Notes by ➖Rashmi Savle
अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक➖

1⃣ शिक्षार्थी से संबंधित कारक अभिवृत्ति
बुद्धि
परिपक्वता
सीखने की इच्छा
शैक्षणिक दृष्टिकोण/ पृष्ठभूमि
शारिरिक मानसिक स्वास्थ्य
अधिगम प्रक्रिया
बाल केन्द्रित शिक्षा
बालक ( शिक्षार्थी)

2⃣ शिक्षक से संबंधित कारक
विषय का ज्ञान
शिक्षण विधि
मनोविज्ञान का ज्ञान
शिक्षक का व्यवहार
व्यक्तित्व
व्यक्तिगत विभेद को समझना
अनुशासन
बाल केन्द्रित शिक्षा

3⃣ पाठ्यवस्तु/ पाठ्यक्रम से संबंधित कारक➖
विषय वस्तु की प्रकृति
विषय वस्तु का आकार
विषय वस्तु रुचिपूर्ण
विषय वस्तु की संरचना
दृश्य या श्रव्य सामग्री का प्रयोग
पाठ्यवस्तु की भाषा शैली
उदाहरण प्रस्तुतीकरण
विषय वस्तु का क्रम

4⃣ ✍ अधिगम व्यवस्था✍

अधिगम के लिए जो व्यवस्था की जाती है अधिगम व्यवस्था कहलाती है
🌺 संपूर्ण बनाम खण्ड विधि➖
किसी कार्य को छोटे छोटे टुकड़ों में बाॅटकर उनका विश्लेषण करना ही संपूर्ण बनाम खण्ड विधि के अन्तर्गत है….

🌺 सक्रिय बनाम निष्क्रिय विधि➖
सक्रिय होने के लिए निष्क्रिय होना आवश्यक है क्योंकि यह हमारे मस्तिष्क में ज्ञान की आवश्यकता लाने के लिए आवश्यक है सक्रिय और निष्क्रिय एक ही सिक्के के दो पहलू है….

🌺 अविषय बनाम संकेन्द्रिय विधि➖
किसी कार्य को करने के लिए उस कार्य तक पहुँचना अर्थात एक मुख्य बिन्दु तक पहुँचने के लिए अलग अलग रास्ते को चुनना जो उस बिन्दु तक पहुँचने में मदद करते हैं और वही रास्ते उस बिन्दु के उपविषय है…..

🌺 आयोजित बनाम प्रासंगिक विधि➖
ये विधि बाल केन्द्रित शिक्षा के लिए आवश्यक है इसमें हम अलग अलग विधियों का प्रयोग करते हैं जो कि प्रासंगिक होते हैं |
हमें किसी कार्य को आयोजित करने के पहले यह जानना आवश्यक है कि उसमें नया क्या है अर्थात हमने क्या सीखा और अधिगम को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक है……

🌺 संकलित बनाम वितरित विधि➖
यदि कोई चीज संकलित है तो उसको अलग अलग करके व्यक्त करना ही वितरण है…….

🌺 वातावरण से संबंधित कारक➖
हमारी आस पास की चीजें जिनसे अधिगम प्रभावित होता है

(1) वंशानुक्रम ➖
वंशानुक्रम अधिगम के लिए एक बाहरी कारक है जो हमें माता पिता से प्राप्त होता है….

(2) सामाजिक वंशानुक्रम➖
ये भी हमें वातावरण से ही प्राप्त होता है जैसे विद्यालय, आस पड़ोस, मित्र आदि ये सब हमारे सामाजिक वंशानुक्रम का हिस्सा है….

(3) वातावरण का प्रभाव ➖
वातावरण का प्रभाव अधिगम को प्रभावित करने का एक मुख्य कारक है जिससे जिससे हमारी बाहरी मानसिकता प्रभावित होती है……

(4) अनौपचारिक साधन ➖
अर्थात हम बाहरी चीजों से सीखते हैं जैसे माता पिता, भाई बहन, दोस्त, रिश्तेदार आदि…..

(5) व्यक्तित्व का विकास ➖
ये भी हमें बाहरी वातावरण से प्रभावित करता है…….

