🔆चिंतन के विषय में स्पीयर मैन के नियम ➖

📍चिंतन जटिल मानसिक प्रक्रिया है।
📍चिंतन जटिल के साथ नियमित है।
📍ऐसी व्याख्या करने के लिए स्पीरमैन ने कुछ नियम प्रतिपादित किए

✨स्पीयर मैन के अनुसार➖
☄️1 संबंधों का पृथक्करण(separation of relationship)
☄️2 सह संबंधों का प्रथक्करण (separation of correlation)

🌀1 संबंधों का पृथक्करण➖

🔹चिंतन का प्रथम नियम है।
🔹चिंतन की प्रक्रिया में जब हम चिंतन करते हैं तो हमारे सामने अनेक वस्तु उपस्थित होते हैं तब हम उस वस्तु से कुछ संबंध जरूर स्थापित कर देते हैं इसे ही वास्तविक संबंध माना गया है।

🔹हम जिस चीज को अपनी नजरिया या दृष्टिकोण से देखते हैं वही हमारा उस वस्तु के साथ वास्तविक संबंध है और यही वस्तुओं के साथ स्थापित उचित संबंध है।

🔹स्पीयर मैन के अनुसार इन वास्तविक संबंध पर निम्नलिखित संबंधों का विशेष प्रभाव पड़ता है।
📍1 गुण
📍2 कालगत संबंध
📍3 स्थान गत संबंध
📍4 कार्य कारण संबंध
📍5 वस्तुगत संबंध
📍6 निर्माणात्मक संबंध
📍7 अन्य संबंध

❇️1 गुण (quality)➖

प्रत्येक वस्तु का अपना गुण होता है उस गुण के साथ उस वस्तु का विशिष्ट संबंध होता है।

जैसे रसगुल्ला का वास्तविक संबंध मीठा से है।
आइसक्रीम का संबंध ठंडा होने से।

⚜️2 कालगत संबंध (time relationship)➖

कुछ वस्तु या तथ्यों के बीच कालगत मतलब समय का संबंध होता है।
जैसे हमारी क्लास 8am पर होती है तो उस समय से हमारा संबंध है।
इस प्रकार कई कार्य ऐसे होते हैं जो हम अपने नियमित समय पर करते हैं तथा उस समय के साथ हमारा संबंध स्थापित हो जाता है।

⚜️3 स्थानगत संबंध (local relationship)➖
वस्तुओं के स्थानगत संबंध उन वस्तुओं के स्थान के संबंध के वजह से एक निश्चित चिंतन में शामिल होते हैं।

जैसे फूलो के बारे में बात करने से उसके स्थान अर्थात बगीचे का होना।
दवाइयों का मेडिकल स्टोर पर मिलना
मिठाइयों का हलवाई की दुकान पर मिलना

⚜️4 कार्य कारण संबंध (work casual relationship)➖

वस्तु और तथ्यों के बीच एक कार्य होता है तो दूसरा कारण।
जैसे भूख के लिए भोजन खाते हैं।
अर्थात भोजन खाना कार्य और भूख एक कारण है

⚜️5 वस्तुगत संबंध (object relationship)➖

दो या दो से अधिक वस्तु के बीच का आपसी संबंध वस्तुगत संबंध कहलाता है।
जैसे : ताले का उसकी चाबी के साथ संबंध
⚜️6 निर्माणात्मक संबंध (formative relationship)➖

कुछ वस्तुएं किसी अन्य सामग्री में बनी होती हैं इन वस्तुओं का संबंध सामग्री से है।
जो संबंध होता है उसे निर्माणात्मक संबंध कहते हैं।

जैसे मकान बनाने के लिए सीमेंट और पत्थर का होना ।
अर्थात मकान का संबंध सीमेंट, पत्थर से हैं।
लकड़ी की टेबल का संबंध लकड़ी से।

⚜️7 अन्य संबंध (other relationship)➖

कुछ मानसिक संबंध भी होते हैं
जिसे विचारात्मक संबंध भी कहते हैं।

विचारात्मक के आधार पर किसी वस्तु से निम्न संबंध होते हैं।
1 समानता का संबंध
2 समीपता का संबंध
3 नियोजन का संबंध

