🔆 शिक्षक के लिए वातावरण का महत्व ➖

❇️1 शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

▪️शिक्षक व छात्र दोनों मिलकर एक शिक्षा का वातावरण या माहौल बनाते हैं जिससे उस वातावरण या माहौल के हिसाब से सायकोलॉजी होती जाती है उसी प्रकार से हम निर्णय कर पाएंगे कि हम सीखेंगे या नहीं।

▪️शिक्षक को बच्चे के लिए सर्वप्रथम एक सहज वातावरण रखना है तथा साथ ही बच्चों के लिए शिक्षा का उत्साही वातावरण रहे यह भी ध्यान रखना है शिक्षक को उत्तम वातावरण की स्पष्ट जानकारी रखना भी अत्यंत आवश्यक है जिसके आधार पर वह उचित और उत्तम वातावरण छात्रों को प्रदान कर पाएंगे जिससे बच्चों के ज्ञान को बढ़ा पाएंगे।

❇️ 2 बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है शिक्षा इन वातावरण के स्थान को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है।

▪️मात्र बच्चे को उपयुक्त वातावरण में पढ़ा देने से ही बेहतर रूप से छात्र को नहीं सिखा पाएंगे इसीलिए कक्षा कक्ष के वातावरण के साथ-साथ अन्य स्थानों के बारे में भी शिक्षक को ध्यान रखना होगा क्योंकि बच्चे अधिकतर अपना समय यहां पर व्यतीत करते हैं इसीलिए यह वातावरण शिक्षक द्वारा अवलोकन किया जाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि कक्षा कक्ष का उत्तम वातावरण।

❇️ 3 रूत बेनेडिक्ट के अनुसार

“व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है।”

▪️स्थिति को जानने वाला शिक्षा की बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

▪️एक शिक्षक के रूप में बालक के आदर्शों के अनुरूप जिसका उसके द्वारा पालन किया जा रहा है तथा जो उचित व सही संस्कृति है उसको जानकर वह समझ कर ही छात्रों की संस्कृति को एक सही तरीके से विकसित किया जा सकता है।

▪️प्रत्येक प्राणी विशेष रूप से अपनी संस्कृति से किसी ना किसी रूप से प्रभावित रहते हैं यदि हमारी संस्कृति के विपरीत कोई भी कार्य या बात होती है तो उस कार्य को हम स्वीकार करने में कुछ समय लेते हैं। या जब कभी कभी हमारी संस्कृति के विरुद्ध कार्य किया जाता है या किसी  एक तरह की ही संस्कृति को  ही सभी जगह बढ़ावा दिया जाता है,तो हम उस संस्कृति को या उस व्यक्ति को कभी नहीं स्वीकारते या किसी भी प्रकार की कोई मान्यता नहीं देते हैं।

▪️इसीलिए शिक्षक को प्रत्येक बच्चे की संस्कृति को समान महत्व देना एवं सभी का सम्मान करना और सभी का पालन करना है।

❇️ 4 यूनेस्को  के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण का बालक की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उससे उनके चरित्र का निर्माण होता है।

▪️ शिक्षक कैसे वातावरण का निर्माण करें जिससे ना केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो बल्कि इसके साथ-साथ चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

▪️व्यक्ति की जैसी भावनाएं जैसे संवेग होते हैं वैसे ही विचार आते हैं और उन्ही विचारों से हम कार्य को करते हैं।इसीलिए शिक्षक को बच्चे की भावनाओं को संतुलित रूप से विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 ▪️यहां संतुलित रूप से  विकास करने से तात्पर्य है कि बच्चों को किस विषय में कहां तक सही प्रकार से सोचना है? या उसकी क्या सीमाएं हैं? कहां तक नहीं सोचना है? इत्यादि और अपनी भावनाओं के संतुलन के साथ कार्य को करना और आगे बढ़ना है।

❇️ 5 अनुकूल वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है।

▪️इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि ,प्रकृति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

❇️ 6 वातावरण बालक के विकास की दिशा निर्धारित करता है।

▪️वातावरणीय निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा ,चरित्रवान या चरित्रहीन ,देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा।

❇️ 7 वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, शिष्ट सामाजिक व्यवहार, कर्तव्यों और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

