💠💠 प्रगतिशील शिक्षा (progressive education) 💠💠 प्रगतिशील शिक्षा शिक्षक की पारस्परिक शैली के लिए एक प्रतिक्रिया है। यह एक शैक्षणिक आन्दोलन है कि समझ सिखाया जा रहा है कि किमत पर सिखने, तथ्यों पर अनुभव को महत्व देता है। 🔷 प्रगतिशील शिक्षा पद्धति को विकसित करने वाले व्यक्ति अमेरिकिन मनोवैज्ञानिक जॉन डी वी है। 🎲 इस शिक्षा का उद्देश्य वैयक्तिक भिन्नता को ध्यान में रखते हुए बालकों का समग्र विकास करना है। ताकि विकास के दौर में कोई भी बालक पीछे ना रह जाए। 🔰 प्रगतिशील शिक्षा में निम्न गुण पाये जाते हैं:- 🎲 करके सिखने पर बल ➖ 🔸हाथ से किये जाने वाले कार्य – इसमें बालक स्वयं समस्या का समाधान निकालने के लिए अभ्यास करके सिखता है। 🔸अनुभाव से सिखना – इसमें बालक अपने अनुभव के माध्यम से समस्या का समाधान निकालता है। 🎲 विषयगत इकाई पर केन्द्रित एकीकृत पाठ्यक्रम – इसमें किसी क्षेत्र विशेष को ध्यान में रखते हुए एकीकृत शिक्षा प्रदान की जाती है। 🎲 शिक्षा में उद्यमिता का एकीकरण – शिक्षा को हमें किसी भी उद्योग से जोड़कर के शिक्षा प्रदान कराते हैं। 🎲 समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिन्तन पर बल – इसमें बालक समस्या के समाधान के लिए उस समस्या के पक्ष और विपक्ष दोनों को ध्यान में रखते हुए ही समस्या का समाधान खोजते हैं। 🎲 सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलो का विकास – इसमें समूह में रह कर के शिक्षा दी जाती है इसमें इस प्रकार से शिक्षा दी जाती जिससे समाज में रहकर के बालक शिक्षा ग्रहण कर सकें और बालक समाज के साथ आपसी सम्बन्धों के साथ शिक्षा ग्रहण कर सकें। 🎲 रटे रटाए ज्ञान के बदले समझदारी और क्रियाकलापों पर आधारित शिक्षा देना – इसमें बालक को रटने के बजाय ऐसा ज्ञान देना चाहिए जिस में बालक अपनी समझ के अनुसार कुछ क्रियाकलाप कर के शिक्षा ग्रहण कर सकें। 🎲 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक – बालक को सहयोगात्मक शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जिस से वह आगे बढ़ सकें। 🎲 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा – बालकों को इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए कि वह समाज में रहकर के अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए निभाई जाएं। 🎲 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्यो के अनुरूप हो – बालक को उसकी निजी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही व्यक्तिगत शिक्षा दी जानी चाहिए जो उसकी जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो। 🎲 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक सेवा और सेवा की शिक्षा देने वाली परियोजनाओं को सम्मिलित करना 🎲 विषय सामग्री का चयन करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इससे भविष्य की किन किन जरुरतों की पूर्ति होगी। 🎲 पाठ्य-पुस्तकों में बंधी बंधाई सामग्री पढ़ाने पर जोर ना देना बल्कि विभिन्न प्रकार की सामग्री पढ़ाने पर बल देना चाहिए। 🎲 बालक को ऐसी शिक्षा दी जाए जो जीवन पर्यन्त चले। 🎲 बालक के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन। 📝📝 Notes by ➖ ✍️ Gudiya Chaudhary 🍀 प्रगतिशील शिक्षा 🍀 🌈 प्रगतिशील शिक्षा के प्रवर्तक *जान डीवी है* प्रगतिशील शिक्षा का का उद्देश्य बालक की शक्तियों का विकास करना है व्यक्तिक विभिन्नता के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया में भी अंतर रखकर इस उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है- ★ प्रगतिशील शिक्षा :- शैक्षिक आंदोलन जोकि निम्नानुसार हैं 🌀 *1 *करके सीखना* ➖ इसमें बच्चा किसी भी कार्य को स्वयं से करता है और प्राप्त होने वाले अनुभवों से सीखता है … 🌀*2 *विषय गत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम*➖ व्यक्तिक विभिन्नता को ध्यान रखते हुए उसी पाठ्यक्रम को पढ़ाना है जिसमें बच्चा रुचि लेता है और उस कार्य को बेहतर तरीके से कर पाता है। 🌀 *3 उद्यमिता का एकीकरण*➖ उद्यमिता अर्थात व्यवसाय बच्चे को किसी ना किसी उद्योग या काम से जोड़ना है जिसमें वह खुद का मालिक हो अर्थात हम यह कह सकते हैं कि बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जिसमें वह कुछ ना कुछ करके खुद के पैर पर खड़े हो । 🌀 *4 समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल*➖ इसमें बच्चों को किसी भी समस्या में शामिल करना है और फिर उनके विचार मत जाना है इससे उनके अंदर समस्या समाधान करने की क्षमता विकसित होगी कि वह किसी भी समस्या के प्रति आगे आने वाले समय में समस्या समाधान कर पाए । 🌀 *5 सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास*➖ बच्चों को समूह में खेल करवाना , ताकि वह एक दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ,कब किस बात पर कैसी प्रतिक्रिया देना है, आपस में एक दूसरे का सहयोग करना एक दूसरे से बात करना, नैतिक विचारों को समझना, बच्चों को समूह में यह सब कार्य करने के लिए देंगे या खेलने को कहा जाएगा तो वह एक बेहतर सामाजिक कौशल विकास होगा। 🌀 *6 रटे रटाए विद्या के बदले समझ और कार्यन्वन की विद्या को आधार बनाया जाता है* ➖ अर्थात कहने का तात्पर्य है कि बच्चों को हमें बिल्कुल भी रटने पर जोर नहीं देना है बल्कि उन्हें समझ को आधार बनाकर सिखाना है क्योंकि किसी भी चीज को याद करने से वह स्मृति से जल्दी निकल जाती है और जो चीजें हम प्रैक्टिकल या समझ के आधार पर करते हैं वह हमें आसानी से या जल्दी नहीं भूलती हैं । 🌀 *7 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक*➖ बालको के सहयोगात्मक और सहकारी तकनीकों का विकास करना चाहिए ताकि बच्चा आगे बढ़ सके और सीख सके । 8 👉 *सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा* ➖ कोई भी कार्य हो यदि हम उसे अपनी जिम्मेदारी समझकर करते हैं तो अच्छा होता है इसलिए हमें बच्चों के मन में भी यह सोच पैदा करनी है कि यदि हम उस कार्य को अपना समझ कर करते हैं तो एक ना एक दिन हम उस काम में जरूर बेहतर होंगे इसलिए कार्य को खुद का बास(मालिक) समझकर करना है और घमंड नहीं करना है उस कार्य को हम अच्छे तरीके से करें गे तो निश्चित ही परिणाम परिणाम बेहतर होगा। 9 👉 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्यों के अनुरूप हो । 10 👉 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना चाहिए। 11 👉 विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि इससे भविष्य की किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। 12 👉 पाठ्यवस्तु में बधी बधाई सामग्री ना पढ़ाएं विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर दें 13 👉 बच्चों के शैक्षणिक विकास का समय समय पर मूल्यांकन भी करें। 14 👉 ऐसी शिक्षा दें जो बच्चों के जीवन पर्यंत तक काम आए धन्यवाद ✍️ नोट्स बाय प्रज्ञा शुक्ला 📖 📖 प्रगतिशील शिक्षा 📖 📖 (Progressive education) 🌺🌺प्रगतिशील शिक्षा🌺🌺 प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षणिक आंदोलन है, इसके अंतर्गत बच्चों की शिक्षा के संबंधित ही चर्चा की गई है। प्रगतिशील शिक्षा का अर्थ है, कि हम किस प्रकार से बालक को आगे बढ़ा सकते हैं। बालक की शिक्षा को पूर्ण रूप से व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जाता है। बालक रटी रटाई चीजों को एवं किताबी ज्ञान को ही महत्व ना दें। बल्कि अपने दैनिक जीवन से संबंधित विषयों एवं तथ्यों पर भी ध्यान दिया जाए। प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत इन्हीं सभी पहलुओं को महत्व दिया गया है। जिसका वर्णन निम्नलिखित कुछ मुख्य बिंदुओं के आधार पर हैं:- 🍃🍂 करके सीखना~ बालक को किसी भी कार्य को या किसी भी समस्या को स्वयं से करके सीखने में जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वह किसी अन्य के द्वारा या देखकर प्राप्त नहीं होते है। अर्थात हम इसको दो बिंदुओं पर आधारित मानते हैं। जो कि निम्नलिखित हैं:- ● हाथ से किए जाने वाले कार्य अर्थात हस्तकला पर जोर दिया जाता है। ● स्वयं से सीखे हुए या प्रयोग किए हुए अनुभवों के आधार पर सीखने पर बल दिया जाता है। 