🔆अभिप्रेरणा को विकसित करने वाली विधियां
(Methods to develop motivation)➖

✨फ्रेंक्सन के अनुसार प्रभावी अधिगम प्रभावी अभिप्रेरणा पर निर्भर करता है।

▪️अर्थात जितनी अच्छी प्रेरणा होगी उतना ही बेहतर सीखना होगा।

▪️यह विधियां निम्नानुसार है।
📍1 पुरस्कार और दंड
📍2 प्रशंसा और निंदा
📍3 सफलता और असफलता
📍4 प्रतियोगिता और सहयोग
📍5 प्रगति का ज्ञान
📍6 आकांक्षा का स्तर
📍7 नवीनता
📍8 रुचि
📍9 आवश्यकता का ज्ञान
📍10 कक्षा का वातावरण

❇️1 पुरस्कार और दंड (rewards and punishment)➖

🔹इसके अनुसार अच्छे कार्यों के लिए छात्रों को पुरस्कार दिया जाना चाहिए और गलत कार्यों के लिए दंड दिया जाना चाहिए।

🔹पुरस्कार और दंड दोनों का ही प्रयोग उचित परिस्थिति या उचित समय, उचित तरीके अर्थात सीमित मात्रा या संतुलित रूप में देना चाहिए।

🔹शिक्षण प्रक्रिया में छात्रों को अभिप्रेरित करने के लिए पुरस्कार एवं दंड प्रदान करना एक महत्वपूर्ण प्रविधि है छात्रों द्वारा सही एवम अच्छा कार्य किए जाने पर उन्हें किसी प्रकार का पुरस्कार प्रदान करना अथवा सम्मानजनक स्थिति प्रदान करने से प्रोत्साहन मिलता है तथा वह पुनः क्रियाशील होने के लिए प्रेरित होते हैं।

🔹इसके विपरीत छात्रों द्वारा गलत या अवांछनीय कार्य करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है या किसी अन्य प्रकार का दंड दिया जाता है तू भी भविष्य में इस प्रकार का कोई भी गलत कार्य ना करने का मन बना लेते हैं , और इस प्रकार से भी सही कार्य के प्रति प्रेरित होते हैं।
पुरस्कार और दंड दोनों से ही छात्रों की अभिप्रेरणा को बढ़ाया जा सकता है

❇️2 प्रशंसा और निंदा (praise and censure)➖

🔹छात्र के अच्छे कार्यों के लिए प्रशंसा और बुरे कार्यों के लिए निंदा होनी चाहिए।

🔹विद्यार्थियों को अभिप्रेरित करने में प्रशंसा अधिक प्रभावशाली होती है। प्रेरणा की यह सुदृढ़ता व्यक्तिगत विद्यार्थियों में भिन्न-भिन्न होती है। उचित अवसर पर ही प्रशंसा का प्रयोग करना चाहिए।

🔹अतः इस प्रविधि का प्रयोग आवश्यकता एवं परिस्थिति के अनुसार किया जाए तो इसका अनुकूल प्रभाव पड़ता है तथा शिक्षार्थी की अभिप्रेरणा में वृद्धि होती है।

❇️3 सफलता और असफलता (success and failure)➖

🔹सफलता मिलने पर व्यक्ति आगे बढ़ता है तथा असफल होने पर व्यक्ति का मनोबल टूट जाता है।

🔹सफलता की प्राप्ति पुनर्बलन का कार्य करती है जिससे व्यक्ति अधिक उत्साह और आत्मविश्वास के साथ पुनः कार्य को करने में अभिप्रेरित होता है। सफलता सभी को अभिप्रेरणा प्रदान करती हैं तथा इससे व्यक्ति अपनी योग्यता और क्षमता का आकलन करके आगे के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है।

🔹असफलता सफलता के विपरीत होती है किंतु यह यह भी अभिप्रेरक के रूप में कार्य करती है। कई छात्र असफलता को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं तथा अधिक परिश्रम और उत्साह के साथ सफलता को प्राप्त करने के लिए अभी प्रेरित होते हैं। इस प्रकार असफलता का भय भी अभी प्रेरक के रूप में कार्य करता है।

