🔆 वंशानुक्रम के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण नियम 🔆

❇️ अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम : – 

▪️इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनके संतान को प्राप्त नहीं होते हैं।

 ▪️बल्कि हमारे जो कुछ भी गुण होते हैं हम अर्जित करते हैं या जो कुछ भी हम सीखते हैं वह किसी ना किसी रूप में हमारे अंदर आता ही है लेकिन उसका व्यक्ति के आगे आने वाली पीढ़ी के लिए भी वह महत्वपूर्ण हो जाता है।

▪️यदि इन गुणों का महत्व नहीं होता तो यह आगे की पीढ़ी में स्थानांतरित ही नहीं होता व्यक्ति को जो अपनी पीढ़ी से मिलने वाले गुण है ।वह कहीं ना कहीं किसी की पीढ़ी ने अर्जित तो किए ही होंगे तभी जाकर वह उसको आगे आने वाली पीढ़ी को विरासत में प्राप्त हुए हैं।

▪️इन सभी कारणों से इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी लैमार्कवाद कहते हैं कि 

▪️व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है।

▪️इसका उदाहरण देते हुए कहा कि

▪️जिराफ की गर्दन पहले घोड़े के समान थी पेड़ से पत्ते खाने के लिए जिराफ ने अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींच आया उठाया तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उसकी गर्दन लंबी होती चली गई कालांतर में उसकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में भी संक्रमित हुआ।

▪️व्यक्ति या कोई भी प्राणी अपनी परिस्थितियां वातावरण के अनुसार चीजों को अर्जित करते हैं और उसे अपने आगे आने वाली किसी ना किसी पीढ़ी में स्थानांतरित करते हैं।

▪️जैसे मां के गर्भ में बच्चा भी बाहरी वातावरण से गर्भ के अंदर भी कई चीजों को सीखता या अर्जित करता है अर्थात वह बाहरी वातावरण भी बच्चों को प्रभावित करता है।

▪️लैमार्क के इस कथन की पुष्टि मेगडुग्ल और पावलाव ने चूहों पर।

हैरिसन ने पतंगों पर परीक्षण करके की।

▪️आज के युग में विकास वाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है।

▪️वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से सोचने पर यह बात प्राय: असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संगठित किया जा सके।

▪️यदि आप कोई भाषा बोलना सीख नहीं तो क्या आप जीने के माध्यम से बच्चों में भी उसे संक्रमित कर सकते हैं?

▪️इस प्रकार की किसी भी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है।

❇️ मेंडल का नियम :- 

▪️इस नियम के अनुसार वर्णसंकर प्राणी या वस्तु में अपने मौलिक वा  सामान्य रूप की ओर अग्रसर होती हैं इस नियम को जेकोस्लोवेलिया के मेंडल नामक पादरी ने प्रतिपादित किया।

🔹 मेंडल का मटरो पर प्रयोग:-

 मेंडल ने अपने प्रयोग मटर के पौधे पर किया।

▪️जिसमें उन्होंने अपने बगीचे में छोटी व बड़ी मटर  बराबर संख्या में मिलाकर बोई तत्पश्चात उगने वाली मटर में सब वर्ण संकर जाति की थी। मेंडल ने इन वर्णसंकर मटरो को फिर बोया और इस प्रकार उन्होंने उगने वाली मटर को कई बार बोया ,अंत में उन्हे ऐसी मटर मिली जो वर्णसंकर होने के बजाय शुद्ध थी ।

 शुद्ध बड़ी मटर + शुद्ध छोटी  मटर

 = वर्णसंकर मटर 

वर्णसंकर मटर = शुद्ध बड़ी मटर(25%), वर्णसंकर बड़ी मटर(50%) ,शुद्ध छोटी मटर (25%)

🔹मेंडल का चूहों पर प्रयोग :- 

इस प्रकार मेंडल ने चूहों पर भी प्रयोग किया।

 ▪️इस प्रयोग में उन्होंने सफेद और काले चूहों को एक साथ रखा। जिसमें उन्होंने देखा कि उन्हें  आगे आने वाली चूहों की इस पीढ़ी में काले प्रजाति के चूहे प्राप्त हुए।

      काला🐀  + सफेद🐁  =काला🐀 ,🐀

▪️एक बार फिर उन्होंने वर्णसंकर काले और काले चूहों को एक साथ रखा जिसमें उन्होंने देखा कि आगे आने  वाली चूहों को इस पीढ़ी में काले वह सफेद दोनों प्रजाति के चूहे उत्पन्न हुए

काला 🐀 + 🐀 := काला🐀, सफेद🐁

                    🐀🐁

                      !      

         🐀       🐀         🐀

            !           !             !

       🐀   🐀      🐀       🐁

         !       !          !           !    !    !

