🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

🌈 वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध– वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है ।ये एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

     स्वास्थ्य बीज सभी  स्वस्थ्य पौधों का रूप धारण करती है जब वातावरण स्वास्थ्य और संतुलित हो अच्छी खाद, समय से पानी की तैयारी आधी बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

👨‍✈ लैंडिस के अनुसार –  वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन चिंताओं के विकसित करने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं।

    वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है। परिस्थिति या  वातावरण में हमें इस को निवेश करने के अवसर प्रदान करता है।

👨🏼‍💼 मैकाइवर एवं पेज के अनुसार– जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है। किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है। जितनी की दूसरी। कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती हैं।

🌈👨‍✈️ वुडवर्थ & मारेक्विस के अनुसार– व्यक्ति ,वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल होता है। 

    H* E= development

 🦚 शारीरिक ,मानसिक, संवेगात्मक सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

      बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किस का किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था आज भी है।

          प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं ।लेकिन आधुनिक समय में इनमें परिवर्तन आ गया है। व्यक्ति एक बालक के रूप में, एक युवा के रूप में, एक प्रौढ़ के रूप में ,जो भी सोचता है ,करता है, अनुभव करता है, यह सब वंशानुक्रम के कारण तथा वातावरण दोनों को एक दूसरे का परस्पर प्रभाव पड़ता है।

👨‍✈️🌈 क्रो&क्रो के अनुसार– व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम ना केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

🌈 वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष महत्व–  कुछ विद्वानों का कहना है की कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं है। 

 व्यवहारवादियों  जैसे वाट्सन कोहलबर्ग  इन्होंने कहा है योग्यता क्षमता शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है। इस प्रकार के विचार  को “कट्टरपंथी” कहा गया है।

🌈👨‍✈️ मैकाइवर और पेज के अनुसार –जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है। परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं ।इसमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

🌴🌺 बालक के लिए महत्व–

1️⃣ वातावरण और वंशानुक्रम की अप्रथकता–

🦚 मैकाइवर और पेज के अनुसार –जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों का वातावरण और वंशानुक्रम का दोनों  समान रूप से आवश्यक  है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

2️⃣ वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व–

 वुडवर्थ के अनुसार – यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है। कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।

3️⃣ वंशानुक्रम और वातावरण का पारस्परिक निर्भरता– 

 🦚मोर्स एवं विंगों के अनुसार– मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतर क्रिया का प्रतिफल है।

4️⃣ वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव –

 वुडवर्थ के अनुसार– व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती हैं पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है। कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

5️⃣ बालक वातावरण और वंशानुक्रम की उपज है–👨‍✈️ वुडवर्थ के अनुसार– व्यक्ति वंशानुक्रम और वातावरण का योग नहीं  गुणनफल है।

🦚सारांश – बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

📚 गैरेट के अनुसार– इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक-दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌻Notes by Poonam sharma🌴🌴🌴🌴📚📚📚📚

🔆 वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध

▪️वंशानुक्रम और वातावरण बच्चे के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

▪️वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है यह दोनों ही एक दूसरे के पूरक ,एक दूसरे के बिना अधूरे या दोनों एक दूसरे पर निर्भर है।

▪️यदि माता-पिता या पूर्वजों से प्राप्त होने वाले गुण या जीन पर वातावरण का प्रभाव ना हो तो वह जीन या गुण आगे विकसित ही नहीं हो पाएगा।

▪️उसी प्रकार यदि बच्चे को माता-पिता या पूर्वजों से कुछ भी गुण या जीनप्राप्त ना हो और केवल वातावरण  ही उसे आगे ले जाए तो ऐसा भी संभव नहीं है।

▪️अर्थात एक के बिना दूसरे की कोई सार्थकता नहीं है।

▪️वंशानुक्रम वह वातावरण को हम एक तराजू के दो पलड़े की तरह भी समझ सकते हैं जिसमें तराजू को सही तरह से संतुलित करने के लिए दोनों ही पलड़े अर्थात वंशानुक्रम वातावरण का बराबर या संतुलित होना आवश्यक है।

▪️जिस प्रकार स्वास्थ्य बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करता है जब उसका वातावरण स्वस्थ व संतुलित हो। अच्छी खाद ,समय पर पानी ,धरती की तैयारी आदि सब बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है ।

✨ लैंण्डिस के अनुसार 

वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमता के विकसित होने के अवसर में वातावरण से मिलते हैं।

वंशानुक्रम हमें “कार्यशील पूंजी” देता है और परिस्थिति हमें इसको “निवेश करने के अवसर” प्रदान करती हैं।

✨ मैकाइवर व पेज के अनुसार

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का(वंशानुक्रम और वातावरण) परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी की दूसरी।

कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

✨ वूडवर्थ व मोरक्विस के अनुसार

व्यक्ति वंशानुक्रम और वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

      H+ E= Development ❎

      H×E = Development ✅

▪️चाहे व्यक्ति का शारीरिक मानसिक या संवेगात्मक इन सभी प्रकार के विकास के लिए वंशानुक्रम व वातावरण दोनों ही शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

▪️वंशानुक्रम व वातावरण दोनों ही इन सभी विकास को प्रभावित करते हैं इन दोनों के अंतर को विस्थापित या डिस्टिंग्विश नहीं किया जा सकता जिसमें दोनों का ही महत्वपूर्ण योगदान रहता है किसका कितना योगदान है?इसकी पृथक रूप से व्याख्या भी नहीं की जा सकती।