कई चीजों के प्रति संबंध इस प्रकार होते हैं कि हम उसे मानसिक रूप से संबंध स्थापित कर लेते हैं अर्थात उस वस्तु के बारे में जब बात की जाती है तो उसे हम अपने मानसिक रूप से किसी भी समानता के साथ जोड़कर या उसके समीप होकर उसका उसी प्रकार से नियोजन करते हैं।

🌀2 सह संबंधों का पृथक्करण (separation of correlation)

🔹कभी-कभी तथ्यों को संबंधों के संकेत के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है इस स्थिति में संबंधों का प्रथक्करण हो जाता है।

❇️चिंतन के सिद्धांत➖
मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं

📍1 केंद्रिय सिद्धांत (Central theory)
📍2 पेशीय सिद्धांत (muscles theory)

🌺1 केंद्रीय सिद्धांत➖

🔸यह मुख्यत: मानसिक क्रिया पर आधारित होता है।
🔸यह सिद्धांत मानता है कि चिंतन प्रक्रिया मस्तिष्क पर निर्भर करती है मस्तिष्क के केंद्र में जब तक चिंतन के आधार पर जटिल समस्या का निवारण करते हैं तब हम यह कह सकते हैं कि चिंतन के लिए मस्तिष्क की क्रियाएं बहुत आवश्यक होती हैं।

🌺2 पेशीय सिद्धांत➖

🔸यह मुख्यतः शारीरिक क्रियाओं पर आधारित होता है।
🔸चिंतन के समय शारीरिक क्रियाएं भी होती हैं व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक ने कहा है कि चिंतन हमारी मौन वाणी है चिंतन के समय स्वर यंत्र के साथ अन्य शारीरिक क्रियाएं भी होती हैं।

✍️ Notes By Vaishali Mishra

चिंतन के विषय में स्पीयर मैन के नियम

Law of spearman for thinking

✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨

चिंतन जटिल मानसिक प्रक्रिया है।
यह जटिल के साथ-साथ नियमित है। चिंतन की जटिल प्रक्रिया में विश्लेषण और संश्लेषण और इस प्रकार पृथक्करण और संगठन ये दोनों प्रक्रिया सम्मिलित है। संश्लेषण आत्मक दृष्टि से ज्ञान का संगठन होता है जिसका आधार स्मृति एवं कल्पनाएं हैं। तथा विश्लेषणात्मक दृष्टि से कल्पनाओं का आधार पृथक्करण है। इसे व्याख्या करने के लिए स्पीयरमैन कुछ नियम प्रतिपादित किए।

  1. संबंधों का पृथक्करण (spearman of relationship)
  2. सह – संबंधों का पृथक्करण(spearman of relationship)

1. संबंधों का पृथक्करण
(Spearman of relationship)

यह चिंतन का प्रथम नियम है। यह चिंतन बताता है कि चिंतन की प्रक्रिया में जब हमारे सामने अनेक वस्तु उपस्थित होता है तो हम उसमें कुछ संबंध जरूर स्थापित कर लेते हैं। इन संबंधों का आधार आकार, दूरी, व निकटता आदि होता है।
इसे ही वास्तविक संबंध माना गया है।

spearman के अनुसार वास्तविक संबंध पर निम्नलिखित का विशेष प्रभाव पड़ता है…..

1. गुण (quality)
✨✨✨✨✨

प्रत्येक वस्तु का अपना गुण होता है और उस गुण के साथ उस वस्तु का विशिष्ट संबंध होता है। जैसे- रसगुल्ला मीठा होता है मीठापन रसगुल्ले का विशेष गुण है इसी प्रकार नींबू खट्टा होता है खट्टापन नींबू का विशेष गुण है जिसको किसी भी दशा में पृथक्करण नहीं किया जा सकता।

2. कालगत संबंध (time relationship)

