🥀🌷How children think and learn🌻🌿
🌾बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं🌺

🌻कोई भी बच्चा विरासत में मिली प्रवृत्ति के साथ पैदा होता है। मतलब बच्चों में अनुवांशिक का गुण अपने पूर्वजों से मिलता है।

🥀पर्यावरण में मुख्य रूप से व्यस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जैसे- बच्चा बड़ा होता है तो बच्चे का ज्ञान ( knowledge) भी बढ़ता जाता है।

🔥बच्चे के बड़े होने से निरीक्षण क्षमता ( observation power) बढ़ता है।

🌸जब बच्चा बड़ा होता है तो बच्चे को अलग-अलग अनुभव(experience ) का सामना करना पड़ता है।
और उसकी सीखने या समझने की क्षमता के अनुसार आगे बढ़ता है।

🌾 सोच ~~~~~~

🌻प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं। मतलब किसी दो बच्चे या दो से अधिक बच्चे का सोच एक जैसा नहीं हो सकता है।

🌿🌷बच्चों को चीजों के प्रति दृष्टिकोण अलग- अलग होता है। कुछ चीजें मिलती जुलती हो सकती है, लेकिन उनका नजरिया अलग होता है।

🌸🌾बच्चों में अवसरों और अनुभवों का अहम योगदान होता है जब हम बच्चों को अवसर देते हैं तो बच्चा अपने अनुभव से अपना सोच विकसित करते हैं।

🥀🔥जो बच्चा सोच रहा है उनके सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है वह बच्चा अपने भाषा से सोच का विकास करता है। सोचने की क्षमता विकसित होता है।

⭐भाषा से विचार या तथ्य व्यवस्थित हो जाते हैं कहा जाता है कि व्यक्ति के भाषा से उनके ज्ञान, विचार ,अनुभव का पता चलता है। अगर भाषा अच्छा नहीं हो तो उनका सोच विचार भी अच्छा नहीं हो सकता।

🌻🌺बच्चों में सोच से समस्या सुलझाने के कौशल विकसित होते हैं।

🌾🌸कार्य को पूरा करने की असमर्थता ~

🌷🌿इस अवस्था में किसी भी कारणवश बच्चे अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं तो एक शिक्षक की जिम्मेदारी है,
इसके लिए छात्र को प्रोत्साहित करें और कार्य पूरा करवाएं,
चाहे कार्य कितना भी कठिन क्यों ना हो।

🌸🌾विलंब या खराब समय प्रबंधन~

🌻🥀बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं है, कार्य अंतिम समय में करता है, देर से करते हैं।

शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदतों को प्रोत्साहित करें।

🙏🥀🌻Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌸🌺🙏

🌹🦚🌹How children think & learn🌹🦚🌹

🐣👨‍👨‍👧‍👧 बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं👨‍👨‍👧‍👧🐣

🌟 कोई भी बच्चा विरासत में मिली प्रकृत्ति एवं गुण के साथ पैदा होता है। जो कि उन्हें अपने माता-पिता और पूर्वजों द्वारा प्राप्त होता है।

🌟 पर्यावरण मुख्य रूप से व्यस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

💥 जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है।वैसे-वैसे उसका…..

🌺 सभी बच्चों में ज्ञान बढ़ते जाता है।
🌺सभी बालकों में निरीक्षण क्षमता बढ़ती है।
🌺सबमें अलग-अलग अनुभव का सामना करता है।
🌺उसकी सीखने और समझने की क्षमता के अनुसार आगे बढ़ता है।
🌺 प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं।
🌺उनका चिंताओं के प्रति दृष्टिकोण अलग-अलग होता है।
🌺 इसमें अवसरों और अनुभव का अहम योगदान होता है।
🌺उनके सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है।
🌺 भाषा से विचार तथ्य व्यवस्थित हो जाते हैं।
🌺समस्या सुलझाने के कौशल विकसित होती है।

💥💥 बच्चों के स्कूल प्रबंधन में सफलता प्राप्त करने में असफलता रहने का महत्वपूर्ण कारक💥💥

🔥 कार्य को पूरा करने की असमर्थता :-

🐣 इस अवस्था में किसी भी कारणवश बच्चे अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं तो एक शिक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वे छात्रों को प्रोत्साहित करें तथा उन्हें खुद से करके सीखने पर बल दे और कार्य को पूरा करना चाहे तो उन्हें प्रोत्साहित करें तथा मदद करें।

