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➡️1.वंशानुक्रम का मूल शक्तियों पर प्रभाव :-🧑🏼‍💼थॉर्नडाइक ने बालक 👶🏻के जीवन और विकास में बालक की मूल शक्तियों में वंशानुक्रम के प्रभाव को वरीयता दी है।🧑🏼‍💼👉🏻 थॉर्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का मुख्य कारण उसका वंशानुक्रम है।

➡️2. वंशानुक्रम का शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव :-वंशानुक्रम का प्रभाव मानव के शारिरिक लक्षणों में भी पड़ता है।

🧑🏼‍💼कार्ल पीयरसन वंशानुक्रम के शारिरिक लक्षणों के प्रभावों के संबंध में अपना मत दिया है कि यदि ”माता-पिता की लम्बाई का असर उनकी संतानों में भी पड़ता है, जो कि एक प्रकार का शारिरिक लक्षण है।

➡️3. वंशानुक्रम का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-वंशानुक्रम का प्रजातियों की श्रेष्ठता में गहरा प्रभाव पड़ता है, इसके संबंध में 🧑🏼‍💼क्लिनबर्ग ने अपने विचार देते हुए कहा है कि “बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है। यही कारण है कि अमरीका की श्वेत प्रजाति, नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।” 

हैनलकक हांलाकि क्लिनबर्ग के इस📚 विचार में बहुत से मनोवैज्ञानिकों में मतभेद भी रहा है।

➡️4. वंशानुक्रम का व्यावसायिक योग्यता पर प्रभाव :-🧑🏼‍💼👉🏻कैटल ने व्यावसायिक योग्यता का मुख्य कारण वंशानुक्रम को ही मानते हैं। कैटल ने व्यावसायिक में वंशानुक्रम का प्रभाव का पता करने के लिए अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवारों का की योग्यता का अध्ययन किया और बताया कि कुल 885 वैज्ञानिक परिवारों में से व्यवसायी वर्ग से संबंध रखने वाले परिवारों की संख्या कुल संख्या का 2/5 थी, इसी प्रकार उत्पादक वर्ग के 1/2 और कृषि वर्ग के केवल 1/4 परिवार थे।

➡️5. वंशानुक्रम का सामाजिक स्थिति पर प्रभाव :-🧑🏼‍💼विनशिप ने वंशानुक्रम का सामाजिक स्थिति पर प्रभाव के संबंध में अपने विचार देते हुए कहा है, कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की सन्तान भी अपने जीवनकाल में प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।

विनशिप ने वंशानुक्रम के सामाजिक स्थिति पर प्रभाव में अपना मत देने से पहले उन्होंने एडवर्ड और उनकी पत्नी एलिजाबेथ के परिवार का अध्ययन किया जो कि (एडवर्ड और एलिजाबेथ) एक प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखते थे। जिनके वंशजों ने प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया और उनके वंशजों में से एक अमेरिका का उपराष्ट्रपति भी बना।

➡️6. वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव :-🧑🏼‍💼डगडेल का वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर मानना है कि चरित्रहीन माता-पिता की सन्तान चरित्रहीन होती है। और इसी प्रकार अच्छे चरित्र वाले माता पिता की संतानें भी अच्छी चरित्र वाली होती हैं।

डगडेल🧑🏼‍💼 ने वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर अपना विचार सन 1877 ई. में ज्यूकस के वंशजों का अध्ययन करके दिया था।

➡️7. वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव :-गाल्टन का वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव के बारे में सीधा मत है, कि व्यक्ति की महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है।

व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति आदि उसके वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं। वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव में 🧑🏼‍💼गॉल्टन कहते हैं कि–,”

महान न्यायाधीशों, राजनीतिज्ञों, सैनिक पदाधिकारियों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों के जीवन चरित्रों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है, कि इनके परिवारों में इन्हीं क्षेत्रों में महान कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति भी हुए हैं।

– गाल्टन

➡️8. वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव :-

गोडार्ड ने वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव पर कहा है, कि मन्द बुद्धि माता-पिता की सन्तान मन्द बुद्धि और तेज बुद्धि के माता-पिता की सन्तान तीव्र वाली होती है।

🧑🏼‍💼कॉलसेनिक  केअनुसार,”जिस सीमा तक व्यक्ति की शारीरिक रचना को उसके पित्रैक निश्चित करते है।उसके मस्तिष्क एवम अन्य लक्षण खेल कूद सम्बंधी कुशलता और गणित सम्बन्धित योग्यता ये सभी बाते उसके वंशानुक्रम पर निर्भर होती है।

उपर्युक्त कथनों से पता चलता है कि व्यक्ति के शारीरिक तथा मानसिक विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।📚📖📝 Notes by shikha Tripathi📚📚📚📚

🔆 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव :-

( Factor affecting of heredity in child development)

▪️बच्चों के विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है प्रारंभिक है एक बार माता-पिता या पूर्वजों से मिल जाने पर बदला नहीं जा सकता अर्थात यह पूर्वजो या माता-पिता से मिल जाने के बाद स्थिर हो जाते हैं लेकिन इनका प्रभाव या असर जीवन भर बना रहता है।

▪️व्यक्ति के व्यक्तित्व की प्रत्येक पहलू मतलब व्यक्ति के बोलने व्यवसाय करने ,उसकी शक्ति कार्य को करने के चरण या तरीके, महानता इन सभी बातों को वंशानुक्रम से जुड़ा जाता है।

▪️व्यक्ति के किसी भी विषय वस्तु पर की गई अभिव्यक्ति चाहे वह मौखिक हो या लिखित इससे उस व्यक्ति के संस्कार व परिवार का पता चलता है।

▪️व्यक्ति के व्यक्तित्व को जब हम देखते हैं तो प्रारंभिक रूप से वंशानुक्रम को प्रायिकता देते हैं इसके बाद वातावरण को।

▪️व्यक्तित्व के हर पहलू या कोई भी गतिविधि पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।

▪️वंशानुक्रम का बाल विकास पर प्रभाव कई रूपों में पड़ता है जिस पर कई मनोवैज्ञानिकों ने अपने मत प्रस्तुत किए है।

❇️ 1 मूल शक्तियों पर प्रभाव: – 

थोर्नडायक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है।

▪️हम देखते हैं कि हमें 

जो कुछ भी गुण या जीन जो हमें अपने माता-पिता या अन्य पूर्वज से मिले हैं वह स्थिर हो गए हैं, लेकिन जो भी वातावरण या पर्यावरण से  मिला है वह कभी भी स्थिर नहीं हुआ है।

▪️हमारे माता-पिता से मिले गुण या जो जीन है वो वातावरण  या पर्यावरण या परिस्थिति या समय अनुसार ही  ओवरलैप या अपडेट होते रहते हैं। अर्थात यह गुण वातावरण से प्रभावित होते हैं।

❇️ 2 शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव: –

▪️कार्ल पीटरसन ने संदर्भ में कहा है कि

“अगर माता-पिता की लंबाई तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है।”

