🗯️  🌳अनुवांशिकता और वातावरण🌳🗯️

        🗯️🌳  वातावरण (environment)🌳🗯️

🌴 बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं है

                           . वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम में अनेक शक्तियां या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है लेकिन इन शक्तियों का विकास वातावरण में होता है

                                       . यदि बच्चों को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो बच्चे की शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता है

                    . पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि + आवरण 

 परि= चारों ओर 

आवरण= ढकने वाला

                            . व्यक्ति के चारों ओर जो भी कुछ है उसका पर्यावरण हैं इसमें वे सब तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन में और व्यवहार को प्रभावित करते हैं

🌴जिस्बर्ट के अनुसार:- वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है

🌴एनी अनास्टासी  के अनुसार:- वातावरण में भी सभी वस्तुएं सम्मिलित है जो व्यक्ति के पित्रैक के अतिरिक्त उसके सभी पक्षों को प्रभावित करती हैं

🌴  मेकाइवर एवं पेज के अनुसार:-  स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण  का फल है

                             , पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक के उत्पाद कोषों में भी  निहित  है

🌴 बोरिंग ,लैगफील्ड एवं वेल्ड के अनुसार:- एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी  उत्तेजनाओ का योग आ जाता है जिसको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है

🌴 जे एस रॉस के अनुसार:- वातावरण एक वह शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है

🌴   woodworth के अनुसार:- वातावरण में भी समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया

🌴 डगलस व हॉलैंड के अनुसार:- वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त भाग शक्तियां, प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन, स्वभाव ,व्यवहार विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं

   ☺️😊सपना साहू 😊☺️

🔆 वातावरण (Environment) 

▪️बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का भी महत्व कम नहीं है। वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है लेकिन इन शक्तियों क्षमताओं का विकास वातावरण में ही होता है।

▪️यदि हम बच्चों की इन शक्तियों क्षमताओं को विकसित होने के लिए वैसा या उचित या अनुचित वातावरण नहीं देंगे तो वह शक्ति और क्षमता कभी भी विकसित नहीं हो पाएगी।

▪️जन्मजात शक्तियों क्षमताओं को पोषित करने का कार्य वातावरण का ही है जब तक यह शक्तियां क्षमता है वातावरण द्वारा पोषित नहीं होती तब तक उनका कोई भी महत्व या उनकी कोई उपयोगिता नहीं रह जाएगी।

▪️वंशानुक्रम व वातावरण एक दूसरे से अंतः संबंधित है।

▪️वंशानुक्रम से प्राप्त शक्तियां या विशेषताओं का विकास वातावरण में ही होता है यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण इन शक्तियों का पोषक या पर्यावरण कहलाता है।

❄️वातावरण का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Environment)

▪️‘वातावरण‘ के लिए ‘पर्यावरण’ शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘परि + आवरण‘। ‘परि‘ का अर्थ है- ‘चारों ओर’ एवं ‘आवरण‘ का अर्थ है-‘ढकने वाला‘।  

▪️इस प्रकार पर्यावरण या वातावरण वह वस्तु है जो चारों ओर से ढके हुए है। अतः हम कह सकते हैं कि व्यक्ति के चारों ओर जो कुछ है, वह उसका वातावरण है। इसमें वे सभी तत्व सम्मिलित है, जो मानव के जीवन व व्यवहार को प्रभावित करते हैं।  

▪️कोई भी चीज या कोई भी कार्य या कोई भी बात जो भी हमारे आसपास घटित हो रही है उसका कुछ ना कुछ प्रभाव हमारे ऊपर निश्चित रूप से पड़ता है।

▪️पर्यावरण में केवल कोई वस्तु ही नहीं बल्कि इसके साथ-साथ पर्यावरण की जो गतिविधि हैं जो घटित हो रही हैं वह भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को यह हमारी मानसिकता वह हमारे मनोविज्ञान को निश्चित रूप से प्रभावित करती है।

▪️वातावरण के अर्थ को और अधिक स्पष्ट करने के लिए कुछ परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

❇️(1) जिस्बर्ट के शब्दों में –

‘‘वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए है और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है।‘‘

❇️(2) एनास्टासी के अनुसार –

‘‘वातावरण वह प्रत्येक वस्तु है, जो व्यक्ति के जीन्स के अतिरिक्त प्रत्येक वस्तु को प्रभावित करती है।‘‘