🍂🍃 विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम~ इसके अंतर्गत पाठ्यक्रम को विषय से एकीकृत करके ही पूर्ण कराया जाना चाहिए। क्योंकि अगर एक सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम नहीं रहेगा। तो बालक विचलित रहेगा, कि उसे शिक्षण प्रक्रिया कहां से प्रारंभ करनी है। और कहां तक पूर्ण करनी है, इसके लिए यह आवश्यक है, कि एक एकीकृत एवं सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम होना चाहिए। 🍃🍂 उद्यमिता का एकीकरण~ उधमिता का अर्थ होता है, कि व्यवसाय से संबंधित है। अर्थात व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से किसी भी रोजगार में लगा रहे हैं। अपना जीवन व्यतीत करने के लिए स्वयं अपने द्वारा ही कार्य कर पाए। उसे अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरी करने के लिए वह अपने द्वारा ही किए गए कार्यों से पूर्ण कर सके। जैसे कि किसी भी प्रकार के छोटे-मोटे उद्योगों के द्वारा बेरोजगार पा सके। स्वयं के ही द्वारा कई उद्योगों व छोटे से कारखानों का निर्माण कर सके। जिससे कि वह अपने जीवन की प्रक्रिया हमें आर्थिक कमी को महसूस ना कर सके। 🍂🍃 समस्या समाधान व आलोचनात्मक चिंतन पर बल दिया जाए~ प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बालक किसी भी समस्या का समाधान करता है, तो वह उस समस्या के सभी पक्षों पर ध्यान दें। जिससे कि बालक में आलोचनात्मक चिंतन का विकास हो सके। यह समस्या के केवल एक ही पहलू को ना देखें। बल्कि सभी पहलुओं को देखकर किसी भी प्रकार का निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर पाए। 🍃🍂 सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास करना~ बालक में समूह में रहकर कार्य करने की क्षमता भी विकसित की जानी चाहिए। जिससे कि बालक सामूहिक कार्य कर पाए। और सामाजिक कौशलों का भी विकास किया जाना चाहिए। क्योंकि अगर व्यक्ति किसी कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से कर तो सकता है। लेकिन अन्य व्यक्तियों के समक्ष में उसे प्रस्तुत नहीं कर पाता है, जिसे हम सामाजिक अलगाव कह सकते हैं। उदाहरण एक व्यक्ति अकेले कमरे में एक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, या वह अकेले ही कमरे में अच्छा नृत्य कर सकता है। लेकिन उसे वही प्रदर्शन या वही नृत्य कुछ लोगों के सामने करने के लिए किया जाए, तो वह नहीं कर पाएगा। अर्थात इसी को हटाने के लिए प्रगतिशील शिक्षा में प्रयास किए गए हैं। 🍂🍃 रटा रटाया ज्ञान के बदले समझदारी व कार्य करना या क्रियान्वयन विद्या को आधार माने~ रटा रटाया ज्ञान अर्थात कहने का अर्थ है, कि केवल किताबी ज्ञान के पर ही बालक की शिक्षा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। बल्कि उसके जगह पर उसे उस विषय वस्तु को समझकर व अपने द्वारा किए गए कार्यों में लाना चाहिए। तो उस समस्या का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। क्योंकि वाला कटे हुए ज्ञान की जगह पर किसी कार्य को कर कर सीखेगा, तो उसके लिए अधिक स्थाई ज्ञान हो जाएगा। 🍃🍂 सहयोगात्मक व सहकारी शिक्षण तकनीक~ बच्चों में ऐसी तकनीक या विकसित करें। जो कि उनमें सहयोग की भावना का विकास कर सकें। बालक समूह में कार्य करेंगे तो वह एक दूसरे के साथ सहयोग अवश्य ही करेंगे। अर्थात हमें बच्चों के अंतर्गत एक दूसरे की मदद करने की भावना जागृत किए जाने का कार्य प्रगतिशील शिक्षा के माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं। हम बच्चों में सहकारी तकनीक यों को विकसित कर कर उन्हें एक उचित विकास की दिशा दे सकते हैं। 🍂🍃 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा~ बालकों की शिक्षा में ऐसे विषयों को भी संबंधित हो या जोड़ा जाना चाहिए। जो कि समाज से जुड़े हुए हो, उसी के आधार पर हम उन्हें सामाजिक शिक्षा दे पाएंगे। बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी होना अनिवार्य है, क्योंकि व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में जीवन व्यतीत करता है, अर्थात उसके अंदर सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता होनी चाहिए। इसी तरह लोकतांत्रिक हो पाएगा। अन्य लोगों की भावना को समझ पाएगा, एवं उनके समक्ष भी अपने भाग को प्रस्तुत कर पाएगा। यह सभी प्रावधान हमें प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत मिलते हैं। 🍃🍂 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए, जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो~ प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत शिक्षा दी जानी चाहिए। क्योंकि हर व्यक्ति भिन्न-भिन्न तरीकों से सीखते हैं। व्यक्तियों में व्यक्तिक विभिन्नताएं पाई जाती है। उसी के आधार पर हुआ है। हमें हर व्यक्ति को अलग-अलग शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। जो उस व्यक्ति के लक्ष्य से जुड़ी हुई हो, उसके स्वयं के लक्ष्य के अनुसार होना चाहिए। 🍂🍃 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना~ बालक के पाठ्यक्रम में दैनिक कार्यों को जोड़ा जाना चाहिए, एवं उन कार्यों में समुदाय या सामूहिक कार्यों को करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।षएवं उनमें दूसरों के प्रति सेवा का भाग भी विकसित किया जाना चाहिए। ताकि उनमें सेवा शिक्षा परियोजना का भी विकास हो जाए। इसी तरह बालक के विकास की संपूर्ण प्रक्रिया हो पाएगी। 🍃🍂 विशेष सामग्री का चयन~ बच्चों को इस बात का ज्ञान कराना आवश्यक है, कि वह विषय सामग्री का चयन करने के लिए इस बात पर ध्यान दें, कि भविष्य में इससे किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सकती है, अर्थात उनके भविष्य से संबंधित ही उनको ज्ञान कराने की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। ताकि वह भी अपने जीवन के लिए संबंधित कार्य कर सकें। 🍂🍃 पाठ्यवस्तु से संबंधित ज्ञान~ पाठ्यपुस्तक या पाठ्यवस्तु में बनी बनाई सामग्री ना पढ़ाना अर्थात जो पाठ्यवस्तु में दिया हुआ है। बल्कि इसके अलावा विभिन्न प्रकार की शिक्षा सामग्री या नए तरीकों से पढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। ताकि बच्चे कुछ नया सीख सकें। एक ही चीज से सीखने पर व्यक्ति की विशेष वस्तु पर रुचि समाप्त हो जाती है। एवं अगर हम पाठ्य पुस्तक में लिखी हुई चीजों को बच्चे के दैनिक जीवन से संबंधित कार्यों से जुड़े हुए तथ्यों से जोड़ा जाए तो वह उसे रुचि के साथ पड़ेगा। 🍃🍂 शिक्षा ऐसी दे, जो जीवन पर्यंत चले~ प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बच्चे को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए। जो कि उसे जीवन पर्यंत मददगार साबित हो ना कि ऐसी शिक्षा दें। जो कि सिर्फ तब तक ही बच्चे के साथ रहे जब तक वह पड़ता है, बल्कि उसे पूरे जीवन भर प्रत्येक जगह पर उस व्यक्ति को प्रत्येक समस्या के समाधान में सहायता करें। तभी शिक्षा का सार्थक अर्थ निकलेगा। 🍂🍃 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन भी करें~ बच्चे के विकास के लिए हमें बच्चे के विभिन्न पहलुओं का विकास करना होगा। तभी हम उसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। इसके लिए हमें सबसे पहले उसके शिक्षक विकास का मूल्यांकन करना होगा। इस आधार पर हम उस बच्चे की क्षमता का पता लगा सकते हैं, कि उसे किस प्रकार की समस्या है, उसके पश्चात हम उसका उपचार भी कर पाएंगे। 📚📚📘 समाप्त 📘📚📚 ✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻 🌻🌿🌺🙏🏻🌷🌻🌿🌺🙏🏻🌷🌻🌿🌺🙏🏻🌷🌻🌿🌺🙏🏻 💠🌀💠 *प्रगतिशील शिक्षा*( progressive education) 💠🌀💠 प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षणिक आंदोलन है जो 19 वी सदी के अंत में शुरू हुआ था वर्तमान समय में यह विभिन्न रूपों में बनी हुई है। प्रगतिशील शिक्षा में बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए या उनकी रूचि या प्रयास को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए जोर दिया गया है। 🍃🍂 प्रगतिशील शिक्षा आधुनिक शिक्षा पद्धति पर आधारित है *जॉन डीवी को प्रगतिशील शिक्षा पद्धति के पिता माना जाता है* प्रगतिशील शिक्षा एक जटिल पारंपरिक शिक्षा प्रणाली है जो एक विकल्प के रूप में उभर कर आई है प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बालको का समग्र विकास करना है और इस शिक्षा में बालकों के व्यक्तिगत विभिन्नता को भी ध्यान में रखा गया है ताकि विकास के दौर में कोई भी बालक पीछे ना रह जाए शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न विधियों का प्रयोग भी किया जाता है। 