❇️ 3 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव:-

▪️किलनबर्ग का मत है कि

“बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है यही कारण है कि अमेरिका की स्वेत प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।”

▪️भारत में भी हिंदू वर्ग के अंतर्गत जाति को चार आधार पर विभाजित किया गया ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।

इन चारों ही वर्णों को कर्मों के आधार पर विभाजित किया गया

▪️जिसमें उच्च स्तर के कर्म ,सोच या विचार से कोई व्यक्ति कार्य करेगा तो उसका यह प्रभाव उनकी प्रजाति की आगे आने वाली पीढ़ी में दिखेगा।

▪️इसी प्रकार किलन वर्ग ने यह उदाहरण देकर  बताया या समझाया कि अमेरिका के जो प्रजाति के लोग है उनका कुछ अलग वातावरण,अलग स्तर, अलग तरह का रहन-सहन, अलग तरह का खान पान होगा जिससे उनकी आगे आने वाली पीढ़ी में भी यह प्रभाव रहा होगा।

▪️जबकि दूसरी ओर नीग्रो प्रजाति का अलग वातावरण, अलग स्तर ,अलग रहन-सहन या अलग खानपान रहा होगा जिससे उनकी आगे आने वाली प्रजाति में इसका प्रभाव रहा होगा।

▪️इसी आधार पर उन्होंने श्वेत प्रजाति को नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ बताया।

❇️ 4 व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव :- 

▪️व्यवसायिक योग्यता भी किसी न किसी रूप में वंशानुक्रम से आती है यदि हमारे माता-पिता या किसी पूर्वज में व्यवसाय का वह गुण है तो इसे हमारे अंदर भी है देखा जा सकता है।

▪️इस संदर्भ में कैटल का विचार है कि

▪️व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

▪️यदि हम कभी किसी चीज को अपनाते हैं स्वीकारते हैं तो इसीलिए कि वह हमारी जो वर्तमान परिस्थिति है या समय है उसके अनुकूल है जिसके लिए हम उसे अपनाते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं हमारे अंदर वंशानुक्रम कि वह योग्यता रह जाती है जो पहले के वातावरण या परिस्थिति या उस समय में नहीं थी मतलब वैसी सोच ,वैसी समझ जो कि अब नहीं है।

▪️कैटल ने उस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे और उन्होंने बताया कि इन परिवारों में से

      🔸 2/5 व्यवसायिक वर्ग के

      🔸1/2 उत्पादक वर्ग के

      🔸1/4 कृषि वर्ग के थे।

❇️ 5 सामाजिक स्थिति पर प्रभाव :- 

▪️विनशिप का कहना है कि

“गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं।”

▪️जिसमें इन्होंने रिचर्ड एडवर्ड पर अध्ययन किया ।

▪️इस अध्ययन में उन्होंने रिजल्ट और उनकी पत्नी एलिजाबेथ पर अध्ययन किया यह दोनों ही प्रतिष्ठित थी और उनकी जो संतान हुई वह भी प्रतिष्ठित हुई जिसमें कई संतान विधानसभा में सदस्य, महाविद्यालय के अध्यक्ष व अमेरिका के उपराष्ट्रपति रहे।

योन का एक वास्तविक अध्ययन था उन्होंने इसे इसके माध्यम से पेश किया।

❇️ 6 चरित्र का प्रभाव :-

▪️डगडेल का कथन है कि

“डगडेल का वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर मानना है कि चरित्रहीन माता-पिता की सन्तान चरित्रहीन होती है। और इसी प्रकार अच्छे चरित्र वाले माता पिता की संतानें भी अच्छी चरित्र वाली होती हैं।”

▪️डगडेल ने वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर अपना विचार सन 1877 ई. में ज्यूकस के वंशजों का अध्ययन करके दिया था।

▪️ज्यूक एक भ्रष्ट आचरण वाला व्यक्ति था उसने अपनी ही जैसी स्त्री के साथ विवाह किया। जिससे उसकी पांच पीढ़ी में 1000 व्यक्ति का जन्म हुआ 1000 व्यक्तियों के अध्ययन पर देखा गया कि

300 व्यक्तियों की – शैशवाकाल आयु लोगो की मृत्यु हो गई।

440 व्यक्ति – रोगग्रस्त

130 व्यक्ति- कई अपराधी

20 व्यक्ति – कुछ व्यवसाय सीख रहे थे।

✳️7. वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव :-

▪️गाल्टन का वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव के बारे में सीधा मत है, कि व्यक्ति की महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है।

▪️व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति आदि उसके वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं। वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव में गॉल्टन कहते हैं कि–

▪️महान न्यायाधीशों, राजनीतिज्ञों, सैनिक पदाधिकारियों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों के जीवन चरित्रों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है, कि इनके परिवारों में इन्हीं क्षेत्रों में महान कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति भी हुए हैं।

✳️8. वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव :-

▪️गोडार्ड ने वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव पर कहा है, कि मन्द बुद्धि माता-पिता की सन्तान मन्द बुद्धि और तेज बुद्धि के माता-पिता की सन्तान तीव्र बुद्धि वाली होती है।

▪️गोडार्ड ने कालीकाक के सैनिक वंशज पर अध्ययन किया।

▪️इसमें कालीकॉक दो स्त्रियों से विवाह किया जिसमें एक स्त्री मंदबुद्धि तथा दूसरी स्त्री तीव्र बुद्धि वाली थी।

▪️मंदबुद्धि स्त्री की 480 वंशज मे अध्यन कर यह देखा गया कि

143व्यक्ति- मंदबुद्धि

46व्यक्ति -सामान्य

36 व्यक्ति-अवैध

32व्यक्ति -चरित्रहीन

24व्यक्ति- शराबी

8व्यक्ति -चरित्रहीन संस्था के संस्थापक

3व्यक्ति -मिर्गी रोगी थे।

▪️तीव्र बुद्धि वाली स्त्री की 496 वंशजों में अध्ययन कर यह देखा गया कि

 3 व्यक्ति – मंदबुद्धि

और बाकी सभी व्यक्ति-  बिजनेसमैन, डॉक्टर ,शिक्षक, वकील और सामान्य थे।

उपरोक्त कथनों से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि व्यक्ति के शारीरिक तथा मानसिक विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।

✍🏻

Notes By-‘Vaishali Mishra’

🦚 बालक के विकाश में 

वंशानुक्रम का प्रभाव🦚 

बालक के विकाश में वंशानुक्रम का  प्रभाव कई प्रकार से देखने को मिलता है शारिरीक मानशिक  ,व्यवहारिक कई प्रकार से देखने को मिलता है।

इस प्रकार कई प्रभाव है-

🌲मूल शक्तियो का प्रभाव- बालक कि मुल शक्तियो का प्रमुख कारण उसका वंशानुक्रम ही है,मुल शक्तियो पर भी वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।

🌲 शारिरीक लक्षणों पर प्रभाव – शारिरीक लक्षणों पर भी वंशानुक्रम का षप्रभाव पड़ता है  माता-पिता की लंबाई कम है तो उनके बच्चे कि भी लंबाई कम होगी अगर माता-पिता की लंबाई अधिक है तो उनकी संतान कि लंबाई भी अधीक होगी ।

