मानसिक मनोरचनाएं
समायोजन तंत्र
आत्म सुरक्षात्मक शक्तियां
आत्म सुरक्षा अभि यंत्रिकाऐ
प्रतिरक्षण प्रणाली
रक्षा तंत्र

मानसिक मनोरचना वे साधन हैं जिनको व्यक्ति मानसिक रोग से बचने या समायोजन स्थापित करने के लिए उपयोग में लाता है

मानसिक मनोरचना के प्रकार-2

  1. प्रत्यक्ष
  2. अप्रत्यक्ष
  3. प्रत्यक्ष मनोरचना में
  4. बाधाओं को दूर करना
  5. अन्य मार्ग खोजना
  6. लक्ष्य का विस्थापन करना
  7. विश्लेषण एवं निर्णय
  8. अप्रत्यक्ष उपाय
  9. दमन-कटु अनुभूति ,दुखद बातें, अतृप्त इच्छाएं
    इन सब को बलपूर्वक बुला देना दमन कहलाता है

दमन शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सिगमंड फ्रायड ने किया था

  1. दिवास्वप्न/ मन तरंग/ कल्पना प्रवाह-हकीकत में या वास्तव में जिन इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती हैं उनको कल्पनाओं के माध्यम से पूर्ण करके क्षणिक आनंद या संतुष्टि प्राप्त कर लेना दिवास्वप्न कहलाता है।

दिवास्वप्न की अधिकता आपको अपराधी बना सकते हैं
दिवास्वप्न की अधिकता किशोरावस्था में होती है

  1. प्रक्षेपण-खुद की असफलता का दोष किसी और पर डालकर खुद को संतुष्ट करना
  2. औचित्य स्थापन-वस्तु या पद प्राप्ति नहीं होने पर उस वस्तु या पद में दोष निकाल कर अपने आप को संतुष्ट करना
  3. आश्रित होना-कर्म हीन व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होकर अपने आप को समायोजित करता है
  4. प्रतिगमन-जो वर्तमान स्थिति तनाव देते हैं उससे बचने के लिए पूर्व स्थिति में चले जाते
  5. तदात्मीकरण-चाचा विधायक है हमारे
    ऐसे व्यक्ति से परिचय दिखाता है जो विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त हो
  6. शुद्धिकरण या शोधन-असामाजिक प्रवृत्ति को सामाजिक प्रवृत्ति में करके समायोजन करना

Notes by Ravi kushwah

मानसिक मनोरचना ➖
प्रत्यक्ष उपाय
अप्रत्यक्ष उपाय

प्रत्यक्ष उपाय➖

1) बाधाओं को दूर करना
2) अन्य मार्ग खोजने में
3) लक्ष्य का विस्थापन
4) विश्लेषण एवं निर्णय

अप्रत्यक्ष उपाय ➖

1) दमन
कटु अनुभूति ,दुखद बातें, अतृप्त इच्छाएं इन सब को बलपूर्वक भुला देना दमन कहलाता है |
दमन शब्द का प्रयोग सिगमंड फ्रायड ने किया |

2) द्विवास्वप्न /मन तरंग /कल्पना/ प्रवाह ➖
हकीकत में जिन इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती उनको कल्पनाओं के माध्यम से पूर्ण करके क्षणिक आनंद या संतुष्टि प्राप्त कर लेना द्विवास्वप्न कहलाता है |
द्विवास्वप्न की अधिकता व्यक्ति को अपराधी बन सकती है |
दिवास्वप्न की अधिकता किशोरावस्था में होती है |

3) प्रक्षेपण ➖
खुद की असफलता का दोष किसी और पर डालकर खुद को संतुष्ट करना |

4) औचित्य स्थापन ➖
कोई वस्तु या पद प्राप्त न होने पर उस पद और वस्तु में दोष डाल कर अपने आप को संतुष्ट करना |

5) आश्रित होना ➖
कर्महीन व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होकर अपने आप को समायोजित और संतुष्ट करता है |

6) प्रतिगमन ➖
जो वर्तमान स्थिति तनाव देती है उससे बचने के लिए पूर्व स्थिति में चले जाते हैं |

7) तदात्मीकरण ➖
ऐसे व्यक्ति से तालमेल बैठाता है परिचय दिखाता है जो विशेष प्रतिष्ठा का प्राप्त हो |

8) शुद्धिकरण/ शोधन ➖
असामाजिक प्रवृत्ति को सामाजिक प्रवृत्ति में बदलकर समायोजन करना |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙨𝙖𝙫𝙡𝙚

मानसिक मनोरचना के दो प्रकार है :-

(1) प्रत्यक्ष
(2) अप्रत्यक्ष

प्रत्यक्ष ➖
(1) बाधाओं को दूर करना
(2) अन्य मार्ग खोजना
(3) लक्ष्य का विस्थापन
(4) विश्लेषण एंव निर्णय

अप्रत्यक्ष ➖
(1) दमन – कटु अनुभूति , दु:खद बाते , अतृप्त इच्छाऐ इन सबको बलपूर्वक भूला देना , दमन कहलाता है |
दमन शब्द का प्रयोग — सिगमंड फ्रायड

(2) दिवास्वप्न / मनतरंग / कल्पना प्रवाह :-
हकीकत मे जिन इच्छाओं की पूर्ति नही होती है उनको कल्पनाओं के माध्यम से पूर्ण करके क्षणिक आनंद या संतुष्टि प्राप्त कर लेना दिवास्वप्न कहलाता है दिवास्वप्न की अधिकता आपको अपराधी बना सकती है |
दिवास्वप्न की अधिकता किशोरावस्था में होती है |

(3) प्रक्षेपण :- खुद की असफलता का दोष किसी और पर डालकर खुद को संतुष्ट करना |

(4) औचित्य स्थापन :- वस्तु / पद प्राप्ति ना होने पर उस पद / वस्तु में दोष निकालकर अपने आप को संतुष्ट करना |

(5) आश्रित होना :- कर्महीन व्यक्ति पूरी तरह से दूसरो पर निर्भर होकर अपने आप को समायोजित करना |

(6) प्रतिगमन :- जो वर्तमान स्थिति तनाव देती है उससे बचने के लिए पूर्व स्थिति में चले जाते है |

(7) तदात्मिकरण :-
” चाचा विधायक है हमारे “
ऐसे व्यक्ति से परिचय दिखाता है जो विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त हो |

(8) शुद्धिकरण / शोधन :- असामाजिक प्रवृति को सामाजिक प्रवृति करके समायोजन करना |

Notes by ➖ Ranjana sen

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