🌺🌺Ritu yogi🌺🌺
🌸 प्रतिभाशाली बालकों की नकारात्मक विशेषताएं🌸
💦 प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा का उचित सम पोषण ना हो पाना!
💦 प्रतिभाशाली बालकों की उपेक्षा की जाती हैं जिसके कारण उनमें नेगेटिविटी पैदा होती है!
💦. उचित सम पोषण , तथा उपेक्षा के कारण बालकों में अधीरता उत्पन्न होती है!
तथा समूह से अलग रहना पसंद करने लगते हैं ,वह एकाकी रहने लगते हैं!
💦 उपरोक्त परिस्थितियों को देखने के बाद प्रतिभाशाली बालकों में ईर्ष्यालु और स्वार्थी प्रवृत्ति जन्म ले लेती है !
… शुरुआत में वह ऐसे नहीं होते हैं, लेकिन जब अपनी कक्षा में अपने ही दोस्त, जो कि प्रतिभाशाली है, अपने से अधिक नंबर देखकर ईर्ष्यालु प्रवृत्ति पैदा होने के कारण वह दोस्ती तोड़ सकते है, उनके मन में अपनों के प्रीति दुर्भावना या बेर उत्पन्न हो जाता है!
💦 लापरवाह / दोषपूर्ण लेखनी👉🏻 प्रतिभाशाली बालक लापरवाह हो जाते हैं, तथा उनकी लेखनी में दोष उत्पन्न हो जाता है !
💦 बालक जिद /हट करने लग जाते हैं ,आवश्यकता से अधिक बोलने लग जाते हैं, क्योंकि वह कर लेते पर कर नहीं पाए इसलिए मन की बातें व्यक्त करते हैं!
🌺🌺 प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा🌺🌺
💦 प्रभाव क और उपयुक्त शिक्षा——- प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा बहुत प्रभावित होती है ,वह निर्धारित आयु से पहले ही विद्यालय में प्रवेश कर जाते हैं !
💦 ऐसे बालक, एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकने की क्षमता रखते हैं!
💦 ऐसे बालकों को सामान्य से कम आयु में पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने की अनुमति दे!
💦 lambardit पाठ्यक्रम…..
🅰️ व्यक्तिगत sambardhit—- अतिरिक्त पाठ्यवस्तु का नियोजन करें ,व्यक्तिगत रूप से आत्मनिर्भर होकर पूर्ण करें!
🅱️ सामूहिक sambardhit—– निर्धारित कार्य समूह में पूरा करें, क्योंकि सोशल इंटरेक्शन के बिना हमारा नॉलेज बेकार है!
💦 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय……. ऐसे बालकों के लिए अलग कक्षा हो, विस्तृत पाठ्यक्रम,बेहतर प्रयोगशाला कार्य, तथा प्रतिभाशाली और संपन्न अध्यापक होना चाहिए!
💦 त्वरित प्रक्रिया….. इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्र को एक सत्र के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है!
🌸 समाप्त🌸


✍ PRIYANKA AHIRWAR ✍

📖 प्रतिभाशाली बालक 📖

🌺प्रतिभाशाली बालक की नकारात्मक विशेषताएं🌺

🎯 हम सब यह भली-भांति प्रकार से जानते हैं, कि प्रत्येक वस्तु, व्यक्ति का सब के दो पहलू होते हैं। हम इसको कहते हैं, एक धनात्मक और एक नकारात्मक।
ठीक इसी प्रकार से प्रतिभाशाली बालक के भी जितनी धनात्मक विशेषताएं होती हैं, वैसे ही नकारात्मक विशेषताएं भी होती है, अतः प्रतिभाशाली बालक की कुछ नकारात्मक विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-

📝 कुछ मुख्य बिंदु:-
1.प्रतिभा का उचित संपोषण:-
प्रतिभाशाली बालकों को उचित संपोषण मिलना चाहिए। उचित संपोषण न मिलने पर प्रतिभाशाली बालक अपनी राह से विचलित हो जाता है, एवं नकारात्मक कार्यों के प्रति आकर्षित होने लगता है।

  1. उपेक्षा:-
    प्रतिभाशाली बालकों के कार्यों की अगर किसी भी प्रकार से उपेक्षा की जाती है, तो वह इस उपेक्षा के चलते आपने आपके आत्मविश्वास को कम कर लेते हैं। जिससे कि वह अपने कार्यों में रुचि नहीं लेते हैं, एवं नकारात्मक भावना उत्पन्न होने लगती है। उपरोक्त कारणों से होने वाले कुछ नकारात्मक तथ्य निम्नलिखित हैं:-
    🌿 अधीरता का भाव:-
    इन कारणों के कारण से बालक अपने धीरज को खो देता है।

