🔆 बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक ➖

❇️ 1 पोषण :-

▪️गर्भ से जीवन पर्यंत तक स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को संतुलित पौष्टिक आहार अर्थात प्रोटीन ,वसा ,कार्बोहाइड्रेट ,लवण,खनिज, विटामिन युक्त भोजन शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक होता है।

▪️पोषण का अर्थ है ऐसा आहार जिसे शरीर की भोजन संबंधी आवश्यकताओं के संदर्भ में उपयुक्त समझा जाता है। बेहतर पोषण तथा सन्तुलित आहार ही बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास में

महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

▪️बच्चों की पोषण  संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी आवश्यक है। प्रोटीन भोजन में विद्यमान और शरीर निर्माण के अवयव हैं।

▪️बालक के सामान्य विकास के लिए उपयुक्त पालन पोषण तथा पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। प्राय: कई परिवारों में सामान्य रूप से बच्चों के भोजन पर ध्यान नहीं दिया जाता कि उसमें स्वास्थ्य के लिए आवश्यक चीजें हैं या नहीं।

शारीरिक विकास के लिए आयोडीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम विटामिन आदि बहुत आवश्यक होते हैं जिनके अभाव में बच्चे अस्वस्थ हो जाते हैं।

इन सभी के अभाव से बच्चे का विकास रुक जाता है

तथा किसी विशेष प्रकार का विकासात्मक परिवर्तन नहीं हो पाता। बाल अवस्था में उचित पौष्टिक आहार प्राप्त होने के फल स्वरूप व्यक्तित्व विकास भी सामान्य रूप से होता है।

❇️ 2 बुद्धि :- 

▪️बुद्धि व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की बातों को सीखने में सहायता प्रदान करती है। मनुष्य की बुद्धि पर उसके आस-पास के वातावरण का अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रभाव पड़ता है। बुद्धि पर वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है ।

▪️किसी तीव्र या कुशाग्र बुद्धि वाले बालक का विकास मंदबुद्धि वाले बालक की अपेक्षा तीव्र गति से होता है।

* टर्मन के अनुसार – बहुत प्रखर बुद्धि वाले बालक में चलने की जो प्रक्रिया है वह 13 महीने आती है तथा बोलने की क्षमता 11 महीने में आती है।

जबकि दुर्बल या मंद बुद्धि वाले बालकों में चलने की प्रक्रिया 30 महीने के बाद भी होती है तथा बोलने की क्षमता 15 महीने तक आती है।

❇️ 3 यौन विकास :- 

▪️यौन विकास केवल शारीरिक विकास को ही नहीं वरन यह हमारे मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है।

▪️जन्म के समय या उसके कुछ दिन बाद लड़कों की लंबाई लड़की की अपेक्षा ज्यादा होती है ।

लेकिन बाद की अवस्थाओं में लड़कियों की लंबाई लड़कों की अपेक्षा अधिक होती है।

लंबाई के साथ-साथ लड़कियों में शारीरिक परिपक्वता, काम शक्ति, मानसिक परिपक्वता भी लड़कों की तुलना में जल्दी विकसित होती है।

▪️कई बुद्धि परीक्षण में भी यह देखा गया है की लड़कियां, लड़कों की तुलना में मानसिक रूप से पूर्व या पहले ही परिपक्व हो जाती है।

❇️ 4 अंतः स्त्रावी ग्रंथियां:- 

▪️मानव शरीर के अंदर कुछ ऐसी अंतः स्त्रावी ग्रंथियां पाई जाती हैं  जिनका स्त्रावण शारीरिक व मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

▪️अंतःस्रावी प्रणाली हमारे शरीर की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी मदद करता है। हमारे शरीर में उपस्थित अंतःस्रावी ग्रंथियां हैं– पीनियल ग्रंथी, हाइपोथैलमस ग्रंथी, पिट्यूटरी ग्रंथी, थायराइड ग्रंथी, पाराथायराइड ग्रंथी, थाइमस, अग्न्याशय, अधिवृक्क ग्रंथी, वृषण और अंडाशय। अंतःस्रावी ग्रंथियों की कार्यप्रणाली को तंत्रिका तंत्र नियंत्रित करता है।

▪️अर्थात शरीर की क्रियाशीलता या हमारा जो शारीरिक व मानसिक विकास है उनमें ग्रंथियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

▪️जैसे – गोंनड ग्रंथि 

यदि कम क्रियाशील है तो किशोरावस्था आने में बिलंभ या देरी होती है।

और यदि यह गोंनड ग्रंथि अधिक क्रियाशील हुई तो यौन परिपक्वता जल्दी आ जाती है।

▪️इसी प्रकार पिनियल ग्रंथि 

यदि अधिक क्रियाशील है तो बच्चे की उम्र बढ़ने पर भी उसमे बचपन के लक्षण लंबे समय तक दिखाई देते हैं।

