💨🐥Date-8/05/2021🐥
💨🐥Batch-UPTET🐥
💨🐥Time 9:00@m🐥
🎉Topic-Different stages of Child Development🎉

🎊बाल विकास के विभिन्न चरण🎊
🎉(Different stages of Child Development)🎉
🌟शैशवावस्था(Infancy)

✨बाल्यावस्था(Childhood)

🔥किशोरावस्था(Adolescence)

🌟शैशवावस्था (Infancy)
☃️शैशवावस्था का अवस्था है जो जन्म के पश्चात प्रारंभ हो जाती है अर्थात बालक जब मां के गर्भ से बाहरी वातावरण में आ जाता है।
(After the birth of baby, Infancy stage started and it’s baby called infant.)

☃️शैशवावस्था को जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था बताई गई है।
(Infancy is the Basic and important stage of Child in their own life because in this stage if u more over control or instruct child So it’s good for their own life future.)
☃️शैशवावस्था महत्वपूर्ण अवस्था इसलिए बताई गई है, क्योंकि इस काल में शिशु का जितना अधिक निर्देशक और नियंत्रण किया जाता है, बच्चे के भावी जीवन की सफलता इसी पर निर्भर करती है।

☃️अर्थात बच्चों में हम जिस प्रकार के गुणों का विकास करेंगे बच्चा उसी के अनुरूप समाज में अंत:क्रिया करेगा।

🐦क्रो एवं क्रो के अनुसार 🐦
☃️उन्होंने कहा कि बीसवीं शताब्दी बालक की शताब्दी है, क्योंकि इस शताब्दी में बालक के विकास को लेकर विस्तृत और गहन अनुसंधान किए गए हैं और यह निष्कर्ष निकाला गया कि शैशवावस्था जीवन की महत्वपूर्ण अवस्था है।

🐣वैलेंटाइन के अनुसार🐣
☃️शैशवावस्था सीखने का आदर्श काल है।

🐤थार्नडाइक के अनुसार🐤
☃️3 से 6 वर्ष की आयु का बालक प्राय अर्द्ध स्वप्नों की अवस्था में रहता है।

🐦फ्राइड के अनुसार 🐦
☃️व्यक्ति को अपने भावी जीवन में जो कुछ भी बनना होता है वह 4 से 5 वर्ष की अवस्था में बन जाता हैं।

🐥वाटसन के अनुसार🐥
☃️शैशवावस्था में सीखने की गति और विकास की सीमा अवस्था से अधिक होती है।

🐣गैसल के अनुसार🐣
प्रथम 6 वर्ष में, बालक, बाद के 12 वर्ष का दुगना सीख जाता है।

🐦गुड एंड एन एफ के अनुसार🐦
☃️व्यक्ति का जितना भी मानसिक विकास होता है उसका आधार 3 वर्ष की आयु तक हो जाता है।
अर्थात मानसिक विकास का आधार (नींव) 3 वर्ष की उम्र तक तैयार हो जाती है।

✨शैशवावस्था की विशेषताएं निम्नलिखित हैं✨
🔥(Characteristics of Infancy)🔥
👀शैशवावस्था में शारीरिक विकास में तीव्रता होती है।

👀शैशवावस्था में मानसिक विकास में भी तीव्रता होती है।

👀शैशवावस्था को”सीखने का आदर्श काल”कहा जाता है।

👀शैशवावस्था में सीखने की प्रक्रिया में भी तीव्रता होती है।

👀शैशवास्था में बालक की कल्पनाओ में सजीवता होती है, अर्थात व निर्जीव वस्तु को भी सजीव मानकर उसके साथ सजीव जैसा व्यवहार करता है।

👀शैशवावस्था में बालक दूसरों पर निर्भर रहता है।

👀शैशवावस्था को आत्म प्रेम वा स्वमोह की अवस्था की कहते हैं।

👀शैशवावस्था में नैतिक गुणों का अभाव होता है।

👀शैशवावस्था मूल प्रवृत्ति पर आधारित होती है।

👀शैशवावस्था में शिशु काम शक्ति का प्रदर्शन करता है (जैसे÷हाथ या पैर का अंगूठा चूसना, स्तनपान करना इत्यादि)

