🌴🦚🦚🦚🦚🦚🦚🌴

💫 बालक पर वातावरण का प्रभाव–     

💥 शारीरिक अंतर का प्रभाव

💥मानसिक विकास का प्रभाव

💥बुद्धि पर प्रभाव

💥व्यक्तित्व पर प्रभाव

🌈 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव–  “क्लार्क के अनुसार”– कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण  वंशानुक्रम न होकर वातावरण होता है।  अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगो की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया । 

               नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम था क्योंकि उनसे श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध हो पाता ।

🌈 अनाथ बच्चों पर प्रभाव– सामाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारणत निम्न परिवार के होते हैं।लेकिन कल्याण केंद्रों पर उनकी अच्छे से  पालन पोषण किया जाता है उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है। इसप्रकार के वातावरण में रहने वाले बच्चों के संबंध में “वुडवर्थ ने कहा – वे समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।

🌈 जुड़वा बच्चो पर प्रभाव– जुडवा बच्चो के शारीरिक लक्षण मानसिक शक्ति शैक्षिक योग्यता में समानता होती है।

👨‍✈️ न्यूमैन ,फ्रीमैन और होल गिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चो को अलग अलग वातावरण में रखा। उनमे वे एक जोड़े के बच्चों को बच्चे को गांव में दूसरे को नगर में रखा। 

    उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है।

      गांव का बच्चा अशिष्ट ,चिंताग्रस्त और कम बुद्धिमान था । और नगर का बच्चा शिष्ट,चिंतामुक्त और अधिक बुद्धिमान थे। 

👨🏼‍💼स्टीफेंस ने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन से यह निर्णय कर सकते है कि पर्यावरण का बुद्धि साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।

🌈 बालक पर बहुमुखी प्रभाव– बालक के बहुमुखी प्रभाव से तात्पर्य है कि बालक में  वातावरण  जिसमें शारीरिक ,मानासिक ,सामाजिक ,संवेगात्मक इत्यादि सभी का बच्चे के विकास में प्रभाव पड़ता है।

     🦚 इसकी पुष्टि एवेरान के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है।इस बालक को जन्म के बाद भेड़िया उठा ले गया था तो उसका पालक पोषण पशुओ के बीच मे हुआ था ।बाद में जब वह 11–12 वर्ष के करीब    हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया । बालक की  आकृति पशुओं सी थी।  उनके समान हाथ पैर से चलता था । कच्चा मांस खाता था ।   आवाज़ भी वैसे ही निकलता था । उसमे मनुष्य के समान बोलने और विचार की शक्ति नही थी। 

🌈 वातावरण के संचयी प्रभाव का उल्लेख करते हुए “स्टीफेंस” ने लिखा है – एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक प्रदत होता है।अगर बच्चा चतुर माँ बाप के साथ रहता है अधिक समय तक तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है उसका स्तर भी उतना ही गुरते चला जाता है।

 पहली दृष्टि में इसमे पर्यावरण के प्रभाव निःसंदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए की पिता के साथ बच्चे की समानता ,लंबाई में या शरीर की अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश आनुवंशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

📚📚📚📚 Notes by poonam sharma 🌺🌺🌺

🔆  बालक के विकास पर वातावरण का प्रभाव  :-

की

❇️ 5 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :- 

✨क्लार्क के अनुसार

कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है।

प्रजाति की श्रेष्ठता के परीक्षण के लिए उन्होंने अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षण लेकर सिद्ध किया कि जिसमे उन्होंने 

नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर कम बताया यह इसीलिए कम था क्योंकि उनमें  स्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक ,सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

❇️ 6 अनाथ बच्चों पर प्रभाव:-

▪️समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारणत:निम्न परिवार के ही होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है। उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है जिससे इस प्रकार के वातावरण में पलने वाले बच्चे के संबंध में 

✨बुडवर्थ ने कहा है कि 

वे समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते है।

❇️ 7 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव :- 

▪️जुड़वा बच्चों की शारीरिक लक्षण ,मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है।

▪️लेकिन ✨न्यूमेन , फ्रीमैन और होल जिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा।

▪️उनमें से जोड़े के एक बच्चे को – गांव में 

जबकि दूसरे बच्चे को – नगर में रखा।

उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है।

▪️गांव का बच्चा – अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था।

नगर का बच्चा – शिष्ट, चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

✨स्टीफेंस ने कहा कि –

▪️इस प्रकार की अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं की पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक या विशेष प्रभाव पड़ता है।

❇️ 8 बालक पर बहुमुखी प्रभाव:-

▪️वातावरण बालक के शारीरिक ,मानसिक, सामाजिक ,संवेगात्मक इत्यादि को प्रभावित करते हैं।

▪️इसकी पुष्टि एबेरोन के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है ।

▪️इस बालक के जन्म के बाद एक भेड़िया उठाकर ले गया था उसके बाद उसका पालन पोषण जंगली पशुओं के बीच हुआ ।बाद में जब वह 11- 12 वर्ष के करीब हुआ तो उसे कुछ शिकारियों ने पकड़ लिया तब उस बालक में कुछ ऐसे लक्षण देखने को मिले जैसे उसकी आकृति पशुओं की तरह थी, वह पशुओं के समान हाथ पैरों से चलता था, कच्चा मांस खाता था।

उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

▪️वातावरण के इन संचयी प्रभाव को उल्लेख करते हुए 

✨स्टीफेंस ने लिखा है कि –

▪️एक बच्चा जितना अधिक उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक उस पर्यावरण की तरफ प्रवृत्त होता है। 

▪️अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ रहता है तो अधिक समय तक वह भी उतना ही चतुर हो जाता है।

▪️अगर बच्चा हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर भी उतना ही गिरता चला जाता है।

▪️पहली दृष्टि में पर्यावरण के प्रभाव नि: संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी इस बार होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता लंबाई में या शरीर के अलग-अलग रचना में आयु के साथ बढ़ेगी।