यह कथन कार्ल पिटरसन ने कहा है।

🌲 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव –  मनुष्य कि श्रेष्ठता का प्रभाव बुध्दी पर भी पड़ता है वातावरण का तो पड़ता है ही प्रजाति की श्रेष्ठता पर भी पड़ता है।

क्लिनबर्ग के अनुसार- बुध्दी की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है यहि कारण  है कि अमेरिका की  श्वेत प्रजाति निग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

🌲 व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव – व्यवसायिक योग्यता का भी प्रभाव बालक के विकाश पर भी पड़ता है ।

जैसे- बड़ई के बेटे बड़ई के गुण तथा शिक्षक के बच्चे में शिक्षक जैसे गुण।इस प्रकार व्यवसाय का भी प्रभाव पड़ता है।

कैटल ने अपने मत दिये है कि- व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारण वंशानुक्रम हैं।

वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिक परिवार का अध्यन करके पहुंचे और उन्होने बताया कि परिवार में से 2/5 व्यवसायिक वर्ग के  1/2 उत्पाद वर्ग के  और केवल 1/4 कृषि वर्ग के।

🌲 सामाजिक स्थिती का प्रभाव – सामाजिक स्थिती का भी प्रभाव बालक के विकाश पर भी पड़ता है अगर गुणवान माता-पिता है तो उनकि संतान भी गुणवान होगी।

विनशिप के अनुशार- एडवर्ड और उनकी पत्नी (एलीजाबेथ) एक अच्छे परिवार से थे । जिनके वंशजो ने प्रतिष्ठा परिवार पदो पर कार्य किया और उनके वंशजो में से एक विधान सभा के सदस्य महाविधान  सभा के अध्यक्ष और अमेरिका के उपराष्ट्पति बने।

🌲 चरित्र पर प्रभाव- बालक के विकाश पर चरित्र का भी प्रभाव पड़ता है, अगर माता-पिता का चरित्र अच्छा है तो उनकी संतान का भी चरित्र अच्छा होगा। कुछ मनोवैज्ञानिक के अनुशार-

डगडेल के अनुशार- चरित्रहीन माता-पिता कि संतान भी चरित्रहीन होती है।

🌲 महानता का प्रभाव- महानता का प्रभाव व्यक्ति के शारिरीक मानशिक लक्षणों पर भी प्रभाव पड़ता हैं ।

गाल्टन का मत है कि- महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है। यह वंशानुक्रम का हि प्रभाव व्यक्तियों की शारिरीक मानशिक लक्षणों में विभीन्नताएं पायी जाति है।व्यक्ति का कद वर्ण स्वास्थ्य  बुध्दी मानशिक शक्ति यह  सब वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं। 

🌲 वृध्दी का प्रभाव- बालक के विकाश में वृध्दी का भी प्रभाव पड़ता है।

गोडार्ड के अनुशार मंद बुध्दी माता-पिता की संतान मंद बुध्दी बुध्दीमान माता-पिता कि संतान भी बुध्दीमान ।

काल्सनिक के अनुशार- व्यक्ति के  शारिरीक मानशिक चरित्र पर पित्रक का प्रभाव पड़ता है वंशानुक्रम का भी प्रभाव। पड़ता है।

कालीकाक – ने दो स्त्रीयों से सादी की पहली पत्नी मंद बुध्दी की तथा दूसरी पत्नी तीवृ बुध्दी की।

पहली पत्नी का वंशज 480 रहा उसमें से 143 मंद बुध्दी 46सामान्य 36अवैध 32चरित्रहीन 24शराबी 8चरित्रहीन संस्था के संस्थापक 3मृगी रोग हुए 3 अपराधि हुए।

दूसरी पत्नी के 496वंशज 3मंद बुध्दी  बाकि के शिक्षक वकिल डाक्टर बिजनेशमैंन सम्मानिय थे।

Notes by _Puja Murkhe

🏵🏵बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव🏵🏵

🌲मूल शक्तियों पर प्रभाव ➖

🖊थार्नडाइक का मानना है कि ➖बालक की मूल शक्ति का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है

बच्चों में जो मूल शक्ति प्रदान होती है वह है अपने पूर्वजों से माता-पिता द्वारा प्राप्त होती हैं और माता-पिता से संतानों में आते हैं

🌲शारीरिक  लक्षणों पर प्रभाव ➖🖊 कार्ल पीटरसन ने कहा ➖माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चों की लंबाई भी कम और अधिक होगी जिसके माता-पिता की लंबाई जिस प्रकार की होती है उनकी बच्चों की लंबाई भी उसी प्रकार से होती है शरीर का बनावट जिस प्रकार का होगा बालक का आकार और बनावट भी उसी प्रकार का होगा

🌲प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव ➖🖊विलनवर्ग का मत है कि➖ बुद्धि की योग्यता का कारण प्रजाति जाती हैं यदि यही कारण है कि अमेरिका की शोध प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है प्रजाति का प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी चलता जाता है जो लोग इस प्रजाति के होंगे वह प्रजाति पीढी दर पीढ़ी चलती जाती है जैसे पूर्वजों ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य प्रजाति के लोग होते हैं तो उनके जो बच्चे होंगे वह ऐसी प्रजाति के माने जाएंगे और उसी प्रजाति का पालन करते हैं अनुवांशिकता में इसका प्रभाव पड़ता है

🌲व्यावसायिक योग्यता का प्रभाव ➖🖊कैटल के विचार द्वारा➖ व्यवसाय योग्यता का मुख्य कारण वंशानुक्रम है अपने पूर्वज जो कार्य करते हैं उसका प्रभाव बच्चों पर पड़ता है बच्चा भी उसी व्यवसाय को आगे बढ़ाता है और इसका प्रभाव बच्चों पर जरूर ही पड़ता है भले ही वह नौकरी करें या कुछ भी कार्य करें लेकिन जो कार्य उनके पूर्वज करते हैं और उसका मन उस कार्य में अवश्य ही लगने लगता है और उसी कार्य को वह आगे  बढ़ाने लगते हैं

🌲सामाजिक स्थिति पर प्रभाव➖🖊 विनशिप का कहना है कि ➖गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की जो संतान होती है वही वही गुणवान और प्रतिष्ठित होती है समाज में उनकी प्रतिष्ठा ज्यादा होती है और समाज के लोगों द्वारा ज्यादा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है जिनके माता-पिता का सम्मान ज्यादा होता है समाज में  होने के बच्चों का भी  सम्मान ज्यादा होता है

🖊📂विपशिप 

 ने रिचर्ड वर्ड पर अध्ययन ➖किया है उन्होंने रिचर्डवर् की पत्नी एलिजाबेथ थी उनकी जो संतान हुई वह प्रतिष्ठित हुई उन्हें प्रतिष्ठा प्राप्त हुई कोई विधानसभा सदस्य बने तो कोई विधि महाविद्यालय के अध्यक्ष है और कोई अमेरिका के राष्ट्रपति बने इससे यह ज्ञात होता है कि माता-पिता की समाज में जिस प्रकार की स्थिति होती है उसी प्रकार के उनके बच्चे होते हैं

