: 📚📚 बच्चे विद्यालय के प्रर्दशन में सफलता प्राप्त करने में कैसे असफल रहते हैं 📚📚

✌️ इसके कई कारण हैं

💠 आत्मविश्वास की कमी ➖
आत्मविश्वास की कमियां विफलता का डर एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन से रोक सकती है नए कौशल हमें हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है।

💠 खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता ➖
प्रत्येक बच्चे को स्कूल में प्रवेश करने से पहले दिन से ही बच्चों को यह सिखाया जाना चाहिए की अपनी पढ़ाई गृह कार्य या अन्य कार्य के लिए मित्रों या दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद करना चाहिए।

💠इच्छा और प्रेरणा की कमी ➖
सक्षम होते हुए भी इच्छा या प्रेरणा मैं कमी के कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं काम का आनंद नहीं लेते हैं फिर कार्य असफल हो जाता है

💠 पढ़ने या समझने की खराब स्थिति ➖
अगर एक बच्चा सामान्यतः पढ़ने के कार्य में प्रयुक्त होने वाले भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ हो तो तेज दिमाग के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टता को नहीं पा सकते हैं।

💠 माता पिता की भागीदारी में कमी ➖
माता-पिता की भागीदारी बच्चों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है कम उम्र के दौरान माता पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

💠 अनुचित संगठनात्मक कौशल ➖
बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में कु प्रबंध या कुसंगठित है तो यह बच्चे के सीखने की गति को अव्यवस्थित करते हैं।

💠 अन्य कारक➖

साथियों का दबाव

बहुत ज्यादा संरक्षण में रखना

माता-पिता की बड़ी उम्मीदें

सामाजिक स्तर पर परेशानी

किसी भी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

🔆 *क्यों और कैसे बचे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं—*

⚜️ आत्मविश्वास की कमी:-
आत्मविश्वास की कमी के कारण बच्चे भी सफलता का डर महसूस करते हैं उनके कौशल और क्षमता गठन को रोक देती है जिससे वह नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। कार्य को करने के लिए बच्चे में धैर्य बहुत जरूरी है धैर्य अगर नहीं रह पाएंगे तो बच्चे उस कार्य को नहीं कर पाएंगे। बहुत से ऐसे बच्चे होते हैं जो किसी कार्य को जल्दबाजी में करना चाहते है क्योंकि उनमें धैर्य की कमी होती है।

⚜️ खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीय —
प्रत्येक बच्चे को स्कूल में प्रवेश करने से पहले दिन से ही यह सिखाना चाहिए कि बच्चे अपने पढ़ाई गृह कार्य अन्य कार्य के लिए मित्रों या दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद करना चाहिए। बच्चे को अपना काम स्वयं करना चाहिए किसी पर आश्रित नहीं होना चाहिए अगर किसी पर आश्रित रहेंगे तो हम उन्हीं पर बुरी तरीके से आश्रीत हो जाएंगे इसलिए हमें खुद से कार्य करने चाहिए खुद पर कार्य करने से हमारे अंदर आत्मविश्वास भी उत्पन्न होती है किसी कार्य करने के लिए उत्सुक भी होते हैं।

⚜️ इच्छा और प्रेरणा की कमी—
बच्चे किसी कार्य को करने में रुचि नहीं लेते हैं तो कार्य करने में उन्हें आनंद भी नहीं आता है अगर वह किसी कार्य को करने में रुचि लेते हैं तभी वह किसी कार्य में आनंद भी ले पाते हैं सक्षम होते हुए भी इच्छा या फिर ना में कमी के कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं उन्हें काम में आनंद नहीं आता है फिर उनका कार्य सफल नही हो पाता है।

⚜️ पढ़ने या समझने की खराब स्थिति—
अगर एक बच्चा समांतर पढ़ने में कार्य में प्रयुक्त होने वाले भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ हो तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टा को नहीं समझ सकते हैं इसलिए बच्चे को गृह कार्य उतना ही देना चाहिए जिससे वह पढ़ने मे उनकी खराब स्थिति ना बने।

