📝 मूल्यांकन📝Evaluation

मूल्यांकन = छात्र का परिमाणात्मक मापन + गुणात्मक अध्ययन + मूल्य निर्धारण

छात्र का परिमाणात्मक मापन गुणात्मक अध्ययन और मूल्य निर्धारण के द्वारा हम उसका मूल्यांकन करते हैं

मूल्यांकन के उद्देश्य object of evolution

1 बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना

2 यह जांच ना कि बच्चों में कुशलता ओं योग्यताओं को कितना ग्रहण किया है

3 बालक की कठिनाई का निर्धारण दूसरों को जानना

4 उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना

5 बच्चों के चहुमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना

6 इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं

7 इससे शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन या अंकन होता है

सतत और व्यापक मूल्यांकन (सी सी ई)
continuonl and comrhasive evalulion

सी सी ई वर्ष 2009 में आरटीआई एक्ट के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है

मूल्यांकन का यह प्रस्ताव भारत में राज्य सरकार के साथ-साथ भारत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पेश किया गया इसमें छठी से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए और कुछ स्कूलों में 12वीं के लिए पेश किया गया

इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है

🙏🙏🙏🙏sapna sahu 🙏🙏🙏🙏

*📝🎯 मूल्यांकन🎯📝*
मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिसके आधार पर हम किसी छात्र के ज्ञान का आकलन करते हैं। मूल्यांकन के द्वारा ही छात्र की किसी विषय में कमियों, उसकी किसी विषय के प्रति रूचि और उसकी प्रतिभा का आकलन किया जाता है।

*मूल्यांकन_छात्र का परिमाणात्मक मापन+ गुणात्मक अध्ययन +मूल्य निर्धारण*
अर्थात् _छात्र का परिमाणात्मक मापन और गुणात्मक अध्ययन व मूल्य निर्धारण द्वारा उसका मूल्यांकन करना।

*♨️मूल्यांकन के उद्देश्य_♨️*

✍🏻1) बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।

✍🏻2) यह जांचना की बच्चो ने कुशलता और योग्यताओं को कितना ग्रहण किया।

✍🏻3) बालक की कठिनाईयों को निर्धारण व दोषों को जानना।

✍🏻4) उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना।

✍🏻5) बच्चे के चहुमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना।

✍🏻6)इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं।

✍🏻7) इससे शिक्षण विधियों सहित विद्यालयों के अलग अलगक्रियाओंकाआकलन / अंकन करना।

*⚜️{सतत तथा व्यापक मूल्यांकन}⚜️*
सतत तथा व्यापक मूल्यांकन का अर्थ है छात्रों के विद्यालय आधारित मूल्यांकन की प्रणाली जिसमें छात्र के विकास के सभी पक्ष शामिल हैं।

🌈 *सतत मूल्यांकन_* शब्द से यहां अर्थ है कि निर्धारण की नियमितता, यूनिट परीक्षा की आवृत्ति, अधिगम के अंतरालों का निदान, सुधारात्मक उपायों का उपयोग, पुनः परीक्षा और स्वयं मूल्यांकन।

🌈 *व्यापक मूल्यांकन_* का अर्थ है कि इस योजना में छात्रों की वृद्धि और विकास के शैक्षिक तथा सह-शैक्षिक दोनों ही पक्षों को शामिल करने का प्रयास किया जाता है।

*🌸संक्षेप में यहाँ विद्यार्थी का मूल्यांकन मात्र किसी एक परीक्षा पर निर्भर नही होकर उसके वर्षपर्यन्त कार्यो का नियमित मूल्यांकन करना है।🌸*

*⚜️CCE, वर्ष 2009 में RTE Act. के तहत् अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता हैं।⚜️*
*🙏🏻🙏🏻धन्यवाद् 🙏🏻🙏🏻*

📚✍🏻
*Notes by_*
💁🏻‍♀️ *Manisha Yadav*

🌺🌈 मूल्यांकन🌈🌺
(Evaluation)

🎯 मूल्यांकन अंग्रेजी भाषा के इवैल्युएशन शब्द के स्थान पर हिंदी भाषा में प्रयोग किए जाते हैं इस प्रकार evaluation शब्द का अर्थ किसी तथ्य के संबंध में निर्णय लेने तथा निष्कर्ष निकालने से है

