📖 📖 शारीरिक विकास 📖 📖

🌺🌺 किशोरावस्था 🌺🌺
( 12-18 वर्ष )

👉🏻 वजन ~ दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती हैं।

👉🏻 18 वर्ष तक लड़को का भार लड़कियो की तुलना में अधिक होता हो जाता हैं।

🌻🌻 लम्बाई 🌻🌻
👉🏻 18 वर्ष तक लड़को की लम्बाई बढ़ती है।

👉🏻 लड़कियो की लम्बाई 16 वर्ष तक बढ़ती है।

🌿🌿 दाँत 🌿🌿

👉🏻 18 साल तक बालक के दाँत पूर्णतया स्थाई हो जाते है।

👉🏻 18 वर्ष के बाद लड़को व लड़कियो में अक्ल के दाँत आना शुरू हो जाता है।

● सिर व मस्तिष्क का विकास ●

👉🏻 सिर व मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है।

👉🏻 सिर का पूर्ण विकास 15-17 साल तक हो जाता है।
👉🏻 मस्तिष्क का भार 1200-1400 ग्राम तक हो जाता है।

🌲 अन्य परिवर्तन 🌲

👉🏻 ह्रदय की धड़कन घटकर 72/ मिनट हो जाती है ।

👉🏻 18 वर्ष तक लड़को में पुरुषत्व व लड़कियो में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती हैं।

👉🏻 इनके शारीरिक बनावट में अन्तर हो जाता है।

📖 📖 मानसिक विकास ( बौद्धिक विकास ) 📖 📖
Mental development

जितनी भी मानसिक योग्यता व शक्ति इसके अन्तर्गत आता है।

👉🏻 संवेदना/ प्रत्यक्षीकरण ~ बालक अपनी संवेग से अनुभव करता है।
आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा ये संवेदनाए है। इसी से हम अनुभूति करतेहैं। यही संवेदना का निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करे, वह प्रत्यीकरण का रुप ले लेती हैं।
हम जानते हैं कि हम सब संवेग से अनुभव करते है, पहले चीजों को इनके आधार पर ही समझते हैं।

👉🏻 संप्रत्यय निर्माण ~ यह एक प्रकार का सामान्यीकृत विचार है, जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यीकरण व अनुभव के माध्यम से विपरीत होती हैं।
यह आगमनात्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है।
इसमें संवेदना के बाद बालक अपने संप्रत्यय का निर्माण करता है।

👉🏻 स्मरण शक्ति का विकास ~ यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। परिपक्वता व अनुभव के माध्यम से इनका धीरे-धीरे विकास होने लगता है।
इसमें बालक अपनी संवेदना व संप्रत्यय के आधार पर अपनी स्मरण शक्ति का विकास करते हैं, इसी से हम सीखी हुई बातो को याद कर पाते है।

👉🏻 समस्या समाधान की योग्यता का विकास ~ व्यक्ति के समक्ष जो अनेक समस्या होती हैं। उसमें चिंतन और तर्क के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास होता है।
पूर्व के तीनो बिन्दुओं के बाद बालक समस्या का समाधान करता है।
📚📚📒 समाप्त 📒📚📚
✍🏼 PRIY AHIRWAR ✍🏼

🙏🏻🌺🌿🌻🌷🙏🏻🌺🌿🌻🌷🙏🏻🌺🌿🌻🌷🙏🏻🌺🌿🌻

🌈 शारीरिक विकास 🌈

🦚🦚 किशोरावस्था🦚
(Physical development in adolescence) (12-18)

शरीर विकास की दृष्टि से यहअवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि किशोरावस्था की समाप्ति तक बालक और बालिका उगना शारीरिक परिपक्वता तक प्राप्त कर लेते हैं
किशोरावस्था में होने वाले प्रमुख शारीरिक परिवर्तन निम्नलिखित है

👉🏼 वजन -दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है

👉🏼 परंतु किशोरावस्था में बालक व बालिका के भार में अंतर रहता है
👉🏼 किशोरावस्था में भार अस्थियों और मांसपेशियों के विकास के कारण बढ़ता है

