📖 📖 शिक्षण पद्धतियां 📖 📖

2. चर्चा विधि (Discussion method) ~
इस विधि में छात्र व शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक वार्तालाप होता है। सोच व संचार की क्षमता विकसित करती है। इससे बच्चे में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास भी होता है।
अर्थात चर्चा विधि के अंतर्गत हम यह कह सकते हैं, कि शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों किसी एक मुख्य बिंदु को लेकर उस पर चर्चा करते हैं। और शिक्षक उस बिंदु को लेकर अपने विचार प्रस्तुत करता है, और वही विद्यार्थी भी अपने विचारों को प्रस्तुत करता है। इसी के चलते शिक्षक व विद्यार्थी दोनों ही उस बिंदु पर जिस प्रकार की समस्या होती है, उसे समाधान करते हैं।

👉🏻गुण ~
● इस विधि में छात्रों को अपने विचारों को प्रस्तुत करने का मौका मिलता है।
● इस विधि के चलते ही बच्चे में चिंतन करने का एवं सृजनात्मक शक्ति का भी विकास होता है।
● बच्चा अन्य व्यक्तियों के समक्ष बोलने के प्रति उत्सुक रहता है उसकी झिझक खत्म हो जाती है।

3. कहानी कहने का तरीका~
शिक्षा कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है। इसमें बच्चे की शब्दावली बढ़ती है, कहानी से भाव व सामाजिक अध्ययन को भी पढ़ा सकते हैं।

👉🏻 अर्थात कहने का आशय यह है, कि इसके अंतर्गत कहानी के माध्यम से शिक्षण करवाया जाता है। किसी भी पाठ को एक कहानी के माध्यम से पढ़ाया जाता है। और उसी के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं। जिससे कि छात्रों को कहानी से प्रश्नों के उत्तर जल्दी से याद हो जाए। अतः वह उन प्रश्नों को समझने का प्रयास करें, क्योंकि बच्चे कहानी में अधिक रूचि लेते हैं तो शिक्षण का यह माध्यम सबसे उचित होगा।

👉🏻 कहानियों में बच्चों के ज्ञान में वृद्धि होगी और उनकी शब्दावली भी बढ़ेगी क्योंकि उन्हें नए नए शब्दों का ज्ञान होगा इससे वह अपने ज्ञान के भंडार में एवं शब्द के भंडार में भी वृद्धि कर पाएंगे।

👉🏻 कहानी कहने के तरीके के अंतर्गत हम केवल एक ही विषय को नहीं पढ़ा सकते है। बल्कि हम एक से अधिक विषय का ज्ञान भी इसके माध्यम से करा सकते हैं। उदाहरण के लिए सामाजिक विज्ञान या सामाजिक अध्ययन। हम बच्चों को अतीत एवं इतिहास की कई कहानियों को सुना कर, उन्हें सामाजिक अध्ययन का ज्ञान सरल व सुगम तरीके से कर सकते हैं।

● परियोजना पद्धति ( Project method ) ~
परियोजना विधि के अंतर्गत विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है। इसमें बच्चा समस्या का हल करण के स्वाभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।

इस विधि के अंतर्गत कई अन्य विधियों को भी शामिल किया गया है। जिसके माध्यम से हम बच्चों को शिक्षण करा सकते हैं, और शिक्षण कराने में हमें अन्य प्रकार की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है। हमारा शिक्षण सरल व सुगम तरीके से संपूर्ण हो जाता है। परियोजना पद्धति के अंतर्गत निम्नलिखित विधियां है~

🍂🍃 परियोजना विधि~ परियोजना पद्धति के अंतर्गत आने वाली सर्वप्रथम विधि परियोजना विधि है। इस विधि के अंतर्गत हम किसी कार्य को करने के लिए पहले से ही एक योजना एवं समय सारणी निश्चित कर लेते हैं। कि हमें इसके अनुसार इन सभी कार्यों को करना होगा। एक निश्चित समय सारणी व योजना होने से हमें कार्यों को करने में आसानी होती है। और हम उन कार्यों को विधिवत तरीके से पूर्ण कर पाते हैं।

🍃🍂 समस्या समाधान विधि~ समस्या समाधान विधि के अंतर्गत शिक्षक द्वारा एक समस्या बच्चों को दी जाती है। समस्या बच्चों की क्षमता के अनुसार होती है जिसे कि वह समाधान कर पाए।
समस्या समाधान विधि को कई चरणों में पूरा किया जाता है। जैसे कि सर्वप्रथम बच्चे को समस्या का चयन करके दिया जाता है। बच्चा उस समस्या का समाधान करने के लिए उस समस्या को जानता है, कि समस्या किस प्रकार की है। उसके पश्चात बालक समस्या से जुड़ी हुई जानकारियों को एकत्रित करता है। उससे संबंधित जानकारियों को प्राप्त करके बालक समस्या का समाधान करने का प्रयास करता है। और अंत में वह समस्या का समाधान कर भी पाता है।

समस्या समाधान विधि से बच्चों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं जिसमें से कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं~
👉🏻 इस विधि से बच्चों में तर्क करने की क्षमता विकसित होती है।
👉🏻 बच्चा सोया में समस्याओं का समाधान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहता है, उसमें उत्सुकता बढ़ती है।
👉🏻 इस विधि के माध्यम से बच्चे आत्मनिर्भर हो जाते हैं, वह समस्या समाधान करने के लिए अन्य व्यक्तियों पर निर्भर नहीं होते हैं।
👉🏻 बालक समस्या को अपने जीवन से जोड़कर हल करने का प्रयास करता है जिससे कि बालक सृजनात्मकता की ओर बढ़ता जाता है।