👀शैशवास्था में सीखने की प्रक्रिया अनुकरण द्वारा होती है।

👀शैशवास्था में जिज्ञासा की प्रवृत्ति होती है।

👀शैशवावस्था में दोहराने की प्रवृत्ति होती है।

👀शैशवावस्था में बालक अंतर्मुखी व्यक्तित्व का होता है।

👀शैशवावस्था में शिशु संवेगो का प्रदर्शन करता है। ✨ बाल्यावस्था✨ ✨ Childhood✨

👀बाल्यावस्था में विकास की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और यह गति धीमी होना आवश्यक भी है क्योंकि मंद गति के कारण विकास में मजबूती आती है।

👀इस अवस्था को समूह प्रियता की अवस्था भी कहते हैं।

🎉🎉written by Shikhar Pandey 🐦🙏

🔆 बाल विकास की प्रमुख अवस्थाएं➖

📍 शैशवावस्था( Infancy)
📍 बाल्यावस्था( Childhood)
📍 किशोरावस्था (Adolescence)

❇️शैशवावस्था➖

⚜️ शैशवावस्था विकास क्रम की महत्वपूर्ण अवस्था है यह अवस्था शिशु जन्म के बाद प्रारंभ होती है।

⚜️ क्योंकि इस काल में शिशु का जितना ज्यादा निर्देशक और नियंत्रण किया जाता है बच्चों के भावी जीवन की सफलता उसी पर निर्भर करती है।

✨ क्रो एंड क्रो के अनुसार➖ बीसवीं शताब्दी बालक की शताब्दी है क्योंकि इस शताब्दी में बालक के विकास को लेकर व्यवस्थित और गहन संशोधन किए गए हैं निष्कर्ष निकला कि शैशवावस्था जीवन की महत्वपूर्ण अवस्था है।

✨ वैलेंटाइन के अनुसार➖ शैशवावस्था अवस्था सीखने का आदर्श काल है।

✨ थार्नडाइक के अनुसार➖ 3 से 6 वर्ष की आयु का बालक अर्द्ध स्वपनावस्था अवस्था में रहता है।

✨ फ्राइड के अनुसार➖ व्यक्ति को जो कुछ भी बना होता है 4 से 5 वर्षों में बन जाता है।

✨ वाटसन के अनुसार➖ शैशवावस्था में सीखने की गति और विकास की सीमा अन्य अवस्थाओं से अधिक होती है।

✨ गैसल के अनुसार ➖प्रथम 6 वर्ष बालक के बाद के 12 वर्षों का दुगना सीख जाता है।

✨ गुड एन एफ के अनुसार➖ व्यक्ति का जितना मानसिक विकास होता है उसका आधार 3 वर्ष की आयु तक हो जाता है।

🌀शैशवावस्था की विशेषताएं➖

⚜️शैशवावस्था में शिशु का शारीरिक विकास तीव्रता होती है

⚜️शैशवास्था मैं शिशु का मानसिक विकास तीव्रता से होता है।

⚜️शैशवास्था को सीखने का आधार काल कहते हैं।

⚜️शैशवास्था मैं सीखने की प्रक्रिया में तीव्रता आती है।

⚜️ शैशवावस्था में कल्पना में सजीवता होती है।

⚜️शैशवावस्था में शिशु दूसरों पर निर्भर रहता है।

⚜️शैशवावस्था मैं शिशु के अंदर आत्म प्रेम / स्वमोह की भावना होती है ।

⚜️शैशवास्था शिशु के अंदर नैतिक गुणों का अभाव होता है।
⚜️ शैशवास्था मैं शिशु अपने मूल प्रवृत्ति के आधार पर व्यवहार करता है।

⚜️शैशवावस्था शिशुओं के अंदर काम शक्ति का प्रदर्शन होता है।

⚜️शैशवावस्था मैं शिशु जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है।

⚜️शैशवावस्था मैं शिशु के अंदर दोहराने की प्रवृत्ति होती है।

⚜️शैशवावस्था मैं शिशु संवेगों का प्रदर्शन करता है।

❇️बाल्यावस्था➖

⚜️बाल्यावस्था में विकास की गति थोड़ी धीमी हो जाती है धीमी होना आवश्यक है क्योंकि मंद गति के कारण उसके विकास में मजबूती आती है।