🔹हर प्राणी को सफलता असफलता दोनों ही जीवन में प्राप्त होती रहती है।

❇️4 प्रतियोगिता और सहयोग (competition and cooperation)➖

🔹प्रतियोगिता एक अच्छा प्रेरक है इस भावना से प्रेरित होकर व्यक्ति अपने कार्यों के लिए मेहनत करता है।

🔹लेकिन जब भी अधिकता में दिया जाता है तो बच्चों में जलन की भावना भी आ जाती है।

🔹बिना सहयोग की भावना के मनुष्य का कार्य चलना सामाजिक जीवन में संभव नहीं है।

🔹मनुष्य में अपने आप को एक दूसरे से श्रेष्ठ दिखलाने की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है इसीलिए कक्षा में छात्र अपने सहपाठी साथियों से अधिक अंक पाना चाहते हैं छात्रों की है भावनाओं से अधिक परिश्रम करने की अभी प्रेरणा प्रदान करती हैं अत: शिक्षक प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों को अधिक सीखने और अधिक परिश्रम करने के प्रति अभिप्रेरित कर सकते हैं।

🔹सामूहिक प्रतियोगिता में छात्रों में उचिया उच्चतम स्थान प्राप्त करने के साथ सहयोग की भावना भी जागृत होती है जिससे उन्हें मिलजुल कर कार्य करने का प्रोत्साहन मिलता है। तथा यह सामाजिक कौशल एवं लोकतांत्रिक भावना के विकास को भी प्रोत्साहन देता है।

❇️5 प्रगति का ज्ञान (knowledge of progress)➖

🔹प्रविधि का ज्ञान होने से व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने में प्रोत्साहन मिलता है।

🔹जैसे जब हम परीक्षाएं टेस्ट आदि में अच्छा करते हैं तो हमारे अंदर सकारात्मक सोच आने लगती है और हमारे तौर तरीका तथा किसी भी चीज को देखने का नजरिया सकारात्मक हो जाता है।

🔹छात्रों को अपनी प्रगति के बारे में जानकारी हो जाने पर उनकी कार्य की गति में तीव्रता और उसे करने के ढंग में दृढ़ता आ जाती है । तथा उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।

🔹छात्रों को उनकी प्रगति के बारे में जानकारी प्रदान करने के कई तरीके हो सकते हैं।
जैसे शिक्षक द्वारा उनकी प्रगति की निरंतर जानकारी प्रदान करते रहना, कई तरह की मासिक परीक्षाओं का आयोजन, तथा उनके परिणामों से छात्रों को अवगत कराना, प्रदत्त कार्य जैसे असाइनमेंट के लिए ग्रेट प्रदान करना, अन्य शैक्षणिक क्रियाकलाप जैसे निबंध प्रतियोगिता, पहेली इत्यादि का परिणाम बता कर छात्रों को अभिप्रेरित किया जा सकता है।

❇️6 आकांक्षा का स्तर(level of aspiration)➖

🔹बार-बार सफलता मिलने से व्यक्ति के अंदर आकांक्षा का स्तर बढ़ जाता है।

🔹व्यक्ति अपने जीवन में कुछ निर्धारित लक्ष्यों को पाने की लालसा रखता है तथा उन तक पहुंचने के लिए विभिन्न उपाय और प्रयास करता है यह व्यक्ति की आकांक्षाएं होती है तथा उनका उच्चतर स्तर ही व्यक्ति का आकांक्षा स्तर कहलाता है व्यक्ति का आकांक्षा स्तर जितना उच्च होता है जीवन में वह उतनी ही अधिक सफलता प्राप्त करता है। किंतु यह सफलता उन्हीं व्यक्तियों को प्राप्त होती है जो अपने लक्ष्य का निर्धारण वास्तविकता को देखते हुए करते हैं क्योंकि से प्राप्त करवाना व्यक्तियों की योग्यताओं क्षमता एवं वातावरण पर निर्भर करता है।