🍂🍃 पाठ्यपुस्तक विधि~
इस विधि के अंतर्गत शिक्षक पाठ्य पुस्तक के माध्यम से शिक्षण करवाता है। इस विधि में शिक्षक पुस्तक की सहायता से बच्चों को पाठ को पूर्ण करता है, और बच्चे भी उसी पुस्तक के माध्यम से ज्ञान अर्जित करते हैं।
पाठ्यपुस्तक विधि के माध्यम से छात्र ज्ञान को अपने अनुसार अर्जित कर सकता है। बच्चे को जब भी समय मिले तब पुस्तक के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति कर सकता है। उसे किसी निश्चित समय की आवश्यकता नहीं होती है, कि मुझे केवल इसी समय ज्ञान प्राप्त करना है। वह किसी भी समय पुस्तक से अपना ज्ञान अर्जित कर सकता है। क्योंकि पाठ्यपुस्तक को वह किसी भी स्थान पर रखकर पड़ सकता है। जिससे कि उसे इस प्रकार की कठिनाइयां नहीं होगी, कि मुझे केवल शिक्षक के माध्यम से ही शिक्षा की प्राप्ति हो सकती है। वह पाठ्य पुस्तक के माध्यम से भी शिक्षक प्राप्त कर सकता है।

📚 📚 📕 समाप्त 📕 📚 📚

✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻

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🦚🌀 चर्चा विधि🌀🦚

👉🏼 चर्चा एक व्यापक शब्द है जिसका अर्थ है दो या अधिक लोगों के समूह के बीच अन्वेषी अन्योन्यक्रिया

👉🏼इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है यह आपकी सोच, संचार की क्षमता विकसित करती है इससे बच्चों में उच्च स्तर की संज्ञानात्मक विकास होता है

इसे कई रूपों में विभक्त किया गया है
🦚🌀 कहानी कहने का तरीका➖
👉🏼इसमें शिक्षण कहानी कहने के रूप में कराया जाता है इसमें बच्चे की शब्दावली बढ़ती है
👉🏼बच्चे में कल्पना शक्ति का विकास होता है कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ सकते हैं

🌀🦚 परियोजना पद्धति (project method)➖

👉🏼 इसमें विषय वस्तु के सभी पहलू को करके सीखने पर बल दिया जाता है जिससे बच्चा समस्या का हल करके स्वाभाविक परिस्थितियों को समझने का प्रयास करता है
👉🏼बालक किसी भी महत्वपूर्ण समस्या के विषय में सोचेगा और योजना बनाकर उसमें अनुकूल साधन जु टा येगा उतना ही वह इस प्रोजेक्ट को पूर्ण करने में सफल होगा
परियोजना विधि के अंतर्गत तीन विधि आती है
👉🏼 परियोजना विधि
👉🏼 समस्या समाधान विधि
👉🏼 पाठ्यपुस्तक विधि

🖊️🖊️📚📚 Notes by…. Sakshi Sharma📚📚🖊️🖊️

🌀🌀 *चर्चा विधि*🌀🌀

👉🏻 इस विधि में किसी भी विषय पर एक से अधिक लोगों के द्वारा चिंतन व वार्तालाप करने को चर्चा विधि कहते हैं।

👉🏻 इस विधि से शिक्षण करने से सुनने व समझने का कौशल विकसित होता है।

👉🏻 इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है, जो सोच और संचार की क्षमता विकसित करती है इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है।

👉🏻 इस विधि में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों की समान रूप से सहभागिता एवं सक्रियता रहती है।

🌀 *कहानी कहने का तरीका*🌀

👉🏻 इस विधि से शिक्षण करने से कहानी कहने के रूप में कराया जाता है इससे बच्चे की शब्दावली बढ़ती है कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ा सकते हैं यहां शिक्षक कहानी के माध्यम से अपने भाव अभिव्यक्त करते हैं।

👉🏻 एक शिक्षक को अपना पाठ शुरू करते समय कहानी का सहारा जरूर लेना चाहिए जैसे एक राजा था एक राजकुमारी थी या एक परी थी। इस प्रकार की कहानियां हमने अपने दादा दादी नाना नानी से सुनी अवश्य होंगे उसमें बताई गई बातें हमको याद रहती है यह विधि कथन विधि कहलाती है।

👉🏻 इस विधि का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यदि शिक्षण का स्थाई प्रभाव डालना है तो शिक्षण को कल्पना द्वारा आकर्षक तरीके से कहानी के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहिए इस विधि के द्वारा बच्चे जल्दी सीखते हैं और इन्हें लंबे समय तक अपने मस्तिष्क में याद भी रखते हैं और इस विधि के द्वारा उनमें जिज्ञासा भी जागृत होती है यह विधि मुख्यतः मौखिक विधि कहलाती है।

🌀 *परियोजना पद्धति*(project method)🌀

इसमें विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है इसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वाभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।

👉🏻 इस विधि में बच्चों को स्वतंत्र रूप से सोचने विचारने का अवसर प्राप्त होता है तथा उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। इसमें बच्चे किसी भी महत्वपूर्ण समस्या के विषय के बारे में चिंतन करेगा और योजना बनाकर उसके अनुकूल उपर्युक्त साधन जुटाकर समस्या का समाधान कर पाएगा ।