❇️(3) मैकाइवर व पेज के अनुसार –

“स्वयं प्राणी, उसके जीवन का ढांचा ,बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण का फल है।

पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक के उत्पादक कोषो में भी निहित है।”

❇️(4) बोरिंग लैंगफील्ड एवं बेल्ड के अनुसार – 

“एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजनाओं का योगा जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।”

❇️(5) जे.एस.रॉस के अनुसार –

 ‘‘वातावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।‘‘ 

❇️(6) वुडवर्थ के शब्दो में – 

‘‘वातावरण में सब वाह्य तत्व आ जाते हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरम्भ करने के समय से प्रभावित किया है।‘‘

❇️(7) डग्लस एवं हॉलैंड के अनुसार – 

“वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन, स्वभाव, व्यवहार ,विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

🌠वातावरण के प्रभाव को ना तो खत्म किया जा सकता है और ना ही अनदेखा । लेकिन यह जागरूक हो सकते हैं कि किसका कैसा प्रभाव या क्या सही है या क्या गलत है प्रभाव हमारे ऊपर पड़ रहा है।

🌠उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि वातावरण व्यक्ति को प्रभावित करने वाला तत्व है। इसमें बाह्य तत्त्व आते हैं। यह किसी एक तत्त्व का नहीं अपितु एक समूह तत्त्व का नाम है। वातावरण व्यक्ति को उसके विकास में वांछित सहायता प्रदान करता है।

✍️

   Notes By-‘Vaishali Mishra’

🌼☘️ वातावरण ☘️🌼

         (Environment)

👉🏼 🧍🏻बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व कम नहीं है वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियों या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है।

👉🏼 इन शक्तियों का विकास वातावरण से होता है यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण पोषण या पर्यावरण कहलाता है।

☘️ परि ➡️ चारों ओर

☘️ आवरण➡️ ढकने वाला

👉🏼व्यक्ति के चारों और जो कुछ भी होता है उसका पर्यावरण है उसमें वह सब तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

✍🏻 जिस्बर्ट के अनुसार➖”वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधे प्रभाव डालती है”।

✍🏻 एनी एनास्टासी के अनुसार➖ “वातावरण को सभी वस्तुएं सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के पित्रैक के अंतर्गत सभी पक्षों को प्रभावित करती है”।

✍🏻 मेकाइवर एवं पेज के अनुसार➖”स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण का फल है”।

“पर्यावरण जीवन के प्रारंभ  से यहां तक के उत्पादक कोषों में भी निहित “।

✍🏻 बोरिंग,लैगफील्ड एवं वील्ड के अनुसार➖”एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजना ओं का योग आ जाता है जिन्हें वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है”।

✍🏻 जे.एस.राॅस के अनुसार➖”वातावरण एक बाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है”।

✍🏻 वुडवर्थ के अनुसार➖”वातावरण में वह समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है”।

✍🏻 डगलस व हॉलैंड के अनुसार➖”वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन स्वभाव व्यवहार विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं”।

✍🏻📚📚 Notes by…. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

🥀🥀वातावरण🥀🥀

👉🏻 बालक के व्यक्तित्व के विकास मे वातावरण का महत्व भी कम नहीं है। वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से एक बात तय हो कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां या क्षमता ग्रहण करते ही जन्म लेता है। शक्तियों का विकास वातावरण मे होता है। यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता हैं तो उनके शक्तियों का विकास वह बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता हैं।

➡️वातावरण का अर्थ और परिभाषा          

                🥀🥀🥀🥀

➡️वातावरण का अर्थ – 

वातावरण का अर्थ पर्यावरण , पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। परि + आवरण। परि का अर्थ होता है चारों ओर आवरण का अर्थ होता है ढकना। इस प्रकार से पर्यावरण का अर्थ हुआ जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है।उसे हम पर्यावरण कहते हैं। व्यक्ति या मनुष्य, जलवायु, वनस्पति पहाड़ ,पठार नदी वस्तु आदि से घिरा हुआ है यही सब मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं इसे वातावरणीय पोषण के नाम से भी जाना जाता है वातावरण मानव जीवन के विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। मानव विकास में जितना योगदान आनुवंशिकता का है। उतना ही वातावरण का भी है इसीलिए कुछ मनोवैज्ञानिक वातावरण को सामाजिक वंशानुक्रम भी कहते हैं।