🎯 मूल्यांकन शब्द दो शब्दों मूल्य+ आकलन अर्थात एक तथ्य, घटना, विचार आदि के संदर्भों में स्थान नियत करना निर्णय लेना एक अनुभव के संबंध में निष्कर्ष निकालना तथा स्थिति का संपूर्ण वातावरण के संदर्भ में ज्ञान करना

🎯 मूल्यांकन के शाब्दिक अर्थ हो निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है

👉🏼 छात्र व्यवहार का परिणामस्वरूप मापन+गुणात्मक अध्ययन+मूल्य निर्धारण

🎯 मूल्यांकन का उद्देश्य🎯

(Purposes of evaluation)

👉🏼 बच्चों का अपेक्षित व्यवहार और आकलन परिवर्तन की जांच करना

👉🏼 यह जांचना कि बच्चे ने कुशलता व योग्यताओं को कितना ग्रहण किया है

👉🏼 बालक की कठिनाइयों का निर्धारण /दोषों को जानना

👉🏼 बालकों के चहुंमुखी विकास को निरंतर गति को जानना

👉🏼 बालकों की व्यक्तिगत व सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु जानकारी प्रदान करना

🎯 सतत् और व्यापक मूल्यांकन का अर्थ🎯

🎯 सतत् मूल्यांकन➖ सतत मूल्यांकन से तात्पर्य नियमित व निरंतर चलने वाले मूल्यांकन से है

🎯 व्यापक मूल्यांकन➖ व्यापक मूल्यांकन प्रक्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है जो बड़े स्तर में होती है

🎯 CCE वर्ष 2009 मेंRTE Act. के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है

🖊️🖊️📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚🖊️🖊️

⚖️⚖️मूल्यांकन(Evaluation)⚖️⚖️

➡️मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिसके आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि छात्र की रुचि,ज्ञान,समझ वा उसकी प्रतिभा,कौशल, अभिप्रेरणा इत्यादि को इंगित करता है।

➡️मूल्यांकन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है मूल्य तथा अंकन।

🎯छात्र व्यवहार का परिमाणात्मक मापन + गुणात्मक मापन + मूल्य निर्धारण;

🧠परिमाणात्मक मापन-यह हमें प्रणाम का अध्ययन कर आता है।

💫जैसे ➡️ परीक्षा में प्राप्त किए गए अंक खुद की समझ को कि कितना बेहतर कर रहे है, या क्या कमियां हैं इत्यादि ;अर्थात परिणात्मक मूल्यांकन को अंतिम परिणाम मान सकते हैं।

🧠 गुणात्मक अध्ययन बच्चों के विकास का मापन करना संभव नहीं उनका अध्ययन ही संभव है ;

🧠मूल्य निर्धारण- कितना क्या ( Value )मूल्य है आप कितने कीमती है यहां पर कीमत का मतलब पैसो रुपयो से नहीं बल्कि आपकी सभ्यता, व्यवहार, ज्ञान, समझ आदि पहलुओं को लेकर मूल्य निर्धारण करते हैं
(जैसे- स्टीफन हॉकिंग का मूल्य अनमोल था क्योंकि जो इंसान ना खुद से बोल सकता है ना खुद चल सकता है फिर भी अपनी तर्कशक्ति,प्रतिभा से बड़ी से बड़ी समस्या को हल कर सकता है जिसने साबित किया कि ब्लैक होल से कुछ मात्रा मे रेडिएशन निकलते है जिस “हाकिंग रेडिएशन”कहते है वा अन्य खोजों पर भी अपनी तर्कशक्ति,प्रतिभा, से महान कार्य किए किया ।👍

⚖️मूल्यांकन के उद्देश्य⚖️
⚖️ (Objectives of Evaluation)⚖️

🌈बच्चों में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना;

🌈यह जांचना की बच्चो ने कुशलताओ, योग्यताओ को कितना ग्रहण किया;

🌈बालक की कठिनाइयों का निर्धारण करना में वा दोषो को जानना;

🌈उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना (उपचार करने से पहले मूल्यांकन करते है);

🌈बच्चे का चहमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना;