💫 परियोजना पद्धति के अंतर्गत तीन विधि आती है💫

🌴 परियोजना विधि
🌴 समस्या समाधान विधि
🌴 पाठ्यपुस्तक विधि

🌴 *परियोजना विधि*➖ इस विधि में विद्यार्थी वास्तविक जीवन से संबंधित किसी समस्या का हल निकालने के लिए स्वयं करके समाधान स्वाभाविक परिस्थितियों में सामाजिक वातावरण में ही पूर्ण करते हैं।

इस विधि में छात्रों को समूह बनाकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से संबंधित एक प्रोजेक्ट सौंप दिया जाता है छात्र वास्तविक जीवन की समस्याओं को एक दूसरे के सहयोग से सीखते हैं और हल करते हैं।

🌴 *समस्या समाधान विधि*➖ इस विधि में विद्यार्थियों के सामने कुछ समस्या प्रस्तुत किया जाता है जो छात्रों के समस्या अनुभव के अनुसार होता है छात्र स्वयं से चिंतन करके या शिक्षक की मदद से समस्या का विश्लेषण और संश्लेषण करते हुए समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। इस विधि के द्वारा विद्यार्थियों में चिंतन शक्ति का विकास होता है।

🌴 *पाठ्यपुस्तक विधि*➖

इस विधि में शिक्षक तथा शिक्षार्थी दोनों का ही परिश्रम या मेहनत कम होता है तथा कक्षा में सभी स्तर के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ाया जा सकता है ।

👉🏻 इस विधि के द्वारा विद्यार्थियों में स्वाध्याय का विकास होता है।

👉🏻 इस विधि में विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति का विकास होता है तथा सक्रिय रहते हैं।

✍🏻notes by manisha gupta ✍🏻

💥 चर्चा विधि 💥

🔥 इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है। जिससे सोच और क्षमता की संचार विकसित होती है। जिससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है।

🔥 इस विधि के अंतर्गत किसी भी विषय पर एक से अधिक व्यक्तियों के द्वारा चर्चा या वार्तालाप करने की विधि को चर्चा विधि कहते हैं।

🔥 इस विधि द्वारा शिक्षण में सुनने और समझने की क्षमता विकसित होती है।

💥 कहानी कहने का तरीका💥

🔥 इस विधि के द्वारा शिक्षण कराने से बच्चों में शब्द भंडार तथा सुनने की कौशल में वृद्धि होती है। और इस विधि द्वारा शिक्षा भाषा और सामाजिक अध्ययन का भी शिक्षण कराता है। तथा शिक्षक अपनी भावों को कहानी के माध्यम से व्यक्त करता है।

🔥 एक प्रभावी शिक्षक होने के नाते किसी भी पाठ को शुरू करने से पहले बच्चों से कहानीयों का सहारा जरूर लेना चाहिए। ऐसा करने से देखी सुनी गई तथा कल्पना की गई थी ज्यादा समय तक स्मरण रहती है। इसे कथन विधि के नाम से भी जानते है।

🔥 किस विधि का सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया है कि इस विधि द्वारा शिक्षण कराए जाने से छात्रों में चिंतन कौशल,कल्पना,तर्क आदि विकसित होते हैं। इस विधि द्वारा विद्यार्थियों में जिज्ञासा भी जागृत होती है।जिससे यह सारी कथित घटनाएं बालकों को स्मरण रह जाती है जो कि लंबे समय तक भूलते नहीं है। यह विधि मुख्यत: मौखिक विधि कहलाती है।

💥 परियोजना पद्धति💥

🔥 इसमें विषय वस्तु के सभी पहलुओं पर करके सीखने के लिए बल दिया जाता है। इसमें बच्चा समस्या को हल करके स्वाभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।

🔥परियोजना विधि
🔥समस्या समाधान विधि
🔥 पाठ्यपुस्तक विधि

🔥परियोजना विधि🔥

💥इस विधि द्वारा विद्यार्थियों को उनके वास्तविक जीवन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या का स्वयं करके हल निकालने का अवसर दिया जाता है तथा स्वयं समस्या हल करके स्वाभाविक परिस्थिति में सीखना ही परियोजना विधि है।

🔥समस्या समाधान विधि🔥

💥 इस विधि में शिक्षक यों के प्रति कुछ ऐसी समस्याएं प्रस्तुत की जाती है। जो कि छात्रों के अनुभव पर आधारित होती है तथा छात्र शिक्षक व मित्रों की मदद से इन समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करते हैं।

💥 इस विधि द्वारा विद्यार्थियों में खोज,चिंतन तथा तर्क शक्ति विकसित होती है।

🔥 पाठ्यपुस्तक विधि🔥

💥 इस विधि द्वारा शिक्षा कराने में शिक्षक तथा शिक्षार्थी दोनों का अन्य विधियों की अपेक्षा बहुत ही कम योगदान होता है।

💥 इस विधि द्वारा विद्यार्थियों में स्वाध्याय की क्षमता विकसित होती है।

💥 इस विधि द्वारा शिक्षण कराने से शिक्षार्थी सक्रिय रहते हैं तथा उनमें स्मरण की क्षमता का भी विकास होता है।

🔥Notes by :- Neha Kumari ☺️

🙏🙏धन्यवाद् 🙏🙏

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🔷️चर्चा विधि🔷️

➡️इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है lसोच और संचार की क्षमता विकसित करती है इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता हैl

🛑 कहानी कहने का तरीका⤵️

➡️ शिक्षण कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है इससे बच्चे की शब्दावली बढ़ती हैl कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन भी पढ़ा सकते हैंl
➡️ बच्चों में कल्पना शक्ति का निर्माण होता हैl