   🐀  🐀  🐀  🐀 🐀  🐁🐁🐁

▪️अपने प्रयासों के आधार मेंडल ने सिद्धांत प्रतिपादित किया कि वर्णसंकर प्राणी या वस्तुएं अपने मौलिक या सामान्य रूप की ओर अग्रसर होती हैं यही सिद्धांत मेंडल वाद के नाम से प्रसिद्ध है इसकी व्याख्या करते हुए बीएन झा ने लिखा कि 

“जब वर्णसंकर अपने स्वयं केपितृ या मात्र उत्पादक कोषो का निर्माण करते हैं ,तब वे प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकारों को जन्म देते हैं।”

✍🏻

Notes By-‘Vaishali Mishra’

➡️वंशानुक्रम का अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम :-

वंशानुक्रम का अर्जित गुणों के संक्रमण के नियम के अनुसार, माता-पिता द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किये जाने वाले गुण उनकी सन्तान को प्राप्त नहीं होते हैं।  

लेमार्क के इस कथन की पुष्टि मैग्डूगल और पावलव ने चूहों पर एवम हैरिसन ने पतंगो पर परीक्षण करके किया।

👉🏻 इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी लेमार्क कहते है कि वंशानुक्रम का अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम के बारे में कहा कि–

“व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है, वह उनके द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले संतानों को संक्रमित करता है।”

👉🏻लेमार्क ने वंशानुक्रम का अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम के लिए अपने मत को साबित करने के लिए उदाहरण के तौर पर कहतें हैं कि–🦄

जिराफ की गर्दन पहले लगभग घोड़े 🐴की गर्दन के समान ही होती थी, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी लम्बी हो गई जिससे पता चलता है कि 🦓जिराफ की लम्बी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित होने हुआ।

👉🏻आज के समय में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धान्त स्वीकार नहीं किया जाता है। 

📝इसके बारे में वुडवर्थ ने अपना मत रखा है जो कि निम्नलिखित है👉🏻

यदि आप कोई भाषा बोलना सीख लें, तो क्या आप पित्रैकों द्वारा इस ज्ञान को अपने बच्चे को संक्रमित कर सकते हैं? इस प्रकार के किसी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है। क्षय या सूजाक ऐसा रोग, जो बहुधा परिवारों में पाया जाता है, यह रोग संतानों में परिवार में छुआ-छूत की वजह से होता है, न कि संक्रमण से।

➡️(मैण्डल का वंशानुक्रम का नियम) :-मेंडल ने मटरो पर परीक्षण कर यह सिद्धांतप्रतिपादितकिया कि वर्णसंकर प्राणी अथवा जीव  वस्तुएँ अपने मौलिक या सामान्य रूप की ओर अग्रसर होती है। 

👉🏻इस नियम को जेकोस्लोवेकिया के मैण्डल नामक पादरी ने प्रतिपादित किया था।

मैण्डल नेे बड़ी और छोटी मटरें बराबर संख्या में मिलाकर बोयीं। उगने वाली मटरों में सब वर्णसंकर जाति की थीं। मैण्डल ने इस वर्णसंकर मटरों को फिर बोया और इस क्रिया को कई बार दोहराया और अंत में मैण्डल को वर्णसंकर के बजाय शुद्ध मटर प्राप्त हुईं।

             बड़ी मटर+छोटी मटर

                         ⬇️

                  वर्णसंकर मटर

                          ⬇️

     ⬇️               ⬇️            ⬇️  

शुद्ध बड़ी       बड़ी संकर      शुद्ध छोटी      

मटर50%        मटर50%     मटर50% 

  ⬇️                  ⬇️              ⬇️

शुद्ध बड़ी    बड़ीवर्णसंकर    शुद्ध छोटी

मटर 25%    मटर 50%       मटर25%

ग्रेगर जॉन मैण्डल ने जो प्रयोग किये, उनसे प्राप्त निष्कर्षों से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभावों के अध्ययन में अत्यधिक उपयोगी साबित हुए।

अधिक जाग्रत या प्रबल गुण, सुप्त गुण को निष्क्रिय कर देता है। सुप्तावस्था में रहने वाले व्यक्त गुण जब प्रकट होकर मुख्य गुण का रूप धारण कर लेते हैं।

                 🐀🐁

➡️ [चूहों पर प्रयोग]÷ मेंडल ने सफेद और काले चूहे को एक साथ रखा इन चूहों के बच्चे हुए वे सभी काले रंग के थे। फिर इन वर्णसंकर काले चूहे को एक साथ रखा गया इनसे उत्पन्न होने वाले चूहे काले और सफेद दोनो रंग के थे तथा काले और सफेद चूहों का अनुपात 3: 1था।इस तरह उत्पन्न सफेद चूहों से केवल सफेद चूहे उत्पन्न हुए, किन्तु काले चूहों मे से एक तिहाई ने केवल काले चूहे उत्पन्न किए और दो तिहाई ने काले (3)और सफेद (1)दोनों प्रकार के बच्चे उत्पन्न किए। 

             🐀+🐁

                  ⬇️

🐀     🐀     🐀        🐁

                  ×

⬇️      ⬇️      ⬇️      ⬇️

🐀      🐀        🐀        🐁

25%   25%    25%         25%

                     (50%)

⬇️                                 ⬇️

🐀                                  🐁

100%                             100%

⬇️       ⬇️        ⬇️            ⬇️

🐀       🐀        🐀            🐁

25%             50%               25%

           75%

🥀 उपर्युक्त परीक्षणों से निष्कर्ष निकलता हैंकि नर और मादा के गुण सूत्रों में से कुछ तो व्यक्त और कुछ सुप्त रूप में होते हैं। व्यक्त गुण के अभाव से सुप्त गुण प्रधान हो जाता है।