▪️बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किस का किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था और आज भी है।

▪️प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं और अपना अलग-अलग प्रभाव डालते हैं।, लेकिन आधुनिक समय में जैसे-जैसे इसका अध्ययन करते गए वैसे वैसे ही समझ भी आती गई कि व्यक्ति के बालक रूप में ,युवा के रूप में , प्रौढ़के रूप में जो भी सोच या समझ या जो भी अनुभव है वह सब वंशानुक्रम के कारक व वातावरण दोनों का परस्पर प्रभाव पड़ने से है।

✨ क्रो एंड क्रो के अनुसार

व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम से और ना ही केवल वातावरण से होता है वास्तव  में वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज हैं।

🔆 वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष महत्व :-

▪️कुछ विद्वानों का मत है कि व्यक्ति के कुछ गुण वंशानुगत से होते हैं जिन पर वातावरण का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता उन्होंने वंशानुक्रम को वातावरण से सर्वोपरि माना है।

▪️जबकि कुछ विद्वानों या व्यवहारवादियों (वाटसन , गाल्टन) का मत है कि कुछ गुण केवल वातावरण से ही विकसित होते हैं उनमें वंशानुक्रम का कोई भी योगदान नहीं है या मानव की योग्यता, क्षमता व विशेषता में वंशानुक्रम का कोई भी महत्व नहीं है।

▪️यह वंशानुक्रम वातावरण के बीच मतभेद बेबुनियाद है यह दोनों ही अलग-अलग प्रकार के विचार है इस प्रकार के विचार को कंठरपंथी विचार कहा गया है।

✨मैकाइवर और पेज ने इस संदर्भ में कहा कि

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

“हर व्यक्ति के नजरिए या दृष्टिकोण से वंशानुक्रम और वातावरण का अलग-अलग महत्व जिनमें से बालकों के लिए महत्व निम्नानुसार है।

🥏 बालकों के लिए महत्व:-वंशानुक्रम वातावरण का बालकों के लिए महत्व निम्नानुसार देखा जा सकता है।

📍 वंशानुक्रम और वातावरण की  अपृथकता :-

✨  मैकाइवर व पेज के अनुसार :-

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का  परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी की दूसरी।कोई ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती हैं।

📍 वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व:-

✨ वुडवर्थ ने कहा है कि:-

यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।

📍 वंशानुक्रम व वातावरण की पारस्परिक निर्भरता :-

मूल प्रवृत्ति वंशानुक्रम से प्राप्त होती हैं और इन्हीं मूल प्रवृत्तियों का विकास वातावरण में होता है।

✨ इस संदर्भ में  मोर्स एवं विंगो ने कहा है कि:-

मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।

📍 वंशानुक्रम व वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है:-

✨ वुडवर्थ ने कहा है कि:-

व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुदा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

📍 बालक वंशानुक्रम वातावरण की उपज है:-

✨ वूडवर्थ ने कहा है कि व्यक्ति वंशानुक्रम और वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

▪️ सारांश:-

बालक के विकास के लिए दोनों का (वंशानुक्रम और वातावरण) समान महत्व एक की भीअनुपस्थिति में विकास असंभव है।

✨ गैरेट के अनुसार:-

इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव है और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है ।

✍️

      Notes By-‘Vaishali Mishra’

🌼☘️ वंशानुक्रम एवं वातावरण में संबंध☘️🌼

🌼(Relation in heredity and environment )

🌼 वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है यह एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

🌼 वंशानुक्रम वातावरण का संबंध बिल्कुल बीज तथा खेत के जैसा संबंध है। स्वस्थ बीच तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण कर सकता है जबकि वातावरण स्वस्थ एवं संतुलित हो।

🌼 अच्छी खाद, समय पर पानी, धरती की तैयारी, निराई- गुड़ाई आदि वातावरण की सृष्टि करती है।

🤵🏻‍♂लैण्डिस के अनुसार➖”वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन छात्रों के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं वंशानुक्रम हमें क्रियाशील पूंजी  देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करता है”।

🧑🏼‍💼 मेकआइवर एवं🧑🏽‍🔬 पेज के अनुसार➖जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यकता है जितनी दूसरी कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

वुडवर्थ 👨🏻‍🔬 एवं  मरेक्रिवस 🤵🏻 के अनुसार➖ व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

 Heredity × environment =Development

🌼शारीरिक मानसिक संवेगात्मक सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में सीमा तक प्रभाव पड़ता है।

🌼 प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन आधुनिक समय में इसमे परिवर्तन आ गया हैं। व्यक्ति एक बालक, युवा ,प्रौढ़  के रूप में जो भी सोचता है ,करता है ,या अनुभव करता है यह सब वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का परस्पर प्रभाव है।

क्रो एंड क्रो के अनुसार➖व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकता और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

🌼☘️ वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व☘️🌼

विद्वानों के अनुसार➖ कुछ गुण वंशानुक्रम होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

☘️ व्यवहारवादी वाटसन तथा गाल्टन➖ योग्यता , क्षमता, शारीरिक विशेषताओं में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है इस प्रकार के विचार को यह भी सच नहीं माना गया है और इसे कट्टरपंथी भी कहा है।