▪️अर्थात उन समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

✍️

     Vaishali Mishra

☘️🌼 बालक पर वातावरण का प्रभाव🌼☘️

1-💫 शारीरिक प्रभाव

2-💫 मानसिक विकास का प्रभाव

3-💫 बुद्धि पर प्रभाव

4-💫 व्यक्तित्व का प्रभाव

5-🌼 प्रजाति की श्रेष्ठता  पर प्रभाव ➖ क्लार्क के अनुसार-कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है, अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया।

🌼 उनमें श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

6-☘️🌼 अनाथ बच्चों पर प्रभाव➖ समाज -कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारण निम्न परिवार के होते हैं। लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है। इसके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है, इस प्रकार के वातावरण में पलने वाले बच्चों के संबंध में वुडवर्थ ने कहा– वह समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।

7-🌼☘️ जुड़वा बच्चों पर प्रभाव➖ जुड़वा बच्चों के शारीरिक लक्षण,मानसिक शक्ति और शैक्षणिक योग्यता में समानता होती है।

🌼 न्यूमैन, फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा उनमें से जोड़े के एक बच्चे को गांव में दूसरे को नगर में रखा उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है।

🌼 गांव का बच्चा अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धि वाला था, नगर का बच्चा  शिष्ट ,चिन्ता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

🌼 स्टीफैन्स ने कहा है कि इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव होता है।

8-🌼☘️ बालक पर बहुमुखी  प्रभाव➖वातावरण बालक के शारीरिक ,मानसिक ,सामाजिक, संवेगात्मक आदि सभी अंगों पर प्रभाव डालता है।

🌼 इसकी पुष्टि ‘एवेराॅन के जंगली बालक ‘के उदाहरण से की जा सकती है।

🌼इस बालक को जन्म के बाद भेड़िया उठाकर ले गया उसका पालन पोषण पशुओं के बीच हुआ बाद में वह 11 -12 वर्ष के करीब हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया। उसकी आकृति पशुओं की -सी थी और वह उनके सामान हाथों पैरों से चलता था।वह कच्चा मांस खाता था उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

🌼 वातावरण के संचयी प्रभाव की उल्लेख करते हुए स्वीफेम्स ने लिखा–एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस वातावरण की तरह प्रदृत होता है अगर बच्चा चतुर माता-पिता के साथ रहता है अधिक समय तक तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिरता चला जाता है।

🌼 पहली दृष्टि में इसमें वातावरण के प्रभाव निस्संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी इस्वरण करना चाहिए कि पिता के साथ जो बच्चे की समानता है लंबाई में यह शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की बुद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

✍🏻📚📚 Notes by…… Sakshi Sharma📚📚✍🏻

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🌻बालक पर वातावरण का प्रभाव

🍄शारीरिक प्रभाव

 🍄मानसिक विकास का प्रभाव

🍄बुद्धि पर प्रभाव

🍄व्यक्तित्व का प्रभाव

➡️वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-

वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव के संबंध में🧑🏼‍💼 क्लार्क ने अपना मत देते हुये कहा है कि–

कुछ प्रजातियों की बौद्धिक श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है।

🧑🏼‍💼क्लार्क 👉🏻ने वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव में अपने विचार अमरीका के कुछ गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया क्लार्क का कहना है कि, नीग्रो प्रजाति की बुद्धि का स्तर इसलिए निम्न है, क्योंकि उनको अमेरिका की श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं होता है।

➡️ वातावरण का अनाथ बच्चों पर प्रभाव :-

समाज कल्याण केन्द्रों में अनाथ और बेसहारा बच्चे आते है। वे साधारणतः निम्न परिवारों से संबंध रखते हैं, लेकिन समाज कल्याण केन्द्रों में उनका अच्छा पालन-पोषण होता है, और उनको एक बेहतर वातावरण भी मिलता है, जिससे उनको अच्छा व्यक्तित्व प्राप्त होता है।

👉🏻वुडवर्थ के अनुसार,”

इस प्रकार के वातावरण में पाले जाने वाले बच्चे समग्र रूप में अपने माता-पिता से अच्छे ही सिद्ध होते हैं।

➡️वातावरण का जुड़वाँ बच्चों पर प्रभाव :-

जुड़वाँ बच्चों के शारीरिक लक्षणों, मानसिक शक्तियों, व्यवहार और शैक्षिक योग्यताओं में, अत्यधिक समानता होती है। लेकिन यदि दोनों बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा जाए तो उनमें पर्याप्त अन्तर होता है।

न्यूमैन, फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वाँ बच्चों में प्रत्येक जोड़े के एक बच्चे को गाँव के फार्म पर और दूसरे को नगर में रखा। बड़े होने पर दोनों बच्चों में पर्याप्त अन्तर पाया गया।

👉🏻स्टीफेन्स  के अनुसार,”पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण और उपलब्धि पर अधिक व विशेष प्रभाव पड़ता है।

➡️ वातावरण का बालक पर बहुमुखी प्रभाव :-

वातावरण, मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक सहित सभी गुणों पर गहरा प्रभाव डालता है। इसकी पुष्टि एवेरॉन के जंगली बालक के उदाहरण से की–

एक बच्चे को जन्म के बाद ही भेड़िया उठा ले गया था और उसका पालन-पोषण जंगली पशुओं के बीच में हुआ था। कुछ शिकारियों ने उसे सन 1799 ई. में पकड़ लिया। उस समय उसकी आयु 11 या 12 वर्ष की थी। वह बच्चा पशुओं के समान हाथों-पैरों से चलता था। वह कच्चा मांस खाता था। उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी। उसको मनुष्य के समान सभ्य और शिक्षित बनाने के सब प्रयास विफल हुए।

➡️वातावरण के संचयी प्रभाव की उल्लेख करते हुए   🧑🏼‍💼 स्टीफेन्स ने  लिखा है कि 

👉🏻👶🏻एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस वातावरण की तरह प्रदृत होता है अगर बच्चा चतुर माता-पिता के साथ रहता है अधिक समय तक तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिरता चला जाता है।

बच्चा जितने अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है, उसका व्यक्तित्व उतना ही उत्तम होगा। हालांकि मनुष्य के व्यक्तित्व और वृद्धि में कुछ प्रभाव आनुवंशिकता भी होता है।

👉🏻वातावरण के प्रभाव निस्संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ जो बच्चे की समानता लंबाई में या शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

 हालांकि मनुष्य के व्यक्तित्व और वृद्धि में कुछ प्रभाव आनुवंशिकता भी होता है।

         🌴🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌴

🖊️📚📖📝 Notes by shikha Tripathi📖📚🖊️💫💫💫💫

19/03/2021.                  Friday 

Last class ….