🔥 विलंब या खराब समय प्रबंधन :-

🐣 बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं होने के कारण कार्य अंतिम समय में करते हैं तथा विलंब से करते हैं जिसमें शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थी को कम उम्र से ही अच्छे से अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदतों के लिए प्रोत्साहित करें ताकि मैं आगे चलकर भी अपने कार्यों को सुव्यवस्थित रूप से तथा ससमय कर पाने में सक्षम हो सकें।

💥💥समाप्त 💥💥

🌹🌹Notes by :- Neha Kumari 😊

🔥🔥धन्यवाद् 🔥🔥

📖 📖 बालक कैसे सीखता व सोचता है 📖 📖

🌻🌿🌻 बालक का सीखना 🌻🌿🌻

👉🏻 विरासत में मिली प्रकृति के साथ प्रत्येक बालक पैदा होता है।
अर्थात बालक अपने माता-पिता एवं पूर्वजों से जो गुण प्राप्त करता है, वह उसमें सदेव भी रहते हैं। एवं यह गुण बालक के सीखने एवं सोचने दोनों को ही प्रभावित करते हैं। जिस प्रकार की प्रवृत्ति माता-पिता की एवं पूर्वजों की होगी, बालक अभी कुछ हद तक उसी प्रकार से सोचत आवश्यकता है।

👉🏻 पर्यावरण मुख्य रूप से वयस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।
कहने का अर्थ यह है, कि बालक के सीखने व सोचने को पर्यावरण काफी हद तक प्रोत्साहन व समर्थन करता है। बालक जो सीखता है, जैसा बालक सोचता है। वह सब उसके पर्यावरण से ही निश्चित हो जाता है, कि उसके आसपास का वातावरण किस प्रकार का है। वातावरण अच्छा नहीं होगा, तो बालक भी अच्छे विचारों को व्यक्त नहीं करेगा। क्योंकि विचारों को व्यक्त करना सोच पर निर्भर होता है और सोच वातावरण पर निर्भर होती है।

👉🏻 जैसे-जैसे बालक बड़ा होता जाता है तो उसमें कई प्रकार के परिवर्तन आते हैं वह चीजों को अपने तरीके से समझने लगता है जब बालक बड़ा हो जाता है तो इस के संदर्भ में कुछ मुख्य तथ्य निम्नलिखित है कि वह कैसे सीखता है~
● जब बालक बड़ा हो जाता है। तो उसका ध्यान भी बढ़ता है, क्योंकि वह चीजों को समझने लगता है, और उसके ज्ञान में वृद्धि होती जाती है।

● जब बालक बड़ा होता जाता है। तो वह चीजों को समझने लगता है। और उन चीजों का भी निरीक्षण करता है, कि कार्य किस प्रकार से किया जा रहा है। और निरीक्षण के बाद वह उन चीजों का अवलोकन करता है। निरीक्षण क्षमता होने पर ही बालक अनुकरण कर पाता है, और अनुकरण के माध्यम से वे चीजों को सीखने लगता है।

● बालक अलग-अलग अनुभवों का सामना करता है। वह कई चीजों को देखकर एवं उनको करके सीखता है। उससे उसे कई प्रकार के अनुभव प्राप्त होते हैं, और उनके सीखने समझने की क्षमता के अनुसार वह आगे बढ़ता जाता है। वह अपनी क्षमता के अनुसार अनुभव कर पाता है, और चीजों को समझने में सक्षम हो जाता है।

● कई बार बालक चीजों को अपनी रुचि एवं जिज्ञासा के आधार पर सीखता है। बालक की रूचि जिस कार्य को करने में होगी वह उसी कार्य को करने के लिए जिज्ञासु रहता है। इसीलिए हमें हर चीज को रुचिकर बनाया जाना चाहिए जिससे कि बालक चीजों को जल्दी सीख पाए।

● बालक चीजों को सीखने के लिए कल्पना करता है। कई बालकों में कल्पना करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। और वह चीजों को काल्पनिक तरीके से सीखते हैं, कई बार कल्पना के अभाव में बालक अपने ज्ञान को दूसरों के प्रति या दूसरों के सामने प्रस्तुत नहीं कर पाता है। क्योंकि उसमें काल्पनिक शक्ति का विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है, अर्थात बालक के सीखने में कल्पना का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

