🏵️आकलन🏵️

🎗️आकलन मुख्य 3 तरीके से किया जाता है।🎗️

🍂self assessment, (स्व आकलन)

🍂peer assessment, (सहपाठी आकलन)

🍂 tutor assessment शिक्षक आकलन

🔖self assessment (स्व आकलन):- स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है।
🧿 जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करता है और उसे दूर करने की कोशिश करता है।
🔖 Peer assessment (सहपाठीआकलन )/(सहयोगी आकलन):- जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है
🍀सहयोग की भावना रहनी चाहिए ।
🍀आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए ।
🍀आकलन करते समय एक सहपाठी को शिक्षक की भांति ही सोचना चाहिए।
🟣Tutor assessment ( शिक्षक आकलन):- इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक देते है ।
शिक्षक आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है ।
🟠रचनात्मक आकलन के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है। और सहायता प्रदान की जाती है ।
🟢जबकि योगात्मक आकलन में बच्चों की उपलब्धि के आधार पर निर्णय किया जाता है।
✍️Pragya Rangare 🙏🙏

📝 आकलन के प्रकार. 📝

आकलन मुख्यतः तीन तरीके से किया जाता है
1 स्व आकलन. ( self assessment)
2 सहपाठी आकलन. (peer assessments)
3 शिक्षक आकलन (tutor assessments)

self assessment( स्व आकलन )

स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है
जो भी बच्चे अधिगम करें रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं

परंतु छोटी कक्षा के बच्चे स्वयं का आकलन नहीं कर सकते

peer assessments ( सहपाठी /सहयोगी आकलन)

जो छात्र अपनी सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है
बच्चों में सहयोग की भावना रहनी चाहिए
आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए
आकलन करते समय एक सहपाठी को शिक्षक की भांति सोचना चाहिए

tutor assessments (शिक्षक आकलन)

इसमें शिक्षक छात्रों को फीडबैक देते हैं आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है
रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है

योगात्मक आकलन में बच्चों की उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏sapna sahu🙏🙏🙏🙏🙏🙏

,
🌈आकलन और मूल्यांकन🎯
(Assessment and evaluation)

💫आकलन मुख्यतः तीन प्रकार से किए जाते हैं।

1️⃣स्व आकलन (self assessment)

2️⃣सहपाठी आकलन (peer assessment)

3️⃣शिक्षक आकलन (tutor assessment)

💫1️⃣ स्व आकलन (self assessment) :-

🍂 स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है ।
जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं।

🎯2️⃣सहपाठी आकलन (peer assessment) :-

जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में feedback प्रदान करते हैं । वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है।

🌾 इसमें जो बच्चे भाग लेते हैं उस में सहयोग की भावना रहनी चाहिए।

🍁 आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए ।

🌻आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए।

💫3️⃣शिक्षक आकलन (tutor assessment) :-

🌿इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर feedback देते हैं ।

🍂यह आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकते हैं।

🍁रचनात्मक के अंदर छात्राओं को feedback दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है।

☘️योगात्मक आकलन में बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है।

🙏🙏🙏🙏🙏🌾🌻🌿Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌻🥀☀️🙏🙏🙏🙏🙏

🏅आकलन और मूल्यांकन🏅

📝आकलन मुख्यतः तीन तरीके से किया जाता है:–

1️⃣ स्व आकलन
2️⃣ सहपाठी/ सहयोगी आकलन
3️⃣ शिक्षक आकलन

🌻 स्व आकलन:— स्वा आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टि से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं

🌻 सहयोगी /सहपाठी आकलन:— जो छात्र अपने सहयोगी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है

:— सहयोग की भावना रहनी चाहिए
:— आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए
:— आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक के भाती सोचना चाहिए

🌻 शिक्षक आकलन:— शिक्षा के द्वारा आकलन इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक देते हैं
👉आकलन रचनात्मक या योग्य आत्मक दोनों हो सकता है