➡️वातावरण की परिभाषा 

वातावरण की परिभाषा विभिन्न शिक्षणशत्रियो के अनुसार निम्नलिखित हैं।

➡️जिसबर्ट के अनुसार ,

” जो किसी एक वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है घेरे हुए है, तथा उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है वह पर्यावरण होता है।”

➡️ एनीअनस्तासी के अनुसार,

” पर्यावरण व हर चीज है ,जो व्यक्ति के जीवन के अलावा उसे प्रभावित करती है ।”

मैकाइवर और पेज के अनुसार,

” स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण का फल है।पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक कि उत्पादक कोषों में भी निहित होती है।”

➡️बोरिंग , लैंगफील्ड एवम वेल्ड के अनुसार,

” अनुवांशिकी के अलावा व्यक्ति को प्रभावित करने वाली वस्तु वातावरण हैं। “

➡️वुडवर्थ के अनुसार ,

” वातावरण में वह सब बाह्य तत्व आ जाते हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है।”

➡️डगलस व हॉलैंड के अनुसार ,”वातावरण शब्द का प्रयोग उन सबका शक्तियों शक्तियों प्रभाव दशाओं का सामूहिक रूप का सामूहिक रूप से वर्णन करने के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणियों के जीवन ,स्वभाव, व्यवहार बुद्धि विकास और परिपक्वता पर प्रभाव डालते हैं।”

➡️जे एस रॉस के अनुसार ,

” वातावरण व बाहरी शक्ति है जो  हमें प्रभावित करती हैं।

🥀📚📚📝🖊️🖋️notes by shikha tripathi📚📚📝🥀🥀🥀🥀

🌻🌻🌼🌼💥💥🌺🌺

🌴💫 वातावरण 💫🌴

 🦚 बालक के व्यक्तित्व के विकास में व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व कम नही है।

  वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियों या क्षमता ग्रहण करके जन्म लेता है।और इन शक्तियों का विकास वातावरण में ही होता है।

    यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उसकी शक्तियों का वीक बेहतर तरीके से होता है और यह वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता है।

   जब बच्चा गर्भ में होता है उस समय भी बच्चा वातावरण के बीच मे ही रहता है। उस समय का वातावरण एक अलग प्रकार का होता है। और जन्म के बाद दूसरे वातावरण में रहता है। उस समय के वातावरण से प्रभावित होता है।

💫🌴पर्यावरण― पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि +आवरण । जहाँ परि का अर्थ होता है – चारो ओर।  और आवरण का अर्थ होता है -ढकने वाला या ढका हुआ ।

  व्यक्ति के चारो ओर जो कुछ भी है। वह उसका पर्यावरण है। व्यक्ति अपने चारों ओर पर्यावरण से घिरा हुआ है। इसमें वे सब तत्व सम्मिलित किया जाता है जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

🌻विभिन्न प्रकार के शिक्षण शास्त्रियों ने अपनी -अपनी  अलग- अलग परिभाषा दी।

🌺जिस्बर्ट के अनुसार –वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य बस्तु को घेरे हुए है और उस पर सीधा अपना प्रभाव डालती है।

🌺एनी एनास्टासी (एनास्तासकी) के अनुसार― वातावरण में वे सभी वस्तुए सम्मिलित हैं जो व्यक्ति की पैतृक के अतिरिक्त उनमे सभी पक्षो को प्रभावित करती है।

🌺मैकाइवर एवं पेज  के अनुसार― स्वयं प्राणी ,उसके जीवन का ढांचा , बीते हुए जीवन  एवं अतीत पर्यावरण का फल है।

   पर्यावरण, जीवन के प्रारंभ से यहाँ तक उत्पाद कोषों में भी निहित होते हैं।

🌺बेरिंग,लैंगफील्ड एवं वेल्ड के अनुसार – एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजनाओं का योग आ जाता है।जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

🌺 जे.एस. रॉस के अनुसार– वातावरण वह वाह्य शक्ति है जो हमे प्रभावित करती है।

🌺वुडवर्थ के अनुसार― वातावरण में वे सभी तत्व सम्मिलित होते हैं। जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है।