🛑परियोजना पद्धति⤵️

⭐परियोजना पद्धति के अंतर्गत तीन विधि आती है〰️
(1) परियोजना विधि
(2) समस्या समाधान विधि
(3) पाठ्यक्रम विधि

➡️ अपने विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है इससे बच्चा समस्या का हल करके स्वभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता हैl

🛑परियोजना विधि⤵️

➡️ परियोजना विधि के प्रणेता जॉन डीवी थे परियोजना विधि शिक्षा दर्शन की एक प्रमुख विचारधारा परियोजना वाद पर आधारित है तथा इस विधि के जन्मदाता डब्लू एच किलपैट्रिक है
➡️इस विधि में बालक अपने अनुभव के आधार पर सीखते हैं उन्हें स्वतंत्र रूप से सोच में विचारने का अवसर मिलता है तथा उसका शारीरिक और मानसिक विकास होता हैl

🛑 समस्या समाधान विधि⤵️

➡️ इस विधि के अंतर्गत शिक्षार्थियों को एक समस्या दी जाती है जिसका समाधान शिक्षार्थी खोज खोजते हैं और ज्ञान अर्जित करते हैं इस विधि का प्रयोग माध्यमिक और उच्च स्तरीय कक्षा हमें आलोचनात्मक एवं समीक्षात्मक चिंतन क्षमता का विकास करवाने के लिए किया जाता हैl

🛑 पाठ्यक्रम विधि⤵️

इस विधि के अंतर्गत शिक्षक पाठ्यपुस्तक के माध्यम से शिक्षण करवाता है तथा छात्र अपने अनुसार पाठ पढ़ सकते हैं और छात्र अपने तरीके से चीजों को पढ़ सकते हैं एक बार में समझ नहीं आए तो दो-तीन बार में समझ सकते हैं इसमें छात्र को चिंतन का भी मौका मिलता हैl

📝Notes by : – sangita bharti
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🔆 शिक्षण और अधिगम की पद्धतियां 🔆

💫 भाव वाहक पद्धति➖

1) व्याख्यान विधि

2) चर्चा विधि

3)कहानी कहने का तरीका

🎯चर्चा विधि ➖

यह एक लोकतांत्रिक विधि है इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है सोच और संचार की क्षमता विकसित होती है जिससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है |

अर्थात् इस विधि में बच्चे अपने विचारों का आदान प्रदान करते हैं और इसमें शिक्षक और छात्र दोनों एक दूसरे के बीच अंत: क्रिया स्थापित करके अपने विचारों का आदान प्रदान करते हैं और जिससे बच्चे की तर्क शक्ति का विकास होता है |

🎯 कहानी कहने का तरीका➖

कहानी ऐसी होना चाहिए जो बच्चों के लिए रुचि पूर्ण हो कहानी में जब हम अपने शब्दों को जोड़ते हैं तो बच्चे का शब्दकोश भी बढ़ता है उसके सीखने के तौर-तरीके भी बढ़ते हैं | यह एक तंत्रीय विधि है लेकिन यह एक एक तंत्रीय विधि होने के बाद भी बच्चों के लिए लाभदायक होती है यदि वह अच्छे तरीके से प्रस्तुत की जाए तो |

अर्थात शिक्षण कहानी के रूप में करवाया जाता है इससे बच्चे की शब्दावली भी बढ़ती है कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ा सकते हैं |

💫 परियोजना पद्धति ➖

परियोजना पद्धति में हम बच्चों को कुछ कार्य देते हैं जिसे वे अपनी तार्किक क्षमता के आधार पर उसे स्वयं करते हैं और उसे शिक्षक के सामने प्रस्तुत करते हैं |

इस पद्धति में विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता इसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है |

1) परियोजना विधि

2) समस्या समाधान विधि

3) पाठ्यपुस्तक विधि

🎯 परियोजना विधि ➖

इस विधि में हम बच्चों को उनकी क्षमता के आधार पर कुछ चीजों पर कार्य देते हैं जिसे वे अपने तार्किक क्षमता के आधार पर हल करते हैं और शिक्षक के सामने प्रस्तुत करते हैं |

🎯 समस्या समाधान विधि ➖

समस्या समाधान विधि में बच्चे के पास कोई समस्या आती है या हमारे पास कोई समस्या आती है तो हम उस समझते हैं उसके सभी पक्षों को देखते हुए उसके तौर-तरीकों को समझ कर उस पर बातचीत करके उसका समाधान करते हैं यही समस्या समाधान विधि है |

🎯 पाठ्यपुस्तक विधि ➖

पाठ्य पुस्तक के माध्यम से उसके अलग-अलग तथ्यों और अवधारणाओं आदि से पढ़ाया जाता है क्योंकि पाठ्यपुस्तक बच्चों के पास भी उपलब्ध होती है तो बच्चे पाठ्यपुस्तक के तौर तरीकों से पढ़ते हैं और बच्चे खुद अपने आप में सकते हैं किसी की आवश्यकता नहीं होती है जिससे बच्चे अपने आप में आत्मविश्वास उत्पन्न कर सकते हैं अर्थात पाठ्यपुस्तक विधि प्रयोजना विधि का एक मुख्य भाग है जिसमें बच्चे खुद अपनी परियोजना के अनुसार कार्य करते हैं |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