🔹आकांक्षा की प्रेरणा होने से व्यक्ति को सफलता की सीढ़ियां प्राप्त होने लगती है। इसी प्रकार शिक्षक भी छात्रों को अपना आकांक्षा स्तर ऊंचा बनाए रखने की प्रेरणा देता है तब भी अधिक क्रियाशील और प्रोत्साहित रहते हैं।

❇️7 नवीनता/ नयापन (novelty)➖
🔹यहां पर नवीनता से तात्पर्य ऐसे परिवर्तन या विविधता से है जिसका संबंध व्यक्ति के जीवन से होता है ।

🔹एक शिक्षक का कर्तव्य होता है कि वह बच्चों के अधिगम प्रक्रिया के प्रति रुचि को कम ना होने दें।

🔹जिसके लिए शिक्षक को नई शिक्षण विधियों एवं सहायक सामग्रियों , पाठ्यवस्तु शैक्षिक तकनीकों आदि का प्रयोग करना चाहिए।

🔹नवीनता व्यक्ति की इच्छाओं जिज्ञासाओ एवं अन्य आवश्यकताओं की संतुष्टि में सहायक होती हैं।

🔹किसी विषय की नवीन तथ्यों का उद्घाटन कर शिक्षक विद्यार्थियों में विषय के प्रति उत्सुकता और रूचि उत्पन्न कर सकता है । किसी भी कार्य में नवीनता का संचार होने से रुचि के भाव जागृत होते रहते हैं।

🔹क्योंकि जब भी हम किसी कार्य को करते हैं यदि उसे एक ही तरीके से करते हैं तो उस कार्य में हमारी रुचि नहीं रहती तथा उस कार्य को करने में ना ही हमें आनंद आता है और हम उस काम से ऊब जाते हैं

❇️8 रुचि (interest)➖

🔹रुचि से बढ़कर कुछ नहीं होता इसके अभाव में शिक्षक के सभी प्रयास विफल हैं।

🔹रुचि रही तो किसी भी चीज को शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात आपको सफलता दिलाने में साथ लग जाती है।

🔹विद्यार्थी जिस कार्य में अधिक रुचि लेता है, उसमें उसकी अधिक अभिप्रेरणा होगी और अभिप्रेरणा से वह कार्य शीघ्र एवं भली-भांति सीखा जा सकेगा। अतः शिक्षक को विद्यार्थियों की रुचियों को पहचान कर तद्नुरूप शिक्षण कार्य करना चाहिए।

❇️9 आवश्यकता का ज्ञान(knowledge of need) ➖

🔹प्रत्येक छात्र की कुछ आवश्यकताएं है।
🔹तथा कुछ मूल्य व आदर्श होते हैं।

🔹शिक्षक छात्रों की इन आवश्यकता तथा कुछ मूल्यों व आदर्शों को ध्यान में रखकर शिक्षण कार्य करता है तो बच्चे पूर्ण रूप से अभी प्रेरित रहते है।

जो दृष्टिकोण अभिक्षमता उद्दीपन का कार्य करता है।

❇️10 कक्षा कक्ष का वातावरण(environment of classroom)➖

🔹एक अभी प्रेरक होता है व्यक्तित्व को प्रभावित करता है।

🔹जब कक्षा का वातावरण बच्चों के लिए सहज होता है तो वह पूर्ण रूप से अभिप्रेरित रहते हैं।

🔹कक्षा का वातावरण शिक्षण के व्यवहार से तथा उस वातावरण में प्रेरणा और आनंद महसूस होना जरूरी है।

🔹कक्षा में बाह्य एवं आन्तरिक अभिप्रेरणा दोनों ही आवश्यक होती हैं। वाहय प्रेरणा का सम्बन्ध विद्यार्थियों के बाहय वातावरण से होता है, जबकि आन्तरिक प्रेरणा का सम्बन्ध उनकी रुचियों, अभिरुचियों, दृष्टिकोण और बुद्धि आदि से होता है।

✍️ Notes By Vaishali Mishra

Date-11/05/2021
Batch-SuperTet
Topic-Methods to develop Motivation

🐣फ्रेंडसन के अनुसार÷ प्रभावी अधिगम प्रभावी प्रेरणा पर निर्भर करता है।
अर्थात जितनी अच्छी प्रेरणा होती है उतना ही बेहतर सीखना होता है।