☘️मेकाइवर और पेज➖जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

💫 बालक के लिए महत्व💫

1-☘️ वंशानुक्रम और वातावरण का अपृथकता

मेकाइवर और पेज➖जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

2- ☘️ वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व

वुडवर्थ के अनुसार➖यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक रूप से अनिवार्य है।

3- ☘️ वंशानुक्रम और वातावरण के पारस्परिक निर्भरता➖ बच्चों की मूल प्रति का विकास वातावरण में होता है।

मोर्स एवं पिगो के अनुसार➖मानव व्यक्ति की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण के अंत: क्रिया का फल है।

4- ☘️ वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव➖

वुडवर्थ के अनुसार➖व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

5- ☘️ बालक वातावरण और वंशानुक्रम का उपज

वुडवर्थ के अनुसार➖व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

💫🌼  सारांश  🌼💫

बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

गैरेट के अनुसार➖इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रमाण हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

✍🏻📚📚 Notes by…. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

💫 वंशानुक्रम और वातावरण में सम्बन्ध 💫

🔷 वंशानुक्रम एवम् वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं हैं बल्कि ये एक दूसरे के पूरक हैं , एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

🔷 स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करती है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित हो , अच्छी खाद, समय पर पानी, धरती की तैयारी आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

🌈💫 लैंडिस के अनुसार :-

” वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमताओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं ,वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करता है।”

🌈💫 मैकाइवर एवं पेज के अनुसार:-

“जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी दूसरी ,कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती हैं।”

🌈💫 वूडवर्थ एवम् मारेक्विस के अनुसार:-

“व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है। ”     H×E=DEVELOPMENT

    आनुवांशिकता×वातावरण=विकास

🌱🌺शारीरिक मानसिक संवेगात्मक इन सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का इस्तेमाल किया जाता है।

🌱🌺 अनुवांशिकता और वातावरण दोनों का ही महत्वपूर्ण योगदान होता है कोई अधिक कोई कम होता है लेकिन हम इन में अंतर नहीं कर सकते हैं कि किस का कितना योगदान है।

🌱🌺 बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किस का किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था आज भी है।

🌱🌺 प्राचीन समय में  यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं,लेकिन आधुनिक समय में इस में परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक के रूप में,एक युवा के रूप में ,या एक  प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है ,जो भी करता है , या जो अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है।

  🌈💫 क्रो एंड क्रो के अनुसार:-

“व्यक्ति का निर्माण न  केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

💦🌍 वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व 💦

🧑‍✈️💦 कुछ विद्वानों का मानना है कि:-कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है

🧑‍✈️💦व्यवहारवादी (वाटसन, गाल्टन):-योग्यता क्षमता शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है।

वैज्ञानिकों का यह मतभेद है इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी विचार कहा गया है।

🌈💫 मैकाइवर और पेज के अनुसार:-

“जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है, परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है , और ना ही अलग किया जा सकता है।

🙎💦🌱 बालक के लिए महत्व 💦🌱🙎

🔷 वंशानुक्रम और वातावरण की अपृथ्कता

🌈💫 मैकाईवर और पेज के अनुसार:-

“जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है ,इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है, और ना ही अलग किया जा सकता है।”

🔷 वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व

🌈💫 बुडवर्थ के अनुसार:-

“यह प्रश्न पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है ,कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।”

🔷 वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता

🌈💫 मोर्स एवम् विंगो के अनुसार:-

“मानव व्यवहार कि प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतर क्रिया का फल है।”

🔷 वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव

🌈💫 बुडवर्थ के अनुसार:-

“व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है, पर यह बातें इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है ,कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।”

🔷 बालक वातावरण और वंशानुक्रम की उपज है

🌈💫 वूडवर्थ के अनुसार:-

“व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।”  

          H×E=Development

💦💫 सारांश 💫💦

💦बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

🌈💫 गैरेट के अनुसार:-

“इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

     💫🌴🌺📝📝📖📖🌺🌴💫

💦✍️ Notes by kailashwati Singh✍️💦

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🔆 वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध➖

 वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है ये एक दूसरे के पूरक हैं एक के बिना दूसरे की कोई सार्थकता नहीं है |

 स्वस्थ बीज होगा  तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करता है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित होगा|

 अच्छी खाद ,समय – समय पर पानी, धरती की तैयारी,आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है |

लैण्डिस के अनुसार➖

“वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमताओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं और  वंशानुक्रम कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के लिए अवसर प्रदान करता है |”

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार➖

” जीवन की प्रत्येक घटना दोनों( वंशानुक्रम और वातावरण) का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी दूसरी | कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही कभी अलग की जा सकती है |”

वुडवर्थ और मारेक्विस के अनुसार ➖

” व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं बल्कि गुणनफल है |”

    H + E= D

चाहे शारीरिक ,मानसिक या संवेगात्मक विकास हो इन सब प्रकार के विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है |

 बच्चों के विकास में वंशानुक्रम और वातावरण में किस का किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था और आज भी है  |

प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में इसमें परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक, युवा  , या प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है या करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है |

क्रो एवं क्रो के अनुसार➖

 व्यक्ति का निर्माण ना केवल वंशानुक्रम और ना केवल वातावरण से होता है वास्तव में यह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है |