🌈इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं;

🌈इसमें शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन/ अंकन होता है।

🏋️सतत एवं व्यापक मूल्यांकन(Continous and Comprehensive Evaluation)🏋️

🎯सतत् ➡️निरंतर मूल्यांकन
🎯व्यापक➡️बड़े स्तर पर किया गया मूल्यांकन

🌺सीसीई(CCE-Child Ceneterd Education) वर्ष 2009 में आरटीआई (RTI- Right to Information Act)एक्ट के तहत मूल्यांकन अनिवार्य प्रक्रिया हैं, इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।

💞 धन्यवाद💞
🌻Written by-$hikhar pandey🙏

🎯 Evaluation
(मूल्यांकन)🎯

🌀 मूल्यांकन अंग्रेजी भाषा के इवैल्यूएशन शब्द के स्थान पर हिंदी भाषा में प्रयोग किया आता है किस प्रकार इवैल्यूएशन शब्द का अर्थ किसी तत्व के संबंध में निर्णय लेने या उसके निष्कर्ष तक पहुंचने से है।

🌀 मूल्यांकन शब्द दो शब्दों मूल्य+ आकलन अर्थात एक तथ्य घटना विचार आदि के संदर्भ में स्थान नियत करना निर्णय लेना एक अनुभव के संबंध में निष्कर्ष निकालना तथा स्थिति का संपूर्ण वातावरण के संबंध में ज्ञान कराना।

👉 छात्र व्यवहार का परिणामस्वरूप मापन+ गुणात्मक अध्ययन+मूल्य निर्धारण

💫 मूल्यांकन का उद्देश्य ( purposes of evaluation)

👉 बच्चों का अपेक्षित व्यवहार और आकलन परिवर्तन की जांच करना ।
👉यह जांच ना कि बच्चे ने कुशलता व योग्यता को कितना ग्रहण किया है ।
👉बालक की कठिनाइयों का निर्धारण दोषों को जानना ।
👉बालक के चहुमुखी विकास को निरंतर गति को जानना ।
👉बालकों की व्यक्तिगत व सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु जानकारी प्रदान करना।

✨ सतत् और व्यापक मूल्यांकन का अर्थ ➖

💫 सतत् मूल्यांकन ➖
सतत मूल्यांकन से तात्पर्य नियमित व निरंतर चलने वाले मूल्यांकन से है।

💫 व्यापक मूल्यांकन ➖
व्यापक मूल्यांकन एक ऐसी प्रक्रिया है जो बड़े स्तर में होती है।

🌀 CCE ( continuous and comprehensive Evaluation) वर्ष 2009 में RTE Act ( Right to Education Act -2009) के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

🌼🌼मूल्यांकन (Evaluation )🌼🌼

छात्र व्यवहार का – परिमाणात्मक मापन+ गुणात्मक अध्ययन + मूल्य निर्धारण !!!!

🌼🌼मूल्यांकन के उद्देश्य 🌼🌼
🌼objectives of evaluation) 🌼

🌼1.बच्चे में अपेक्षित व्यवहार आचरण परिवर्तन की जांच करना !!
🌼2.यह जांचना कि बच्चे बच्चों ने कुशलता, योग्यताओं को कितना ग्रहण किया है !!!
🌼3.बालक की कठिनाई का निर्धारण /दोषों को जानना !!!
🌼4.उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना
🌼5.बच्चे की चौमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना
🌼6.इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं
🌼7.इससे शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन/ अंकन होता है

🌼सतत और व्यापक मूल्यांकन( CCE) 🌼

🌼सतत मूल्यांकन – सतत् मूल्यांकन निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है
🌼 व्यापक मूल्यांकन-व्यापक बड़े स्तर पर होने वाली प्रक्रिया है..