👀पुरस्कार एवं दंड👀
इसके अनुसार छात्रों को उनके अच्छे कार्य के लिए पुरस्कार दिया जाना चाहिए और गलत कार्यों के लिए दंड दिया जाना चाहिए;
पुरस्कार के द्वारा छात्रों में उत्साह बढ़ता है किंतु पुरस्कार उचित समय में उचित प्रकार से दिया जाए तभी वह प्रभावित होता है अन्यथा महत्वहीन हो जाता है,
इसी प्रकार दंड भी छात्रों में गलत कार्य को करने से रोकने के लिए एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा उन्हें उचित उचित मार्ग वाह सही प्रतिक्रिया करवा सकते हैं किंतु दंड का भी अपना एक उचित समय होता है अन्यथा वह भी महत्वहीन हो जाता है।
किसी एक छात्र को दंड व पुरस्कार प्रदान करने से वह अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित होते हैं वह गलत कार्य को करने से बचते हैं और वह अपने भावी जीवन में गलत कार्यों को करने से बचते हैं।

पुरस्कार एवं दंड के द्वारा बालक के भावी जीवन की नींव तैयार की जा सकती है अर्थात इसके द्वारा एक बेहतर वालों को और उच्च स्तर पर ले जाया जा सकता है वही अपराधी बालक व समस्यात्मक बालक को सही मार्ग पर लाया जा सकता है उनके जीवन को भी उच्च स्तर पर ले जाया जा सकता है।

👀प्रशंसा एवं निंदा👀
छात्र के अच्छे कार्य के लिए उसकी प्रशंसा होनी चाहिए और बुरे कार्य के लिए निंदा होनी चाहिए किंतु बालक की अत्यधिक प्रशंसा व अत्यधिक निंदा करने से वह भ्रमित और कुंठित हो सकता है जो बालक के अधिगम में बाधा उत्पन्न कर सकता है,वा बालक स्वयं को समाज से पृथक करने की कोशिश करने लगता है,अत:एक शिक्षक को प्रशंसा वा निंदा दोनों का प्रयोग उचित रूप से किया जाना चाहिए।

👀सफलता और असफलता👀
सफलता मिलने का मनोबल बढ़ता है और व्यक्ति आगे बढ़ता है, सफलता प्राप्त होने पर व्यक्ति का मनोबल टूट जाता है वहां से उत्साहित हो जाते हैं वह मनोबल टूट जाता है।
किंतु व्यक्तिगत सफलता से भी सकता है यदि उसे उसके कार्य को बेहतर करने के लिए अभिप्रेरित करें।

👀प्रतियोगिता एवं सहयोग👀
प्रतियोगिता एक अच्छा बेहतर प्रेरक है इस भावना से प्रेरित होकर बालक अपने कार्य को बेहतर करने के लिए मेहनत करता है किंतु कई बार प्रतियोगिता से बालकों में आपस में एक दूसरे के लिए जलन वा गलत भावना आ जाती है किंतु यदि स्वस्थ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए तो इससे बालक आपस में एक दूसरे से सीखते है वा अधिगम रुचिकर हो जाता है।

👀सहयोग👀
सहयोग की भावना को जाग्रत करना परम आवश्यक है इसके द्वारा एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहता है,वा एक साथ अनेक क्रिया कलापों में सहभागी होता है।

👀प्रगति का ज्ञान👀
बालक को उसकी प्रगति का ज्ञान होना चाहिए क्योंकि इसके द्वारा बालक को आगे बढ़ने में निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहता है क्योंकि इसके द्वारा एक व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में जिस प्रकार से मेहनत कर रहा है उसके फल स्वरुप वह किस स्तर पर पहुंच रहा है अर्थात उसके अंदर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगन आ जाती है वा उसको सकारात्मक पुनर्बलन मिलता है।