⚜️ माता-पिता की भागीदारी में कमी—
माता-पिता की भागीदारी भी बच्चों के अधीन में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सबसे ज्यादा बच्चे अपने माता-पिता के पास ही समय गुजारते हैं कम उम्र के दौरान ही माता पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है माता-पिता को बचपन में ही बच्चे को अच्छे ज्ञान बताने चाहिए उन्हें कार्य में रुचि उत्पन्न कर आनी चाहिए जिससे बच्चे को कार्य करने में जिज्ञासा उत्पन्न हो उन्हें भारी ना लगे।

⚜️ अनुचित संगठनात्मक कौशल—
बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में खूब प्रबंध या को संगठित हो तो यह बच्चे के सीखने की गति को अवस्थित करते हैं इसलिए बच्चे को अच्छे वातावरण उपलब्ध करवाना चाहिए।

🔆 अन्य कारक —
साथियों का दबाव— बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने का कारण उनके साथियों का दबाव भी है उनके साथी उन्हें स्कूल में बहुत परेशान करते हैं जिससे वह अपने कार्य को सही तरीके से नहीं कर पाते हैं।

⚜️ उसमें ज्यादा संरक्षण में रखना- बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के कारण उनमें ज्यादातर संरक्षण में रखना भी होता है।

⚜️ माता-पिता की बड़ी उम्मीदें— जैसे माता-पिता की बहुत बड़ी उम्मीदें पहले से ही होती है जिसके कारण है बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं इसलिए हमें बच्चे से उतनी ही उम्मीद रखनी चाहिए जितनी वह क्षमता के अनुसार हो।

⚜️ सामाजिक स्तर पर परेशानी— बच्चों को स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं करना सामाजिक स्तर पर परेशानी भी होती है कई बच्चे ऐसे होते हैं जो समाज में समायोजन नहीं कर पाते हैं।

⚜️ किसी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप— बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन इसलिए नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनके दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप ज्यादा होती है।

Notes By:-Neha Roy 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🌷🌷 *क्यों और कैसे बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं 🌷* 🌷

3. 🌺 आत्मविश्वास की कमी. :-*

आत्मविश्वास की कमी या डर, एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन से रोक सकती है , तो नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है।
अर्थात बच्चों में जब स्वयं पर ही विश्वास नहीं होता है तो उनमें डर बना रहता है कि कहीं हम असफल तो नहीं हो जायेंगे उनका यही डर और क्षीण आत्मविश्वास बच्चों के शैक्षिक क्षेत्र में असफलता का कारण बनता है। अतः अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों में धैर्य , आत्मविश्वास और होंसला बढ़ाना चाहिये।

*4. 🌺खुद से ज्यादा दूसरे पर विश्वसनीयता। :-*

प्रत्येक बच्चे को विद्यालय में प्रवेश करने के पहले दिन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि अपनी पढ़ाई , अपने गृह कार्य या अन्य कार्यों के लिए मित्रों परिवार या दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय खुद करना चाहिए।
बच्चे अपने कार्य स्वयं से न करके बल्कि दूसरों पर निर्भर रहते हैं जो कि उनकी असफलता का कारण बनता है।अतः बच्चों में स्वयं से जिम्मेदारी पूर्वक अपने कार्य पूरा करने की प्रवृत्ति जगानी चाहिये।

*5. 🌺इच्छा और प्रेरणा की कमी :-*

सक्षम होते हुए भी इच्छा या प्रेरणा में कमी के कारण बच्चे अपने कार्यों में दिलचस्पी नहीं दिखाते , काम का आनंद नहीं लेते , फिर कार्य में असफल हो जाते हैं।
बच्चे कर सकते हैं लेकिन यदि उनमें कोई भी कार्य करने की इच्छा नहीं है या बे कार्यों के प्रति प्रेरित नहीं होंगे तो असफल होंगे इसीलिए बच्चों में कार्यों के प्रति दिलचस्पी, इच्छा और प्रेरणा का विकास करते रहना चाहिए।