🌼🌼🌼CCE , वर्ष 2009 में RTE एक्ट के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है इससे छात्र की विकास की सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

Notes by manjari soni

💫🌺🌹 मूल्यांकन 🌹🌺💫

‘ मूल्यांकन ‘ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – मूल्य +अंकन
जिसके माध्यम से बच्चों के मूल्यों का आकलन किया जाता है।
उनकी रूचि, योग्यता, तथा उनकी कमियों का आकलन किया जाता है।

🍂🌷 छात्र व्यवहार का परिणामात्मक मापन +गुणात्मक अध्ययन +मूल्य निर्धारण

🔥💫🍂🌻 मूल्यांकन के उद्देश्य 🌻🍂💫🔥

🌿🌹 बच्चों में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।

🍃🌻यह जांचना की बच्चों ने कुशलताओं , योग्यताओं को कितना ग्रहण किया जाता है।

🌿🌺बालक की कठिनाईयों का निर्धारण/दोषों को जानना।

🍂🌹 उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना।

🍁🌻बच्चें के चहुंमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना है।

🍃🌷 इसके अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं।

🌿🌹 इससे, शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन / अंकन होता है।

⭐🌺🍂🌻सतत और व्यापक मूल्यांकन 🌻🍂🌺⭐

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में बच्चों के हर पहलू का अध्ययन किया जाता है।

🍂🌹सतत मूल्यांकन🌹🍂

इस पहलू में बच्चों का निरंतर मूल्यांकन किया जाता है।

🌿🌻 व्यापक मूल्यांकन 🌻🌿

इस पहलू में बच्चों का बड़े स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है।

🔥⭐🍂CCE , वर्ष 2009, में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE act) के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है।

🌹🌺 इसमें छात्र के विकास के सभी पहलुओं को सम्मिलित किया जाता है 🌺🌹

☃️🌹🌺🍂🌻 Notes by -. Babita yadav 🌻🍂🌺🌹☃️

🌹🌹🌹🌺🌺🌺🌻🌻🌸🌸🍁🍁🍁🍁🌷🌷

🌹🌹 मूल्यांकन Evaluation 🌹🌹

मूल्यांकन छात्र व्यवहार का
“परिमाणात्मक मापन + गुणात्मक अध्ययन + मूल्य निर्धारण ”

🌺 मूल्यांकन के उद्देश्य Objectives Of Evaluation

👉बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।
👉यह जानना कि बच्चों ने कुशलताओं योगात्मकताओं को कितना ग्रहण किया है।
👉बालक की कठिनाइयों का निर्धारण / दोषों को जानना।
👉उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना।
👉बच्चे के चौमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना। 👉इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं।
👉इससे शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन / अंकन होता है।

🌹 सतत् और व्यापक मूल्यांकन [ C C E ] 🌹Continuous & Comprehensive Evaluation

सतत् 👉 निरंतर ।
व्यापक 👉 बड़े स्तर पर ।

🌲 सतत् मूल्यांकन निरंतर चलने बाला मूल्यांकन है।

🌲 व्यापक मूल्यांकन व्यापक रूप से बड़े स्तर पर चलने बाला मूल्यांकन है।

🌺 CCE :- वर्ष 2009 में [ RTE अधिनियम ] के तहत, अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है।

इसमें छात्रों के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।

इस पद्धति में कक्षा 6 – कक्षा 10 तक मूल्यांकन किया जाता है, और किसी विद्यलयों मे कक्षा 12 तक भी मूल्यांकन किया जाता है।

🌺✒️✒️ Notes by- जूही श्रीवास्तव ✒️✒️🌺

🔆 मूल्यांकन ( Evaluation) ➖

मूल्यांकन छात्र व्यवहार का परिमाणात्मक मापन + गुणात्मक अध्ययन + मूल्य निर्धारण तीनों का योग है |

या कह सकते हैं कि छात्र व्यवहार के परिमाणात्मक मापन , गुणात्मक अध्ययन एवं उसके मूल्यों के निर्धारण का जो अध्ययन है वह मूल्यांकन है |

मूल्यांकन दो शब्दों” मूल्य+ अंकन “से मिलकर बना है अर्थात जिसके माध्यम से हम बच्चों के मूल्यों का अध्ययन या उनका आकलन करते हैं |

उनकी रुचि ,योग्यता ,कमियों, और उनकी क्षमताओं का अध्ययन किया जाता है मूल्यांकन के द्वारा छात्र के प्रत्येक पक्ष का बारीकी से आकलन किया जा सकता है |

