Emotion

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Sep 3, 2020

संवेग : –
【Emotion】
★ संवेग शब्द का शाब्दिक अर्थ उत्तेजना है ।
★ व्यक्ति की उत्तेजित अवस्था को संवेग कहते हैं ।
★ संवेग की संख्या 14 है ।
● भय, क्रोध, घृणा, आश्चर्य, वात्सल्य, कष्ट, कामुकता,
आत्मविभान, अधीनता, एकांकीपन, भूख, अधिकार, कृति, आमोद
★ संवेग और मूल प्रवृत्ति एक दूसरे के पूरक हैं ।
★ संवेग दो प्रकार के होते हैं ।

  1. सकारात्मक संवेग
  2. नकारात्मक संवेग

■ सकारात्मक संवेग

  1. कृति भाव
  2. आश्चर्य
  3. वात्सल्यता
  4. करूणा
  5. आमोद
  6. आत्माभिमान
  7. अधिकार भावना

■ नकारात्मक संवेग :

  1. क्रोध
    2.घृणा
    3.भय
  2. आत्महीनता
  3. एकांकीपन
  4. भूख
  5. कामुकता मूल प्रवृत्ति :-
    【Basic nature】
    ★ मूल प्रवृत्ति शब्द का शाब्दिक अर्थ मुख्य आदत है ।
    ★ ऐसी प्रवृत्ति जो जन्मजात या अनुवांशिकता में पायी जाती है उसे मूल प्रवृत्ति कहते हैं ।
    ★ ” किसी कार्य को करने का बिना सीखा हुआ स्वरूप मूल प्रवृत्ति है ” …. वुडवर्थ
    ★ ” मूल प्रवृत्ति अपने मूल अर्थ में पशु उद्वेग है ” …. जेम्स ड्रेवर
    ★ ” मूल प्रवृत्ति जन्मजात मनो शारीरिक प्रेरक है ” ….. मैक्डूगल
    ★ मूल प्रवृत्ति वह जन्मजात प्रवृत्ति है जो किसी जैविक प्रयोजन को निश्चित तरीके से किया करके पूरा करती है ” ….. वैलेन्टाइन
    ★ मूल प्रवृत्ति के जनक मैक्डूगल हैं ।
    ★ जेम्स ड्रेवर , थार्नडाईक , वुडवर्थ ने भी मूल प्रवृत्ति को परिभाषित किया है ।
    ★ मूल प्रवृत्तियों की संख्या 14 है ।
    ● पलायन , युयुत्सा, निवृत्ति, पैतृक प्रवृत्ति, संवेदना, जिज्ञासा, काम भावना, आत्म स्थापना, दैन्य, सामूहिकता, भोजनान्चेषण, संचय, रचना, हास्य

■ सकारात्मक या धनात्मक मूल प्रवृत्ति : – इनकी संख्या 7 है ।

  1. संतान कामना
  2. सृजनात्मकता
  3. संग्रह प्रवृत्ति
  4. आत्मस्थापना
  5. जिज्ञासा
  6. शरणागति
    7.हास्य

■ नकारात्मक या ऋणात्मक मूल प्रवृत्ति : – इनकी संख्या 7 है ।

  1. सामूहिकता
  2. युयुत्सा
  3. निवृत्ति
    4.पलायन
  4. काम प्रवृत्ति
    6 दैन्य भाव
    7 भोजनान्वेषण

★ प्रत्येक मूल प्रवृत्ति का संबंध संवेग से होता है। –
मूल प्रवृत्ति संवेग

  1. पलायन – भय
  2. युयुत्सा – क्रोध
  3. निवृत्ति – घृणा
  4. पैतृक प्रवृत्ति – वात्सल्य
  5. संवेदना – कष्ट
  6. जिज्ञासा – आश्चर्य
  7. काम भावना – कामुकता
  8. आत्म स्थापना – आत्मभिमान
  9. दैन्य – अधीनता की भावना
  10. सामूहिकता – एकांकीपन
  11. भोजनान्चेषण – भूख
  12. संचय – अधिकार की भावना
  13. रचना – कृति भाव
  14. हास्य – आमोद

✍️ 🇧 🇾 – ᴊᵃʸ ᴘʳᵃᵏᵃˢʰ ᴍᵃᵘʳʸᵃ


संवेग- अंग्रेजी भाषा के इमोशनल का हिंदी रूपांतरण है। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के इमोवयर से हुई है।जिसका अर्थ है उतेजित होना।

