Evaluation

Byadmin

May 26, 2021

Date -25/05/2021

🎄 मूल्यांकन ( EVOLUTION) 🎄

🍁सतत् मूल्यांकन ( Continueous evolution)

सीखने सिखाने की प्रक्रिया, उसके साथ जो मूल्यांकन होता है, सतत् मूल्यांकन कहलाता है |

जैसे- प्रतिदिन मूल्यांकन, साप्ताहिक मूल्यांकन, मासिक मूल्यांकन, अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन, वार्षिक मूल्यांकन इत्यादि |

🍁व्यापक मूल्यांकन🍁

👉बच्चों के हर पहलू का मूल्यांकन |
👉 बेंजामिन ब्लूम ने व्यापक मूल्यांकन के तीन पक्ष बताये थे –

  1. संज्ञानात्मक डोमेन – ज्ञान, समझ, इत्यादि|
  2. क्रियात्मक डोमेन – क्रिया का करना |
  3. भावात्मक डोमेन – भाव

🍁निर्माणत्मक मूल्यांकन / रचनात्मक मूल्यांकन ( formative assesment) 🍁

👉बालक के अधिगम को जानना, समझना और उसमे सुधार करना रचनात्मक मूल्यांकन कहलाता है |

🍁योगत्मक मूल्यांकन/ संकलित मूल्यांकन/ आंकलित मूल्यांकन ( summative assesment)🍁

👉 ऐसा मूल्यांकन जो शिक्षण प्रक्रिया के अंत मे मूल्यांकन किया जाता है |

👉 संविधान लागू – 26/01/1950
अनुच्छेद 45- 6-14 वर्ष के बच्चों को 10 वर्ष के अंदर अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा दी जाए|

🍁 सर्व शिक्षा अभियान (2001) 🍁

👉 भारत सरकार द्वारा बनाई गयी योजना – 9 वी पंच वर्षीय योजना चल रही थी इसके तहत — वित्तीय खर्च केंद्र सरकार (85%) और राज्य सरकार (15%) मिलकर खर्च करेगी |
👉 10 वी पंच वर्षीय योजना मे – केंद्र सरकार (75%) और राज्य सरकार ( 25%)
👉 वर्तमान मे केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही 50-50% वित्तीय खर्च देती है |
👉 इस योजना से 192 मिलियन बच्चो और 600 जिलों को लाभ मिला |

🍁 जिला प्राथमिक कार्यक्रम 🍁
Prumary District program ( DPEP) -1994
👉उद्देश्य –

  1. शिक्षा को सार्वभौमिक ( सभी लोगो तक पहुचना)
  2. गुणवत्ता मे सुधार
  3. प्राथमिक शिक्षा म सुधार Note 🌿🌿 DPEP के लिए भारत मे वित्तीय सहायता के लिए–
  4. UNICEF
  5. नीदरलैंड बैंक
  6. IDA ( International Development authority) नोटस बाय 📝📝 निधि तिवारी🌿🌿 y

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🌏 सतत मूल्यांकन ( Continuous Evaluation) ➖

ऐसा मूल्यांकन जिसमें सीखने सिखाने की प्रक्रिया के साथ ही साथ मूल्यांकन होता है सतत मूल्यांकन कहलाता है |

💠 सतत मूल्यांकन के प्रकार➖

1) प्रतिदिन मूल्यांकन

2)साप्ताहिक मूल्यांकन

3) मासिक मूल्यांकन

4) अर्धवार्षिक मूल्यांकन

5) वार्षिक मूल्यांकन

🌏 व्यापक मूल्यांकन( Comprehensive Evaluation) ➖

ऐसा मूल्यांकन जिसमें बच्चों के हर पक्ष का मूल्यांकन किया जाता है | बच्चे की प्रत्येक गतिविधि कि बच्चे कि कक्षा में स्तर कैसा है वह किस पक्ष में कमजोर है किस पक्ष में उसको समस्या है आदि सभी कमियों का पता लगाने और उन्हें पता लगाकर दूर करने के लिए बच्चों का व्यापक मूल्यांकन किया जाता है जो कि कक्षा कक्ष के दौरान या अन्य गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है |