🌺🌿🌺बालक कैसे सोचता है 🌺🌿🌺

👉🏻 प्रत्येक बालक में सोचने की गति अलग-अलग विकसित होती है हर बाला के एक ही तरीके से नहीं सोच सकता है। क्योंकि हम जानते हैं, कि प्रत्येक बच्चे में व्यक्तिक विभिन्नता पाई जाती है। तो इसी के आधार पर हर बालक या हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता है, सब में कुछ ना कुछ भी बताएं पाई जाती है।

👉🏻 बच्चों का चीजों के प्रति दृष्टिकोण भी अलग अलग होता है वह हर चीजों के बारे में एक ही जैसे सोच प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं हर बालकों की सोच का आधार अलग अलग होता है वह ऐसी चीजों को अपने अपने नजरिए से देखते हैं और उसी के आधार पर अपने विचार को प्रस्तुत करते हैं।
इसमें अवसरों का अनुभवों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। बालक अपने अनुभवों को भी इसी के माध्यम से प्रस्तुत कर पाता है।

👉🏻 बच्चे के सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है, क्योंकि बालक जैसा बोलेगा वैसे ही उसके विचारों में उसकी प्रस्तुति दिखेगी। जैसी भाषा को वह अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करेगा उसके विचार भी वैसे ही होने लगेंगे, अर्थात इससे उसके विचारों मे भी परिवर्तन होगा।
बालक अपनी भाषा के योगदान से ही कई बार समस्याओं को सुलझाने के कौशल भी विकसित कर लेता है अतः हम कह सकते हैं कि बालक के समस्या को सुलझाने में व विचारों को प्रस्तुत करने में एवं समस्या को सुलझाने में भी योगदान होता है।

🌷🌿🌷 क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं 🌷🌿🌷

👉🏻 कार्य को पूरा करने की असमर्थता~ इस अवस्था में बालक किसी भी कारण वर्ष से अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाता है। कार्य को पूरा ना करने के बालक के कई कारण हो सकते हैं। जो कि उसके कार्य में रुकावट पैदा करते हैं जिनमें से कुछ मुख्य निम्नलिखित है~

■ अनुचित वातावरण,
■ पर्याप्त सहायक सामग्रियों का ना होना,
■ उपयुक्त मार्गदर्शक का ना होना,
■ समस्या समाधान के कौशल का पूर्ण रूप से विकसित ना होना,
इत्यादि सभी कारण बालक के कार्य को पूर्ण होने में बाधा उत्पन्न करते हैं।

एक शिक्षक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी होती है, कि हम उन छात्रों को प्रोत्साहन करें कि वह कार्य को पूरा करें । इसके लिए हमें किसी भी प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़े या फिर समस्या कितनी भी कठिन क्यों ना हो। हमें बच्चों को यह सिखाना होगा, कि हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसके लिए हमें उचित वातावरण एवं पर्याप्त सामग्रियां इत्यादि सभी का ध्यान शिक्षक होने के नाते रखना होगा।

👉🏻 विलंब या खराब समय प्रबंधन~ बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं होता है। वह कई बार कार्यों को अंतिम समय में करते हैं, अर्थात देर से करते हैं। वह कार्यों की महत्वपूर्णता को नहीं समझ पाते हैं।
शिक्षक की यह जिम्मेदारी होती है, कि वह बच्चों को कम उम्र से ही ऐसे गुणों को विकसित करें। जिससे कि वह गृह कार्य व अध्ययन की आदतों के लिए प्रोत्साहित हो सके।
हमें बच्चों को समय के महत्व को समझाना चाहिए, कि समय का उचित उपयोग करके ही हम हर प्रकार की समस्या का हल निकाल सकते हैं। अतः समय की उपयोगिता को हमें बच्चों को समझाई जाने चाहिए।

📚 📚 📒 समाप्त 📒 📚 📚

✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻

🙏🏻🌷🌿🌻🌺🙏🏻🌷🌿🌻🌺🙏🏻🌷🌿🌻🌺🙏🏻🌷🌿🌻

🌻🌹🌻 *how children think and learn* 🌻🌹🌻

📚🧠( *बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं*) 🧠📚

💫 प्रत्येक बच्चा विरासत में मिली प्रवृत्ति के साथ या गुण के साथ पैदा होता है जो उसे अपने माता-पिता या पूर्वजों द्वारा प्राप्त होता है।