●वुडवर्थ के अनुशार-संवेग व्यक्ति की उतेजित दशा हैं।
●क्रो और क्रो के अनुसार-संवेग ऐसी भावनात्मक अनुभूति ह जो किसी व्यक्ति के मानसिक या शारीरिक उतेजना से जुड़ी होती ह ।
आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी है जो अभिब्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है।

★★मैकडुगल ने संवेग के 14 मूल प्रवित्ति बताई है ।जो निम्न ह :-

  • पलायन – भय
    *युयुत्सा। – क्रोध
    *निवृत्ति। – घृणा
    *जिज्ञासा। -आश्चर्य
    *शिशुरक्षा -वात्सल्य
    *शरणागत। -विषाद
    *रचनात्मक -संरचनात्मक
    *संचायेप्रवृति-स्वमित्व की भावना
    *सामूहिकता -एकाकीपन
    *काम। -कामुक्ता
    *आत्म गौरव- श्रेष्ठ की भावना
    *दैन्य -आत्महीनता
    *भोजन अन्वेषण- भूख
    *ह्रास। -आमोद।

🌈संवेग
संवेग इमोशन की उत्पत्ति लैटिन भाषा की इमोशनल शब्द से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ भड़क या उत्तेजना होना है संवेग संज्ञान पर आधारित होते हैं संवेग के लिए संज्ञान का होना आवश्यक है संवेग में मूल प्रवृत्तियां माय बेसिक नेचर होती है जब बच्चे को भूख लगती है तो वह रोने लगता है यह लो ना उसका बेसिक नेचर है उसी को हम मूर्ख व्यक्ति हैं कहते हैं संवेग वास्तव में मानसिक उत्पत्ति की व्यवस्था है जो प्रत्येक व्यक्ति के कार व्यवहार को प्रेरणा शक्ति प्रदान करती है किसी वस्तु को देखकर प्रसन्न होना तथा डरावनी वस्तु को देखकर डर लगना के विपरीत पर होने पर क्रोधित होना या किसी खराब वस्तु को देखकर घृणा हो ना इत्यादि संवेगात्मक स्थितियों के कुछ संवेग हैं
🌈वुडवर्थ के अनुसार संवेग व्यक्ति की भी उत्तेजित दशा है
🌈मैक्डूगल के अनुसार संवेग प्रगति का केंद्र है
🌈Crow and crow के अनुसार
संवेग व भावात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिक शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी है जो अभिव्यक्ति द्वारा व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है आंतरिक समायोजन मे हम किस प्रकार कार्य को करना है यह हम अपने आंतरिक व्यवहार से करते हैं इसमें मानसिक शारीरिक उत्तेजना का प्रयोग करते हैं जिस प्रकार हमें किसी चीज को अच्छी लगती है और तो हमारा मानसिक समायोजन होता है लगना हमारा सारिक समायोजन है आंतरिक समायोजन में मानसिक व शारीरिक उत्तेजना का समायोजन बैठाना है
🌈मैक्डूगल ने14 प्रकार की प्रवृत्तियां बताए हैं
⭐ पलायन -भय
⭐ युयुत्सा- क्रोध
⭐ निवृत्ति- घृणा
⭐ जिज्ञासा- आश्चर्य
⭐ शिशु रक्षा- वात्सल्य
⭐ शरणागति- विषाद/करुणा
⭐रचनात्मक- संरचनात्मक भाव
⭐ संचय प्रकृति- स्वामित्वकी भावना
⭐सामुहिकता- एकाकीपन
⭐ काम- कामुकता आत्मगौरव- श्रेष्ठ की भावना
⭐ दैन्य- आत्म हीनता
⭐ भोजन अन्वेषण- भूख
⭐ ह्रास- आमोद
✍Menka patel


✍️ By ➖
Anamika Rathore

🍁संज्ञान➖
संज्ञान का अर्थ जानना है । जानना, ज्ञान का अभिन्न अंग है। संज्ञान हमारे संवेग से जुड़ा हुआ है।

🍁 संवेग ( Emotion)➖
संवेग शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ”एमोवेेर ” ( emovere) से हुई है। जिसका अर्थ है ‘ उत्तेजित होना ‘ या ‘ हलचल होना ‘ ।
“”संवेग को व्यक्ति की ‘ उत्तेजित दशा ‘ कहते है। व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं के कारण संवेग होता है।””
✏️व्यक्ति के संज्ञान , बुद्धि के अनुसार ही व्यक्ति को कैसे रिएक्ट करना है वह करता है।
✏️हमारे संवेग हमारे मानसिक स्तर पर निर्भर करते हैं। अर्थात् हमारी मूल प्रवृत्ति को हम चाहे तो छुपा भी सकते है । परिस्थिति के अनुरूप मानसिक संवेगो को नियंत्रित किया जा सकता है।
✏️हमारा भिन्न- भिन्न व्यक्तियों के साथ भिन्न- भिन्न संवेग होता है जिसे आंतरिक समायोजन के द्वारा हम दिखाते है।
जैसे- अगर व्यक्ति घर में माता- पिता के सामने अलग और ऑफिस में अलग संवेग प्रदर्शित करता है और दोस्तो के साथ फिर अलग संवेग व्यक्त करता है।


