✍️✍️Manisha Gupta ✍️❤

अभिप्रेरणा की विधियां ❤ प्रेरणा से ही यह निश्चित होता है कि बच्चे कितनी देर तक इसी चीज को सीख रहे हैं या कितनी अच्छी तरह से सीख सकते हैं । बच्चा प्रेरित होकर ही अपने कार्य में पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त कर सकता है प्रेरणा प्रदान करने के लिए निम्नलिखित विधियां हैं ➖ 1⃣ कक्षा का उचित वातावरण➖ कक्षा में उचित वातावरण बनाना बच्चों के लिए अति आवश्यक है कक्षा में उचित वातावरण बनाकर ही बच्चों को पढ़ाई के प्रति ध्यान केंद्रित कराया जा सकता है उचित वातावरण बनाकर ही कक्षा में बच्चों में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है कक्षा कक्ष का उचित वातावरण पर मोटिवेशन निर्भर करता है । 2⃣ आवश्यकता का आइना दिखाना ➖ बच्चों की आवश्यकता के अनुसार ही उन्हें मोटिवेट करना चाहिए , बच्चों को इस प्रकार से प्रेरित किया जाना चाहिए कि उनकी आवश्यकता कितनी है या किस आवश्यकता पर कितना प्रेरित किया जाए। 3⃣ सफलता और असफलता➖ बच्चों को उनके कार्य से सफलता और असफलता दोनों ही मिल सकता है यहा बच्चों को सफलता या असफलता दोनों की अभीप्रेरित करते हैं अर्थात बच्चे की सफलता के लिए उन्हें अग्रसर करना चाहिए, अभिप्रेरणा सफलता और असफलता पर निर्भर करता है यह सफलता और असफलता बच्चों को मोटिवेट ओर डिमोटिवेट दोनों प्रकार से कर सकता है यह बच्चे की सोच पर निर्भर करता है कि वह सफलता या असफलता को किस प्रकार से ले रहा है success and failure bhi motivation par effect karts h। 4⃣ प्रतियोगी वातावरण या सहयोग ➖ किसी बच्चे को अभी प्रेरित करने के लिए प्रतियोगी वातावरण एवं सहयोग का वातावरण या माहौल का निर्माण करना चाहिए जिससे बच्चे एक दूसरे के प्रति एक पॉजिटिव competition environment and cooperative environment बना सके। 5⃣ प्रशंसा और निंदा➖ प्रशंसा और निंदा भी यह दोनों ही बच्चे को अभी प्रेरित कर सकते हैं लेकिन उचित समय या उचित स्थान में प्रशंसा करने से बच्चे अभिप्रेरित हो सकते हैं। प्रशंसा और निंदा भी यह बच्चों की सोच पर निर्भर करता है कि वह बच्चा उस प्रशंसा या निंदा से किस प्रकार से मोटिवेट या डिमोटिवेट हो रहा है। अर्थात प्रशंसा और निंदा हमें मोटिवेट भी कर सकते हैं और डिमोटिवेट भी कर सकते हैं। 6⃣ पुरस्कार और दंड➖ सही जगह सही समय सही स्थान पर दिया जाने वाला पुरस्कार ही बच्चों को अभी प्रेरित कर सकता है पुरस्कार भी एक ऐसा कारक है जिसके द्वारा बच्चों को प्रेरित किया जा सकता है, और दंड भी एक ऐसा कारक है जो नेगेटिव है लेकिन बच्चों को दंड से भी मोटिवेट किया जा सकता है बच्चों को ऐसा दंड दिया जाए जिससे वह उस गलती को दोबारा ना करें और उस दंड से से मोटिवेट हो। 7⃣ आकांक्षा या उम्मीद(expectations) : परिस्थिति के अनुसार ही आकांक्षा होने से बच्चा अभिप्रेरित हो सकता है यह आकांक्षा या उम्मीद किसी को कम या ज्यादा हो सकती है इससे हमारा स्तर का पता चलता है कि हम कितना चाहते हैं यह किस स्तर तक हम उसे पाना चाहते हैं आपको इस चीज की priorty kitni h , समय या परिस्थिति के अनुसार की हममे आकांक्षाएं आती है इसके लिए हमें priorty डिसाइड करना पड़ता है कि हमें कब और किसे कितनी priorty देनी है । 8⃣ रुचि:➖ रुचि भी एक महत्वपूर्ण कारक है जिसके द्वारा बच्चों को अभिप्रेरित किया जा सकता है। जरूरत के हिसाब से हमारी रुचि घटती और बढ़ती रहती है हमारा मूल्य आत्मविश्वास ,स्वाभिमान, पर भी रुचि निर्भर करता है कोई चीज हमें कितनी जरूरत है वह हमारे रुचि पर depend करता है वातावरण का भी रुचि पर प्रभाव पड़ता है। छात्रों का ध्यान आकर्षित करने के लिए भी रुचि अत्यंत आवश्यक है। 9⃣नयापन ➖ नयापन भी बच्चों को अभी प्रेरित करता है समय-समय पर बच्चों के पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की विधियों में अपडेट करते रहना चाहिए नयापन बच्चों में पढ़ने के लिए उत्तेजित करता है और प्रोत्साहित भी करता है। 🔟 प्रगति का ज्ञान➖ प्रगति का ज्ञान भी एक आवश्यक कारक है जो बच्चों को प्रेरित करें, बच्चों की प्रगति का ज्ञान की जानकारी लेकर प्रेरित किया जाना चाहिए। (ये सभी कारक उचित परिस्थिति में उचित समय पर उचित स्थान पर देकर ही बच्चों को पूर्ण रूप से अभिप्रेरित किया जा सकता है।)