🌿 एकाकीपन का भाव:-
बालकों के अंदर समूह से अलग होकर रहने की भावना जागृत हो जाती है, वह अकेले रहना पसंद करते हैं।

🌿 ईर्ष्यालु और स्वार्थी पूर्ण व्यवहार:-
प्रतिभाशाली बालकों को उचित संपोषण ना मिल पाने के कारण उन बालको मे ईर्ष्या और स्वार्थ की भावना उत्पन्न होने लगती है, जिससे वह अन्य बालकों से ईर्ष्या करने लगते हैं।

🌿 लापरवाही और दोषपूर्ण लेखनी:-
इस स्थिति में बालक लापरवाही पूर्ण व्यवहार करने लगता है, एवं जानबूझकर दोषपूर्ण लेखन का कार्य भी करने लगता है।

🌿 हठ करना और आवश्यकता से अधिक बोलना:-
बालक अधिक से अधिक हठ करने लगता है, और जहां आवश्यकता नहीं होती, वहा भी बोलने के लिए तत्पर रहता है। अनावश्यक बातों को भी बोलता है।

🌻 🌻 प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा व्यवस्था 🌻 🌻

प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य शिक्षा देना उपयुक्त नहीं होता है, इन बालकों को विशिष्ट शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा की व्यवस्था के लिए कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-

  1. प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा:-
    🍀 निर्धारित आयु से पूर्व विद्यालय में प्रवेश कराना।
    🍀 एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन करना।
    🍀 सामान्य से कम समय में एवं कम आयु में पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने की अनुमति देना।
  2. संवर्धित पाठ्यक्रम:-
    🍂 व्यक्तिगत संवर्धित:-
    अतिरिक्त पाठ्यक्रम या पाठ्यवस्तु को पूर्ण करना, जिससे वह उसे आत्म – निर्भरता से पूर्ण कर सके।

🍂 सामूहिक संवर्धित:-
निर्धारित कार्य समूह में पूरा करें जिससे कि उसमें प्रतियोगी की भावना विकसित हो और उसका सामाजिकरण भी हो, तो बच्चा ठीक तरह से सीख पाता है।

  1. विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय:-
    🌲 अलग कक्षा व्यवस्था:-
    प्रतिभाशाली बालकों के लिए विशेष प्रकार की एक अलग कक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।

🌲 विस्तृत पाठ्यक्रम:-
प्रतिभाशाली बालकों का पाठ्यक्रम सामान्य ना होकर एक विशेष प्रकार का विस्तृत पाठ्यक्रम होना चाहिए।

🌲 बेहतर प्रयोगशाला कार्य:-
इन बालकों के लिए एक बेहतर प्रयोगशाला होनी चाहिए, जिसमें इनकी प्रतिभा के अनुसार एक कार्य भी होने चाहिए।

🌲 प्रशिक्षित शिक्षक:-
प्रतिभाशाली बालकों के लिए एक सामान्य शिक्षक की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि एक प्रशिक्षित एवं विशिष्ट शिक्षक की आवश्यकता होती है। जो कि इनकी शिक्षित होने की प्रक्रिया को समझ सके।

  1. त्वरण प्रक्रिया:-
    इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्रों को एक शास्त्र के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में ही यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है अर्थात कहने का अर्थ यह है कि वर्ष के बीच में ही इन्हें कक्षा से दूसरी कक्षा में भेज दिया जाता है जो कि इनकी योग्यता के अनुसार होनी चाहिए। 🌻🍀 समाप्त 🍀🌻 🙏🌻🙏🌺🙏🌻🙏🌺🙏🌻🙏🌺🙏🌻🙏🌺🙏

✍🏻 Notes By-Vaishali Mishra

🔆 🧠 प्रतिभाशाली बालकों की नकारात्मक विशेषताएं (Negative characteristics of Talented child)➖

प्रतिभाशाली बच्चों की प्रतिभा का यदि उचित सम पोषण या पूरा उपयोग नहीं होता या उनकी प्रतिभा की उपेक्षा की जाए. तो उस बालक की प्रतिभा दबती चली जाती है जिसके निम्न परिणाम दिखाई देते हैं।