वर्तमान ने इस सिद्धांत को अपेक्षाकृत अधिक मान्यता प्राप्त है। परन्तु मेंडल ने जो प्रतिशत निशिचत किया है वह सब मनुष्यों पर लागू नहीं होता,यह तो पैत्रको के संयोग पर निर्भर करता है जो किसी विशेष क्रम में नही होता, चान्स फैक्टर पर निर्भर करता है।

📚📖📝 Notes by shikha tripathi

☘️🌼 वंशानुक्रम के सिद्धांत🌼☘️

🌼 अर्जित बड़ों के संक्रमण का नियम (Law of Transmission of acquired Traits)

👉🏼 इस नियम के अनुसार,माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनके संतान को प्राप्त नहीं होती है।

👉🏼 इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी 🤵🏻‍♂लेमार्क कहते हैं, “व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उसके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है।”

👉🏼 इसका उदाहरण देते हुए🤵🏻‍♂ लेमार्क  ने कहा है कि 🦒 की गर्दन पहले 🐎 के समान थी पेड़ से पत्ते खाने के लिए🦒ने अपनी गर्दन को ऊपर की ओर उठाया तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उसकी गर्दन लंबी होती चली गई कालांतर में इसकी लंबी गर्दन का गो अगली पीढ़ी में संक्रमित हुआ।

👉🏼🤵🏻‍♂लैमार्क के इस कथन की पुष्टि मैण्डूगल 🤵🏻 और पावलव🧑🏼‍💼 ने 🐀 पर एवं हैरीसन👨🏻‍🔬 ने कीट पतंगा पर परीक्षण करके किया है।

🧑🏽‍🔬  वुडवर्थ के अनुसार➖आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया जाता है।

👉🏼 वंशानुक्रम के प्रक्रिया को अपने आधुनिक ज्ञान से संपन्न होने पर यह बात पर आया असंभव जान पड़ती है।कि अर्जित गुरु को संक्रमित किया जा सके यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले तो क्या आप जिनके माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते हैं इस प्रकार के किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है।

🌼☘️ मेंडल का नियम (Law of Mendel)

👉🏼इस नियम का प्रतिपादन मेंडल ने किया। उनका सिद्धांत मेंडलवाद के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ। सर्वप्रथम उसने छोटी और बड़ी मटर को अलग-अलग बोया तो छोटी मटर से छोटी तथा बड़े मटर से बड़ी मटर पैदा हुई।

👉🏼किंतु जब छोटी और बड़ी मटर को बराबर संख्या में मिलाकर वो या तो केवल बड़ी मटर ही पैदा हुई अतः छोटेपन का गुण सुप्त रह गया और बड़ेपन  का गुण व्याप्त हो गया जिससे सिद्ध हुआ कि प्रकृति सदैव गुण वाले संतति को बढ़ाती है।

👉🏼 मटरों  के समान मेंडल🧑🏼‍💼 ने 🐀पर प्रयोग किया उसने सफेद🐁 और काले🐀 चूहे को साथ-साथ रखा इनसे जो चूहे उत्पन्न हुए वह काले🐀 थे फिर उसने वर्णसंकर काले🐀 चूहे को एक साथ रखा इससे उत्पन्न चूहे काले 🐀व सफेद🐁 दोनों रंग के थे।

 बी एन झा के अनुसार➖जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पितृ या मातृ  उत्पादक कोशो का निर्माण करता है तो वह मुख्य गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देता है।

👉🏼🤵🏻‍♂मेंडल ने जो प्रयोग किया उससे प्राप्त निष्कर्ष से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला।

✍🏻📚📚 Notes by…. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

➡️अर्जित गुणों का के संक्रमण का नियम = 

इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनके संतान को प्राप्त नहीं होते हैं

इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी लैमार्क कहते हैं कि व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित किया करता है

➡️इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा कि कि जिराफ की गर्दन वाले घोड़े के समान थी पेड़ से पत्ते खाने के लिए जीराफ अपने-अपने गर्दन को ऊपर की ओर खींचा तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गई

➡️कालांतर में उनकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में भी संक्रमित हो गया

➡️लैमार्क के इस कथन की पुष्टि.   मैकडुग्गल और पावलव  ने चूहे पर और हैरिसन ने  पतंगो पर परीक्षण करके किया है

लेकिन   वुडवर्थ ने इसको सही नहीं माना |

➡️आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है

➡️ वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से संपन्न होने पर यह बात प्राय: असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले ,तो क्या आप जीन के माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते है| 

इस प्रकार के किसी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है

🖤मेंडल का वंशानुक्रम का नियम=

मेंडल ने अपने बगीचे में बड़ी और छोटी मटर के दानों को बराबर संख्या में मिलाकर बोया –

🖤 मेंडल ने मटर पर परीक्षण कार्य सिद्धांत का प्रतिपादन किया उन्होंने दो प्रकार के मटर के पौधे पर परीक्षण किया एक शुद्ध बड़ी मटर एक शुद्ध छोटी मटर उनके बीच क्रॉस करवाया उन्होंने पाया वर्णसंकर मटर की नई प्रजाति आई फिर वर्णसंकर मटर पर प्रयोग कर पाया कि शुद्ध बड़ी मटर- 25 परसेंट,,, बड़ी वर्णसंकर मटर -50 परसेंट और शुद्ध छोटी मटर -25 परसेंट आया