🦚 लंबाई 🦚

👉🏼18 वर्ष तक लड़कों की लंबाई बढ़ती है
👉🏼 लड़कियों की लंबाई 16 वर्ष तक बढ़ती है

🦚🦚 दांत🦚🦚

👉🏼 18 साल तक बालक के दांत पूर्णतया स्थाई हो जाते हैं
👉🏼 18 वर्ष के बाद लड़कों और लड़कियों में अकल दांत आना शुरू हो जाते हैं

🦚 सिर व मस्तिष्क का विकास🦚
👉🏼 सिरूबा मस्तिष्क का विकास निरंतर चलता रहता है

👉🏼 सिर का पूर्ण विकास 15-19 साल तक हो जाता है
👉🏼 मस्तिष्क का भार 1200-1400तक हो जाता है

🦚 अन्य परिवर्तन🦚

👉🏼 हृदय की धड़कन घटकर 72/मिनट हो जाती है

👉🏼18 वर्ष तक लड़कों में पुरुषत्व और लड़कियों में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषताएं प्रकट होने लगती हैं

👉🏼 इनके शारीरिक बनावट में अंतर स्पष्ट हो जाता है

👉🏼इस अवस्था में चेहरे की बनावट में आश्चर्यजनक परिवर्तन आता है बालिकाओं की त्वचा में निखार आ जाता है
और बालकों के चेहरे पर दाढ़ी, मूछ आ जाने के कारण उनके चेहरे की कोमलता समाप्त हो जाती है

🌈 मानसिक विकास 🌈
(Mental development)

मानसिक विकास का केंद्र बिंदु बुद्धि है जितनी भी मानसिक योग्यता वह शक्ति इसके अंतर्गत आती है

👉🏼 संवेदना/प्रत्यक्षीकरण-
बालक अपने संवेग से अनुभव करता है
आंख ,कान, नाक ,जीभ त्वचा में संवेदनाएं है। इसी से हम अनुभूति करते हैं यह संवेदना का निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करें वह प्रत्यीकरण का रूप ले लेती है

👉🏼 संप्रत्यय निर्माण-यह एक प्रकार का सामान्यीकृत विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यीकरण वाहनों के माध्यम से विपरीत होता है
इसमें संवेदना के बाद बालक अपने संप्रत्यय का निर्माण करता है

👉🏼 स्मरण शक्ति का विकास-
यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है परिपक्वता और अनुभव के माध्यम से इनका धीरे-धीरे विकास होने लगता है

👉🏼 समस्या समाधान की योग्यता का विकास-व्यक्ति के समय जो अनेक समस्याएं होती हैं उसमें चिंतन और तर्क के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास होता है

🖊️🖊️📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma🖊️🖊️

🔆 *शारीरिक विकास*🔆
(12-18 वर्ष)

🌀वजन— दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है।

🌀 18 वर्ष तक के बालकों का भार बालिकाओं की तुलना में अधिक होता है।

🎯लम्बाई — लड़कों की लंबाई 18 वर्ष तक बढ़ती , और लड़कियों की लंबाई 16 वर्ष तक बढ़ती है।

🎯दाँत — 18 वर्ष तक बालक के दाते स्थाई हो जाते हैं ।
🌀 18 वर्ष के बाद है बालक और बालिकाओं में अकल के दांत आना शुरू हो जाते हैं।

🎯 सिर व मस्तिष्क—
🌀 सिर का पूर्ण विकास 15-17 साल तक हो जाता है।
🌀 मस्तिष्क का भार— 1200-1400 ग्राम

🎯अन्य परिवर्तन —
किशोरावस्था में हृदय की धड़कन 72/ मिनट हो जाती है।

🎯 18 वर्ष तक लड़कों में पुरुषत्व लड़कियों में स्त्रियों का पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है।

🎯 बालक और बालिकाओं के शारीरिक बनावट में अंतर भी देखने को मिलता है।

🔆 मानसिक विकास 🔆
संवेदना /प्रत्यक्षीकरण— बालक संवेग के अनुसार अनुभव करते है। आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा ये सभी संवेदनाए हैं। इसी से बालक अनुभूति करते हैं।

🎯 संवेग से अनुभव करते हैं उनके चीजों के आधार पर ही हम समझते हैं।

🎯 संप्रत्यय निर्माण- यह सामान्य विचार है जो व्यक्ति द्वारा एक दूसरे से अलग अलग अनुभव करके सीखते हैं।