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🔆 शिक्षण और अधिगम की पद्धतियां 🔆
♦ चर्चा विधि ♦➖ इस विधि में छात्र और शिक्षक के के बीच एक विषय पर मौखिक रूप से बातचीत करते हैं इस पद्धति में सोच और संचार करने की क्षमता का विकास होता है | इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास होता है |
▶ कहानी कहने का तरीका ➖ शिक्षण कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है इससे बच्चे की शब्दावली बढ़ती है और कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को आसानी से पढ़ा सकते हैं |
♦ परियोजना पद्धति ♦ ➖ इसमें विषय वस्तु के सभी पहलुओं सभी पहलुओं के सभी पहलुओं सभी पहलुओं सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है इसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वाभाविक परिस्थितियों को समझने की कोशिश करता है |
◼ परियोजना विधि
◼ समस्या समाधान विधि
◼ पाठ्यपुस्तक विधि
♦ परियोजना विधि ♦ ➖ परियोजना विधि में हम बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार कुछ चीजों पर कुछ कार्य देते हैं जिससे वह योजना तैयार करता है फिर वह अपनी सोच और तार्किक क्षमता के आधार पर हल करता है और शिक्षक के सामने प्रस्तुत करता है |

♦ समस्या समाधान विधि ♦➖ समस्या समाधान विधि वह विधि है जिसमें शिक्षण कार्य किसी समस्या को लेकर आयोजित एवं गठित किया जाता है यह ऐसी क्रिया विधि है जिसमें छात्र के सम्मुख कोई भी चुनौतीपूर्ण समस्या रखकर उनके उन्हें उसके समाधान का प्रशिक्षण प्रदान करती है |
इस विधि में विद्यार्थियों के सम्मुख वास्तविक जीवन की भी परिस्थितियां उत्पन्न कर दी जाती है और क्रियात्मक चिंतन द्वारा उन में उन परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना करने की योग्यता विकसित की जाती है |
समस्या चुनौतीपूर्ण होनी चाहिए |
समस्या विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुकूल होना चाहिए |
समस्या का स्वरूप निश्चित होना चाहिए | समस्या समाधान भी निश्चित होना चाहिए समस्या विषयों के विस्तार में सहायक होनी चाहिए |
समस्या का संबंध मनुष्य के बुनियादी आवश्यकताओं से होना चाहिए |
♦ पाठ्यपुस्तक विधि ♦➖ पाठ्यपुस्तक विधि के नाम से ही मालूम हो जाता है कि यह पाठ्य पुस्तक पर आधारित होती है अन्य विषय विषयों की भांति सामाजिक अध्ययन की भी प्रत्येक कक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक निर्धारित की जाती है शिक्षक को अपना शिक्षण कार्य किस पर आधारित करना होता है अतः यह कहा जाता है पाठ्यपुस्तक विधि सर्वप्रचलित विधि है |
Notes by ➖Ranjana Sen

🔆 *चर्चा विधि(Discussion method)*🔆

✳️इस विधि में शिक्षक बच्चों के साथ चर्चा करके पढ़ाते हैं।

✳️इस विधि से शिक्षक बोलकर या सुनकर समझने का कौशल विकसित होता है।

✳️ इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है सोच और संचार की क्षमता विकसित करती है इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है।

✳️ इस विधि में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों ही समान रूप से सहभागिता और सक्रियता रहती है।

🔆 *कहानी कहने का तरीका*-

✳️ शिक्षण कहानी के रूप में करवाते है इससे बच्चे की शब्दावली बढ़ती है कहानी से भाषण सामाजिक अध्ययन को पढ़ा जा सकता है शिक्षक के माध्यम से अपने भावों को व्यक्त भी करते हैं।

✳️ एके शिक्षक पाठ को शुरू करते हैं तो उस समय कहानी का सहारा जरूर लेते हैं जैसे आते हैं कहानी एक अमीर की कहानियां हमें अपने दादा और दादी से सुनने को भी मिलती है उसमें बताई गई कहानी को हमें हमेशा याद रखते हैं।

✳️ यह विघि महत्वपूर्ण विधि है क्योंकि इसमें से जाने का साहित्य भाव रहता है शिक्षण का कल्पना और आकर्षक तरीके से माध्यम से भी हम प्रस्तुत कर सकते हैं बच्चे इस विधि के द्वारा जल्दी ही सीखते हैं और वह लंबे समय तक अपने मस्तिष्क में याद भी रहते हैं इस विधि से उनमें एक जिज्ञासा भी होती है और यह मौखिक विधि कहलाती आती है।

🔆 *परियोजना पद्धति(project method)*

✳️ इसमें विषय वस्तु के सभी पहलू को करके सीखने पर बल दिया जाता है परियोजना विधि में बच्चे को कुछ करना है जैसे बच्चे के दरमियां छुट्टी के समय परियोजना करने को शिक्षक देते हैं और बच्चे करते हैं इसमें बच्चा समस्या हल करके स्वभाव परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।

✳️ इस विधि में बच्चा खुद ही सोचता है खुद समझता है और उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी होता है इसमें बच्चे किसी भी महत्वपूर्ण विषय के बारे में चिंतन करते हैं और योजना बनाकर उनके अनुकूल साधन जुटाकर समस्या का समाधान ने करते हैं।

🔆 परियोजना पद्धति के अंतर्गत 3 विधि आते हैं।

✳️ *परियोजना विधि—*
इस विधि में विद्यार्थी वास्तविक जीवन से संबंधित समस्या का हल निकालने के लिए स्वयं करके समाधान करते हैं और सामाजिक वातावरण में पूर्ण होते हैं।
इस विधि में छात्र समूह बनाकर वास्तविक जीवन से अनुभव संबंधित प्रोजेक्ट है सौंप दिया जाता है और छात्र वास्तविक जीवन से जोड़कर दूसरे को सहयोग करके सीखते हैं।