👉रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है

👉योगात्मक आकलन में बच्चों की उपस्थिति पर निर्णय प्रदान किया जाती है

🏅🏅🏅🏅🏅🏅🏅🏅🏅

Notes by:—sangita Bharti 🙏

🏋️ आकलन (Assessment)🏋️

🌺आकलन मुख्यता 3 तरीके से किया जा सकता है।

⚖️ आकलन $elf assessment

⚖️सहपाठी आकलन Peer assessment

⚖️शिक्षक आकलन Tutor Assessment

🌺स्व आकलन ($elf assessment)🌺

⚖️स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है ।

⚖️जो भी बच्चा अधिगम कर रहा है वह स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करता है और उसे दूर करने की कोशिश करता है।

➡️स्वयं मूल्यांकन करने के लिए चिंतन की आवश्यकता होती है;

➡️अमूर्त बालक अच्छे से स्व -मूल्यांकन कर सकता है;

➡️पूर्व बाल्यावस्था या बाल्यावस्था के बालक स्व-मूल्यांकन नहीं कर सकते हैं;

🌺सहपाठी /सहयोगी आकलन (Peer assessment)

⚖️जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में प्रतिपुष्टि(Feedback) प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है।

➡️यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है;

➡️सहयोग की भावना रहनी चाहिए;

➡️आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए;

➡️आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए;

🌺 शिक्षक आकलन (Tutor assessment)🌺

➡️इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर प्रतिपुष्टि(Feedback) देते हैं

➡️आकलन रचनात्मक व योगात्मक दोनों हो सकता है।

➡️रचनात्मक के अंदर छात्रों को प्रतिपुष्टि (Feedback) दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है।

➡️योगात्मक आकलन में बच्चों की उपस्थिति पर निर्णय प्रदान किया जाता है।

NIVH- National Institute of Visually Handicapped (located on Dehradun)

NIMH National Institute of Mental Handicapped (located on hydrabad in sikandrabad)

NIHH National Institute of Hearing Handicapped

Written by- $hikhar pandey

🌺🦚 आकलन का रूप🦚🌺(forms of assessment)

🎯 आकलन मुख्यतः तीन तरह से किए जाते हैं।

👉🏼 स्वयं आकलन(self assessment)

👉🏼 सहपाठी/ सहयोगी समूह(peer assessment)

👉🏼 ट्यूटर आकलन (tutor assessment)

🎯 स्वयं आकलन/स्व आकलन➖
⚡इस आकलन में छात्र कक्षा अध्यापन के माध्यम से सीखता है तथा अपने अधिगम का मूल्यांकन करता है

⚡यह आकलन ज्ञान कौशल प्रक्रियाओं रुचि व्यवहार आदि में प्रगति केसवा आकलन से संबंधित है

⚡ स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है

⚡जो भी बच्चा अधिगम कर रहा है वह स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टि से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करता है और उसे दूर करने का प्रयास करता है

🎯 सहपाठी/सहयोगी समूह➖

⚡जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करता है वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है

⚡ इस आकलन में सहयोग की भावना होनी चाहिए

⚡और आकलन में निष्पक्षता होनी चाहिए आकलन करते समय एक सहपाठी को शिक्षक की भांति सोचना चाहिए

🎯 ट्यूटर आकलन➖

⚡ इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक देता है आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों ही हो सकता है

⚡ रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है

⚡ योगात्मक आकलन मैं बच्चों की उपस्थिति पर निर्णय प्रदान किया जाता है

🖊️🖊️📚📚 Notes by…… Sakshi Sharma📚📚🖊️🖊️

🎯 आकलन के प्रकार 🎯

🌀 आकलन मुख्यतः तीन तरीके से किया जाता है –

1️⃣ स्वआकलन (self assessment)

2️⃣ सहपाठी आकलन (peer assessment)

3️⃣ शिक्षक आकलन (tutor assessment)

💫Self assessment(स्व-आकलन)➖
स्वआकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं परंतु छोटी कक्षा के बच्चे स्वयं का आकलन नहीं कर सकते।