▪️ अधीरता➖ किसी भी कार्य को करने में आतुरता या बेसब्री या बेचैनी या हम दूसरे रूप में कह सकते है कार्य के प्रति धैर्य का अभाव रहता है।

▪️ समूह से अलग एकाकी रहना➖यदि उनकी प्रतिभा को समूह में अनदेखा या उपेक्षा या उचित संपोषण नहीं हो पाता है तो वह उस समूह से अलग या पृथक् होकर एकांत में या अकेले में रहना पसंद करने लगते हैं।

▪️ ईर्ष्यालु और स्वार्थी पूर्ण व्यवहार➖ ईर्ष्यालु..अर्थात दूसरों की उन्नति से दुखी होने लगते हैं यदि उनकी प्रतिभा की उपेक्षा व उचित सम पोषण ना किया जाए तो।
स्वार्थी.. मतलब अपना हित साधने की उग्र भावना आ जाती है या ऐसी बात जिसमें उनका लाभ या हित हो, वैसा स्वार्थी व्यवहार करने लगते हैं।

▪️ लापरवाह व लेखनी दोषपूर्ण➖ यदि प्रतिभा की उचित सम पोषण ना हो और उपेक्षा की जाए तो वे बालक अपने कार्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और अपनी लिखावट में कई सारी गलतियां करने लगते हैं।

▪️ हट करना व आवश्यकता से अधिक बोलना➖ किसी भी बात के पर अड़े रहते है या जिद करने लगते हैं। साथ ही साथ आवश्यकता से अधिक या जरूरत से ज्यादा बोलने भी लगते हैं।

🔅 प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा (education to talented child)➖ “प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के लिए सामान्य बालकों के अलावा भी ऐसे बालक होते हैं जो प्रतिभाशाली हैं जो सभी से उच्चतम होते हैं।”
“प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का सफल कार्यक्रम वही हो सकता है जिसका उद्देश्य उनकी विभिन्न योग्यताओं का विकास किया जा सके।”
प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए।
✓प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा (Effective and useful education)
✓संवर्धित (बृहद) पाठ्यक्रम का प्रावधान (Provision of enhanced Curriculum)
✓विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय (Special classes and School)
✓त्वरण प्रक्रिया (Acceleration Process)
उपर्युक्त व्यवस्था का वर्णन निम्नानुसार किया जा सकता है।

💠 प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा (Effective and useful education)➖ जो भी शिक्षा दी जाए वह बालक के लिए प्रभावी या उसके उपयुक्त या उसके स्तर या विशेषता के अनुरूप हो। इसके लिए हम निम्न तरीके अपना सकते हैं।

🔸 निर्धारित आयु से पूर्व ही वह विद्यालय में प्रवेश कर पाए।
🔸 एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सके।
🔸सामान्य से कम समय में या कम आयु में पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करने की अनुमति दी जाए।

💠 संवर्धित (बृहद) पाठ्यक्रम का प्रावधान (Provision of enhanced Curriculum)➖ यदि कोई प्रतिभाशाली बालक है और उसके अंदर यह प्रतिभा है कि वह पढ़ाई के अलावा कई अन्य कार्य को कर सकता है तो उसे पूरा सहयोग और बढ़ावा दिया जाए ।और यह सहयोग और बढ़ावा संवर्धित पाठ्यक्रम देकर कर सकते हैं।
इसके लिए दो तरह से सवर्धित किया जा सकता है।

🔸 व्यक्तिगत संवर्धित पाठ्यक्रम➖ अतिरिक्त पाठ्यक्रम का व्यक्तिगत रूप से नियोजन करें जिससे प्रतिभाशाली बालक खुद से आत्मनिर्भर होकर कार्य को पूरा कर पाए।

🔸 सामूहिक संवर्धित पाठ्यक्रम➖
प्रतिभाशाली बालकों को संपूर्ण समूह से अतिरिक्त पठन, लेखन को देकर या निर्धारित समय सामग्री को देकर (जहां पर कोई भी नया कौशल रखा हो) तो प्रतिभाशाली उन चीजों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कर पूर्ण रूप से आगे बढ़ पाएंगे। और साथ में सामूहिक संवर्धित के द्वारा सामाजिक अंत:क्रिया का भी विकास हो पाएगा ।