🌺 डगलस व हॉलैंड के अनुसार– वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त वाह्य शक्तियों, प्रभावों और दशाओ के योग के वर्णन के लिए किया जाता है। जो जीवित प्राणी के जीवन स्वभाव, व्यवहार विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

📚📚📚📚Notes by Poonam sharma🦚

🍒🍒(Environment)🍒🍒

                       ✋वातावरण✋

💨बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं है, वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां वा  क्षमताएं ग्रहण करके ही जन्म लेता है लेकिन इन शक्तियों का विकास वातावरण में ही होता है।

💦उदाहरण÷ पौधों की नर्सरी से हम एक उच्च किस्म के व गुणवत्ता वाले आम के  पौधे को घर लेकर आते हैं जो कि बहुत ही मीठे फल देगा किंतु लाने के बाद उसकी देखभाल हम वह उसको पोषण नहीं दे पाते हैं तो ऐसे में कुछ-कुछ में किस्म के पौधे का कोई मतलब नहीं रह गया क्योंकि उसको पोषण अच्छा मिला ही नहीं जिसकी वजह से या तो वह अच्छे व मीठे फल नहीं दे पाएगा या फिर वह मुरझा जायेगा।

💨यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों ,क्षमताओं का विकास बेहतर तरीके से होता है और यही वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता है।

         ‌    🍒🍒पर्यावरण🍒🍒

🌸पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है÷

🌸परि +आवरण जिसका अर्थ है;

🌸परि =चारो ओर 

🌸आवरण=घिरा हुआ/ढ़का हुआ

💦व्यक्ति के चारों ओर जिससे वह घिरा हुआ है वह पर्यावरण ही है,इसमें वे सब तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

💨पर्यावरण वह हर एक विषय वस्तु या घटना है जो आसपास घटित हो रही है।

💨हमारे आसपास की की हो रही  गतिविधियां भी हमारा पर्यावरण कहलाती है।

🌸🗣️जिसबर्ट÷ वातावरण वह वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है।

🌸🗣️एनी एनास्तासी (एनास्तास्की)÷वातावरण में वैसे भी वस्तु में सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के चित्र के अतिरिक्त सभी पक्षों को प्रभावित करती हैं।

🌸🗣️मैकाइवर एवं पेज ÷स्वयं प्रणाली व उसके जीवन का ढांचा एवं बीते हुए जीवन एवं अतीत वातावरण का फल है; पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक के उत्पाद कोषो मे  भी निहित है।

🌸🗣️बोरिंग लैंड फील्ड एवं वेल्ड के अनुसार÷एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजनाओं का योग आ जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

🌸🗣️जे .एस .रॉस÷वातावरण एक बाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।

🌸🗣️वुडवर्थ के अनुसार÷वातावरण में वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है।

🌸🗣️डग्लस व हालैंड के अनुसार÷वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभाव और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन, स्वभाव व्यवहार, विकास और परिपक्वता को प्रभावित करती हैं।

🧠😘Written÷Shikhar pandey🧠

🍀🔅बाल विकास का वातावरण पर प्रभाव🔅🍀

बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं है वंशानुक्रम मैं यह बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है

यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उसकी शक्तियों का विकास भी अच्छी तरीके से हो जाता है और यदि वातावरण वातावरण अच्छी नहीं मिलता है तो इसका प्रभाव बालक पर बहुत ही पड़ता है इसी को वातावरण पोषण या पर्यावरण कहा जाता है

   🔅 पर्यावरण =परि +आवरण🔅

    ➖️  परि -➖️ चारों ओर

     ➖️ आवरण ➖️-ढकने वाला

💮व्यक्ति के चारों और जो कुछ भी हो उसका पर्यावरण है बेशक तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं जिस वस्तु द्वारा जो हमारे चारों ओर है जिससे जो क्षेत्र ढकता है वह सब पर्यावरण के अंतर्गत आता है हमारे चारों ओर के वातावरण वस्तु सब कुछ पर्यावरण कहलाता है जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को पूरी तरीके से प्रभावित करता है जैसे मानव, चीज, वस्तुए,पेड़-पौधे, जीव जंतु पशु पक्षी, नदियां पठार पर्वत  मकान  हर चीज स्थान घेरती है अनेक प्रकार की ऐसी चीजें हैं जो पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं

❇️✏️जिस्वर्ट के अनुसार- ➖️वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर अपना प्रभाव डालती है

💮✏️एनास्तासी के अनुसार➖️ वातावरण में वे सभी वस्तुएं सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के जीन के अतिरिक्त उनके सभी  पहलूओ को प्रभावित करती हैं

💮✏️मैकाइवर एवं पेज के अनुसार ➖️इसमें स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अधिक पर्यावरण का फल है

पर्यावरण, जीवन के प्रारंभ से यहां तक कि उत्पादक कोसों में निहित है

💮✏️बोरिंग, लेंगफील्ड एवं वेल्ड के अनुसार ➖️एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी योजनाओं का योग आ जाता है जिसको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है

💮✏️J. S. Ras के अनुसार➖️ वातावरण एक  वाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है

💮✏️वुडवर्थ के अनुसार ➖️वातावरण में वे सब तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है

💮✏️डग्लस और हॉलैंड के अनुसार ➖️वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त शक्तियों प्रभाव दशाओं के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन स्वभाव, व्यवहार,विकास और परिपक्वता को प्रभावित करता है🌸🌸🌸🌸🌸🌸

Notes by sapna yadav 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

🔆 वातावरण (Environment) ➖

बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का  महत्व भी कम नहीं है वंशानुक्रम से एक बात तो तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियों, या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है |

बच्चे के जन्म के समय उसको जो भी गुण  प्राप्त होते हैं वे स्थायी होते हैं |  जब बच्चा मां के गर्भ में  होता है तो वहां पर मां के गर्भ का वातावरण निर्भर करता है कि मां उसको कैसा वातावरण देती है  माँ की सोच और उसके खानपान का प्रभाव भी बच्चे पर पड़ता है |

       लेकिन जब बच्चा जन्म लेता है तो उसमें जो भी गुण  आते हैं उसको वंशानुक्रम से प्राप्त होते हैं जो कि स्थाई होते हैं और उनका पोषण वातावरण  में रहकर ही किया जाता है |

      यदि बच्चे के जन्म के बाद का वातावरण अच्छा है तो उसका विकास अच्छा होगा और यदि अच्छा नहीं है तो  अच्छा नहीं होगा  |

      जैसे यदि किसी पौधे को एक जगह से दूसरी जगह लगाया जाता है यदि उस पौधे को अच्छे अच्छा वातावरण या अच्छे से उसका पोषण नहीं किया जाता तो वह मुरझा जायेगा |

 इसी प्रकार यदि बच्चे का वातावरण अच्छा  नहीं होगा तो उसका विकास भी ठीक प्रकार से नहीं हो पायेगा |

             यदि बच्चे को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही शक्तियां यही वातावरण  पोषण या पर्यावरण कहलाता है  |

पर्यावरण शब्द  ” परि + आवरण”  शब्दों से मिलकर बना है  अर्थात 

परि ➖ चारों ओर

आवरण ➖ढकने वाला होता है |

अर्थात व्यक्ति के चारों ओर जो कुछ भी है वह उसका वातावरण ही  है |

वातावरण में वे सभी तत्व शामिल किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं |

वातावरण से संबंधित मनोवैज्ञानिकों की कथन➖

🎯 जिस्बर्ट के अनुसार ➖

“वातावरण हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए है और  और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है |”

🎯 एन एनास्तास्की के अनुसार➖

“वातावरण में भी सभी वस्तुएं संबंधित है जो व्यक्ति के पित्रैक के अतिरिक्त उसके सभी पक्षों को प्रभावित करती है ` |”

🎯 मैकाइवर एवं पेज के अनुसार➖ 

“स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अतीत के पर्यावरण का फल है पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक कि उत्पाद कोषों में भी निहित है | “

🎯 वुडवर्थ के अनुसार➖

 वातावरण में वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है |”

🎯डगलस और हालैंड के अनुसार ➖

 “वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त  बाह्य शक्तियों प्रभावों और  दशाओं के योग के  वर्णन के लिए किया जाता है |

जो  जीवित प्राणी के जीवन ,स्वभाव और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं |”

🎯 बोरिंग , लैंडफील्ड एवं वेल्ड के अनुसार ➖

एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजनाओं उनका योग आ जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है |