*6. 🌺पढ़ने और समझने की खराब स्थिति :-*

अगर एक बच्चा सामान्यतः पढ़ने के कार्यों में प्रयुक्त होने वाली भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ है तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टता को नहीं पा सकते हैं।
उत्कृष्ट (Excellent) बच्चा भी गलत भाषा या वातावरण के प्रभाव से शैक्षिक रूप से disappointed विचलित हो जाता है और असफल हो जाता है, अतः बच्चे की सफलता के लिए उचित भाषा और वातावरण प्रदान करना चाहिये।

*7. 🌺माता-पिता की भागीदारी में कमी. :-*

माता-पिता की भागीदारी बच्चों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है एवं कम उम्र के दौरान भी माता पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
अतः बच्चे अपने माता पिता और परिवार से सबसे पहले सीखते हैं इसीलिए माता पिता और परिवार की बच्चे के शैक्षिक सफलता में सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

*8. 🌺अनुचित संगठनात्मक कौशल :-*

बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में यदि कुसंबद्धता या कुसंगठितता है तो यह बच्चे की सीखने की गति को आव्यवस्थित करते हैं।
अतः बच्चों के दैनिक जीवन में समयबद्धता और सुव्यवस्थित कार्य करने की आदत होगी तो प्रत्येक बच्चा सफल होता है।

*9. 🌺अन्य कारक :-*

👉 साथियों का दबाव
👉 बहुत ज्यादा संरक्षण (अनुशासन) में रखना
👉 माता पिता के बड़ी उम्मीदें (अपेक्षाएं )
👉 सामाजिक स्तर पर परेशानी
👉 किसी दूसरे के द्वारा निरंतर हस्तक्षेप।

*🌺✒️Notes by- जूही श्रीवास्तव*✒️🌺

🔆 क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में असफल रहते हैं 🔆

🎯 आत्मविश्वास की कमी ➖

यदि बच्चे के आत्मविश्वास में कमी है तो बच्चे की असफलता की ज्यादा अवसर होगें |
बच्चे में यदि विफलता का डर उत्पन्न हो गया तो वह छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन करने से क्षमता गठन करने से रोक सकती है क्योंकि डर एक ऐसी चीज है जिसको बच्चे ने खुद क्रिएट किया है यह अर्जित है जन्मजात नहीं है डर को दूर भी किया जा सकता है |
इसके लिए नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है यदि धैर्य है तो इंसान कभी हार नहीं सकता है |

🎯 खुद से ज्यादा दूसरों पर आत्मविश्वास ➖

आज के युग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह दूसरों पर विश्वास करता है और यही असफलता का सबसे बड़ा कारण है इसलिए बच्चे को स्कूल के पहले दिन से यह सिखाना चाहिए कि दूसरों पर विश्वास कभी ना करें चाहे वह उसका दोस्त, सहपाठी ,शिक्षक, परिवार या उसके माता-पिता में से कोई भी हो खुद पर विश्वास करना सीखें |

अर्थात प्रत्येक बच्चे को स्कूल में प्रवेश करने के पहले दिन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि अपनी पढ़ाई के लिए ,गृह कार्य के लिए या अन्य कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय खुद करना चाहिए |

🎯 इच्छा और प्रेरणा की कमी ➖

यदि किसी कार्य की आवश्यकता है तो उस आवश्यकता को पूरा करने के लिए रुचि और अभिप्रेरणा की आवश्यकता होती है और यदि प्रेरणा और इच्छा नहीं है तो आवश्यकता पूरी नहीं हो सकती |

अर्थात सक्षम होते हुए भी इच्छा अभिप्रेरणा में कमी के कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते काम या आनंद नहीं लेते है और असफल हो जाते हैं |