▪️इसी प्रकार थायराइड ग्रंथि 

अस्थियों के निर्माण में मदद करती है।

▪️हार्मोनों की अधिकता या कमी का हमारे शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

❇️ 5 प्रजाति :- 

▪️गर्म जलवायु में रहने वाले बच्चे का शारीरिक विकास ठंडे जलवायु में रहने वाले बच्चों की अपेक्षा शीघ्र होता है । नीग्रो बच्चे स्वेत बच्चो की अपेक्षा 80% अधिक परिपक्व होते है

▪️यह प्रजाति के लोग दूसरी प्रजाति के लोगों से शारीरिक गठन वर्ण व आकृति इत्यादि इन सभी में एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

▪️प्रजाति केवल शारीरिक विकास को ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी प्रभावित करती है।

▪️लेकिन हरलॉक ने इस मत को नहीं माना है।

❇️ 6 रोग व चोट :- 

▪️ गर्भ काल या जन्म के बाद या इसके बाद के किसी भी अवस्था में अर्थात गर्भ से जीवन पर्यंत बच्चे को किसी भी कारणवश किसी चोट या रोग से ग्रसित हो जाता है तो उसका दुष्प्रभाव बच्चे पर दिखाई पड़ता है।

▪️अर्थात यदि कभी कोई बच्चा बचपन में या घर में या किसी भी अवस्था में किसी गंभीर बीमारी या उसे आघात है तो यह निश्चित ही बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।

❇️ 7 परिवार :- 

▪️परिवार का वातावरण विकास की प्रकिया पर बहुत ज्यादा प्रभाव डालता है, यह प्रभाव सकारात्मक या नकारात्मक किसी भी प्रकार का हो सकता है जो कि परिवार के वातावरण पर निर्भर करता है।

▪️जैसे परिवार के लोगों का रहन सहन ,खाना-पीना, माता-पिता का आपसी संबंध, परिवार में बालक की स्थिति ,परिवार का आकार, बच्चों की देखभाल परिवार का आंतरिक वातावरण या माहौल यह सभी बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं।

▪️कुछ परिवारों में लड़कों को लड़कियों में अंतर करना या उन में भेदभाव करना वह तनाव युक्त परिवार  का वातावरण यह सब भी बालक के विकास को प्रभावित करता है।

▪️बच्चा जिस पारिवारिक वातावरण में रहता है वह स्वत: ही उस अनुसार बर्ताव या व्यवहार करने लगता है या वैसे ही पारिवारिक वातावरण में ढल जाता है या उसमें सीखने लगता है उससे समायोजित होने लगता है इसीलिए परिवार के सकारात्मक या नकारात्मक वातावरण का प्रभाव बच्चों पर आसानी से देखा जा सकता है।

❇️ 8 विद्यालय :- 

▪️विद्यालय की भूमिका बच्चों के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण व संवेदनशील है बच्चा उत्तर बाल्यावस्था के बाद समाज के संपर्क में आता है और यही बच्चों का यही समाज विद्यालय कहलाता है।

▪️विद्यालय में बच्चों को परिपक्वता के साथ शिक्षा मिलती है महाविद्यालय वातावरण से व्यवहार व ज्ञान को सीखता है जिससे बच्चे का बहुमुखी विकास होता है।

▪️विद्यालय की व्यवस्था और विद्यालय की गतिविधियां विद्यार्थियों के विकास पर नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रभाव डालती हैं।

✍🏻 

  Notes By-‘Vaishali Mishra’

♻️बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक♻️♻️

🎉बाल विकास को प्रभावित करने वाला कारक निम्नलिखित हैं➖

1- पोषण

2- वृद्धि

 3-योन 

विकास 

4-अंतः स्त्रावी ग्रंथियां

5- प्रजाति

6- रोग और चोट

7- परिवार

8- विद्यालय 

🎄 पोषण- बालक के लिए बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक में पोषण का विशेष महत्व होता है  जीवन पर बालक के जीवन काल में गर्व से लेकर जीवन  अंत तक पोषण की आवश्यकता होती है पोषण के बिना विकास संभव नहीं है शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पोषण जरूरी है इसके लिए संतुलित पोषण आहार में प्रोटीन वसा कार्बोहाइड्रेट खनिज लवण विटामिंस की जरूरत होती है इसमें मानसिक और शारीरिक विकास में सहायता मिलती है

🎄2- वृद्धि ➖टर्मन के अनुसार तीव्र बुद्धि के माता-पिता की संतान तीव्र बुद्धि तथा मंद बुद्धि के माता-पिता की संतान मंदबुद्धि होती है यह जरूरी नहीं है