(6) पारिवारिक वातावरण ➖
पारिवारिक वातावरण भी अधिगम को प्रभावित करता है क्योंकि अधिकांश गुण बच्चे को विद्यालय जाने से पूर्व परिवार से ही प्राप्त होतें है…….

(7) कक्षा का भौतिक वातावरण➖ कक्षा का भौतिक वातावरण भी बच्चे के अधिगम का हिस्सा है जैसा कक्षा का वातावरण होगा अधिगम भी वैसे ही होगा……..

(8) मनोवैज्ञानिक वातावरण➖
ऐसा कारक जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है और वह हमारे मन में चलते रहता है जो हमारा मनोवैज्ञानिक वातावरण है…….

(9) सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण➖

(10) संपूर्ण परिस्थिति ➖

🌺🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌺


✍🏻Notes By- Vaishali Mishra

🔅अधिगम को कई कारक प्रभावित करते है जिसमे से कुछ निम्न प्रकार है।

🔆अधिगम व्यवस्था से संबंधित कारक (Factor related to learnings System)➖ इसमें कई कारक आते है जिनके द्वारा अधिगम प्रभावित होता है।

▪️1 संपूर्ण बनाम खंड विधि (Whole Vs Block method)➖
किसी भी संपूर्ण विषय के ज्ञान को हम छोटे छोट खंडो में बांटकर समस्त ज्ञान को इकट्ठा कर लेते है।
संपूर्णता- केवल संपूर्णता के साथ अधिगम करने से अधिगम कार्य प्रभावित होता है और अधिगम बेहतर रूप से नहीं हो पाता है।
खंड- जो भी संपूर्ण ज्ञान है उस ज्ञान को यदि खंड में बांटकर या छोटे छोटे रूप में अधिगम किया जाए तो अधिगम कार्य को काफी ज्यादा बेहतर और आसान बनाया जा सकता है।

▪️2 सक्रिय बनाम निष्क्रिय विधि
(Active Vs inactive method)➖
यह दोनों ही अधिगम को बहुत प्रभावित करते है।
जब हम सक्रिय होकर अधिगम करते है अधिगम काफी प्रभावी होता है लेकिन हर समय हम सक्रिय नहीं रह सकते है या हर समय सक्रिय बने रहने पर हम एक न एक समय निष्क्रिय हो ही जाते है।
यदि हमे अधिगम को सक्रिय रूप से करना है तो इसके लिए हमें निष्क्रिय भी होना पड़ेगा। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है कि जब हमारा शरीर और दिमाग निष्क्रिय या आराम करता है तभी वे बेहतर रूप से सक्रिय रह पाते हैं।

▪️3 उपविषय बनाम संकेंद्रिय विषय (Subtopic Vs Central low)➖

किसी भी उपविष्य का कितना महत्व है, वह कितना संबंधित है हमारे विषय के केंद्र से यह काफी जरूरी होता है।
उप विषय के द्वारा हम अपने विषय के केंद्र को समझ कर एक बेहतर रूप से अधिगम कर सकते है।

▪️4 आयोजित बनाम प्रसंगिक विधि (Conducted Vs Relevant low)
किसी भी कार्य का आयोजन इस तरह से किया जाना चाहिए जिससे हमे उस कार्य की प्रसंगिक्ता या जरूरत या हमारे लिए उसकी उपयोगिता का पता चल सके।
जब किसी भी कार्य का आयोजन किया जाता है तो उसके आयोजन के फलस्वरूप हमे कितना अधिगम हुआ था हम कितना सीख पाए है ,वहीं अधिगम प्रसांगिक होता हैं।
जब कार्य प्रसांगिक हो जाता है तब वह कुछ समय के बाद निष्क्रिय भी हो जाता है या कुछ देर आराम की अवस्था में आ जाता है। फिर बाद में आयोजित होता है क्योंकि जब किसी व्यक्ति द्वारा कार्य को ठीक प्रकार से आयोजित करना है तो उसके लिए उसका निष्क्रिय या आराम होना भी उतना ही जरूरी है जितना कि ठीक प्रकार से आयोजित होना।