💫 सहपाठी आकलन (peer assessment)➖
जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्वआकलन से ज्यादा विस्तृत होता है ।
👉बच्चों के सहयोग की भावना रहनी चाहिए ।
👉 आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए ।
👉आकलन करते समय एक सहपाठी को शिक्षक की भांति सोचना चाहिए ।

💫शिक्षक आकलन (tutor assessment)➖
इसमें शिक्षक छात्रों को फीडबैक देते हैं आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है 👉 रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान की जाती है।
👉 योगात्मक आकलन में बच्चों की उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है।

📝 Notes by ➖

✍️ Gudiya Chaudhary

⭐🍁⭐🍁⭐ आकलन के प्रकार⭐🍁⭐🍁⭐

🌺 आकलन के मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं

🎇 स्व आकलन( self assessment)

🎇 सहपाठी आकलन( Peer assessment)

🎇 शिक्षक आकलन( tutor assessment)

🌈 स्व आकलन:-
स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियां का पता लगाकर उनको दूर करने की कोशिश करते है परंतु छोटे बच्चे स्वयं का आकलन नहीं कर सकते हैं

🌈 सहपाठी आकलन:-
सहपाठी आकलन में छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्व आकलन से ज्यादा बड़ा होता है

🍁 आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए

🍁 बच्चों में सहयोग की भावना रखनी चाहिए

🍁 आकलन करते समय एक सहपाठी को शिक्षा की भांति सोचना चाहिए

🌈 शिक्षक आकलन:-
इस आकलन में शिक्षक छात्रों को फीडबैक देते हैं यह आकलन रचनात्मक योगात्मक दोनों हो सकता है

🌺 रचनात्मक के अंधार छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान की जाती है

🌺 योगात्मक आकलन में बच्चों की उपलब्धि का निर्णय प्रदान किया जाता है

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻Menka patel ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺⭐

💫आकलन के प्रकार💫
आकलन मुख्यतः तीन तरीके से किया जाता है |
1⃣ स्व आकलन (Self Assessment)

2⃣ सहपाठी आकलन (Peer Assessment)

3⃣ शिक्षक आकलन (Tutor Assessment)

💥 स्व आकलन (Self Assessment) ➖
स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं |
💥 सहपाठी / सहयोगी आकलन (peer Assessment) ➖ जो छात्र अपने से सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है |
◼ इसमें आकलन में सहयोग की भावनाएं रहनी चाहिए |
◼ इस आकलन में बालको में निष्पक्षता रहनी चाहिए
◼ इस आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए |
💥शिक्षक आकलन (Tutor Assessment ) ➖ इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक देते हैं यह आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है
◼ इसमें शिक्षक को रचनात्मकता के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है |
◼ शिक्षक के द्वारा योगात्मक आकलन में बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाएगा |
Notes by➖Ranjana Sen

💫🍂 आकलन के प्रकार 🍂💫

🌻🌿 आकलन मुख्यत तीन तरीकों से किया जाता है 🌿🌻

🍂🌹स्व आकलन(Self Assessment)

🍃🌻सहपाठी आकलन (Peer Assessment)

🌿🌺शिक्षक के द्वारा आकलन (Tutor Assessment)

🌹🍂💫स्व आकलन (self Assessment)💫🍂🌹

स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है जो भी बच्चें अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखकर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते थे।

🌟🔥🌻 सहपाठी/सहयोगी आकलन (Peer Assessment)🌻🔥🌟

जो छात्र अपने सहपाठी अन्य छात्रो के अधिगम में Feedback प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है।यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है।

🌹🌿 सहयोग की भावना रहनी चाहिए।

🌻🍃 आकलन में निष्पक्षता रहनी चाहिए।

🌷🌿 आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए।

🔥🍂🌻 शिक्षक आकलन (Tutor Assessment)🌻🍂🔥

इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यो पर Feedback देते हैं। आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है।

🌼🌹 रचनात्मक आकलन के अन्दर छात्रों को Feedback दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है।

🍂🌻योगात्मक आकलन में बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय लिया जाता है।