👀आकांक्षा का स्तर👀
विद्यार्थी को बारंबार सफलता मिलने से उसके अंदर आकांक्षा का स्तर बढ़ जाता है आत्मविश्वास की भावना बेहतर ढंग से जाग्रत हो जाती है जिसके द्वारा अन्य किसी भी कार्य को करने के लिए रहता है ईमानदारी, लगन रुचि और मेहनत वा सक्रियता के साथ कार्य को करता है।

👀नवीनता👀
एक शिक्षक का परम कर्तव्य है कि वह बच्चों के अधिगम प्रक्रिया के प्रति रुचि कम ना होने दें, बच्चों को यदि शिक्षक को बेहतर अधिगम कराना है तो उन्हें प्रत्येक बाल नए-नए तरीकों नई-नई शिक्षण विधियां नये विचारों एवं सहायक सामग्री का प्रयोग करते रहना चाहिए जिसके द्वारा कुछ बालक में उसके प्रति रुचि जाग्रत हो जाती है और वह विषय उसके लिए बोझिल, नीरस ना होकर रुचि पूर्ण हो जाता है।

👀रुचि👀
बालक के अधिगम को सफल बनाने के लिए एक विषय वस्तु बालक की रूचि का होना आवश्यक है क्योंकि रुचि से बढ़कर कुछ नहीं है, किसके अभाव में शिक्षक के द्वारा उस विषय वस्तु को प्रस्तुत करने के लिए गए प्रत्येक प्रयास विफल हो जाएंगे।

👀आवश्यकता👀
आवश्यता का ज्ञान प्रत्येक छात्र की अपनी आवश्यकता होती है उनका मूल होता आदर्श होते हैं, स्वयं का दृष्टिकोण होता है अभिक्षमता होती है तो यह सभी मिलकर प्रोत्साहन को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
अर्थात आवश्यकता एक महत्वपूर्ण मनोभाव है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी कार्य को करने के लिए अभिप्रेरित होता है।

👀कक्षा का वातावरण👀
कक्षा का वातावरण अच्छा अभिप्रेरक होता है, कक्षा का वातावरण बालक के सीखने पर वा अधिगम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है क्योंकि एक अच्छे वातावरण में एक बेहतर और सुगम अधिगम कराया जा सकता है और वास्तविक एवं सफल भी होता है।

written by Shikhar Pandey 🐦

Method to develop motivation
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फ्रेंडसन के अनुसार,

प्रभावी अधिगम, प्रभावी प्रेरणा पर निर्भर करते हैं। अर्थात्
जितनी अच्छी प्रेरणा होगी उतना ही बेहतर सीखना होगा।

1. पुरस्कार और दंड
✨✨✨✨✨✨

इसके अनुसार अच्छे कार्यों के लिए छात्रों को पुरस्कार दिया जाना चाहिए तथा गलत कार्यों के लिए दंड। पुरस्कार और दंड दोनों ही प्रेरणा के स्रोत हैं।
जब बच्चों के अच्छे कार्यों पर उनको पुरस्कार दिया जाता है तो वह ज्यादा उत्साहित होते हैं और उस कार्य को और अच्छे से करते हैं। वही यदि गलती करते हैं तो उन्हें दंड भी देना चाहिए जिससे वह भविष्य में उस गलती को दोबारा ना दोहराए और उसको सुधारे। दंड एक सकारात्मक प्रेरणा होती है इससे विद्यार्थियों का हित होता है।

2. प्रशंसा और निंदा
✨✨✨✨✨✨

छात्र के अच्छे कार्यों के लिए प्रशंसा होनी चाहिए और बुरे कार्यों के लिए निंदा होनी चाहिए। विद्यार्थियों को प्रेरित करने में प्रशंसा अधिक प्रभावशाली होती है शिक्षक को चाहिए कि उचित अवसर पर ही प्रशंसा का प्रयोग करें।और यदि बच्चा कोई गलत कार्य कर रहा है तो उसकी निंदा भी करनी चाहिए।