▪️6 वातावरण से सम्बन्धित कारक
( Factor related to environment ) यह भी कई रूपो में अधिगम को प्रभावित करता है। जैसे
*1 वंशानुक्रम
*2 सामाजिक वंशानुक्रम
*3 वातावरण का प्रभाव

  • 4 शिक्षा के अनौपचारिक साधन
    ( विद्यालय के साथ साथ अन्य किसी भी तरह जैसे माता पिता,मित्र,या किसी भी रूप में शिक्षा प्राप्त करना)
  • 5 व्यक्तित्व का विकास
  • 6 परिवार का वातावरण
  • 7 कक्षा का भौतिक वातावरण
  • 8 मनोवैज्ञानिक वातावरण ( वातावरण की कई वस्तुओं या घटनाओं या स्थिति को देखकर हम अपने मन में वैसी ही धारणा या बना लेते है या वैसा ही सोचने लगते है जैसा की हमे दिखाई देता है।)
    *7 सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण
    *8 संपूर्ण परिस्थिति उपरोक्त समस्त कारक किसी न किसी रूप में अधिगम को प्रभावित करते है। इन सभी कारकों के द्वारा हम अधिगम को काफी आसान और बेहतर बनाया जा सकता है।

✍🏻notes by- manisha gupta✍🏻

💫 अधिगम व्यवस्था से संबंधित कारक💫

🌈 संपूर्ण बनाम खंड विधि(whole vs block method)➖ किसी भी संपूर्ण कार्य को उसके छोटे-छोटे खंड में बांटकर उसका गहन अध्ययन करके या विश्लेषण करना ही संपूर्ण बनाम खंड विधि कहलाता हैइस विधि में संपूर्णता से छोटे-छोटे खंड की ओर, या छोटे-छोटे पार्ट्स को लेकर
संपूर्णता की ओर जाकर अधिगम कर सकते हैं।

🌈 सक्रिय बनाम निष्क्रिय विधि(active vs inactive method)➖

सक्रियता और निष्क्रियता एक दूसरे के पूरक होते हैं जब हमारा मस्तिष्क या गति एक्टिव होता है तो सक्रियता और जब हमारी गति कम हो जाती है तो हम निष्क्रिय हो जाते हैं इसलिए ऐसा कह सकते हैं कि सक्रिय होने के लिए निष्क्रिय होना भी बहुत जरूरी है। जैसे हम किसी कार्य को करने के लिए एक्टिव होते हैं और जब वह कार्य पूर्ण हो जाता है तब हम निष्क्रिय हो जाते हैं, इसलिए ऐसा कह सकते हैं कि सक्रियता और निष्क्रियता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

🌈 उप विषय बनाम सकेंद्रीय विधि(subtopics vs central law)➖

उप विषय बालक के स्तरीय आयु के आधार पर ही बना कर सकेंद्रीय विधि में उन्ही उप विषयों का अधिगम करा कर एक मुख्य बिंदु तक पहुंचा जा सकता है।

🌈 आयोजित बनाम प्रासंगिक विधि(conducted vs relevant method)➖

किसी भी कार्य के आयोजन से पहले यह याद कर लिया जाना चाहिए कि वह हमारे लिए कितना जरूरी है या प्रासंगिक है इस विधि में इस विधि में उस कार्य को ही कंडक्ट किया जाता है जो बच्चों के लिए जरूरी हो यह विधि पूर्ण रूप से बाल केंद्रित पर आधारित है।

🌈 संकलित बनाम वितरित विधि(compiled vs distributed method)➖

कोई विषय वस्तु को यदि अलग-अलग भाग में है तो उसे संकलित करना और यदि कोई विषय वस्तु संकलित है तो उसे अलग अलग करके वितरित करना ही संकलित बनाम वितरित विधि कहलाता है।

💫 वातावरण से संबंधित कारक💫

हमारे आसपास का वातावरण भी हमारे अधिगम पर प्रभाव डालता है➖

🌸 वंशानुक्रम(heredity)➖ प्रत्येक बच्चे में योग्यताएं ,क्षमता है उसके वंशानुक्रम की ही देन होती है यह एक बाह्य कारक है जो हमें माता-पिता से प्राप्त होती है जिससे हमारा अधिगम प्रभावित होता है।

