थी जिनको वह सरलता से पूरा कर देता था आधुनिक युग में हमें विभिन्न प्रकार की विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों की आवश्यकता है जो समाज के विभिन्न विकास में योगदान दे सकें व्यक्तिगत भेद विशेष के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि उनके विकास में संतोष और आनंद मिलता है और वह अपनी योग्यता के अनुकूल विकास करता है व्यक्तिगत भेदों के अध्ययन से बच्चों की व्यक्तिगत योग्यताओं का पता लगाकर उनका उचित विकास कर सकते हैं |
जो मनुष्य एक दूसरे से मानसिक योग्यताओ, शारीरिक क्षमता तथा शील गुणो के आधार पर भिन्न होते हैं यहां तक कि जुड़वा भाई बहन भी एक दूसरे से भिन्न होते हैं ये भिन्नताएँ एक व्यक्ति को दूसरे पति से अलग करती है |

🔅 स्किनर के अनुसार :- “व्यक्तिक भिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलुओं से है जिसका मापन एवं मूल्यांकन किया जा सकता है” |

🔅 हेडलर के अनुसार :- रूप रंग कार्य ज्ञान बुद्धि अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली विभिन्नता को ही व्यक्तिगत विभिन्नता कहते हैं |
◼ व्यक्तिगत विभिन्नता के प्रकार :-
1⃣ शारीरिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖ इसमें व्यक्तियों मे काले गोरे लंबे छोटे मोटे पतले आदि ऐसे वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है |
रंग शरीर ढांचा परिपक्वता इन सभी के कारण भी वैयक्तिक भिन्नता पाई जाती है शिक्षक का दायित्व है कि बालको के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें | अलग-अलग शारीरिक विभिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें |

2⃣ योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖ सभी बच्चों में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी |
उनकी विशिष्ट योग्यता का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है |
हर व्यक्ति की अलग – अलग योग्यता होती है और वह आगे बढ़ता है |

3⃣ लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖ इसमें पुरुषों महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते है |
सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है |

4⃣ समुदाय के आधार पर वैयक्तिक भिन्नता ➖ इसमें समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है परिवार क्षेत्र |
कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बातें बात करते हैं कुछ बात करने से कतराते हैं |
जिन परिवार में भाषा अच्छी नहीं होती उस परिवार के बच्चे निम्न स्तर की सोच के पाए जाते हैं |

5⃣ व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता ➖ हर बच्चे का अपना – अपना व्यक्तित्व होता है उसी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है तथा बच्चा जैसा अनुसरण करता है वह उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर शिक्षक को समझने की जरूरत है |

वैयक्तिक विभिन्नता के कारण :➖
1.- वंशानुक्रम –
2.- वातावरण –
3.- परिपक्वता –
4.- जाति देश प्रजाति इत्यादि

◼ वंशानुक्रम :- इसमें बच्चों में कुछ विभिन्नता के कारण वंशानुक्रम का प्रभाव भी पड़ता है |
◼ वातावरण :- बच्चो पर वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है | जिसके कारण वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है|
◼ परिपक्वता :- इसमें बच्चों में परिपक्वता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता देखी जाती है|
◼ जाति देश प्रजाति इत्यादि :- जाति देश प्रजाति आदि के आधार पर भी वैयक्तिक विभिन्नता देखी जाती है |
Notes by➖ Ranjana Sen

🌈individual difference🎯 (वैयक्तिक विभिन्नता)🎯

बच्चों में वैयक्तिक विभिन्नता निम्नलिखित कारणों से हो सकती है ।जैसे- स्वाभाविक ,बुद्धि, शारीरिक, सामाजिक ,मानसिक, संवेगात्मक इत्यादि कारणों से व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

👉जुड़वा बच्चे एक तरफ से दिखते हैं लेकिन उनमें भी विभिन्नता होती है। कभी-कभी हम विभिन्नता को परेख नहीं पाते हैं।

सामान्य तौर पर देखे जाते हैं एक या दो व्यक्ति आपस में भाषा का संप्रेषण करते हैं जैसे- कभी-कभी बातचीत करते हैं और बोलते हैं कि आपका भाषा और मेरा भाषा कितना मिलता-जुलता है आपका विचार और मेरा विचार दोनों मिलता-जुलता है आपका वेशभूषा पर मेरा वेशभूषा एक ही जैसा है हम दोनों में कोई अंतर ही नहीं है इत्यादि अनेक तरफ से बातचीत होते हैं लेकिन यह वास्तविकता नहीं है दुनिया में कोई भी बच्चा एक समान नहीं होते हैं किसी न किसी रूप से विभिन्नता होती है।

🌾किसी व्यक्ति में दूसरे की तुलना में किसी भी पक्ष में अंतर या मिलना व्यक्तिक भिन्नता है।

वैयक्तिक विभिनता के संदर्भ में…..