⭕ वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व ➖

 विद्वानों ने कहा है कि कुछ गुण वंशानुक्रम में होते हैं इस पर वातावरण का कोई योगदान नहीं है  | 

       जबकि व्यवहारवादी जैसे वाटसन और गाल्टन का कथन है कि योग्यता, क्षमता, और शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का कोई योगदान नहीं है |  इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी माना गया है |

” मैकाइवर और पेज “

 ने  वंशानुक्रम और वातावरण के सापेक्ष महत्व के बारे में कहा है कि 

“जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इसमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है |”

💥  वंशानुक्रम और वातावरण का बालक के लिए महत्व ➖

🍀 वंशानुक्रम और वातावरण की अपृथकता ➖

 वंशानुक्रम और वातावरण की अपृथकता के संबंध में  ” मैकाइवर और पेज”  ने कहा है कि ➖

     “जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम  होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है | “

🍀 वंशानुक्रम और वातावरण का सामान महत्व ➖

वंशानुक्रम और वातावरण के समान महत्व के  संबंध में “वुडवर्थ ” ने कहा है कि 

“यह पूछने का कोई अर्थ नहीं है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य हैं |”

🍀 वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता ➖

” योर्स और विंगो ” के अनुसार

 मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण अंतः क्रिया का फल है |

🍀 वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव  में अंतर करना ➖

” वुडवर्थ ” ने कहा है कि 

” व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बातें इतनी भी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुदा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है |

🍀   बालक वातावरण और वंशानुक्रम की उपज➖

 “वुडवर्थ ” का कथन है कि

 “व्यक्ति वंशानुक्रम और वातावरण

 दोनों का गुणनफल  है |

सारांश ➖

 “बालक के विकास के लिए दोनोंं का समान महत्व है एक भी अनुपस्थित होने से विकास प्रभावित होता है |

 विकास में  यदि किसी एक की भी अनुपस्थिति है त़ो विकास असंभव है  |

इस के संदर्भ में ” गैरेट “कहा है कि  निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

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🥀 वंशानुक्रम एवं वातावरण में संबंध🥀

➡️वंशानुक्रम और वातावरण परस्पर रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे के पूरक हैं।

वंशानुक्रम मानव जीवन में एक बीज की तरह है, और वातावरण उस बीज को मिलने वाला खाद-पानी है।

वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है  एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

👉🏻वंशानुक्रम वातावरण का संबंध बिल्कुल बीज तथा खेत के जैसा संबंध है। स्वस्थ बीच तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण कर सकता है जबकि वातावरण स्वस्थ एवं संतुलित हो। अच्छी खाद, समय पर पानी, धरती की तैयारी, निराई- गुड़ाई आदि वातावरण की सृष्टि करती है।

🧑🏼‍💼लैण्डिस के अनुसार,”वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन छात्रों के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं वंशानुक्रम हमें क्रियाशील पूंजी  देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करता है”।

👉🏻 मेकआइवर एवं पेज के अनुसार,”जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यकता है जितनी दूसरी कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

👉🏻वुडवर्थ 🧑🏼‍💼 एवं  मरेक्रिवस 🧑🏼‍💼 के अनुसार,” व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

 Heredity × environment =Development

👉🏻शारीरिक मानसिक संवेगात्मक सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में सीमा तक प्रभाव पड़ता है।

👉🏻 प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन आधुनिक समय में इसमे परिवर्तन आ गया हैं। व्यक्ति एक बालक, युवा ,प्रौढ़  के रूप में जो भी सोचता है ,करता है ,या अनुभव करता है यह सब वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का परस्पर प्रभाव है।

👉🏻क्रो एंड क्रो के अनुसार,”व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकता और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

➡️ वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व

विद्वानों के अनुसार,” कुछ गुण वंशानुक्रम होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

🧑🏼‍💼व्यवहारवादी वाटसन 🧑🏼‍💼तथा गाल्टन🧑🏼‍💼 योग्यता , क्षमता, शारीरिक विशेषताओं में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है इस प्रकार के विचार को यह भी सच नहीं माना गया है और इसे कट्टरपंथी भी कहा है।

🧑🏼‍💼मेकाइवर और पेज के अनुसार,” जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

👶🏻 बालक के लिए महत्व

➡️वंशानुक्रम और वातावरण का अपृथकता

👉🏻मेकाइवर और पेज के अनुसार,” जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

➡️वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व

👉🏻वुडवर्थ के अनुसार ,”यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक रूप से अनिवार्य है।

➡️वंशानुक्रम और वातावरण के पारस्परिक निर्भरता  बच्चों की मूल प्रति का विकास वातावरण में होता है।

🥀👉🏻मोर्स एवं पिगो के अनुसार ,” मानव व्यक्ति की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण के अंत: क्रिया का फल है।

➡️ वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव➖

🥀वुडवर्थ के अनुसार,”👉🏻व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

➡️ बालक वातावरण और वंशानुक्रम का उपज🖊️

👉🏻वुडवर्थ के अनुसार,”व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

 👶🏻

बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

👉🏻गैरेट के अनुसार,”इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रमाण हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

🍄🌻📚📚 Notes by shikha tripathi 📚📚🌻🍄

*वंशानुक्रम एवं वातावरण में संबंध*

*Relation in heredity and environment* 

➡️वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है यह एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

➡️स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण कर सकता है जब वातावरण स्वस्थ एवं संतुलित हो।

