Date -29/05/2021
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👩‍🎤संवेगात्मक विकास➖

अंदर से गति करना या उत्तेजित होना

वूडवर्थ➖संवेग मानव की उत्तेजित दशा है |
👉 संवेग दो प्रकार का होता है➖

  1. बुरे ➖ क्रोध, घृणा, इर्ष्या, भय
  2. अच्छे ➖ प्रेम, हर्ष, आनंद, करुणा, दया 👶 🧒शैशवावस्था मे संवेगात्मक विकास➖
  3. जन्म से उत्तेजना ही संवेग है |
  4. दो वर्ष की उम्र तक सभी संवेग उत्पन्न हो जाते है
  5. शुरू मे संवेग अस्पष्ट रहता है, धीरे धीरे स्पष्टता आती है |
  6. शुरू मे संवेग अनिश्चित होता है |
    5.शुरू मे संवेग तीव्र होता हैं |
  7. शिशु मे संवेगात्मक अभिव्यक्ति का विकास धीरे धीरे होता है | 🟢 एलिस क्रो➖ शिशु अपनो से बड़ो का संवेगात्मक व्यवहार का अनुकरण करता है, यही कारण है कि उसे उन सब बातों से डर नही लगता है जिनसे उनसे बड़े लोगो को डर लगता है |
    🟢 जोन्स ➖ 2 वर्ष के शिशु को सांप से डर नही लगता क्योकि उनमे भय नाम का संवेग विकसित नही हुआ होता है लेकिन वही शिशु 3 वर्ष का होने पर अंधेरे व जानवर से डरने लगता है क्योकि डर नाम का संवेग विकसित हो जाता है |

👦👧 बाल्यावस्था मे संवेगात्मक विकास 🟢 क्रो एंड क्रो➖ सम्पूर्ण बाल्यावस्था मे संवेग की अभिव्यक्ति मे निरंतर परिवर्तन होते है |

  1. संवेग स्पष्ट और निश्चित होता है |
  2. संवेग की तीव्रता मे अपेक्षाकृत कमी होती है |
  3. बच्चे का संवेग, परिवार, विद्यालय और शिक्षक से प्रभावित होता है |
  4. टोली, समूह या गैंग मे रहने के कारण बालक मे ईर्ष्या, घृणा, द्वेष आदि वाधित संवेग भी आ सकते है |

👨👩 किशोरावस्था मे संवेगात्मक विकास➖
1 . दया, प्रेम, क्रोध, करुणा आदि संवेग स्थाई हो जाते है |

  1. शारीरिक, शक्ति का उसकी संवेगात्मक रुचि और व्यक्तित्व पर प्रभाव डालती है |
  2. किशोर बहुत चिंता मे रहता है जिसके कारण इंसान क्रोधी और चिड़चिड़ा हो जाता है |

📝📝नोटस बाय निधि तिवारी🌿🌿🌿

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