💫 By ➖ रश्मि सावले 💫
अभिप्रेरणा (motivation) ➖अभिप्रेरणा से ही हमें कुछ करने का हौसला प्राप्त होता है और हम उसको सही ढंग से संचालित कर पाते हैं ठीक इसी प्रकार हम बच्चों को अभिप्रेरित कर यह निश्चित कर सकते हैं कि उनमें सीखने की क्षमता कितनी है और यह अलग अलग प्रकार से हो सकता है जैसे पुरुस्कार, रुचि, प्रशंसा आदि…

बच्चों को अभिप्रेरित करने की
मुख्य विधियाँ➖

🔹कक्षा का उचित वातावरण देकर ➖
कक्षा में हम एक बेहत्तर वातावरण उत्पन्न करके बच्चों का mind ko set कर सकते हैं जिससे एक बेहतर अभिप्रेरणा विकसित की जा सकती है…

🔹आवश्यकता का आईना दिखाकर ➖
यदि हम बच्चों को उनकी आवश्यकता बताकर अभिप्रेरित किया जा सकता है जिससे बच्चों को अपने लक्ष्य को पाने में आसानी होगी……

🔹सफलता/असफलता➖
सफलता और असफलता के द्वारा भी अभिप्रेरणा मिलती है ये परिस्थिति पर निर्भर करता है कि उस समय कैसे motivat किया जा रहा है….

🔹प्रतियोगी वातावरण/सहयोगी वातावरण ➖
कक्षा का ऐसा वातावरण बनाया जाये कि बच्चे स्वयं को उससे जोड़ सकें और एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावना विकसित कर सकें….

🔹प्रशंसा/ निंदा ➖
प्रशंसा और निंदा दोनों ही एक प्रकार से अभिप्रेरणा का कार्य करते हैं कभी परिस्थिति हमारे अनुसार नहीं होती है फिर भी हम अभिप्रेरित होते हैं और परिस्थिति हमारे अनुसार होती है तब भी हम अभिप्रेरित होते हैं it’s all about way off think हम प्रत्येक परिस्थिति में अभिप्रेरित होते हैं केवल देखने का नजरिया अलग अलग होता है…

🔹पुरुस्कार /दंड ➖
पुरुस्कार और दंड दोनों ही अभिप्रेरणा का कार्य करते हैं निर्भर करता है कि सही जगह पर सही समय में सही काम के लिए पुरुस्कार और दंड दिया जाए तभी वह सकारात्मक होगा, अन्यथा अभिप्रेरक नकारात्मक हो सकता है….

🔹आकांक्षा/ उम्मीद➖
जिस प्रकार की आकांक्षा होगी उसी प्रकार का motivation भी होगा अभिप्रेरणा आकांक्षा के अनुसार मिलती है इससे हमारे स्तर का पता चलता है….