            बड़ी मटर➕छोटी मटर

                         ⬇️

                  वर्णसंकर मटर

                          ⬇️

     ⬇️               ⬇️            ⬇️  

शुद्ध बड़ी       बड़ी संकर        शुद्ध छोटी      

मटर50%      मटर50%     मटर50% 

  ⬇️                  ⬇️              ⬇️

शुद्ध बड़ी    बड़ीवर्णसंकर       शुद्ध छोटी

मटर 25%    मटर 50%    मटर25%

🖤मटर के प्रयोग के बाद  मेंडल ने चूहे पर प्रयोग किया उन्होंने एक काले चूहे और एक सफेद चूहे पर अपना प्रयोग किया उन्होंने पाया कि जब एक काला चूहा और एक का सफेद चूहे के  बीच क्रॉस कराया गया तो प्रथम पीढ़ी में सारे काले बच्चे पैदा हुए फिर उन काले  बच्चों में प्रयोग कराया गया तो सेकेंड पीढ़ी में एक सफेद बच्चा और बाकी सभी काले बच्चे पैदा हुए ,फिर उन  सफेद और काले बच्चों में प्रयोग कराया गया तो कुछ काले कुछ सफेद बच्चे पैदा हुए| 

              🐀➕🐁

                  ⬇️

🐀     🐀        🐀        🐁

                  ✖️

⬇️      ⬇️        ⬇️        ⬇️

🐀      🐀        🐀        🐁

⬇️                 ✖️               ⬇️

🐀                                     🐁

⬇️       ⬇️        ⬇️            ⬇️

🐀       🐀        🐀            🐁

बीएन झा  के अनुसार 

जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पित् या मात्  उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं तब वह प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं

मेंडल ने जो प्रयोग किए उनसे प्राप्त कर से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग किया              

     *Notes by malti sahu*

          🖊️ *Thanku* 🖊️

🌸🔅अर्जित गुणों के  संक्रमण का नियम🔅🌸

🔅इस नियम में जो गुण माता-पिता अपने जीवन काल में अर्जित करते हैं वह गुण  संतान में उत्पन्न नहीं होते हैं

🔅 इस नियम को स्वीकार करते हुए विकासवादी लैमार्क कहते हैं ➖️कि व्यक्ति अपने जीवन काल में गुण के अलावा जो भी अर्जित करते हैं वह है उनके द्वारा उत्पन्न किए गए संतानों को संक्रमित किया जाता है

✏️इसका उदाहरण बताते हुए लैमार्क कहते हैं ➖️की जिराफ की गर्दन पहले घोड़े के समान थी वह पेड़ की पत्तियां खाते-खाते उसकी गर्दन लंबी हो गई जरा आप अपनी गर्दन को ऊपर की ओर खींच कर पेड़ की पत्तियां खाता तो जेवर आपकी गर्दन लंबी हो गई इस लंबी गर्दन का गुण पीढ़ी दर पीढ़ी चलता गया जिराफ की गर्दन लंबी होने से उनकी जो भी बच्चे पैदा हुए उनकी गर्दन भी लंबी हो गई यह प्रक्रिया पीढ़ी दर पीढ़ी चलती गई

लेमार्क के कथन की पुष्टि करते हुए ⚜️मेडयुगल और ⚜️पावलाव में➖️ चूहे पर और ⚜️हैरिसन ➖️ने पतंग पर परीक्षण करके किया है

लेकिन ✏️वुडवर्ड ➖️ने इसको सही नहीं माना है वह कहते हैं कि आज के युग में विकासवादी या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है

 वंशानुक्रम के प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से उत्पन्न होने पर यह बात प्रायः असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुण को संक्रमित किया जा सके यदि आप कोई भाषा बोलना सीख लेते है तो क्या आप जीन माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते हैं इस प्रकार के किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है

🔅✏️मेंडल का वंशानुक्रम पर नियम➖️

 मेंडल ने मटर पर परीक्षण किया और यह सिद्धांत का 🔅प्रतिपादन ➖️ मेंडल  ने दिया उन्होंने दो प्रकार के मटर लिए छोटे मटर और बड़े मटर इन दोनों को अलग-अलग बोया तो छोटे मटर से छोटी और बड़े मटर से बड़ी मटर पैदा हुई

लेकिन जब उन्होंने छोटी मटर और बड़ी मटर दोनों को मिलाकर एक साथ हो या तो दोनों ही प्रकार के मटर पैदा हुई आता छोटे पन का गुणसूत्र रह गया और बड़े पन का गुण व्याप्त हो गया मटर समान प्रकार में पैदा हुई इस प्रक्रिया को कई बार दोहराया और अंत में मेंडल को वर्णसंकर  के बजाय शुद्ध मटर प्राप्त हुई

उन्होंने मटर जैसे चूहों🐀🐁 पर प्रयोग किया उन्होंने दो प्रकार के चूहे ले काला 🐀और दूसरा सफेद 🐁और दोनों को एक साथ रखा जो चूहे उत्पन्न हुई वह काले🐀🐀 थे फिर उसने वर्णसंकर काले 🐀चूहे को एक साथ रखा इससे उत्पन्न चूहे सफेद🐁 और काले 🐀दोनों प्रकार के हुए इससे यह पता चलता है कि एक काले 🐀चूहे और सफेद 🐁चूहे से उत्पन्न चूहा सफेद🐁 भी हो सकता है और काले भी हो सकता है किसी भी प्रकार के चूहे हो सकते हैं सफेद🐁 या काले🐀 दोनों में से दोनों रंग में से कोई भी रंग हो सकता है