🌹🌺🍂🌿🔥Notes by÷ Babita yadav 💥🌹🌺🌿🍃

🌺🌺🌺💐💐🌹🌹🌺🌺🌿🌿🌼

🌹🌹 आकलन के प्रकार 🌹🌹

🌲 आकलन मुख्यतः तीन तरीके से किया जाता है :-

👉स्व-आकलन
👉सहपाठी आकलन
👉शिक्षक आकलन

1.🌺. स्व-आकलन (self Assessment)

स्व-आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है।
जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखकर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उन्हें दूर करने की भी कोशिश करते हैं।

2.🌺(सहपाठी) सहयोगी आकलन (peer assessment)

जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में feedback प्रदान करते हैं वह आकलन, सहपाठी आकलन कहलाता है।यह स्वआकलन से ज्यादा विस्तृत होता है।
इसमें छात्रों को अपने सहपाठियों के साथ सहयोग की भावना रखनी चाहिए।
आकलन में निष्पक्षता रखनी चाहिए।
आकलन करते समय एक सहपाठी को, एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए।

3. 🌺 शिक्षक आकलन (Tutor Assessment)

इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर feedback देते हैं।

आकलन , रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है।

रचनात्मक आकलन के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है , और सहायता प्रदान की जाती है।

योगात्मक आकलन में बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है।

🌹✒️✒️ Notes by – जूही श्रीवास्तव ✒️✒️🌹

🌼🌼Assesment ( आकलन) 🌼🌼

आकलन assesment मुख्यता 3 तरीके से किया जाता है!!

🌼 1..self assesment (स्व-आकलन)
🌼2..peer assesment (सहपाठी आकलन)
🌼3..tutor assesment (शिक्षक आकलन)

🌼🌼1..स्व- आकलन– स्व-आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है
जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं

🌼🌼2. — peer assesment (सहपाठी / सहयोगी आकलन) –जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में feedback प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह सब का आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है
🌼 सहयोग की भावना रहनी चाहिए
🌼 आकलन में निष्पक्षता रखनी चाहिए
🌼 आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए

🌼🌼🌼3.. Tutor assesment (शिक्षक आकलन )–इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक देता है
आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है
रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान की जाती है युवाओं की उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
By manjari soni

🔆 आकलन के प्रकार 🔆

आकलन मुख्यतः 3 प्रकार से किया जाता है➖

1) स्व आकलन(Self Assessment)

2) सहपाठी/ सहयोगी आकलन(Pear Assessment)

3) शिक्षक आकलन (Tutor Assessment)

🎯 स्व आकलन ( Self Assessment) ➖

इस प्रकार के आकलन में विद्यार्थी स्वयं का आकलन करते हैं अपनी कमजोरियों को खुद ही पहचानते हैं और उनका स्वयं ही पता लगाते हैं इसको स्व आकलन कहते हैं |

स्व आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है |

जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं वे स्वयं के कार्यों को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखकर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं इस प्रकार के आकलन को स्व आकलन कहते हैं |

🎯 सहपाठी / सहयोगी आकलन ( Pear Assessment) ➖

सहपाठी आकलन साथियों द्वारा किया जाता है इसमें एक स्वास्थ्य वातावरण का निर्माण होता है |

जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में फीडबैक ( प्रतिपुष्टि) प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है |

यह स्व आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है क्योंकि स्व आकलन में व्यक्ति स्वयं की कमजोरी का पता नहीं रख पाता है इसमें व्यक्ति सब कुछ अपने नजरिए से देखता है और सहपाठी आकलन में बहुत से लोग अपने नजरिए से आकलन करते समय अपने नजरिए को साझा करते हैं इसलिए यह स्व आकलन से अधिक विस्तृत होता है |

सहयोगी आकलन के लिए आवश्यक है कि ➖

इसमें सहयोग की भावना हो |यदि सहयोग की भावना नहीं होगी तो सहपाठी आकलन का होना संभव नहीं है |