✳️ *समस्या समाधान —*
इससे विधि में बच्चों को समस्या प्रस्तुत किया जाता है और बच्चे अपने खुद के अनुभव से सीखते हैं छात्र स्वयं से चिंतन करते हैं या शिक्षा की मदद से समस्या का समाधान करते हैं इस विधि के द्वारा विद्यार्थियों में चिंतन शक्ति का विकास होता है।

✳️ *पाठ्यपुस्तक विधि—*
इस विधि में अपनी मर्जी से ही पढ़ते हैं पाठ्यपुस्तक विधि में कांटेक्ट मिलता और कंटेंट को अपने अनुसार ही बता सकते हैं।

✳️ इस विधि में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों का ही बहुत ही कम योगदान होता है और कक्षा में सभी स्तर के विद्यार्थी को एक साथ पढ़ाया जा सकता है।

✳️ इस विधि के द्वारा विद्यार्थियों में स्मरण शक्ति का विकास होता है और वह सक्रिय रहते हैं।

Notes By :-Neha Roy🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शिक्षण और अधिगम की पद्धतियां

🔥भाववाहक पद्धति-

1.व्याख्यान पध्दति

2.चर्चा विधि

👉इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है
👉यह बच्चों की सोच और संचार की क्षमता विकसित करती हैं
अर्थात् जब हम किसी समूह में बातचीत कर रहे होते हैं तो यहां से हमारे किसी बात को बोलने के तरीका या प्रस्तुत या संप्रेषण करने के तरीके का विकास होता है कि किस प्रकार बोलना है क्या क्या नहीं बोलना है आदि।
👉इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है।
👉 यह एक लोकतांत्रिक प्रणाली हैं

3. कहानी कहने का तरीका

👉इसमें शिक्षण कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है
👉इससे बच्चों की शब्दावली बढ़ती है
👉कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ा सकते हैं
👉यह शिक्षण की एक तंत्रीय प्रणाली है
👉इससे छात्र में कल्पनाशीलता का विकास होता है
अर्थात्
हमारा किसी भी कहानी को प्रस्तुत करने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि जैसे वह अभी वह सामने हो रहा हो जिससे छात्र उसके बारे में कल्पना कर सके और उस कहानी को रुचिकर तरीके से सुन सके।

🔥 परियोजना विधि या पध्दति

👉इस पद्धति में विषय वस्तु के सभी पहलू को करके सीखने पर बल दिया जाता है
👉इसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।
अर्थात् जैसे किसी बच्चे को मोटरसाइकिल चलाना सीखना है तो वह पहले उसके बारे में कुछ आधारभूत बातों को जानेगा और फिर उसके अनुसार अपनी स्वाभाविक परिस्थिति बनाकर उस पर कार्य करेगा
कभी-कभी स्वभाविक परिस्थिति नकारात्मक भी हो जाती है और इसका परिणाम बहुत नुकसान दायक हो सकता है।

1. परियोजना विधि

👉इस विधि में छात्र परियोजना को चुनता है और
👉फिर इसको क्रियान्वित करने के लिए योजना बनाता है
👉योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन करता है और
👉क्रियान्वयन करने के पश्चात उसकी जांच और मूल्यांकन करता है
👉इस विधि में छात्र स्वयं करके सीखता है इससे छात्र का ज्ञान ज्यादा समय के लिए स्थाई रहता है।

2.समस्या समाधान पध्दति

👉इस विधि में भी छात्र स्वयं करके सीखता है
👉इसमें छात्रों को कुछ समस्या दी जाती है जिनका छात्रों को समाधान करना होता है और
👉छात्र समस्याओं का समाधान करने के लिए समस्याओं का विश्लेषण करते हैं
👉उनके समाधान के लिए आंकड़े इकट्ठे करते हैं और समस्या का समाधान कर लेते हैं
👉इससे छात्र समस्या का समाधान करते समय जीवन उपयोगी कौशल और अनुभवों को सीखते हैं।

3. पाठ्य-पुस्तक विधि

👉इस विधि में छात्र स्वयं पुस्तक पढ़ कर उसका अपनी तर्क क्षमता से विश्लेषण करते हैं

अर्थात् छात्र पुस्तक से विभिन्न सूचनाओं को एकत्रित करता है उनको अपने मस्तिष्क में संगठित करता है और उन पर अपनी मानसिक योग्यता से विश्लेषण करके जो आवश्यक हैं उन्हें अपने पास रहने देता है और जो आवश्यक नहीं है उन्हें छोड़ देते हैं।
👉विश्लेषण करके उसके प्रति कुछ संप्रत्यय का निर्माण करते हैं
👉इस विधि से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है

Notes by Ravi kushwah

🌷 शिक्षण Teaching🌷

🌲भावनात्मक पद्धति🌲

2. 🌺 चर्चा विधि :-

👉इस विधि में छात्र और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है , सोच और संचार की क्षमता विकसित होती है तथा इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है।

👉अतः चर्चा विधि शैक्षणिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण विधि है क्योंकि इसमें छात्र अपनी शैक्षिक समस्याओं को शिक्षक के सामने प्रस्तुत करता है और शिक्षक से सीखता , समझता है।