💠 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय (Special classes and School)
प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा देना असंभव या निरर्थक होगा। इसीलिए उनके लिए विशेष कक्षाएं और विद्यालय हो।
यधपि कुछ विद्वान मनोवैज्ञानिक कारण इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था का विरोध करते हैं, लेकिन अभ्यास और अनुभवो की दृष्टि से यह सशक्त योजना है और इसे सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है।
विशेष कक्षा एवं विद्यालय का आयोजन निम्न प्रकार से कर सकते हैं।
🔸 अलग कक्षा
🔸 विस्तृत पाठ्यक्रम
🔸 बेहतर प्रयोगशाला कार्य
🔸 प्रतिभा संपन्न शिक्षक (प्रशिक्षित शिक्षक)

💠 त्वरण प्रक्रिया (Acceleration Process) ➖इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्रों को एक सत्र के मध्य या बीच में किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है।


🌸 Notes by :- Neha Kumari☺️

📚 बालक में नकारात्मक विशेषताएं :-

A. प्रतिभा का उचित संपोषण
B. उपेक्षा की गई

🌟 अधीरता
🌟 समूह से अलग एकाकी रहना
🌟 लापरवाह/दोषपूर्ण कार्य करना
🌟 ईर्ष्यालु और स्वार्थी होना
🌟 हठ करना/आवश्यकता से अधिक बोलना

📚 प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा :-

१. प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा
२. संबंधित पाठ्यक्रम
३. विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय
.त्वरण प्रक्रिया

१. प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा :-

🌟 निर्धारित आयु से पूर्व विद्यालय में प्रवेश।
🌟 एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं की पाठ्यक्रम का अध्ययन।
🌟 सामान्य से कम उम्र में पाठ्यक्रम/कक्षा उत्तीर्ण करने की अनुमति।

२. संबंधित पाठ्यक्रम :-

🌸 व्यक्तिगत संबंधित
🌸 सामूहिक संबंधित

🌸 व्यक्तिगत संबंधित :-
व्यक्तिगत रूप से अतिरिक्त पाठ्यवस्तु का नियोजन करना तथा आत्मनिर्भरता पूर्वक पूर्ण करना।

🌸 सामूहिक संबंधित :-
सभी के उपलब्धियों को देखते हुए कार्य निर्धारित करना तथा उसे पूर्ण करना।

३. विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय :-
🌟 अलग कक्षा।
🌟 विस्तृत पाठ्यक्रम।
🌟 बेहतर प्रयोगशाला कार्य।
🌟 प्रतिभा सम्मान अध्यापक।

४. त्वरण प्रकिया :-

🌟 यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रतिभाशाली छात्र को 1 वर्ष के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरे श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है।

🌸🌸समाप्तम्🌸🌸

🙏🙏धन्यवाद् 🙏🙏


𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙨𝙖𝙫𝙡𝙚

💫 प्रतिभाशाली बालकों की नकारात्मक विशेषताएं ➖

🔅 प्रतिभा का उचित संपोषण ➖
यदि प्रतिभाशाली बच्चे की प्रतिभा को सही मार्गदर्शन नहीं मिला या नहीं किया गया तो उनकी प्रतिभा का सही उपयोग नहीं हो पाएगा और उनमें नकारात्मक प्रवृत्ति आ जाती है जिसका प्रभाव उनके भावी भविष्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है, इस स्थिति में एक शिक्षक को उनका सही मार्गदर्शन करना अति आवश्यक है नहीं तो वे डिप्रेशन का शिकार भी हो सकते हैं |

🔅 उत्प्रेक्षा ➖

यदि इनकी प्रतिभा का सही उपयोग नहीं हो पाता है और उनकी उत्प्रेक्षा की गई तो उसमें नकारात्मक प्रवृत्ति आ जाती है इस परिस्थिति में वे पागल भी हो सकते हैं और उनकी प्रतिभा दबती चली जाती है इसलिए एक शिक्षक को यह प्रयास करना चाहिए कि उनकी प्रतिभा के अनुसार सही मार्गदर्शन दिया जाए और उनकी आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था की जाए |

यदि बालक के मन में उचित संपोषण नहीं हो पाया और उसकी उपेक्षा की गई तो इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं➖

🍀 अधीरता ➖प्रतिभाशाली
बालकों में किसी कार्य के प्रति या उस कार्य को करने में उत्सुकता या बेचैनी होती है जिससे उनके मन में संयमता खत्म हो जाती है वे अधीर हो जाते हैं |

