💫💫Eric Erickson’s psychosocial theory💫💫

➡️(एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत)

➡️सिग्मन फ्रायड-मनोविश्लेष्णात्मक सिद्धांत

🌺Note-एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत ,सिग्मन के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत से प्रभावित अवश्य था लेकिन,किंतु,परंतु इन्होंने बहुत कुछ तथ्य नये भी जोड़े थे।

👨🏻‍🏫 ➡️ एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कार्यों की भूमिका को स्वीकार किया है इसलिए भी इन्हें मनोसामाजिक सिद्धांत का जनक कहा जाता है।

➡️ मानव प्रकृति के संबंध में पूर्व कल्पनाएंl

🌱🌱एरिकसन में तीन तत्वों को मानव प्रकृति माता गाना है÷🌱🌱

1️⃣ ➡️ पूर्णतावाद

2️⃣ ➡️ पर्यावरणीयता

3️⃣ ➡️ परिवर्तनशीलता

💨मानव व्यक्तित्व को अलग-अलग अवस्था से होकर गुजरना होता है-

💦इदम् I’d

💦अहम् Ego

💦परम अहम् Super Ego

🔥व्यवस्था पहले से ही निश्चित और शाश्वत होती है;
इतना ही नहीं विकास की ये अवस्थाएं विशिष्ट मिशन द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती हैं पश्चजात (Epigenetic) कहते हैं।

🔥मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं, जिन्हें इरिक्सन का (3-R theory ) कहते हैं।

💦Ritualization (कर्मकांडता)

💦Ritual (कर्मकांड)

💦Retualism (कर्मकांडवाद)

👉👉कर्मकांडता (Ritualization)👈👈

👉समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों को व्यवहार का अंतः क्रिया करना।

👉👉 (Ritual)👈👈

👉व्यस्त लोगों के समूह कारक के स्वरूप की मूल घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य

👉👉. ( Ritualism)👈👈

👉कर्मकांडता में जो विराट उत्पन्न होता है ;उसे एरिक्सन के कर्मकांड वाद का नाम दिया है, उसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर रहता है।

🌼🌼 Thank you🌼🌼
🌺🌺 Written by ➡️ Shikhar pandey 💫

🌼एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत🌼
🌼 मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत- सिगमंड फ्रायड 🌼

🌼🌼एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व का विकास में सामाजिक एवं ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया है इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है

🌼 मानव प्रकृति के संबंध में पूर्व कल्पनाए-
🌼🌼 ऐरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति मे महत्वपूर्ण माना है
🌼🌼1.पूर्णताबाद
🌼🌼2.पर्यावरणीयता
🌼🌼3.परिवर्तनशीलता

🌼2. Id, /ego/super ego –मानव व्यक्तित्व का अलग-अलग अवस्थाओं से गुजरता है
🌼यह अवस्थाएं पहले से निश्चित और सास्वत होते हैं इतना ही नहीं विकास की यह अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती है इसी पश्चजात( epigenetic) नियम कहते हैं

🌼🌼 मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं जिन्हें ऐरिक्सन का 3-R theory कहते हैं

🌼🌼1. Ritualization (कर्मकांडता)
🌼🌼2. Ritual(कर्मकांड )
🌼🌼3.Ritualism (कर्मकांड वाद)

🌼🌼. 1.Ritualization (कर्मकांडता )–समाज के व्यक्ति के साथ संस्कृति तत्व से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंतः क्रिया करना

🌼🌼2. Ritual(कर्मकांड) –वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृती स्वरूप की तुलना घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य! ।

🌼🌼3.Ritualism(कर्मकांडवाद)– कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांड वाद का नाम दिया है इस मे प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर रहता है

🌼🌼🌼🌼🌼by manjari soni🌼🌼

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत
Eric Erickson phychosocial Theory

एरिक्सन का जन्म जर्मनी में हुआ था और इनकी मृत्यु अमेरिका में हुई थी इन्हें जर्मनी- अमेरिकन मनोवैज्ञानिक कहते हैं।

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत ,सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत से प्रभावित अवश्य था लेकिन साथ ही एरिक्सन ने इसमें कुछ नया भी जोड़ा था।

एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया है।
इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है इसे एरिक्सन का व्यक्तित्व का सिद्धांत भी कहते हैं।