🌺 कहानी कहने का तरीका :-

बच्चों को सरल और रोचक ढंग से भी शिक्षा दे सकते हैं।

👉शिक्षण , कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है।
जैसे इसमें छात्रों की शिक्षा को उनके वर्तमान दैनिक जीवन से संबंधित उदाहरणों और कहानी के लय में पढ़ाते हैं जिससे बच्चों को पढ़ाई गयी चीजें हमेशा के लिए याद हो जाती हैं।

👉इससे बच्चे की शब्दावली (शब्दकोष) बढ़ती है।
जब बच्चों को कहानी के रूप में पढ़ाते हैं तब हमारी एक नयी शब्दावली सामने आती है, अतः इन शब्दों को सुनकर बच्चे भी नये- नये शब्द सीखते हैं।

👉कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ा सकते हैं।
कहानी विधि के द्वारा बच्चों को आसानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को भी पढ़ा सकते हैं।

🌲 परियोजना पद्धति 🌲

इसमें विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है।

इसमें बच्चे समस्या का हल करके स्वभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।

1. 🌺 परियोजना विधि :-

अर्थात इस विधि में बच्चों को एक योजना बद्ध तरीके से शिक्षा दी जाती है। और बच्चों को भी अपने शैक्षिक कार्यों को एक योजनावद्ध तरीके से स्वयं करने पर बल दिया जाता है।

2.🌺 समस्या समाधान विधि :-

इस विधि में बच्चों को समस्या समाधान करने में प्रवीण किया जाता है, अतः बच्चों को स्वयं गलतियां करके सीखने पर बल दिया जाता है।

3. 🌺 पाठ्यपुस्तक विधि :-

इस विधि में छात्र अपनी पाठ्यपुस्तकों से पढ़ने में स्वयं स्वतंत्र होते हैं, शिक्षक के तरीके से नहीं बल्कि बो अपनी किताबों से अपने ढंग से पढ़ सकते हैं।

🌺✒️ Notes by – जूही श्रीवास्तव ✒️🌺

🌲शिक्षण पद्धतियां🌾

💐चर्चा विधि ( discussion method)…….

👉इस विधि में छात्रा और शिक्षक के बीच एक विषय पर मौखिक बातचीत होती है या बच्चों की सोच, संचार की क्षमता विकसित करती है इससे बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास होता है
मतलब इस विधि में छात्र और शिक्षक किसी भी एक टॉपिक पर विचार विमर्श करते हैं । विचार विमर्श से बच्चों में सोचने की क्षमता का विकास चरम स्तर पर होते हैं । इस विधि में छात्र और शिक्षक सक्रिय रहता है
इस विधि में छात्रों की सृजनात्मक शक्तियों का विकास होता है।

🌾🍁कहानी कहानी का तरीका……..
🍂👉शिक्षण कहानी कहने के रूप में करवाया था इससे बच्चों की शब्दावली बढ़ती है कहानी से भाषा और सामाजिक अध्ययन को पढ़ा सकते हैं। कहानी ऐसा हो कि बच्चों में रोचकता बड़े तथा सृजनात्मक क्षमता का विकास हो।
इस विधि से अलग-अलग विषय को भी पढ़ा जा सकता है जिसे भाषा और सामाजिक अध्ययन के प्रति दृष्टिकोण विकसित हो सके।

🌴परियोजना पद्धति (project method)……
💫👉इस पद्धति में विषय वस्तु के सभी पहलू को करके सीखने पर बल दिया जाता है ,जिसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वाभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।
इसमें बच्चा विषय वस्तु के किसी भी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है ताकि बच्चा तार्किक चिंतन कर सके।

⭐परियोजना पद्धति के निम्न प्रकार है
(1) परियोजना विधि
(2) समस्या समाधान विधि
(3)पाठ्यपुस्तक विधि

💫परियोजना विधि……..
🌴👉इसमें छात्र किसी भी प्रोजेक्ट को जो शिक्षक द्वारा सौंपा गया हो, उसे वास्तविक जीवन से जोड़कर अपने अनुभव से समस्या का हल निकालने के लिए समूह की सहयोग से सीखते हैं और हरेक समस्या का समाधान करते हैं। तार्किक चिंतन करने से बच्चे में अनुभव का विकास होता है ताकि बच्चा अपने अनुभव से और बेहतर करने की कोशिश करता है।

🌻समस्या समाधान विधि……

🌿👉इस विधि में बच्चों को समस्या समाधान करने के लिए शिक्षक द्वारा समस्या को सौंपा जाता हैं तथा बच्चा अपने अनुभव के आधार पर समस्या का समाधान करते हैं। इसमें छात्र चिंतन करके या शिक्षक की मदद से संश्लेषण विश्लेषण करते हुए समस्या खोजने का प्रयास करते हैं इस विधि में बच्चे में चिंतन शक्ति का विकास होता है।

⚡पाठ्यपुस्तक विधि………..
🌊👉इसमें बच्चा अपने अनुसार पाठ्य पुस्तक को पढ़ते हैं तथा चिंतन करते हैं जिससे बच्चे में तार्किक चिंतन का विकास होता हैं इसमें बच्चा किसी भी समय पुस्तक से ज्ञान अर्जित कर सकता है क्योंकि पाठ्य पुस्तक को किसी भी स्थान तथा किसी भी समय अध्ययन कर सकता है इस विधि में बच्चे केवल पाठ्यपुस्तक की मदद से शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। तथा इसमें बच्चे अपने अनुभव को विस्तारित कर सकते हैं।
🌲🥀🌴🙏Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌈🌸💥🌺🙏