💫 बच्चा उस समय से ही सीखने लगता है जब उसने जन्म लिया है उसकी बातचीत उस समय से बाहरी दुनिया में शुरू होती है।

💫 बच्चे में सीखने या सोचने की क्षमता अनुवांशिकता एवं वातावरण से विकसित होती है।

💫 पर्यावरण मुख्य रूप से वयस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अर्थात बच्चे में सोचने व सीखने की क्षमता में अनुवांशिकता एवं पर्यावरण का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

💫 जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं वैसे वैसे उनका………

🍃 ज्ञान भी बढ़ता जाता है।

🍃 निरीक्षण क्षमता भी बढ़ती जाती है।

अर्थात बच्चा अपने आसपास के वातावरण को या आस-पड़ोस, परिवार, के लोगों को देखकर , सुनकर अनुकरण करने लगता है यही अनुकरण की क्रिया सीखने की की प्रवृत्ति को विकसित करता है।

🌀 *उदाहरण*➖ उदाहरण स्वरूप हम ऐसा कह सकते हैं कि किसी भी बच्चे के सामने जब उसके घर में उसके माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों में लड़ाई होती है तो बच्चा उस लड़ाई का कारण तो नहीं जानता है लेकिन उसमें उस लड़ाई के कारण नकारात्मक harmones या नकारात्मक सोच विकसित हो जाती है। अर्थात कहने का तात्पर्य है कि बच्चा जो देखता है या समझता है उसी के आधार पर उसकी सोच भी विकसित हो जाती है।🌀

💫 प्रत्येक बच्चे में बड़े होने के साथ-साथ उनके ज्ञान, निरीक्षण क्षमता में वृद्धि होती है और वह अपने ज्ञान के कारण ही अलग-अलग अनुभवों का सामना करता है और उसके सीखने या समझने की क्षमता के अनुसार ही उन्हें आगे बढ़ाता है। अर्थात बच्चे अनुकरण करके अनुभवों के माध्यम से सीखते हैं।

💠 *बच्चे कैसे सोचते हैं*

💫 सोचना अथवा चिंतन करना एक प्रकार की ज्ञानात्मक प्रक्रिया होती है जो ज्ञान को संगठित करने में मुख्य भूमिका निभाती है।

💫 प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं। अर्थात प्रत्येक बच्चे में सीखने की क्षमता भिन्न-भिन्न होती है।

💫 प्रत्येक बच्चे का चीजों के प्रति भी दृष्टिकोण अलग अलग होता है।

💫 प्रत्येक बच्चे में चिंतन या सोचने में अवसरों और अनुभवों का अहम योगदान होता है अर्थात जब तक बच्चे को अवसर या अनुभव प्रदान नहीं किए जाएंगे तब तक उनमें चिंतन या सोचने की क्षमता विकसित नहीं होगी।

💫 प्रत्येक बच्चे के चिंतन या सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है। अर्थात बच्चे की जैसी सोच होती है वैसी ही उनकी भाषा होती है।

🌻 भाषा से विचार, तथ्य व्यवस्थित हो जाते हैं। अर्थात सामने वाले आदमी के भाषा को सुनकर ही हम सामने वाले के लिए विचार बना लेते हैं। अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि जैसे हमारे विचार होती है, वैसे ही हमारी भाषा होते हैं।

💫 इसी प्रकार प्रत्येक बच्चा समस्याओं, वस्तुओं आदि के विषय में चिंतन करता रहता है। यह चिंतन अनुभवों के माध्यम से होता है।

💫 बालक अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार वस्तुओं को छूकर या देखकर उनके बारे में अनुभव प्राप्त करता है धीरे-धीरे बालक में संप्रत्यय निर्माण होने लगता है और उस समस्या के प्रति चिंतन भी करने लगता है। जिससे बच्चे में समस्या सुलझाने के कौशल विकसित होते हैं।

😞 *क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं*😞

कुछ मूलभूत कारक होते हैं जिसके कारण बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं।

1️⃣ *कार्य को पूरा करने की असमर्थता*➖

💠कारण➖ ‌ ‌इस अवस्था में किसी भी कारणवश बच्चे अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते है । या किसी भी कार्य को करने में असमर्थ होते हैं।