🍁वुड वर्थ ➖ संवेग , व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।

🍁क्रो & क्रो ➖ संवेग वह भावनात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है। आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी होती है, जो अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है।


,✏️ मूल प्रवृत्ति और संवेग एक – दूसरे से जुड़े है।
✏️मूल प्रवृत्ति आधार ( base) है और संवेग , उसका भाव ( representation) है।

🍁मैक ङुगल ➖
मैक ड्डुगल के अनुसार, संवेग की 14 मुल प्रवृत्ति होती है।
मूल प्रवृत्ति। संवेग

1: पलायन ( escape) —
भय ( fear)

2: युयुत्सा ( combact)–
क्रोध(anger)

3: निवृत्ति (repulsion)–
घृणा(disgust)

4: जिज्ञासा (curiosity)–
आश्चर्य (wonder)

5: शिशुरक्षा (parental)–
वात्सल्य (love)

6: शरणागति (apeal)–
विषाद (distress)

7: रचनात्मक (construct)–
संरचनात्मक भावना (feeling of constructorness)

8: संचय प्रवृति (aequistion)–
स्वामित्व (ownership)

9: सामूहिकता (gregariousness)–
एकाकीपन(lonelyness)

10: काम (sex)–
कामुकता (lust)

11:आत्मगौरव(self asseration)–
श्रेष्ठता की भावना (positive self feeling)

12: दैन्य (submission)–
आत्महिनता (nagative self feeling)

13:भोजन अन्वेषण(food- seeking)–
भूख (appetite)

14: हास(laughter)–
आमोद (amusment)


📝Notes by रश्मि सावले 📝 संवेग (Emotions) :- संवेग व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं एवं मूल प्रव्रतियाओ के द्वारा बाहरी व्यहार में व्यक्त किया जाता है संवेग हमारे मानसिक स्तर पर निर्भर करता है जो कि संज्ञान के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है संज्ञान के बिना संवेग की कल्पना नहीं की जा सकती है… संवेग अंग्रेजी भाषा के शब्द Emotion का हिन्दी रूपांतरण है जो कि लेटिन भाषा के Emovere से बना है जिसका अर्थ है उत्तेजना हलचल या उथल पुथल…. वुडवर्थ के अनुसार :– संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है… क्रो एवं क्रो के अनुसार :– संवेग हमारी भावनात्मक अनुभूति है जो किसी व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है और ये आंतरिक समायोजन के साथ अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यहार के रूप में प्रदर्शित होती है….. अर्थात परिस्थिति के अनुसार हम अपनी भावनाओं को समायोजित करते हैं… मेक्डूगल ने संवेग 14 प्रकार के बताये है.. (1) पलायन (Escape) :–भय ( Fear) (2) युयुत्सा ( Combat) :–क्रोध (Anger) (3) निवृत्ति (Replesion) :– घृणा ( Disgnst) (4) जिज्ञासा (Curiosity) :– आश्चर्य(Wonder) (5) शिशु रक्षा (Parental) :–वात्सल्य (Love) (6) शरणागति( Apeal):– विषाद (Distress) (7) रचनात्मक(Construction) :–संरचनात्मक की भावना (Feeling of creativeness) (8) संचय प्रवृत्ति(Acqnistion) :– स्वामित्व(Ownership) (9) सामूहिकता(Gregariouss) :–एकाकीपन (Loneliness) (10) काम ( Sex) :– कामुक्ता (Lust) (11) आत्मगौरव (Self assertion) :–श्रेष्ठता की भावना (Positive self feeling) (12) दैन्य (Submission) :–आत्महीनता (Negative self feeling) (13) भोजन अन्वेषण (Food seening) :–भूख (Appetite) (14) हृस (Laughter) :–अमोद (Amusement)