3. सफलता और असफलता
✨✨✨✨✨✨✨✨

सफलता मिलने पर व्यक्ति आगे बढ़ता है और असफल होने पर मनोबल टूट जाता है। हर प्राणी में सफलता और असफलता दोनों जीवन में प्राप्त होते हैं। शिक्षक को चाहिए कि समस्त कक्षा के लिए सफलता के लक्ष्य निर्धारित करें जिन की प्राप्ति सुगमता से हो सके। यदि छात्रों का लक्ष्य लाभप्रद है तो वह सफलता प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होता है और यदि असफलता की प्राप्ति होगी तो उसका मनोबल टूट जाता है। परंतु कई बार बच्चा अपनी असफलता से भी सीखता है अपनी भूल को सुधार कर, अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है।

4. प्रतियोगिता एवं सहयोग
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प्रतियोगिता एक अच्छा प्रेरक है। इस भावना से प्रेरित होकर व्यक्ति अपने कार्य को मेहनत से करता है। बिना सहयोग की भावना के मनुष्य का कार्य चलना सामाजिक जीवन में संभव नहीं है। बच्चों के सीखने के लिए शिक्षक प्रतियोगिता एवं सहयोग की मदद लेते हैं लेकिन शिक्षक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि प्रतियोगिता सकारात्मक हो और बच्चे एक दूसरे से सहयोग की भावना रखें ना की जलन की।

5. प्रगति का ज्ञान
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प्रगति का ज्ञान होने से व्यक्ति को आगे बढ़ने में निरंतर प्रोत्साहन मिलता है। बच्चों ने कितना सीखा है और कितना सीखना बाकि है उसका ज्ञान उसको होना चाहिए जिससे वह निरंतर मेहनत करके आगे बढ़ने की कोशिश करेगा।

6. आकांक्षा का स्तर
✨✨✨✨✨✨

बार-बार सफलता मिलने पर व्यक्ति की आकांक्षा का स्तर बढ़ जाता है।

7. नवीनता
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एक शिक्षक का कर्तव्य होता है कि वह बच्चों की अधिगम प्रक्रिया के प्रति रुचि को कम ना होने दें। नई शिक्षण विधियों एवं सहायक सामग्रियों का प्रयोग कर शिक्षक बच्चों में अधिगम के लिए रुचि विकसित कर सकता है।

8. रुचि
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रुचि से बढ़कर कुछ नहीं है। इसके अभाव में शिक्षक के सारे प्रयास विफल है और यदि रुचि है तो बच्चा सीखने के लिए उत्सुक रहता है। विद्यार्थी जिस कार्य में अधिक रुचि लेता है उसमें उसकी अधिक अभिप्रेरणा होगी और उस कार्य को शीघ्र एवं भली- भांति सिख सकेगा। शिक्षक को विद्यार्थियों की रुचियों को पहचान कर उसके अनुसार ही शिक्षण कार्य करना चाहिए।

9. आवश्यकता का ज्ञान
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प्रत्येक छात्र की कुछ आवश्यकता होती है। उनके कुछ मूल आदर्श होते हैं। प्रत्येक बच्चे का अपना दृष्टिकोण होता है। अभिप्रेरणा उद्दीपन का कार्य करता है। बिना आवश्यकता के बच्चे / व्यक्ति किसी भी विषय में ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता।
जैसे- भूख लगी तो भोजन को प्राप्त करने के लिए प्रयास करेंगे। यहां भूख, भोजन की आवश्यकता का ज्ञान है।

10. कक्षा का वातावरण
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कक्षा का वातावरण अच्छा अभिप्रेरक होता है। यह व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। शिक्षक के व्यवहार से प्रेरणा और आनंद महसूस होना जरूरी है।

कक्षा में बाह्य एवं आंतरिक अभिप्रेरणा दोनों ही आवश्यक होती है बाह्य अभिप्रेरणा का संबंध विद्यार्थियों के बाह्य वातावरण से होता है जबकि आंतरिक प्रेरणा का संबंध उनकी रूचि, अभिरुचि, दृष्टिकोण और बुद्धि आदि से होता है यह प्राकृतिक अभिप्रेरणा होती है। इसके लिए शिक्षण विधि की आवश्यकता का ज्ञान, आत्म प्रदर्शन का अवसर, योग्यता अनुसार देना चाहिए।

Notes by Shreya Rai…….✍️🙏

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