🌲चरित्र पर प्रभाव ➖🖊डगडील➖ का कथन है कि चरित्रहीन माता पिता की संतान चरित्रहीन होती है और चरित्रवान माता-पिता की संतान चरित्रवान

लेकिन देखा जाए तो वंशानुक्रम का काम वातावरण का ज्यादा प्रभाव पढ़ रहा है वर्तमान समय में।

🌲महानता का प्रभाव ➖🖊गार्डन का विचार है कि ➖महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विभिन्नता पाई जाती है व्यक्ति का कद, स्वास्थ्य,शक्ति वृद्धि ,मानसिक ,वृद्धि सब वंशानुक्रम पर आधारित होता है

🌲बुद्धि का प्रभाव➖🖊 गोडार्ड के अनुसार➖ तेज बुद्धि वाले माता-पिता की संतान तेज होती है और मंद बुद्धि वाले माता-पिता की संतान मंदबुद्धि की होती है बुद्धि पर वंशानुक्रम का प्रभाव बहुत ही पड़ता है

📁 इन्होंने कालीकाक के वंशज पर अध्ययन किया

कालिका अपने दो शादी की थी पहली स्त्री मंदबुद्धि की थी और दूसरी स्त्री स्त्री तेज बुद्धि की थी 

🌺मंदबुद्धि स्त्री की 480 वंशज थे और 

🌺दूसरी स्त्री के 496 वंशज थे

🌺मंद बुद्धि स्त्री के वंशज ➖इस प्रकार हुए 143 मंदबुद्धि ,

46 सामान्य बुद्धि 

36 अवैध संतान

 32चरित्रहीन 

24 शराबी

 8 चरित्रहीन 

3अवैध 

और मृगरोगी हुए

🌺तीव्र बुद्धि स्त्री के वंशज➖ इस प्रकार हुए जिसमें 496 में से तीन मंद बुद्धि के और बाकी सब अच्छी बुद्धि के और अच्छे पद पर कार्य करने वाले बच्चे हुए जिसमें कोई वकील के ,डॉक्टर ,शिक्षक ,इंजीनियर अनेक पदों पर गए

 Notes by sapna yadav 🏵🏵🏵🏵

🔆 बालक के विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव➖

1) मूल शक्तियों पर प्रभाव

2) शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव

3) प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव

4) व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव

5) सामाजिक स्थिति पर प्रभाव

6) चरित्र पर प्रभाव

7) महानता का प्रभाव

8) वृद्धि का प्रभाव

🎯 मूल शक्तियों पर प्रभाव➖

थार्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान या मुख्य कारण उसका वंशानुक्रम ही है  | क्योंकि व्यक्ति को जो वंशानुक्रम से गुण प्राप्त होते हैं वह स्थाई होती हैं |

🎯शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव➖

कार्लपिटरसन के अनुसार अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है |

🎯 प्रजाति की श्रेष्ठता का प्रभाव ➖

 क्लिनवर्ग का मत है कि बुद्धि  की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत प्रजाति निग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है |

🎯व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव➖

कैटल ने कहा कि “व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है |”

                              वह   इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885  वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करने पहुंचे |

इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि इन परिवारों में से 2/5 व्यवसायिक वर्ग के, 1/2 उत्पादक वर्ग के और केवल 1/4 कृषि वर्ग के थे |

🎯 सामाजिक स्थिति पर प्रभाव ➖

 “विनशिप”  का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती है |

                 इस कथन की पुष्टि करने के लिए विनशिप ने रिचर्ड एडवर्ड के परिवार का अध्ययन किया जिसमें एडवर्ड  और उनकी पत्नी  एलिजाबेथ थी जोकि बहुत प्रतिष्ठित थे |

   जिससे उनकी संतान ने भी  बहुत प्रतिष्ठा प्राप्त की, जिसमें से कुछ विधानसभा के सदस्य कुछ महाविद्यालय के अध्यक्ष और कुछ अमेरिका के राष्ट्रपति हुए |

🎯 चरित्र पर प्रभाव ➖

डगडेल का कहना है कि “चरित्रहीन माता पिता की संतान चरित्रहीन होते हैं |”

        इस कथन की पुष्टि करने के लिए उन्होंने 1877  में ज्यूकस नामक व्यक्ति  के परिवार पर अध्ययन किया |

 जिसके अंतर्गत उनकी पांच पीढ़ी चरित्रहीन थी जिसमें 1000 व्यक्ति थे ,,,,  उसमें से 300 की बाल्यावस्था में मृत्यु हो गई,,,   310 दरिद्रग्रह में,,,,,  440 रोग के कारण,,,,    130 पर हत्या करने के आरोप का मुकदमा चलाया गया,,,तथा 20 व्यक्तियों ने व्यवसाय किया |

🎯 महानता का प्रभाव➖

गाल्टन का विचार है कि” महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है |”

 यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विविधता पाई जाती है व्यक्ति का कद, वर्ण(रंग) ,स्वास्थ्य ,बुद्धि और मानसिक शक्ति सब कुछ वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं |

🎯 वृद्धि पर प्रभाव➖

गोडार्ड का विचार है कि “मंदबुद्धि माता पिता होने पर संतान भी मंदबुद्धि होती है और तीव्र बुद्धि माता-पिता होने पर उनकी संतान भी तीव्र बुद्धि की होती है |”

       इस कथन को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कॉलिकाॅक  नामक सैनिक के वंशज का अध्ययन किया जिसमें काॅलिकाॅक ने दो विवाह किया था  |

जिसमें से एक पत्नी मंदबुद्धि और दूसरी पत्नी तीव्र बुद्धि की थी |

जिसमें उनकी  मंदबुद्धि पत्नी के 480 वंशज में से     140 मंदबुद्धि ,,,  46 सामान्य,,,,   36 अवैध संतान ,,,,   32 चरित्रहीन 24 चरित्रहीन  संस्था के संस्थापक तथा ,,,,,,  3 मृगी रोग से ग्रसित,,, तथा 3 अपराधी हुए |

 एवं  तीव्र बुद्धि वाली पत्नी के 496 वंशज में से  3 मंदबुद्धि  और बाकी व्यवसाय,,, शिक्षक /शिक्षिका ,,,,वकील  आदि सम्मानित व्यक्ति हुए |

नोटस बाय ➖रश्मि सावले

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☘️🌼 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव🌼☘️

(Effect of Heredity in child development)

1-🌼 मूल शक्तियों का प्रभाव➖ थार्नडाइक का मत हैं,कि बालक की मूल शक्तियों का प्रभाव उसका वंशानुक्रम है।

2-शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव➖

कार्ल पीयरसन का मत है ,कि यदि माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो उनके बच्चों की भी लंबाई कम अधिक होती है।

3-🌼 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव➖ क्लिनबर्ग का  मत हैं कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है यही कारण है कि अमेरिका के श्वेत प्रजाति निग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