▪️ शिक्षक के रूप में यदि कोई कार्य या बात कहां करनी है और कितनी व किस तरह से करनी है कहां रुकना है कहां बढ़ना है अर्थात हर बात का संतुलन ।यह सभी बातें एक सफल वातावरण को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

▪️व्यक्ति के विचारों  की उचित अभिव्यक्ति हो पाए लेकिन व्यवहार भी सामाजिक बना रहे । अर्थात कक्षा की गरिमा बनी रहे।

अधिकारों का ज्ञान हो लेकिन कर्तव्यों का भी ज्ञान हो।

हमारी जो भी स्वाभाविक प्रवृत्ति है उन पर भी नियंत्रण रखना।

▪️इन सभी गुणों का विकास ,वातावरण का महत्व समझने वाला या जानने वाला शिक्षक ही कर सकता है। जिससे छात्र द्वारा पालन भी किया जाना चाहिए।

❇️ 8 प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है।

▪️हम जानते हैं कि हर समाज का अपना एक विशिष्ट वातावरण है जिसमें बच्चा रहता है हर क्षण या हर पल शिक्षक छात्र के साथ नहीं रह सकता और इस स्थिति में कई बार बच्चे को उस वातावरण के साथ अनुकूलन करना पड़ता है । इस बात से परिचित होने वाला यदि कोई शिक्षक है तो वह अपनी कक्षा को या विद्यालय को एक लघु समाज का रूप प्रदान करके वह ज्ञान दे सकता है ,जिससे बच्चा अपने आगे आने वाले विस्तृत समाज के साथ बेहतर रूप से अनुकूलन स्थापित कर पाएगा।

▪️शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है इस तरह से ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

✨सोरेनसन के अनुसार 

“शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।”

✍️

    Notes By-‘Vaishali Mishra’

💐वातावरण का महत्व💐

 सोरेनसन के अनुसार:-  शिक्षा का उत्तम वातावरण  बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से  उत्तम  शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की  चेष्टा करता है 

बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है

रुथ बैंडिक्ट  के अनुसार:- व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है

इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है

यूनेस्को के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि,

                                                           , वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उससे उनके चरित्र का निर्माण होता है

शिक्षक  ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे ना केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो

 अनुकूल वातावरण मैं ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है

इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि प्रकृति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करता है

वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है:- वातावरण यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा चरित्रवान या चरित्रहीन देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा

वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थिति कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति  शिष्ठ सामाजिक व्यवहार कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो

प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान करके बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है

शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर की शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं

 सोरेनसन के अनुसार:- शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के  सापेक्षिक प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है

सपना साहू 

💠💠💠🌴🌴🌳🌳🌴🌴🌴🌴🌴

वातावरण का महत्व

    🌎🌙🌦️👩‍🏫🕵🏻‍♀️✍🏻🌴🌞

🌞1. सोरेंसन के अनुसार ✍🏻

 शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है। 

         इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

🌞2. बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है।

        शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है ।

🌞3. रूथ बैंडिक्ट के अनुसार ✍🏻

व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है।

        इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

🌞4.  यूनेस्को के कुछ विशेषज्ञों का मत है कि वातावरण बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उसके  उनके चरित्र का निर्माण होता है।

         शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो सके बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

🌞5. अनुकूल वातावरण नहीं जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है।

         इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण आदान – प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

🌞6. वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है। यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, चरित्रवान या चरित्रहीन, देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा।

🌞7. वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, शिष्ट सामाजिक व्यवहार, कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान, और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

🌞8. प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है। बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है। इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक, विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है ।

📝 शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

सोरेनसन के अनुसार ✍🏻

शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

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Notes  by Shreya Rai  ✍🏻

🎉वंशानुक्रम वा वातावरण के सापेक्ष शिक्षक का महत्व🎉

          💢  वातावरण का महत्व💢

✍️🌸1-सोरेन्सन के अनुसार

🏵️शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है इस बात की जानकारी करने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

🏵️2-बालक अपने परिवार पास -पड़ोस, गली मोहल्ले ,और खेल के मैदानों में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं,शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित प्रदर्शन करता है।