🍀 समूह से अलग एकाकी रहना ➖
यदि समूह में उनकी प्रतिभा का उचित संपोषण नहीं हो पाता है या उनकी उपेक्षा की जाती है या चीजें उनके अनुसार नहीं चलती है तो वे समूह से अलग एकाकीपन या अकेलेपन में रहने लगते हैं |

🍀 ईर्ष्यालु या स्वार्थपूर्ण व्यवहार ➖
उनकी क्षमता का उचित उपयोग न होने के कारण उनकी प्रतिभा दबती चली जाती है ऐसी परिस्थिति में वे स्वार्थी और ईर्ष्यालु प्रवृत्ति के हो जाते हैं उनकी प्रवृत्ति तो ऐसी नहीं होती है लेकिन क्षमता का उचित उपयोग न होने के कारण वे ऐसा करते हैं |

🍀लापरवाह/दोषपूर्ण लेखनी ➖
चूंकि उनकी क्षमता का उचित उपयोग नहीं हो पाता है उनकी उपेक्षा की जाती है इसलिए उनमें नकारात्मकता आ जाती है जिससे वे लापरवाह हो जाते हैं और उनकी लेखनी भी दोषपूर्ण हो जाती है |

🍀 हठ करना या आवश्यकता से अधिक बोलना ➖
नकारात्मकता के कारण वे हठी हो जाते हैं यदि कोई बालक कुछ करना चाहता था लेकिन नहीं कर पाया तो ऐसी परिस्थिति में बालक हठी व आवश्यकता से अधिक बोलने लगते हैं यदि उनको सही वातावरण और सही मार्गदर्शन दिया जाए तो वे संभल सकते हैं |

🎯 प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा ➖
प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा एक जटिल कार्य है इसको 3 प्रणाली में बांटा गया है जिसमें प्रतिभाशाली बालक को शिक्षा दी जाती है |

🔹प्रभावशाली व उपयुक्त शिक्षा

🔹संवर्धित पाठ्यक्रम

🔹विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय

🔹त्वरण प्रक्रिया

🔅 प्रभावशाली व उपयुक्त शिक्षा➖
उन्हें ऐसी शिक्षा दी जाए जो प्रभावी हो , उनको उनकी आवश्यकता के अनुसार शिक्षा दी जाए |
इसके लिए निम्न तरीके से शिक्षा दी जा सकती है ➖
▪निर्धारित आयु से पूर्व ही वह विद्यालय में प्रवेश कर जाए |

▪अपनी बौद्धिक योग्यता के आधार पर एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकें |

▪सामान्य से कम समय में या कम आयु में पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करने की अनुमति प्रदान करके |

🔅 संवर्धित पाठ्यक्रम➖
प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा में संवर्धित पाठ्यक्रम का उपयोग करना चाहिए ताकि वे आगे बढ़ पाएं और ये एक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि उनकी प्रगति में अवरोध उत्पन्न ना हो उसको सहयोग करना चाहिए ताकि उसकी शिक्षा मैं प्रगति हो सके और यह प्रगति हम संवर्धित पाठ्यक्रम देकर कर सकते हैं संवर्धित पाठ्यक्रम दो प्रकार का होता है —

▪व्यक्तिगत संवर्धित ➖

इस प्रकार के संवर्धन में अतिरिक्त पाठ्यवस्तु का नियोजन करना ताकि वे स्वयं आत्मनिर्भर बन सकें और शिक्षा को प्रभावी तरीके से पूर्ण कर सकें |

▪ सामूहिक संवर्धित ➖

कुछ चीजें या कुछ कार्य प्रतिभाशाली बालक कर ही सकता है ये आवश्यक नहीं है इसके लिए एक सामूहिक प्रक्रिया होती है जो समूह में ही संभव है इसलिए उनको अतिरिक्त कार्य देना कि वह उसको ग्रुप में ही या समूह में ही कर सके ,ताकि निर्धारित कार्य समय में पूरा कर सकें जिससे उनके अतिरिक्त कौशलों का विकास होगा और उनकी शिक्षा भी प्रभावी होगी |

🔅 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय प्रतिभाशाली बालकों के लिए विशेष कक्षा एवं विद्यालय उपलब्ध कराए जाएं |
लेकिन कुछ विद्वान मनोवैज्ञानिक इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था का विरोध करते हैं |
किन्तु इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था से उनके अध्ययन को प्रभावी या प्रभाव सील बनाया जा सकता है इसके लिए विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय का आयोजन निम्न प्रकार से कर सकते हैं —