🔅✏️बीएन झा के अनुसार➖️ जयशंकर अपने स्वयं के माता-पिता उत्पादक कोषों का निर्माण करता है तो वह मुख्य गुणों से युक्त माता पिता के समान सरकार को जन्म देता है

🔅मेंडल ने जो प्रयोग की  उससे प्राप्त निष्कर्षों से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला

Notes by sapna yadav

🔆 वंशानुक्रम के सिद्धांत➖

1) बीजकोष की निरंतरता का सिद्धांत 

2)समानता का सिद्धांत 

3) विभिन्नता का नियम

4) प्रत्यागमन का नियम 

5) अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम

6) मेंडल का नियम

🎯 अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम➖

इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए  किए जाने वाले गुण उनके संतान को प्राप्त नहीं होते हैं |

          इस नियम को अस्वीकार करते हुए   “विकासवादी लैमार्क”    कहते हैं कि व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित किया जाता है |

 इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा कि जिराफ की गर्दन पहले घोड़े की गर्दन के समान थी पेड़ से पत्ते खाने के लिए जिराफ़ ने अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचा तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गई |

कालांतर में उनकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित होता गया |

                   लैमार्क के  इस कथन की पुष्टि मेक्डूगल और पावलव ने चूहों पर एवं हैरिसन ने पतंगों पर परीक्षण करके किया |

 आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है |      क्योंकि 

वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से संपन्न होने पर यह बात प्रायः असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके इस प्रकार के किसी भी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है  |

🎯 मेंडल का नियम➖

मेंडल ने अपने बगीचे में बड़े और छोटी मटर बराबर संख्या या मात्रा में लगाई  जिसमें उगने वाले मटर वर्णसंकर मटर थे |

 इस प्रकार अलग-अलग प्रकार के  मटर पाए गए उन्होंने मटर को फिर बोया और फिर अलग-अलग प्रकार की मटर पाया और यह प्रक्रिया बार-बार करने के दौरान उन्होंने पाया कि जो मटर है वह वर्णसंकर ना होकर शुद्ध मटर के रूप में था गोल और सफेद थे |

और  यह प्रयोग उन्होंने चूहों पर भी किया जिसमें उन्होंने सफेद और काले चूहों को एक साथ रखा जिसमें जो  भी चूहे  हुए वह काले हुए और फिर उन्होंने वर्णसंकर चूहों को एक साथ रखा जिसमें उन्होंने उनसे होने वाले काले चूहों को एक साथ रखा जिससे उन से होने वाले चूहे काले और सफेद भी थे |

  जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौलिकता में जो विशेष गुण होते हैं  वह पूर्वजों से प्राप्त होते हैं |

इसी संदर्भ में  बी.एन. झा.➖

                         ने कहा कि “जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पितृ या मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं तो वे प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं  | 

मेंडल ने  जो प्रयोग किए उनसे प्राप्त निष्कर्ष से वंशानुक्रम  तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला  | 

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

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🥀🥀  अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत🥀🥀

🗣️इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में आयोजित किए जाने वाले गुण के संतान को प्राप्त नहीं होते हैं।

✋इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी के लैमार्क जी कहते हैं कि”व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है।

इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा कि “पुराने समय में जिराफ की गर्दन घोड़े के गर्दन के समान ही होती थी किंतु पेड़ से पत्तियां खाने के लिए जिराफ ने अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ उठाया और इस क्रिया को निरंतर करने के कारण उसकी गर्दन पीढ़ी दर पीढ़ी लंबी होती चली गई और कालांतर में उसकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित हुआ।

🗣️लैमार्क के इस कथन की पुष्टि मैक्डूगल वा पावलाव ने चूहों पर एवं हैरिसन ने कीट -पतंगों पर परीक्षण करके किया है।

🙄आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है।

🌻🏵️वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से संपन्न होने पर यह बात पर आया असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सकता है,यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले तो क्या आप जिनके माध्यम से बच्चों में उस भाषा को संक्रमित कर सकते हैं, इस प्रकार के संक्रमण की किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है।

      🕵️मेंडलवाद का नियम🕵️

    (Mendelism Theory)

   (प्रयोग वर्ष÷1856-1863)

👩‍🎓मेंडल का पूरा नाम÷ग्रेगर जॉन रे मेंडल

🍒प्रयोग÷उद्यान मटर (Garden pea)scinitific name-Pisium sativum(pea)

🏵️🌻ग्रेगर जॉन मेंडल ने अपने बगीचे में मीठी मटर के बड़े और छोटे दानों को आपस में मिलाकर अपने उद्यान में बो दिए, उगने वाली मटर में सब वर्णसंकर जाति की मटर थी वह पहली पीढ़ी की थी  (Filial generation-1)(F1 -generation)

🌻🏵️मेंडल ने इन वर्णसंकर मटरो को फिर से बोया, प्राप्त वर्णसंकर मटरे  दूसरी पीढ़ी अर्थात (F2 -Generation)की थी ,इसी तरह उसने अलग-अलग पीढ़ीयों के गुणों का पता लगाने के लिए वर्णसंकर मटरो को बार-बार बोया और फिर अंतिम में प्राप्त हुई मटर बिल्कुल शुद्ध  प्रकार की थी, ना ही छोटी थी ना ही अत्यधिक बढी ना ही झुर्रीदार ना ही सूखी।