एरिक्सन की मानव प्रकृति के संबंध में निम्न पूर्व कल्पनाएं है-

1. एरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है
👉पूर्णतावाद perfectionism
👉पर्यावरणीयता environmentality
👉परिवर्तनशीलता variability

जब पर्यावरण में परिवर्तन होगा तो वह पूर्णता की तरफ जाता है।

2. Id,Ego & Super Ego-. मानव अलग-अलग अवस्था से गुजरता है ।इड,इगो,सुपर इगो

ये अवस्था पहले से निश्चित और शाश्वत होती है।
इतना ही नहीं विकास की ये अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती हैं जिसे पश्चजात epigenetic नियम कहते हैं।

मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं जिन्हें एरिकसन का 3-R Theory कहते हैं।

1.Ritulization कर्मकांडता
2.Ritual कर्मकांड
3.Ritualism कर्मकांडवाद

1.Ritulization कर्मकांडता – समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंत:क्रिया करना कर्मकांडता कहलाता है।

2.Ritual कर्मकांड- वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप की मुख्य घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य , कर्मकांड कहलाता है।

3.Ritualism कर्मकांडवाद- कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर ही रहता है।

Notes by Ravi kushwah

🔆 एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत/ एरिक्सन के व्यक्तित्व का सिद्धांत ( Erick Erickson’s psycho Social Theory ) ➖

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषण सिद्धांत से प्रभावित है |

एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया इसके इसलिए भी इसे मनो सामाजिक सिद्धांत भी कहा जाता है |

मानव प्रकृति के संबंध में कुछ पूर्व कल्पना हैं ➖

🍀 एरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है ➖

1) पूर्णताबाद
( Perfectionism)

2) पर्यावरणीयता
(Environmentality)

3) परिवर्तनशीलता
( Variability )

🍀 इदम्, अहम्, परमअहम➖
इन्होंने इस बात को माना कि व्यक्ति का जो व्यक्तित्व है वह अलग-अलग अवस्थाओं से होकर गुजरता है जो पहले से निश्चित तथा शाश्वत होती हैं इतना ही नहीं विकास की ये अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती हैं और इसको पश्चजात (Epigenetic) नियम कहते हैं |

🎯 एरिक्सन का 3 – R सिद्धांत➖

मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3 – R होते हैं जिन्हें एरिकसन का 3 – R सिद्धांत कहते हैं |

🍀कर्मकांडता ( Ritulization) ➖

समाज के व्यक्तियों के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंतः क्रिया करना ही कर्मकांडता है |

🍀 कर्मकांड ( Ritual) ➖

वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप की मुख्य घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य कर्मकांड है |

🍀 कर्मकांडवाद( Ritualism )➖

कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया है इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर ही रहता है |

नोट्स बाॅय➖ रश्मि सावले

🌻🍀🌼🌸🌺🌻🍀🌼🌸🌺🌻🍀🌼🌸🌺🌻🍀🌼🌸🌺
✨⭐एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत ⭐✨

🍂सिंगमड फ्रायड — मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत

👉 एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया है।
इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा गया है।

🌟🍁मानव प्रकृति के सम्बन्ध में पूर्व कल्पनाएं 🍁🌟

🌼 एरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है—
🕊️ पूर्णतावाद
🌷 पर्यावरणीयता
🌺 परिवर्तनशीलता

💥🌻ID/Ego/super ego 🌻💥
🌼मानव व्यक्तित्व अलग अलग अवस्था से गुजरता है।
ये अवस्था पहले से निश्चित और शाश्वत होती है इतना ही नहीं विकास की ये अवस्थाएं विशिष्ट मिथक द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती है।
इन्हें पश्चाजात (Epigenetic) नियम भी कहते हैं।

🌹✨ मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3 — R होते हैं जिसे एरिक्सन का 3 -R Theory कहा जाता है।

✨R — Ritualization(कर्मकांडता)

✨R — Ritual(कर्मकांड)

✨R — Ritualism (कर्मकांडवाद)

👉 कर्मकांडता ( Ritualization) — समाज के व्यक्तियों के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अन्त क्रिया करना।

🌺 कर्मकांड(Ritual) —- वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप की मुख्य घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य।

🌷 कर्मकांडवाद (Ritualism) — कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया है इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर रहता है