💫 मूल्यांकनके उद्देश्य ( Objective of Evaluation) ➖
आकलन मूल्यांकन का एक भाग है | किन्तु आकलन छोटे स्तर पर किया जाता है और मूल्यांकन बड़े स्तर पर किया जाता है |
मूल्यांकन के उद्देश्य निम्नलिखित हैं ➖

🎯 बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना |
अर्थात एक बच्चे के तार्किक चिंतन में कितना विकास हुआ है और उनके आचरण में कितना परिवर्तन हुआ है इसकी जांच करना मूल्यांकन के उद्देश्य के अंतर्गत आता है |

🎯 यह जांच करना कि बच्चों ने कुशलताओं और योग्यताओं को कितना ग्रहण किया है |
अर्थात मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य उनमें प्रगति करना है उपलब्धि करना है ये देखना कि उनमें कितना बदलाव आया है उसकी पहचान करना है |
इससे हम बच्चों की कुशलता और योग्यता का पता कर सकते हैं कि उसका मूल्यांकन किस स्तर का है और उसमें और कितना विकास करना है |

🎯 बालक के कठिनाई का निर्धारण एवं दोषों को जानना |
अर्थात बच्चे के कठिनाई का स्तर जानना और उनके दोषों को जानना कि अभी उनमें कितना परिवर्तन करना है |
उनकी कठिनाई किस स्तर की है यदि हमें उनकी कठिनाई के स्तर का पता चल जाएगा तो उपचारात्मक शिक्षण करने में आसानी होगी |

🎯 उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना |
बच्चे की कठिनाई स्तर का पता लगाकर उनकी समस्याओं का निदान करके उनका उपचार करना है इससे बच्चों का मूल्यांकन बेहतर होगा और प्रभावी रहेगा |

🎯 बच्चे की चहुमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना |
अर्थात बच्चे के सभी पक्षों को देखते हुए उनका चौतरफा विकास करना और उस को आगे बढ़ाना मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य है इसके अंतर्गत हम बच्चे की सभी छोटे बड़े पक्षों को देखते हुए उनका आलोचनात्मक आकलन करते हैं और उसके अनुसार उनके सर्वांगीण विकास की निरंतरता में गति प्रदान करते हैं |

🎯 इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं |
अर्थात् मूल्यांकन के द्वारा अध्ययन और अध्यापन दोनों की जांच करके उनमें सुधार किया जा सकता है कि अध्ययन में किस शिक्षण विधि का प्रयोग करना है किस तरीके से बच्चों के सामने अभिव्यक्त करना है आदि के द्वारा हम मूल्यांकन को एक अच्छे प्रकार से कर सकते हैं |

🎯 मूल्यांकन द्वारा शिक्षण विधि की उपयोगिता और विद्यालय की अलग-अलग क्रियाओं का आकलन या अंकन किया जाता है |
यदि मूल्यांकन निरंतर रूप से किया जाए तो हम अपने शिक्षण विधि में परिवर्तन करके अलग-अलग क्रियाकलापों के द्वारा शिक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और मूल्यांकन में सुधार किया जा सकता है |

💫 सतत और व्यापक मूल्यांकन ( Continues and Comprehensive Evaluation) ➖

सतत और व्यापक मूल्यांकन से बच्चे का निरंतर और बड़े स्तर पर अर्थात उसके हर एक पहलू को देखते हुए उसका आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जा सकता है |

सतत मूल्यांकन का अर्थ निरंतर रूप से जो मूल्यांकन किया जाता है |

तथा व्यापक मूल्यांकन का अर्थ बड़े स्तर पर और उसके हर पक्ष का मूल्यांकन किया जाता है ताकि बच्चे का सर्वांगीण विकास हो सके |

सतत और व्यापक मूल्यांकन 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम RTE Act ( Right to education act) के तहत मूल्यांकन अनिवार्य प्रक्रिया है |

इसमें छात्र के विकास में सभी पक्षों को शामिल किया जाता है |

सतत मूल्यांकन एक घटना नहीं है बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें बच्चे के किसी एक पक्ष पर नहीं बल्कि सभी पक्षों को देखते हुए मूल्यांकन किया जाता है |
जबकि व्यापक में छात्र के शैक्षिक और सह – शैक्षिक स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है |