🌋3-रूथ व बेंडिट के अनुसार

व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है,इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

UNESCO(United Nations Educational, Scientific and Cultural organization)

🏵️यूनेस्को संस्था के अनुसार

यूनेस्को के कुछ विशेषज्ञो का कहना है कि वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उससे उनके चरित्र का निर्माण होता है,

                                              शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

🏵️5-अनुकूल वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है;

                                          इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

🏵️6-वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है

वातावरण यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, देश प्रेमी व देशद्रोही, चरित्रवान या चरित्र इत्यादि में क्या ? बनेगा।

🏵️7-वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक÷

विद्यालय में बालकों के लिए शिक्षक एक ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति,शिष्ट सामाजिक व्यवहार ,कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

🏵️8-प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर केh बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूल करने की शिक्षा दे सकता है।

🏵️शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकता है।

✍️🌸सोरेन्सन का कथन-शिक्षक के लिए मानव  विकास पर  वंशानुक्रम या वातावरण के सापेक्षिक प्रभाव,और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

written by-Shikhar

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🔆 वातावरण के महत्त्व में शिक्षक की भूमिका ➖

⭕ सोरेन्सन के अनुसार ➖

” शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है |

अर्थात यदि शिक्षक को अपने बालकों की  कमजोरियों का पता है तो शिक्षक कक्षा में ऐसा वातावरण उत्पन्न करता है जिससे बालकों की बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि हो सके और उनमें नई चीजों की खोज करने की प्रवृत्ति उत्पन्न हो सके |

⭕ बालक अपने परिवार,  पड़ोस , मौहल्लै और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है | 

शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है |

अर्थात् शिक्षक को बच्चे के घर के और उसके बाहरी वातावरण के बारे में पता होना अति आवश्यक है तभी शिक्षक बच्चे का सही मार्गदर्शन कर सकता है  और इसके विपरीत यदि शिक्षक को छात्र के अनौपचारिक वातावरण का पता नहीं होगा तो  वह उसका उचित मार्गदर्शन  कर ही नहीं सकता है |

 क्योंकि यदि बच्चे के घर का और उसके आसपास का वातावरण ठीक नहीं होगा तो कक्षा का वातावरण कितने भी अच्छे तरीके से बनाया जाए बच्चा सीखने में असमर्थ ही होगा |

⭕ रूथ बैडिक्ट के अनुसार➖

 व्यक्ति जन्म से ही निश्चित सांस्कृतिक वातावरण रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है |

तथा तथ्य को जाने वाला शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है  |

अर्थात व्यक्ति का जन्म एक समाज में होता है तो उसके समाज की एक निश्चित संस्कृति होती है जिस सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण में बच्चा बड़ा होता है और उसके अनुसार ही वह समाज के मानदंड के अनुसार उसका आचरण धारण करता है  | 

यदि शिक्षक को बच्चे के सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण की जानकारी नहीं होगी तो वह बच्चे का संपूर्ण विकास नहीं कर सकता है उसके सामाजिक सांस्कृतिक विकास में योगदान नहीं कर सकता है |

यदि  शिक्षक बच्चे के सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण के विपरीत अपनी भूमिका प्रदर्शित करता है तो  बच्चे उससे पढ़ने में सहज महसूस नहीं कर पाते हैं  शिक्षा अर्जित करने में असमर्थता व्यक्त करते हैं  और उसके साथ शिक्षा ग्रहण करने में आरामदायक भी नहीं समझते हैं |

 हमारा भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है जिसमें सभी वर्गों को समान रूप से सम्मान दिया जाता है और यदि शिक्षक बच्चे की सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण के बारे में  जानकारी नहीं रख पाता है तो  इससे बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ सकता है |

⭕ यूनेस्को के कुछ विशेषज्ञों ने का कहना है कि➖

”  वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उससे उनके  चरित्र का निर्माण होता है ऐसी परिस्थिति में शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे ना केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो बल्कि उनके चरित्र निर्माण में  भी सहायक हो |

 क्योंकि शिक्षा का सार्थक अर्थ होता है कि  बालक का सर्वागीण विकास, उसका चारों ओर से चाहे वह सामाजिक ,मानसिक या चाहे वह उसका संवेगात्मक विकास हो सभी प्रकार से विकास होना अनिवार्य है  |