बालक के विकास में बुद्धि जरूरी कारक  है बालक की बुद्धि तीव्र होती है तो बालक का विकास भी तीव्र गति से होता है मंदबुद्धि वाले बालक का विकास मंद गति से होते हैं बहुत प्रखर बुद्धि वाले बालक की चलने की प्रक्रिया 13 माह में होती है और बोलने की क्षमता 11 माह से चालू हो जाती है और मंदबुद्धि या दुर्बल बुद्धि वाले बालक की चलने की क्षमता30 माह में होती है और बोलने की क्षमता उसकी 11 माह से चालू होती है

🎄3-योन विकास➖ योन विकास में लड़के और लड़कियों के शारीरिक और मानसिक विकास होता है जन्म से ही लड़का और लड़कियों का विकास अलग-अलग तरीके से होता है उनकी लंबाई और वजन  परिवर्तन होता है जन्म के समय लड़कियों के वजन लड़कों से वजन और भार और आकार ज्यादा होता है धीरे-धीरे आगे बढ़ने के साथ-साथ और बढ़ता जाता है 10 से 11 वर्ष में लड़कियों  मानसिक विकास शारीरिक और मानसिक विकास लड़कों से ज्यादा होता है और ज्यादा परिपक्व भी जल्दी हो जाती हैं काम शक्ति की भावना लड़कों से ज्यादा 2 वर्ष पहले ही विकसित हो जाती है

बुद्धि परीक्षण लड़कियों का ज्यादा लड़कों का कम होता है लड़कियां पहले परिपक्व हो जाती है

🎄4अंतः स्त्रावी ग्रंथियां ➖अंतः स्रावी ग्रंथियां का विकास को प्रभावित करने वाले कारकों में से एक कारक है इसमें अनेक प्रकार की ग्रंथियां होती है जिसका विकास पर प्रभाव पड़ता है

 Gonadग्रंथि➖ इसgonad ग्रंथि -द्वारा क्रियाशीलता में कमी से किशोरावस्था में विलंब हो जाता है और देरी से किशोर अवस्था होती है और इससे ग्रंथि में क्रियाशीलता में अधिकता होने से  परिपक्वता जल्दी विकसित हो जाती है

 पैराथाहाइट ग्रंथि ➖इस ग्रंथि में अस्थियों के निर्माण में मदद मिलती है यह ग्रंथि विकसित नहीं होगी तो अस्थियों का निर्माण सही तरीके से नहीं हो पाएगा

 Thimiyasग्रंथि➖ यह ग्रंथि अगर  क्रियाशील अधिक होती है तो इसमें समस्या हो जाती है इससे मानव में बचपन के लक्षण होने लगते हैं व्यस्त आदमी बचपन के जैसा व्यवहार करने लगता है यह ग्रंथि अभिक्रियाशील होना सही नहीं है

🎄प्रजाति ➖एक प्रजाति के लोग दूसरी प्रजाति के लोगों से शारीरिक गठन वर्ण और आकृति में भिन्न होते हैं शारीरिक ही नहीं इससे मानसिक विकास भी प्रभावित होता है शारीरिक और मानसिक विकास दोनों पर ही प्रजाति का प्रभाव पड़ता है 

हरलॉक➖ अपने इस मत को नहीं माना है

🎄रोग और चोट➖ गर्व से जीवन प्रयत्न के बीच या गर्भाधान से लेकर  बचपन में गंभीर बीमारी हो जाने पर या घर चोट लगने पर बाल विकास पर भी प्रभाव पड़ता है इससे उसके विकास और शारीरिक विकास भी रुक जाता है

🎄परिवार➖ परिवार से ही बालक का विकास सुचारू रूप से होता है इससे बालक के व्यवहार में परिवर्तन होता है आचार विचार परिवार का जैसा अचर विचार होगा बालक का भी वैसा ही आचरण विचार होता है माता-पिता का आपसी संबंध अच्छा होना चाहिए अगर इनके संबंध अच्छे नहीं होते हैं तो बालक का इस पर बुरा प्रभाव पड़ता है परिवार का आकार बच्चे की देखभाल बालक बालिकाओं में अंतर यह परिस्थिति घर परिवार में होती है तो इसका प्रभाव पड़ता  है

🎄 विद्यालय➖ विद्यालय द्वारा ही बालक का विकास सही तरीके से होता है विद्यालय का वातावरण कैसा रहेगा बालक भी उसी प्रकार से सीखता है बालक में परिपक्वता आना शिक्षा ग्रहण करना यह सब व्यवहार और ज्ञान सभी विद्यालय द्वारा ही होता है बालक का चहुमुखी विकास विद्यालय द्वारा ही होता है

बालक का प्रथम विकास परिवार द्वारा होता है और दूसरा विद्यालय द्वारा होता है

📝 notes by sapna yadav

*🌸बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक🌸*

*(factor affecting of child development)*

👉 बच्चे के शारीरिक,  मानसिक, सामाजिक, भाषाई, आदि विकास को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाले कारकों में कई प्रकार के कारक आते हैं, जिनसे बच्चे का विकास प्रभावित होता है। 