🎯स्किनर का कथन—

व्यक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य उन सभी पहलू से है जिसका मापन या मूल्यांकन किया जा सकता है।

💮हैडलर के अनुसार…….

रूप, रंग, कार्य ,ज्ञान, बुद्धि, रुचि इत्यादि इन सभी लक्षणों में पाए जाने वाले विभिन्न हि वैयक्तिक विभिन्नता है।

🌈वैयक्तिक विभिन्नता अन्य कारकों पर निर्भर करता है……

⭐शारीरिक आधार पर व्यक्तिक भिन्नता—-

समाज में अनेक तरह के लोग होते हैं उनमें से कुछ लोग काले, गोरे ,लंबे ,छोटे, मोटे ,पतले इत्यादि रूप से एक- दूसरे से भिन्न होते हैं।

कुछ व्यक्ति में रंग ,शरीर, ढांचा, परिपक्वता इत्यादि प्रकार से वैयक्तिक भिन्नता होती है।

एक शिक्षक का दायित्व होता है कि बालकों के शिक्षण अधिगम में उनके शारीरिक विकास का ध्यान अवश्य रखें।

अगर बालकों में शारीरिक भिन्नता अधिक होती है तो उचित निर्देशन करें।

⚡योग्यता के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता…….

सभी बच्चे में किसी ना किसी क्षेत्र में योग्यता जरूर होगी। जैसे-कोई बच्चा पढ़ने लिखने में अच्छा हैं, तो कोई बच्चा गाना गाने में ,कोई नृत्य करने में, कोई खेल खेलने में अच्छा है तो हर एक बच्चे में कोई न कोई अलग-अलग विशिष्टताएं होती है।

उन्हीं विशिष्ट योग्यताओं का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

💫लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता……

पुरूष महिलाओं की अपेक्षा कम कोमल होते हैं लेकिन इनके सीखने के स्तर या क्षमता पर अंतर नहीं होता है।

🌷समुदाय के आधार पर व्यक्ति विभिन्नता…..

समुदाय का प्रभाव बचपन से ही दिखता है कुछ बच्चे बहुत प्रभावी बात करते हैं कुछ बच्चे करने से कतराते हैं
जिन परिवार में अच्छी भाषा प्रयोग नहीं होते हैं उन परिवार में बच्चे निम्न स्तर के सोच के पाए जाते हैं। क्योंकि विद्यालय में अलग-अलग समुदाय से परिवार से बच्चे आते हैं तथा उनमें विभिन्न प्रकार के सोच , चीजों को करने का तरीका इत्यादि अलग-अलग प्रकार से होते हैं।

🍁व्यक्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता है…

व्यक्ति के आधार पर व्यक्तिक विभिन्नता हैं अपने अपने personality पर depend करता है हर बच्चे का अपना अपना व्यक्तित्व होता है उसकी व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति उनके व्यवहार को दर्शाती है।

व उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
बच्चा एक शिक्षक जैसा बनता है इसलिए व्यक्तिगत तौर पर एक शिक्षक को वैयक्तिक विभिन्नता को समझने की जरूरत है।

वैयक्तिक विभिन्नता के कारण….

(1) वंशानुक्रम –
अपने पूर्वजों से विरासत में मिला हुआ गुण जो हर बच्चे में अलग- अलग होती है उसके आधार पर व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

(2) वातावरण —
हर एक बच्चा अलग-अलग वातावरण से आते हैं जो बच्चा जिस वातावरण में पला बढ़ा है उन बच्चों में वैसे ही गुण विकसित होंगे। तथा इसके आधार पर व्यक्ति में विविधता होती है।

(3) परिपक्वता –
अगर हम विद्यालय की बात करें तो बच्चे की आयु अलग-अलग होती है तथा उन बच्चे में भी परिपक्वता आ जाती है अंतर सिर्फ इतना ही है कि कोई बच्चे में जल्दी और कोई बच्चे में देर से परिपक्वता आती है।

(4)जाति ,देश, प्रजाति —
सब बच्चे एक ही जाति, धर्म, संप्रदाय, प्रजाति के नहीं होते हैं मैं भी उन सभी में जाति, देश, प्रजाति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता होती है।

☘️🍂💐💐🙏Notes by- SRIRAM PANJIYARA🏵️🌹🌾💮🙏

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