और यह तभी संभव हो पाएगा जब शिक्षक बच्चे की भावनाओं  को सही प्रकार से  समझेगा जिससे बच्चे अपने विचार साझा कर सकें तभी बच्चे के चरित्र का निर्माण हो सकता है |

⭕ अनुकूल वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है |

 इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है |

अर्थात यदि कक्षा कक्ष या विद्यालय का वातावरण छात्र अनुकूल है जहां उसके विचारों को व्यक्त करने का अवसर दिया जाता हो उसकी रूचि, क्षमता और उसकी सोच आदि को महत्व दिया जाता है तो बच्चे का इस प्रकार के वातावरण में सर्वांगीण विकास हो सकता है जो सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि क्या शिक्षक अपने बच्चों की रुचि आवश्यकता  या उनके विचार को समझता है और उनके अनुसार वातावरण उत्पन्न कर सकता है | यदि यह सब विद्यालय में संभव है तो बच्चे का विकास सर्वांगीण विकास हो होगा और इस प्रकार से बच्चे अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं |

⭕ वातावरण , विकास की दिशा निर्धारित करता है वातावरण यह बात निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, चरित्रवान या चरित्रहीन ,देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा |

 इस बात को हम इस प्रकार से सिद्ध कर सकते हैं कि यदि दो जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा जाता है तो उनका भी विकास भी वातावरण के अनुरूप ही होता है |

यदि एक बच्चे का वातावरण बहुत अच्छा है और एक बच्चे का वातावरण अच्छा नहीं है तो उनका विकास उनके वातावरण पर ही निर्भर करेगा किक्षकिस प्रकार से बच्चे का विकास होगा |

⭕ वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में  में ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है जिसमें उनके विचारों की उचित अभिव्यक्ति हो उनका शिष्ठ सामाजिक व्यवहार ,कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान तथा स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो |

⭕ प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है |

इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को एक लघु समाज का रूप प्रदान करके बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है |

क्योंकि हम जानते हैं कि जब बच्चे का जन्म होता है तो वह एक सामाजिक वातावरण का हिस्सा बन जाता है जिसमें समाज केअपने मानदंड होते हैं जिनका पालन करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है और इन मानदंडों का पालन करते हुए बच्चा अपने सामाजिक वातावरण में अनुकूलन करता है  |

यदि शिक्षक इस बात को समझता है तो वह अपने विद्यालय या अपने कक्षा कक्ष को एक छोटे समाज के रूप में प्रदान कर सकता है और इससे उनको समाज में अनुकूलन करने की प्रेरणा दे सकता है जिससे वे समाज का हिस्सा बनकर उसमें अपनी भागीदारी था का निर्वाह कर सकें |

🎯   शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण का ज्ञान बहुत आवश्यक है इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय,संतुलित और सर्वांगीण विकास कर सकता है |

 इस संबंध में में  “सोरेन्सन” ने कहा है कि➖

 ” शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है  |”

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

🍀🌸🌻🌼🌺🌸🍀🌺🌻🌼🌺🌸🍀🌻🌼🌺🌸🍀🌻🌼

🌲🌴 वातावरण का महत्व🌲🌴

 🤵🏼सोरेंसन के अनुसार ,”

 शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है। 

 👉🏻  इस बात की जानकारी रखने वाला 🧑‍🏫शिक्षक अपने छात्रों 🧑‍💻👩‍💻के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

⚫👼🏻 बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है।

    🧑‍🏫 शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है ।

🤵🏼 रूथ बैंडिक्ट के अनुसार ,”

व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है।

 इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

⚫यूनेस्को के कुछ विशेषज्ञों का मत है कि वातावरण बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उसके  उनके चरित्र का निर्माण होता है।

      🧑‍🏫शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो सके बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

⚫ अनुकूल वातावरण नहीं जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है।

       👉🏻  इस बात को समझने वाला 🧑‍🏫शिक्षक अपने छात्रों👩‍💻🧑‍💻 की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण आदान – प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