🌻🏵️इसी प्रकार मेंडल ने चूहों पर भी अपना प्रयोग किया

उसने अपने चूहों के प्रयोग के लिए सफेद एवं काले चूहो को चुना और इन चूहों को एक साथ रखा जिससे प्राप्त होने वाले  पहली पीढ़ी (F1 -generation)के सभी चूहे पूर्णता वर्णसंकर काले थे;

🌻🏵️फिर उसने इन चूहों को एक साथ रखा तो इससे प्राप्त होने वाले कुछ चूहे काले एवं कुछ सफ़ेद थे दूसरी पीढ़ी (F2 -Generation); प्राप्त इन काले एवं सफेद चूहों में से काले चूहों को काले के साथ ,एवं सफेद चूहों को सफेद के साथ रखने पर सफेद चूहों में से सिर्फ सफेद रंग के चूहे की निकले किंतु काले चूहो में से काले चूहे एवं सफेद दोनों की वर्णशंकर जाति रंग के चूहे  निकले;

इससे उन्होंने अपने मेंडल वाद नियम का प्रतिपादन किया और उसने कहा कि अगर हम मौलिकता (विशिष्ट गुण)की बात करें तो गुण एक पीढ़ी से दूरी दूसरी पीढ़ी हस्तांतरित होते रहते हैं किंतु उनका प्रभाव सभी पीढ़ी में समान नहीं रहता।

🗣️बी एन झा के अनुसार÷जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पित्र या मात्र उत्पादक कोशो का निर्माण करते हैं,तब वह प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं।

🗣️मंडल ने जो प्रयोग किए,उनके प्राप्त निष्कर्ष से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला।

written by-shikhar

अनुवांशिकता एवं वातावरण

 अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम:– इस नियम के अनुसार माता-पिता के द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनकी संतान को प्राप्त नहीं होते हैं

इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी लैमार्क कहते हैं कि👉” व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है उनके द्वारा उत्पन्न में किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित किया जाता है”

इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा है कि जिराफ की गर्दन पहले घोड़े के समान थी पेड़ से पत्ते खाने के लिए फिर आपने अपनी गर्दन के ऊपर की तरफ खींचा तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गई कालांतर में उसकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित हुआ

लैमार्क के इस कथन की पुष्टि  maikdugal और  पावलव  ने चूहों पर एवं हैरिसन ने पतंगों (कीट पतंगों )पर परीक्षण करके किया

” आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता”

” वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने अनुवांशिक ज्ञान से संपन्न होने से यह बात पर यह असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले तो क्या  आप जीन के माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते हैं इस प्रकार के किसी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है”

 मेंडल का नियम🍃🍃

मेंडल ने मटर पर प्रयोग किया है

मेंटल में शुद्ध बड़ी मटर एवं शुद्ध छोटे मटर को एक साथ बराबर संख्या में बोया तो उनमें से वर्णसंकर मटर उत्पन्न हुए जब इन्होंने वर्णसंकर मटर को बोया तो उसमें से 25% शुद्ध बड़ी मटर 25% शुद्ध छोटी मटर एवं 50% बड़ी वर्णसंकर मटर उत्पन्न हुई

इस प्रकार से मेंडल ने निष्कर्ष निकाला कि प्रकृति अपने शुद्ध लक्षणों के साथ संतान पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करती है इस सिद्धांत को अनुवांशिकता के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है और इस सिद्धांत को मंडेलिज्म  के नाम से जाना जाता है

इसी प्रकार मेंडल ने चूहों पर भी प्रयोग किया

पहले इन्होंने दो प्रकार के काले और सफेद चूहों को एक साथ रखा उसमें उन्होंने देखा कि काले चूहे प्राप्त हुए फिर उन्होंने सिर्फ काले काले  चूहों को साथ में रखा तो उनसे उन्होंने देखा कि सफेद और काले दोनों प्रकार के चूहे प्राप्त हुए

इससे हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि संतान में जो गुण आते हैं वह उनके माता-पिता से ही नहीं बल्कि उनके पूर्वजों से भी प्राप्त होते हैं

 बीएन झा के अनुसार:- जब   वर्णसंकर  अपने स्वयं के  पितृ या मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं तब वह प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं

मेंडल जो प्रयोग किए उनसे प्राप्त निष्कर्षों से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग करता है

सपना साहू 

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वंशानुक्रम के सिद्धांत

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15 march  2021

🌻 5.  अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम  :-

इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए जाने वाले गुण उनकी संतान को प्राप्त नहीं होते हैं।

                        🍁 इस नियम को अस्वीकार करते हुए   “विकासवादी लैमार्क ”  कहते हैं कि  :-

व्यक्तियों द्वारा अपने जीवनकाल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है।

अतः इसका उदाहरण देते हुए ” लैमार्क ” ने कहा है कि –

👉👉 ” जिराफ की गर्दन पहले घोड़े के समान थी पर ,  पेड़ों से पत्तियां खाने के लिए जिराफ ने अपनी अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचा / उठाया तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गई तथा कालांतर में उनकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित होता चला गया। “