 बच्चे के विकास को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है-

*१. पोषण (nutrition) -*

गर्भावस्था से लेकर जीवन पर्यंत व्यक्ति को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। 

 लेकिन गर्भावस्था से किशोरावस्था के अंत तक संतुलित आहार की आवश्यकता बच्चे के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। क्योंकि इस समय बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास चरम पर होता है। 

 👉संतुलित आहार से तात्पर्य उम्र के अनुसार सही मात्रा में उचित खनिज पोषक तत्वों से भरपूर आहार से है। 

👉 संतुलित आहार में बच्चे को प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण, विटामिन आदि की उचित मात्रा उचित में आवश्यकता होती है जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है 

👉जन्म से किशोरावस्था तक का समय बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है जिसमें संतुलित आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

👉 बच्चे को संतुलित आहार ना दिया जाए जाए तो उसका मानसिक व शारीरिक विकास अवरुद्ध हो जाता है जिसके कारण कई बीमारियों का जन्म होता है। 

 जैसे – आयरन की कमी से एनीमिया नामक रोग। 

वसा की अधिकता से मोटापा आदि। 

👉 बच्चों के संतुलित आहार को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त 1995 से मिड डे मील ( मध्यान भोजन) योजना का आरंभ किया गया है। 

*२. बुद्धि ( intelligence) -*

बच्चे के विकास में बुद्धि का भी महत्वपूर्ण स्थान है।

तीव्र बुद्धि वाले बच्चे का विकास मंदबुद्धि वाले बच्चे की अपेक्षा हर क्षेत्र में अधिक होता है क्योंकि अधिक बुद्धि वाला बच्चा अपनी बुद्धि, शारीरिक व मानसिक विकास के लिए उपयोग करने में सक्षम होता है जबकि मंदबुद्धि बालक बुद्धि की कमी के कारण पीछे रह जाता है। 

*🌸 टर्मन के अनुसार* – ” प्रखर बुद्धि वाले बालक में चलने की प्रक्रिया 13 महीने में होती है और बोलने की क्षमता 11 माह में होती है, वही दुर्बल बुद्धि वाले बालक में चलने की प्रक्रिया 30 वे माह में होती है और बोलने की क्षमता 15 वे माह में होती है। “

*३. यौन विकास (sex development)* 

यौन बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास को बहुत प्रभावित करता है।

👉जन्म के कुछ दिनों तक यह विकास लड़कों में लड़कियों की अपेक्षा अधिक होता है। 

 👉10 -11 वर्ष में  लड़कियों की लंबाई, लड़कों की अपेक्षा अपेक्षा अधिक होती है। 

👉 शारीरिक परिपक्वता भी लड़कियों में लड़कों की अपेक्षा 1- 2 वर्ष पूर्व ही आ जाती है। 

👉 काम शक्ति भी लड़कियों में लड़कों की अपेक्षा 1- 2 वर्ष पूर्व आ जाती है। 

 अतः यौन सिर्फ शारीरिक विकास को ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी बहुत प्रभावित करता है। 

*४. अंतः स्त्रावी ग्रंथियां ( endocrine glands)-*

मानव शरीर में अनेक ग्रंथियां होती है जिनके सुचारू रूप से कार्य करने पर मानव का शारीरिक व मानसिक विकास भी सही ढंग से होता है। और अगर यह ग्रंथियां अतिसक्रिया या कम क्रियाशील हो तो मानव विकास में अधिकता या कमी हो जाती है। 

उदाहरण के लिए गोनड ग्रंथि की कम क्रियाशीलता से किशोरावस्था आने में विलंब होता है और अधिक क्रियाशीलता से यौन परिपक्वता जल्दी आती है। 

 पैराथायराइड ग्रंथि – यह ग्रंथि अस्थियों के निर्माण में मदद करती हैं। 

 पीनियल ग्रंथि – इस ग्रंथि की अति क्रियाशीलता से सामान्य विकास में पठार आ जाता है ऐसी स्थिति में बचपन के लक्षण बहुत दिनों तक बने रहते हैं।

अर्थात् ग्रंथियों स्त्रावन  का मानव विकास पर सीधा असर पड़ता है। 

*५. प्रजाति ( species) -*

एक प्रजाति के लोग दूसरी प्रजाति के लोगों से शारीरिक गठन, वर्ण और आकृति में भिन्न होते हैं।

शारीरिक ही नहीं इसमें मानसिक विकास भी प्रभावित होता है

लेकिन हरलॉक महोदय ने इस मत को नहीं माना है। 

*६. रोग और चोट ( disease and injury)-*

गर्भ और बचपन की गंभीर बीमारी या आघात, मानसिक तथा शारीरिक विकास को प्रभावित करता है। 