📚 प्रगतिशील शिक्षा में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं➖ 👉🏻1️⃣ *करके सीखने पर बल*➖ 🍃 *हाथ से किए जाने वाले काम* ➖ इसमें बालक स्वयं ही कार्य करता है अर्थात खुद ही समस्या का समाधान निकालने के लिए प्रयास भी करता है और इस प्रकार हाथ से किए जाने वाले काम से वह सीखता है। 🍃 *अनुभवों से सीखना*➖ इसमें बालक विभिन्न अनुभवों के माध्यम से सीखने का कार्य करता है। 👉🏻2️⃣ *विषय गत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम*➖ अर्थात बालकों के व्यक्तिगत विभिन्नता को ध्यान में रखते हुए ही शिक्षा देना है जिसमें बच्चे की रूचि हो । 👉🏻3️⃣ *उद्यमिता का एकीकरण*➖ अर्थात प्रगतिशील शिक्षा में बच्चे को किसी न किसी व्यवसाय या उद्योग या काम से जोड़ना है जिसमें वह स्वयं कुछ करके भविष्य में अपना जीविकोपार्जन कर सके। 👉🏻4️⃣ *समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल*➖ अर्थात प्रगतिशील शिक्षा में बच्चे को समस्या के समाधान में सम्मिलित करना या समस्या का समाधान निकालने के लिए अवसर प्रदान करना जिससे बालक में अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की क्षमता विकसित हो जाए। आलोचनात्मक चिंतन अर्थात समस्या का समाधान निकालते समय बालक किसी भी विषय के पक्ष या विपक्ष चीजों के ऊपर विचार कर सके। 👉🏻5️⃣ *सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास*➖ प्रगतिशील शिक्षा में बच्चों को समूहों में विभाजित करके सामूहिक कार्य जैसे खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाना चाहिए ताकि उनमें एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावना विकसित हो जाए। एक दूसरे के प्रति अच्छा व्यवहार , नैतिकता , आदि से बालक में सामाजिक कौशल विकसित होंगे। अर्थात सामाजिक कौशल विकसित होने से बालक समाज के अच्छे नागरिक बन कर समाज के हित के लिए कार्य करेंगे। 👉🏻 *6 रटे रटाए विद्या के बदले समझ और कार्यान्वयन की विद्या को आधार बनाया जाए*➖ अर्थात इसमें हमें बालक को रटन विद्या से दूर रखना है और ऐसी शिक्षा या ज्ञान देना है जिसमें बालक अपने समझ को आधार बनाकर कार्यान्वयन अर्थात कुछ प्रैक्टिकल या क्रियाकलाप करके शिक्षा अर्जित करें। 👉🏻 *7 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक*➖ इसमें बालक को ऐसी शिक्षा प्रदान करना है जिसमें बालक एक दूसरे का सहयोग करते हुए अधिगम करें और सरकारी शिक्षण तकनीक की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे छात्रों में एक साथ काम या एक छोटे से समूह में विशिष्ट कार्य करने के लिए सक्रियता आए। 👉🏻 *8 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा*➖ इसमें बालकों को इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए कि वह समाज के लिए एक अच्छा नागरिक बनकर समाज में ही रहकर समाज के नियमों का पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारियों को समझे । और निष्ठा पूर्ण अपनी जिम्मेदारी को निभाए। 👉🏻 *9 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो व्यक्ति के निजी लक्ष्य के अनुरूप हो*➖ अर्थात इस में बालक को व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो बालक के निजी आवश्यकताओं या जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है कि बालक को क्या-क्या आवश्यकताएं हैं, यह शिक्षा बालकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। 👉🏻 *10 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना*➖ अर्थात इसमें बालकों की शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम ऐसा बनाया जाए जो बालकों की दैनिक जीवन से संबंधित हो और इस पाठ्यक्रम में सामुदायिक सेवा और सेवा शिक्षा परियोजना को भी सम्मिलित करना चाहिए। 👉🏻 *11विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि उससे भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी*➖ अर्थात इस में बालकों को अपनी विषय सामग्री का चयन करने का पूर्ण रूप से अवसर दिया जाता है और वह विषय सामग्री का चयन करते समय अपने भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करता है उसे भविष्य में किस किस चीज की आवश्यकता है। 👉🏻 *12 पाठ्यवस्तु में बंधी बधाई सामग्री ना पढ़ाएं, विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर दें* ➖ अर्थात बालकों को केवल विषय वस्तु से ही ज्ञान लेने पर जोर ना देकर बल्कि विभिन्न प्रकार के शिक्षण सामग्री या विभिन्न तरीकों से पढ़ाने पर जोर देना चाहिए। 👉🏻 *13 प्रगतिशील शिक्षा में शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यंत चले*➖ अर्थात बालकों को ऐसी शिक्षा दी जाए जो उनके लिए जीवन पर्यंत काम आए। 👉🏻 *14 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें* 📚📚 ✍🏻 Notes by manisha gupta ✍🏻📚 ✍️ प्रगतिशील शिक्षा✍️ 🌸प्रगतिशील शिक्षा के प्रवर्तक जॉन डीवी हैं ।प्रगति शिक्षण में पाठ्यक्रम के रूप में क्रांति के रूप में आए प्रगतिशील शिक्षा को शैक्षिक आंदोलन भी कह सकते हैं आंदोलन का मतलब हुआ जो प्रगति शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को बहुमुखी विकास हो। ंव्यक्तित्व भिन्नता के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया में भी अंतर रखकर इस उद्देश्य को पूरा कर सकते हैं। 🏵प्रगतिशील शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए है जो कि निम्नलिखित है:- 1. 💎करके सीखना—इसमें बच्चा खुद कार्य करके सीखता है और अपने अनुभव से सीखता है खुद के अंतर्गत कार्य करते हैं। 2. 💎*विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम—* विषय गति कहां पर पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत विभिन्नता को संस्कृत करके एक विकृत करके पढ़ाना चाहिए जिसमें बच्चा रुचि लेता है और उससे बेहतर तरीके से कर पाता है। 3. 💎*उघमिता का एकीकरण—* उद्यमिता का एकीकरण से मतलब है कि बच्चे खुद से कार्य करना सीखे अपना व्यवसाय कर सके अपना बिजनेस से कर सके किसी अभियान के लिए भी कार्य कर सकें ऐसी पढ़ाई हो जो हम किसी न किसी भी विधि में कार्य करें जैसे —वोकेशनल कोर्स 4. 💎*समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल —* अपने बच्चे के समस्या को जानना है उनके अंदर क्या समस्या है समाधान करने की क्षमता विकसित करनी है आलोचनात्मक पक्ष और विपक्ष दोनों होते हैं समझना है उस पर अपनी टिप्पणी दर्ज करना है और उसमें आत्म चिंतन पर बल देना आलोचनात्मक हैं हम दोनों पक्ष रखते हैं सही भी और गलत भी दोनों तरफ से हम अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करते हैं। 5. 💎*सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास—* बच्चों से सामूहिक आर्य करवाएंगे जिससे उनके कौशलों का विकास होगा वह एक दूसरे के साथ व्यवहार करना भी सीखते हैं कब किस बात पर कैसी प्रतिक्रिया देना है आपस में एक दूसरे का सहयोग करने से बात करने से नैतिक विचारों से बच्चों को समूह में यह कार्य करने के लिए देंगे खेलने को कहेंगे उनका बेहतर समाजिक कौशल का विकास होगा। 6. 💎 रटे-रटाई विद्या के बदले समाज और कार्य ने 1 की विद्या को आधार बनाया जाता है—* बच्चे को हम बिल्कुल भी रटने पर जोर नहीं देंगे उन्हें समझ के आधार बनाकर दिखाएंगे कोई भी चीज उनको याद करने के नहीं कहेगे क्योंकि उन्हें स्मृति से जल्दी निकल जाती है उनसे हम प्रेक्टीकल और समझ के आधार पर कार्य करें जिससे वह जल्दी भूल नहीं सकते हैं। 7 💎प्रयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक—* बालकों को हम सहकारी शिक्षण तकनीक से उन्हें शिक्षा देंगे जिससे वह प्रगतिशील शिक्षा में स्वास्थ्य माइंड से सीखते हैं और स्वस्थ माइंड से सहयोगात्मक कार्य करने को प्रेरित होते हैं बहुत कम लोग सहयोगात्मक कार्य करते हैं बहुत लोग सिर्फ अपने पर ही सीमित रहते हैं। 8 💎*सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा—* हमें अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए बॉस बनना चाहिए किसी से मांगना नहीं चाहिए खुद को करना चाहिए Boss मतलब जिम्मेदारी लेना चाहिए तब हम बोस बनने। बोस का मतलब है अहंकार नहीं होता है जिम्मेदारी लेना होता है इसलिए कार्य को खुद करना चाहिए घमंड नहीं करना चाहिए अगर हम किसी कार्य को अच्छी तरीके से करते हैं तो उसका परिणाम भी हमें उसका बेहतर ही मिलेगा। 