🔹 अलग कक्षा

🔹विस्तृत पाठ्यक्रम

🔹 बेहतर प्रयोगशाला कार्य

🔹प्रतिभा संपन्न शिक्षक (प्रशिक्षित शिक्षक)

🔅 त्वरण प्रक्रिया ➖

इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्र को एक सत्र के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथा शीघ्र त्वरित कर दिया जाता है |

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💦🌩️Mahima kumari🌩️💦
🌼प्रतिभाशाली बालक🌼
प्रत्येक बच्चे में गुण के साथ कुछ ना कुछ अवगुण भी होते हैं अर्थात अगर कोई बच्चा प्रतिभाशाली है तो यह जरूरी नहीं है कि वह सारे कामों में निपुण हो!
प्रतिभाशाली बच्चे की सोच सकारात्मक भी हो सकती है और नकारात्मक भी!
👉 इसके लिए हमें प्रतिभाशाली बच्चे की नकारात्मक विशेषताओं को देखनी चाहिए….. जो निम्न प्रकार से है ➖
◼️ प्रतिभा का उचित संपोषण:-
प्रतिभाशाली बच्चों को उचित संपोषण न मिलने के कारण उनके अंदर नकारात्मकता की भावना उत्पन्न होने लगती है।
◼️ उपेक्षा की गई:-
ऐसे बच्चों के अंदर अगर इसके किसी भी कामों के बीच में उपेक्षा की गई तो इनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है ।जिसके कारण वह अपने कामों में किसी भी प्रकार की रुचि नहीं दिखाते हैं। इससे इसमें गलत प्रभाव पड़ता है और नकारात्मक भावना उत्पन्न होने लगती है।

प्रतिभाशाली बच्चों के नकारात्मकता के लक्षण➖
1️⃣ अधीरता:- अधीरता के कारण बच्चों के अंदर संयम की कमी आ जाती है और वह over possessive हो जाते हैं।
2️⃣ एकाकीपन:- कभी-कभी जब बच्चों के हिसाब से कोई काम नहीं होता है तो वह समूह से अलग रहने लगता है और उसके दिमाग में कुछ से कुछ चलने लगता है वह बिल्कुल एकांत रहना चाहता है जो एक प्रतिभाशाली बच्चे के लिए ठीक नहीं है।
3️⃣ ईर्ष्यालु और स्वार्थ पूर्ण व्यवहार:-
एकाकीपन के कारण बच्चों के अंदर ईर्ष्या और स्वार्थ की भावना उत्पन्न होने लगती है।
4️⃣ लापरवाह और दोषपूर्ण से कमी:-
ऐसे बच्चों को खुद में संयम नहीं रहता है। लापरवाह जैसे काम करने लगते हैं क्या पढ़ रहे हैं क्या लिख रहे हैं इसका उन्हें नहीं होता है।
5️⃣ हट करना / आवश्यकता से अधिक बोलना:-
प्रतिभाशाली बच्चे का पांचवा लक्षण यह है कि वह अधिक से अधिक जिद करने लगता है बिना आवश्यकता के वह अधिक बोलने लगता है। वह यह नहीं सोचता है कि क्या बोलना है कैसे बोलना है अनावश्यक बातें करने लगता है।
📖प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा व्यवस्था📖1️⃣प्रभावक और उपयुक्त शिक्षा:-
प्रतिभाशाली बच्चों को निर्धारित आयु से पहले ही विद्यालय में प्रवेश करा दिया जाता है और समय से पहले ही वह बहुत कुछ प्राप्त कर लेता है।
☀️1 क्लास का बच्चा 3 क्लास के बच्चे का किताबी ज्ञान प्राप्त कर लेता है।
☀️ इनकी भौतिक एवं शैक्षिक क्षमता के आधार पर एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम को पढ़ा दिया जाता है।
☀️ सामान्य से कम एवं आयु में किसी भी पाठयक्रम को उत्तीर्ण करने की अनुमति दे दिया जाता है।
2️⃣ संवर्धित पाठ्यक्रम ➖इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत पाठ को बड़ा और बेहतर किया जाता है।
जैसे::- यदि कोई बच्चा खेलकूद में ड्राइंग में आगे हो तो एक शिक्षक होने के नाते हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उस बच्चे को बढ़ावा दें।
🅰️व्यक्तिगत संवर्धित:-
बच्चों को अधिक पाठ्यक्रम देना जिसको बच्चा खुद आत्मनिर्भर होकर करें।
🅱️ सामूहिक संवर्धित:-
बच्चों को पठानिया लेखन का कार्य ग्रुप में देना चाहिए बच्चे ग्रुप में एक साथ मिलकर काम करें और बच्ची के अंदर competition की भावना जागृत हो। जिससे बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
3️⃣ विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय:➖
साधारणतः देखा जाए तो प्रतिभाशाली बालक के लिए विशेष कक्षाएं , विद्यालय ,शिक्षक,का होना अनिवार्य है।
दूसरी ओर, सभी विद्वानों का इसमें एकमत नहीं है➖
🔵 अलग कक्षा व्यवस्था :➖ऐसे बालकों के लिए विशेष प्रकार की कक्षा के व्यवस्था होनी चाहिए।
🟠विस्तृत पाठ्यक्रम:➖ प्रतिभाशाली बालकों के पाठ्यक्रम में भी कुछ changes चाहिए।
🟣बेहतर प्रयोगशाला:- प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक बेहतर प्रयोगशाला की भी आवश्यकता होनी चाहिए
🟤प्रतिभा संपन्न अध्यापक :➖प्रतिभाशाली बच्चों के लिए सबसे जरूरी है एक प्रतिभा संपन्न अध्यापक की।बच्चे के अंदर कितनी भी प्रतिभा क्यों ना हो अगर उन्हें बेहतर मार्गदर्शन ना मिले तो बच्चे की प्रतिभा सिमट कर रह जाएगी इसलिए एक बच्चे को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षक की भी एक अहम भूमिका होती है।
4️⃣ त्वरित प्रक्रिया:➖ इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्र को एक सत्र के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता हैं ।अगर हम देख रहे हैं कि कोई बच्चा पढ़ने में काफी सजग है तो हमें उस बच्चे को अगले क्लास में प्रमोट कर देना चाहिए।।।
💦🍁🍁🍁 समाप्त🍁🍁🍁💦