🎯 यह आगमन आत्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है।

इसमें बालक अपने संप्रत्यय या विचार का निर्माण करते हैं इसके बाद बालक अपने संप्रदाय का निर्माण करते हैं।

🎯 स्मरण शक्ति का विकास— स्मरण शक्ति से बच्चों में परिपक्वता आती है उसके अनुसार बालक अनुभव करते हैं और धीरे-धीरे वह सीखते हैं इससे बालक में संवेदना और संप्रदाय के आधार पर अपनी शक्ति का विकास करते हैं सीखी हुई बात को याद भी रखते हैं।

🎯 समस्या समाधान की योग्यता का विकास है— बालक की जो सामने समस्या उत्पन्न होती है उसमें बच्चे चिंतन करते हैं तर्क लगाते हैं उस के माध्यम से ही वह समस्या का समाधान कर पाते हैं।

Notes By:-Neha Roy🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🔥🔥किशोरावस्था 🔥🔥

🦚 यह अवस्था मानव जीवन की अत्यंत महत्वपूर्ण अवस्था है।इसमें हम सबके जीवन में अनेक प्रकार के सामाजिक,सांस्कृतिक,संवेगात्मक और भावनात्मक इत्यादि अनेक प्रकार के परिवर्तन आते हैं। जिसका उल्लेख निम्न प्रकार से किया जा रहा है :-

💥💥वजन💥💥

🌸इस अवस्था में वजन और भार लड़की और लड़कियों दोनों में सामान तरीके से बढ़ता है।

🌸18 वर्ष तक लड़कों का बाल लड़कियों की अपेक्षा अधिक हो जाता है।

💥💥 लंबाई 💥💥

🌸 लड़कों की लंबाई 18 वर्ष तक बढ़ती रहती है।

🌸 लड़कियों की लंबाई 16 वर्ष तक ही बढ़ती है।

💥💥दांत💥💥

🌸 18 वर्षों तक बालकों के बालक पूर्णत: स्थाई हो जाते हैं।

🌸 18 वर्षों के बाद बालक तथा बालिकाओं में अकल के दांत आने शुरू हो जाते हैं।

💥💥 सिर व मस्तिष्क का विकास💥💥

🌸 सिर व मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है।

🌸 सिर व मस्तिष्क का विकास पूर्णत: 15 से 17 सालों में हो जाता है।

🌸 इस अवस्था तक मस्तिष्क का भार 1200 – 1500 ग्राम तक हो जाता है।

🌸 बालकों की अपेक्षा पहले बालिकाओं में यह सारी परिवर्तन पाए जाते हैं।

💥💥 अन्य परिवर्तन 💥💥

🌸 इस अवस्था में ह्रदय की धड़कन घटकर 72 प्रति मिनट हो जाती है।

🌸 इस अवस्था में आते-आते बालकों में पुरुषत्व तथा बालिकाओं में स्त्रीत्व के गुण विकसित होने लगते हैं।

🌸 इनके शरीर की बनावट मे अंतर आ जाता है।

🌸 बालकों की अपेक्षा बालिकाएं जल्दी परिपक्व हो जाती हैं।

💥💥मानसिक व बौद्धिक विकास💥💥

🔥 मानसिक विकास का केंद्र बिंदु बुद्धि है जितनी भी प्रकार की संवेदनाएं इस में पाई जाती हैं वह इसके अंतर्गत ही आते हैं।

🐭🐣 संवेदना या प्रत्यक्षीकरण 🐣🐭

🌟 बालक अपने संवेग से अनुभव करता है। उसी के आधार पर चीजों को सोचता और समझता है।

🌟 आंख,नाक,कान,जीव,त्वचा आदि ये सारे संवेदनात्मक अंग है। इसी से हम अपनी संवेदना ओं का अनुभव करते हैं। और यह हमारी संवेदनाओं का उचित अर्थ निकालने में हमारी मदद करते हैं।
उसके बाद फिर वह प्रत्यक्षीकरण का अनुभव ले लेती है।

🐭🐣 संप्रत्यय निर्माण🐣🐭

🌟 यह एक प्रकार का सामान्यीकृत व्यवहार है जो कि अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग प्रकार से विचार या अंतः क्रिया प्राप्त कर पाने पर हर एक व्यक्ति में अलग अलग प्रकार से पनपता या विकसित होता है।