✍️manisha gupta ✍️

संवेग[emotion ] 🌺 हमारे संज्ञान के कारण ही उत्पन्न होता है संवेग अर्थात मानसिक क्रियाएं संवेदना तर्क ही डिसाइड करते हैं कि हमारा संवेग कैसा होगा। 🔆 ,angreji sabd “emotion” ka हिंदी रूपांतरण है यह ‘इमोशन ‘शब्द लैटिन भाषा के “इनोवेयर” से बना है जिसका अर्थ -उत्तेजना ,हलचल, उथल-पुथल होता है। 🔆woodwoth 🔆 ” संवेद व्यक्ति की उत्तेजित दशा है” 🔆 क्रो एंड क्रो के अनुसार- ” संवेग वह भावनात्मक अनुभूति है जो किसी व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है, आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी होती है जो अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है” 🌸 संवेगो का संबंध मूल प्रवृत्तियों से होता है मूल प्रवृत्ति के आधार पर ही हम अपनी भावना को रिप्रेजेंट करते हैं । 🔆 मैक्डूंगल के अनुसार 14 मूल प्रवृत्तियों के 14 संकेत दिए हैं-✏️(1)पलायन{escape}- भय {fear} ✏️(2) युयुत्सा {combat}- क्रोध{angry } ✏️(3) निवृत्ति{repulsion }- घृणा{disgust} ✏️(4) जिज्ञासा{curiasity }- आश्चर्य{wonder} ✏️(5) शिशु रक्षा{ parental}- वात्सल्य{love} ✏️(6)शरणागति{appeal}-विषाद। {distress} ✏️(7) रचनात्मक{construction }- संरचनात्मक भावना{feeling of creativeness} ✏️(8) संचय प्रकृति{acquisition }- स्वामित्व की भावना{ownership } ✏️(9) सामूहिकता{gregariousness}- एकाकीपन{ lonelyness} ✏️(10)काम{sex}-कामुक्ता{lust} ✏️(11) आत्म गौरव {self assertion}-श्रेष्ठता की भावना{positive self feeling} ✏️(12) दैन्य{submission }- आत्महीनता{negative self feeling } ✏️(13) भोजन अन्वेषण{food seeking }-भूख{appetite} ✏️(14)हास{laughter}-आमोद{amusement} 🔆संवेग की प्रकृति या विशेषताएं 🔆 संवेग हमारे प्रतिदिन के जीवन को प्रभावित करते हैं।


By-#Rohit_Vaishnav✍️

संवेग शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा की इमोशन शब्द से हुई है। इमोशन लेटिन भाषा के Emovear शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है उत्तेजित दशा।

मनुष्य अपने दैनिक जीवन में सुख , दुख, भय , क्रोध,प्रेम आदि का अनुभव करता है, यह उसकी संवेग अवस्थाएं कहलाती हैं। संवेगो के प्रकार

1 सकारात्मक संवेग- यह संवेग प्रायः हमारे लिए सुखदाई होते हैं जैसे- प्रेम, हर्ष, उल्लास, स्नेह आदि।

2 नकारात्मक संवेग- यह संवेग हमारे लिए कष्टकारी या दुखदाई होते हैं जैसे- भय, क्रोध,, चिंता आदि।

“”संवेगों के तुरंत बाद होने वाली प्रक्रिया मूल प्रवृत्ति कहलाती है अर्थात पहले संवेग तथा बाद में मूल प्रवृत्तियां होती हैं””। 👉 मूल प्रवृत्तियों के जन्मदाता मेकडुगल को कहा गया है।
👉इनके अनुसार संवेग की संख्या 14 है।

👉 वुड वर्थ- संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा को प्रस्तुत करता है।

👉 क्रो एंड क्रो- संवेग मनुष्य की वह भावात्मक स्थिति है जो व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक उत्तेजना से परस्पर जुड़ी हुई है।


💫 Notes by – Neha Kumari

✍️संवेग :-

▪️संवेग शब्द का शाब्दिक अर्थ उत्तेजना होता है। जो कि अंग्रेजी भाषा के हिंदी इमोशनल शब्द का हिंदी रूपांतरण है। इसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द इमोवेयर से हुई है।
▪️संवेग दो प्रकार के होते हैं :-

  1. सकारात्मक संवेग
    2 नकारात्मक संवेग

🏝️क्रो एवं क्रो के अनुसार :- संवेग एक ऐसी भावनात्मक अनुभूति है जो किसी व्यक्ति के मानसिक या शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है।

🏝️वूडवर्थ के अनुसार :- संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।

📚ये एक ऐसी दशा है जो व्यक्ति के आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी होती है और हमारी अभिव्यक्ति के द्वारा प्रदर्शित होती है।

