🔅योजना विधि- किसी काम को करने से पहले हम अपनी capacity,knowledge & time के according एक प्लान को निश्चित करते है। जैसे- हम अपनी पढ़ाई को पूरी करने के लिए unacedemy का subscription लिए अब किस समय मे किस educator से कैसे पढेंगे फिर कब मुझे self study करनी है ये सब का एक शेड्यूल बनेगे फिर उसके according पढ़ाई करेगे । 🔅इस योजना विधि में किलपेट्रिक के अनुसार- शिक्षा सप्रयोजन होनी चाहिए (लक्ष्य निर्धारण) इसमे अनुभव (experience) होना जरूरी है ।जैसे- हम उस काम को सही तरीके से कर सकते है जिसमे हमारा अनुभव पहले से है। अगर हमारे पास पढ़ाने का अनुभव है तभी हम बच्चे को सही तरीके से पढ़ा सकते है या बालक को कैसे पढाये जिससे जल्दी समझ सके इसमे हमारा अनुभव help करता है। 🌸योजना विधि के गुण – योजना बनाने से हमारे अंदर अमूर्त्त सोच / तर्कशक्ति का विकास होता है। इससे हमारा काम सिस्टमेटिक तरीके से easy हो जाता है जिससे हमे संतुष्टि मिलती है। इसमें निरीक्षण करने की क्षमता बढ़ती है। योजना बनाने से समय की सदुपयोग होता है जिससे हमारे दिमाग पर बोझ नही लगता है। इसमें सहज रूप से किसी भी परिस्तिथियों को संभालने की क्षमता बढ़ती है।और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। इसमें हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसमे क्रियात्मक और सृजनात्मक क्षमता का गुण बढ़ता है। 🌸योजना विधि के सिद्धांत🌸- समस्या (टास्क) का उत्पन्न होना, कार्य को चुनना,योजना करना, योजना को क्रियान्वयन करना, कार्य का निर्णय और कार्य का निष्कर्ष (लेखा-जोखा) करना। 👉🏻बैकन के अनुसार:- गणित सभी विज्ञान का प्रवेश द्वार एवं कुंजी है। 👉🏻हॉगबैन के द्वारा :- गणित संस्कृति का दर्पण है। 👉🏻 बर्नार्ड शो के द्वारा :- तार्किक चिंतन के लिए गणित एक शाक्तिशाली साधन है। 👉🏻 आईंस्टीन के द्वारा :- गणित उस मानव का प्रतिफल है,जो अनुभव से स्वतंत्र है और सत्य के अनुरूप है। 👉🏻पियर्स के द्वारा :- गणित एक विज्ञान ही है,जिसकी सहायता से आवश्यक निष्कर्ष निकले जाते है। 🌸योजना विधि के दोष :- हर विषय मे योजना करके पढ़ाई नही हो सकती है। अगर planing करके काम नही कर पाते है तो replaning करके उस काम को कर सकते है। 🌸 पूजा कुमारी🌸


🔆योजना विधि🔆
▪️इस विधि को किलपेट्रिक द्वारा दिया गया ।
▪️कार्य को सही तरीके से आसान बनाने के लिए हम योजना बनाते है।
किसी भी कार्य को करने से पहले हम उसकी एक planning अपनी capacitiy,time और knowledge के हिसाब से करते हैं।
▪️जब भी हम अपने कार्य को सफल तरीके से करना चाहते है तो उसके लिए हमे अपने अनुभव के आधार पर अपना मकसद पूरा कर सकते हैं।
▪️ हमारा मकसद या हमारी शिक्षा का संप्रयोजन होना चाहिए और उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारे पास एक योजना होना बहुत ज़रूरी है।
यदि हम बिना योजना के आधार पर किसी कार्य को करते हैं तो हम अपने कार्य को कभी भी सफल तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे।
▪️शिक्षण के कार्य में शिक्षक को अपने अनुभव के आधार पर एवम् समय क्षमता और ज्ञान के हिसाब से एक योजना बनानी चाहिए जिससे शिक्षण कार्य को सही तरीके से और सफल तरीके से पूरा कर सकते है।
▪️हम अपनी प्रायकिता के आधार पर अपनी capacity,time और knowledge को manage कर अपने कार्य को सफल बना सकते है।
( यदि हम अपने मकसद को या उद्घेश्य को पूरा करना चाहते है तो हम अपना वर्तमान कार्य को बेहतरीन तरीके से करने में सफल होंगे।)