💠 उपाय➖ इसके लिए एक शिक्षक की यह जिम्मेदारी होती है कि वे छात्रों को उनके कार्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करें ,जब तक कि वह पूरा ना हो जाए, चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों ना हो या कठिन क्यों ना हो।

अर्थात किसी भी बच्चे को कार्य उसके क्षमता या योग्यता के अनुसार ही देनी चाहिए यदि वह कार्य बच्चे की आवश्यकता के अनुसार नहीं एवं क्षमता से ऊपर होगा तो बच्चे स्कूल प्रदर्शन में भी असफल हो जाएंगे इसके लिए एक शिक्षक को बच्चे को वही कार्य दिया जाना चाहिए जो उनके योग्यता के अनुसार हो ।

2️⃣ *विलंब या खराब समय प्रबंधन*➖

‌‌ यह भी एक महत्वपूर्ण कारक है जिससे बालक स्कूल प्रदर्शन में असफल रहते हैं।
इस अवस्था में➖कारण

👉🏻 बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं होता है और

👉🏻 बच्चे कार्य अंतिम समय में करते हो या देर से करते हैं।

उपाय ➖ इसके लिए शिक्षकों को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थी को कम उम्र से ही अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदतों को प्रोत्साहित करें क्योंकि कुछ विद्यार्थियों को कार्यों को पूरा करने के अंतिम क्षण या अंतिम दिन पर कार्य करने की आदत होती है। एक शिक्षक को प्रत्येक बच्चे को यह बताना है कि सही समय और सही तरीके का प्रबंधन करें। जिससे वे आगे चलकर भी समय का सदुपयोग और अपने कार्यों को व्यवस्थित रूप से कर पाने में सक्षम या सफल हो सके।

💫💫 समाप्त💫💫

✍🏻✍🏻 Notes by manisha gupta✍🏻✍🏻

📚 How children think and learn ( बच्चें कैसे सोचते और सीखते हैं )📚

💫 सभी बच्चें अपनी विरासत में मिले गुणों और प्रवृत्तियो के पास पैदा होते हैं लेकिन पर्यावरण और मुख्य रूप से वयस्क, बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है , उस बच्चे का ज्ञान भी बढ़ता जाता है। वह अपने आस पास की चीजों का निरीक्षण करने लगता है , नए अनुभवों का सामना करता है और अपनी सीखने और समझने की क्षमता के आधार पर आगे बढ़ने की कोशिश करता है।

💠 प्रत्येक बच्चा एक अलग गति से विकसित होता है और उसका चीजों के प्रति अलग नजरिया होता है। अधिकतर बच्चे पुस्तकों में चित्रों को देखकर कहानियां सुनने की प्रवृत्ति रखते हैं। ये विभिन्नता बच्चों को विरासत में मिली प्रवृत्तियों, अवसरों और अनुभवों की वजह से हो सकती है। यह बच्चों के विचारों और तथ्यों को व्यवस्थित करने में मदद करता है और धीरे धीरे अपने विचारों को विकसित करने के बदले में समस्या के समाधान के कौशल को विकसित करता है।

🔰 बच्चें कैसे विद्यालय के प्रर्दशन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं।

✌️ इसके कारण निम्न हैं।

💠 कार्य को पूरा करने की असमर्थता ➖

इस अवस्था में किसी भी कारण से कोई भी बालक अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाता है तो वह असफल हो जाता है। एक शिक्षक की जिम्मेदारी होती है कि इसके लिए छात्र को प्रोत्साहित करें और कार्य पूरा कराये चाहें कार्य कठिन ही क्यो ना हो।

🎲 विलम्ब या खराब समय प्रबंधन ➖

बच्चें का समय प्रबंधन ठीक नहीं है या कार्य अन्तिम समय में करते हैं या देर से करते हैं। शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अच्छे ग्रहकार्य और अध्ययन की आदतों को प्रोत्साहित करें।

📝 Notes by ➖

✍️ Gudiya Chaudhary

🌺🌺🦚 बच्चे कैसे सोचते हैं और कैसे सीखते हैं🦚🌺🌺
(How children thinking and learning)

👉🏼 सोचना एक प्रकार की मानसिक प्रक्रिया है जो ज्ञान को संगठित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बालक अपने स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार वस्तुओं को देखकर छूकर उसके बारे में अनुभव प्राप्त करता है धीरे-धीरे बच्चों मैं प्रत्यय निर्माण होने लगता है