*भौगोलिक वातावरण

*सामाजिक वातावरण

*सांस्कृतिक वातावरण

*मानसिक वातावरण

👉 बालक पर वातावरण का प्रभाव

(1) शारीरिक अंतर का प्रभाव 

(2) मानसिक विकास पर प्रभाव

(3) बुद्धि पर प्रभाव

(4) व्यक्तित्व का प्रभाव

 Today class… वातावरण के प्रकार…..( पार्ट 2)

(5)🥏 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव क्लार्क के अनुसार:— कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है । 

👉अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें स्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक सामाजिक व सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है

(6)🥏 अनाथ बच्चे पर प्रभाव:—

समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारण निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है इस प्रकार के वातावरण में काले जाने वाले बच्चे के संबंध में

👉 वुडवर्थ  ने कहा:— वे समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं

(7)🥏 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव:—

जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है

👉 न्युन्मेन फ्रीमैन और हॉल जिंग:–

इन्होंने 20 जोड़ी जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा उनमें से जोड़ें को एक बच्चे को गांव में और दूसरे बच्चे को नगर में रखा उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है 

👉गांव का बच्चा अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था नगर का बच्चा शिष्ट, चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान थे

👉 स्टेफैंस ने कहा कि:— इस प्रकार के निर्णय से यह पता कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है

(8)🥏 बालक और बहुमुखी प्रभाव

 🥏वातावरण:—

 बालक के शारीरिक ,मानसिक, सामाजिक ,संवेगात्मक आदि सभी अंगों पर प्रभाव डालता है

👉 इसकी पुष्टि एवेरांन के जंगली बालक मोगली के उदाहरण से की जा सकती है

👉 इस बालक को जन्म के बाद भेरिया उठा ले गया ।उसका पालन पोषण पशुओं के बीच हुआ ।बाद में जब वह 11 12 वर्ष के करीब हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया। बालक की सभी आकृति पशुओं सी थी उनके समान हाथ, पैर से चलता था ,कच्चा मांस खाता था, उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी

🥏 वातावरण के संचायी प्रभाव का उल्लेख करते हुए स्टेफैंस ने लिखा:—

एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस पर्यावरण की तरफ से प्रवृत होता है अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ रहता है अधिक समय तक वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है उसका स्तर उतना ही गिरते चला जाता है पहले दृष्टि में इसमें पर्यावरण के प्रभाव निसंदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता लंबाई में या शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

✍Notes by:—संगीता भारती✍

           Thank you 🙏

🌳बालक पर वातावरण का प्रभाव🌳

              🌳प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव🌳

 क्लार्क के अनुसार:- कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण  अनुवांशिकता ना होकर वातावरण है अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है

          🌳 अनाथ बच्चों पर प्रभाव 🌳

समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारण निम्न परिवार  के होते हैं  लेकिन कल्याण केंद्र पर उनको अच्छे से पालन पोषण किया जाता है साथ ही अच्छा व्यवहार किया जाता है इस प्रकार के वातावरण में पहले वाले बच्चे के संबंध में

 वुडवर्थ ने कहा है वे बालक समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं

        🌳 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव 🌳

जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण, मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है

               , न्यूमैन फ्रीमैन और होल जिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चे को अलग अलग वातावरण में रखा इनमें से जुड़े के एक बच्चे को गांव में दूसरे बच्चे को नगर में रखा

                            , उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर था गांव का बच्चा अशिष्ट चिंता युक्त और कम बुद्धिमान था ,जबकि नगर का बच्चा स्वस्थ चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था

  स्टीफेंस ने कहा कि:- इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है

     🌳 बालक पर बहुमुखी प्रभाव 🌳

वातावरण

             1 शारीरिक 

2मानसिक 

3सामाजिक 

4संवेगात्मक 

इसकी पुष्टि  yeveroun के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है

                        , इस बालक को जन्म के बाद भेड़िया उठा ले गया उसका पालन पोषण पशुओं के बीच हुआ बाद में जब वह 11से 12 वर्ष के करीब हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया

              , बालक की सभी आकृति पशुओं की थी  उनके समान हाथ पेड़ पर चढ़ना और कच्चा मांस खाता था

            , उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी

वातावरण के संचयी प्रभाव का उल्लेख करते हुए स्टीफेंस ने लिखा———- एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस पर्यावरण की तरफ प्राकृत होता है अगर बच्चा चतुर मां-बाप के पास अधिक समय तक रहता है तो वह भी उतना चतुर हो जाता है अगर वह नकारात्मक वातावरण में रहता है तो वह भी उतना ही गिरते चला जाता है

पहली दृष्टि में इसमें पर्यावरण के प्रभाव नहीं निःसंदेश प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की संरचना में आयु के साथ बढ़ती अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है

Nots by सपना साहू 

🌳🌳🌳🌳🌳🌴🌴🌴🌴🌴🍃🍃🍃🍃🍃🖋️🖋️🖋️🖋️

🌼🌼बालक पर वातावरण का प्रभाव🌼🌼

🌼 1. शारीरिक प्रभाव

 🌼2. मानसिक विकास का प्रभाव

🌼3. बुद्धि पर प्रभाव

🌼4. व्यक्तित्व का प्रभाव

🌼🌼🌼वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-

🌼वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव के संबंध में क्लार्क ने अपना मत देते हुये कहा है कि:-“कुछ प्रजातियों की बौद्धिक श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है।”

🌼🌼क्लार्क ने वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव में अपने विचार अमेरीका के कुछ गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया कि, नीग्रो प्रजाति की बुद्धि का स्तर इसलिए निम्न है, क्योंकि उनको अमेरिका की श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं था।