📚मैक्डूगल ने संवेग के 14 मूल प्रवृत्तियां बताई है। जो निम्नलिखित हैं :-

➡️ मूल प्रवृत्तियां :-
▪️पलायन (escape) – भय ( fear)
▪️ युयुत्सा (combat) – क्रोध ( anger)
▪️निवृति (repnlsion) – घृणा ( disgust)
▪️जिज्ञासा(curiosity) – आश्चर्य ( wonder)
▪️शिशुरक्षा(parental) – वात्सल्य(love)
▪️शरणागति(apeal) – विषाद ( distress)
▪️रचनात्मक(constructive) – संरचनात्मक(creativity)
▪️संचय प्रवृति(Aquisition) -। स्वामित्व(ownership)
▪️सामूहिकता(gregariousness) – एकाकीपन(loneless)
▪️काम( sex) – कामुकता(lust)
▪️ आत्मगौरव ( self assertion) – श्रेष्ठता की भावना ( positive self feeling)
▪️ दैन्य ( submission) – आत्म हीनता( negative self feeling)
▪️भोजन अन्वेषण ( food services) – भूख( appetite)
▪️ हास्य ( laughter) – आमोद( amusement)
Thanks 👏


संवेग – अंग्रेजी भाषा के Emotional का हिंदी रूपांतरण है। सवेग शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के इमोवयर से हुई है।जिसका अर्थ है-उथल पुथल ,, हल चल ,,उतेजित होना हैं ।

📚यह सबसे अधिक किशोरावस्था में होती हैं ।📚
📚इसका पहला अधययन चाल्स डार्विन ने किया।
सवेग की परिभाषाएँ
💕वुडवर्थ के अनुसार –
संवेग व्यक्ति की उतेजित दशा हैं।
💕रास के अनुसार-
संवेग एक मनशिक प्रकिया है जिसमे क्रोध, प्रेम ,हाव भाव तत्व प्रधान होते है।
💕क्रो और क्रो के अनुसार-
संवेग ऐसी भावनात्मक अनुभूति है जो किसी व्यक्ति के मानसिक या शारीरिक उतेजना से जुड़ी होती ह ।
यह आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी है जो अभियव्क्ती द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है।
मुलप्रवितीया
💕मैकडुगल ने संवेग के 14 मूल प्रवित्ति बताई है ।💕
(1)पलायन(escape) – भय(fear)
(2)युयुत्सा(compat) – क्रोध(anger)
(3)निवृत्ति(repulsion) – घृणा(disgust)
(4)जिज्ञासा(curiosity) -आश्चर्य(wonder)
(5)शिशुरक्षा(perentar) -वात्सल्य(child love)
(6)शरणागत(apeal) -विषाद(distress)
(7)रचनात्मक(constreta) -संरचनात्मक(feeling of creative)
(8)संचयी प्रवृति(aeanistion)-स्वमित्व की भावना(ownership)
(9)सामूहिकता ( gregariousess)-एकाकीपन (loneliness)
(10)काम (sex) -कामुक्ता(lust)
(11)आत्म गौरव( self assertion)- श्रेष्ठ की भावना( positive self feeling)
(12)दैन्य (sunmission) -आत्महीनता (negative self feeling)
(13)भोजन अन्वेषण (food seeking)- भूख (appelite)
(14)ह्रास(laughter) -आमोद( amuse)।।।
😊मालती साहू😊