🔹रुचि ➖
रुचि हमारी जरुरत, स्वाभिमान, self respect, आकांक्षा और मूल्यों के कारण भी आती है और इससे भी हम अभिप्रेरित होते हैं……

🔹नयापन ➖
हर समय हम अलग अलग पहलुओं से भी अभिप्रेरित होते हैं और इससे हमें और नया करने की अभिप्रेरणा मिलती है……

🔹प्रगति का ज्ञान देकर ➖
प्रगति का ज्ञान समय समय पर बच्चों को बताया जाना चाहिए जिससे कि वो अभिप्रेरित हो सकें जिससे और प्रगति करने की अभिप्रेरणा प्राप्त हो….

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🌈 अभिप्रेरणा की विधियां
🌟 कक्षा का उचित वातावरण बस कक्षा का ऐसा वातावरण बनाया जाए जिसमें बच्चे यह सखी रूप से सीखे और प्रेरित है
⭐आवश्यकता का आइना दिखाना बच्चों को इस प्रकार से सिखाया जाए कि वह सीखने के लिए प्रेरित और उन्हें किस चीज की आवश्यकता है
⭐सफलता और असफलता
जब बच्चे सफलता प्राप्त होती है तो बच्चा सीखने के लिए प्रेरित होता है और जब असफलता होती है तो बच्चा उससे भी सीखने के लिए प्रेरित होता है यह बच्चे की सोच पर निर्भर करता है कि वह सफलता को किस प्रकार से ले रहा है या असफलता को
⭐प्रतियोगिता वातावरण या सहयोग हमें बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिससे बच्चा प्रतियोगिता और सहयोग से प्रेरित हो
⭐प्रशंसा और निंदा बच्चे की प्रशंसा उचित समय उचित स्थान में प्रशंसा करना बच्चे को प्रेरित करता है और बच्चे की सोच पर निर्भर करता है कि वह प्रशंसा से अंडा से किस प्रकार से प्रेरित होता है जब कभी बच्चन की निंदा की जाती है तो उसे उससे भी कुछ सीखने के लिए प्रेरित होता है
⭐ पुरस्कार और दंड बच्चे को जब हम पुरस्कार देते हैं तो इससे बच्चा प्रेरित होता है और जब कभी बच्चे के लिए दंड भी मोटिफ किया जाता है जा सकता है बच्चों को ऐसा दंड दिया जाए जिससे उनकी गलती को दोबारा ना करें और ढंग से भी अभी प्रेरित हो
⭐आकांक्षा या उम्मीद बच्चे किस स्तर तक उसे पाना चाहते हैं और इस चीज की कितनी समय परिस्थिति के अनुसार हमें आवश्यक जरूरत है हमें कब कितनी जरूरत है
⭐रुचि
बच्चे को प्रेरित किया जा सकता है और जरूरत के हिसाब से हमारी रुचि करती हो बढ़ती रहती है आत्मविश्वास स्वाभिमान पर सूची निर्भर करती है बच्चे बच्चे को इस प्रकार का वातावरण दिया जाए जिससे वह रुचि उत्पन्न हो और सीखने के लिए प्रेरित हो बच्चे को आकर्षित चीजें भी चीजों को देखकर भी रुचि उत्पन्न होती है वह इससे भी अभी प्रेरित होता है ⭐प्रगति
बच्चे को समय-समय पर बताया जाना चाहिए कि वह प्रगति करने की अभिप्रेरणा
✍Menka patel


◆ अभिप्रेरणा ◆

★ अभिप्रेरणा का शब्दिक अर्थ उत्तेजना है ।
★ ” प्रेरणा कार्य को प्रारम्भ करने जारी रखने और नियमित करने की प्रकिया है ” गुड
★ ” प्रेरणा व्यवहार को जागृत करने , क्रिया के विकास को संपोषित करने और क्रिया के तरीके को नियमित करने की प्रक्रिया है ” .. युंग