9.💎 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए तो व्यक्ति की निजी लक्ष्य के अनुरूप हो। 10. 💎*दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना चाहिए* प्रगति शिक्षा में हम यह देखते हैं कि कैसे किसी कार्य को करते हैं समझते हैं प्रगतिशील का मतलब है कि बच्चों ने कितना लक्ष्य अपना निर्धारित किया बच्चे उस चीज को जल्दी विकास करते हैं जैसा हम चाहते हैं नहीं तो कोई फायदा नहीं है इसे बचा खुद को कार्य करने का अवसर देते हैं जिससे उनके शैक्षिक विकास होता है। 11.💎 सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है इसे भविष्य की पूर्ति होगी किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी । जो हमारा पढ़ाई है भविष्य की ओर ए पूर्ति करें वह अपनी आवश्यकताओं के लिए समाज की आवश्यकताओं के अनुसार अपने कौशलों में रचनात्मक परिवर्तन कर सके तभी प्रभावी भी होगी। 12.💎पाठ्यवस्तु से संबंधित ज्ञान पाठ्यवस्तु में बंधी बधाई सामग्री ना पढ़ाई विभिन्न प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से बढ़ाने पर जोर दें केवल किताबी कीड़ा ना बनाएं पीपीटी को रटवा ना यह सिर्फ किताब को पढ़ाना यह संतुष्टि नहीं है प्रगतिशील शिक्षा में किताबी लाइन नहीं होनी चाहिए उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर पढ़ाना चाहिए। 13.💎 शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यत चले-प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बच्चे को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए जो उनको जीवन भर इतने मददगार हो जो कि सिर्फ तब तक ही बचे के साथ ना रहे जब तक वह पढ़ते रहे बल्कि उसे पूरे जीवन भर पढ़ते एक जगह पर उससे समस्या समाधान में वह सहायता करें तभी शिक्षा का सार्थक निकलेगा। 14.💎 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन भी करें- बच्चे के विकास के लिए हमें बच्चे के विभिन्न पहलुओं का विकास करना चाहिए तभी हम उसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर पाएंगे इसके लिए हमें सबसे पहले उसके शिक्षा के विकास का मूल्यांकन करना होगा इस आधार पर हम उस पर बच्चे की क्षमता का पता लगा सकते हैं फिर उसे किस प्रकार की सहायता चाहिए कैसे सहायता देना है हम उस पर उपचार करेंगे। Notes By :-Neha Roy 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🌱🍁प्रगतिशील शिक्षा 🍁🌱 (Progressive education) 🌟 प्रगतिशील शिक्षा के जनक~ “जॉन डी. वी.” 🌲 प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षणिक आंदोलन है इस प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य बालकों का समग्र विकास करना है इस प्रणाली में व्याप्त विभिन्न नेताओं को भी ध्यान में रखा गया है ताकि विकास के दौरान कोई भी बालक पीछे ना रह जाए इसीलिए प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत चीनी सभी पहलुओं को महत्व दिया गया है। 🌟करके सीखना~ इसमें बालक किसी भी कार्य को स्वयं से करके सीखने में जो अनुभव आपके होते हैं उन के माध्यम से सीखता है। इस शिक्षा में हाथ से किए जाने वाले कार्य अर्थात हस्तकला पर अधिक जोर दिया जाता है तथा उससे प्राप्त अनुभवों से बालक सीखता है। 🌟🌱विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम- इसके अंतर्गत पाठ्यक्रम को विशेष एकीकृत करके पूर्ण कराया जाता है। 🌟🌱उद्यमिता का एकीकरण~ “उद्यमिता का अर्थ है कि किसी भी उद्योग से जुडना।” 🌟🌱 समस्या समाधान व आलोचनात्मक चिंतन पर बल दिया जाए ~ प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बालक समस्या का समाधान करता है तथा समस्या के सभी पक्षों को देखता है और उसमें आलोचनात्मक के बारे में बताता है की क्या सही करने की जरूरत है आलोचनात्मक का अर्थ यह नहीं है कि दोनों में से किसी एक की आलोचना करना अर्थात आलोचनात्मक चिंतन का तात्पर्य है कि उसमें इंप्रूवमेंट करना। 🌟🌱 सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास- प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत बालक को समूह में रहकर कार्य करने की भावना विकसित करना जिससे बालक समूह में कार्य कर सकें और सामाजिक कौशलों का विकास करना जिससे कि वह समाज में रहकर समाज के लोगों के साथ तालमेल उठा सकें। 🌟🌱 रटे रटाए विद्या के बदले समझ को क्रियान्वयन की विद्या को आधार बनाया जाए~ प्रगतिशील शिक्षा के अंतर्गत हम बालकों को रतन प्रणाली से दूर रखते हैं और बच्चे को समझ को आधार बनाकर क्रियान्वयन करने पर बल देते है। 🌟🌱 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीकी:- इसमें बालक को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे बालक एक दूसरे को सहयोग करें। 🌟🌱 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा- प्रगतिशील शिक्षा में हम बालकों को ऐसी शिक्षा देंगे जिससे वह रह रहे समाज की जिम्मेदारियां को निभाने की क्षमता होनी चाहिए। लोकतांत्रिक भावना का विकास करना जिससे वह समाज मे रह रहे लोगो की भावना को समझ सकें। 🌟🌱 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो- प्रत्येक व्यक्ति में व्यक्तिगत विभिन्नता पाई जाती है, हमें उसी के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत विभिन्नता के अनुरूप ही शिक्षा दी जानी चाहिए। जिससे वह शिक्षा उसके निजी लक्ष्यों सें ज़ुड़ी हो। 🌟🌱 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना- बालक के पाठ्यक्रम में दैनिक कार्य को जोड़ना चाहिए ताकि उनके कार्यों में सामूहिक कार्य करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जिससे वह दूसरों के प्रति सेवा की भावना विकसित करें। 🌟🌱 प्रगतिशील शिक्षा में विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि इससे भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी उसके अनुसार ही बालक को शिक्षा देते हैं। 🌟🌱 प्रगतिशील शिक्षा में पाठ्यवस्तु में बनी बनाई सामग्री को ना पढ़ाएं विविध प्रकार की शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर देते हैं बालक को केवल किताबी ज्ञान ना दें उसे बाहरी वह एक्स्ट्रा ज्ञान दे जिससे बच्चा किताबी कीड़ा ना बन सके। 🌟🌱 प्रगतिशील शिक्षा में बालकों की ऐसी शिक्षा दी जाती है जो उनके जीवन पर्यंत चलती है। बच्चों को नैतिक शिक्षा से जोड़ते हैं तथा बच्चों महमूद सोच को बढ़ावा देकर सृजनात्मकता विकसित करते हैं 🌟🌱 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें। 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 ✍🏻NOTES BY:- SHASHI CHOUDHARY 🙏🙏🙏🙏🙏 🔊 प्रगतिशील शिक्षा🔊 प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षणिक आंदोलन है यह 19 वी सदी के अंत में शुरू हुआ था प्रगतिशील शिक्षा कई रूपों में देखने को मिलती है आधुनिक शिक्षा पद्धति के आधार पर जॉन डीवी को प्रगतिशील शिक्षा का पिता माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा के विषय में कुछ बिंदु इस प्रकार हैं 1- करके सीखना-/ करके सीखने के अंतर्गत हाथ से किए जाने वाले काम और अनुभवों से सीखना , बालक समस्या का समाधान पाने के लिए वह खुद से उपाय ढूंढता है और खुद से करने पर उसे अनुभवों की प्राप्ति भी होती है जिससे वह सीखता है 2- विषय गत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम 3- उद्यमिता का एकीकरण 4- समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल देना-/ किसी भी वस्तु पर उसके पक्ष या विपक्ष के बारे में सोचना 5- सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास करना 6 रटी रटाई विद्या के बदले समझ और कार्यान्वयन की विद्या को आधार बनाया जाए रटी रटाई शिक्षा नहीं दी जाए क्योंकि ratan विद्या स्थाई नहीं होती समझकर सीखा हुआ स्थाई होता है 7- सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक 8- सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा देनी चाहिए इसके अंतर्गत बच्चे को समाज के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए use अपने आप को समाज के प्रति जिम्मेदार होकर कार्य करना चाहिए बच्चे के अंदर लोकतांत्रिक भावना का विकास करना जिससे वह समाज में लोगों की भावनाओं को भली-भांति समझ सके 9- व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो 10- दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना चाहिए सामुदायिक से सहयोग की भावना और सेवा शिक्षा से सेवा का भाव जागृत हो 11- विषय सामग्री का चयन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि इससे भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी बच्चों को इस प्रकार की शिक्षा देनी चाहिए जो उन्हें भविष्य में भी काम आए 12- पाठ्यवस्तु में बंधी बंधाई सामग्री ना पढ़ाएं विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से बढ़ाने पर जोर दें बच्चों को पाठ्यपुस्तक तक ही सीमित ना रखें उन्हें विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्रियों या विभिन्न तरीके से पढ़ाएं जिससे कि उन्हें व्यवहारिक जीवन का ज्ञान भी मिले उन्हें ऐसा ज्ञान दे जो उनके जीवन में हर क्षेत्र में काम आए 13- शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यंत चले- बच्चों को ऐसे शिक्षा देनी चाहिए जो जीवन पर्यंत चलें वह किताब तक सीमित ना रहे जिसे वह भूले ना ऐसी शिक्षा जो उन्हें हमेशा याद रहे और वह अपने जीवन में अपने व्यवहार में अपनाकर एक श्रेष्ठ नागरिक बन सकें 14- बच्चों के शैक्षणिक विकास का Notes by✍🏻 ✍🏻ritu yogi ✍🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 प्रगतिशील शिक्षा प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षिक आंदोलन है इसके जनक जॉन डीवी है प्रगतिशील शिक्षा में निम्न बातों पर जोर दिया गया है 1.करके सीखना -जो काम हाथ से किया जाता है जिसे हम खुद करते हैं तो उससे सिखा हुआ ज्ञान अधिक स्थाई रहता है ,अनुभव से सीखना भी अधिक स्थाई रहता है। 2.विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम होना चाहिए 3.बालकों को उद्यमिता का एकीकरण अर्थात व्यवसायिक शिक्षा दी जानी चाहिए (बालकों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो उनमें भविष्य में जीवन निर्वाह करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करें। जिससे कि वह अपना भविष्य का गुजारा आसानी से कर सकें। 4. इसमें समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल दिया गया (बालक की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि उसमें समस्या समाधान करने का कौशल विकसित हो और बालक की आलोचनात्मक क्षमता का विकास अर्थात किसी वस्तु के पक्ष और विपक्ष के बारे में चिंतन करने में सक्षम हो) 5.सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास हो (शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि बच्चों की समूह में कार्य करने की आदत का विकास हो) 6.रटी रटायी विद्या के बदले समझ और क्रियान्वयन की विद्या को आधार बनाया जाए अर्थात बालकों को ऐसी शिक्षा दी जाए जो केवल रटने पर आधारित नहीं होनी चाहिए वह किसी कार्य को समझकर करने वाली होनी चाहिए 7.सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक होनी चाहिए अर्थात बालकों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि बालकों में आपसी सहयोग की भावना उत्पन्न हो या भावना का विकास हो 8.सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा अर्थात बालकों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि बालक स्वयं अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार बने।वह अपना बोस स्वयं बने। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि किसी को ज्यादा महत्व नहीं दे सबको बराबर महत्व दिया जाना चाहिए और निष्पक्ष होनी चाहिए। 9.व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो 10.दैनिक पाठ्यक्रम में सामूहिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना 11.विषय सामग्री का चयन करते समय यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि इससे बच्चों की भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होंगी अर्थात विषय सामग्री उनको भविष्य में काम आएगी या नहीं आएगी 12.पाठ्यवस्तु में बंधी बंधाई सामग्री को ना पढ़ाया जाए बल्कि विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। 13.शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यंत चले 14.बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें ।अध्यापक को समय-समय पर बच्चों के सिखे हुए ज्ञान को जांच करते रहना चाहिए की उसने कितना सीखा। Notes by Ravi kushwah… 🌈प्रगतिशील शिक्षा🌈🌻 (progressive education)🔥 🌈प्रगतिशील शिक्षा में हमेशा बच्चों को आगे बढ़ाने की बात आते हैं 💥प्रगतिशील शिक्षा के प्रवर्तक जॉन डीवी है अतः हम बच्चों को कैसे आगे बढ़ाए ।नीचे दिए गए निम्नलिखित बिंदु अंकित किया गया है 🌾⭐करके सिखना–इसमें बच्चों को हाथ से किए जाने वाले काम तथा अनुभव से किया गया काम को करने के लिए प्रेरित करते हैं। 🌾⭐विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम–इसमें हम बच्चों को विषय से जुड़ी हुई बात को पढ़ाते हैं। 🌾⭐उद्यमिता का एकीकरण करना- बच्चों को इस प्रकार का शिक्षा देंगे ताकि बच्चे अपने दैनिक जीवन में कुछ ना कुछ कार्य करके अपना भरण- पोषण कर सके। 🌾⭐समस्या समाधान तथा आलोचनात्मक चिंतन पर बल दिया जाए। 🌾⭐बच्चों में सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलो का विकास करना चाहिए ताकि बच्चे में एक दूसरे से बातचीत करने का अवसर मिले। तथा समाजिक कौशल का विकास हो सके। 🌾⭐रटी रटाई ज्ञान के बदले समझदारी एवं कार्यन्वन की विद्या को आधार बनाया जाय। 🌾⭐बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा दी जानी चाहिए। ताकि बच्चा सामाज में समायोजन कर सके । और स्वतंत्र रूप से सामाजिक कार्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा कर सके। 🌾⭐सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक-इसमें बच्चों को दूसरों के प्रति सहयोग की भावना जागृत करने पर बल देते हैं। 🌾⭐व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो व्यक्ति के निजी लक्ष्य के अनुरूप हो। 🌾⭐दैनिक पाठ्यक्रम मैं समुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना। 🌾⭐विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। 🌾⭐पाठ्यवस्तु में बंधी बंधाई सामग्री न पढ़ाए , विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर दें। 💥🌻शिक्षा ऐसी दें जो जीवन -पर्यंत चले। 🌸🌺बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें। 🙏🌻🌸💥Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌸💥🌺🙏 🔆 *प्रगतिशील शिक्षा*🔆 प्रगतिशील शिक्षा एक तरह का शैक्षिक आंदोलन है। शिक्षा के क्षेत्र में हम शिक्षा को बढ़ते क्रम में यह बढ़ते ग्राफ के रूप में देखना चाहते हैं जिसके लिए हम प्रगतिशील शिक्षा के निम्न बिंदुओं को देखते हैं। ⚜️ *1करके सीखना*➖ ▪️ जो हाथ से पूरे किए जाने वाले कार्य हैं। ▪️ अनुभव से सीखना जब हम किसी कार्य को करते हैं तो उसके अनुभव से सीखते हैं मतलब हम खुद से उससे कार्य को किए हैं किसी से देख व सुनकर नहीं। ⚜️ *2 विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम*➖ ▪️एकीकृत पाठ्यक्रम पढ़ाया जाए लेकिन उसमें विषयगत ईकाईयों का भी ध्यान रखा जाए जैसे यदि कोई विषय या इकाई है उसे ही संश्लेषित करके या एकीकृत करके पाठ्यक्रम में रखा जाए। ⚜️ *3 उधमिता का एकीकरण*➖ ▪️शिक्षा ऐसी हो जिसमें हर व्यक्ति पूरे तरीके से व्यवसाय को प्राप्त कर पाए या किसी न किसी उधमिता को या व्यवसाय को या जो भी रोजगार है उससे जुड़ पाए और उसमें काम कर पाए । ⚜️ *4 समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल*➖ ▪️किसी भी चीज के पक्ष और विपक्ष दोनों को ही समझना और उस पर अपनी टिप्पणी करना आलोचनात्मक चिंतन है। ▪️हम किसी भी चीज की आलोचना उस चीज में बदलाव के लिए करते हैं या उसके प्रति अपनी सोच में बदलाव लाते हैं। ▪️आलोचना से यह मालूम चलता है कि कार्य कहां तक हुआ है और उसे कहां तक पूरा करना है अर्थात किसी भी वस्तु या कार्य के हर एंगल से कार्य के बारे में पता चलता है। ▪️आलोचना चिंतन प्रगतिशील शिक्षा में होना बहुत आवश्यक है यदि यह चिंतन नहीं होगा तो हम किसी भी चीज की केवल एक ही पक्ष को जान पाएंगे दूसरे पक्ष को नहीं और परिणाम स्वरूप हम एक अच्छे व्यक्ति नहीं बन पाएंगे और किसी भी काम में प्रगति नहीं कर पाएंगे। ⚜️ *5 सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास*➖ ▪️यदि किसी बच्चे को प्रगतिशील शिक्षा दी जा रही है तो यह जरूरी होना