🌟 यह आगमनात्मक तकनीक का प्रयोग कर विकसित होता है।

🌟 इसमें संवेदना के बाद बालक अपनी संप्रत्ययों का निर्माण करता है।

🐭🐣 स्मरण शक्ति का विकास🐣🐭

🌟 यह एक ऐसी विकास है जिसका हमारी मानसिक और बौद्धिक शक्ति से अत्यंत महत्वपूर्ण रिश्ता है जो कि इनके बिना पूर्ण ही नहीं हो सकती।

🌟 जैसे ही परिपक्वता व अनुभव बढ़ती है तो इसका विकास परिपक्वता व अनुभव के माध्यम से धीरे-धीरे होने लगता है।

🌟 इसमें बालक अपनी संवेदना और संप्रत्यय के माध्यम से अपनी स्मरण शक्ति विकसित करते हैं।
इसी के द्वारा हम अपनी सीखी गई बातों को याद रख सकते हैं।

🐭🐣 समस्या समाधान की योग्यता का विकास🐣🐭

🌟 जैसा कि हम सब जानते हैं मानव जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं होती है। जिसमें हमें अनेक प्रकार की समस्या समाधान कौशल और योग्यताओं की आवश्यकता होती है जो कि हम अपनी तर्कशक्ति चिंतन वह अपनी योग्यता द्वारा कर पाते हैं।

💥 संवेदना/प्रत्याक्षीकरण,संप्रत्यय निर्माण, स्मरण शक्ति का विकास तथा समस्या समाधान की योग्यता के विकास द्वारा बालक अपनी क्षमताओं को पहचान पाता है तथा अपन बालक अपनी क्षमताओं को पहचान पाता है तथा उनके संप्रत्यय निर्माण में सहायक होता है।

🌸🐣🌺समाप्त🌺🐣🌸

🔥🔥Notes by :- Neha Kumari ☺️

🙏🙏🙏धन्यवाद् 🙏🙏🙏

🔥🔥🐣🐣🌸🌸🌺🌺🌸🌸🐣🐣🔥🔥

📖📚 शारीरिक विकास 📖📚

💫 किशोरावस्था ( 12-18 वर्ष )

👉 वजन – दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है।

👉 18 वर्ष तक लड़कों का भार बालिकाओं की तुलना में अधिक होता है।

💠 लम्बाई 💠

👉 18 वर्ष तक लड़कों की लंबाई बढ़ती है।

👉 लड़कियों की लंबाई 16 वर्ष तक बढ़ती है।

💫 दांत 💫

👉 18 साल तक बालक के दांत पूर्णतया स्थाई हो जाते हैं।

👉 18 वर्ष के बाद लड़कों व लड़कियों में अक्ल के दांत आना शुरू हो जाता है।

💠सिर व मस्तिष्क का विकास 💠

👉 सिर में मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है।

👉 सिर का पूर्ण विकास 15 से 17 साल तक हो जाता है

👉 मस्तिष्क का भार 1200 से 1400 ग्राम हो जाता है

🔰 अन्य परिवर्तन 🔰

👉 हृदय की धड़कन घटकर 72
प्रति मिनट हो जाती है।

👉 18 वर्ष तक लड़कों में पुरुषत्व और लड़कियों में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है

👉 इनके शारीरिक बनावट में अंतर हो जाता है।

💠💠 मानसिक विकास ( बौद्धिक विकास ) mental development 💠💠

जितनी भी मानसिक योग्यता व शक्ति इसके अंतर्गत आता है।

👉 संवेदना/ प्रत्यक्षीकरण – बालक अपने संवेग से अनुभव करता है।
आंख कान नाक जीभ त्वचा ये संवेदनाएं हैं इसी से हम अनुभूति करते हैं यही संवेदना का निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करें यह प्रत्यीकरण का रूप लेती है।

हम जानते हैं कि हम सब संवेग से अनुभव करते हैं पहले चीजों को इसके आधार पर ही समझते हैं।

👉 संप्रत्यय निर्माण-
यह एक प्रकार का सामान्यीकृत विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यीकरण वे अनुभव के माध्यम से विपरीत होती है
यह आगमनात्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है इसमें संवेदना के बाद बालक अपने संप्रत्यय का निर्माण करता है