⚫वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है। यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, चरित्रवान या चरित्रहीन, देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा।

⚫. वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, शिष्ट सामाजिक व्यवहार, कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान, और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

⚫प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है। बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है। इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक, विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है ।

 🧑‍🏫शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

🤵🏼सोरेनसन के अनुसार ,”

शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

  📝🖊️📖Notes by shikha tripathi📚📕📗

वंशानुक्रम एवं वातावरण के सापेक्ष शिक्षकों के महत्व के अंतर्गत   –     वातावरण का महत्व

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23 march 2021

👉👉    सोरेन्सन  के अनुसार  :- 

शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है। इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

🌺  बालक अपने परिवार , पड़ोस , मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं।

       अतः शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित प्रदर्शन करते हैं।

अर्थात् बच्चों का उचित प्रदर्शन करने के लिए शिक्षकों को उनके आसपास के वातावरण को भी परखना होता है जिसके आधार पर शिक्षक बच्चों का उचित मार्गदर्शन / पथ प्रदर्शन कर पाते हैं।

👉👉   रूथ बेंडिक्ट  के अनुसार  :-

व्यक्ति जन्म से एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है ।

       इस तथ्य को जानने वाले शिक्षक बालक को अपना सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकते हैं।  

👉👉👉 ( Unesco यूनेस्को )  के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि-  

 वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उनके चरित्र का निर्माण होता है।

       अतः शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

 🌺  अनुकूल वातावरण में भी जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है ।  

    इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि ,  प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान करके आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान कर सकता है।

🌺  वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है ।

वातावरण यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा , चरित्रबान या चरित्रहीन , देशप्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा।

🌺  वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण निर्मित कर सकता है जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति , शिष्ट  सामाजिक व्यवहार , कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण आदि गुणों का अधिकतम विकास हो सके।

🌺  प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है ।

बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है ,  इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की दिशा दे सकता है।

🌺  शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों को ज्ञान होना बहुत महत्वपूर्ण है ।

इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

👉 👉  सोरेनसन के अनुसार  :-

शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

अंततः उपर्युक्त तथ्यों के आधार पे हम समझ सकते हैं कि बच्चों के वातावरण आधारित विकास में शिक्षकों का महत्वपूर्ण स्थान होता है , जिसके आधार पर ही शिक्षक बच्चों को उनमें, उनके संसार , और उनके जीवन में उचित अनुचित  का सही ज्ञान और समझ विकसित करते हैं।

✍️Notes by – जूही श्रीवास्तव✍️

वातावरण का महत्व ➖

1. सोरेंसन के अनुसार:-

 शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है। 

     इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

2. बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है।

        शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है ।

3. रूथ बैंडिक्ट के अनुसार :-

व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है।

        इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को उसका सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

4.  यूनेस्को(UNESCO) के कुछ विशेषज्ञों का मत है ➖ वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उसके  उनके चरित्र का निर्माण होता है।

         शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें ,जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो सके बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

5. अनुकूलित वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है।

         इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण का आदान – प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

6. वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है। यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, चरित्रवान या चरित्रहीन, देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि में से क्या बनेगा।

7. वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है, जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, शिष्ट सामाजिक व्यवहार, कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

8. प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है। बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है। इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक, विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है।

 ➡️शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

सोरेनसन के अनुसार :-

शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

DeEPiKa RaY📊📊

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🌌🏵️🏵️वंशानुक्रम एवं वातावरण के सापेक्ष शिक्षकों के महत्व मेंवातावरण का महत्व ➖🏵️🏵️🎇🎇

🌲✏️1. सोरेंसन के अनुसार➖️

 शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है। 

     इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

🌲2. बालक अपने परिवार ,पड़ोस, मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है।

        शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है ।

🌲✏️3. रूथ बैंडिक्ट के अनुसार ➖️

व्यक्ति जन्म से ही एक निश्चित सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदर्श के अनुरूप ही आचरण करता है।

        इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को उसका सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

🌲4.  यूनेस्को(UNESCO) के कुछ विशेषज्ञों का मत है ➖ वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उसके  उनके चरित्र का निर्माण होता है।