🌸 सामाजिक वंशानुक्रम(social heredity)➖
प्रत्येक बच्चे में जो आदर्श या संस्कार होते हैं वह हमें सामाजिक वातावरण से ही प्राप्त होता है जैसे आस-पड़ोस विद्यालय मित्र आदि सामाजिक वंशानुक्रम के अंतर्गत आते हैं।

🌸 वातावरण का प्रभाव( effect of environment)➖
प्रत्येक बालक के लिए वातावरण का उचित होना वंशानुक्रम के विकास के लिए अनिवार्य होता है वातावरण का प्रभाव एक महत्वपूर्ण कारक है जो हमारे अधिगम पर प्रभाव डालता है।

🌸 व्यक्तित्व का विकास(development of personality)➖

बच्चा वंशानुक्रम तथा वातावरण से ज्ञान अर्जित कर के ही मानवीय मूल्यों में रुचि लेने लगता है इन्हीं मूल्यों के कारण हमारा व्यक्तित्व का विकास होता है।

🌸 अनौपचारिक साधन(informal resources)➖

बालक अनौपचारिक साधन जैसे माता-पिता से, टीवी से ,समाचार पत्र से, कुछ न कुछ अवश्य सीखता है अनौपचारिक साधन भी बालकों के अधिगम पर गहन प्रभाव डालता है।

🌸 पारिवारिक वातावरण (familiar environment)➖पारिवारिक वातावरण भी एक ऐसा महत्वपूर्ण कारक है जो बालक के अधिगम को प्रभावित करता है यदि परिवार में कलह होता है तो बालक की मस्तिष्क पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और यदि परिवार में खुशियों का माहौल होता है तो बालक का मस्तिष्क भी अधिगम के लिए रुचिकर हो जाता है।

🌸 कक्षा का भौतिक वातावरण(physical environment of classroom)➖

कक्षा में छात्रों को भौतिक वातावरण जैसे प्रकाश, वायु , शोर आदि की समुचित व्यवस्था नहीं मिलती है तो ऐसी स्थिति में छात्रों का अधिगम में मन नहीं लगता है। इसलिए कक्षा का भौतिक वातावरण भी बालक के अधिगम को प्रभावित करता है।

🌸 मनोवैज्ञानिक वातावरण(psychology environment)➖ यह कारक अत्यंत महत्वपूर्ण होता है जो बालक के अधिगम को प्रभावित करता है बच्चों में एक दूसरे के प्रति सहयोग या सहानुभूति की भावना है या नहीं यह सीखने की प्रक्रिया में प्रभाव डालता है।

🌸 सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण(social and cultural environment)➖

सामाजिक वातावरण वह है जो रीति रिवाज मान्यताएं आदर्श मूल्य एवं स्वयं व्यक्ति की परिस्थिति भी व्यक्ति के अधिगम को प्रभावित करती है और सांस्कृतिक वातावरण वह है जो व्यक्ति द्वारा उन समस्त नियमों ,विश्वासों से, अधिगम करता है।

🌸 संपूर्ण परिस्थिति(whole situation)➖

विद्यालय को इस प्रकार से निर्मित किया जाना चाहिए जो विद्यार्थी को संतुष्टि प्रदान करें और उसे उसकी उपलब्धि पाने में मदद करें।

🌸🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌸


By ➖ Anamika Rathore ✍️

🍁 अधिगम को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत या पर्यावरणीय कारक 🍁

1: शिक्षार्थी
2: शिक्षक
3: पाठ्य वस्तु
4: अधि गम व्यवस्था
5: वातावरण

4️⃣ अधिगम व्यवस्था से संबंधित कारक ➖

1:: संपूर्ण बनाम खण्ड विधि ==

किसी विषय को संपूर्ण रूप से बड़े स्तर के ज्ञान को छोटे छोटे भागो में बांटकर विश्लेषण करना फिर संपूर्ण जानकारी को इक्कट्ठा करना।
यदि खण्ड में विभाजित करके छोटे छोटे टुकड़ों में अधिगम किया जाए तो अधिगम को ज्यादा आसान और बेहतर बनाया जा सकता है।