Notes by :- ✍️ Gudiya Chaudhary 👇👇
🔆🔆 संवेग ( Emotion)🔆🔆
संवेग वस्तुतः ऐसी प्रक्रिया है।जिसे व्यक्ति उद्दीपक द्वारा अनुभव करता है।
🔹 संवेगात्मक अनुभव ➖ संवेग चेतन उत्पन्न करने की अत्यंत प्रारम्भिक स्थिति है। शिशु का संवेग टूटा-फूटा अधूरा होता है जबकि प्रौढ की संवेदना विकृतजन्य होगी।
🔷 संवेग शब्द का अर्थ ➖
संवेग शब्द अंग्रेजी भाषा के Emotion का हिंदी रुपान्तर है। जो लेटिन भाषा के Emovare से बना है जिसका अर्थ है “उत्तेजना या हल चल या उथल-पुथल।
▪️ संवेग एक भावात्मक स्थिति है। जब मनुष्य का शरीर उत्तेजित होता है। इसी अवस्था को संवेग का नाम दिया है। जैसे ➖ भय,क्रोध,चिन्ता,हर्ष,प्रसन्नता आदि।
▪️ संवेग एक उत्तेजित अवस्था है जिस कारण वह अधिक मानसिक सजगता के कारण कोई प्रतिक्रिया करता है। संवेग एक कल्पित प्रत्यय है जिसकी विशेषताओं का अनुमान व्यवहार से लगाया जाता है। संवेग में भाव,आवेश तथा शारीरिक प्रतिक्रियाएं सम्मिलित हैं।
🔷 संवेग की परिभाषाएं ➖
▪️ मैक्डूगल ➖ संवेग मूलप्रवृत्ति का केन्द्रीय अपरिवर्तनशील तथा आवश्यक पहलू है।
▪️ वेलेंटाइन ➖ जब भावात्मक दशा तीव्रता में हो जाए तो उसे हम संवेग कहते हैं।
▪️ आर्थर टी जर्सीलड➖ संवेग शब्द किसी भी प्रकार से आवेश में आने तथा उत्तेजित होने की दशा को सूचित करता है।
▪️वुडवर्थ➖ संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।
क्रो एण्ड क्रो ➖ संवेग हमारी भावनात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिक व शारीरिक उत्तेजना से जूडी रहती है। आन्तरिक समायोजन के साथ जुड़ी है जो अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रर्दशित होती है।
🔷मैक्डूगल ने 14 मूलप्रवृत्ति बताई है ➖
1.पलायन(Excape)➖भय(Fear)
2.युयुत्सा(combat)➖क्रोध(anger)
3.निवृत्ति(repulsion)➖घृणा(disgust)
4.जिज्ञासा(curiosity)➖ आश्चर्य(wonder)
5.शिशु रक्षा(parental)➖ वात्सल्य(tenderness)
6.शरणागति(apeal)➖ विषाद(distress)
7.रचनात्मक(construction)➖संरचनात्मक भावना(feeling of creativess)
8.संचय प्रवृत्ति(acquisition)➖स्वामित्व (ownership)
9.सामूहिकता(gregarious)➖एकाकीपन(lonlyness)
10.काम(sex),➖ कामुकता(lust)

  1. आत्मगौरव(self assertion)➖श्रेष्ठता की भावना(postive self feeling)
    12.दैन्य(submission)➖आत्महीनता(nagitive self feeling)
    13.भोजन अन्वेषण(food seening)➖ भूख(appetite)
    14.हास(laugther)➖आमोद(amusement)

🌼संवेग ( Emotion) 🌼
हमारे मन के अलग अलग प्रकार के भाव संवेग होते हैं।
संवेग संज्ञान (मानसिक क्रियाओं) के कारण उत्पन्न होते हैं।
जैसे जैसे संज्ञान बढता जाता है वैसे वैसे संवेग प्रदर्शित करने का तरीका बदल जाता है।
हम संज्ञान के कारण ही अपने संवेगो बाहर प्रकट करते हैं या छिपाते है।
संवेग emotion लैटिन भाषा के शब्द emovere (इमोवेयर) से बना है जिसका अर्थ होता है – उत्तेजना, उथल पुथल, हलचल

वुडवर्थ के अनुसार संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।

क्रो&क्रो के अनुसार संवेग वह भावनात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिक या शारीरिक उत्तेजना की अवस्था से जुड़ी होती है, आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी हैं जो अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है।

संवेग का आधार मूल प्रवृति है। जैसी मूल प्रवृति होगी उसके आधार पर संवेग प्रदर्शन होता है।

मेक्डुगल ने 14 मूल प्रवृतियो के 14 संवेग बताये हैं।

मूल प्रवृति (basic nature ) संवेग( emotion )
1)पलायन (escape) – भय(fear)
2) युयुत्सा (combat) – क्रोध (anger)
3) निवृति (repulsion) – घृणा (disgust)
4) जिज्ञासा (curiosity) – आश्चर्य (wonder)
5) शिशुरक्षा(parental ( – वात्सल्य (Love)
6) शरणागति (apeal)- विषाद (distress)
7) रचनात्मक (construction) – संरचनात्मक भावना (feeling of creativeness)
8) संचय प्रवृत्ति(aequistion) – स्वामित्व (ownership)
9) सामूहिकता(gregariousness) – एकाकीपन (loneliness)
10) काम (sex) – कामुकता (lust)
11)आत्मगौरव (self assertion) – श्रेष्ठता की भावना (positive self feeling)
12) दैन्य(submission) – आत्महीनता (negative self feeling)
13) भोजन अन्वेषण( food seeking) – भूख (appetite)
14) ह्रास (laughter) – आमोद (amusement)