👉स्मरण शक्ति का विकास-
यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है परिपक्वता अनुभव के माध्यम से इनका धीरे-धीरे विकास होने लगता है
इसमें बालक अपनी संवेदना व संप्रत्यय के आधार पर अपनी स्मरण शक्ति का विकास करते हैं इसी से हम सीखी हुई बातों को याद कर पाते हैं।

👉 समस्या समाधान की योग्यता का विकास-
व्यक्ति के समक्ष जो अनेक समस्या होती है उसमें चिंतन और तर्क के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास होता है ।
पूर्व के तीनों बिंदुओं के बाद बालक समस्या का समाधान करता है।

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

🌻🥀Physical development🌻🥀
🌷किशोरावस्था (12 – 18/20/21 )🌺

🌸🌿वजन
– बालक / बालिका के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है।

🌈18 वर्ष के अंत तक लड़कों का भार लड़कियों की तुलना में अधिक हो जाता है।

💥लंबाई ~~

👉लड़के 18 वर्ष तक लंबे होते हैं।

👉लड़कियां 16 वर्ष तक पूरा हो जाते हैं।

💥🔥दांत ~~

🌿🌸18 साल तक दांत पूर्णतया स्थाई हो जाता है।

🌾लड़के लड़कियों में अक्ल के दांत आना शुरू हो जाते हैं।

🌈सिर /मस्तिष्क ~~~~

🌷सिर/मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है।

🌻सिर का पूर्ण विकास 15 से 17 साल तक हो जाती है।

🌾मस्तिष्क का भार 1200 – 1400 ग्राम तक होता है।

🌿हृदय की धड़कन 72 बार प्रति मिनट हो जाती है।

🌺18 वर्ष तक लड़कों में पुरुषत्व और लड़कियों में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है।

🌈🌈 Mentel devlopment💥💥
मानसिक विकास / बौद्धिक विकास

🌿🌸बच्चे के मानसिक विकास उसके बुद्धि से होती है अर्थात मानसिक योग्यता या शक्ति से बच्चे में मानसिक विकास होती हैं।

🌻🥀संवेदना और प्रत्यक्षीकरण –

बच्चे में अनुभूति होती है और अनुभूति से संवेदना आती है
आंख ,कान ,नाक ,जीव, और त्वचा। इन पांचों ज्ञानेंद्रियों से हम कुछ ना कुछ अनुभूति करते रहते हैं अलग-अलग ज्ञानेंद्रियों से हम अलग -अलग चीजों की अनुभूति प्राप्त करते हैं।
इनका निश्चित अर्थ निकालने की चेतना करें वह प्रत्यक्षीकरण का रूप ले लेता है।

🙏🌿संप्रत्यय निर्माण ~~~~(concept build)

🌾🌷संप्रत्यय एक प्रकार का सामान्यी कृत विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यक्षीकरण और अनुभवों के माध्यम से विकसित होते हैं।

🌷🌾आगमनात्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है।

🌺💥स्मरण शक्ति का विकास

यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है जो परिपक्वता और अनुभव के माध्यम से इसका धीरे-धीरे विकास होने लगता है।

🌸🌿समस्या समाधान की योग्यता का विकास ~~

🌸💥व्यक्ति के समक्ष जो अनेक समस्या होती है यह जो अलग-अलग समस्या होती है उसमें चिंतन और तर्क की योग्यता का विकास होता है।

🌻🥀🌾Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌸💥🌺

🌸🌸 बाल विकास🌸🌸

🌼🌼किशोरावस्था🌼🌼

✍🏻शारीरिक विकास (12- 18 वर्ष)

🌈वजन- दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है।

💧 18 वर्ष तक बालों को का भार बालिकाओं की तुलना में अधिक होता है।
💧लम्बाई- लड़कों की लंबाई 18 वर्ष तक बढ़ती है और लड़कियों की लंबाई 16 वर्ष तक बढ़ती है।

🌈 दांत- ▫️ 18 साल तक दांत पूर्णता स्थाई हो जाता है।
▫️ 18 वर्ष के बाद बालक और बालिकाओं में अक्ल दाढ़ आना शुरू हो जाता है।