4-🌼 व्यवसायिक  योग्यता का प्रभाव ➖कैटल का विचार है की व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है, वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे। उन्होंने बताया कि इन परिवारों में से 2/5  व्यवसायी – वर्ग के,1/2 उत्पादक- वर्ग के और केवल 1/4 कृषि-वर्ग के थे।

5-🌼 सामाजिक स्थिति पर प्रभाव➖विनशिप आप कहना है गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती  हैं।

☘️ रिचर्ड  एडवर्ड ➖ उनकी पत्नी एलीजाबेल एक प्रतिष्ठित थे, और उनकी संतान भी प्रतिष्ठित हुए उनकी संतान भी विधानसभा के सदस्य, महाविद्यालय में अध्यक्ष और अमेरिका के उपराष्ट्रपति बने।

6-🌼 चरित्र पर प्रभाव➖ डगडेल का मत है कि चरित्रहीन माता पिता की संतान चरित्रहीन होती है। न्यूयॉर्क में जन्म लेने वाला ज्यूकस एक चरित्रहीन मनुष्य था और उसकी पत्नी भी उसके समान चरित्रहीन थी इन दोनों के वंशजों के संबंध में नन ने लिखा है-

☘️”5 पीढ़ियों में लगभग 1000 व्यक्तियों में से 300 बाल्यावस्था में मारे गए, 310 ने 2,300 दरिद्रगृहों में व्यतीत किए, 440 रोग के कारण मर गए, 130 दंड प्राप्त अपराधी थे और केवल 20 ने कोई व्यवसाय करना सीखा”।

7-🌼 महानता का प्रभाव➖डाल्टन का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों में शारीरिक और मानसिक लक्षणों में भिन्नता पाई जाती है व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति, वजन सब वंशानुक्रम पर आधारित है।

8-🌼 वृद्धि का प्रभाव➖ गोडार्ड का मत है कि मंद -बुद्धि पिता के संतान मंदबुद्धि और तीव्र बुद्धि वाली माता पिता के संतान तीव्र बुद्धि वाले होते हैं।

☘️ कालीकाॅक नामक एक सैनिक के वंशजों का अध्ययन करके सिद्ध की ।उन्होंने सबसे पहले एक मंदबुद्धि स्त्री से और कुछ समय के बाद एक तीव्र बुद्धि की स्त्री से विवाह किया। पहले स्त्री के 480 वंशजों में से 143 मंदबुद्धि, 46 सामान्य, 36 अवैध संतान, 32 वेश्यायें, 24 शराबी, 8 वेश्यालय- स्वामी,3मृगी रोगी वाले और 3 अपराधी थे। दूसरी स्त्री के 496 वर्षों में से केवल तीन मंदबुद्धि और चरित्रहीन थे।शेष ने व्यवसायियों ,डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों आदि के रूप में समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त किया।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

 🌈मूल शक्तियों का प्रभाव― बालक की मूल शक्तियां उनके पूर्वजों के द्वारा जीन के माध्यम से स्थानांतरित होती है।    

👉थार्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानक्रम है।

🌈शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव― किसी बालक कुछ शारीरिक लक्षण जैसे कि माता पिता की लंबाई और भी कई चीज़े होती है जो माता पिता से बच्चे में प्रभाव देखने को मिलता है।

👉कार्लपीटरसन ने कहा कि अगर माता पिता की लंबाई कम या अधिक है।तो बच्चे की लंबाई भी अधिक होती है।

🌈प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव– जैसे कि किसी बालक की वंशानुक्रम का प्रजातियों की श्रेष्ठता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

।👉 क्लिसन वर्ग का मत है कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण है प्रजाति है। यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

🌈व्यावसायिक योग्यता का प्रभाव― जैसे कि कहा जाता है कि कुछ व्यवसाय ऐसे होते है जो पारम्परिक होते हैं जो पूर्वजो के समय से करते आ रहे हैं और आगे आने वाली पीढ़ी भी वही व्यवसाय करती है बस थोड़ा वातावरण के प्रभाव पर उसे थोड़ा अलग तरीके से करते हैं।

👉 कैटल ने विचार है व्यवसाय योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

    वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुचे । उन्होंने बताया कि इन परिवारों में से 2/5 व्यवसायी वर्ग के,1/2 उत्पादक वर्ग के और केवल 1/4 कृषि वर्ग के थे।

🌈सामाजिक स्थिति पर

 प्रभाव―   

   🌻💥 विनशिप का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता – पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।

   इन्होंने रिचर्ड एडवर्ड पर अपना अध्ययन किया था इनकी पत्नी एलिज़ाबेथ थी। ये दोनों ही प्रतिष्ठित व्यक्ति थे ।तो इनसे प्राप्त संताने भी प्रतिष्ठित हुई। जिनमे से कुछ विधानसभा के सदस्य हुए कुछ महाविद्यालय के अध्यक्ष हुए और अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में भी प्रतिष्ठा प्राप्त की।

🌈चरित्र पर प्रभाव― एक बच्चे पर उसके माता पिता तथा पूर्वजो के चारित्र का भी प्रभाव देखा जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए  ” डगडेल ने कहा”है कि चरित्र हीन माता पिता की संताने चरित्र हीन होते हैं। इसका अध्ययन1877 में ज्यूकस पर किया गया था।

🌈महानता का प्रभाव―  गॉल्टन का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है। यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विभिन्नता पाई जाती है। व्यक्ति का कद,वर्ण,स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति सब वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं।

🌈वृद्धि का प्रभाव― 

  👉गोडार्ड का विचार है कि मंद बुद्धि माता पिता की संतान मंद तथा तीब्र माता पिता की संतान तीब्र होती है।

  इन्होंने अपने प्रयोग कॉलीकॉक नाम का एक सैनिक था उसके वंशज पर उन्होंने अध्ययन किया।

 कॉलिकॉक की दो पत्नी थी जिसमे से एक मंदबुद्धि वाली थी और दूसरी तीब्र बुद्धि वाली थी। जिसमे की मन्द बुध्दि वाली से 480 वंशज हुए जिनमे से 143 मंद,46 सामान्य,36 अवैध ,32 चरित्र हीन,24 शराबी ,8 चरित्रहीन संस्था के संस्थापक हुए और 3 मृगी रोगी , 3 अपराधी हुए।  और दूसरी जो तीब्र बुद्धि वाली थी उससे 496 वंशज मिले  जिनमे 3 मंद बुद्धि वाले थे और बाकी के बिजनेस मैन ,डॉक्टर, वकील, शिक्षक  आदि से सम्मानित हुए।

💥💥💥💥💥💥💥💥Notes by Poonam sharma🌻🌻🌻🌻🌻

🌈बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव🌈

💥1- मूल शक्तियों पर प्रभाव – थार्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है।

💥2- शारीरिक लक्षणों पर  प्रभाव -काल्र पीटरसन ने कहा कि अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है।

💥3- प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव – क्लिनबर्ग का मत है कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति ही है यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत  प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

💥4- व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव – कैटल का  विचार है कि व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