🎯 पढने या समझने की खराब स्थिति ➖

यदि बच्चे सामने जो पढ़ाई कराई जाती है वह ठीक नहीं है और पढ़ाई में प्रयोग होने वाली भाषा ठीक नहीं है और वह उस भाषा को समझने में असमर्थ है तो बच्चा प्रतिभाशाली होने के बाद भी नहीं समझ पाएगा और वह पीछे हो सकता है |
अर्थात अगर एक बच्चा सामान्यतः पढ़ने के कार्य में प्रयुक्त होने वाले भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ है तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टता को नहीं पा सकते हैं |

🎯 माता-पिता की भागीदारी में कमी ➖

माता-पिता की भागीदारी बच्चे के अध्ययन में बहुत अधिक प्रभाव डालती है, बच्चे के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है कम उम्र के दौरान माता-पिता की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो बच्चे को तथ्य सोचने या सोचने समझने के लिए उपयोगी साबित हो सकती है |

🎯 अनुचित संगठनात्मक कौशल ➖

बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में कुप्रबंध या कुसंगठित है तो उससे बच्चे की सीखने की गति अव्यवस्थित हो सकती हैं |

क्योंकि यदि बच्चा पढ़ने में स्वयं को कुसमायोजित या कुप्रबंधित समझता है तो उसके सीखने में एक बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं |

🎯 अन्य कारक ➖

इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे ➖
1) साथियों के दबाव के कारण भी सीखने का एक मेजर फैक्टर है यदि बच्चे के सीखने में साथियों का दबाव है तो बच्चे उससे कुछ भी नहीं कर पाते हैं और भी पीछे हो जाते हैं |

2) बच्चों को बहुत ज्यादा संरक्षण में रखना जो कि ठीक नहीं है इससे बच्चे के सीखने में बाधा उत्पन्न होती है और वे सीख नहीं पाते हैं या हम कह सकते हैं कि उनकी सीखने पठार आ जाता है |

3) माता-पिता की बड़ी उम्मीदें माता-पिता की सीखने में बड़ी उम्मीदें बच्चे के सीखने में है बाधा उत्पन्न करती है माता-पिता का सबसे बड़ा कारण है कि वे बच्चों से ज्यादा उम्मीद करते हैं कि अव्वल दर्जे से पास होगें |

4) सामाजिक स्तर पर परेशानी बच्चे की असफलता का कारण उसका सामाजिक स्तर है सामाजिक का परेशानी जिससे बच्चे के आत्मविश्वास में कमी हो जाती है और वह दुनिया को अपने नजरिये से देखता है कि वह असफल ही होगा इसलिए उसके असफल होने की ज्यादा चांसेस प्राप्त होते हैं |

5) किसी दूसरे के द्वारा हस्तशिल्प बच्चे के कार्य में यदि दूसरों द्वारा हस्तक्षेप किया जाता है तो जुड़ जाती है अर्थात उनकी चिड़चिड़े की प्रवृत्ति हो जाती है जिससे उनके सीखने में बाधा उत्पन्न हो सकती है |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙨𝙖𝙫𝙡𝙚

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👨‍👨‍👧‍👧👨‍👨‍👧‍👧क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं 👨‍👨‍👧‍👧👨‍👨‍👧‍👧

💥 आत्मविश्वास की कमी :-

🐣 आत्मविश्वास की कमी या विफलता का डर एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन को रोक सकती है नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है।

💥 खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता :-

🐣 प्रत्येक बच्चे को स्कूल में प्रवेश करने से पहले दिन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि अपने पढ़ाई गृह कार्य या अन्य कार्य के लिए मित्रों या दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद अपने कार्य करना चाहिए ।

💥 इच्छा और प्रेरणा की कमी :-

🐣 सक्षम होते हुए भी इच्छा या प्रेरणा में कमी होने के कारण बच्चों को कार्य में दिलचस्पी नहीं होती वे दिलचस्पी नहीं दिखाते तथा कार्य का आनंद नहीं लेते और फिर कार्य में असफल हो जाते हैं।