🌼🌼 वातावरण का अनाथ बच्चों पर प्रभाव :-

🌼समाज कल्याण केन्द्रों में अनाथ और बेसहारा बच्चे आते है। वे साधारणतः निम्न परिवारों से संबंध रखते हैं, लेकिन समाज कल्याण केन्द्रों में उनका अच्छा पालन-पोषण होता है, और उनको एक बेहतर वातावरण भी मिलता है, जिससे उनका व्यक्तित्व अच्छा प्राप्त होता है।

🌼🌼वुडवर्थ के अनुसार:- “इस प्रकार के वातावरण में पाले जाने वाले बच्चे समग्र रूप में अपने माता-पिता से अच्छे ही सिद्ध होते हैं।”

🌼वातावरण का जुड़वाँ बच्चों पर प्रभाव :-

जुड़वाँ बच्चों के शारीरिक लक्षणों, मानसिक शक्तियों, व्यवहार और शैक्षिक योग्यताओं में, अत्यधिक समानता होती है। लेकिन दोनों बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा जाए तो उनमें पर्याप्त अन्तर होता है।

🌼न्यूमैन, फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वाँ बच्चों में प्रत्येक जोड़े के एक बच्चे को गाँव के फार्म पर और दूसरे को नगर में रखा। बड़े होने पर दोनों बच्चों में पर्याप्त अन्तर पाया गया।

🌼स्टीफेन्स  के अनुसार:- “पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण और उपलब्धि पर अधिक व विशेष प्रभाव पड़ता है।

🌼🌼🌼 वातावरण का बालक पर बहुमुखी प्रभाव :-

🌼वातावरण, मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक सहित सभी गुणों पर गहरा प्रभाव डालता है। इसकी पुष्टि एवेरॉन के जंगली बालक के उदाहरण से की:-

🌼🌼एक बच्चे को जन्म के बाद ही भेड़िया उठा ले गया था और उसका पालन-पोषण जंगली पशुओं के बीच में हुआ था। कुछ शिकारियों ने उसे सन 1799 ई. में पकड़ लिया। उस समय उसकी आयु 11 या 12 वर्ष की थी। वह बच्चा पशुओं के समान हाथों-पैरों से चलता था। वह कच्चा मांस खाता था। उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी। उसको मनुष्य के समान सभ्य और शिक्षित बनाने के सब प्रयास विफल हुए।

🌼🌼वातावरण के संचयी प्रभाव की उल्लेख करते हुए , स्टीफेन्स ने  लिखा है कि एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस वातावरण की तरह प्रदृत होता है अगर बच्चा चतुर माता-पिता के साथ रहता है  तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिरता चला जाता है।

🌼बच्चा जितने अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है, उसका व्यक्तित्व उतना ही उत्तम होगा। हालांकि मनुष्य के व्यक्तित्व और वृद्धि में कुछ प्रभाव आनुवंशिकता भी होता है।

🌼🌼वातावरण के प्रभाव नि:संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ जो बच्चे की समानता लंबाई में या शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

 🌼हालांकि मनुष्य के व्यक्तित्व और वृद्धि में कुछ प्रभाव आनुवंशिकता भी होता है।

         🌼🌼🌼manjari soni🌼🌼🌼

🔆🌲बालक पर वातावरण का प्रभाव🌲🔆

🍀1.शारीरिक प्रभाव

🍀2.मानसिक विकास का प्रभाव

🍀3.बुद्धि पर प्रभाव

🍀4.व्यक्तित्व का प्रभाव

🍀5.वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठतापर प्रभाव➖️✏️ क्लार्क के अनुसार➖️ कुछ प्रजाति की सफलता का कारण अनुवांशिकता ना होकर वातावरण है अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोग प्रजाति के लोगों की बुद्धि परीक्षण लेकर सिद्ध किया कि नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर कम होती है उनकी बौद्धिक स्तर इसलिए होती है क्योंकि उनमें से प्रजाति के समान शैक्षिक सामाजिक या सांस्कृतिक उपलब्ध नहीं हो पाता है

🍀6.अनाथ बच्चों पर प्रभाव ➖️समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे  साधारण निम्न परिवार के होते थे लेकिन कल्याण केंद्र में उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है उसके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है इस प्रकार के वातावरण में चलने वाले बच्चे के संबंध में

वुडवर्थ ने कहा वे समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं

🍀7.जुड़वा बच्चों पर प्रभाव ➖️जुड़वा बच्चों की शारीरिक लक्षण,मानसिक शक्ति,और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है

 🔅✏️न्यूमैन, फ्रीमैन एंड होलसिंगर ➖️ने   20 जोड़े जुड़वा बच्चों को अलग अलग वातावरण मे रखा और उनमें से कुछ जोड़े के एक बच्चे को गांव में और कुछ बच्चों को नगर में रखें उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है गांव का बच्चा अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था और वही नगर का बच्चा शिष्ट,चिंता,मुक्त,और अधिक बुद्धिमान था

🔅✏️स्टीफेंस का मत है ➖️कि इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक प्रभाव पड़ता है

🍀8. बालक पर बहुमुखी प्रभाव➖️ बालक पर वातावरण का बहुत ही प्रभाव पड़ता है जैसे शारीरिक,मानसिक, सामाजिक,संवेगात्मक इत्यादि

 🔅इसकी पुष्टि एवेरान के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है

इस बालक को जन्म के बाद भेड़िया उठाकर ले गया था और उसका पालन पोषण जंगली पशुओं के बीच हुआ था।

कुछ शिकारी ने उसे पकड़ लिया उसकी आयु 11 से 12 वर्ष थी उसके शरीर की आकृति बनावट पशुओं के समान थी।

मनुष्य के समान सोच विचार वह नहीं कर पाता था उसके मनुष्य के समान बनाने में प्रयास किया गया लेकिन सारे प्रयास असफल हो गए तो इसके कहने का मतलब यह है।

कि बहुमुखी प्रभाव बालक पर बहुत ही प्रभाव पड़ता है।

🍀9. वातावरण के संचयी प्रभाव ➖️का उल्लेख करते हुए 🔅✏️स्टीफेंस ने लिखा➖️

एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है और वह उतना ही अधिक पर्यावरण की तरह प्रदत् होता है अगर बच्चा चतुर माता-पिता के साथ रहता है तो वह भी उतना ही चतुर होता है अगर वह हानिकारक या बुरे वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिरता चला जाता है