◆ प्रेरणा के पक्ष :-
● प्रेरणा के तीन पक्ष है ।

  1. आवश्यकता
  2. अन्तर्नोद
  3. उद्दीपन

◆अभिप्रेरणा के कारण :-
● अभिप्रेरणा के दो कारण हैं ।

  1. स्वभाविक
  2. अर्जित

◆ अभिप्ररेणा के सिद्धान्त :-

  1. वातावरणीय सिद्धान्त
  2. शारीरिक क्रिया सिद्धान्त
  3. मूल प्रवृत्ति सिद्धान्त
  4. अन्तर्नोद सिद्धान्त
  5. मनोविश्लेषण सिद्धान्त
    6.निस्पत्ति प्रेरणा सिद्धान्त
  6. आन्तरिक प्रेरण सिद्धान्त

◆ अभिप्ररेणा के प्रकार :-
★ सकारात्मक
★ नकारात्मक

✍️ 🇧 🇾 – ᴊᵃʸ ᴘʳᵃᵏᵃˢʰ ᴍᵃᵘʳʸᵃ 💐😊


✍️by ➖ Anamika Rathore

➖अभिप्रेरणा की विधियां ➖

1::कक्षा का उचित वातावरण==
शिक्षक को प्रभावशाली प्रेरणा देने के लिए शिक्षण सामग्री से संपन्न , अर्धपुर्णं , निरन्तर परिवर्तन शील कक्षा कक्ष का वातावरण रखना चाहिए।

2:: आवश्यकता का आईना दिखा कर==
बच्चे की मुख्य आवश्यकता उसके सीखने में अच्छा सहयोग करती है।

3:: सफलता या असफलता==
बच्चो को इस प्रकार से प्रेरित किया जाना चाहिए कि बच्चे को उसकी कितनी आवश्यकता है । सीखने के सफल अनुभव अधिक सीखने की प्रेरणा देते हैं। वहीं पर असफलता भी बच्चे को फिर से सफल होने के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरणा देती हैं।

4:: प्रतियोगी वातावरण या सहयोग==
शिक्षाशास्त्रय के संपूर्ण इतिहास में प्रतियोगिता को प्रेरणा के लिए प्रयोग किया जाता है। एक ही सितुएशन दो अलग अलग लोग एक दूसरे के लिए पॉजिटिव प्रतियोगी वातावरण बना सके।

5:: प्रशंशा या निंदा==
सही समय और स्थान पर प्रयोग किए जाने पर प्रशंशा , प्रेरणा का कार्य करती है। वहीं कभी कभी निंदा भी बच्चे को अभिप्रेरित के देती है। परन्तु प्रशंशा और निंदा हम मोटिवेट भी के सकती है और डिमोटिवेट भी के सकती हैं।

6:: पुरस्कार और दण्ड==
सही समय , सही जगह , सही काम के लिए दिया गया पुरस्कार , प्रेरणा का कार्य करता हैं। वहीं बच्चो को ऐसा दण्ड देना जिससे वह मोटिवेट हो और वहीं गलती वापिस से ना करे।

7:: आकांक्षा और उम्मीद==
आपको किसी चीज की कितनी आवश्यकता है वहीं आपकी आकांक्षा को दर्शाता है , कि उसका स्तर कितना है। किसी चीज की आवश्यकता ही डिसाइड करती है कि आकांक्षा कैसी होगी।

8:: रुचि==
रुचि से बच्चो को अभिप्रेरित किया जा सकता है यह किसी बच्चे में ज्यादा तो किसी बच्चे में कम होती है। अपनी जरूरत और वातावरण पर रुचि निर्भर करती हैं।

9:: नयापन==
बच्चो द्वारा अलग अलग चीजों को अपनाकर उन्हें अभिप्रेरित किया जा सकता है।
10:: प्रगति का ज्ञान देकर ==
बच्चो की प्रगति के ज्ञान की जानकारी लेकर उसे प्रेरित किया जा सकता है।

🍁 यह सभी कारक बच्चे को सही समय , परिस्थिति ऑर स्थान पर देकर बच्चे को पूर्ण रूप से प्रेरित कर सकते हैं।


✍🏻Notes By➖ Vaishali Mishra 🔆अभिप्रेरणा 🔆

अभिप्रेरणा कई तरह से लायी जा सकती है या किसी शिक्षक द्वारा किसी भी बच्चे को कई तरीको से प्रेरित किया जा सकता है।➖