चाहिए कि हम सामूहिक कार्य करें और सामाजिक कौशल का विकास करें। ▪️कोई भी व्यक्ति अकेले प्रगति नहीं कर सकता है यदि फिर भी प्रगति हुई है तो जरूरी नहीं है कि उसका समाज में एक बेहतर स्थान भी होगा ▪️यदि शिक्षा का उपयोग समूह में व समाज के साथ बेहतर रूप से अंतः क्रिया कर पाते हैं तो इसका मतलब हम अपनी शिक्षा में बेहतर रूप से प्रगति कर रहे हैं। ▪️यदि सामाजिक अंतः क्रिया ही नहीं होगी तो वह किसी भी क्षेत्र में वह शिक्षा बेहतर साबित नहीं होगी। इसीलिए प्रगतिशील शिक्षा में सामाजिक कौशल का विकास करना सामूहिक कार्य में बच्चों को आगे बढ़ाना होगा। ▪️जब हम समूह में कार्य करते हैं तो हमें यह ज्ञात हो जाता है कि हम ज्ञान प्राप्ति में कहां तक सीख पाए है और क्या-क्या सुधार या सीखने की आवश्यकता अभी और है। ⚜️ *6 रटी रटाई ज्ञान के बदले समझदारी व कार्यान्वयन ज्ञान को आधार बनाया जाए*➖ ▪️प्रगतिशील शिक्षा के अनुसार जो शिक्षा है वह केवल किताबी ज्ञान पर या रटे रटाए ज्ञान पर आधारित ना हो बल्कि वह समझी हुई और उस ज्ञान का प्रयोग आप अपने सीखे हुए किसी भी कार्य में कर पाए। ▪️यदि कोई भी चीज रटी रटाई है या उसके भाव को हम नहीं समझ पा रहे हैं तो ऐसी शिक्षा का कोई मतलब नहीं है और वह उसी क्षेत्र तक सीमित रह जाती है। ▪️लेकिन जब चीज समझी जा रही है लेकिन उसका क्रियान्वयन उपयोग नहीं किया जा रहा तो उस ज्ञान का भी कोई अर्थ नहीं है। ⚜️ *7 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक*➖ ▪️सहयोगात्मक व सहकारी शिक्षण तकनीक छात्रों को एक स्वस्थ मानसिक रूप से सीखने पर वह बड़े स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। ▪️”Sharing is caring” यदि हम अपने कार्य में दूसरों का भला या सहयोग कर रहे हैं तो हम अपने कार्य में प्रगति कर रहे हैं जबकि इसके विपरीत यदि मदद या सहयोग नहीं कर रहे हैं तो हम अपने कार्य में या ज्ञान में संकीर्ण होते चले जाते हैं। ▪️जब अपने कार्य में दूसरों की सहायता की जाती है तो दूसरों की प्रवृत्ति के साथ-साथ स्वयं की भी प्रगति होती जाती है। ⚜️ *8 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा*➖ ▪️जो व्यक्ति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी संभालते हैं तो अवश्य ही प्रगति करते हैं। ▪️जब हम स्वयं अपने आप को किसी कार्य को करने के प्रति अपनी सोच में मालिक बनते हैं तो उस कार्य को हम अपनी जिम्मेदारी, समय पर, ईमानदारी, लगन और पूरी सत्य निष्ठा, प्रायिकता अनुसार व संतुलन के साथ पूरा करते हैं। तथा कभी भी कार्य के गलत होने पर उस गलती को स्वीकारते हैं और आगे सही प्रकार से करते हैं। ▪️इसीलिए हमें अपनी समाज की चीजों के प्रति स्वयं मालिक बनना है और जो भी सामाजिक जिम्मेदारी है उन्हें पूरी तरह से पूरा करना है। ⚜️ *9 व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो*➖ ▪️व्यक्तिगत शिक्षा ऐसी दी जाए जो व्यक्ति के निजी या स्वयं के लक्ष्यों को पूरा करें। ▪️हर व्यक्ति अलग अलग है उनकी अलग अलग जरूरत है इसीलिए व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से वह उनके लक्ष्य के हिसाब से शिक्षा दी जाए। ▪️यदि बच्चों के लक्ष्य को ध्यान में ना रख कर शिक्षा देंगे तो बच्चा उस कार्य में प्रगति नहीं कर पाएगा क्योंकि वह बच्चे का लक्ष्य ही नहीं है तो ना ही बच्चे का उसमें मन लगेगा और ना ही शिक्षा प्राप्त कर प्रगति कर पाएगा। जिस व्यक्ति की जिस कार्य क्षेत्र में विशेषता या क्षमता है यदि उसी विशेषता या क्षमता में शिक्षा दी जाए तो वह व्यक्ति उस कार्य में बहुत बेहतर रूप से प्रगति हासिल कर पाता है। ⚜️ *10 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक शिक्षा व सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना*➖ ▪️दैनिक पाठ्यक्रम हमारे समाज से व समाज समुदाय के लिए जो सेवा परियोजनाएं या सहयोग है उससे जुड़ा हुआ होना चाहिए ⚜️ *11 विषय सामग्री का चयन करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है या अनिवार्य है कि इससे भविष्य की किन-किन आवश्यकता की पूर्ति होगी*➖ ▪️विषय वस्तु इस प्रकार की ना हो कि वह केवल तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति करें बल्कि विषय सामग्री का चुनाव करते समय इस तरह का हो कि वह भविष्य में समाज के विभिन्न कौशलों के विकास में भी सहायक हो या किसी भी कार्य को करने में सहायता करें। ⚜️ *12 पाठ्यवस्तु में बंधी बंधाई सामग्री ना पढ़ाई जाए बल्कि विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीके से पढ़ाने पर जोर दें*➖ ▪️हर प्रकार के अनुभव, स्थिति, शिक्षण सामग्री या हर प्रकार के शिक्षण तौर-तरीकों को पाठ्यवस्तु या किताबों से नहीं लिखा जा सकता। ⚜️ *13 शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यंत चले*➖ ▪️जब भी कुछ सिखाया जाए या शिक्षा दी जाए कि उसका प्रयोग हम अपने जीवन के किसी भी परिस्थिति या किसी भी स्थिति में कर पाए अर्थात व जीवन पर उपयोगी हो या काम में आए। ⚜️ *14 बच्चे के अंदर जो शैक्षिक विकास है उसका समय समय पर मूल्यांकन भी करे*➖ ▪️बच्चे के बौद्धिक या मानसिक विकास का पता लगाने के लिए समय समय पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। ✍🏻 *Notes By-Vaishali Mishra* ✍️ शारीरिक विकास✍️ (physical Development) 💐 गर्भावस्था व भ्रूणावस्था 💐 इसके अंतर्गत तीन अवस्थाएं होती है जिसमें गर्भ के अंदर ही बालक का विकास होता है जब बालक मां के गर्भ में ही रहता है। 💎 डिंबावस्था- डिंब की अवस्था कहते हैं। 💎भ्रूणीय अवस्था- इस अवस्था में डिम्ब का विकास प्राणी के रूप में होता है। 💎भ्रुणावस्था- इस अवस्था में गर्भ में 2 महीने से लेकर जन्म तक की अवस्था होती है। 🌸 भ्रूणावस्था में बच्चे की लंबाई- 20 इंच ,वजन- 6-7 पौण्ड। 💎 बालक का रंग त्वचा एवं शरीर के सभी अंगो का निर्माण गर्भ में ही हो जाता है। 💎 बच्चे की धड़कन की आवाज आसानी से सुना जा सकता है। 🌴 अध्ययन की दृष्टि से 🌻💐 शैशवस्था🌻💐 ःशैशवावस्था की उम्र 0 से 5 साल तक होती है। वजन -6-8 पोण्ड, (2.5-3.5kg) बालिकाओं में बालकों की अपेक्षा वजन कम होती है। 5वर्ष के अन्त में 38-40 पोण्ड(17-18kg) 🌴लम्बाई जन्म के समय-19-22 Inch(48-56cm) बालिकाओं की लंबाई भी बालकों की अपेक्षा कम होती है। 🌴3-4 वर्ष के बाद लड़कियों की लंबाई लड़कों की अपेक्षा अधिक हो जाती है। 🏵 सिर और मस्तिक 🏵 जन्म के समय बच्चे का सिर का विकास उसके शरीर के विकास का एक चौथाई भाग (1/4) होता हैं। 🌴 बच्चे के मस्तिष्क का वजन-350gm 🏵 हड्डियां🏵 जन्म के समय बालक की हड्डियां मुलायम व लचीले होती हैं। 🌴जन्म के समय बच्चे में 270-300 हड्डियां पाई जाती हैं और बाद में हड्डियों की संख्या 206 हो जाती है। 🌴हड्डियों का विकास लड़कों में अपेक्षाकृत लड़कियों में तीव्र होता है। 🏵अन्य कारक 🏵 बालक के विकास में से संबंधित कुछ अन्य कारक है जो कि निम्नलिखित हैं। 🌴5 या 6 महीने से बच्चे के दांत निकालना शुरू हो जाते हैं बच्चों में सबसे पहले नीचे के दांत आते हैं। 🌴4 वर्ष तक बच्चे के सारे अस्थाई दांत निकल जाते हैं इन अस्थाई दातों की संख्या 20 होती है। 🌴 शिशुओं की धड़कन प्रारंभ में 140 /मि.होती हैं। 🌴3 से 4 वर्ष तक 120/मि.हो जाती हैं। 🌴5 वर्ष तक 100/मि. हो जाती हैं। 🌴 शैशावस्था में बच्चों में यौन अंगों का विकास मंद गति से होता है। 🌴 शैशवावस्था में बच्चे का संपूर्ण विकास सबसे तीव्र गति से होता है। Notes By :-Neha Roy🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *♨️प्रगतिशील शिक्षा क्या है?♨️* प्रगतिशील शिक्षा आधुनिक पद्धति पर आधारित है। *अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जॉन डीवी* को प्रगतिशील शिक्षा पद्धति के पिता माना जाता हैं प्रगतिशील शिक्षा एक जटिल पारंपरिक शिक्षा पद्धति है, जी एक विकल्प से उभरकर आई हैं। इस प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बालकों का समग्र विकास करना है प्रगतिशील शिक्षा (प्रोग्रेसिव एजुकेशन) एक शैक्षणिक आन्दोलन है जो उन्नीसवीं सदी के अन्त में शुरू हुआ था। वर्तमान समय में यह विभिन्न रूपों में बनी हुई है। ‘प्रगतिशील’ शब्द इस शिक्षा को 19वीं शताब्दी के पारम्परिक यूरोपीय-अमेरिकी पाठ्यक्रम से अलग करने के लिए प्रयुक्त हुआ है। प्रगतिशील शिक्षा की जड़ें वर्तमान अनुभव में निहित हैं। *⚜️प्रगतिशील का अर्थ_⚜️* उन्नति की राह पर अग्रसर या जो उन्नति कर रहा हो अधिकांश प्रगतिशील शिक्षा कार्यक्रमों में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं- 🌈करके सीखने पर बल – हाथ के करके पूरा किए जाने वाले परियोजनाएँ, अनुभवात्मक सीख । 