💥 पढ़ने या समझने की खराब स्थिति :-

🐣 अगर एक बच्चा सामान्यत: पढ़ने के कार्य में प्रयुक्त होने वाले भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ हो तो तेज दिमाग के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टता को नहीं प्राप्त कर सकतें।

💥 माता-पिता की भागीदारी में कमी :-

🐣 माता-पिता की भागीदारी बच्चों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है कम उम्र के दौरान ही माता पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है तथा उम्र बढ़ने के साथ-साथ भी माता-पिता की भागीदारी तथा सहयोग की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें हम सबसे अधिक जानकारी तथा अनुभव प्राप्त होता है।

💥 अनुचित संगठनात्मक कौशल :-

🐣 बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में कुप्रबंध या कुसंगठित हो तो यह बच्चे की सीखने की गति को व्यवस्थित कर देती है।

💥अन्य कारक :-

🐣 साथियों का दबाव।

🐣बहुत ज्यादा संरक्षण में रखना।

🐣 माता-पिता की बड़ी उम्मीदें।

🐣सामाजिक स्तर पर परेशानी।

🐣 किसी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप।

💥💥समाप्त 💥💥

🔥🔥Notes by :- Neha Kumari ☺️

🙏🙏धन्यवाद् 🙏🙏

🌹🌹🌸🌸🌹🌹

🌈🌾🌻क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं💥🔥🌻

🌈🥀(1) आत्मविश्वास की कमी ~~~~

🌸🌺बच्चों को खुद के ऊपर अविश्वास होना आत्माविश्वास की कमी का महत्वपूर्ण तथ्य है।

💥⭐आत्मविश्वास की कमी या विफलता का डर एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन से रोक सकती है मतलब बच्चों को अपने मन में यह filling आए कि यह कम हमसे नहीं हो पाएगा, तो बच्चा वास्तव में उस कार्य को करने में सफल नहीं होंगे।

🌷🌺नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है अर्थात बच्चे धैर्य को बनाए रखें।

👉बच्चों को धैर्य रखने की प्रेरणा देते रहें।

🌈🌻(2) खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता~~

🌾🥀बचपन से ही बच्चों को सिखाया जाना चाहिए कि अपने गृह कार्य, किताब ,कॉपी इत्यादि पर दूसरे बच्चों या शिक्षक ,परिवार वाले से उम्मीद ना करें ।खुद पर भरोसा रखें।प्रत्येक बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने के पहले दिन से ही यह सिखाया जाना चाहिए।

🥀🌿खुद के शरीर से ज्यादा किसी पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए।

⭐🌻(3) इच्छा और प्रेरणा की कमी ~~~~

🔥🌸सक्षम होते हुए भी इच्छा या प्रेरणा में कमी अगर है तो इसके कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते ,कम का आनंद नहीं लेते, फिर कार्य असफल हो जाता है।

🌿🌻किसी भी आवश्यकता को पूरा करने के लिए दो चीजों की जरूरत होती हैं।
👉(1) रुचि
👉(2) प्रेरणा
✌️इन दोनों में से किसी एक में कमी होने से बच्चे असफलता की ओर अग्रसर होने लगती हैं।

🌈(4) पढ़ने या समझने की खराब स्थिति ~~~~

🌷🥀अगर एक बच्चा सामान्यतः पढ़ने के कार्य में प्रयुक्त होने वाले भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ है तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्ठता को नहीं पा सकते हैं। मतलब बच्चा जिस परिवेश में है उस जगह के भाषा या वातावरण को समझना अति आवश्यक है नहीं तो बच्चे में विपरीत प्रतिक्रिया की संभावना बन सकती हैं। जिससे बच्चे में असफलता की प्रवृत्ति आवश्यक हो सकता हैं।

🌈(5) माता-पिता की भागीदारी में कमी ~~

💥🌺माता-पिता की भागीदारी बच्चों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है कम उम्र के दौरान माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🌈(6) उचित संगठनात्मक कौशल ~~~