🔅इसीलिए बच्चे को अच्छा वातावरण देना चाहिए जितना अच्छा बच्चे को वातावरण मिलेगा बच्चे उतना ही अच्छा रहेगा

🔅पर्यावरण के प्रभाव में नि :संदेश प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की संरचना में आयु के साथ बढ़ती अर्थात वक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है

📝Notes by sapna yadav 🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆

🌻🌻🌻🌻🌻🌻१९०३२०२१🌻🌻🌻

5️⃣ प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव : प्रजाति की श्रेष्ठता के संबंध में क्लार्क महोदय ने कहा है कि “कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है।”

↪️ प्रजाति की श्रेष्ठता के लिए क्लार्क ने अमेरिका के कुछ गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया।

↪️ क्लार्क के समर्थन में कुछ और मनोवैज्ञानिकों ने कहा कि “निग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।”

6️⃣ अनाथ बच्चों पर प्रभाव : समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे सामान्यत: निम्न परिवार के होते हैं, लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है, उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है तो इस प्रकार के वातावरण में पलने वाले बच्चे के संबंध में वुडवर्थ (Wood worth) ने कहा “वे समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।”

7️⃣ जुड़वा बच्चों पर प्रभाव : 

↪️जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण, मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में सामान्य होती है। 

↪️न्यूमैन, फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चे को अलग अलग वातावरण में रखा। इनमें से जोड़े के एक बच्चे को गांव में और दूसरे को नगर में रखा। उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनो में पर्याप्त अंतर है।

↪️गांव का बच्चा अशिष्ट,चिंताग्रस्त और कम बुद्धिमान था और नगर का बच्चा शिष्ट, चिंतामुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

👤स्टीफेंस ने कहा कि “इसप्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।”

8️⃣ बालक पर बहुमुखी प्रभाव : बालक के विकास में वातावरण का कई प्रभाव पड़ता है। जैसे – 1. शारीरिक , 2.मानसिक, 3. सामाजिक, 4.संवेगात्मक इत्यादि।

↪️ इसकी पुष्टि एवेरॉन के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है। 

↪️ इस बालक को जन्म के बाद ही भेड़िया उठाकर ले गया था। उसका पालन पोषण पशुओं के बीच हुआ। 

↪️ बाद में जब वह 11-12 वर्ष का हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया। बालक की उस समय आकृति पशुओं के जैसा था। 

↪️ वह पशुओं के समान हाथ-पैर से चलता था, कच्चा मांस खाता था।

↪️उसमे मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

          वातावरण के संचयी प्रभाव का उल्लेख करते हुए स्टीफेंस ने लिखा कि एक बच्चा जितना अधिकतम वातावरण में रहता है उतना ही उस वातावरण की तरफ प्रवृत्त होता है। अगर वह बच्चा चतुर माता-पिता के साथ अधिक समय तक रहता है तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है। अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर गिरते चला जाता है। पहली दृष्टि में इसमें पर्यावरण के प्रभाव निःसंदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हम यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता, लंबाई में या शरीर के अलग संरचना में, आयु के साथ बढ़ेगी।अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।🔚

        🙏

🌹📝 by – Awadhesh Kumar 🌹🌹

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            ⛲बालक पर वातावरण का प्रभाव⛲

    💦  प्रजाति की श्रेष्ठता  पर प्रभाव

🗣️क्लार्क के अनुसार

✍️कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है अमेरिका के गोरे और निग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया;

                         नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें स्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

💦अनाथ बच्चों पर प्रभाव÷

✍️ समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारणत:निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है इस प्रकार के वातावरण में पलने  के संबंध में;

       🗣️  “वुडवर्थ “ने कहा कि वे समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।

         👬  जुड़वा बच्चों पर प्रभाव👭

✍️जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण, मानसिक शक्ति और शैक्षिक योगिता इत्यादि में समानता होती है।

🗣️न्यूमैन फ्रीमैन और होलजिंगर के अनुसार÷

👬➡️ जुड़वा जोड़े बच्चो पर प्रयोग किया इन्होंने इन जुड़वा जोड़े बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा उसने एक जोड़े के एक बच्चे को गांव में व दूसरे बच्चे को नगर में रखा उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है,

✍️गांव का बच्चा अशिष्ट चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था, नगर का बच्चा शिष्ट चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

🗣️”स्टीफंस ने कहा है कि इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और  उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।

  💦 बालक पर बहुमुखी प्रभाव÷

           ⛲ वातावरण⛲

⛲शारीरिक मानसिक सामाजिक संवेगात्मक इत्यादि का प्रभाव पड़ता है।

✍️बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक इत्यादि चीजों पर वातावरण प्रभाव डालता है।

✍️इसकी पुष्टि एवेरान के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है ;

✍️इस बालक को जन्म के बाद ही भेड़िया उठाकर ले गया था और उसका पालन पोषण भी जंगली जानवर के बीच हुआ था कुछ वर्ष बाद जब वह 11 से 12 वर्ष के बीच था तब उसे शिकारियों ने पकड़ लिया था उसके बाद उस बालक में देखा गया कि कि अब उस बालक की आकृति पशुओं सी थी उनके सामान हाथ -पैर दोनों का साथ प्रयोग करके चलता था, कच्चा मांस भी खाता था पशुओं के समान आवाजें भी निकालता था।

उसमें मनुष्य सामान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

✍️मनुष्य के रूप में परिवर्तित करने के भरपूर प्रयास किए गए किंतु सभी प्रयास असफल रहे।

✍️वातावरण के संचई प्रभाव का उल्लेख करते हुए स्टीफन्स ने लिखा है कि एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस पर्यावरण की तरफ प्रवृत्त होता है यदि अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ  अधिक समय तक तो वह उतना ही चतुर हो जाता है; 

और यदि हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिरते चला जाता है।

✍️पहले  इसमें पर्यावरण के प्रभाव में निसंदेह प्राप्त होते हैं, लेकिन हमें यह स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता लंबाई, में यह शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी। अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