2::सक्रिय बनाम निष्क्रिय विधि==

यह एक ही सिक्के के दो पहलु है।
जब अधिगम चल रहा होता है तब हम सक्रिय रहते है अधिगम होने के बाद निष्क्रिय हो जाते हैं ताकि फिर से दूसरे अधिगम के लिए सक्रिय हो सके ।
अर्थात् हमे अधिगम को सक्रिय रूप से करना है तो हमे निष्क्रिय भी होना पड़ेगा । हम कह सकते हैं कि हमारा शरीर और दिमाग निष्क्रिय या आराम करता है तभी वह अच्छे से सक्रिय हो पाता है।

3:: उपविषय बनाम सकेंद्रिय विधि==

किसी विषय को उसके उप विषय में विभक्त करके पढ़ना फिर उसके सेंटर प्वॉइंट ( विषय ) पर पहुंचना।
उप विषय के द्वारा हम अपने विषय को समझ कर अच्छे से अधिगम के सकते है।

4:: आयोजित बनाम प्रासंगिक विधि==

किसी भी कार्य का आयोजन ऐसे किया जाए कि उस कार्य की जरूरत ( प्रासंगिक ता ) का पता चल सके।
कार्य ऐसे आयोजित किए जाएं जो प्रासंगिक हो।
अधिगम का आयोजन काफी प्रभावपूर्ण और रूचिपूर्ण तरीके से करवा कर वह अधिगम बच्चो के लिए प्रासंगिक बनाया जा सकता है।

5:: संकलित बनाम वितरित विधि==

हमारे पास संकलित रूप से जो भी ज्ञान है उसे कई तरह से बांटकर अलग अलग रूप में अधिगम में उसका उपयोग करना ।
जैसे — हमारे पास वॉट्सएप पर कोई बड़ा मैसेज आता है तो रीड मोर ( read more )
का ऑप्शन आता है जिसे क्लिक करने पर मैसेज वितरित हो जाता है ।

5️⃣ वातावरण से संबंधित कारक ➖

1: वांशानुक्रम == माता पिता से अधिगम पर प्रभाव पड़ता है।

2: सामाजिक वांशनुक्रम== पड़ोसी और समाज की विचार धारा का अधिगम पर प्रभाव पड़ता है।

3: वातावरण == बच्चा किस वातावरण में रहता है उसका प्रभाव भी अधिगम पर पड़ता है।

4: अनोपचारिक साधन == कोई दूसरा ( बाहरी ) व्यक्ति भी आकर हमारे अधिगम को प्रभावित कर सकते हैं।

5: व्यक्तिव विकास == यह भी अधिगम को प्रभावित कर सकता है।

6: परिवार का वातावरण == बच्चे के पारिवारिक वातावरण का अधिगम पर प्रभाव पड़ता है।

7: कक्षा का भौतिक वातावरण == कक्षा कक्ष का वातावरण बच्चे के लिए अच्छा होना चाहिए जिसमें वह स्वयं को फिजिकली समायोजित हो सके ।

8: मनोवैज्ञानिक वातावरण == जैसा हम देखते है या सोचते है उसके अनुरूप मन में धारणा बना लेते है उसका प्रभाव अधिगम पर पड़ता है।

9: सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण == बच्चा कैसे समाज , संस्कृति , पृष्ठभूमि या माहौल में रहता है उसका प्रभाव अधिगम पर पड़ता है।

10: संपूर्ण परिस्थिति == हमारे जीवन में जितनी भी परिस्थितियां आती है या समस्याएं उसका प्रभाव अधिगम पर पड़ता है।
🙏🙏


By Vandana Shukla

🌸learning system 🌸

🌸अधिगम व्यवस्था से संबंधित कारक🌸

1️⃣ संपूर्ण बनाम खंड विधि whole vs block method इस विधि मैं किसी भी विषय की पहले हम संपूर्ण जानकारी बताएंगे फिर उसके खंड करके उस विषय के बारे में बताएंगे जिससे बच्चों का अधिगम सुगम हो जाएगा।

