व्यक्तित्व का सिद्धांत –

मानव का व्यक्तित्व किसी एक नहीं बल्कि अनेक कारको का बनता है।
व्यक्ति धारणाओं के आधार पर ही व्यक्तित्व संबंधी सिद्धांत का निर्माण हुआ है ।

1–विश्लेषणात्मक सिद्धांत– इसके प्रतिपादक सिगमंड फ्रायड है।
फ्राइड के अनुसार व्यक्तित्व का निर्माण इदम् ,अहम पराअहम के द्वारा होता है ।

💐इदम– यह अचेतन मन होता है। मूल प्रवृत्ति एवं नैसर्गिक इच्छाएं रहती है।
यह शीघ्र तृप्ति चाहती है ।

💐 अहम –इगो एक चेतन अवस्था है ,इसके साथ-साथ चेतन शक्ति तर्क बुद्धि आदि सभी आते हैं ।

💐सुपर ईगो– आदर्शों से निर्मित होता है।
फ्राइड ने एगो की विषय में कहा है कि –
इगो, ईदम का वह भाग है जो वाह्य संसार के अनुमान तथा संभावना से परिषद होता है और उसका कालांतर में प्रभाव भी पड़ता है जो प्राणी को उद्दीपन करने एवं उसके इर्द-गिर्द जमी परत के अंश के रूप में व्याप्त रहता है।

फ्रायड ने सुपर ईगो के विषय में कहा है कि– सुपर ईगो, इगो का वह पक्ष हैं, जो आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया को संभव बनाता है। इसे सामान्य रूप से चेतना कहते हैं।

इस प्रकार मानव व्यक्तित्व का निर्माण इन्हीं तत्वों से होता है यह तत्व व्यक्ति के अनेक रूप प्रकट करते हैं।
2– रचना सिद्धांत – शेल्डन अपने व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा है ।

💐गोल आकृति –इस व्यक्तित्व वाले मनुष्य गोल गर्दन तथा मांसपेशियों से पूर्णतः विकसित होते हैं ।चर्बी का बढ़ना इत्यादि इसके के अंदर आता है।

💐आयत आकृति– इस प्रकार के व्यक्तित्व में हड्डियों तथा मांस पेशियों का विकास परिलक्षित होता है ।

💐लंब आकृति– इस प्रकार की व्यक्तित्व में केंद्रीय स्नायु संस्थान के मांसपेशियां तंत्र विकसित होते हैं ।
3–प्रतिकारक प्रणाली सिद्धांत– यह सिद्धांत RB कैटल द्वारा दिया गया था ।
व्यक्ति जो किसी विशेष परिस्थिति में जो भी कार्य करता है ।उसका प्रतिरूप व्यक्तित्व है।
इन्होंने कहा चरित्र एक भावात्मक एकता, सामाजिक, कल्पनाशीलता, अभिप्रेरित, उत्सुकता ,लापरवाही यह सभी चरित्र का पार्ट है ।

हम अपने अलग-अलग संवेग से अभी प्रेरणा लेते हैं। इससे हम व्यवहार करते हैं। उधर उद्देश्य की प्राप्ति करते हैं ।

4–ओलपोर्ट का सिद्धांत– गोल्डन डब्लू आलपोर्ट ने व्यक्तित्व के संबंध में जो सिद्धांत प्रतिपादित किया है वह वंश क्रम वातावरण व्यक्तिगत पर आधारित है ।
ऑलपोर्ट ने वंश द्वारा निर्धारित व्यक्तित्व के जटिल मिश्रण के प्रति न्याय करने या स्वभाव सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक कारणों के प्रति न्याय करने पर बना दिया है।

पूनम शर्मा

☘️🌸 व्यक्तित्व के सिद्धांत🌸☘️

मानव का व्यक्तित्व किसी एक नहीं बल्कि अनेक कारणों से बनता है।
वैयक्तित्क धारणाऐं के आधार पर व्यक्तित्व संबंधी सिद्धांतों का निर्माण हुआ है।

☘️ मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत➖
इसके प्रतिपादक सिगमंड फ्रायड है। राइट के अनुसार व्यक्तित्व का निर्माण Id,Ego, super Ego के द्वारा होता है।

Id( इदम्) ➖अचेतन मन होता है जिसमें मूल प्रवृत्ति एवं नैसर्गिक इच्छाएं रहती है यह शीघ्र तृप्ति चाहते हैं।

Ego( अहम्)➖ चिंतन, इच्छाशक्ति, बुद्धि ,तर्क

Super Ego( परम अहम्)➖ आदर्शों से निर्मित

फ्राइड ने Ego के विषय में कहा है-
Ego ,Id का वह भाग है जो बाहर संसार के अनुमान तथा संभावना से परिष्कृत होता है और उसका कालांतर में प्रभाव भी पड़ता है जो प्राणी को उधीजन करने एवं उसके इर्द-गिर्द जमीन परत के अंश के रूप में व्याप्त रहता है।

फ्रायड ने super Ego के विषय में कहा है कि-super Ego का वह पक्ष है जो आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया को संभव बनाता है जिसे सामान्य रूप से चेतना कहते हैं।

इस प्रकार मानव व्यक्तित्व का निर्माण उन्हीं तत्वों से होता है यह तत्व व्यक्ति के अनेक रूप प्रकट करते हैं।

🌸☘️ रचना सिद्धांत☘️🌸

शैल्डाॅन अपने व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा है।

1-गोलाकृति➖ इस व्यक्तित्व वाले मनुष्य गोल गर्दन तथा मांसपेशियों से पूर्णता विकसित होते हैं चर्बी का बढ़ना इत्यादि गुण इसके अंदर आते हैं

2-आयताकृति➖ इस प्रकार के व्यक्तित्व में हड्डियों तथा मांसपेशियों का विकास दिखता है।

3-लम्बाकृति➖ इस प्रकार के व्यक्तित्व में केंद्रीय स्नायु संस्थान में मांसपेशियां तंतु विकसित होते हैं।

🌸☘️प्रतिकारक प्रणाली सिद्धांत☘️🌸

इसके प्रतिपादक R.B. कैटल है।
व्यक्ति जो किसी विशेष परिस्थितियों में जो भी कार्य करता है उसका प्रतिरूप व्यक्तित्व है ‌

चरित्र➖ भावनात्मक ,एकता, सामाजिकता, कल्पनाशीलता, अभि प्रेरक, उत्सुकता ,लापरवाही में यह सभी आते हैं।

अलग-अलग संवेग में हमें अभी प्रेरणा मिलती है इससे हम व्यवहार करते हैं और उद्देश्य की प्राप्ति होती है।

☘️🌸आॅलपोर्ट का सिद्धांत🌸☘️

गोर्डन wआॅलपोर्ट ने व्यक्तित्व के संबंध में जो सिद्धांत प्रतिपादित किया है वह वंश क्रम ,वातावरण, व्यक्तिगत भेद पर आधारित है।

आॅलपोर्ट ने वंश क्रम, द्वारा निर्धारित व्यक्तित्व के जटिल मिश्रण के प्रति न्याय करने या स्वभाव, समाजिक तथा मनोवैज्ञानिक कारणों के प्रति न्याय करने पर बल दिया है‌।
व्यक्तित्व के नवीनीकरण को मान्यता देने पर बल दिया गया है।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma

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