📝Notes by- Puja kumari 🖋️
Emotion (संवेग) :-
🔅emotion शब्द लैटिन भाषा के Emovere से बनी है।जिसका अर्थ उत्तेजना/हलचल होता है।
◆ व्यक्ति की उत्तेजना संवेग से जुड़ी होती है।
◆ व्यक्ति का संवेग अपनी संज्ञान या मानसिक क्रिया से जुड़ी है जो सिचुएशन के अनुसार कार्य करती है। संवेग व्यक्ति के मूल-प्रवर्ति से होती है, जिसमे कुछ संवेग जन्मजात होती है,जो हमारे heridity से जुड़ी होती है।
🌸 संवेग और मुलप्रवृति एक दूसरे के पूरक होते है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनो ही व्यक्ति के अंदर होता है।
🔹वुडवर्थ :- संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।
🔹 क्रो & क्रो :- संवेग वह भावनात्मक अनुभूति है, जो व्यक्ति की मनसिक या शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी है, आंतरिक समायोजन के साथ जुड़ी है जो अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यहार के रूप में प्रदर्शित होती है।
🔹मैकडुगल ने मूलप्रवृति के 14 प्रकार बताये है ,जो निम्न है:-
➡️मुलप्रवृति ( Basic nature)- (14) :-.
1). पलायन (Esscape)
2).युयत्सा (Combat)
3).निवृत्ति (Repulsion)
4).जिज्ञासा (Curiosity)
5).शिशुरक्षा (Parental)
6).शरणागति (Apeal)
7).रचनात्मक (Structure)
8).संचायप्रवृति(Acquisition)
9).सामूहिकता(Gragariousness)
10). काम (Sex)
11).आत्मगौरव (Selfproud)
12). दैन्य(Submission)
13).भोजन अन्वेषण(Food seeking)
14).ह्रास(Laughter)
➡️ संवेग (Emotion) :-
1). भय ( Fear)
2).क्रोध (Anger )
3). घृणा (Disgust)
4).आश्चर्य (Wonder)
5).वात्सल्य (Love)
6).विषाद (Distress)
7).संरचनात्मक (Felling of creativeness)
8).स्वामित्व (Ownership)
9).एकाकीपन (Loneliness)
10).कामुक्ता (Lust)
11).श्रेष्ठता की भावना (Positive self felling)
12).आत्महीनता (Negative self felling)
13).भूख ( Hungary )
14).आमोद (Amusement)


✍🏻Notes By➖ Vaishali Mishra 🔆संवेग (Emotion)

▪️संवेग या हमारे जो भाव है वो सब हमारे संज्ञान से निकल कर आते है।
▪️जितनी भी हमारी मानसिक क्रियाएं (तर्क, बुद्धि, संवेदनाएं, विचार) होती है वो सब हमारे संज्ञान में होती है और यही संज्ञान हमारे संवेग को जन्म देता है।हम अपने संज्ञान के अनुसार ही अपने संवेग दिखाते या छिपाते है।
▪️यदि कोई व्यक्ति हमारे किसी संवेग को पहचानते लेते है तो वह संज्ञान ही है जो उसको संवेग पहचानने में मदद करते है।
▪️ जैसे जैसे हमारा संज्ञान बढ़ता वैसे वैसे ही हमारे संवेग को पहचानने की क्षमता भी बेहतीन होती चली जाती है।
▪️ संवेग का आधार ही मूल प्रवृति होती है।

🔅मूल प्रवृति (Basic Nature)➖

*हमारे कई संवेग होते है जिसमे से जो सामने से दिखाई देते है वे संवेग कहलाते है और दूसरी तरफ जो संवेग हम नहीं दिखाते है या छिपाते है वहीं मूल प्रवृति कहलाते है।

◼️”संवेग – Emotion शब्द से बना हुआ है जो कि एक लेटिन भाषा के Emovere शब्द से बना है जिसका अर्थ उत्तेजना या हल चल या उथल पुथल होता हैं।

▪️ बुडवर्थ का कथन➖” संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है”
▪️क्रो एंड क्रो का कथन➖”संवेग एक भावनात्मक अनुभूति है जो किसी व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक उत्तेजना से आंतरिक रूप से समायोजन के साथ जुड़ी हुई होती है जो कि अभिव्यक्ति द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं।”

हमारी कई सारी भावनात्मक अनुभूति होती है जो कि हमारे शारीरिक और मानसिक रूप से किसी न किसी प्रकार से जुड़ी हुई होती है जिनसे हमारे अंदर उत्तेजना आती है और हम आंतरिक रूप से परिस्थितियों के अनुरूप समायोजन करते है और अपनी अभिव्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करने लगते है।