🌈 सिर/ मस्तिष्क

▫️ सिर या मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है।
▫️ सिर का पूर्ण विकास से 15 से 17 साल तक हो जाता है।
▫️ मस्तिष्क का भार 1200 -1400 ग्राम तक होता है।

🌈अन्य परिवर्तन🌼

▫️ किशोरावस्था में हृदय की धड़कन घटकर 72 बार/ मिनट हो जाती है।
▫️ 18 साल तक लड़कों में पुरुषोत्व और लड़कियों मे स्प्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है।
▫️ इनकी शारीरिक बनावट में अंतर स्पष्ट हो जाता है।

🌱🍁मानसिक विकास🍁🌱

1️⃣संवेदना और प्रत्यक्षीकरण- बालक अपने समय के अनुसार अनुभव करते हैं बालक में यह 5 ज्ञानेंद्रियां कान, नाक ,आंख ,जीभ,त्वचा है इन्हीं के आधार पर बालक अनुभूति करते हैं।

▫️ संवेदना का अगर निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करें तो वह प्रत्यक्षीकरण का रूप ले लेती है।

2️⃣संप्रत्यय निर्माण- यह एक प्रकार का सामान्य कब विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यक्षीकरण और अनुभवों के माध्यम से विकसित होती है।
▫️ आगमनात्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है।

3️⃣ स्मरण शक्ति का विकास- यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है स्मरण शक्ति के साथ-साथ बच्चों में परिपक्वता आती है इसी के अनुसार बालक अनुभव करते हैं और धीरे-धीरे सीखते हैं।

4️⃣ समस्या समाधान की योग्यता का विकास- व्यक्ति के सामने जो समस्याएं उत्पन्न होती है उन पर वह चिंतन और तर्क के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास करते हैं तथा उसी के माध्यम से समस्या का समाधान भी कर लेते हैं।

🌼🌼🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🌼🌼

✍🏻 NOTES BY
🌸Shashi Choudhary🌸

🙏🇮🇳🙏🇮🇳🙏

*🌷 किशोरावस्था में शारीरिक विकास 🌷*

अध्ययन की दृष्टि से किशोरावस्था 🙁 12 – 18 ) वर्ष

1. 🌺 वजन 🌺

👉किशोरावस्था में किशोर – किशोरियों दोनों के भार में तीव्र गति से वृद्धि होती है।

👉18 वर्ष के अंत तक किशोरों का भार किशोरियों की अपेक्षा बढ़ जाता है।

2. 🌺 लम्बाई 🌺

👉किशोरों की लंबाई 18 वर्ष तक बढ़ती है ।

👉किशोरियों की लंबाई 16 वर्ष तक बढ़ती है।

3. 🌺 दांत 🌺

👉18 वर्ष तक दांत पूर्णतया स्थाई हो जाते हैं ।

👉18 वर्ष के बाद किशोर – किशोरियों में अक्ल के दांत आना शुरु हो जाते हैं।

4. 🌺 सिर और मस्तिष्क 🌺

👉सिर / मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है ।

👉सिर का पूर्ण विकास ( 15 – 17 ) वर्ष तक हो जाता है ।

👉मस्तिष्क का भार “1200 – 1400″ ग्राम तक होता है।

5. 🌺 अन्य परिवर्तन 🌺

👉किशोरावस्था में हृदय की धड़कन घटकर 72 बार प्रति मिनट हो जाती है ।

👉18 वर्ष तक किशोरों में पुरुषत्व और किशोरियों में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है ।

👉किशोरावस्था में किशोर और किशोरियों के शारीरिक बनावट में अंतर स्पष्ट हो जाता है।

*मानसिक विकास/बौद्धिक विकास* 🧠🧠🧠

बच्चों के मानसिक विकास को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जाता है :-

मानसिक योग्यता/शक्ति, बच्चे के मानसिक विकास के अंतर्गत आती है ।

1. संवेदना और प्रत्यक्षीकरण

संवेदना से ही अनुभूति / अनुभव करते हैं।
” आंख , कान , नाक , जीभ , त्वचा ” ये पांच ज्ञानेन्द्रियों से ही अपनी संवेदनाओं की अनुभूति की जाती है।अतः इसका निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करें वह प्रत्यक्षीकरण का रूप ले लेती है।
अर्थात जब हमारी संवेदनायें प्रत्यक्ष रूप से होंगी तभी अनुभूति का अहसास होता है।