 खाद, पानी, मिट्टी की तैयारी, आदि वातावरण की सृष्टि करती है।

💞 *लैण्डिस के अनुसार*➖

वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है तथा विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं। वंशानुक्रम हमें क्रियाशील पूंजी  देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करता है।

 💞 *मेकआइवर एवं पेज*➖

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक की उतनी ही आवश्यकता है जितनी दूसरे की जिसमें से कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

💞 *वुडवर्थ  एवं  मरेक्रिवस*➖

 व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

Development = Heredity × environment 

Development ≠ Heredity + Environment 

➡️शारीरिक ,मानसिक ,संवेगात्मक सभी के विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का प्रयोग किया जाता है। बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में अंतिम सीमा तक प्रभाव पड़ता है।

➡️प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन आधुनिक समय में इसमे परिवर्तन आ गया हैं। व्यक्ति एक बालक, युवा ,प्रौढ़  के रूप में जो भी सोचता है ,करता है या अनुभव करता है, यह सब वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का परस्पर प्रभाव है।

💞 *क्रो एंड क्रो के अनुसार*➖

व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकता और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

 *वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व*

(Compression Importance of Heredity and Environment )

🚹 *विद्वानों के अनुसार*➖

 कुछ गुण वंशानुक्रम होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

🚹 *व्यवहारवादी (वाटसन तथा गाल्टन)*➖

 योग्यता , क्षमता, शारीरिक विशेषताओं में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है इस प्रकार के विचार को यह भी सच नहीं माना गया है। इसे कट्टरपंथी भी कहा है।

💞 *मेकाइवर और पेज*➖

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है। परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है। इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

*बालक के लिए महत्व*

1- *वंशानुक्रम और वातावरण का अपृथकता* ➖

💞 *मेकाइवर और पेज*➖

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है ।परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है। इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

2- *वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व*

💞 *वुडवर्थ*➖

यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक रूप से अनिवार्य है।

3- *वंशानुक्रम और वातावरण के पारस्परिक निर्भरता*➖

 बच्चों की मूल प्रति का विकास वातावरण में होता है।

💞 *मोर्स एवं पिगो*➖

मानव व्यक्ति की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण के अंत: क्रिया का फल है।

4- *वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव*

💞 *वुडवर्थ*➖

व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

5- *बालक वातावरण और वंशानुक्रम का उपज*

💞 *वुडवर्थ*➖

व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है, पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त करती है कि बहुता वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

 *सारांश (conclusion)*

✝️बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है। एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

💞 *गैरेट*➖

इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रमाण हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

🌧️Deepika Ray🌧️

वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध

वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं  एक दूसरे के पूरक हैं एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है

               .  स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करता है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित हो अच्छी खाद समय पर पानी   धरती  की तैयारी आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है

 लैंडिस के अनुसार:- वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमता ओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसे निवेश करने की अवसर देता है 

 मेकैवर एवं पेज के अनुसार:- जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है( हेरेडिटी एंड एनवायरमेंट) किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतना ही आवश्यक है जितना दूसरा किसी को भी ना तो हटाया जा सकता है ना ही अलग किया जा सकता है

वुडवर्थ और  marekvis  अनुसार:- व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल होता है

H*E= devlopment 

शारीरिक ,मानसिक ,संवेगात्मक विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है

 वृद्धि—– शारीरिक

 विकास —-over all development

बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किसका किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादात्मक था और आज भी है

प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आधुनिक समय में इस में परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक, युवा, प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है करता है अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है

 crow and crow के अनुसार :- व्यक्ति का निर्माण ना केवल वंशानुक्रम और ना केवल  वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है

वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व

 विद्वान गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता

व्यवहारवादी वाटसन तथा galtan के अनुसार:- योग्यता ,क्षमता, शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी कहा जाता है

मेकैवर एवं पेज के अनुसार:- जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है( हेरेडिटी एंड एनवायरमेंट) किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतना ही आवश्यक है जितना दूसरा किसी को भी ना तो हटाया जा सकता है ना ही अलग किया जा सकता है

 बालक के लिए महत्व:- 1वंशानुक्रम और वातावरण की अध्यक्षता

मेकैवर एवं पेज के अनुसार:- जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है( हेरेडिटी एंड एनवायरमेंट) किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतना ही आवश्यक है जितना दूसरा किसी को भी ना तो हटाया जा सकता है ना ही अलग किया जा सकता है

2 वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व

 वुडवर्थ के अनुसार :- यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता की व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य हैं

3वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता

 मूल प्रवृत्ति -वंशानुक्रम 

विकास-  वातावरण

मोर्स एवं विंगों के अनुसार :- मानव विकास की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतर क्रिया का फल है

4 वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव:-

 वुडवर्थ  के अनुसार:- व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बातें इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है

5 बालक वातावरण और वंशानुक्रम  की  उपज

वुडवर्थ के अनुसार :- यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता की व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य हैं

 सारांश:- बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है

 गैरेट के अनुसार:- इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि  वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य

सपना साहू🌴🌳🌴🌳🌴🌳🌴🌳🌴

वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध

🤱👨‍👦👨‍👩‍👧‍👦 💇🏋️🤼🌴🌄🌧️🌏

वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे  से अलग नहीं है यह एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