🌈विषयगत इकाइयों पर केन्द्रित एकीकृत पाठ्यक्रम का निर्माण करना। 🌈शिक्षा में उद्यमिता का एकीकरण करना। 🌈समस्या समाधान तथा आलोचनात्मक सोच पर बल देना। 🌈समूह कार्य तथा सामाजिक कौशलों का विकास करना। 🌈रटे-रटाए ज्ञान के बजाय समझदारी एवं क्रिया (ऐक्शन) को शिक्षा का लक्ष्य मानना। 🌈सहयोगात्मक (Collaborative) और सहकारी शिक्षण (cooperative learning) परियोजनाएं। 🌈सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र के लिए शिक्षा पर बल देना। 🌈अत्यन्त व्यक्तिगत शिक्षा जो प्रत्येक व्यक्ति के निजी लक्ष्यों के अनुरूप हो। 🌈दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक सेवा और सेवा की शिक्षा देने वाली परियोजनाओं को सम्मिलित करना। 🌈विषय सामग्री का चयन करने के लिए इस बात पर विचार करना कि भविष्य की समाज में किन कौशलों की आवश्यकता होगी। 🌈पाठ्यपुस्तकों में बंधी-बंधायी सामग्री पढ़ने पर जोर न देना बल्कि विविध प्रकार की शिक्षण सामग्री पढ़ने पर बल देना। 🌈जीवनपर्यन्त शिक्षा तथा सामाजिक कौशलों पर बल देना। 🌈 बच्चे के शैक्षणिक विकास के मूल्यांकन के लिए उसके प्रोजेक्ट एवं प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करना। *🙏🏻धन्यवाद्🙏🏻* 📚✍🏻 *Notes by~* *Mनिषा Sky Yadav* 🔆 प्रगतिशील शिक्षा या शैक्षिक आंदोलन ➖ प्रगतिशील शिक्षा के जनक जॉन डीवी को माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य है कि बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जाए जो उनको प्रगति की ओर अग्रसर करें | प्रगतिशील शिक्षा व्यक्तिगत विभिन्नता के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया में अंतर को रखते हुए इस उद्देश्य को पूरा करता है कि बच्चे का किस प्रकार से चहुमुखी या सर्वांगीण विकास हो सकता है | प्रगतिशील शिक्षा मुख्य बिंदुओं पर जोर देता है ➖ 🎯 करके सीखना ➖ 1) हाथ से किए जाने वाले कार्य जैसे चित्रकला ,हस्त कला, मूर्तिकला ,आदि | 2) अनुभव से सीखना | अर्थात किसी कार्य को प्रत्यक्ष रूप से या अनुभव के द्वारा किया जाता है तो उसमें जो ज्ञान प्राप्त होता हवह देखने या सुनने से नहीं मिलता है | 🎯 विषयगत ईकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम ➖ पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जो एकीकृत हो अर्थात जो भी पढ़ाया जाए वह अलग अलग प्रकार से संश्लेषित करके पढ़ाया जाए | 🎯 उधमिता का एकीकरण➖ व्यवसाय का एकीकरण करना अति आवश्यक है जिसे भी अपने आप में एक सफल व्यक्ति के रूप में साबित हो सके | अर्थात ऐसी शिक्षा जिसमें प्रत्येक व्यक्ति पूरे तरीके से व्यवसाय के लिए तैयार हो सके अर्थात वह किसी ना किसी रूप में उधमिता के आधार पर व्यवसाय या रोजगार से जुड़ पाए और अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके यही प्रगतिशील शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है | 🎯 समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल ➖ किसी भी समस्या के अच्छे और बुरे दोनों पक्षों पर ध्यान देना आलोचनात्मक चिंतन है किसी समस्या के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों को देखते हुए तथा उसका समाधान करना चाहिए | अर्थात स्वयं को विपरीत परिस्थिति में रखकर भी सकारात्मक परिस्थिति में उस समस्या का समाधान खोजना चाहिए ना कि उस परिस्थिति के नकारात्मक पहलू पर ध्यान देना चाहिए | 🎯 बच्चे के सामूहिक कार्य और समाजिक कौशलों का विकास करना ➖ अर्थात जो बच्चा प्रगति कर रहा है उसमें सामाजिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास करना है जो प्रगतिशील शिक्षा का महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि बच्चों के ज्ञान का दूसरों के साथ बेहतर तरीके से साझा होना अति आवश्यक है जिसके लिए सामाजिक कौशल का विकास करना अति महत्वपूर्ण है | 🎯 रटे रटाए ज्ञान के बदले समझ आदि कार्यान्वयन को आधार बनाया जाए ➖ अर्थात प्रगतिशील शिक्षा कहता है कि स्वयं की समझ को विकसित करते हुए समझते हुए उसका क्रियान्वयन करना अति आवश्यक है ऐसा नहीं होगा तो जो ज्ञान है उसका कोई अर्थ नहीं होगा | जैसे कोरोना काल में लोगों को मास्क लगाने और सेनेटाइजर का प्रयोग करने की समझ तो है लेकिन उसके क्रियान्वयन नहीं करते हैं उनको पता तो है मास्क लगाना पर लगाते नहीं है अर्थात वह उनके क्रियान्वयन में नहीं है | 🎯 सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीक ➖ क्योंकि हम प्रगतिशील शिक्षा को आगे बढ़ा पाएंगे जब बच्चे का स्वास्थ्य मष्तिक हो और उसमें सहयोगात्मक शिक्षण की भावना हो | और यदि ऐसा नहीं होगा तो उसका मस्तिष्क संकीर्ण हो जाएगा विश्लेषित नहीं हो पाएगा | 🎯 सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा ➖ यदि बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का विकास करके और लोकतंत्र की जिम्मेदारी को बताया जाए तो वे प्रगति की ओर अग्रसर होंगे और यदि ऐसा नहीं होगा तो उनकी प्रगति नहीं होगी और प्रगतिशील शिक्षा नहीं हो पाएगी | 🎯 व्यक्तिगत शिक्षा जो प्रत्येक व्यक्ति के निजी लक्ष्यों के अनुरूप हो ➖ अर्थात बच्चों को ऐसी शिक्षा देना जो खुद के एवं दूसरों के जीवन की प्रगति में कार्य करें और उनको व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो उनके निजी लक्ष्यों को पूरा करें | अर्थात शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो उनकी आवश्यकता को पूरा करें और उनके कार्यों के अनुरूप हो यदि ऐसा नहीं होगा तो प्रगतिशील शिक्षा नहीं हो पाएगी | 🎯 दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और शिक्षा परियोजना को शामिल करना ➖ अर्थात बच्चों को पाठ्यक्रम के द्वारा यह बताना कि हम एक दूसरे की सहायता करके अपने आप को कैसे निखार सकते हैं और उनको अपनी शिक्षा परियोजना में शामिल करना,तथा बच्चे उस रूप में प्रगति करें जो उनके लिए आवश्यक हो इसके लिए जरूरी है कि वह खुद से अनुभव करके सीखें | 🎯 विषय सामग्री का चयन करते हुए समय ध्यान रखना कि इससे भविष्य के किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी ➖ विषय सामग्री का चयन करने के लिए इस बात का चयन करें कि उनको भविष्य में किन-किन कौशलों की आवश्यकता है अर्थात उनकी आवश्यकता के साथ-साथ उनको भविष्य में किन-किन कौशलों की आवश्यकता होगी ऐसा कौन सा कौशल उनकी आवश्यकता की पूर्ति करता है और उनकी प्रगति में सहायक है क्योंकि तत्कालिक आवश्यकता की पूर्ति से भविष्य की आवश्यकता को पूरा नहीं किया जा सकता है | 🎯 पाठ्यवस्तु में बंधी बधाई सामग्री ना पढ़ाएं विविध प्रकार की शिक्षण सामग्री या तरीके से बढ़ाने पर जोर दें ➖ अर्थात शिक्षा के तौर तरीके, विधियां अलग-अलग सोच के हो सकते हैं उन्हें किताबी कीड़ा ना बनाएं उन्हें अपने अनुभव के आधार पर तथा उदाहरणों के साथ शिक्षण दें जो उनकी प्रगतिशील शिक्षा का एक भाग है | 🎯 ऐसी शिक्षा दें जो जीवन पर्यंत चले ➖ अर्थात ऐसी शिक्षा देना जो उनके तत्कालिक जीवन को नहीं बल्कि जीवन पर्यंत काम आए शिक्षा ऐसी हो जो उनके प्रत्येक पहलू को निखारे | 🎯 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें ➖ बच्चों का शैक्षणिक विकास का समय-समय पर अवलोकन करके उनका मूल्यांकन करते रहे जिससे उनके जीवन में प्रगति हो सके| 𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚 🌹🌻🌻🌻🌸🌸🌸🌺🌺🌺🍀🍀🍀🌹 🌻👩🏻‍🎓 *प्रगतिशील शिक्षा Progressive education* 👩🏻‍🎨🌻 🍁🦚🍁 *प्रगतिशील शिक्षा*➖ प्रगतिशील शिक्षा का उद्देश्य बालक की शक्तियों का विकास करता है। भिन्न भिन्न रूचियों और योग्यताओ के बालको में विकास भिन्न भिन्न तरह से होता है। इसलिए अध्यापक को बालक की योग्यताओ पर नजर रखते हुए उसे निर्देशित करते है। जिसके अंतर्गत प्रोजेक्ट विधि, समस्या समाधान विधि, क्रिया कार्यक्रम जैसी शिक्षण पद्धतियों को अपनाया जाता है। 🍅 *प्रगतिशील शिक्षा ( शैक्षिक आदोलन) के विषय में कुछ बिंदु निम्न है*:➖ 🎀 *करके सीखना*:- 🍹 हाथ से किए जाने वाले काम :- 👉 इसमें बालक के स्वयं करके सीखने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाता है। 