⛲⛲Written by $hikhar pandey⛲⛲

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

🔆 बालक पर वातावरण का प्रभाव ➖

 शिक्षाविदों ने अनेक अध्ययन और परीक्षण से यह सिद्ध किया कि बालक के  व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू पर भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है |

1) शारीरिक अंतर का प्रभाव

2) मानसिक विकास पर प्रभाव

3) बुद्धि पर प्रभाव 

4) व्यक्तित्व का प्रभाव 

5) प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव

6) अनाथ बच्चों पर प्रभाव

7) जुड़वा बच्चों पर प्रभाव

8) बालक पर बहुमुखी प्रभाव

🎯  प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव➖

” क्लार्क ” का मत है कि

 “कुछ प्रजातियों की श्रेष्ठता का कारण  वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है |”

 उन्होंने अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर यह सिद्ध किया कि निग्रो प्रजाति की बुद्धि का स्तर इसलिए कम है क्योंकि उन्हें श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक ,सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है |

🎯 अनाथ बच्चों पर प्रभाव➖

 समाज कल्याण केंद्र में अनाथ बच्चे साधारणतया निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छी तरह से पालन पोषण किया जाता है उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है इस प्रकार के वातावरण में पढ़ने वाले बच्चे बच्चे के संबंध में 

वुडवर्थ ने कहा है कि वे

” समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं |”

🎯 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव ➖

जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है |

 लेकिन न्यूमैन, फ्रीमैन, और होलजिंगर  ने 20 जुड़वा बच्चों  बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा |

 उनमें से जोड़े के एक बच्चे को गांव में तथा दूसरे को शहर में रखा उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त व्यापक अंतर था |

 गांव का बच्चा अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान  जबकि शहर का बच्चा चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था |

 इसी संबंध में  ” स्टीफैन्स ” कहा कहा है कि

 इस प्रकार के अध्ययन से यह निर्णय नहीं कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है |

🎯 बालक पर बहुमुखी प्रभाव➖

वातावरण का प्रभाव ,शारीरिक,,मानसिक सामाजिक संवेगात्मक, आदि कई रूप से पड़ता है |

इसकी  पुष्टि ऐवरान  के  जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है |

 जिसको जन्म  के बाद भेड़िया उठा ले गया उसका पालन पोषण भी जंगली जानवरों या पशुओं के बीच हुआ|

कुछ समय बाद उसे शिकारियों ने पकड़ लिया जब वह करीब 11- 12 वर्ष का था तब बालक की आकृति पशु जैसी थी जानवरों के सामान हाथ पैर से चलता था |

 कच्चा माल खाता था उसमें  मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी |

 वातावरण के संचयी प्रभाव  का उल्लेख करते हुए ” स्टीफैन्स” ने

 लिखा है कि

”  एक बच्चा जितना अधिक  समय  उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस पर्यावरण की तरह प्रवृत होता है |

 अगर बच्चा  चतुर मां-बाप के साथ रहता है तो अधिक समय तक वो भी उतना ही चतुर हो जाता है |

 इसी प्रकार के अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ नहीं रहता है |

 इसी प्रकार यदि वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर उतना ही गिर जाता है |

 पहली दृष्टि में उसमें पर्यावरण के प्रभाव निसंदेह प्राप्त होते लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ जो बच्चे की समानता है वह लंबाई में या  शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंशकालिक अनुवांशिकता के कारण होता है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

🍀🍀🌸🌻🌼🌺🌸🌻🌼🌺🌸🌻🌼🌺🌸🌼🌺🌺

🎄 बालक पर वातावरण का प्रभाव 🎄

🔺 प्रजाति की श्रेष्टता पर प्रभाव :-

 🔹क्लार्क र्क के अनुसार ➖

 कुछ प्रजाति की श्रेष्टता का कारण वंशनुकर्म ना होकर वातावरण है, अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षण लेकर सिद्ध किया।

             नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें स्वयं प्रजाति के समान शैक्षिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

👭 अनाथ बच्चों पर प्रभाव:-

🔹 समाज कल्याण केंद्रों में, अनाथ बच्चे साधारण तौर निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है।

            इस प्रकार के वातावरण में पढ़ने वाले बच्चों के संबंध में “वुडवर्ड”  ने कहा ➖

 वह समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे सिद्ध होते  हैं।

👩‍❤️‍👩 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव :-

🔹 जुड़वा बच्चों के शारीरिक लक्षण मानसिक,शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है।

                न्यूमैन फ्रीमैन और हॉल जींगर ने 20 जुड़वा बच्चे, को अलग-अलग वातावरण में रखा। उनमें से जोड़े के एक बच्चे को गांव में और दूसरे को शहर में रखा।

            उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है। गांव का बच्चा  अशिष्ट,  चिंतन ग्रस्त और कम बुद्धिमान था नगर का बच्चा शिष्ट, चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

🔹 स्टीफेंस ने कहा ➖

 इस प्रकार के अध्ययन से,हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।

🤴🏻 बालक पर  बहुमुखी प्रभाव:-

➖ बालक पर वातावरण का शारीरिक,मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी पुष्टि, एवरेन के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है :-

▪️ जिसको जन्म के बाद भेड़िया उठाकर ले गया और उसका लालन पोषण जंगली जानवरों के बीच हुआ। 11 -12 बस की आयु में उसे शिकारियों ने पकड़ा तो पाया कि उसकी आकृति  पशु जैसी थी…. सोचने समझने की क्षमता भी पशु के समान थी..