बैंजामिन ब्लूम ने व्यापक मूल्यांकन को 3 पक्षों में बताया है➖

💠 संज्ञानात्मक डोमेन ➖

1) ज्ञान
2) अवबोध
3) अनुप्रयोग
4) विश्लेषण
5) संश्लेषण
6) मूल्यांकन

💠 भावात्मक डोमेन➖

1) अभिग्रहण/ प्राप्त करना
2) अनुक्रिया / प्रतिक्रिया
3) मूल्य निरूपण / बातों का महत्व
4) संगठन / आयोजन करना
5) निरूपण

💠 क्रियात्मक डोमेन➖

1) उत्तेजना / आवेग
2) नियंत्रण
3) सामंजस्य /समन्वय
4) स्वाभाविक /अनुकूलन
5) आदत निर्माण /गठन/ उन्नति

🌏 निर्माणात्मक/ रचनात्मक मूल्यांकन ➖

बालक के अधिगम को जानना समझना और उसमें सुधार करना रचनात्मक मूल्यांकन कहलाता है |

🌏 योगात्मक / संकलित / आकलित मूल्यांकन➖

ऐसा मूल्यांकन जो शिक्षण प्रक्रिया के अंत में किया जाता है |
जिसके आधार पर बच्चों का वार्षिक परीक्षा परिणाम निकाला जाता है यह मूल्यांकन बच्चों के ग्रेड पर आधारित होता है जिसमें बच्चों की उपलब्धि का पता लगाया जा सकता है कि बच्चे उन्हें क्या किया है लेकिन इस प्रकार के मूल्यांकन में बच्चों की उपलब्धि में सुधार नहीं किया जा सकता है |
संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत 6 – 14 वर्ष की सभी बच्चों को 10 वर्ष के भीतर अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा दी जाए |

🌏 सर्व शिक्षा अभियान (2001) ➖

भारत सरकार की

🧿 नौवीं पंचवर्षीय योजना

इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय खर्च जो कि केंद्र और राज्य सरकार क्रमशः 85% और 15% मिलाकर खर्च करेगी |

🧿 10वीं दसवीं पंचवर्षीय योजना➖

इस योजना के तहत केंद्र सरकार 75% और राज्य सरकार 25% खर्च करेगी |

लेकिन वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार 50% का खर्च कर रहे जिससे 192 मिलीयन बच्चे 600 जिलों में लाभान्वित हुए हैं|

🌏 जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम ( DEEP) 1994 ➖

💠 उद्देश्य

1) शिक्षा का सार्वभौमीकरण अर्थात सभी लोगों तक शिक्षा पहुचाना

2)गुणवत्ता में सुधार

3) प्राथमिक शिक्षा में सुधार
जिसमें खर्च का बंटवारा केंद्र सरकार द्वारा 85% और राज्य सरकार द्वारा 15% करोगे |

इसमें भारत को वित्तीय सहायता इसके लिए 3 देशों ने प्रदान की|

1) UNICF

2) नीदरलैंड बैंक

3) IDAS

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮 ➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

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Batch-supertet
Time-7:45
Topic-Continous and comprehensive evaluation

सतत् मूल्यांकनContinuous Evaluation)

सीखने सिखाने की प्रक्रिया के साथ ही जो मूल्यांकन होता है वह सतत मूल्यांकन कहलाता है।

सतत मूल्यांकन अर्थात निरंतर मूल्यांकन करना।

इस प्रकार के मूल्यांकन में बालक के अधिगम के साथ-साथ वा दौरान की गई गतिविधियों वासी के ज्ञान का निरंतर रूप से मूल्यांकन किया जाता है।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के मूल्यांकन होते हैं

प्रतिदिन मूल्यांकन
सप्ताहिक मूल्यांकन
मासिक मूल्यांकन
अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन
वार्षिक मूल्यांकन

व्यापक मूल्यांकन

इसके अंतर्गत बच्चों के प्रत्येक पक्षों का मूल्यांकन किया जाता है।

बेंजामिन ब्लूम ने व्यापक मूल्यांकन के 3 पक्ष बताए थे, जो निम्नलिखित हैं
1- संज्ञानात्मक डोमेन
2-क्रियात्मक डोमेन
3-भावात्मक डोमेन