▪️1 उचित वातावरण बनाकर ➖ यहां पर उचित वातावरण का मतलब शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए जिससे बच्चे बेहतर रूप से अभिप्रेरित रहे।कार्य के दौरान उन्हें समय समय पर किसी न किसी माध्यम से प्रेरित करते रहना चाहिए।क्योंकि कक्षा का उचित वातावरण ही अभिप्रेरणा को बनाए रखता है।

▪️2आवश्यकता का आइना दिखाकर ➖ यहां आवश्यकता का आइना मतलब है कि बच्चो को उनकी जरूरतों को अहसास होने पर भी बेतहर रूप से अभिप्रेरित किया जा सकता है।जब हमे किसी चीज की जरूरत या आवश्यकता होती है तो उसे पाने के लिए हम सदा ही अभिप्रेरित बने रहते है।

▪️3 प्रतियोगी वातावरण और सहयोग देना➖शिक्षण कार्य में शिक्षक को एक प्रतियोगी वातावरण का निर्माण करना चाहिए जिससे कि बच्चो में एक दूसरे को अच्छा करते हुए देखकर वह भी अच्छा करने के लिए अभिप्रेरित होते है।साथ ही बच्चो के लिए सहयोगी वातावरण का निर्माण भी करना चाहिए।

▪️4 सफलता और असफलता के द्वारा ➖हम सफल और असफल दोनों के होने पर अभिप्रेरित होते है और नहीं भी।
जब हम सफल होते है तभी भी हम अभिप्रेरित होते है कि हमे ओर अच्छा करना है या अभिप्रेरित नहीं भी होते है कि एक बार सफल हो गए तो काफी है।
जब हम असफल होते है तब भी अभिप्रेरित होते है कि इस बार नहीं कर पाए तो अगली बार जरूर करके दिखाएंगे । और कभी कभी अभिप्रेरित नहीं भी होते है जैसे कि यदि असफल होते है तो सोचते है कि रहने दो हम से नहीं हो पाएगा अब।

▪️5 प्रशंशा और निंदा➖बच्चो को प्रसंशा और निंदा दोनों जी अभिप्रेरित करती है। जब बच्चे किसी काम को करते है और उस काम में हमारी तारीफ या प्रशंशा होती है तो उस काम के प्रति बच्चे काफी ज्यादा अभी प्रेरित हो जाते है।
जबकि इसके विपरित शब्द निंदा होने पर भी बच्चे अभिप्रेरित होते है जैसे की यदि बच्चो की काम में निंदा की जाती है या उसकी बुराई की जाती है तो वे सोचने लगते है कि अगली बार इस काम को इतने बेहतर तरीके से कोशिश करेंगे कि निंदा जैसा कोई शब्द ही प्रयोग नहीं होगा।

▪️6 पुरुष्कार और दण्ड➖ बच्चे पुरुष्क़ार और दण्ड दोनों के द्वारा भी हम काफी ज्यादा अभिप्रेरित होते है ।

▪️7 आकांक्षाएं (expectations) और उम्मीद (Desire)➖किसी काम को करने के बाद उस काम की सफलता को पाने में हमारी काफी ज्यादा आकांक्षाएं और उम्मीद होती है लेकिन यह दोनों ही हमारी pririoty या उसकी अहमियत पर निर्भर करती है।

▪️8 रुचि➖ हमारा आत्मसम्मान, स्वभविमान ही हमारी रुचि को अभिप्रेरित करता है और रुचि हमारी जरूरत,वातावरण पर निर्भर करती है।
किसी भी काम को देखकर हमारे अंदर जो भावना जाग्रत होती है वहीं रुचि कहलाती है।किसी भी काम में रुचि होने पर उस काम के प्रति हम पूरी तरह से अभिप्रेरित रहते है।

▪️9 नवीन रूप ➖
यदि बच्चे किसी कार्य को बार बार एक ही तरीके से करते रहें तो उस काम के प्रति ज्यादा डर तक प्रेरित नहीं रह पाते है ।इसलिए किसी भी कार्य को करते समय उसमे कई नवीन तरीको का या नवीन चीजों का प्रयोग कर शिक्षक उस कार्य के प्रति बेहतर अभिप्रेरणा को विकसित कर पाते है।

▪️10 प्रगति का ज्ञान देकर ➖शिक्षक द्वारा समय समय पर बच्चो को प्रगति देकर एक बेहतर रूप से अभिप्रेरित किया जा सकता है।