🌿🌿 लैमार्क के इस कथन की पुष्टि –

👉 मैक्डुगल  और पावलव  ने   :-   चूहों पर 

👉 तथा हैरिसन ने                  :-    पतंगों( कीट )

पर परीक्षण करके की है।

🌺  वुडवर्थ  के अनुसार  :-

आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता है।

     वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से संपन्न होने पर यह बात प्रायः असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके।

यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले तो क्या आप gene पित्रैक के  माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते हैं –  

[ बिल्कुल भी नहीं ]

अतः इस प्रकार के किसी भी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है।

🌻  6. मेंडलवाद  का नियम   :-

पूरा नाम :- ग्रेगर जॉन मेंडल 

इस नियम के प्रयोग करने का वर्ष है :- 1856 – 1863

प्रयोग किया  :- मटर पर

👉 मेंडल ने अपने बगीचे में शुद्ध बड़ी मटर और शुद्ध छोटी मटर के बीजों को मिलाकर सर्वप्रथम  एक साथ बोया जिससे वर्णसंकर मटर की प्रजाति उत्तपन्न हुयी ।

 👉 इसके बाद वर्णसंकर मटर को बार – बार बोया तो उससे 

👉 25% शुद्ध बड़ी मटर

👉 25% शुद्ध छोटी मटर 

👉 तथा 50% वर्णसंकर मटर

की प्रजाति की पैदावार हुई और ।

🌿🌿🌿 इसी प्रकार से मेंडल ने चूहों पर अपना प्रयोग किया  :-

👉 सबसे पहले मेंडल ने एक काले और एक सफेद चूहों को एक साथ रखा ( क्रॉस करवाया ) जिससे होने बाली नयी प्रजाति काले रंग के चूहों की हुई।

👉 इसके बाद काले रंग के नए चूहों को क्रॉस करवाया जिससे कुछ काले रंग के चूहों के साथ सफेद रंग के चूहे भी पैदा हुए ।

👉 अब जो नये चूहे पैदा हुए उनमे से सफेद रंग के चूहों को क्रॉस करवाने पर सिर्फ सफेद

👉 और काले रंग के चूहों को क्रॉस करवाने पर सिर्फ काले 

👉 तथा कुछ अन्य काले रंग के चूहों को क्रॉस करवाने पर काले और सफेद दोनों रंगों के चूहों का जन्म हुआ । 

🌹🌹अंततः मेंडल के प्रयोग से निष्कर्ष निकलता है कि नई पीढ़ी की मौलिकता में सिर्फ उनके माता पिता के गुण ही नहीं बल्कि उनके पूर्वजों के भी गुण, gene आते हैं।

🌻  इसी संदर्भ में  B . N . झाँ  ने कहा है कि  –

 जब वर्णसंकर अपने स्वयं के पितृ या मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं तो वे प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं।

        अतः मेंडल ने जो प्रयोग किए उनसे प्राप्त निष्कर्षों से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला है।

✍️Notes by – जूही श्रीवास्तव✍️

DATE   15/03/2021

 🌵अनुवांशिकता एवं वातावरण🌵

🙏समानता का नियय

🙏विभिन्नता का नियम

🙏 भिन्नता का नियम

🙏प्रत्यागमन का नियम

          Today class….

🙏अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम:– 

🐒इस नियम के अनुसार माता-पिता के द्वारा अपने जीवन काल में अर्जित किए जाने वाले  गुण उनकी संतान को प्राप्त नहीं होते हैं

🌲इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी:– लैमार्क कहते हैं कि:–

” व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है उनके द्वारा उत्पन्न में किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है”

🐒इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा है कि :–

🦕 जिराफ की गर्दन पहले घोड़े के समान थी । पेड़ से पत्ते खाने के लिए जिराफ ने अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचा तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गई । कालांतर में उसकी लंबी गर्दन का गुण अगली पीढ़ी में संक्रमित हुआ ।

🐒लैमार्क:– के इस कथन की पुष्टि  मैक्डूगल और पावलव  ने चूहों पर एवं हैरिसन ने पतंगों (कीट पतंगों )पर परीक्षण करके किया ।

🌵वुडवर्थ ने इस पर कहा वंशानुक्रम की प्रकिया मे अपने आधुनिक ज्ञान से सम्पन्न होने पर यह बात प्रायः असम्भव जान परती है की अर्जित गणों को संक्रमित किया जा सके।

🤔अर्थात यदि आप कोई भाषा बोलना सिख ले तो क्या आपके (Jean)के द्वारा इस भाषा का ज्ञान बच्चों मे चला जाता है। तो इस प्रकार से किसी प्रमाण के पुस्ठी नही हुई 

🌵” आज के युग में विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जाता”

🦠 वंशानुक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक  ज्ञान से संपन्न होने से यह बात पर यह असंभव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके यदि आप कोई भाषा बोलना सीख ले तो क्या  आप जीन के माध्यम से बच्चों में संक्रमित कर सकते हैं इस प्रकार के किसी प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है”

 🌵मेंडल का नियम

इस नियम के अनुसार :— जो भी अलग-अलग प्रकार के जीव-जन्तु है उनका सबका अपना विकास का नियम होता है उन्होने अपने बगीचे मे बड़ी और छोटी मटर बराबर संख्या में मिलाकर वोया। उगने वाला जो मटर था सब वर्ण संकर जाति (अलग-अलग तरह के मटर उगे) मैन्ड़ल ने इसको फिर से वोया इस प्रकार उन्होने कई बार वोया एसे मे अंत में उन्होने देखा वर्णसंकर मटर नही थे सारे मटर शुद्ध मटर था 