2. संप्रत्यय निर्माण ( Concept Build )

यह एक प्रकार का सामान्यीकृत विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यक्षीकरण और अनुभवों के माध्यम से विकसित होती है। अर्थात इसमें बालक अपनी संवेदनाओं के प्रत्यक्षीकरण के बाद अपना संप्रत्यय निर्माण करता है।

3. स्मरण शक्ति का विकास

यह मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। परिपक्वता और अनुभव के माध्यम से इसका धीरे-धीरे विकास होने लगता है।
एक बालक में जब अपनी संवेदनाओं का प्रत्यक्षीकरण और फिर संप्रत्यय निर्माण हो जाता है तब उसमें स्मरण शक्ति का विकास हो जाता है, बच्चे अपनी पुरानी बातों, कार्यों आदि को याद करके नयी स्थिती में अनुभव करते हैं।

4. समस्या समाधान की योग्यता का विकास

व्यक्ति के समक्ष जो अनेक समस्याएं होती हैं उसमें चिंतन और तर्क के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास होता है।
जब बच्चे में संवेदना का प्रत्यक्षीकरण हो जाता है, संप्रत्यय का निर्माण हो जाता है तथा स्मरण शक्ति का विकास हो जाता है तब बच्चे में समस्या समाधान की योग्यता का विकास हो जाता है। बच्चे के सामने जब कोई स्थिति, समस्या होती है तब बे सोच – विचार करके अपनी समस्या का समाधान कर लेते हैं।

🌺 ✒️✒️Notes by – जूही श्रीवास्तव ✒️✒️✒️🌺🌺🌺

🔰physical devlopment🔰
शारीरिक विकाश

किशोरावस्था:- वजन :- बालक बालिकाओं के बाहर में तीव्र गति से वृद्धि होती है 18 वर्ष के अंत तक लड़कों का भार लड़कियों से अपेक्षाकृत बढ़ जाता है

लंबाई:- 18 वर्ष तक लड़कों की लंबाई लगभग पूर्ण हो जाती है

16 वर्ष तक लड़कियों की लंबाई लगभग पूर्ण हो जाती है

दांत:- दांत 18 साल तक स्थाई हो जाते हैं लड़के लड़कियों के अक्ल के दांत आना शुरू हो जाते हैं

सिर/ मस्तिस्क: 1 सिर मस्तिष्क का विकास निरंतर जारी रहता है
2 सिर का पूर्ण विकास 15 से 17 साल तक हो जाता है
3 मस्तिष्क का भार 12 सौ से 14 सौ ग्राम तक होता है

अन्य परिवर्तन:- 1 ह्रदय की धड़कन घटकर 72 बार प्रति मिनट हो जाती है
2 18 वर्ष तक लड़कों में पुरुषत्व और लड़कियों में स्त्रीत्व की पूर्ण विशेषता प्रकट होने लगती है
3 उनकी शारीरिक बनावट में अंतर स्पष्ट हो जाता है

mental devlopment
मस्तिष्क विकास/ बौद्धिक विकास

मानसिक योग्यता /शक्ति:-
1 संवेदना प्रत्यक्षीकरण:- आंख कान नाक जीभ त्वचा
संवेदना अनुभूति संवेदनाएं

संवेदना का कोई निश्चित अर्थ निकालने की चेष्टा करें वह प्रत्यक्षीकरण का रूप ले लेती है

2 संप्रत्यय निर्माण:- एक प्रकार का सामान्य ज्ञान विचार है जो एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग प्रत्यक्षीकरण और अनुभवों के माध्यम से विकसित होता है

अगनात्मक तकनीक का प्रयोग करके विकसित होता है

3 स्मरण शक्ति का विकास :- मानसिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है परिपक्वता और अनुभव के माध्यम से इसका धीरे-धीरे विकास होने लगता है

समस्या समाधान की योग्यता का विकास:- व्यक्ति के समक्ष जो अनेक समस्याएं होती हैं उसमें चिंतन और तर्कों के माध्यम से समस्या समाधान की योग्यता का विकास होता है

🙏🙏🙏sapna sahu 🙏🙏🙏

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