   स्वस्थ्य बीज तभी स्वस्थ्य पौधे को धारण करता है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित हो। अच्छी खाद, समय समय पर पानी, धूप और अच्छी देखभाल बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

लेंडिस के अनुसार📝

वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है। इन क्षमताओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं। वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के लिए अवसर प्रदान करता है।

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार,📝

जीवन की प्रत्येक घटना अनुवांशिकता और वातावरण का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी दूसरी। कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

वु़डवर्थ एवम् मारेक्विस के अनुसार,📝

व्यक्ति, वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं बल्कि गुणनफल है।

Heredity+environment ≠ Development ❎

Heredity * environment = Development ✅

शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, संवेगात्मक, बौद्धिक इत्यादि सभी  विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में से किसका किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था और आज भी है।

प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में इस में परिवर्तन आ गया है । व्यक्ति एक बालक युवा, प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है करता है या अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है।

क्रो एंड क्रो के अनुसार,📝

व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व💫💫

कुछ विद्वान कहते हैं कि कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं होता।

                  तो वहीं कुछ व्यवहारवादी (वाटसन, गाल्टन) के मत हैं कि योग्यता, क्षमता, शारीरिक विशेषता में वांशनुक्रम का योगदान नहीं है।

इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी कहा गया है ।

बालक के लिए महत्व

1. वांशानुक्रम और वातावरण की अपृथकता🌏🌄👨‍👩‍👧‍👦🌴🌅🌧️💇🏋️🤼🤱👨‍👦

मेकाइबर और पेज के अनुसार,📝

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

2. वंशनुक्रम और वातावरण का सामान महत्व👨‍👩‍👧‍👦🌴🌅🌧️💇🏋️🤼🤱🌏

वुडवर्थ के अनुसार, 📝

यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है। दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।

3. वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता👨‍👦🤱🤼🏋️💇🌧️🌅🌴👨‍👩‍👧‍👦

मोर्स एवम् विंगो के अनुसार,📝

मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।

4. वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव🤱👨‍👦🌴👨‍👩‍👧‍👦🌅🌄🌧️🌏💇

वुडवर्थ के अनुसार,📝

व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बातें इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

 सारांश✍🏻

बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

गैरेट के अनुसार,📝

इसमें अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव है और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

✍🏻 Notes by Shreya Rai 🙏🙏

👼🏻🎄 वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध :-

➖ वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं, एक दूसरे के पूरक है एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं  है।

           स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ होने का रूप धारण करती है, जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित रहे अच्छी खाद, समय पर पानी,धरती की तैयारी आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

🟠 लेन्डीस के अनुसार :-

 वंशानुक्रम, हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमताओं  के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करता है।

🔵 मेकाआइवर  एवं पेज के अनुसार:-

 जीवन की प्रत्येक घटना वंशानुक्रम और वातावरण का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतना ही आवश्यक है जितना दूसरा कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग किया सकती है।

🟣 वुडवर्थ और मारेक्विश के अनुसार:-

➖ व्यक्ति, वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

 ➡️H×E=DEVELOPMENT

🔅 मानव के विकास में, शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

🔅 बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था,

 आज भी है।

🔅 प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में,, इन में परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक,युवक प्रोढ़ के रूप में जो भी सोचता है करता है अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है

♦️क्रो एंड क्रो के अनुसार:-

 व्यक्ति का निर्माण,,न केवल वंशानुक्रम और ना केवल वातावरण से होता है वास्तव में, वह जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

😎 वंशनुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व:-

🔵 कुछ विद्वान के अनुसार :-

 कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

🟡 व्यवहारवादी  (वाटसन और गाल्टन )के अनुसार :-

 मानव विकास में,योग्यता,क्षमता शारीरिक विशेषता में योगदान नहीं है इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी कहा गया है।

🔵 मैकाइवर और पेज के अनुसार :-

 जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है, परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

🌻 निष्कर्ष ➖

👼🏻 बालक  के लिए महत्व :-

 मैकाइवर और पेज के अनुसार :-

 जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है, परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

🎄👼🏻 वंशनुक्रम और वातावरण का समान महत्व :-

▪️ वुडवर्थ  के अनुसार:-

 पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों(H&E) में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य हैं।

🟠 वंशनुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता:-

➖ मोर्श एवं विगो के अनुसार :-

 मानव व्यवहार की, प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतर क्रिया का फल है।

🌌 वंशनुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव :-

 वुडवर्थ के अनुसार :-

 व्यक्ति  के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

👼🏻🌌🎄 बालक, वातावरण और वंशानुक्रम की उपज :-

 वुडवर्थ के अनुसार:-

 व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बात इतनी पेचीदा  ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

🔚 सारांश 🤗

➖ बालक के विकास के लिए दोनों( वातावरण और वंशानुक्रम)  का सामान महत्व है। एक की अनुपस्थिति में विकास संभव है।

🟠 गैरेट के अनुसार :-

इसके,अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

📝NOTES BY “AkAnKsHa”📝

🎄👼🏻🌌🔅🌻😎🥰🙏🏻✍🏻🤟🏻👏🏻🙌🏻

वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध

वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है 

ये एक दूसरे के पूरक हैं

एक के बिना दूसरे की सार्थकता नहीं है।

स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करती है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित हो।

अच्छी खाद ,समय पर पानी, धरती की तैयारी आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