🌟 वह उस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे उन्होंने बताया कि इन परिवार में से 2/5 व्यवसाई वर्ग के ,1/2 उत्पादक वर्ग के और केवल 1/4 कृषि वर्ग के थे।

💥5- सामाजिक स्थिति पर प्रभाव –  विनशिप का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती है विनशिप ने रिचर्ड एडवर्ड पर अध्ययन किया। 

🌟जो विधानसभा के सदस्य ,महाविद्यालय के अध्यक्ष, अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे।

💥6 – चरित्र पर प्रभाव – डगडेल का कथन है कि चरित्रहीन माता -पिता की संतान चरित्रहीन होते हैं।1877 मे ज्यूकस के वंशज पर अध्ययन किया।

💥 7-  महानता का प्रभाव – गाल्टन का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विभिन्नता पाई जाती है कि व्यक्ति का कद, वण्, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति सब वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं।

💥8 – वृद्धि का प्रभाव  – गोडार्ड का विचार है कि मंद माता पिता के बच्चे मंद होते हैं तीव्र माता पिता के बच्चे तीव्र होते हैं गोडार्ड ने कालिकॉक पर अध्ययन किया।

📝 notes by suchi Bhargav………🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️

🤰🏻🤰🏻 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव🤱🏻👩🏻‍🍼

(Effect of Heredity in child development)

1- 💪🏻🤝🏻मूल शक्तियों का प्रभाव➖ THORNDYKE का मत हैं,कि बालक की मूल शक्तियों का प्रभाव उसका वंशानुक्रम है।

2-☠️💀शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव➖

CARL PEARSON का मत है ,कि यदि माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है, तो उनके बच्चों की भी लंबाई कम या अधिक होती है।

3-🥸 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव➖ CLINBURG का  मत हैं ,कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है। यही कारण है कि अमेरिका के श्वेत प्रजाति, निग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

4-💂🏻‍♀️🕵🏻‍♀️👩🏻‍🏫👩🏻‍💻👩🏻‍🔬👸🏻👩🏻‍⚖️व्यवसायिक  योग्यता का प्रभाव ➖CAITAL का विचार है, की व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है। वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे। उन्होंने बताया कि इन परिवारों में से 2/5  व्यवसायी – वर्ग के,1/2 उत्पादक- वर्ग के और केवल 1/4 कृषि-वर्ग के थे।

5- 🤓🧐सामाजिक स्थिति पर प्रभाव➖VINSHIP आप कहना है, कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती  हैं।

RECHURD ADBERD🧑🏻‍✈️ AND ALIZABETH👰🏻‍♀ एक प्रतिष्ठित दंपति थे और उनकी संतान भी प्रतिष्ठित हुए । उनकी संतान विधानसभा के सदस्य, महाविद्यालय में अध्यक्ष और अमेरिका के उपराष्ट्रपति बने।

6-🫂 चरित्र पर प्रभाव➖ DOGDEL का मत है कि चरित्रहीन माता पिता की संतान चरित्रहीन होती है। न्यूयॉर्क में जन्म लेने वाला ज्यूकस🤢 एक चरित्रहीन मनुष्य था और उसकी पत्नी भी उसके समान चरित्रहीन थी इन दोनों के वंशजों के संबंध में लिखा है-

“5 पीढ़ियों में लगभग 1000 व्यक्तियों में से 300 बाल्यावस्था में मारे गए, ,300 दरिद्रगृहों में व्यतीत किए, 440 रोग के कारण मर गए, 130 दंड प्राप्त अपराधी थे और केवल 20 ने कोई व्यवसाय करना सीखा”।

7- 👳🏻‍♀️महानता का प्रभाव➖ DALTON का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है। यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों में शारीरिक और मानसिक लक्षणों में भिन्नता पाई जाती है। व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति, वजन सब वंशानुक्रम पर आधारित है।

8- 🧍🏻‍♀️वृद्धि का प्रभाव➖ GODARD का मत है कि मंद -बुद्धि पिता के संतान मंदबुद्धि और तीव्र बुद्धि वाली माता पिता के संतान तीव्र बुद्धि वाले होते हैं।

🦍 KALICOCK नामक एक सैनिक के वंशजों का अध्ययन करके सिद्ध किया ।उन्होंने सबसे पहले एक मंदबुद्धि स्त्री से और कुछ समय के बाद एक तीव्र बुद्धि की स्त्री से विवाह किया। पहले स्त्री के 480 वंशजों में से 143 मंदबुद्धि, 46 सामान्य, 36 अवैध संतान, 32 वेश्यायें, 24 शराबी, 8 वेश्यालय- स्वामी,3 मिर्गी रोगी वाले और 3 अपराधी थे। दूसरी स्त्री के 496 वर्षों में से केवल तीन मंदबुद्धि और चरित्रहीन थे।शेष ने व्यवसायियों ,डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों आदि के रूप में समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त किया।

✍🏻@Deepika_Ray@✍🏻

🧠🧠(Effects of heredity in child development)🧠🧠

   💦 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव💦

🍒व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।

💦बालक के विकास में वंशानुक्रम के प्रभाव पढ़ने वाले निम्नलिखित कारक है÷

🗣️1-मूल शक्तियों पर प्रभाव

🕵️थार्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान उसका वंशानुक्रम ही है।

💦मूल प्रवृत्तियां जो वंशानुक्रम से मिली है जीवनपर्यंत तक रहती हैं किंतु वातावरण उन सभी अवस्थाओं  व समय व माहौल के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डालता है।

🗣️2-शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव

🕵️कॉल पीटरसन ने कहा है कि अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है।

💦माता-पिता या पूर्व जो द्वारा आए गुणो का प्रभाव बच्चे पर होता है इससे उसकी लंबाई व आंखों का रंग,  बालों का रंग व शारीरिक बनावट भी उन्ही की तरह की ही होती है।

🗣️3-प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव

💦क्लिनवर्ग का मत है कि बुद्ध की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है, यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

💦उदाहरण जैसे मनुष्य ही पृथ्वी पर एक ऐसा प्रजाति है जो पूरी तरह से विकसित है क्योंकि उसका मस्तिष्क परिपक्व है,वह अन्य प्राणियों के साथ सामंजस्य पूर्ण व्यवहार कर सकता है , उनके साथ स्वयं को समायोजित कर सकता है।

🗣️4-व्यवसाय की योग्यता का प्रभाव

💦केटल का विचार है कि व्यवसाय की योग्यता का मुख्य कारण वंशानुक्रम है।

💦इन्होंने इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 805 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके उन्होंने बताया कि इन परिवारों में से 2/5 व्यवसाय वर्ग के 1/2 उत्पाद वर्ग के वह केवल 1/4 कृषि वर्ग के थे।

🗣️4-सामाजिक स्थिति पर प्रभाव -विनशिप का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठता प्राप्त करती है।