*७. परिवार ( family)-*

माता-पिता का आपसी संबंध, परिवार में बालक की स्थिति, परिवार का आकार, बच्चों के देखभाल, परिवार का आंतरिक वातावरण, बालक-बालिका में अंतर, परिवार का तनाव, आदि सारी चीजें बच्चे के विकास  को प्रभावित करती है। 

 क्योंकि बच्चे का मस्तिष्क इस समय ग्रहण करने के उच्च क्षमता पर होता है और बच्चा अनुकरण भी करता है। 

*८. विद्यालय ( school) -*

 बच्चा परिवार से निकलकर जब विद्यालय पहुंचता है तब उसका सामाजिक और नैतिक विकास तीव्र गति से होता है। 

विद्यालय में वह अनेक बच्चों से मिलता है जो व्यक्तिक भिन्नता वाले होते हैं और साथी-सहपाठी से अंत: क्रिया के दौरान अनेक नई चीजें जानता व समझता  जो उसके विकास को बहुत प्रभावित करते हैं।

विद्यालय में बच्चे को परिपक्वता के साथ शिक्षा मिलती है। 

बच्चा विद्यालय में व्यवहार व ज्ञान सीखता है वहां उसका चहुमुखी विकास होता है। 

Notes by Shivee Kumari

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

🔆 बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक ➖ 

1) पोषण

2) बुद्धि

3) यौन विकास

4) अतः स्त्रावी  ग्रंथियाँ

5) प्रजाति

6) रोग और चोट 

7) परिवार

8) विद्यालय

🎯 पोषण ➖

संतुलित पौष्टिक आहार जैसे प्रोटीन, वसा ,कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण, और विटामिन आदि की संतुलित मात्रा की आवश्यकता शरीर को बहुत अधिक  होती है |

     यदि भोजन संतुलित और पौष्टिक नहीं होगा तो इसका प्रभाव बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित पड़ता है जिससे उसका बाल विकास प्रभावित  होता है | 

       यदि बच्चे को पौष्टिक या संतुलित आहार ना दिया जाए तो उसमें कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोग शुरू हो जाते हैं जिसके कारण बहुत सी बीमारियों का जन्म होता है  |

जैसे विटामिन ए – की कमी से रतौंधी, वसा की अधिकता से मोटापा, आयरन की कमी से एनीमिया नामक रोग उत्पन्न हो जाते हैं |

        बच्चे के जन्म से लेकर उसकी किशोरावस्था के पूर्ण होने तक शारीरिक और मानसिक विकास को संतुलित बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है यदि बच्चे का भोजन पौष्टिक और संतुलित नहीं होगा तो उसका शारीरिक और मानसिक विकास अत्याधिक तीव्र गति से प्रभावित होगा |

            इसलिए बच्चों के संतुलित आहार को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त सन 1995 में मिड डे मील योजना का आरंभ किया गया  जिसके अनुसार बच्चे को विद्यालय में संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाता है |

🎯 बुद्धि ➖

वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह सिद्ध किया है कि तीव्र बुद्धि वाले बच्चों में मंदबुद्धि वाले बच्चों की तुलना में अधिक  तीव्र गति से विकास होता है |

 टर्मन ने भी अपने प्रयोग में पाया कि बहुत प्रखर बुद्धि  वाले बच्चों में  चलने की प्रक्रिया 13 माह में तथा बोलने की क्षमता 11 माह तक पूरी हो जाती है जबकि मंदबुद्धि वाले बच्चों में चलने की प्रक्रिया 30 माह में तथा बोलने की क्षमता 15 माह तक पूरी होती है  |

🎯 यौन विकास➖

यौन विकास हमारे शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव डालता है जन्म के समय लड़के, लड़कियों से ज्यादा लंबे होते हैं लेकिन धीरे-धीरे बाद की अवस्थाओं में लड़कियां ,लड़कों से अधिक लंबी हो जाती है और किशोरावस्था के अंत में लड़के ज्यादा लंबे हो जाते हैं  |

       लेकिन लड़कियां लड़कों से 2 वर्ष पहले ही परिपक्व हो जाती हैं तथा उनकी कार्य शक्ति भी बढ़ जाती है  लड़कियों में परिपक्वता लड़कों की अपेक्षा हमेशा 2 वर्ष पहले  हो जाती है |

        बुद्धि परीक्षण में पाया गया कि लड़कियां, लड़कों की तुलना में मानसिक विकास में भी जल्दी परिपक्व हो जाती है |

🎯 अंत: स्त्रावी ग्रंथियाँ ➖

मानव शरीर के विकास में अंत: स्त्रावी ग्रंथियों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है शरीर की क्रियाशीलता का शारीरिक मानसिक विकास पर का महत्वपूर्ण योगदान रहता है  जिसमें ग्रंथियों का भी योगदान होता है  हमारे शरीर में बहुत सारी ग्रंथियां है जो शरीर के संचालन में और उसका संतुलन बनाए रखने में मदद करती है  | जैसे