✍🏻✍🏻Menka patel✍🏻✍🏻

🍁🍁 प्रतिभाशाली बालक🍁🍁

🎯प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएं

प्रतिभा का उचित संपोषण :- प्रतिभाशाली बालकों को उचित संपोषण मिलना चाहिए उचित संपोषण नहीं मिलने पर अपनी राह से विचलित हो जाते हैं और नकारात्मक कार्य की ओर आकर्षित होने लगते हैं

🍁 उपेक्षा:- प्रतिभाशाली बालक के कार्यों की अगर किसी भी प्रकार की उपेक्षा की जाती है तो वह नकारात्मक सोचने लगती है वह उनमें आत्मविश्वास कम होने लगता है जिससे कि वह अपने कार्य को रुचि नहीं लेते हैं

🎯 अधीरता का अभाव प्रतिभाशाली बालकबालक:-
अनेक कारणों के कारण अधीर होने लगते हैं और अपने कार्य के प्रति विचलित होते हैं

🎯 समूह से अलग एकाकी रहना :-
प्रतिभाशाली बालक अपने समूह के बच्चों से अलग रहना तथा वह स्वयं अकेले रहना पसंद करने लगते हैं उनमें एकाकी की भावना आ जाती है

🎯 लापरवाह और दोषपूर्ण लेखनी:- प्रतिभाशाली बालक में जब नकारात्मक विशेषता आने लगती है तो वह अपने कार्य के प्रति लापरवाह और लेखनी संबंधी दोष होने लगते हैं

🎯 हट करना/ आवश्यकता से अधिक बोलना:- जब कोई भी बच्चा हट करता है या व आवश्यकता से अधिक बोलने लगता है तो वह अपने कार्य को नहीं कर पा रहा है इसलिए वह ऐसा करने लगता है

🎯 ईर्ष्यालु और स्वार्थी :- प्रतिभाशाली बालक ईर्ष्या और स्वार्थी की भावना आ जाती है व अन्य बालकों से ऐसा करने लगते हैं और अपने स्वार्थ के लिए ऐसा व्यवहार दिखाते हैं

🎆 प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा व्यवस्था
प्रतिभाशाली बालक के लिए उचित शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए

🍁 प्रभावक व उपयुक्त शिक्षा :-
⭐ निर्धारित आयु से पूर्व विद्यालय में प्रवेश

⭐एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम का अध्ययन

⭐सामान्य से कम आयु का पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने की अनुमति

🍁 संवर्धित पाठ्यक्रम

⭐ व्यक्तिगत संबंधित:-
अतिरिक्त पाठ्यक्रम का नियोजन करें व्यक्तिगत रूप से आत्मनिर्भर होकर पूर्ण कर सके