         शिक्षक ऐसे वातावरण का निर्माण करें ,जिससे न केवल बच्चे की भावनाओं का संतुलित विकास हो सके बल्कि उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

🌲5. अनुकूलित वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है।

         इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि, प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण का आदान – प्रदान करके आगे बढ़ने में सहायता प्रदान कर सकता है।

🌲6. वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है। यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा, चरित्रवान या चरित्रहीन, देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि में से क्या बनेगा।

🌲7. वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण उपस्थित कर सकता है, जिससे उनमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, शिष्ट सामाजिक व्यवहार, कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो।

🌲8. प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है। बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है। इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक, विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान कर के बालक को उनके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की शिक्षा दे सकता है।

 🔆🔅शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह के ज्ञान से संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और संतुलित विकास कर सकते हैं।

🔅✏️सोरेनसन के अनुसार ➖️

शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है

Notes by sapna yadav📝📝💮💮💮💮💮💮

🌼 वातावरण का महत्व🌼☘️

☘️🤵🏻 1- सोरेन्सन के अनुसार➖शिक्षा का उत्तम वातावरण बालकों की बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि में प्रशंसनीय योगदान देता है

इस बात की जानकारी रखने वाला शिक्षक अपने छात्रों के लिए उत्तम से उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की चेष्टा करता है।

☘️2- बालक अपने परिवार, पड़ोस ,मोहल्ले और खेल के मैदान में अपना पर्याप्त समय व्यतीत करता है शिक्षक इन स्थानों के वातावरण को ध्यान में रखकर ही बालक का उचित पथ प्रदर्शन करता है।

☘️3- रूथ बैंडिक्ट के अनुसार➖व्यक्ति जन्म से ही एक विशेष सांस्कृतिक वातावरण में रहता है और उसके आदेशों के अनुरूप ही आचरण करता है इस तथ्य को जानने वाला शिक्षक बालक को अपने सांस्कृतिक विकास करने में योगदान दे सकता है।

☘️4- यूनेस्कोंके कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण का बालकों की भावनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उनके चरित्र का निर्माण करता है शिक्षक ऐसा वातावरण का निर्माण करें जिससे न केवल बच्चों की भावनाओं का शब्द विकास हो बल्कि उसके चरित्र निर्माण में भी सहायक हो।

☘️5- अनुकूल वातावरण में ही जीवन का विकास होता है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है इस बात को समझने वाला शिक्षक अपने छात्रों की रुचि ,प्रवृत्ति और क्षमता के अनुसार वातावरण प्रदान कर सकता है।

☘️ 6-वातावरण विकास की दिशा निर्धारित करता है वातावरण यह निश्चित करता है कि बालक बड़ा होकर अच्छा या बुरा चरित्रहीन या चरित्रवान देश प्रेमी या देशद्रोही इत्यादि बनेगा।

☘️7-वातावरण के महत्व को समझने वाला शिक्षक विद्यालय में बालकों के लिए ऐसा वातावरण स्थित कर सकता है जिससे उसमें विचारों की उचित अभिव्यक्ति, श्रेष्ठ सामाजिक व्यवहार, कर्तव्य और अधिकारों का ज्ञान और स्वाभाविक प्रवृत्ति पर नियंत्रण इत्यादि गुणों का अधिकतम विकास हो सके।

☘️8-प्रत्येक समाज का एक विशिष्ट वातावरण होता है बालक को इस वातावरण में अनुकूलन करना पड़ता है इस बात से परिचित होने वाला शिक्षक विद्यालय को लघु समाज का रूप प्रदान करके बालक को उसके विस्तृत समाज के वातावरण में अनुकूलन करने की दिशा दे सकता है।

💫शिक्षक के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का ज्ञान होना आवश्यक है इस तरह संपन्न होकर ही शिक्षक अपने छात्रों का वांछनीय और  संतुलित विकास कर सकता है।

🤵🏻 सोरेन्सन➖ शिक्षक के लिए मानव विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष इस प्रभाव और पारस्परिक संबंध का ज्ञान विशेष महत्व रखता है।

✍🏻📚📚 Notes by…… Sakshi Sharma📚📚✍🏻

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