इस प्रकार की आकलन में निष्पक्षता का होना अनिवार्य है यदि निष्पक्षता नहीं होगी तो सहपाठी आकलन नहीं हो सकता है |

आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सोचना चाहिए | क्योंकि इससे एक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है और अच्छे से आकलन किया जा सकता है |

🎯 शिक्षक आकलन ( Tutor Assessment) ➖

इस प्रकार का आकलन शिक्षक के द्वारा किया जाता है |
इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर फीडबैक ( प्रतिपुष्टि) देते हैं |
यह आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है |

रचनात्मक आकलन में फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान की जाती है |

जबकि योगात्मक आकलन में बच्चे की उपलब्धि पर निर्णय लिया जाता है |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺

आकलन के प्रकार📝

आकलन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं

🔥स्व आकलन
🔥सहपाठी आकलन
🔥शिक्षक आकलन

1. स्व आकलन (self assessment)

स्वआकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का एक बेहतर तरीका है। जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं, वे स्वयं के कार्यों को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखकर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं। स्व आकलन बच्चे द्वारा स्वयं के सीखने तथा ज्ञान, कौशल ,प्रक्रियाओं ,रुचि ,व्यवहार आदि में प्रगति के स्व आकलन से संबंधित है।

2. सहपाठी/ सहयोगी आकलन (peer assessment)

जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम में प्रतिपुष्टि (feedback) प्रदान करते हैं वह आकलन सहपाठी आकलन कहलाता है यह आकलन से ज्यादा विस्तृत होता है। इसमें सहयोग की भावना और आकलन में निष्पक्षता होनी चाहिए। आकलन करते समय एक सहपाठी को एक शिक्षक की भांति सूचना चाहिए। इसमें एक बच्चा द्वारा दूसरे बच्चे का आकलन किया जाता है ,इसे दो बच्चों की जोड़ी/ समूह में करवाया जाता है।

3. शिक्षक आकलन (tutor assessment)

इसमें शिक्षक छात्रों के कार्यों पर प्रतिपुष्टि (फीडबैक) देते हैं आकलन रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है। रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है वही योगात्मक आकलन में बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जाता है।

🙏🙏Notes by Shreya Rai 😎

✍🏻 आकलन (Assesment)✍🏻

आकलन को तीन प्रकार मे बाँटा गया हैं ।
👉🏻स्वआकलन (self assement)
👉🏻सहपाठी /सहयोगी आकलन
👉🏻 शिक्षक आकलन

🌈स्वआकलन (सेल्फ assement ➖
स्व-आकलन अधिगम का मूल्यांकन करने का बेहतर तरीका है । जो भी बच्चे अधिगम कर रहे हैं, वे स्वयं के कार्य को आलोचनात्मक दृष्टिकोन से देख कर स्वयं की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं और उसे दूर करने की कोशिश करते हैं ।

🌈सहयोगी आकलन (peer assement )➖
✍🏻जो छात्र अपने सहपाठी छात्रों के अधिगम मे फीडबैक प्रदान करते है, वो आकलन, सहपाठी आकलन कहलाता है।
यह स्व-आकलन से जाएदा विस्तृत होता है।
✍🏻सहपाठी आकलन मे आवश्यक बातें ➖
🌸सहयोग की भावना रहनी चाहिए।
🌸आकलन मे निष्पझता रहनी चाहिए।
🌸आकलन करते समय, एक सहपाठी को एक शिक्षक की तरह सोचना चाहिए।

🌈शिक्षक आकलन (Tutor Assement )
🌸इसमें शिक्षक, छात्रों के कार्यो पर फीडबैक देते है।
🌸आकलन, रचनात्मक या योगात्मक दोनों हो सकता है।🌸रचनात्मक के अंदर छात्रों को फीडबैक दिया जाता है और सहायता प्रदान किया जाता है।
🌸योगात्मक, आकलन मे बच्चों के उपलब्धि पर निर्णय प्रदान किया जायेगा।

♦️Notes By अाकांक्षा♦️
🙏🤗🤟🙏🌸

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.