लेण्डिस के अनुसार

वंशानुक्रम हमें *विकसित होने की क्षमता* प्रदान करता है इन *क्षमताओं के विकास होने के अवसर* हमें वातावरण से मिलते हैं। वंशानुक्रम हमें *कार्यशील पूंजी* देता है और परिस्थिति हमें इसको *निवेश* करने के अवसर प्रदान करती हैं।

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों (वंशानुक्रम और वातावरण) का परिणाम होता है। किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी दूसरी। कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

वुडवर्थ और मारेक्विस के अनुसार

व्यक्ति, वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं *गुणनफल* है अर्थात 

*वंशानुक्रम* वातावरण=  संपूर्ण विकास*

H+E=Development   ❌

H *E=Development. ☑️

शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

*बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किसका, किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था और आज भी है।*

प्राचीन समय में यह धारणा भी थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में इसमें परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक ,युवा, प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है, करता है, अनुभव करता है यह सब दोनों (वंशानुक्रम और वातावरण ) का परस्पर प्रभाव है।

क्रो एंड क्रो के अनुसार

व्यक्ति का निर्माण न केवल वंशानुक्रम और न केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह *जैविकदाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।*

वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व-

कुछ विद्वानों के अनुसार कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

जबकि

व्यवहारवादी (वाटसन, गाल्टन) के अनुसार व्यक्ति की योग्यता, क्षमता, शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं होता है।

लेकिन इनमें से किसी भी मत को स्वीकार नहीं किया गया।

इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी कहा गया है।

मेकाइवर एवं पेज के अनुसार 

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है ‌।परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

वंशानुक्रम और वातावरण के महत्व

1. बालक के लिए महत्व

1. वंशानुक्रम और वातावरण अपृथकता

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और न ही अलग किया जा सकता है।

2. वंशानुक्रम एवं वातावरण का समान महत्व

वुडवर्थ के अनुसार

यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।

3. वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता

मूल प्रवृत्ति वंशानुक्रम से मिलती है और इसका विकास वातावरण से होता है।

मोर्स और बिंगो के अनुसार

मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।

4. वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव

वुडवर्थ के अनुसार

व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती हैं पर यह बात इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती हैं कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है।

5. बालक ,वातावरण और वंशानुक्रम की उपज 

वुडवर्थ के अनुसार

व्यक्ति ,वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

H *E=Development. ☑️

सारांश 

बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

गैरेट के अनुसार

इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक-दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है।

Notes by Ravi kushwah

20/03/2021…..saturday

Today class… वंशानुक्रम और वातावरण (पार्ट 3)

🤱🏞वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध

➖वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है यह एक दूसरे के पूरक है बीज तथा खेत जैसा इनका संबंध है एक – दूसरे के बिना सार्थकता नहीं है ।स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण कर सकता है जब वातावरण स्वस्थ एवं संतुलित हो ।अच्छी खान ,समय पर पानी, धरती की तैयारी निराई -गुड़ाई आदि बीज के विकास के लिए महत्वपूर्ण है

⭕🕵🏼‍♂️लैंडिस🔘

➖” वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है। इन क्षमताओं को विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलती है, वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करती है ”

⭕🎎 मैकाइवर एवं पेज🔘

➖ “जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतना ही आवश्यक है जितनी की दूसरी कोई भी ना तो हटाए जा सकती है ना ही अलग की जा सकती”

⭕👨‍🏫 वुडवर्थ तथा मारेकिव्स🔘

➖”व्यक्ति, वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नई गुणनफल है”

❎Heridty + environment =development ❌

✅Heridty × environment =development ✔

➖विकास की किसी अवस्था में बालक या व्यक्ति की शारीरिक ,मानसिक और संवेगात्मक विशेषताओं का सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का इस्तेमाल किया जाता है

➖ बालक के निर्माण में वंशानुक्रम और वातावरण का किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह विषय सदैव विवादास्पद था और अब भी है

➖ प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में इस में परिवर्तन आ गया है व्यक्ति एक बालक, युवा, प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है, करता है, अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है

🕵🏽‍♂️ क्रो एंड क्रो⛔

➖ व्यक्ति का निर्माण ना केवल वंशानुक्रम और ना केवल वातावरण से होता है वास्तव में यह जैविक्दाय और सामाजिक विरासत के एकीकरण उपज है

🤱🏞 वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व

⭕विद्वान:—

➖ “कुछ गुण वंशानुगत होते हैं इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं”

⭕ व्यवहारवादी =(वाटसन , गाल्टन)

➖ उन्होंने कहा योग्यता क्षमता शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है अतः व्यवहारवादी और विद्वान दोनों ही आपस में उल्टा बात बोले हैं लेकिन सच्चाई यही है यह जो मतभेद है यह बेबुनियाद है

➖ इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी कहा गया है

⭕⭕बालक के लिए महत्त्व

(1) वंशानुक्रम और वातावरण की अपृथकता 

👨‍🏫मैकाइवर और पेज⛔

➖ जीवन का प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होता है परिणाम के लिए दोनों एक समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है

(2) वंशानुक्रम और वातावरण का सामान महत्व

👨🏼‍💼 वुडवर्थ ⛔

➖ यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन सा अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है