👉🏼 कोई भी बच्चा विरासत में मिली प्रवृत्ति के साथ पैदा होता है

👉🏼पर्यावरण प्रमुख रूप से वयस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

👉🏼 जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है उसका ज्ञान बढ़ता जाता है उसकी निरीक्षण क्षमता बढ़ती है और अलग-अलग अनुभव का सामना करता है और उसको सीखता है समझने की क्षमता के अनुसार आगे बढ़ता है

👉🏼 प्रत्येक बच्चे अलग गति से विकसित होते हैं

👉🏼 उनका चीजों के प्रति दृष्टिकोण अलग अलग होता है उनमें अवसरों और अनुभव का आदान योगदान है

👉🏼 उनके सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है भाषा के विचार तथ्य व्यवस्थित हो जाता है

👉🏼 समस्या सुलझाने के कौशल विकसित होते हैं

🌺🌺 क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं🌺🌺

🦚 इसके कारण निम्र है🦚

🌺 कार्य को पूरा करने में असमर्थतता-

इस अवस्था में किसी भी कारणवश बच्चे अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं एक शिक्षक की जिम्मेदारी होती है की इसके लिए छात्र को प्रोत्साहित करें और कार्य पूरा करवाएं चाहे कार्य कठिन ही क्यों न हो

🌺 विलंम्ब या खराब समय प्रबंधन –
बच्चे का समय प्रबंधन ठीक ना होने से उसका कार्य अंतिम समय तक पूरा नहीं हो पाता शिक्षक पर चाहिए कि विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदत को प्रोत्साहित करें

🖊️🖊️📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma🖊️🖊️

⭐✨⭐ बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं⭐✨⭐

सोचना or अनुभव करना मानसिक प्रक्रिया है जिससे बालक सीखते जाते हैं

✍🏻 कोई भी बच्चा विरासत में मिली प्रवृत्ति या गुण के साथ पैदा होता है बच्चा अनुवांशिकता के कारण भी सीखता है उनकी प्रवृत्ति या गुण जिस प्रकार के होते हैं उसी प्रकार से सीखते हैं

✍🏻 पर्यावरण मुख्य रूप से वयस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

✍🏻 जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है उसका ज्ञान बढ़ता है- /
जैसे जैसे बच्चों का विकास होता जाता है वैसे वैसे बच्चा अनुकरण के द्वारा सीखता जाता है और उसका ज्ञान का बढ़ता जाता है

✍🏻 निरीक्षण क्षमता बढ़ती है-/ समय और उम्र के साथ साथ बच्चों की निरीक्षण क्षमता भी बढ़ती जाती है वह किसी भी वस्तु निरीक्षण करके सीख सकते हैं

✍🏻अलग अलग अनुभव का सामना करता है-/
और उसकी सीखने समझने की क्षमता के अनुसार आगे बढ़ता है जैसे जैसे उसे ज्ञान हो जाता है चीजों को निरीक्षण करता है अनुभव करके देखता है अनुभवों से सीखता है तो बच्चे की सीखने की समझने की क्षमता में वृद्धि होती है
👉🏻 प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं -/व्यक्तिगत भिन्नता के कारण प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं सभी का विकास एक समान नहीं होता

👉🏻 उनका चित्रों के प्रति दृष्टिकोण अलग अलग होता है-/
प्रत्येक बच्चे का चित्रों के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण होता है किसी भी चित्र के बारे में हर एक बच्चे की अलग-अलग धारणाएं होते हैं

👉🏻 इनमें अवसरों और अनुभवों का अहम योगदान होता है-/
बच्चों को कई अवसर मिलते हैं जिसमें वह अनुभव करके बहुत कुछ सीख लेते हैं

👉🏻 उनके सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है बालक जिस प्रकार की भाषा का उपयोग करते हैं उसी के आधार पर उनकी विचारधारा होती है
👉🏻 भाषा से विचार /तथ्य व्यवस्थित हो जाते हैं
बच्चों में भाषा से विचार व्यवस्थित हो जाते हैं बच्चे जैसी भाषा बोलते हैं उसी के अनुकूल उनके विचार हो जाते हैं
👉🏻 समस्या सुलझाने के कौशल विकसित हो जाते हैं बच्चा स्वयं अपने बुद्धि के अनुसार समस्या का समाधान कर सकता है

✨ क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं✨

👉🏻 कार्य को पूरा करने की असमर्थता-/
इस अवस्था में किसी भी कारणवश बच्चे अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते हैं एक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि इसके लिए छात्र को प्रोत्साहित करें और कार्य पूरा करवाएं चाहे वह कार्य कठिन ही क्यों ना हो

👉🏻 विलंब या खराब समय प्रबंधन-/
बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं है कार्य अंतिम समय में करते हैं देर से करते हैं
शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदतों को प्रोत्साहित करें !