▪️जैसे जब हम किसी शिक्षक के साथ जुड़े हुए होते है तो हमारे मानसिक और शारीरिक क्रियाओं में कई उत्तेजनाएं भी आती है जिसको हम आंतरिक रूप से अपने अंदर समायोजित करते है फिर शिक्षक के प्रति अपनी अभिव्यक्ति के द्वारा अपने भाव या संवेग को प्रदर्शित करते है।
▪️किसी भी चीज के प्रति हमारे जो अच्छे या बुरे संवेग होते है उनका हम आंतरिक समायोजन के द्वारा परिस्थिति के अनुरूप ही अपनी अभिव्यक्ति को दिखाते है।

इन संवेग जा आधार ही मूल प्रवृति होती है या इन मूल प्रवृति से जी संवेग जा जन्म होता है”

🔅मेगडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृति दी जो कि संवेग से जुड़ी हुई है।

▪️मूल प्रवृति ▪️संवेग
*1 पलायन (Escape)-भय (Fear)
*2 युयुप्सा(Combat)- क्रोध(Anger)
*3निवृति (Repulsion)- घृणा (Disgnst)
*4 जिज्ञासा (Curiosity)- आश्चर्य (Wounder)
*5 शिशुरक्षा (Parent)- वात्सल्य (Love)
*6 शरना गति (Appeat)- विषाद(Distress)
*7 रचनात्मक (construction)- संरचनात्मक (Feels of creativness)
*8 संचय प्रवृति (Aequistion)- स्वामित्व (Owenership)
*9 सामूहिकता (Gregariousness)- एकाकीपन (Loneliness)
*10 काम(Sex) – कामुकता ( Lust)
*11 आत्मगौरव (Self asseration)- श्रेष्ठता की भावना (Self Fellings)
*12 दैतय (Submission)- आत्महिंता ( Negative self feelings)
*13 भोजन अन्वेषण (Food Seeking) – भूख(Appetite)
*14 हास (Laughter)- अमोद (Amusement)।


वंदना शुक्ला -द्वारा

✳️संवेग Emotion ✳️

🔸संवेग संज्ञान के कारण ही उत्पन्न होता है संज्ञान मानसिक क्रियाए होती है, बुद्धि के हिसाब से संवेग होता है ,उम्र के हिसाब से संवेग होता है।
जैसे जब बच्चा छोटा होता है तो कम मानसिक क्रियाएं होती हैं और संवेग भी कम होते हैं जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है उसकी मानसिक क्रियाओं में वृद्धि होती है और संवेग में भी वृद्धि होती है।
🔸 संवेग मानसिक क्रियाओं के द्वारा उत्पन्न होता है ।
🔸मानसिक स्तर संवेग को प्रभावित करते हैं ।
🔸 संज्ञान के बिना संवेग की कल्पना नहीं की जा सकती।

🔸संवेग Emotion लेटिन भाषा के शब्द से बना है मतलब उत्तेजना, दिशाओं में उथल-पुथल।
🔸वुडवर्थ- ने कहा कि संवेग व्यक्ति की उत्तेजित दशा है।

🔸क्रो एंड क्रो- ने बोला कि संवेग वह भावनात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिक शारीरिक उत्तेजना से जुड़ी होती है और यह आंतरिक आंतरिक समायोजन के साथ अभिव्यक्ति के द्वारा बाहरी व्यवहार के रूप में प्रदर्शित होती है अर्थात परिस्थिति के अनुसार हम अपनी भावनाओं को समायोजित करते हैं।

🔸 मैक्डूगल के अनुसार संवेग 14 तरीके के होते हैं ।
मूल प्रवृत्ति। संवेग 1पलायन escape – भय fear 2युयुत्सा combat – क्रोध anger
3 निवृत्ति repulsion-घृणा disgust
4 जिज्ञासा curiosity- आश्चर्य wonder
5 शिशु रक्षा (parental)- वात्सल्य (love)
6 शरणागत (appeal )-विषाद दुख (distress)
7 रचनात्मक (construction)- संज्ञानात्मक भावना (feeling of creativeness)
8संचय प्रवृत्ति (acquisition)- स्वामित्व (ownership)
9सामूहिकता(gregariousness)- एकाकीपन(loneliness)
10 काम(sex)- कामुकता (last)
11आत्म गौरव (self assertion)-श्रेष्ठता की भावना(positive self feeling)
12 दैन्य (submission)- आत्म हीनता(negative self esteem)
13 भोजन अन्वेषण (food seeking)-भूख ( appetite)
14हास्य (laughter)- आमोद(amusement)

धन्यवाद

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