 🍀 गोन्ड ग्रंथि  ➖ 

यदि इस ग्रंथि की क्रियाशीलता कम होगी तो किशोरावस्था में विलंब होगा | और यदि  ग्रंथि में क्रियाशील अधिक होगी तो यौन परिपक्वता जल्दी विकसित होगी |

 🍀 पैराथायराइड ग्रंथि  ➖

इस ग्रंथि से अस्थियों के निर्माण में मदद मिलती है  |

🍀 पीनियल ग्रंथि ➖

इस ग्रंथि से शरीर की अति क्रियाशीलता बनी रहती है |

🎯 प्रजाति ➖ 

वैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्ति की प्रजाति के अनुसार उसका विकास निर्भर करता है एक प्रजाति के लोग दूसरी प्रजाति के लोगों से शारीरिक गठन ,वर्ण, और आकृति में भिन्न होते हैं |

      जिससे व्यक्ति कख शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक विकास भी प्रभावित होता है  |

       लेकिन हरलाॅक ने इस कथन को असत्य माना है उन्होंने कहा है कि 

“यदि मनुष्य का जन्म दुनिया के किसी भी कोने में होता है तो सभी मनुष्य प्रजाति के लोगों का विकास एक समान रूप से होता है |”

🎯 रोग और चोट➖

रोग और चोट का प्रभाव बच्चे के गर्भ से लेकर उसे जीवन पर्यंत तक के विकास में  पड़ता है गर्भ  या बचपन की गंभीर बीमारी या आघात  का प्रभाव व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक विकास में बहुत अधिक प्रभाव डालती है |

🎯 परिवार ➖

बालक के विकास में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है  जिसके अंतर्गत बच्चे का परिवार से परस्पर संबंध, उसके माता-पिता का आपसी  संबंध, परिवार में बालक की स्थिति, परिवार का आकार , और बच्चे की देखभाल आदि सब उसके आंतरिक वातावरण को प्रभावित करते हैं यदि बालक और बालिकाओं में परिवार के द्वारा पक्षपात किया जाता है तो उनमें तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है जिससे उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता है | 

अर्थात् हम कह सकते हैं कि जैसा बच्चे के परिवार का वातावरण होगा बच्चे का विकास भी वैसा ही होगा |

🎯 विद्यालय ➖ 

 बच्चा जब बाल्यावस्था की अवस्था में होता है तो वह अपने परिवार से निकलकर विद्यालय में प्रवेश करता है जहां उसका मानसिक सामाजिक और नैतिक विकास अत्यधिक तीव्र गति से होता है |

 जब बच्चा विद्यालय जाना शुरू करता है तब वह बाहरी वातावरण से प्रभावित होता है  विद्यालय में नए दोस्त बनाता है और अपने नए दोस्त और सहपाठियों के साथ अंतः क्रिया के दौरान नई- नई चीजों का अर्जन करता है जो उसके मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं  |

विद्यालय में परिपक्वता से शिक्षा दी जाती है जहां पर उसके व्यवहार और ज्ञान आदि का विकास होता है अर्थात यूँ कहे कि उसका चाहुंमुखी  विकास होता है |

 इसलिए माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चे के विद्यालय में कैसा वातावरण दिया जा रहा है यदि विद्यालय का वातावरण बच्चे के अनुरूप नहीं होगा या उसकी सोच को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी जिससे बच्चे का विकास संभव नहीं है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

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💫🌻 बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक💫🌻 (Factor affecting of child development)

🌼 विकास क्रम को प्रभावित करने वाले अनेक तत्व होते हैं इन तत्वों द्वारा विकास को गति प्राप्त होती है।

🌼 यह तत्व विकास को नियंत्रित भी रखते हैं विकास को प्रभावित करने वाले अनेक कारक  निम्नलिखित  है।

1-💫पोषण (Nutrition)➖

किसी भी बालक के विकास में पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गर्भ कालीनअवस्था से लेकर जीवन पर्यंत तक प्राणी को जीवित तथा स्वस्थ बनाए रखने के लिए उत्तम पोषण की आवश्यकता होती है।

🌼 क्योंकि इससे बालक का शारीरिक और मानसिक विकास चरम पर होता है।

🌼बालक के विकास के लिए उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट ,खनिज लवण आदि की आवश्यकता पड़ती है यदि हमारे खान -पान में उपयुक्त पोषक तत्वों की कमी होगी तो वृद्धि का विकास इससे प्रभावित होगा।

🌼 बच्चों के संतुलित आहार को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त 1995 से मिड डे मील (मध्यान भोजन) योजना का आरंभ किया गया था।

💫2-बुद्धि (Intelligence)➖

🌼 बच्चे के विकास में बुद्धि का महत्वपूर्ण स्थान है। किसी भी बालक की बुद्धि या बौद्धिक क्षमताएं उसके विकास के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है।