इस प्रक्रिया में कक्षा 1 – 10 तक मूल्यांकन किया जाता है लेकिन किसी विद्यालयों में कक्षा 12 तक भी सतत और व्यापक मूल्यांकन करना शुरू कर दिया गया है |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮 ➖𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺

🌼🌼 मूल्यांकन🌼🌼 Evaluation

▫️ मूल्यांकन छात्र व्यवहार का परिमाणात्मक मापन +गुणात्मक अध्ययन+ मूल्य निर्धारण

💐 मूल्यांकन के उद्देश्य

▫️ बच्ची में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।

▫️ यह जांच ना कि बच्चों ने कुशलता योग्यता को कितना ग्रहण किया है।

▫️ बालकों की कठिनाइयों का निर्धारण और दोषों को जानना।

▫️ उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना

▫️ बच्चे के चहुंमुखी विकास विकास को निरंतर गति प्रदान करना।

▫️ इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं।

▫️ इससे शिक्षण विधियां सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन /अंकन होता है।

🌼 सतत और व्यापक मूल्यांकन🌼
(CCE)

💐 सतत् मूल्यांकन:- इस मूल्यांकन में बालक का निरंतर मूल्यांकन किया जाता है।

💐 व्यापक मूल्यांकन:- इस मूल्यांकन में बालक के हर एक पहलू का तथा बड़े स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है।

🌼CCE :– 2009 में RTE एक्ट के तहत् अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है।

▫️ इसमें छात्रों के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।

🌼🌼🌼🌼🌼

🌼NOTES BY
🌼 Shashi choudhary🌼

🙏🙏🙏🙏🙏

🔶 मूल्यांकन (Evaluation) 🔶

मूल्यांकन में यह पता लगाना है कि कोई वस्तु मात्रा मैं कितनी अधिक या कितनी कम है कितनी बड़ी है कितनी छोटी है यह बात हर प्रकार के मूल्यांकन के संबंध में कही जा सकती है | परंतु योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए हमें एक परीक्षण में प्राप्त अंकों को देखना पड़ता है |
मूल्यांकन दो शब्दों से मिलकर बना है [ मूल्य + अंकन = मूल्यांकन ]
मूल्यांकन का अर्थ मूल्य निर्धारण से है अर्थात सीखने के अनुभव से बालक में जो व्यवहारगत परिवर्तन हुए हैं उनका परीक्षण करना निर्णय लेना निष्कर्ष निकालना ही मूल्यांकन है |

💫 छात्र व्यवहार का परिमाणात्मक मापन + गुणात्मक अध्ययन + मूल्य निर्धारण

💫 छात्र व्यवहार का परिमाणात्मक मापन और गुणात्मक अध्ययन का मूल्यनिर्धारण करना ही मूल्यांकन कहलाता है |
🔅 मूल्यांकन के उद्देश्य (Objectives of Evaluation ) ➖
1⃣ बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना |
बच्चों में व्यवहार आचरण में क्या परिवर्तन हुए जैसे कि बड़ों के प्रति कैसा व्यवहार रखते हैं बच्चे में यह परिवर्तन की जांच करना ही मूल्यांकन करना है |
2⃣ यह जांचना कि बच्चों ने कुशलताओ योग्यताओं को कितना ग्रहण किया | यह बच्चो में उनके व्यवहार से आता है |
3⃣ यह बालक की कठिनाई का निर्धारण करता है और उनके दोषो को जानना है |
4⃣ बालको का उपचारात्मक शिक्षण में मूल्यांकन के रूप में प्रदान किया जाता है |
5⃣ बच्चे के चहुमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना |इसमें बच्चे के विकास के बारे में जाना जाता है कि बच्चे में निरंतर विकास कितना हुआ है | मूल्यांकन के दौरान देख सकते है |
6⃣ इसमें बच्चों का अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं | इसमें यह देखा जाता है कि बच्चों ने कितना सीखा है उसका मूल्यांकन किया जाता है |
7⃣ मूल्यांकन द्वारा इससे शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन / अंकन होता है |

🔅सतत और व्यापक मूल्यांकन🔅
(Continuous & comprehensive Evaluation ) [ CCE ]