🔅योजना विधि के गुण➖
1 तर्क शक्ति का विकास होता है।
2 अमूर्त चिंतन का विकास कर पाते है।
3 निरीक्षण क्षमता का विकास होता हैं।
4 अनुभव द्वारा सीखने को बढावा मिलता है।
5 सहज रूप से हमारे अंदर परिस्थिति को संभालने की क्षमता बढ़ती है।
6 निर्णय लेने की क्षमता का विकास हो जाता है ।
इन सभी गुणों को एक सार रूप में कह सकते है कि योजना विधि द्वारा क्रियात्मक और सृजनात्मकता का विकास होता है।
🔅योजना बनाने के चरण➖
1 समस्या उत्पन्न करना ( स्थिति या task)
2 समस्या या चुनना ( कार्य का चयन)
3 योजना बनाना
4 योजना क्रियान्वयन (निष्पादन)
5 कार्य का निर्णय (मूल्यांकन)
6 कार्य का लेखा जोखा ( Reporting और recording)

🔅 विभिन्न कथन➖
▪️बेकन➖ गणित सभी विज्ञान का प्रवेश द्वार की कुंजी है।
▪️ बर्नाड शॉ➖ तार्किक चिंतन के लिए गणित एक शक्तिशाली साधन है।
▪️होगबेन➖ गणित संस्कृति का दर्पण है।
▪️ आइंस्टीन➖गणित उस मानव चिंतन का प्रतिफल है ,जो अनुभव से स्वतंत्र है और सत्य के अनुरूप है।
▪️ रॉबर्ट पियर्स➖गणित एक विज्ञान ही है जिसकी सहायता से आवश्यक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

🔅योजना विधि के दोष➖ हर विषय या हर कार्य को इस विधि द्वारा कर पाना संभव नहीं है क्योंकि हमें उसके लिए उस कार्य में या विषय में अनुभव होना काफी जरूरी है।
▪️सभी कार्य की planning नहीं कर पाते है क्योंकि किसी कार्य को करने में ज्यादा समय लगता है किसी कार्य में कम।

उपर्युक्त विधि से यह निष्कर्ष निकलता है कि योजना विधि बहुत ही अच्छी विधि है जिसका आप अपनी कार्य की प्राथमिकता के आधार पर अपनी क्षमता,ज्ञान समय के हिसाब से एक योजना बनाकर अपने कार्य को सफल रूप से कर पाएंगे ओर कार्य के सफल होने पर निश्चित ही हमारा उद्देश्य पूरा हो जाता है। ✍🏻वैशाली मिश्रा


🌈 योजना विधि
इस विधि का प्रयोग किसी काम को करने के लिए किया जाता है| कि काम को किस तरह से करना चाहिए जिससे किसी प्रकार की कठिनाई न आये और काम को अच्छी तरह कर दिया जाए|
🌟योजना विधि के लाभ|
👉 योजना विधि मे तर्क शक्ति का विकास होता है|
👉 इस विधि मे अमूर्त चिंतन शक्ति का विकास होता है|
👉 सहज रूप से परिस्थिति को समझ लेते है|
👉 निरिक्षण क्षमता का विकास होता है |
👉 क्रियात्मक विकास होता है|
👉सृजनात्मक विकास होता है|
🌈योजना विधि के सिध्दांत
⭐समस्या उत्पन्न होना|
⭐कार्य का चुनाव करना|
⭐योजना बनाना|
⭐योजना क्रियान्वयन करना|
⭐कार्य निर्णय करना| ⭐कार्य का लेखा- जोखा करना |
🌈 योजना विधि के दोष
👉कुशल शिक्षक की आवश्यकता होती है|
👉कभी समय का अधिक उपयोग होता है👉 कई चीजों मे इस विधि का उपयोग नही कर सकते है|

💥रोजन बेकन- गणित सभी विज्ञान का द्वार एवं कुश्ती है|
💥 हाॅगवेन- गणित सभ्यता व संस्कृति का दर्पण है|


🌼योजना विधि 🌼
हम किसी भी कार्य को करने से पहले उसके बारे मे सोचते हैं क्या कार्य, कैसे होगा कितना समय लगेगा, कार्य अपनी क्षमता के अनुसार है या नहीं फिर हम उसको करने के लिए चरणबद्ध तरीका अपनाते के हैं वही हमारी योजना है।

👉योजना विधि के प्रवर्तक किलपेट्रीक थे

शिक्षा मे योजना सप्रयोजन (कारण ) के होनी चाहिए। जैसे हम सीटेट को पास कराने के लिए अनअकेडमी पर पढ रहे हैं।