✍🏻ritu yogi✍🏻

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

🌷🌷🧠*बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं* 🧠🌷🌷

🌲🌲 *सीखना* 🌲🌲

👉प्रत्येक बच्चा विरासत / पूर्वजों से मिली प्रवृत्ति / गुण के साथ पैदा होता है।
बच्चों में अपने पूर्वजों, माता – पिता से कुछ विशेष गुण आते हैं। अतः बच्चा अपने इन्हीं पारिवारिक गुणों से भी बहुत कुछ सीखता है जो उसमें जीवन पर्यंत चलता है।

👉बच्चे के आसपास का पर्यावरण , मुख्य रूप से वयस्क बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बच्चा अपने आसपास के वातावरण, अपने से बड़े लोगों के क्रियाकलापों को देखकर, स्वयं अनुकरण करके भी सीखता है।

👉जैसे – जैसे बच्चा बड़ा होता है बच्चे का ज्ञान ही बढ़ता जाता है और बच्चा चीजों का निरीक्षण करने लगता है। “निरीक्षण क्षमता बढ़ती है।” बच्चा अलग अलग अनुभव का सामना करता है।

👉और बच्चा अपनी सीखने / समझने की क्षमता के अनुसार आगे बढ़ता है।
बच्चा जब कुछ देखता है, अनुकरण करता है तो वह हर चीज को सीखता , समझता है इस प्रकार उसमें सीखने, समझने की क्षमताएँ भी बढ़ती जाती हैं।

*🤔🤔 सोचना* 🤔🤔

👉प्रत्येक बच्चे अलग-अलग गति से विकसित होते हैं।
प्रत्येक बच्चे में वैयक्तिक भिन्नता पायी जाती है जिसके आधार पर उनके सोचने की गति का विकास भी भिन्न होता है।

👉उनका चीजों के प्रति दृष्टिकोण अलग अलग होता है।
हर बच्चा भिन्न होने के कारण उनका चीजों, स्थितियों के प्रति द्रष्टिकोण भी भिन्न होता है।

👉इसमें अवसरों और अनुभवों का भी अहम योगदान होता है।
अर्थात बच्चा किस अवसर में है किसी स्थिती में है और बो उस समय कैसा सोच रहा है , अतः अनुभव के आधार पर भी उसकी सोच विकसित होती है।

👉उनके सोचने में भाषा का अत्यंत योगदान होता है।
अर्थात बच्चे जैसी भाषा सुनते , अपनी दिनचर्या में बोलते हैं , उनकी सोच भी वैसी ही बनती है।

👉भाषा से विचार / तथ्य व्यवस्थित हो जाते हैं।
हर बच्चा अपनी भाषा से ही सोचता , विचारता है और इसी आधार पर अपने तथ्यों को व्यवस्थित करता है।

👉समस्या सुलझाने के कौशल विकसित होते हैं।
जब बच्चा अपनी स्थिती के अनुसार सोचता है तो वह उनमें अपनी समस्याओं को सुलझाने का विकास होता है।

🌷*क्यों और कैसे बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं :-* 🌷

**_1. 🌺 कार्य को पूरा करने की* **असमर्थता* :-🌺_*

👉इस अवस्था* में बच्चे किसी भी कारणवश अपने कार्यों को पूरा नहीं कर पाते हैं।

अतः एक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि इसके लिए छात्रों को प्रोत्साहित करें और कार्य पूरा करवाएं चाहे कार्य कठिन ही क्यों ना हो।

*2.🌺 विलंब या खराब समय *प्रबंधन :-* 🌺
*
👉बच्चे का समय प्रबंधन ठीक नहीं है ।

👉कार्य अंतिम समय में करते हैं ।

👉देर से करते हैं ।

अतः इस समय शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अच्छे गृह कार्य और अध्ययन की आदतों को प्रोत्साहित करें।

🌺 ✒️ Notes by – जूही श्रीवास्तव ✒️🌺

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