कालगत संबंध वस्तुओं के बीच समय का वास्तविक संबंध है।
उदाहरण-
यदि हमें ट्रेन से सफर करना है तो उस ट्रेन का प्लेटफार्म पर आने का एक निश्चित समय होता है। यदि ट्रेन का समय 9:40 है तो ट्रेन 9:40 पर ही प्रतिदिन आएगी और हमें 9:40 पर प्लेटफार्म पर उपस्थित रहना होगा।

3. स्थानगत संबंध (local relationship)

वस्तुओं के स्थानगत संबंध उन वस्तुओं के स्थान के संबंध के वजह से एक निश्चित चिंतन में शामिल होते हैं।
उदाहरणार्थ-
ताला और चाबी। ताला और चाबी दोनों वस्तुओं का संबंध विशेष होता है।

4. कार्य कारण संबंध (work causal relationship)

वस्तुओं और तथ्यों के बीच एक कार्य होता है तो दूसरा कारण होता है। प्रत्येक क्रिया किसी ना किसी कारणवश होती है। यदि वर्षा हो रही है तो आसमान में बादल अवश्य होगा। जिसमें बादल वर्षा का कारण है।इसी प्रकार किसी घटना का उसके कारण विशेष से वास्तविक संबंध कार्य कारण संबंध कहलाता है।

5. निर्माणात्मक संबंध (formative relationship)

कुछ वस्तुएं किसी अन्य सामग्री से बनी होती है इन वस्तुओं का संबंधित सामग्री से जो संबंध होता है उसे निर्माणात्मक संबंध कहते हैं। इस प्रकार निर्माणक एवं निर्मित वस्तु के मध्य एक अभिन्न तथा वास्तविक संबंध पाया जाता है। जैसे कुर्सी का लकड़ी से, घड़े का मिट्टी से वास्तविक संबंध।

अन्य संबंध (other relationship)

कुछ मानसिक संबंध भी होते हैं। इसे विचारात्मक संबंध भी कहते हैं। इनके निम्नलिखित आधार हो सकते हैं….

1.समानता का संबंध

इसके अंतर्गत विभिन्न वस्तुओं में गुणों की समानता के आधार पर चिंतन का जन्म होता है।

2.समीपता का संबंध

वस्तुओं के समीप रहने पर उसमें संबंध बोध होता है। जैसे- चांद व तारे।

3. नियोजनात्मक संबंध

कुछ संबंध नियोजन के आधार पर होते हैं। जैसे भाई और बहन के मध्य नियोजनात्मक संबंध है।

2. सह- संबंधों का पृथक्करण
(Spearman off co- relationship)
✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨

कभी-कभी तथ्यों को संबंधों के संकेत के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है इस स्थिति में संबंधों का पृथक्करण हो जाता है। जैसे-
मूली का रंग सफेद और गाजर का..?
उत्तर- लाल

चिंतन के सिद्धांत (theory of thinking)

  1. केंद्रीय सिद्धांत(Central principal)
  2. पेशीय सिद्धांत(muscles principal)

1. केंद्रीय सिद्धांत

चिंतन के क्षेत्र में केंद्रीय सिद्धांत सबसे पहला सिद्धांत है जिसका जन्म संरचनावाद तथा विकास गेस्टाल्टवाद से हुआ है। यह सिद्धांत मानता है कि चिंतन प्रक्रिया मस्तिष्क पर निर्भर करती है मस्तिष्क के केंद्र जब चिंतन के आधार पर जटिल समस्या का समाधान करते हैं तब यह कह सकते हैं कि चिंतन के लिए मस्तिष्क की क्रियाएं बहुत आवश्यक है।

2. पेशीय सिद्धांत

चिंतन में केवल मस्तिष्क ही नहीं बल्कि परिधीय संरचना की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परिधीय सिद्धांत में पेशीय क्रियाओं को प्रमुखता दी गई है। चिंतन के समय एक और स्वर यंत्र की क्रिया पर बल दिया जाता है तो दूसरी ओर अन्य शारीरिक क्रिया पर भी।

वाटसन के अनुसार, “चिंतन हमारी मौन वाणी है।”

Notes by Shreya Rai…..✍️🙏

By admin

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