✨✨✨✨✨Notes by -_— Babita yadav ✨✨✨✨✨✨

🏵️ एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत/एरिक्सन के व्यक्तित्व का सिद्धांत (Erick Erickson’s psycho social theory)✨
👉 एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत से प्रभावित है।
👉 एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया है इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है मानव प्रकृति के संबंध में पूर्व कल्पनाएं हैं।
1️⃣ एरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है-
1️⃣ पूर्णता बाद
2️⃣ पर्यावरणीयता
3️⃣ परिवर्तनशीलता
2️⃣ Id/Ego/Super Ego-
👉 मानव व्यक्तित्व अलग-अलग अवस्था से गुजरता है यह अवस्था पहले से निश्चित और शाश्वत होती है इतना ही नहीं विकास की अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एव नियंत्रित होती है पश्चजात(Epigenetic) कहते हैं।
👉 मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं।
जिन्हें एरिकसन का 3-R theory कहते हैं।
1️⃣Rituacization(कर्मकांडता)
2️⃣Ritual(कर्मकांड)
3️⃣Ritualism(कर्मकांड बाद)
🧚 कर्मकांडता—
👉समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंत: क्रिया करना।
🧚 कर्मकांड—
👉 वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप की मूल्य घटनाओं को दिखने के लिए किया गया कार्य।
🧚 कर्मकांडबाद –
👉 कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडबाद का नाम दिया है इससे प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर ही रहता है।
🏵️🌸💖Thank you🏵️🌸💖
💖💖🌸🏵️ Notes by-Vinay Singh Thakur
एरिक्सन का मनोसामाजिक / व्यक्तित्व सिद्धांत
Ericksons psychosocial theory

सिगमंड फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत
इसके अंदर id ,igo, super igo आते हैं

एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारणों की भूमिका को स्वीकार किया है इसलिए इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है

मानव प्रकृति के संबंध पूर्व कल्पनाएं
1 Ericsson ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है
1 पूर्णतावाद perfectionism
2 pryavrniyta
3 परिवर्तनशीलता। valiability

id, igo,super igo से सबको गुजारना है

यह अवस्था पहले से निश्चित और सास्वत होती है इतना ही नहीं विकास की अवस्थाएं विशिष्ट मिशन द्वारा संचालित एवं नियंत्रित इसे ही Epigenetic कहते हैं

मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3r होते हैं जिन्हें एरिकसन का 3 R कहते हैं

1Ritualization कर्मकांडता
2 Ritual कर्मकांड
3Ritualism कर्मकांडवाद
1 कर्मकांडता

समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंतः क्रिया करता है

2 कर्मकांड

वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप की मुख्य घटनाओं को देखने के लिए किया गया कार्य

3 कर्मकांडवाद

कर्मकांड में जो बिकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया है इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं पर रहता है

🙏🙏🙏🙏🙏🙏sapna sahu🙏🙏🙏🙏🙏🙏

⛳एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत⛳
(Eric- Erickson’s psycho-social theory)

👉🏻एरिकसन जर्मन अमेरिकन मनोवैज्ञानिक थे।

👉🏻एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत से प्रेरित है।
एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया है। इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है।

एरिक्सन के अनुसार मानव प्रकृति के संबंध में पूर्व कल्पनाएं निम्नलिखित है—
१. एरिक्सन ने तीन तत्वों को मानव व प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है—
A. पूर्णतावाद(perfectionism)
B.पर्यावर्णीया
C. परिवर्तनशीलता
👉🏻 एरिक्सन के अनुसार पर्यावरण में जो परिवर्तन होता है यह हमारे परफेक्शन को तय करता है.
२. मनुष्य का व्यक्तित्व अलग-अलग (jese-Ed, ego, super ego) अवस्थाओं से गुजरता है और यह अवस्थाएं पहले से निश्चित और सास्वत होती है इतना ही नहीं विकास की यह अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियमित होती है इससे पश्चजात नियम(Epigenetic rule) कहते है.
मनोसामाजिक विकास के प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं, जिन्हें एरिक्सन की 3-R थ्योरी कहते हैं.
यह 3-R निम्न है-
.१. R—Ritulization (कर्मकाण्डता)
२. R—Ritual (कर्मकांड)
३. R—Ritualism (कर्मकांडवाद)