संज्ञानात्मक डोमेन -इसके अंतर्गत बालक के ज्ञान का मूल्यांकन किया जाता है, अर्थात बालक ने शिक्षण प्रक्रिया के दौरान कितना सीखा है ।

क्रियात्मक डोमेन इसके अंतर्गत बालक ने सीखे हुए ज्ञान का उपयोग या कार्य किया है या नहीं।

भावात्मक डोमेन इसके अंतर्गत बालक ने सीखे हुए ज्ञान के आधार पर जो भी कार्य किया है उसके प्रति उसका भाव किस प्रकार का है,

बालक के अंदर किसी भी एक प्रकार के डोमेन के होने से कोई महत्व नहीं होता है बल्कि बालक के अंदर व्यापक मूल्यांकन के अंतर्गत तीनों प्रकार के डोमेन का होना आवश्यक है, तभी अधिगम पूर्ण वा सफल माना जाता है।

जैसे हम सभी क्लास में अधिगम के किराए के द्वारा सीखते हैं फिर उस पर गतिविधि अर्थात उस पर नोट्स बनाना, प्रश्नों को हल करना वाउस पर टिप्पणी करना, वीडियो बनाना और इन सब कार्यों को करने के पीछे का भाव एक बेहतर और कुशल शिक्षक बनना है साथ ही अपनी नोट्स बा वीडियो के माध्यम से अन्य विद्यार्थियों की मदद करना है।

निर्माणात्मक मूल्यांकन/रचनात्मक मूल्यांकन
इसके अंतर्गत बालक के अधिगम को जानना, समझना और उसकी अधिगम में हो रहे त्रुटियों को दूर करना (अर्थात निदानात्मक मूल्यांकन के द्वारा समस्या का पता लगाना व उपचारात्मक शिक्षण के द्वारा उसका सुधार करना )वा सुधार करना, बेहतर करना रचनात्मक मूल्यांकन कहलाता है।

योगात्मक मूल्यांकन/आंकलित मूल्यांकन

यह एक ऐसा मूल्यांकनहै जो शिक्षण प्रशिक्षण प्रक्रिया के अंत में किया जाता है ।

इस प्रकार के मूल्यांकन में छात्र के अधिगम को प्रभावित नहीं करते हैं बल्कि उसके परिणाम को देखते हैं कि वर्ष पर कितना छात्र ने सीखा।

देश में संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू होने के बाद से अनुच्छेद 45 के अंतर्गत-राज्य संविधान के प्रारंभ से 10 वर्ष के भीतर सभी बालकों को 14 वर्ष की आयु पूरी करने तक निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रबंध करेगा।

सर्व शिक्षा अभियान (2001)

भारत सरकार द्वारा चलाए गए इस मिशन का उद्देश्य”सब पढ़े सब बढ़े से था”अर्थात शिक्षा को संपूर्ण भारत में फैलाने से था।

इस अभियान के प्रारंभ होने के समय देश में नववी पंचवर्षीय योजना चल रही थी ।

इस अभियान में होने वाला वित्तीय खर्च, का अनुमोदन 85% का केंद्र सरकार के द्वारा वाह 15% राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा।

इसके बाद दसवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का वाहन 75 % वह राज्य सरकार का 25 प्रतिशत खर्च वहन करेगी।

वर्तमान समय में 50% केंद्र सरकार व 50% राज्य सरकार खर्च वहन करती है।

इसका प्रभाव यह हुआ कि लगभग 192 मिलियन छात्र 600 जिलों के लाभान्वित हुए इस योजना के अंतर्गत।

जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम 1994
District CTET primary education policy
उद्देश्य-शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना अर्थात शिक्षा को बिना किसी भेदभाव के जन-जन तक पहुंचाना।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता ।

प्राथमिक शिक्षा में सुधार करने की आवश्यकता।

इस योजना के अंतर्गत 85% केंद्र सरकार खर्च वहन करेगी वाह 15% राज्य सरकार खर्च वहन करेगी।

UNICEF (United nation and international children’s education fund)
भारत में जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता दी गई,वो निम्नलिखित हैं-
,1-यूनिसेफ द्वारा
2-नीदरलैंड द्वारा
3-, IDA (international development authority) इन तीनों ने मिलकर वित्तीय सहायता दी।

धन्यवाद

शिखर पाण्डेय ✍️

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