उपर्युक्त तरीको में से किसी भी तरीके के द्वारा हम बच्चे को बेहतर रूप से अभिप्रेरित रख पाते है बस इन सभी के लिए यह तीन बातो का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है सही जगह,सही समय और सही काम के प्रति ही अभिप्रेरणा देनी चाहिए।


🌼अभिप्रेरणा की विधियां 🌼
बच्चों को कई प्रकार से अभिप्रेरित किया जा सकता है।

1) कक्षा का उचित वातावरण बनाकर -कक्षा के वातावरण पर निर्भर भरता करता है कि बच्चे कैसे सिखेगे। यदि कक्षा का वातावरण बच्चों के लिए भय मुक्त, बच्चे अपनी अभिव्यक्ति स्वतंत्र रूप से कर सके। तो बच्चे पढने के लिए अच्छे से प्रेरित होगे। यदि कक्षा का वातावरण अच्छा नही है तो स्वतंत्र होकर अपनी भावनाओं, कार्य को नहीं कर सकते हैं।

आवश्यकता का आइना दिखाकर – बालक को बताना की क्या उसका लक्ष्य हैं, उसे बताना की कैसे लक्ष्य को प्राप्त किया जाए, लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसे क्या क्या करना चाहिए। उसे आवश्यकता अनुसार प्रेरित करते रहना चाहिए।

सफलता और असफलता – सफलता और असफलता से भी बच्चे प्रेरित होते हैं। यदि हम किसी कार्य को पूरी जी जान से करते हैं और हमे उसमे सफलता मिलती है तो हम प्रेरित होते हैं। कभी कभी हम असफलता से भी प्रेरित होते हैं ।जैसे ही असफल होते हैं तो हम उस कार्य मे सफल होने के फिर ऊर्जावान होकर उस कार्य को करते हैं।

प्रतियोगी वातावरण और सहयोग – हमारा अपने सहपाठीयो से प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या के साथ नही होनी चाहिए बल्कि सहयोगात्मक तरीके से होनी चाहिए जिससे दोनों ही अभिप्रेरित होकर अपने कार्य में सफल हो सके।

प्रशंसा और निंदा – प्रशंसा से भी प्रेरित होते हैं। यदि हमने अपने कार्य को पूरी लग्न और निष्ठा से किया और सफल होते हैं तो लोगो के द्वारा हमारी प्रशंसा होती है जिससे हम फिर से कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं। यदि किसी कार्य मे हमारी निंदा होती है तो हम फिर से उस कार्य को अच्छे से करने के लिए प्रेरित होते हैं।

पुरस्कार और दंड – पुरस्कार और दंड सही जगह, सही समय पर और सही काम के लिए देना चाहिए। हमे अच्छा कार्य करने के लिए पुरस्कार दिया जाता है तो हम फिर से कार्य को करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। किसी कार्य मे हम गलती होने पर दंड मिलता है जिससे हम उस गलती को फिर से नहीं करने के लिए प्रेरित होते हैं।

आकांक्षा, उम्मीद – हमे किसी से आकांक्षा या उम्मीद होती है तो हम उससे प्रेरित होते हैं।

रूचि-जब हमे किसी कार्य मे रुचि होती है तो हम उस कार्य को करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

नयापन – जब हम किसी नये कार्य को करते हैं तो हम उसे करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

प्रगति का ज्ञान देकर – जब बच्चा किसी काम को करता है तो हम उसे बताना चाहिए की उसने कार्य को ठीक प्रकार से किया या नहीं। इसके बारे मे बताने से वह प्रेरित होते हैं।

Notes by – रवि कुशवाह


By_ Abha
◆अभिप्रेरणा◆
★अभिप्रेरणा एक ऐसी सीढ़ी हैं, जो हमें अपने स्तर से उच्चे बढ़ने में हमारी सहायता प्रदान करती हैं।इसके कारण हम अपनी आवश्यकताओ को पहचान पाते हैं,और उसे आगे बढ़ने के लिए उत्प्रेरित होते हैं।