🔆शिक्षण और अधिगम की पद्धतियां

⚜️चर्चा विधि (Discussion method)➖

▪️इस विधि में छात्र व शिक्षक मौखिक रूप से किसी भी विषय पर बातचीत करते है।
▪️जिससे छात्र की सोच तो विकसित होती है साथ ही साथ जो संचार करने की क्षमता है वह भी विकसित होती है।
▪️जिसके परिणाम स्वरूप एक प्रभावशाली उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास बच्चे का सामने आता है जिससे बच्चे का व्यवहार व व्यक्तित्व का पता चलता है।
▪️जब भी हम किसी विषय पर चर्चा की जाती है तो उस विषय की समझ या गहराई भी बढ़ती जाती है किसी भी विषय की गहराई तभी बढ़ना संभव है जब उस विषय के बारे में पूर्ण ज्ञान हो।

▪️बच्चा वाद-विवाद या चर्चा में केवल ज्ञान से ही आगे नहीं बढते बल्कि सही समय ,सही तरीके और सही सोच के साथ भी आगे बढ़ते हैं।

▪️यदि चर्चा के दौरान कोई भी बात या कोई भी बिंदु किस तरह से बोलना है या सही बात ,सही समय ,या सही तरीके ,सही अवसर से चर्चा ना की जाए तो वह बात या चर्चा का कोई महत्व नहीं होता और चर्चा में सम्मिलित लोगो का व्यक्तित्व कमजोर हो जाता है।

▪️जो चर्चा के प्रारंभिक शब्द है वो ही हमें बता देते हैं कि सुनने वाले या चर्चा में शामिल लोगों को हमारी चर्चा में आनंद आ रहा है या उसे ध्यान से सुन रहे हैं इसीलिए चर्चा करते समय शब्दों में सकारात्मकता एवं चेहरे के हाव-भाव में तेजस्वता, यशस्वता और ऊर्जा होनी चाहिए।

⚜️ कहानी कहने का तरीका➖
▪️यह भी एक भाव वाहक पद्धति है।
जब भी कहानी कहते हैं तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सुनाने वाला अपनी बात को इस तरह से कहे कि कही गई बात सुनने वाले के दिमाग में बैठ जाए।
जब कोई भी मैटेरियल जो कहानी के रूप में कहा जाता है तब बच्चों से प्रश्न पूछते हैं तब उनके जवाब बता देते हैं।

▪️जब भी शिक्षक कहानी कहते हैं तो नई-नई शब्द बच्चे सुनते हैं जिससे बच्चों का शब्दकोश बढ़ जाता है और अब वह भी व्याख्या करने में अपने शब्द भंडार से अधिक से अधिक शब्दों का प्रयोग करना सीख जाते हैं।
अर्थात
कहानी कहने के रूप में करवाया जाता है और इससे बच्चे की शब्दावली बढ़ती है।

▪️जब कोई 3 से 4 वर्ष के बच्चे को कहानी सुनाते हैं तो वह अपनी कल्पना से नहीं बल्कि केवल कहानी को सुनता है लेकिन यही कहानी जब 12 से 18 वर्ष के बच्चों को सुनाई जाती है तो वह उसे अपनी कल्पना से जस्टिफाई या उस कहानी के बारे में अपनी सोच से सम्बन्धित करता है।

▪️मुख्यत: कहानी कहने में भाषा शिक्षण और सामाजिक अध्ययन को अच्छे से पढ़ा सकते हैं जिसमे शिक्षक अपने भाव से कहानी को मौखिक रूप से सुनाता है या व्यक्त करता है।

⚜️ परियोजना पद्धति (project method)➖
▪️विषय वस्तु के सभी पहलुओं को करके सीखने पर बल दिया जाता है।
इसमें बच्चा समस्या का हल करके स्वाभाविक परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है।
▪️जब भी समस्या का समाधान या हल निकालते हैं तो समस्या के बारे में आधारभूत समस्त जानकारी होनी चाहिए जिससे जो समस्या दी गई है उसका उचित समाधान या हल निकाला जा सकें।
परियोजना पद्धति के अंतर्गत ही निम्न विधियां प्रयोग में लाई जाती हैं।

1. परियोजना विधि

इस विधि में छात्र परियोजना को चुनता है और
फिर इसको क्रियान्वित करने के लिए योजना बनाता है
योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन करता है और
क्रियान्वयन करने के पश्चात उसकी जांच और मूल्यांकन करता है
इस विधि में छात्र स्वयं करके सीखता है इससे छात्र का ज्ञान ज्यादा समय के लिए स्थाई रहता है।

◼️ समस्या समाधान विधि ➖
इसमें हम चीजों को देखते हैं समझते हैं और हमारे जो समस्या के तत्व प्रारूप और तरीके हैं उनको जानकर समस्या का समाधान निकालते हैं।

▪️समस्या का समाधान करके किया जाता है अर्थात यह विधि “करके सीखने” पर आधारित है।

◼️ पाठ्यपुस्तक विधि➖
पाठ्य पुस्तक के माध्यम, विषय वस्तु, ज्ञान व तथ्य के माध्यम से पढ़ाया जाता है।

▪️यह पाठ्यपुस्तक बच्चों के पास भी रहती है या उसकी उपलब्धता रहती है इसीलिए बच्चे स्वयं से भी अध्ययन कर सकते हैं या स्वयं से ही उसका नियंत्रण व ऑपरेट या उस पर अपना विश्लेषण कर सकते हैं।
यह विधि भी “करके सीखने पर” आधारित है अर्थात बच्चा इसमें स्वयं कार्य करके सीखते हैं।

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Notes By-Vaishali Mishra

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