🌼परीक्षणों के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला गया है कि तीव्र बुद्धि बालकों का विकास मंदबुद्धि बालकों की तुलना में शीघ्रता से होता है क्योंकि उसमें नहीं बातों को सीखने की तत्परता यह परिपक्वता पाई जाती है जबकि मंदबुद्धि बालकों में इसका अभाव रहता है।

💫3-यौन विकास  (sex development)➖ यौन बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को बहुत प्रभावित करता है।

🌼 जन्म के कुछ दिनों तक यह विकास लड़कों में लड़कियों की अपेक्षा अधिक होता है।

🌼 यौन सिर्फ शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है।

💫 4-अंतः स्रावी ग्रंथियां (Endocrine glands)➖

🌼हमारे शरीर में बहुत सारी अंतः स्रावी ग्रंथियां पाई जाती हैं यह स्त्राव हमारे शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रभावित करता है।

🌼 जैसे थायराइड ग्रंथि से निकलने वाला स्त्राव थायराॅक्सिन शारीरिक व मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।इसका स्त्राव कम होने पर बालक मूल बुद्धि का हो जाता है जब किस का स्त्राव अधिक होने पर  थायराॅक्सिन अधिक मात्रा में खून में मिलता है जिससे व्यक्ति अधिक जोशीला और सक्रिय नजर आता है।

🌼इस प्रकार अनेक हार्मोन्स भी बालक के शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं।

💫5-प्रजाति (Race)➖वैज्ञानिकों के अनुसार प्रजातियां भिन्नता से विकास प्रभावित होता है वैज्ञानिकों का मानना है कि एक प्रजाति के लोग दूसरे प्रजाति के लोगों को ना केवल शारीरिक गठन वर्ण और आकृति से भिन्न होते हैं अब तो मानसिक योग्यता और बुद्धि में पृथक् होते हैं।

💫6 – रोग और चोट (Diseases and Injuries)

🌼 गर्भ कालीन अवस्था से लेकर बात की अवस्था की बीमारियों तथा आघातों का बालक के विकास पर प्रभाव पड़ता है।

🌼बचपन की गंभीर बीमारियों और मानसिक आघातों का दुष्प्रभाव बालक के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर पड़ता है।

🌼इसके विपरीत जो बालक स्वस्थ रहता है उसका विकास सामान ढंग  में होता है और वह सही समय पर शारीरिक व मानसिक परिपक्वता प्राप्त कर लेता है।

💫 7-परिवार (family)➖पारिवारिक वातावरण कई रूपों से बालक के विकास को प्रभावित करता है जैसे माता-पिता के आपसी संबंध, बालक अभिभावक, संबंध परिवार में बालकों की स्थिति परिवार का आकार बाल- पोषण की विधियां आदि।

💫8-विद्यालय (school)➖

🌼प्राय: 5 वर्ष की आयु से सभी बालक स्कूल जाते हैं विद्यालय के द्वारा बालक को विभिन्न क्षेत्रों में सीखने की पर्याप्त व्यवस्था होती है विकास परिपक्वता के साथ-साथ शिक्षण का भी परिणाम है।

🌼 अतः यदि विद्यालय का वातावरण अच्छा है तो बालक को पर्याप्त शिक्षण दिया जाता है शिक्षक अपने व्यवहार और ज्ञान से बालक का चतुर्मुखी विकास करता है तो बालक को का विकास सही ढंग से होता है।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

🌼🌼बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक🌼🌼

🌼🌼बच्चे के शारीरिक,  मानसिक, सामाजिक, भाषाई, आदि विकास को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाले कारकों में कई प्रकार के कारक आते हैं, जिनसे बच्चे का विकास प्रभावित होता है। 

 बच्चे के विकास को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है-

🌼1. पोषण :-

गर्भावस्था से लेकर जीवन पर्यंत व्यक्ति को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। 

 लेकिन गर्भावस्था से किशोरावस्था के अंत तक संतुलित आहार की आवश्यकता बच्चे के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। क्योंकि इस समय बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास चरम पर होता है। 

 🌼संतुलित आहार से तात्पर्य है कि उम्र के अनुसार सही मात्रा में उचित खनिज पोषक तत्वों से भरपूर मात्रा मे आहार के रूप मे लेना ।।

🌼 संतुलित आहार में बच्चे को प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण, विटामिन आदि की उचित मात्रा  में आवश्यकता होती है जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है 

🌼जन्म से किशोरावस्था तक का समय बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है जिसमें संतुलित आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

🌼 बच्चे को संतुलित आहार ना दिया जाए  तो उसका मानसिक व शारीरिक विकास अवरुद्ध हो जाता है जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियों का जन्म होता है। 