⚜️ बाल्यावस्था को गैंग Age भी बोला जाता है।

✍🏻
Notes By”Vaishali Mishra”

🌼☘️ बाल विकास की प्रमुख अवस्थाएं☘️🌼

💫 शैशवावस्था( Infancy)
💫 बाल्यावस्था( Childhood)
💫 किशोरावस्था (Adolescence)

💫 शैशवावस्था➖

🔸 शैशवावस्था विकास क्रम की महत्वपूर्ण अवस्था है यह अवस्था शिशु जन्म के बाद प्रारंभ होती है।

🔸 क्योंकि इस काल में शिशु का जितना ज्यादा निर्देशक और नियंत्रण किया जाता है बच्चों के भावी जीवन की सफलता उसी पर निर्भर करती है।

☘️ क्रो एंड क्रो के अनुसार➖ बीसवीं शताब्दी बालक की शताब्दी है क्योंकि इस शताब्दी में बालक के विकास को लेकर व्यवस्थित और गहन संशोधन किए गए हैं निष्कर्ष निकला कि शैशवावस्था जीवन की महत्वपूर्ण अवस्था है।

🌼 वैलेंटाइन के अनुसार➖ शैशवावस्था अवस्था सीखने का आदर्श काल है।

☘️ थार्नडाइक के अनुसार➖ 3 से 6 वर्ष की आयु का बालक अर्द्ध स्वपनावस्था अवस्था में रहता है।

🌼 फ्राइड के अनुसार➖ व्यक्ति को जो कुछ भी बना होता है 4 से 5 वर्षों में बन जाता है।

☘️ वाटसन के अनुसार➖ शैशवावस्था में सीखने की गति और विकास की सीमा अन्य अवस्थाओं से अधिक होती है।

🌼 गैसल के अनुसार ➖प्रथम 6 वर्ष बालक के बाद के 12 वर्षों का दुगना सीख जाता है।

☘️ गुड एम एफ के अनुसार➖ व्यक्ति का जितना मानसिक विकास होता है उसका आधार 3 वर्ष की आयु तक हो जाता है।

🎉🎉 शैशवावस्था की विशेषताएं🎉🎉

🟣 शैशवावस्था में शिशु का शारीरिक विकास तीव्रता होती है

🟣शैशवास्था मैं शिशु का मानसिक विकास तीव्रता से होता है।

🟣शैशवास्था को सीखने का आधार काल कहते हैं।

🟣शैशवास्था मैं सीखने की प्रक्रिया में तीव्रता आती है।

🟣 शैशवावस्था में कल्पना में सजीवता होती है।

🟣 शैशवावस्था में शिशु दूसरों पर निर्भर रहता है।

🟣शैशवावस्था मैं शिशु के अंदर आत्म प्रेम / स्वमोह की भावना होती है ।

🟣शैशवास्था शिशु के अंदर नैतिक गुणों का अभाव होता है।

🟣 शैशवास्था मैं शिशु अपने मूल प्रवृत्ति के आधार पर व्यवहार करता है।

🟣 शैशवावस्था शिशुओं के अंदर काम शक्ति का प्रदर्शन होता है।

🟣शैशवावस्था मैं शिशु जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है।

🟣शैशवावस्था मैं शिशु के अंदर दोहराने की प्रवृत्ति होती है।

🟣शैशवावस्था मैं शिशु संवेगों का प्रदर्शन करता है।

💫 बाल्यावस्था➖

🟣बाल्यावस्था में विकास की गति थोड़ी धीमी हो जाती है धीमी होना आवश्यक है क्योंकि मंद गति के कारण उसके विकास में मजबूती आती है।

🟣 बाल्यावस्था को गैंग Age भी बोला जाता है।

✍🏻📚📚 Notes by…… Sakshi Sharma📚📚✍🏻

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