👉🌾बच्चे की पढ़ाई और जिंदगी में कुप्रबंध या कुसंगठित है तो यह बच्चो के सिखाने की गति को अव्यवस्थित करते हैं।

🌈(7) अन्य कारक ~~~

1️⃣⭐बच्चों पर कई बार साथियों का दबाव होता हैं।
2️⃣🌸बच्चों को बहुत ज्यादा संरक्षण में रखा जाता है।

3️⃣🌿माता-पिता की बड़ी उम्मीदें भी बच्चों को शिक्षण में प्रभावित करते हैं।

4️⃣🌾किसी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप से बच्चे के शिक्षण अधिगम में बांधा उत्पन्न करता हैं।
🌷🥀🥀Notes by-SRIRAM PANJIYARA 💥🌺🙏

क्यों और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में असफल हो जाते हैं🤔🤔🤔

🤔 आत्मविश्वास की कमी🤔

आत्मविश्वास की कमी या विफलता का डर एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन से रोक सकते हैं नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है यदि हममे आत्मविश्वास की कमी होती है तो हम किसी भी कार्य को नहीं कर पाते हैं भले ही उसकी क्षमता हमारे अंदर होती है

खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता🤔

बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने के पहले दिन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि अपनी पढ़ाई गृह कार्य अन्य कार्य के लिए मित्रों या किसी दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद से करना चाहिए खुद से किया हुआ कार्य हमें आत्मविश्वास एवं प्रसन्नता देता है एवं हम उसको बहुत अच्छी तरीके से सीख जाते हैं यदि हमें कोई चीज नहीं आती है तो हमें खुद टीचर से पूछना चाहिए यह नहीं सोचना चाहिए कि आगे वाला व्यक्ति जब पूछेगा तो हम उसी में समझ लेंगे

🤔इच्छा और प्रेरणा कि कमी🤔

सक्षम होते हुए भी इच्छा प्रेरणा में कमी के कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं काम का आनंद नहीं लेते हैं फिर कार्य में असफल हो जाते हैं हमें किसी कार्य को करना है तो उसे पूरी लगन एवं इच्छाशक्ति से करना चाहिए तभी हम उस कार्य में सफल होना है

🤔पढ़ने या समझने की खराब स्थिति🤔

अगर एक बच्चा सामान्य पढ़ने के कार्य में प्रयुक्त होने वाली भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ है तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चों उत्कृष्टता को नहीं पा सकते हैं
बच्चा जो भाषा समझता है यदि उसे उस प्रकार का वातावरण नहीं मिलता है तो वह उसे नहीं सीख सकता

🤔 माता-पिता की भागीदारी में कमी🤔

माता-पिता की भागीदारी बच्चों के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है कम उम्र के दौरान माता पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है
आजकल देखा जाता है कि माता-पिता दोनों ही बहुत व्यस्त होते हैं बच्चे को बहुत कम समय दे पाते हैं परंतु हमें उनको समय देना चाहिए

🤔अनुचित संगठनात्मक कौशल🤔

बच्चे के पढ़ाई और जिंदगी में कुप्रबंधन या कुसंगठित है तो यह बच्चे के सीखने की गति को अव्यवस्थित करती है

🤔अन्य कारक🤔
साथियों का दबाव
बहुत ज्यादा संरक्षण में रखना:- माता पिता अपने बच्चों को बहुत ही पाबंदी में रखते हैं जिससे बच्चे क्रिएटिविटी नहीं दिखा पाते हैं

माता पिता के बड़ी उम्मीद है;- माता पिता अपने बच्चों से बहुत ज्यादा ही उम्मीद रखते हैं कि मेरा बेटा इतने नंबर लेकर आएगा मेरा बेटा यह बनेगा परंतु वह यह नहीं सोचते हैं कि बेटे की रूचि किस चीज में है

सामाजिक स्तर पर परेशानी
किसी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप

🙏🙏🙏sapna sahu 🙏🙏🙏

🔆क्यो और कैसे बच्चे स्कूल प्रदर्शन में असफल रहते है|🔆
▶ आत्मविश्वास की कमी ➖ आत्मविश्वास जब खुद में होगा तो कुछ होगा तो कुछ में होगा तो कुछ होगा तो कुछ खुद में होगा तो कुछ होगा तो कुछ में होगा तो कुछ होगा तो कुछ भी कार्य कर सकता है अगर आत्मविश्वास नहीं है तो कोई कार्य करने में भी असमर्थ होता है उसमें आत्मविश्वास की कमी होती है जब बच्चा आत्मविश्वास की कमी या विफलता का डर एक छात्र को उसके कौशल और क्षमता गठन से रोक सकती है नए कौशल हासिल करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है अगर आत्मविश्वास है अगर ज्यादा उसविषय की जानकारी नहीं है और आत्मविश्वास है कि मैं यह कार्य करूंगा तो उसमें आत्मविश्वास बढ़ता है और हर कार्य में सफल होता है |
▶ खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता ➡ बच्चों को खुद से ज्यादा दूसरों पर विश्वसनीयता रखना घातक सिद्ध हो सकता है बच्चे कभी खुद आत्मनिर्भर नहीं बन सकेंगे अगर दूसरों पर हर कार्य में विश्वास रखता है दूसरों से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए प्रत्येक बच्चों को हमेशा शिक्षा दे कि जब बच्चा स्कूल में प्रवेश करता है तो पहले दिन से ही यही सिखाया जाना चाहिए कि वह अपनी पढ़ाई गृह कार्य अन्य कार्य के लिए मित्रों पर दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद करना चाहिए जिससे बच्चे आत्मनिर्भर बनेंगे और हर क्षेत्र में आगे भी बढ़ेंगे |
▶ इच्छा और प्रेरणा की कमी ➖ किसी कार्य या गतिविधि को करने में रुचि नहीं है और मोटिवेशन भी नहीं है तो असफलता तो होगी ही अगर आपको किसी चीज की आवश्यकता है तो रूचि होगी तो उससे प्रेरणा भी मिलेगी जिससे बच्चा सक्षम होते हुए भी इच्छा और प्रेरणा में कमी के कारण बच्चे कार्य में दिलचस्पी नहीं दिखाते काम का आनंद नहीं देते फिर कार्य असफल हो जाता है
▶ पढने या समझने की खराब स्थिति ➡ अगर एक शिक्षक कक्षा में अलग भाषा का प्रयोग करें तो बच्चे को पढ़ने और समझने में बच्चों पर खराब स्थिति का प्रभाव पड़ेगा अगर एक बच्चा सामान्यतः पढ़ने के कार्य मे प्रयुक्त होने वाली भाषा या वातावरण को समझने में असमर्थ है तो तेज दिमाग होने के बावजूद भी बच्चे उत्कृष्टता मे नहीं जा सकते | हर क्षेत्र में आगे आगे में आगे आगे नहीं बढ़ सकते | अगर सही भाषा का प्रयोग करके पढ़ाया जाए तो बच्चे हर क्षेत्र में आगे में आगे हर क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे और सफल भी होगे |
▶ माता-पिता की भागीदारी में कमी ➖ जब बच्चा छोटा होता है तो उसे माता-पिता या परिवार का योगदान होना बहुत ही आवश्यक है माता-पिता की भागीदारी बच्चो के अध्ययन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है जब बच्चा कम उम्र के दौरान माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है |
▶ अनुचित संगठनात्मक कौशल ➡ बच्चों की पढ़ाई और जिंदगी में कुप्रबंधता या कुसंगठिता है तो यह बच्चे के सीखने की गति अव्यवस्थित करते है |
▶ अन्य कारक ➡
इसमें बच्चों को साथियों का दबाव पड़ता है|
बहुत ज्यादा संरक्षण में रखना |
माता-पिता की बडी उम्मीदें |
सामाजिक स्तर पर परेशानी |
किसी दूसरे के द्वारा हस्तक्षेप करना |
Notes by – Ranjana sen

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