१. Ritualization (कर्मकाण्डता) — समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंतः क्रिया करना कर्मकांडता कहलाता है।
२. Ritual (कर्मकांड) — वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृत्ति स्वरूप किये गए मूल्य, घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य कर्मकांड कहलाता है.
३. Ritualism (कर्मकाण्डवाद) — कर्मकांड का में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया है इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के ऊपर ही रहता है

👉🏻Notes by Shivee Kumari😊

🎯(Erickson’s psychological theory)
🎯
💫एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत💫

👉यह जर्मन,- अमेरिकन ,,(psychologist) थे।

👉एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत से प्रभावित हैं।

👉एरिक्सन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारकों की भूमिका को स्वीकार किया ।

इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है

💫मानव प्रकृति के संबंध में पूर्व कल्पनाएं………

🍁एरिक्सन ने तीन तत्व को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है।

(1)पूर्णतावाद(perfectionism)
(2) पर्यावरणीयता (environmentilaity)

(3) परिवर्तनशीलता (variability)

💫Id/ego/supper ego:-मानव का व्यक्तित्व अलग-अलग अवस्था से होकर गुजरता है और यह अवस्था पहले से निश्चित और शास्वत होता है इतना ही नहीं विकास की यह अवस्था विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होता है इसे पश्चाजात(epigenetic) नियम कहते हैं।

👉मनोसामाजिक विकास के प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं। जिन्हें एरिक्सन का 3-R theory कहते हैं।

👉(1) Rituacization (कर्मकाडता)

👉(2) Ritual(कर्मकाड)

👉(3) Ritualism (कर्मकाण्डवाद)

(1) Rituacization ( कर्मकाण्डता):-
समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार कीए गए तरीकों से व्यवहार या अंतः क्रिया करना ।

(2) Ritual(कर्मकांड):-
व्यस्क लोगों के समूह के द्वारा आवृत्ति स्वरुप की मुख्य घटनाओं को दिखाने के लिए किया गया कार्य।

(3) Ritualism (कर्मकांडवाद) :-
कर्मकाडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्सन ने कर्मकांडवाद का नाम दिया है। इसमें प्राणी का ध्यान स्वयं के उपर ही रहता है।

🌼🌺🌻🙏Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌈🌸💥🌺🙏

💥एरिक्शन का मनोसामाजिक सिद्धांत 💥
🔅मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत ➖ सगमंड फ्रायड
🌀एरिक्शन ने मानवीय व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक और ऐतिहासिक कारको की भूमिका को स्वीकार किया है |
इसलिए भी इसे मनोसामाजिक सिद्धांत कहा जाता है |
◼ मानव प्रकृति के संबंध में कल्पनाएं :-
1.- इरेक्शन ने तीन तत्वों को मानव प्रकृति में महत्वपूर्ण माना है |
१.पूर्णतावाद (Perfectionism)
२.पर्यावरणीयता (Environ mentality)
३.परिवर्तनशीलता (Variability)
2.- Id/ Ego/ Super Ego ➖मानव का व्यक्तित्व अलग-अलग अवस्थाओं से गुजरता है |
ये अवस्था पहले से निश्चित और शाश्वत होती है इतना ही नहीं विकास की अवस्थाएं विशिष्ट नियम द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होती है पश्चजात ( कहते है |
◼ मनोसामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था में 3-R होते हैं जिन्हें एरिक्शन 3-R theory कहते हैं |
1.- Ritualization (कर्मकांडता)
2.- Ritual (कर्मकांड)
3.- Ritualism (कर्मकांडवाद)
⭐ Ritualization (कर्मकांडता) ➖
समाज के व्यक्ति के साथ सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किए गए तरीकों से व्यवहार या अंत: क्रिया करना |
⭐ Ritual (कर्मकांड) ➖
वयस्क लोगों के समूह द्वारा आवृति स्वरूप की मुख्य धारणा को दिखाने के लिए किया गया कार्य |
⭐Ritualism (कर्मकांडवाद) ➖
कर्मकांडता में जो विकार उत्पन्न होता है उसे एरिक्शन में कर्मकांडवाद का नया नाम दिया है इसमें प्राणी ध्यान स्वयं के ऊपर रहता है |
Notes by ➖Ranjana Sen

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