💦उदाहरण÷रिचर्ड एडवर्ड नामक इंसान की पत्नी जिनका नाम एलिजाबेथ था ये दोनों एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे,इनकी संता ने भी प्रतिष्ठित रही हैं अर्थात यह भी अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर अपनी प्रतिभा से समाज प्रतिष्ठा फैलाई, इनमें से कुछ सभा के सदस्य थे तो कुछ महा विद्यालय के अध्यापक एवं कुछ ऐसे भी थे जो अमेरिका के राष्ट्रपति तक हुए।

🗣️5-चरित्र पर प्रभाव÷ डगडेल ने कहा है कि चरित्रहीन माता पिता की संतान चरित्रहीन होते हैं।

💦इन्होंने में ज्यूकस नामक व्यक्ति के ५ पीढ़ी के १००० सदस्यों पर अध्ययन किया जिसका विवरण निम्नानुसार रह÷

💦इस पीढ़ी में 300 बालक वा बालिकाए ऐसी हुए  जिनका बाल्यावस्था में ही मृत्यु हो गई ;

318 के आसपास बच्चे दलित ग्रह में चले गए;

440 आसपास के बच्चे विभिन्न प्रकार के रोगो के कारण उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई;

130 बच्चों में 7 पर हत्या करने वाले मुकदमे चलाए गए इसी प्रकार बच्चा चोरी करने वाले 55 के आसपास निठल्ले कामचोर आदि निकले, किंतु कुल 20 ही सदस्य ऐसे थे जो व्यवसाय करने वाले निकले।

💦 धन्यवाद🧠💦

👭 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव👭

🔅 मूल शक्तियों का प्रभाव :-

 ➖Thorndike का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है।

🔅 शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव:-

➖ कार्ल  पीटरसन ने कहा कि अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है।

🔅 प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-

➖ क्लीनबर्ग  का मत है कि बुद्धि के श्रेष्ठाता का कारण प्रजाति ही यही कारण है कि अमेरिका कि श्वेत  प्रजाति,नीग्रो प्रजाति से  श्रेष्ठ है।

🔅व्यवसाहयिक योग्यता का प्रभाव :-

 ➖केटल का विचार है,व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

➖ वह इस निष्कर्ष पर, अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे। उन्होंने बताया कि इन परिवार में से….

➖2/5= व्यवसायी वर्ग के।

➖1/2= उत्पादक वर्ग के।

➖ केवल 1/4= कृषि वर्ग के थे।

🔅 सामाजिक स्थिति पर प्रभाव:-

 विनशिप का कहना है, गुणवान और प्रतिष्ठा प्राप्त माता पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।

➖ रिचर्ड एडवर्ड ने एक प्रयोग में बताया कि उनकी पत्नी,, एलिजाबेथ जो प्रतिष्ठित थी,, और उनके संतान में प्रतिष्ठित हुए जो विधानसभा के सदस्य,, महाविद्यालय के अध्यक्ष बाद में अमेरिका के उप राष्ट्रपति बने।

🔅 चरित्र पर प्रभाव :

 ➖डकडेल  के अनुसार, चरित्रहिन माता पिता के संतान चरित्रहीन  होते हैं।

➖ इन्होंने 1877 में, ज़युकस  के वंशज पर अध्ययन किया।

🔅 महानता  का प्रभाव:-

➖ गार्डन का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है। यह वंशानुक्रम का यह प्रभाव है कि व्यक्तियों में शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विविधता पाई जाती है।

➖ व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति,वजन सब वंशानुक्रम पर आधारित है।

🔅 वृद्धि का प्रभाव :-

➖GODARd का मत है कि मंदबुद्धि पिता के संतान,मंद बुद्धि और तीव्र बुद्धि वाले माता-पिता के संतान, तीव्र बुद्धि वाले होते हैं।

➖कालिकॉक, नामक एक सैनिक के वंशजों का अध्ययन करके यह सिद्ध किया।

➖ उन्होंने सबसे पहले एक मंदबुद्धि स्त्री से और कुछ समय के बाद एक तीव्र बुद्धि की स्त्री से विवाह किया

✨ पहली  स्त्री के :-

➖480 वंशजों  में से 143 मंदबुद्धि।

➖ 46 सामान्य।

➖ 36 अवैध संतान।

➖ 24 शराबी।

➖8 वेश्यालय।

➖3 मिर्गी रोगी वाले।

➖3 अपराधी

✨ दूसरी स्त्री के :-

➖496 बच्चों में से, केवल तीन मंद बुद्धि और चरित्रहीन थे।

➖ शेष में व्यवसायियों, डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों आदि के रूप में समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त किया।

 📝NOTES BY “AkAnKsHa”📝

  🤓🙏🏻🌹💐🤗

✍            16/03/2021.     ✍

            Today class..

बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव

👉 व्यक्ति के हर पहलू पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है

✊(1)- मूल शक्तियों पर प्रभाव – थार्नडाइक:— का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है।

👉 क्योंकि बालक के माता -पिता के गुण से जो मिला वो स्थिर हो गया । लेकिन कोई भी इन्वायरमेंट हमारे पास स्थिर नहीं रहा वह चाहे 10 साल पहले की हो या आज की या आने वाले कल की लेकिन माता-पिता से जो मूल शक्तियां मिली वो रह गया जीवन पर्यंत के लिये।

✊(2)- शारीरिक लक्षणों पर  प्रभाव कार्ल पीटरसन:— ने कहा कि अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चे की लंबाई भी कम या अधिक होती है।

✊(3)-प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव:—क्लिनबर्ग :—का मत है कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत  प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

👉अत: प्रजाति की श्रेषठता का प्रभाव मनुष्य की बुद्धि पर पड़ता है

✊(4)-व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव :—कैटल :—का  विचार है कि व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

👉 जैसे हमारे परिवार में कोई शिक्षक ,डॉक्टर,वकील है तो वह गुण हमारे अंदर खुद व खुद आता है

👉वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे । उन्होंने बताया कि इन परिवार में से..

👉 2/5 व्यवसाई वर्ग के 

👉1/2 उत्पादक वर्ग के

 और केवल 

👉1/4 कृषि वर्ग के थे।

✊(5) सामाजिक स्थिति पर प्रभाव:—  विनशिप :—का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करता है ।

👉 विनशिप ने :—रिचर्ड एडवर्ड पर अध्ययन किया। 

रिचार्ज एडवर्ड एक परिवार था उसके परिवार पर इन्होंने अध्ययन करके इसमें पहुंचा रिचर्ड काफी गुणवान और प्रतिष्ठित मनुष्य था और उसके एलिजावेथ नामक स्त्री से विवाह किया जो वह भी गुणवत्ता में उसी के सामान थी तो इस दोनों के वंशजों  जो हुए वह काफी प्रतिष्ठित हुए वह बाद में विधानसभा के सदस्य बने, विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने ,उनमें से एक वंशज अमेरिका का उपराष्ट्रपति भी बना

✊(6)  चरित्र पर प्रभाव:—डगडेल ने 1877 मे ज्युकस वंश का अध्ययन किया जिसमें उन्होंने कहा चरित्रहीन माता-पिता के बच्चे चरित्रहीन होते हैं

👉 5 पीढी में 1000बच्चे थे जिसमे..