🎯 जी एस राॅस के अनुसार➖

 वातावरण एक बाह्य  शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

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*बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व* ➖

 🏞वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम में अनेक शक्तियों और क्षमताओं के साथ जन्म लेता है, लेकिन इन शक्तियों का विकास वातावरण में होता है। बच्चों को अच्छा वातावरण मिले तो बच्चे की शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता है।

                        पर्यावरण

                           ⬇️

 (परि= चारों ओर ) ➕(आवरण= ढकने वाला)

 🤹🏻‍♀️व्यक्ति के चारों ओर जो भी कुछ है, उसका पर्यावरण हैं। इसमें वे सब तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

🪀GISBERT :- वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है।

🥏N. ANATORCY :- वातावरण में वे सभी वस्तुएं सम्मिलित है जो व्यक्ति के पित्रैक के अतिरिक्त उसके सभी पक्षों को प्रभावित करती हैं।

🏓MELCYVER AND PAGE :- प्राणी व उसके जीवन का ढांचा, बीते हुए जीवन एवं अतीत, पर्यावरण  का फल है। पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से, यहां तक के उत्पाद कोषों में भी  निहित  है।

🥋BORING, LAYFIELD AND VELT :- एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी  उत्तेजनाओ का योग आ जाता है, जिसको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

🏂J. S. ROSS :- वातावरण एक वह शक्ति है, जो हमें प्रभावित करती है।

🛹WOODWORTH :- वातावरण में वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं, जो व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है। 

 🤼‍♂️DUGLAS AND HOLAND :- वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त शक्तियां, प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है, जो जीवित प्राणी के जीवन, स्वभाव ,व्यवहार, विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

   👩🏻‍💻Deepika Ray👩🏻‍🏫

वातावरण

बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं हैं।

वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां या क्षमता ग्रहण करके ही जन्म लेता है इन शक्तियों का विकास वातावरण में होता है।

यदि बच्चे को  अच्छा वातावरण मिल जाता है उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और यही वातावरण पोषक या पर्यावरण कहलाता है।

पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना होता है

परि+ आवरण

परि का अर्थ होता है चारों ओर

आवरण का अर्थ होता है ढकने वाला

अर्थात

व्यक्ति के चारों ओर जो कुछ भी है उसका पर्यावरण है।

इसमें वे सभी तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

जिस्बर्ट के अनुसार 

वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधा अपना प्रभाव डालती है।

एनी एनास्तास्की के अनुसार

वातावरण में वे सभी वस्तुएं सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के पित्रैक या जीन के अतिरिक्त उसके सभी पक्षो को प्रभावित करती है।

मैकाइबर और पेज के अनुसार

स्वयं प्राणी, उसके जीवन का ढांचा, बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण का फल है।

पर्यावरण, जीवन के प्रारंभ से यहां तक की उत्पादक कोषों में भी निहित है।

बोरिंग लैंगफील्ड और वेल्ड के अनुसार

एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजना ओं का योग आ जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

जे एस रॉस के अनुसार

वातावरण एक बाह्य शक्ति हैं जो हमें प्रभावित करती हैं।

वुडवर्थ के अनुसार

वातावरण में वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति के जीवन को प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है।

डगलस और होलैंड के अनुसार

वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है जो प्राणी के जीवन, स्वभाव, व्यवहार ,विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

Notes by Ravi kushwah

वातावरण   Environment

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17 march 2021

बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं है।

वंशानुक्रम से एक बात तो तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियां , क्षमता आदि ग्रहण करके ही जन्म लेता है।

       अतः इन शक्तियों का विकास वातावरण में होता है। 

यदि बच्चों को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होता है , 

और यही वातावरण ‘ पोषक  या  पर्यावरण ‘ कहलाता है।

पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है  :-  

परि   ➕   आवरण  

अर्थात् 

परि         ➡️     चारों ओर 

आवरण   ➡️     ढकने वाला

अर्थात् व्यक्ति को चारों ओर से जो कुछ भी ढके हुए हैं /  आवरण किए हुए हैं वहीं पर्यावरण / वातावरण है। 

वातावरण में वे सभी तत्व शामिल किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