2️⃣ सक्रिय बनाम निष्क्रिय विधि
active vs passive method
जब बच्चा अधिगम करता है तब वह सक्रिय होता है और जब अधिगम नहीं करता तो निष्क्रिय हो जाता है सक्रिय होने के लिए निष्क्रिय होना आवश्यक है जिससे फिर दोबारा अधिगम करें तो पूरी सक्रियता के साथ अधिगम हो।

3️⃣ अविषय बनाम संकेंद्रित विधि subtopic vs centre method
उपविषय से यानी बड़े विषय को छोटे-छोटे उप विषय में विभक्त करना फिर उस विषय को केंद्रीय विषय में जोड़कर अधिगम कराना।

4️⃣ आयोजित बनाम प्रासंगिक
विधि।-
ऐसे विषयों का चुनाव कर उन्हें आयोजित करना चाहिए जो प्रासंगिक हो बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

5️⃣ संकलित बनाम वितरित विधि compiled vs distributed
कोई विषय अगर संकलित है तो उसे टुकड़ों मैं अलग कर के अधिगम करना।

✳️ वातावरण से संबंधित कारक ✳️

1️⃣ वंशानुक्रम – कुछ गुण हमें माता-पिता से प्राप्त होते हैं जो अधिगम में सहायक होते हैं।

2️⃣सामाजिक वंशानुक्रम – हमारे आसपास और रिश्तेदारों के वंशानुक्रम से हैं जो हमारे अधिगम को प्रभावित करते हैं।

3️⃣वातावरण का प्रभाव -बच्चा किस प्रकार के वातावरण में रहता है यह भी उसके अधिगम को प्रभावित करते हैं जैसे विद्यालय से बच्चा घर जाता है लेकिन अगर उसके घर का माहौल के घर का वातावरण अच्छा नहीं है तो वह घर जाकर अधिगम नहीं हो पाएगा।

4️⃣ शिक्षा का अनौपचारिक साधन -बच्चा परिवार में बहुत सारे लोगों के साथ रहता है और उनसे अनौपचारिक तरीके से बहुत सारी चीजें ग्रहण करता है जो उसके अधिगम को प्रभावित करती हैं।

5️⃣व्यक्तित्व का विकास-जिस प्रकार बच्चे के व्यक्तित्व का विकास होता जाता है उस तरीके से उसका अधिगम भी बढ़ता जाता है अगर बच्चा स्वस्थ है तो उसके अधिगम में बाधा नहीं होगी।

6️⃣ परिवार का वातावरण – परिवार का वातावरण भी अधिगम में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है अगर वातावरण खुशहाल है तो बच्चा भी खुश रहता है और अच्छे मन से अधिगम करता है और वहीं अगर परिवार में निर्आशा जनक वातावरण है उसका अधिगम नहीं होगा।

7️⃣कक्षा का भौतिक वातावरण- कक्षा का भौतिक वातावरण भी अधिगम को प्रभावित करता है अगर कक्षा छोटी होगी बच्चे पास पास बैठे होंगे उन्हें बैठने में असुविधा होगी गर्मी लगेगी तो उनका ध्यान इधर उधर भटक जाएगा और वह अधिगम नहीं कर पाएंगे ।

8️⃣मनोवैज्ञानिक वातावरण -कई बार बच्चा मनोवैज्ञानिक रूप से कक्षा में उपस्थित नहीं होता है तो यह भी अधिगम में बाधा उत्पन्न करता है जैसे अगर बच्चा घर से डांट खा कर के आया है तो उसका ध्यान उसी डांट में रहेगा अधिगम कर ही नहीं पाएगा।

9️⃣सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण- कई बार हमारा समाज और हमारी संस्कृति हमें बहुत सारे कार्य करने से रोकता है कई समाज में बालिकाओं को शिक्षा नहीं दी जाती है उन्हें उच्च शिक्षा नहीं दी जाती है यह सोच कर कि आगे चलकर उन्हें घर के काम करना है तो उनको पढ़ाने की क्या जरूरत है।

🔟 संपूर्ण परिस्थिति ।

धन्यवाद


By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.