1)कक्षा का उचित वातावरण:-
कक्षा-कछ में ऐसा महौल होना चाहिए कि बच्चों की मनोवृत्ति को एकाग्रचित्त करें।और उसे अपने भाव को प्रकट करने की स्वतंत्रता मिलती हो,बच्चों में सहयोग की भावना उत्पन्न हो।

2)आवस्यकता की आइना दिखाकर:-
बच्चों की आवश्यकताओ की बारे में चर्चा करना ताकि उसे पता चले कि उसे किस तरफ और किन आवस्यकता की ओर बढ़ना हैं, जो हमें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद करेगी।

3)सफलता/असफलता:-
इस प्रक्रिया द्वारा बच्चों में भी अभिप्रेरणा उत्पन्न होती हैं, जब किसी कार्य को करने से सफलता मिलेगी हैं तो उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान होती हैं।अगर बच्चों को किसी कार्य में असफलता मिलती हैं, तो उसे उस कार्यों को और बेहतर तरीके से करने की उत्सुकता होती हैं।

4)प्रतियोगी वातावरण/सहयोग:-
बच्चों की प्रतियोगी वातावरण से भी इनमें प्रेरणा की भावना आती हैं, जो उन्हें औरों से बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं।एक दूसरे की मदद करना और मदद लेना भी इसमें शामिल होता हैं।

5) प्रशंसा/निंदा:-
प्रसंशा से बच्चों को भावना में उतेजना उत्पन्न होती हैं, ठीक उसी प्रकार अगर बच्चों को किसी के द्वारा निंदा किया गया हो या महसूस हुआ हो तब भी बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं।

6)पुरस्कार/दंड:-
अगर बच्चों को अच्छे कार्य के लिए उन्हें पुरस्कार दी जाती हो,तो उनमें अधिक प्रसन्ता उत्पन्न होती हैं।अगर बच्चों को गलत कार्य करने पर दंड दी जाती हैं, तो उसे अनुभव होता हैं कि हमें ये कार्य नहीं करनी चाहिए और इससे उसको सिख भी मिलती है।

7)उम्मीद/आकांक्षा:-
अभिप्रेरणा द्वारा बच्चों में बहुत सी आकांक्षाये उत्पन्न होती हैं, जिसके कारण वो किसी कार्य को करने के लिए उतेजना उत्पन्न होती हैं।

8)रुचि:-
बच्चों में किसी प्रकार के कार्य करने के लिए उनमें रुचि होना अति आवश्यक है, जो अभिप्रेरणा द्वारा किया जा सकता हैं।
9)नयापन:-
अभिप्रेरणा द्वारा हमेशा कुछ नया करने के बारे में बच्चे को प्रेरित करती हैं।

10)प्रगति का ज्ञान देकर:-
बच्चों को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करके उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सहयोग करती हैं, जो उसे अपने मार्ग पर चलने के लिए उतेजित करती हैं।


Date/ 7/9/2020
Nots_ By shanu sanwle
✏️ अभिप्रेरणा _ प्रेरणा हमें किस प्रकार अभिप्रेरित करती है प्रेरणा से ही हम अपने लक्ष्य को पर्याप्त करने में सफल हो सकते हैं इसके कहीं सारे प्रभावित कारक है।
1️⃣ कक्षा का उचित वातावरण :-
कक्षा में एक ऐसा वातावरण बनाना ,जिसमें बच्चा खुद अभिप्रेरित या मोटिवेट हो ,एक क्रियाशिल वातावरण बच्चों को देना ,जिससे बच्चा खुद सिखता हैं
2️⃣ आवश्यकता का आईना दिखा कर :-
बच्चों अपनी आवश्यकता का आईना दिखाना की आपको पढ़ना क्यो आवश्यक हैं आप क्या करना चाहते , आपकी जरूरत क्या हैं ये सब बातें बता कर बच्चों को अभिप्रेरित कर सकते हैं।
3️⃣ सफलता /असफलता :-
सफलता और असफलता दोनों हि बच्चों को
अभिप्रेरित कर सकती है अभिप्रेरणा साकारात्मक भी और नाकारात्मक भी हो सकती हैं कभी कभी असफलता भी बच्चों को अभिप्रेरित करती है
4️⃣ प्रतियोगिता या वातावरण का सहयोग :-
प्रतियोगिता वातावरण देना बच्चों को सहयोग करता हैं बच्चे पढ़ने में रुचि लेते हैं प्रतियोगिता करवा कर बच्चे मैं ज्ञान प्राप्त करने कि अभिप्रेरणा मिलती है बच्चे बेहतर सिखते ,कुछ करने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है।
5️⃣ प्रशंसा /निंदा : –
प्रशंसा और निंदा दोनों ही बच्चों को मोटिवेशन करती है बच्चा बेहतर कार्य करने लगता ,बच्चे में कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। यह बच्चे के उपर है की बच्चा कैसे सोचता है।
6️⃣ पुरस्कार / दण्ड :-
पुरस्कार देना गलत नहीं, पुरस्कार ऐसा हो जो बच्चों को अभिप्रेरणा दे । पुरस्कार सही काम ,सही जगह ,और सही समय पर देना चाहिते , पुरस्कार छोटा बड़ा नहि होता , प्रशंसा करके भी बच्चे को मोटिवेट कर सकते हैं।
दण्ड :- दण्ड भी कहीं प्रकार का हो सकता है एक शब्द भी दण्ड है लेकिन एक समय के बाद दण्ड साकारात्मक भी हो सकता है
7️⃣आकांक्षा :-
किसी काम को करने की जिज्ञासा ,उम्मिद , आकांक्षा होना चाहिए ,हमारी ज़रूर