🍹 अनुभव से सीखना:- 👉 इसमें बालक के जीवन की क्रियाओं के चारों ओर से सब विषय इस तरह बांध देता है कि क्रियाओं/ अनुभव के द्वारा उनकों ज्ञान प्राप्त हो सकें। 🎀 *विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठयक्रम*:- 👉 इसमें एकीकृत शिक्षा (integrated education) देना है, लेकिन विषय को ध्यान में रखते हुए। जो भी विषयगत इकाई/ किसी topic(विषय) से जुड़े हो/ कोई area हो उसी area पर concentrate/ संश्लेषित/ एकीकृत करके पाठयक्रम देना। 🎀 *उद्यिमता का एकीकरण*:- 👉 ऐसी शिक्षा देना जिससे बच्चे किसी न किसी उद्यिम/ job/ व्यवसाय/ bussiness में हो। इसमें एक centralized प्रक्रिया हो, जिसमें हर बालक को व्यवसाय मिले ऐसा कार्य करे। 🎀 *समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल*:- 👉 ऐसी शिक्षा दे जिससे बच्चे खुद समस्या को solve कर सके। किसी topic पर आलोचना कर सके, मतलब किसी भी पक्ष व विपक्ष दोनों पर बात कर सके। 🎀 *सामुहिक कार्य और सामाजिक कैशल का विकास:*- 👉 बच्चों में हम शिक्षा के माध्यम से ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जिसमें किसी में भेद-भाव की प्रवृति ना आएं, ताकी सभी बच्चे पूर्ण स्वतंत्रता और सहयोग से कार्य कर सके। जिससे बच्चे सामूहिक कार्य भी कर सके और समाजिक कौशल का विकास भी। 🎀 *रटे रटाए विधा के बदले समझ और कार्यन्वन की विधा को आधार बनाया जाए:-* 👉 बच्चे को कभी भी रटने की सलाह न दे, बल्कि बच्चे के लिए ऐसा वातावरण बनाये जिससे बच्चे खुद समझने की कोशिश करेंगा। हमें हर बच्चे को ध्यान में रखते हुए (व्यक्तिगत विभिन्नता) भी सबके according शिक्षण देना जिससे हर बच्चों में intrest जगे, utilize करें और खुद से उसपर कार्य/active भी करे। 🎀 *सहयोगात्मक और सहकारी तकनीक:-* 👉 ये दोनों education बच्चों में एक healthy mind सेट से सीखने के लिए और एक healthy mind set से सीख कर दुनिया को बड़े स्तर पर देख कर आगे बढ़ने/ सहयोग/ collebrate के लिए प्रेरित करती हैं। 🎀 *समाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की शिक्षा*:- 👉 हमे अपने समाज की जिम्मेदारी को समझना चाहिए, हर कार्य को एक जिम्मेदार नागरिक की तरह या बौस की तरह करना चाहिए। हर शिक्षक कोशिश करता है कि विधालय में ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जिससे बच्चे में सामाजिक व्यक्तिगत जिम्मेदारी का विकास हो सके और वह लोकतंत्र के योग्य नागरिक बन सके। 🎀 *व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो प्रत्येक व्यक्ति के निजी लक्ष्य के अनुरूप हो:-* 👉 व्यक्तिगत शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्चे की आवश्यकता/ योग्यता/ रूचि को ध्यान में रखते हुए पूरा कर सके और उनके कार्य के according हो। 🎀 *दैनिक पाठयक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना:-* 👉 बालक को पाठयक्रम के द्वारा यह बताये कि हम एक दूसरे की सहायता करके अपने आप को निखार सकते। उसे अपने शिक्षा परियोजना में शामिल कर, बालक को उस रूप में प्रगति करवाएं, जो उसके लिए आवश्यक हैं, जिससे बच्चे खुद से अनुभव करके सीख सके। 🎀 *विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि भविष्य में इससे किन किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी*:- 👉 चयन करना जरूरी है क्योंकि बच्चे को भविष्य में किन किन कौशलो की आवश्यकता होगी, ऐसा कौन सा कौशल उनकीं आवश्यकता की पूर्ति करता है और उनकी प्रगति में सहायक है, क्योंकि तत्कालिक आवश्यकता की पूर्ति से भविष्य की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकते। 🎀 *पाठयवस्तु में बंधी बधाई सामग्री ना पढ़ाये, विविध प्रकार के शिक्षण सामग्री या तरीकेसे पढ़ाने पर ज़ोर दे:-* 👉 बच्चों को कभी किताबी कीड़ा ना बनाये, बच्चे के अनुसार शिक्षा दे ऐसे ऐसे उदाहरण दे जो उनके आसपास से या जीवन से जुड़ा हो जिससे बच्चे जल्दी सीख सके और इंट्रेसट जगे। 🎀 *शिक्षा ऐसी दे जो जीवन पर्यंत चले:-* 👉 ऐसी शिक्षा दे जिससे बच्चे के तत्कालिक जीवन को ही नही, बल्कि जीवन पर्यंत काम आ सके। उनके हर पहलू को निखार भी सके। 🎀 *बच्चों के अंदर जो शिक्षा का विकास है उसे समय-समय पर मूल्यांकन भी करे:-* 👉 बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन जरूरी है, तभी हम सही शिक्षा दे पायेंगे। शिक्षक समय-समय पर बच्चों के सीखे हुए ज्ञान को जाँच करते है जिससे पता चलता है कि बच्चे ने कितना सीखा है। 🎄🎄🎄Thanku🎄🎄🎄 📚Noted by Soni Nikku ✍ 🌷 प्रगतिशील शिक्षा 🌷 [ प्रगतिशील शिक्षा के प्रवर्तक:- ” जॉन. डी. वी. ” हैं। ] प्रगतिशील शिक्षा :- प्रगतिशील शिक्षा एक शैक्षिक आंदोलन है , जिसमें बच्चों की शिक्षा संबंधी व्यवस्था को आगे बढ़ाने की बात की जाती है। प्रगतिशील शिक्षा का उद्देश्य है कि बच्चों को किस प्रकार से शिक्षा दें, उनको सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर बल्कि पाठ्यक्रम से अलग बाहरी ज्ञान से भी जोड़ा जाये, बच्चे अपने दैनिक जीवन के आधार स्वयं प्रतिक्रिया करके अपने अनुभव के आधार पर सीखें, उनमें रटने की प्रवृत्ति न आये बच्चों में व्यवहारिक ज्ञान का विकास हो आदि। प्रगतिशील शिक्षा को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है :- 1. करके सीखना :- अर्थात बच्चे हाथों से किया जाने वाला काम, हस्तकला के आधार पर स्वयं करके सीखें , स्वयं के अनुभव के आधार पर सीखें। 2. विषयगत इकाई पर एकीकृत पाठ्यक्रम। बच्चों की कक्षानुसार उनका पाठ्यक्रम सरल और सुव्यवस्थित होना चाहिए ताकि बो सरलता से पढ़ और समझ सकें। 3. उद्यमिता का एकीकरण। बच्चों को उधमिता के आधार पर भी शिक्षा दी जाए जो कि उनके भविष्य में काम आये। 4. समस्या समाधान और आलोचनात्मक चिंतन पर बल। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे उनमें समस्या समाधान के गुण भी आयें, तथा वह आलोचनात्मक रूप से भी सोच सकें। 5. सामूहिक कार्य और सामाजिक कौशलों का विकास। बच्चों में समूह में रहकर अपने काम करने की क्षमता और समाज में रहकर अपने कौशलों का विकास करने की शिक्षा भी दी जानी चाहिये। 6. रटे- रटाये विद्या के बदले , समझ और कार्यान्वयन की विद्या को आधार बनाया जाए। प्रगतिशील शिक्षा बच्चों में रटे हुये ज्ञान के बदले स्वयं अनुभव और समझ विकसित करने पर जोर देती है। 7. सहयोगात्मक और सहकारी शिक्षण तकनीकी। बच्चों में सहयोग की भावना तथा सहकारिता शिक्षा का विकास किया जाना चाहिये। 8. सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र शिक्षा। बच्चों में शैक्षिक रूप से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र शिक्षा का विकास करना चाहिये। 9. व्यक्तिगत शिक्षा दी जाए जो निजी लक्ष्य के अनुरूप हो। अर्थात प्रत्येक बच्चे के अनुसार उनको व्यक्तिगत शिक्षा दी जाये जिसमें बच्चे अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकें। 10. दैनिक पाठ्यक्रम में सामुदायिक और सेवा शिक्षा परियोजना शामिल करना। बच्चों में दैनिक अनुभव के आधार पर उनमें सामुदायिक और सेवा शिक्षा का विकास करना चाहिए। 11. विषय सामग्री का चयन करते समय ध्यान रखना अनिवार्य है कि इससे भविष्य की किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। अर्थात बच्चे के विषय सामग्री का इस प्रकार से चयन करना चाहिए जो उनके भविष्य की शैक्षिक, सामाजिक, वास्तविक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करें, उनके जीवन में हर समय काम आये। 12. पाठ्यवस्तु में बंधी बंधाई सामग्री ही न पढ़ाएं , बल्कि विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री या तरीके से बढ़ाने पर जोर दें। अर्थात बच्चों को सिर्फ पाठ्यक्रम आधारित किताबी ज्ञान ही न दें बल्कि उनके पाठ्यक्रम से अलग भी ज्ञान दें ताकि बच्चे का चहुँओर विकास हो सके। 13. शिक्षा ऐसी दें जो जीवन पर्यंत चले। अर्थात बच्चों को सिर्फ कक्षा उत्तीर्ण करने के उद्देश्य से शिक्षा दें, बल्कि ऐसी शिक्षा दें जो उसके जीवन में हर पहलू में जीवन पर्यन्त चले। 14. बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करें। अर्थात समय समय पर बच्चों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन करते रहना चाहिए ताकि उनकी शैक्षिक कमी और विकास का पता लगता रहे जिसके आधार पर उनका और भी विकास हो सके। Notes by 🌺 जूही श्रीवास्तव 🌺

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