योजना अनुभव के आधार पर होनी चाहिए

योजना विधि के गुण –

इससे बालक मे तर्क शक्ति का विकास होता है।
अमूर्त चिंतन का विकास होता है क्योंकि इसमे पहले योजना बनाते है फिर उसका क्रियान्वयन करते हैं
निरीक्षण क्षमता बढती है क्योंकि बालक स्वयं अपने कार्य का अवलोकन करता है
अनुभव द्वारा सीखने को बढावा मिलता है
सहज रूप से परिस्थिति को संभालने की क्षमता बढती है
निर्णय लेने की क्षमता बढती हैं।
क्रियात्मक और सृजनात्मक विकास होता है।

योजना विधि के सिध्दांत –

1) समस्या उत्पन्न होना
2) कार्य को चुनना अर्थात् दिए गए कार्य मे उपयुक्त कार्य का चुनाव करना
3)योजना बनाना -चुने हुए कार्य को पूर्ण करने के लिए योजना बनाना
4) योजना का क्रियान्वयन – बनी हुयी योजना के अनुसार कार्य को करना
5) कार्य का निर्णय -कार्य पूर्ण होने के पश्चात निष्कर्ष निकालना की कार्य सही हुआ या गलत
6) कार्य का लेखा जोखा -कार्य सही होने पर उसकी भविष्य मे पडने वाली आवश्यकता को देखते उसको लिखना। यदि कार्य गलत हुआ है तो उसकी कमियो को लिखना ताकि भविष्य मे गलती दोहरायी न जाए

बेकन के अनुसार गणित सभी विज्ञानो का प्रवेश द्वार एवं कुंजी है
हाॅगबेन के अनुसार गणित संस्कृति का दर्पण हैं।

बनार्ड शो के अनुसार तार्किक चिंतन के लिए गणित एक शक्तिशाली साधन हैं।

आइसंटाइन के अनुसार गणित उस मानव चिंतन का प्रतिफल है जो अनुभव से स्वतंत्र हैं और सत्य के अनुरूप है

पियर्स के अनुसार गणित एक विज्ञान है जिसकी सहायता से आवश्यक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

दोष –
हर विषय के लिए योजना नहीं बना सकते हैं
कुशल अध्यापक की आवश्यकता होती है

रवि कुशवाहा


✳️योजना विधि✳️

🌸 यह विधि किलपैट्रिक द्वारा दी गई है ।🌸

🔅इस विधि से हम किसी भी कार्य को सही तरीके से पूर्ण कर सकते हैं।
🔸 कार्य को संपादित करने से पहले हम एक खाका या योजना बनाते हैं ।
🔸इस योजना में हम क्षमता के अनुसार अपने ज्ञान का उचित प्रयोग करते हुए समय के अंदर कार्य को कैसे संपन्न करें इस पर चिंतन करते हैं।

🔸 शिक्षक इस विधि का प्रयोग कर पाठ को कक्षा में पढ़ाने से पहले एक योजना का निर्माण करता है जिससे वह अपने अनुभवों का प्रयोग कर शिक्षण कार्य को पूर्ण करता है और छात्रों की समस्या को हल करता है।

🔶 योजना विधि के सिद्धांत
1.समस्या उत्पन्न होना

  1. कार्य चुनना
    3.योजना बनाना
    4.योजना क्रियान्वयन
    5.कार्य का निर्णय
    6.कार्य का लेखा-जोखा

🔶योजना विधि के गुण 1.तर्कशक्ति
2.अमूर्त चिंतन
3.निरीक्षण क्षमता
4.अनुभव द्वारा सीखना
5.सहज रूप से परिस्थिति को 6.निर्णय लेने की क्षमता

  1. क्रियात्मक सृजनात्मक

🔶योजना विधि के दोष

1.इस विधि से सभी कार्य को कर पाना संभव नहीं है कुछ कार्यों को करने का समय निर्धारित नहीं हो सकता क्योंकि कुछ कार्य को करने में कम तथा कुछ को ज्यादा समय लगता है
2.कई कार्यो में अनुभव की कमी हो जाती है

  1. इस विधि में कुशल शिक्षकों की आवश्यकता होती है।

🌸 बेकन – गणित सभी विज्ञानों का प्रवेश द्वार एवं कुंजी है ।
🌸 हागबेग- गणित संस्कृति का दर्पण है ।
🌸 बर्नार्ड- तार्किक चिंतन के लिए गणित एक शक्तिशाली साधन है।
🌸 पीयर्स – एक विज्ञान है जिससे सहायता से आवश्यक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
🌸 आइंस्टीन- गणित उस मानव चिंतन का प्रतिफल है जो अनुभव से स्वतंत्र है और सत्य के अनुरूप है।।

धन्यवाद
वंदना शुक्ला


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