🖊🖊Notes by Neha Roy🌸

Motivation 🌸🌸🌸🌸
Motivation लेटिन भाषा के
मोटम शब्द से बना है motum means act (गति) ः
Motivation हमे अपने शिक्षक से मिलती है किसी काय् को करने के लिए अभिप्रेरित करते है
1.कक्षा का उचित वातावरण
कक्षा का उचित वातावरण कहने का तातपय् है शिक्षक को कक्षा का ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे बच्चा अभिप्रेरित हो
2.आवश्यकता का आयना दिखाकर ःः
आवश्यकता का आयना दिखाकर कहने का तातपय् है बच्चो को शिक्षा का महत्व के बारे में बताना उनहे अभिप्रेरित करना जब हमे किसी चीज के लिए अभिप्रेरित होते हैं तो वो जल्दी सीखते हैं
3.सफलता /असफलता
जब हम किसी काय् को करते हैं तो सफल होते है तो अभिप्रेरित होते है जब हम सफल नही होते हैं तो फिर भी अभिप्रेरित होते हैं जैसे – ctet का परीक्षा दिये तो सफल हुए तो अभिप्रेरित हुए कि और आगे मेहनत करनी है अगर सफल नही हुए तो और जी जान से मेहनत करेगे वो अभिप्रेरित होगा
4.प्रतियोगिता वातावरण /
सहयोग
बच्चों को ऐसा वातावरण में रहना चाहिए जिससे बच्चा प्रतियोगिता वातावरण सहयोग से अभिप्रेरित हो किसी बच्चे के लिए positive or negative दोनों होता है मगर उस स्थिति में भी बच्चा अभिप्रेरित होता है
5.प्रशसा/निदा
किसी काय् में बच्चो प्रशंसा मिलती है तो अभिप्रेरित होते हैं अगर निंदा होती हैं तो तब भी बच्चे अभिप्रेरित होते है करना है करके के दिखाना है
6.पुरस्कार /दंड
बच्चे किसी काय् को करते है तो उन्हें पुरस्कार मिलती है तो वो खुश होते है वो अभिप्रेरित होते है अगर दंड मिलती है तो अभिप्रेरित होते हैं जो काम गलत कि ये है उसे सही तरीके से करते है
7.आकांक्षा (उम्मीद)
बच्चे को जब अभिप्रेरणा मिलती है तो उनकी आकांक्षा बढती है और किसी काय् करने के लिए अभिप्रेरित होते है
8.रुचि
बच्चो मे रुचि बढती है तो अभिप्रेरित होते हैं
9.नयापन
बचचे जब अभिप्रेरित होते है तो कुछ नया करते हैं उसे करने के लिए प्रोतसाहित होते है
10.प्रगति का ज्ञान देकर
जब बच्चा कोई काय् करता है तो हमे उसे सही रास्ता तक पहुंचने में मागदशन करना चाहिए इससे बच्चे अभिप्रेरित होते हैं। 📝📝


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