 उसे मनुष्य के सामान बनाने के लिए बहुत सारे प्रयास किए गए, लेकिन सारे प्रयास विफल रहे हैं।

          अंततः,वातावरण के संचयी प्रभाव की उल्लेख करते हुए स्टीफन्स ने कहा ➖

 एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक इस वातावरण  की तरफ प्रवृत होता है। अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ रहता है अधिक समय तक वह भी उतना ही चतुर हो जाता है। अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है उसका स्तर उतना ही गिरते चला जाता है।

          पहली दृष्टि में, इसमें पर्यावरण का प्रभाव निसंदेह प्राप्त होता है, लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता, लंबाई में या शरीर से अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी।यानी,उक्त समानता की बुद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।।।

📝नोट्स BY “AkAnKsHA”📝

🤴🏻👻👩‍❤️‍👨🎄💖🤓🙏🏻👏🏻

बालक पर वातावरण का प्रभाव

💥💥💥💥💥💥💥💥

19  march  2021

1. शारीरिक अंतर का प्रभाव

2. मानसिक विकास पर प्रभाव

3. बुद्धि पर प्रभाव

4. व्यक्तित्व का प्रभाव

5. 🌺 प्रजाति की श्रेष्ठता पर वातावरण का प्रभाव  :-

👉 क्लार्क  के अनुसार  :-

कुछ प्रजातियों की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है।

         उन्होंने अमेरिका के गोरे और निग्रो प्रजाति के लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर यह सिद्ध किया है कि  –

निग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनको श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक , सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

अतः हम जानते हैं मनुष्य पर अनुवांशिकता के साथ –  साथ , वातावरण  का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता और विशेषकर उस वातावरण में उन्हें किस प्रकार का माहौल, संगति मिली है इसका भी व्यापक प्रभाव पड़ता है।

6.  🌺 अनाथ बच्चों पर वातावरण का प्रभाव  :-

समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारणतः निम्न परिवार के होते हैं लेकिन , समाज कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है , उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है ।

        अतः इस प्रकार के वातावरण में पलने वाले बच्चों के संबंध में –

👉 वुडवर्थ  ने कहा है कि  :-

 ऐसे बच्चे समग्र रूप से अपने माता-पिता से अच्छे / बेहतर सिद्ध होते हैं।

अर्थात्  हम जानते कि अनाथ बच्चों में अनुवांशिक गुण भले ही अपने निम्न स्तर के माता – पिता के होते हैं परंतु यदि समाज कल्याण केंद्र जैसे अनेक विशेष संस्थाओं में ऐसे बच्चे रहते हैं तो उनको एक सुशिक्षित, सभ्य, सकारात्मकता पूर्ण वातावरण उपलब्ध होता है तो अनाथ बच्चे भी अपने निम्न स्तर के माता पिता से पैदा होने के बावजूद भी उच्च बौद्धिकता से परिपूर्ण होते हैं।

 7.  🌺 जुड़वा बच्चों पर वातावरण का  प्रभाव  :-

जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण , मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में लगभग समानता होती है।

👉  शिक्षाविद  न्यूमैन  ,  फ्रीमैन , और  होलजिंगर

ने  20 जोड़े  जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वतावरण में रखा 

उनमें से जोड़े के 1  बच्चे को गांव के वातावरण में तथा 

दूसरे बच्चे को शहर के वातावरण में रखा ।

तब उन्होंने पाया कि बड़े होने पर दोनों बच्चों में पर्याप्त अंतर है।

            अतः वह बच्चा जो गांव के वातावरण में रहा वह अशिष्ट , चिंताग्रस्त और कम बुद्धिमान था।  तथा

वही बच्चा जो शहर के वातावरण में रहा वह स्वस्थ ,  चिंतामुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

👉 स्टीफेंस  ने कहा है कि  :-

इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक,  विशेष प्रभाव पड़ता है।

8.  🌺बालक पर वातावरण का बहुमुखी प्रभाव  :-

वातावरण का बालक पर बहुमुखी रूप से प्रभाव पड़ता है जैसे कि  – 

शारीरिक 

मानसिक 

सामाजिक 

संवेगात्मक 

आर्थिक        आदि।

👉 इसकी पुष्टि   ‘ एवेरॉन ‘  के  ‘ जंगली बालक ‘  के उदाहरण से की जा सकती है कि :-

इस बालक को जन्म के बाद ही भेड़िया उठा कर ले गया , जिससे उसका पालन – पोषण जंगली पशुओं के बीच हुआ।

बाद में जब वह बालक 11 वर्ष के करीब हुआ तो उसे शिकारियों ने पकड़ लिया।

उस बालक की शारीरिक आकृति तो मनुष्य जाति की ही थी परंतु जंगली पशुओं के साथ रहने से उसके लक्षण पशुओं की भांति होने हो गए थे ।

वह पशुओं के समान हाथ और पैर दोनों से चलता था ,  कच्चा मांस खाता था , पशु के समान आवाजें भी निकालता था।

अंततः उस बालक में मनुष्यों की भांति बोलने और विचार आदि करने की शक्ति नहीं थी।

 👉👉  अतः ये सभी वातावरण का ही प्रभाव है।

🌻🌻   वातावरण के संचयी प्रभाव का उल्लेख करते हुए 

स्टीफेंस ने लिखा है कि  :-

 एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना अधिक ही इस वातावरण की तरफ प्रवृत्त होता है।

यदि कोई बच्चा अधिक समय तक चतुर / बुद्धिमान माता – पिता के साथ रहता है तो वह भी उतना ही चतुर / बुद्धिमान हो जाता है। 

और यदि वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो बच्चे का स्तर उतना ही गिरते चला जाता है।

पहली दृष्टि में इसमें वातावरण के प्रभाव निसंदेह  प्राप्त होते हैं , लेकिन  –

हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता , लंबाई में या शरीर के अलग-अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी।

                अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

अंततः उपर्युक्त सभी तथ्यों के आधार पर हम समझ सकते हैं कि बच्चों के विकास में यदि वातावरण का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है तो अनुवांशिकता का भी अपना एक विशेष प्रभाव पड़ता है।

✍️Notes by – जूही श्रीवास्तव✍️

बालक पर वातावरण का प्रभाव

🌙🌎🪐🌦️☁️🌟💫🌔💥

5. प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव 🤟

 क्लार्क के अनुसार , कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण होता है। उन्होंने अमेरिका के गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया।

            नीग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता है।

6. अनाथ बच्चों पर प्रभाव 🚶‍♀️🧍

समाज कल्याण केंद्रों में अनाथ बच्चे साधारणत: निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पालन पोषण किया जाता है। उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है। इस प्रकार के वातावरण में पर ले के संबंध में