वातावरण के संदर्भ में कुछ मनोवैज्ञानिकों के कथन निम्न प्रकार है   :-

1.🌺   जिस्बर्ट  के अनुसार  :-

वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधा अपना प्रभाव डालती है।

2.  🌺  N . एनास्तास्की  के अनुसार  :-

वातावरण में वे सभी वस्तुएं सम्मिलित हैं जो व्यक्ति के gene / पित्रैक के अतिरिक्त उसके सभी पक्षों को प्रभावित करती है।

3.🌺  मैकाइवर  एवं   पेज   के अनुसार  :-

स्वयं प्राणी उसके जीवन का ढांचा बीते हुए जीवन एवं अतीत के पर्यावरण का फल है ,  पर्यावरण जीवन के प्रारंभ से यहां तक कि उत्पाद कोषों में भी निहित है।

4.  🌺 बोरिंग  ,  लैंगफील्ड  एवं  वेल्ड  के अनुसार  :-

एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी उत्तेजनाओं का योग आ जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

5. 🌺   J .  S . रॉस   के अनुसार   :-

वातावरण एक बाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।

6.🌺   वुडवर्थ   के अनुसार :-

वातावरण में वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है।

7. 🌺  डगलस  व  हॉलैंड  के अनुसार  :-

वातावरण शब्द का प्रयोग उन समस्त बाह्य शक्तियों ,  प्रभावों और दशाओं के योग के वर्णन के लिए किया जाता है , जो जीवित प्राणी के जीवन , स्वभाव , व्यवहार ,   विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

✍️ Notes by  – जूही श्रीवास्तव ✍️

🎄 वातावरण(Environment )🎄

☄️ बालक के व्यक्तित्व के विकास में वातावरण का महत्व भी कम नहीं है।

✨ वंशानुक्रम से एक बात तय है कि बालक वंशानुक्रम से अनेक शक्तियों  या क्षमता  ग्रहण करके ही,  जन्म लेता है, इन शक्तियों का विकास वातावरण में होता है।

✨ यदि बच्चों को अच्छा वातावरण मिल जाता है तो उनकी शक्तियों का विकास बेहतर तरीके से होगा और   यही वातावरण पोषक या  पर्यावरण कहलाता है।

🎄 पर्यावरण का अर्थ ➖

✨ परि ➕ आवरण

🌱 परि ➖ चारों ओर।

🌱 आवरण ➖ ढकने वाला।

✨ व्यक्ति के चारों और जो कुछ भी है उसका पर्यावरण है इसमें वह सब तत्व सम्मिलित किए जा सकते हैं जो व्यक्ति के जीवन और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

🟣 कुछ पर्यावरणविदों ने, अपने राय निम्न रूप से पर्यावरण के बारे में रखें।

✨ जिसबर्ट के अनुसार ➖

 वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए हैं और उस पर सीधा अपना प्रभाव डालती है।

✨एनी एनास्तसकी (एनास्टासी)के अनुसार ➖

 वातावरण में, वे सभी वस्तुएं सम्मिलित है जो व्यक्ति के पैतृक के अतिरिक्त उसके सभी बच्चों को प्रभावित करती है।

✨ मैकाइवर एवं पेज के अनुसार➖

स्वय प्रार्णी उसके जीवन का ढांचा, बीते हुए जीवन एवं अतीत पर्यावरण का फल है।

          पर्यावरण, जीवन के प्रारंभ से यहां तक के उत्पाद कोशो में भी निहित हों।

✨ बोरिंग, लैकफील्ड एवं वोल्ड  के अनुसार,

➖ एक व्यक्ति के वातावरण के अंतर्गत उन सभी योजनाओं का योग आ जाता है जिनको वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।

✨ जे एस बॉस के अनुसार➖

 वातावरण एक बाह्य सकती है जो हमें प्रभावित करती है।

✨ वुडवर्थ के अनुसार ➖

 वातावरण में, वे समस्त तत्व सम्मिलित हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन प्रारंभ करने के समय से प्रभावित किया है।

✨ डग्लस व हॉलैंड के अनुसार➖

 पर्यावरण शब्द का प्रयोग समस्त बाह्य शक्तियों, प्रभावऔर दशाओं के युग के वर्णन के लिए किया जाता है जो जीवित प्राणी के जीवन, स्वभाव, व्यवहार, विकास और परिपक्वता को प्रभावित करते हैं।

📝NOTES BY “AkaNksHa”📝

🤓✨🙏🥰🤗

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