इस प्रकार से मेंडल ने निष्कर्ष निकाला कि प्रकृति अपने शुद्ध लक्षणों के साथ संतान पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करती है इस सिद्धांत को अनुवांशिकता के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है और इस सिद्धांत को मंडेलिज्म  के नाम से जाना जाता है

🐀🐁इसी प्रकार मेंडल:– ने चूहों पर भी प्रयोग किया

पहले इन्होंने दो प्रकार के काले और सफेद चूहों को एक साथ रखा उसमें उन्होंने देखा कि काले चूहे प्राप्त हुए फिर उन्होंने सिर्फ काले काले  चूहों को साथ में रखा तो उनसे उन्होंने देखा कि सफेद और काले दोनों प्रकार के चूहे उत्पन्न हुए ।

इससे हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि संतान में जो गुण आते हैं वह उनके माता-पिता से ही नहीं बल्कि उनके पूर्वजों से भी स्थानांतरण होते रहते हैं वे दिखे जिस भी जेनरेसंन में।

🐧 बीएन झा के अनुसार:- जब   वर्णसंकर  अपने स्वयं के  पितृ या मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं, तब वह प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं

मेंडल जो प्रयोग किए उनसे प्राप्त निष्कर्षों से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में सहयोग मिला है

🦓🦓🦓🦓🦓🦓🦓🦓🦓

Notes by:– संगीता भारती 🙏🙏

               Thank you

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 वंशानक्रम के नियम―

🌴अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम― 

 💐 इस नियम के अनुसार,” माता पिता द्वारा अपने जीवन काल मे अर्जित किये जाने वाले गुण उनके संतान को प्राप्त नही होते हैं।”

       🦚  इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकास वादी लैमार्क कहते हैं कि,

        ” व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन काल मे जो भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले व्यक्तियों को संक्रमित करता है।

👉इसका उदाहरण देते हुए लैमार्क ने कहा है कि गर्दन पहले घोड़े के समान थी। पेड़ के पत्ते खाने के लिए जिराफ ने अपने गर्दन को ऊपर की तरफ खिंचा तो इस विशेष परिस्थिति के कारण उनकी गर्दन लंबी होती चली गयी । कालांतर में उनकी लंबी गर्दन के गुण उनकी अगली पीढ़ी में संक्रमित हो गया।

       👉लैमार्क के इस नियम की पुष्टि मैकडुगल और पावलव ने चूहों पर एवं हैरिसन ने पतंग पर परीक्षण करके किया ।

🌼🦚वुडवर्थ के अनुसार―

      🌈आज के युग मे विकासवाद या अर्जित गुणों के संक्रमण के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया जाता है।

  🌻💫वंशानक्रम की प्रक्रिया के अपने आधुनिक ज्ञान से सम्पन्न होने पर यह बात प्रायः असम्भव जान पड़ती है कि अर्जित गुणों को संक्रमित किया जा सके। यदि आप भाषा को बोलना सीख ले तो क्या जीन के माध्यम से यह बच्चो में संक्रमित कर सकता है।  ( बिल्कुल भी नही)

💐 इस प्रकार किसी प्रमाण की पुष्टि नही हुई है।

👨‍✈️मेंडल के नियम―  ग्रेगर जॉन मेंडल ने अपना प्रयोग मटर पर किया था। इस प्रयोग में इन्होंने मटर के कुछ बड़े तथा कुछ छोटे पौधों के बीजों को बोया । उससे प्राप्त होने वाली वर्णसंकर मटर प्राप्त हुए । उसके बाद उन्होंने ने बार बार मटर की वर्णसंकर बीजो को बोया । जिसमे उन्हें  शुद्ध बड़ी मटर 25%, शुद्ध छोटी मटर25%,  और वर्णसंकर 50% प्राप्त हुई। 

👨‍✈️🌻 इसी प्रकार मेंडल ने चूहों 🐀पर भी प्रयोग किया । इस प्रयोग में इन्होंने कुछ सफेद तथा कुछ काले चूहों को एक साथ रखा । जिससे इनसे प्राप्त होने वाली नई प्रजाति में सिर्फ काले चूहे ही हुए उसके बाद इन्होंने इन काले चूहों को एक साथ रखा । और उससे प्राप्त नई पीढ़ी में काले तथा सफेद रंग के चूहे प्राप्त हुए। 

 अतः मेंडल के इस प्रयोग से निष्कर्ष निकलता है।कि नई पीढ़ी की मौलिकता केवल माता पिता की ही नही बल्कि पूर्वजो के भी जीन्स होते हैं।

👨🏼‍💼 बी.एन. झा के अनुसार― जब वर्ण संकर स्वयं के पितृ तथा मातृ उत्पादक कोषों का निर्माण करते हैं तो वे प्रमुख गुणों से युक्त माता पिता के समान शुद्ध प्रकार को जन्म देते हैं।

🌴🌻 मेंडल ने जो प्रयोग किये उनसे प्राप्त निष्कर्ष से वंशानुक्रम तथा वातावरण के प्रभाव को अध्ययन में बहुत सहयोग मिला ।

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Notes by Poonam sharma🌻🌻

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