(3) वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता

मूल प्रवृत्ति

     ⏫➖➖ विकास वातावरण           

वंशानुक्रम

🕵️‍♂️ मोर्स एवं विंगो⛔

➖ मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण का अंतः क्रिया का फल है

(4) वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव

 👨‍💼वुडवर्थ 🔘

➖ व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाले प्रत्येक बाद वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाता है पर यह बातें इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती है कि बहुदा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव है

(5) बालक वातावरण और वंशानुक्रम की उपज

👨‍💼वुडवर्थ 🔘

➖ व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है 

    ✅ H×E=Development 

🔰 बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है

👨🏿‍⚕️ गैरेट

➖ इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे के सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य है

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 ✍Notes by:—संगीता भारती✍

             🙏 धन्यवाद 🙏

🏵️☘️❇️🌸 वंशानुक्रम और वातावरण में संबंध 🌸❇️☘️🏵️

वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे से अलग नहीं है ये एक दूसरे के पूरक हैं ।

एक के बिना दूसरे की कोई सार्थकता नहीं है। 

स्वस्थ बीज तभी स्वस्थ पौधे का रूप धारण करती है जब वातावरण स्वस्थ और संतुलित है।

 अच्छी खाद , समय पर पानी , धरती की तैयारी आदि बीच के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

☸️ लैंण्डिस का कथन

वंशानुक्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है ।

इन क्षमताओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं। वंशानुक्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है और परिस्थिति हमें इसे निवेश करने के अवसर प्रदान करता है।

☢️ मेकाइवर एवं पेज

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों ( वंशानुक्रम और वातावरण ) का परिणाम होता है। किसी भी निश्चित परिणाम के लिए एक उतनी ही आवश्यक है जितनी दूसरी। कोई भी ना तो हटाई जा सकती है और ना ही अलग की जा सकती है।

🇫🇴 वुडवर्थ  और मारेक्विस

 व्यक्ति वंशानुक्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

H+E  = development  ( x )

H×E  = development  (✓ )

 🎡 शारीरिक विकास मानसिक विकास संवेगात्मक विकास 

सभी विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। 

बच्चों के विकास में वंशानुक्रम या वातावरण में किसका किस सीमा तक प्रभाव पड़ता है यह पहले भी विवादास्पद था और आज भी है।

प्राचीन समय में यह धारणा थी कि दोनों एक दूसरे से अलग है लेकिन आधुनिक समय में इसमें परिवर्तन आ गया है ।

व्यक्ति एक बालक , युवा , प्रौढ़ के रूप में जो भी सोचता है , करता है , अनुभव करता है यह सब दोनों का परस्पर प्रभाव है।

☸️  क्रो एंड क्रो

व्यक्ति का निर्माण ना केवल वंशानुक्रम और ना केवल वातावरण से होता है वास्तव में वह जैविकदाय और समाजिक विरासत के एकीकरण की उपज है।

🌳 वंशानुक्रम और वातावरण का सापेक्ष महत्व

विद्वान – कुछ गुण वंशानुगत होते हैं , इस पर वातावरण का कोई प्रभाव नहीं है।

 व्यवहारवादी ( गाल्टन , वाटसन) योग्यता , क्षमता , शारीरिक विशेषता में वंशानुक्रम का योगदान नहीं है।

इस प्रकार के विचार को कट्टरपंथी माना गया है।

🕎 मेकाइवर और पेज 

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

✳️ वंशानुक्रम और वातावरण का बालकों के लिए महत्व

1🔸 वंशानुक्रम और वातावरण की आपृथकता

मेकाइवर और पेज

जीवन की प्रत्येक घटना दोनों का परिणाम होती है परिणाम के लिए दोनों ही समान रूप से आवश्यक है इनमें से किसी को ना तो हटाया जा सकता है और ना ही अलग किया जा सकता है।

2 🔸 वंशानुक्रम और वातावरण का समान महत्व

वुडवर्थ — यह पूछने का कोई मतलब नहीं निकलता है कि व्यक्ति के विकास के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है दोनों में से प्रत्येक पूर्ण रूप से अनिवार्य है।

3 🔸 वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक निर्भरता

 मूल प्रवृत्ति   ———- विकास

      ।                           ।

 वंशानुक्रम              वातावरण

मोर्स एवं विगो

मानव व्यवहार की प्रत्येक विशेषता वंशानुक्रम और वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।

4 🔸 वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असंभव

वुडवर्थ — व्यक्ति के जीवन और विकास पर प्रभाव डालने वाली प्रत्येक बात वंशानुक्रम और वातावरण के क्षेत्र में आ जाती है पर यह बातें इतनी पेचीदा ढंग से संयुक्त रहती हैं कि बहुधा वंशानुक्रम और वातावरण के प्रभाव में अंतर करना असम्भव है।

5 🔸 बालक वातावरण और वंशानुक्रम की उपज 

वुडवर्थ —

H x E = development

बालक वंशानुक्रम और वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।

 💦 सारांश  — 

बालक के विकास के लिए दोनों का समान महत्व है एक की भी अनुपस्थिति में विकास असंभव है।

🔸 गैरेट — इससे अधिक निश्चित बात और कोई नहीं है कि वंशानुक्रम और वातावरण एक दूसरे को सहयोग देने वाले प्रभाव हैं और दोनों ही बालक की सफलता के लिए अनिवार्य हैं।

धन्यवाद

द्वारा वंदना शुक्ला

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