 वूडवर्थ ने कहा, कि वे समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।

7. जुड़वा बच्चों पर प्रभाव 🧑‍🤝‍🧑🧑‍🤝‍🧑👯👫🧑‍🤝‍🧑

जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण, मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता इत्यादि में समानता होती है।

न्यूमैन, फ्रीमैन एवम् होलजिंगर के मतानुसार, जुड़वा जोड़े बच्चों पर प्रयोग किया। इन्होंने इन जुड़वा जोड़े बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा।

 उन्होंने  एक जोड़े के एक बच्चे को गांव में व दूसरे बच्चे को नगर में रखा उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर है।

 गांव का बच्चा अशिष्ट, चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था जबकि नगर का बच्चा शिष्ट, चिंता मुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

स्टीफेंस ने कहा कि किस प्रकार के अध्ययन से यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।

8. बालक पर बहुमुखी प्रभाव 🧘🏃🧗🤼🏇🤺⛷️🏄🪂🔥

वातावरण में बालक पर बहुमुखी प्रभाव पड़ता है जैसे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक इत्यादि।

 इसकी पुष्टि एवेरान के जंगल के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है। 

 बालक के जन्म के बाद उसको भेड़िया उठाकर जंगल में ले गया और उस बच्चे का पालन पोषण जंगली जानवरों के बीच हुआ था। जब वह बच्चा 11 से 12 वर्ष के बीच था तब उसे शिकारियों ने पकड़ लिया था उसके बाद उस बालक में देखा गया कि अब उस बालक की आकृति पशुओं के समान थी उनके सामान हाथ पैर दोनों का साथ प्रयोग करके चलना, कच्चा मांस खाना, पशु के समान आवाज निकालना इत्यादि। अब उस बच्चे में मनुष्य के बच्चे के सामान सोचने समझने और विचार विमर्श करने की क्षमता नहीं थी।

उस बच्चे को मनुष्य के रूप में परिवर्तित करने के भरपूर प्रयास किए गए किंतु सभी प्रयास असफल रहे हैं।

वातावरण के संचई प्रभाव का उल्लेख करते हुए स्टीफैंस ने लिखा कि एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक प्रदत्त होता है अगर बच्चा माता पिता के साथ अधिक रहता है तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका स्तर भी उतना ही निम्न स्तर का हो जाता है।

पहलेे इस में पर्यावरण के प्रभाव नि: संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ बच्चे की समानता लंबाई में या शरीर की अलग संरचनाओं में आयु के साथ बढ़ेगी अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

Notes by Shreya Rai✍🏻🙏

⚡☀️👥  बालक पर वातावरण का प्रभाव 👥☀️⚡

🏵️ 5  प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव 

क्लार्क  -*-

कुछ प्रजाति की श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम ना होकर वातावरण है।

 अमेरिका के कुछ गोरे और निग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया।

 कुछ लोगों ने उनका साथ दिया ।

निग्रो प्रजाति की बुद्धि स्तर इसलिए कम है क्योंकि उनमें जो श्वेत प्रजाति है उसके समान शैक्षिक और सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता।

🎡 6 अनाथ बच्चों पर प्रभाव

 समाज कल्याण केंद्र में अनाथ बच्चे साधारणत: निम्न परिवार के होते हैं लेकिन कल्याण केंद्र पर उनका अच्छे से पोषण किया जाता है ।

उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है ।

इस प्रकार के वातावरण में पलने वाले बच्चे के संबंध में वुडवर्थ ने कहा  –

वे समग्र रूप से अपने माता पिता से अच्छे सिद्ध होते हैं।

☘️ 7 जुड़वा बच्चों पर प्रभाव

 जुड़वा बच्चे के शारीरिक लक्षण , मानसिक शक्ति और शैक्षिक योग्यता में समानता होती है ।

न्यूमैन , फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वा बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा।

 उनमें से जोड़े के एक बच्चे को गांव में रखा और दूसरे को शहर में रखा ।

उन्होंने देखा कि बड़े होने पर दोनों में पर्याप्त अंतर था।

 गांव का बच्चा अशिष्ट चिंता ग्रस्त और कम बुद्धिमान था ।

नगर का बच्चा श्रेष्ठ चिंतामुक्त और अधिक बुद्धिमान था।

–*  स्टिफेंस ने कहा कि

 इस प्रकार के अध्ययन से हम यह निर्णय कर सकते हैं कि पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण प्रभाव पड़ता है और उपलब्धि पर अधिक विशेष प्रभाव पड़ता है।

💦 8 बालक पर बहुमुखी प्रभाव

 बाहरी वातावरण का शारीरिक , मानसिक , सामाजिक , संवेगात्मक इत्यादि सभी अंगों पर प्रभाव डालता है ।

इसकी पुष्टि एवेरॉन के जंगली बालक के उदाहरण से की जा सकती है ।

इस बालक को जन्म के बाद भेड़िया उठा ले गया था।

 उसका पालन पोषण पशुओं के बीच हुआ ।

बाद में जब वह 11 से 12 वर्ष के करीब हुआ तो उसे शिकारियों ने  पकड़ लिया।

 बालक की तब आकृति पशुओं जैसी थी , पशुओं जैसे हाथ पैर से चलता था , कच्चा मांस खाता था।

 उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी।

वातावरण के संचयी प्रभाव का  उल्लेख करते हुए स्टीफेंस ने लिखा —

एक बच्चा जितना अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है वह उतना ही अधिक पर्यावरण की तरफ प्रवृत्त होता है ।

अगर बच्चा चतुर मां-बाप के साथ अधिक समय तक रहता है तो वह भी उतना ही चतुर हो जाता है ।

इसी प्रकार अगर वह हानिकारक वातावरण में रहता है तो उसका भी स्तर गिर जाता है ।

पहली दृष्टि में इसमें पर्यावरण के प्रभाव निस्संदेह प्राप्त होते हैं लेकिन हमें यह भी स्मरण होना चाहिए कि पिता के साथ जो बच्चे के समानता है लंबाई में या शरीर के अलग संरचना में आयु के साथ बढ़ेगी ।

अर्थात उक्त समानता की वृद्धि का कुछ अंश अनुवांशिकता की परिपक्वता के कारण होता है।

🌸 धन्यवाद

      द्वारा

      वंदना शुक्ला

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