 जैसे – 

🌼आयरन की कमी से- एनीमिया नामक रोग। 

🌼वसा की अधिकता से -मोटापा आदि। 

🌼 बच्चों के संतुलित आहार को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त 1995 से मिड डे मील ( मध्यान भोजन) योजना का आरंभ किया गया है। 

🌼2. बुद्धि :-

बच्चे के विकास में बुद्धि का भी महत्वपूर्ण स्थान है।

तीव्र बुद्धि वाले बच्चे का विकास मंदबुद्धि वाले बच्चे की अपेक्षा हर क्षेत्र में अधिक होता है क्योंकि अधिक बुद्धि वाला बच्चा अपनी बुद्धि, शारीरिक व मानसिक विकास के लिए उपयोग करने में सक्षम होता है जबकि मंदबुद्धि बालक बुद्धि की कमी के कारण पीछे रह जाता है। 

🌼🌼 टर्मन के अनुसार: – ” प्रखर बुद्धि वाले बालक में चलने की प्रक्रिया 13 महीने में होती है ,और बोलने की क्षमता 11 माह में होती है, वही दुर्बल बुद्धि वाले बालक में चलने की प्रक्रिया 30 वे माह में होती है और बोलने की क्षमता 15 वे माह में होती है। “

🌼3. यौन विकास :- 

यौन बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास को बहुत प्रभावित करता है।

🌼जन्म के कुछ दिनों तक यह विकास लड़कों में लड़कियों की अपेक्षा अधिक होता है। 

 🌼10 -11 वर्ष में  लड़कियों की लंबाई, लड़कों की अपेक्षा अधिक होती है। 

🌼शारीरिक परिपक्वता भी लड़कियों में लड़कों की अपेक्षा 1- 2 वर्ष पूर्व ही आ जाती है। 

🌼 काम शक्ति भी लड़कियों में लड़कों की अपेक्षा 1- 2 वर्ष पूर्व आ जाती है। 

 अतः यौन सिर्फ शारीरिक विकास को ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी बहुत प्रभावित करता है। 

🌼4. अंतः स्त्रावी ग्रंथियां :-

मानव शरीर में अनेक ग्रंथियां होती है जिनके सुचारू रूप से कार्य करने पर मानव का शारीरिक व मानसिक विकास भी सही ढंग से होता है। और अगर यह ग्रंथियां अतिसक्रिया या कम क्रियाशील हो तो मानव विकास में अधिकता या कमी हो जाती है। 

उदाहरण के लिए गोनड ग्रंथि की कम क्रियाशीलता से किशोरावस्था आने में विलंब होता है और अधिक क्रियाशीलता से यौन परिपक्वता जल्दी आती है। 

🌼 पैराथायराइड ग्रंथि – यह ग्रंथि अस्थियों के निर्माण में मदद करती हैं। 

 🌼पीनियल ग्रंथि – इस ग्रंथि की अति क्रियाशीलता से सामान्य विकास में पठार आ जाता है ऐसी स्थिति में बचपन के लक्षण बहुत दिनों तक बने रहते हैं।

अर्थात् ग्रंथियों स्त्रावन  का मानव विकास पर सीधा असर पड़ता है। 

🌼5. प्रजाति :-

एक प्रजाति के लोग दूसरी प्रजाति के लोगों से शारीरिक गठन, वर्ण और आकृति में भिन्न होते हैं।

शारीरिक ही नहीं इसमें मानसिक विकास भी प्रभावित होता है

लेकिन हरलॉक महोदय ने इस मत को नहीं माना है। 

🌼6. रोग और चोट :-

गर्भ और बचपन की गंभीर बीमारी या आघात, मानसिक तथा शारीरिक विकास को प्रभावित करता है। 

🌼7. परिवार :-

माता-पिता का आपसी संबंध, परिवार में बालक की स्थिति, परिवार का आकार, बच्चों के देखभाल, परिवार का आंतरिक वातावरण, बालक-बालिका में अंतर, परिवार का तनाव, आदि सारी चीजें बच्चे के विकास  को प्रभावित करती है। 

 क्योंकि बच्चे के मस्तिष्क मे इस समय ग्रहण करने की  क्षमता उच्च  होती है और बच्चा अनुकरण भी करता है। 

🌼8. विद्यालय :-

 बच्चा परिवार से निकलकर जब विद्यालय पहुंचता है तब उसका सामाजिक और नैतिक विकास तीव्र गति से होता है। 

विद्यालय में वह अनेक बच्चों से मिलता है जो विभिन्न व्यक्तित वाले होते हैं और साथी-सहपाठी से अंत: क्रिया के दौरान अनेक नई चीजों को जानता व समझता  है जो उसके विकास को बहुत प्रभावित करता हैं।

विद्यालय में बच्चे को परिपक्वता के साथ शिक्षा मिलती है। 

बच्चा विद्यालय में व्यवहार व ज्ञान सीखता है वहां उसका चहुमुखी विकास होता है। 

By manjari soni

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