👉 300 बाल्यावस्था में मर गए

👉310 दरिद्र ग्रह हो गया 

👉440 रोग के कारण मर गए

👉 130 में 7 पर हत्या का केस चला

👉10 ने व्यवसाय किया 

इस अध्ययन में

 स्ट्र्वूक :– ने सहयोग किया।

✊ (7) महानता का प्रभाव :— गाल्टन :–का विचार है कि महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विभिन्नता पाई जाती है कि व्यक्ति का कद, वण्, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति सब वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं।

👉 अतः किसी इंसान का व्यक्तित्व उसके हर चीज पर निर्भर करता है

✊(7) वृद्धि का प्रभाव :—

गोडार्ड :—का विचार है कि मंद माता पिता के बच्चे मंद होते हैं तीव्र माता पिता के बच्चे तीव्र होते हैं 

👉गोडार्ड ने कालिकॉक सैनिक पर अध्ययन किया।

कालिकाक ने दो स्त्री से शादी की जिसमें पहला ।

👉मंदबुद्धि स्त्री थी जिसमें 480 वंशज थे इनमें 

👉143 मन बुद्धि

 👉46 सामान्य हुए

 👉36 अवैध संतान

 👉32 चरित्रहीन

👉24 शराबी 

👉8 चरित्रहीन संस्था के संस्थापक

👉3 मिर्गी रोगी 

👉3 अपराधी ।

👉 तीर्व बुद्धि वाली स्त्री:– के 496 में वंशजों मे ….

👉3 मंदबुद्धि 

👉और बाकी बिजनेसमैन ,डॉक्टर, शिक्षक ,वकील, सम्मानित व्यक्ति हुए।

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✍Notse by:–संगीता भारती✍

            🙏Thank you 🙏

💫  Effects of heredity in child development 💫

💫 बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव💫

🌟 मूल प्रवृत्तियों पर प्रभाव

 थार्नडाइक  का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उनका वंशानुक्रम है।

 जिस प्रकार से उनके माता-पिता आपस में व्यवहार करते हैं बातचीत करते हैं आदर करते हैं बड़ों का छोटू का सम्मान करते हैं, इसी तरह से बच्चे भी उनका अनुसरण करके धीरे-धीरे उन्हीं की तरह  आचरण करने लगते हैं, और उनकी भी मूल प्रवृत्तियां अपने माता पिता की तरह हो जाती है।

🌟 शारीरिक लक्षणों का प्रभाव

 कार्ल पीटरसन ने कहा कि अगर माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है तो बच्चों की भी लंबाई कम या अधिक होती है।

 इस कथन का अभिप्राय है कि अगर किसी बच्चे के माता-पिता की लंबाई कद काठी बड़ी होती है तो उसके बच्चे की भी कद काठी बड़ी होने की संभावना ज्यादा होती है ।

जिस प्रकार से उनके माता-पिता का रंग रूप होगा , आंखों का रंग होगा बालों का रंग होगा उसी प्रकार से उनके बच्चों का रंग , आंखों के रंग का एवं बालों के रंग का होता है ।

🌟 प्रजाति की श्रेष्ठता का प्रभाव

 क्लिनबर्ग का मत है कि बुद्धि की श्रेष्टता का कारण प्रजाति है यही कारण है कि अमेरिका की श्वेत प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

क्लिनबर्ग का कहना था कि बालक के वंशानुक्रम मे उसकी प्रजाति का भी योगदान होता है जो उच्च जाति के लोग होते हैं उनकी बुद्धि अधिक श्रेष्ठ होती है निम्न जाति वालों से।

✨व्यवसायिक योग्यता का प्रभाव कैटल का विचार है कि व्यवसायिक योग्यता का मुख्य कारक वंशानुक्रम है।

वह इस निष्कर्ष पर अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवार का अध्ययन करके पहुंचे ।

उन्होंने बताया कि इन परिवार में से  2 / 5 व्यवसायि वर्ग के ,

    1 / 2 उत्पादक वर्ग के और          

   1  / 4 कृषि वर्ग के थे।

✨ सामाजिक स्थिति पर प्रभाव

विनशिप का कहना है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।

 उन्होंने रिचर्ड एडवर्ड पर अपना रिसर्च किया।

 रिजर्ड एडवर्ड और उनकी पत्नी एलिजाबेथ दोनों प्रतिष्ठित व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे ।

उनके संताने भी प्रतिष्ठित ही हुई।

 जिनमें से अमेरिका के राष्ट्रपति हुए विधानसभा के सदस्य हुए महाविद्यालय के अध्यक्ष  जैसै  प्रतिष्ठित पदों  को प्राप्त किए।

✨ चरित्र पर प्रभाव 

चरित्रहीन माता-पिता की संताने चरित्रहीन होती है।

 इस कथन के अनुसार चरित्रहीन माता-पिता की संताने भी अपने माता-पिता के प्रकार ही चरित्रहीन होती है ।

जैसे 1877 में ज्यूकस एक चरित्रहीन व्यक्ति के ऊपर शोध करके पाया गया कि ज्युकस ने एक चरित्रहीन महिला से शादी की।

 उसकी 5 तक 1000 संताने हुई।

– इन 1000 संतानों में 300 संताने बाल्यावस्था में मर गए।

– 300 बहुत गरीब हालत में दरिद्र ग्रह में जीवन यापन किया।

–  440 रोग से ग्रस्त हो गए ।

– 130 में से 7 ने आत्महत्या कर ली ।

– 130 में से 20 ने व्यवसाय किया।

 – और बाकियों का पता नहीं।

✨ महानता का प्रभाव

 गाल्टन का विचार है कि महानता का कारण  उसका वंशानुक्रम है।

 यह वंशानुक्रम का ही प्रभाव है कि व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विभिन्नता पाई जाती है।

 व्यक्ति का कद, स्वास्थ्य बुद्धि मानसिक शक्ति सब वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं।

✨  वृद्धि का प्रभाव

 गोडार्ड का विचार है कि मन्दबुद्धि माता-पिता की संतान मन्दबुद्धि और तीव्र माता-पिता की संतान तीव्र बुद्धि की होती है।

 उन्होंने कालीकॉक नामक सैनिक पर अपना प्रशिक्षण किया ।

कालीकॉक ने दो शादियां की थी।

 एक शादी मंदबुद्धि स्त्री से तथा दूसरी शादी तीव्र बुद्धि स्त्री से।

-मंदबुद्धि स्त्री से 480 वंशज हुए जिनमें से 

143 मंदबुद्धि

  46 सामान्य

  36अवैध संतान 

  32 चरित्रहीन 

  24 शराबी 

  18 चरित्रहीन संस्था के संस्थापक 

  3 मिर्गी रोगी और 

  3 अपराधी संताने हुई।

तीव्र बुद्धि शादी से 496 वंशज हुए।

 जिसमें से 3 मंदबुद्धि 

 बाकियों में से बिजनेसमैन, डॉक्टर ,शिक्षक, वकील आदि हुए।

धन्यवाद 

द्वारा 

वंदना शुक्ला

By admin

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