▪ सतत ➖ ये निरंतर चलता रहता है |
▪ व्यापक ➖ यह बड़े स्तर पर होता है |

सतत व्यापक मूल्यांकन CCE वर्ष 2009 में RTE Act के तहत अनिवार्य मूल्यांकन की प्रक्रिया थी जिसे 2009 में भारत की शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा निर्देशित किया गया था मूल्यांकन का यह प्रभाव भारत के राज्य सरकारों साथ ही भारत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पेश किया गया था छठी से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए और कुछ स्कूलों में बारहवीं तक मूल्यांकन किया जाता है |

Notes by ➖Ranjana Sen

🙇‍♀️मूल्यांकन ( Evaluation)?

👉 मूल्यांकन छात्र व्यवहार का:— परिमाणात्मक मापन +गुणात्मक अध्ययन+ मूल्य निर्धारण

🎯मूल्यांकन के उद्देश्य:—

➡️ बच्चे में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।

➡️ यह जांचना कि बच्चों ने कुशलता, योग्यता को कितना ग्रहण किया है।

➡️ बालकों की कठिनाइयों का निर्धारण और दोषों को जानना।

➡️उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना

➡️ बच्चे के चहुंमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना।

➡️ इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों का मापन कर सकते हैं।

➡️ इससे शिक्षण विधियां सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन /अंकन होता है।

🙇‍♀️सतत और व्यापक मूल्यांकन🙇‍♀️
(CCE)

➡️ सतत् मूल्यांकन:- इस मूल्यांकन में बालक का निरंतर मूल्यांकन किया जाता है।

➡️ व्यापक मूल्यांकन:- इस मूल्यांकन में बालक के हर एक पहलू का तथा बड़े स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है।
➡️सतत मूल्यांकन निरंतर चलने वाला मूल्यांकन है

➡️व्यापक मूल्यांकन व्यापक रूप से बड़े स्तर पर चलने वाला मूल्यांकन है

🔄CCE :– 2009 में RTE एक्ट के तहत् अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है।

➡️इसमें छात्रों के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है

➡️इस पद्धति में कक्षा 6 – कक्षा 10 तक मूल्यांकन किया जाता है, और किसी विद्यलयों मे कक्षा 12 तक भी मूल्यांकन किया जाता है।

Notes by: sangita bharti
🙏🙏🙏🙏

💫मूल्यांकन🎯 (Evaluation)

🌀यह कक्षा के दौरान एवं कक्षा के अंत में क्या जाता है, मूल्यांकन में हम छात्रों के फाइनल अंक के आधार पर जज करते हैं तथा छात्रों के गुणों का पता करते हैं एवं उसका वैल्यू का पता चलता है मूल्यांकन से बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन करते हैं।
अर्थात हम कह सकते हैं की छात्र व्यवहार का :- परिमाणात्मक मापन+ गुणात्मक अध्ययन +मूल्य निर्धारण ,की प्रक्रिया मूल्यांकन कहलाता है।

💫 मूल्यांकन के उद्देश्य🎯
(objective of evaluation)

🌾बच्चों में अपेक्षित व्यवहार और आचरण परिवर्तन की जांच करना।

🍁 यह जांचना कि बच्चे ने कुशलता, योग्यताओं को कितना ग्रहण किया है।

🍂 बालक की कठिनाई का निर्धारण/ दोषों को जानना।

🥏 उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करना ।

🌻बच्चों के चहुंमुखी विकास को निरंतर गति प्रदान करना।

💐 इससे अध्ययन और अध्यापन दोनों काम मापन कर सकते हैं।

🌺 इसमें शिक्षण विधियों सहित विद्यालय के अलग-अलग क्रियाओं का आकलन / अंकन होता है।

🌻सतत और व्यापक मूल्यांकन

🌿सतत मुल्यांकन
सतत मूल्यांकन का अर्थ कंटीन्यूअस /लगातार /निरंतर चलने वाली प्रोसेस है।

🌀व्यापक मूल्यांकन
यह बड़े स्तर पर क्या जाता है।

🍂CCE( continuous and compressive evaluation वर्ष 2009 में आरटीई एक्ट के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है।
इसमें छात्राओं के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है।

🙏Notes by-SRIRAM PANJIYARA🙏

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