🍁सामूहिक संवर्धित:- निर्धारित कार को समूह से पूरा करें जिससे कि वह प्रतियोगी की भावना विकसित हो सके सामाजिकरण भी हो तो बच्चा किस तरह सीख पाता है

🎯 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय की व्यवस्था

🍁 अलग कक्षा की व्यवस्था :-
प्रतिभाशाली बालक के लिए अलग कक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए

🍁 विस्तृत पाठ्यक्रम की व्यवस्था:- प्रतिभाशाली बालकों को विस्तृत पाठ्यक्रम की व्यवस्था होनी चाहिए

🍁 बेहतर प्रयोगशाला का कार्य:- प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक बेहतर प्रयोगशाला की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे वह अपने कार्य को प्रभावित कर सके

🍁 प्रशिक्षित शिक्षक :- प्रतिभाशाली बालकों के लिए एक प्रशिक्षित शिक्षक की आवश्यकता होती है जिससे वह उन्हें विशिष्ट प्रदान कर सके

त्वरण प्रक्रिया: -इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्र की एक सत्र के बीच में ही एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरण कर दिया जाता है अर्थात हम कह सकते हैं कि बच्चे को उसकी योग्यता के अनुसार उसे अगली कक्षा में भी भेज दिया जाना चाहिए जो कि इनकी योग्यता के अनुसार होनी चाहिए

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✍🏻✍🏻manisha gupta ✍🏻

🌺 प्रतिभाशाली बालकों की नकारात्मक विशेषताएं

यदि प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा का उचित संप्रेषण या उनकी प्रतिभा का उचित उपयोग नहीं होता या उस बालक की प्रतिभा की उपेक्षा की जाए तो उस बालक की प्रतिभा दब के रह जाती है तो इस कारण से प्रतिभाशाली बालकों के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।

🔻 अधीरता➖ ऐसे बालक किसी भी कार्य को करने के लिए ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं और कार्य के प्रति धैर्य का अभाव होता है यह बालक किसी भी कार्य को करने में इनमें बेचैनी या आतुरता दिखाई देने लगता है।

🔻 समूह से अलग एकाकीपन में रहना➖ यदि प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा का उचित उपयोग या नजरअंदाज कर दिया जाए तो वे समूह से पृथक या अलग होकर एकांत में रहना पसंद करने लगते हैं। उन्हें अकेले समय व्यतीत करना ही अच्छा लगने लगता है।

🔻 ईर्ष्यालु और स्वार्थी पूर्ण व्यवहार➖ ईर्ष्यालु अर्थात यदि उनकी प्रतिभा की उचित संपोषण नहीं किया जाए तो वे दूसरे की प्रगति को देखकर दुखी होने लगते हैं। इनके मन में प्रगति करने वाले अन्य साथियों के प्रति जलन की भावना उत्पन्न हो जाती है।

स्वार्थी पूर्ण: अर्थात केवल वे अपने हित के बारे में ही सोचने लगते हैं यह बालक पूर्ण रूप से अहम केंद्रित व्यवहार करने लगते हैं।

🔻 लापरवाह या दोषपूर्ण लेखनी➖ यदि प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा की उपेक्षा की जाती है तो यह बालक अपने कार्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं अर्थात ये किसी भी कार्य को करने के लिए सुस्त हो जाते हैं और मन से किसी भी कार्य को करने के लिए तैयार नहीं होते हैं और उपेक्षित होने के कारण इनकी लिखावट में भी गलतियां या त्रुटियां दिखाई देने लगती हैं।

🔻 हठ करना/ आवश्यकता से अधिक बोलना➖ ऐसे बालक जिनकी प्रतिभा का यदि उचित उपयोग नहीं किया जाता तो वे जिद करने लगते हैं और आवश्यकता से अधिक भी बोलने लगते हैं उन्हें यह समझ नहीं आता कि वह क्या बोल रहे हैं उनके बातों में नियंत्रण नहीं रह जाता है।

🎯 प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा

जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के लिए सामान्य व
बालको के अलावा भी ऐसे बालक होते हैं जो सभी से उत्तम प्रवृत्ति एवं उच्चतम बुद्धि लब्धि वाले होते हैं जो प्रतिभाशाली बालक कहलाते हैं।

प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा एक आसान कार्य नहीं है क्योंकि यह संख्या में कम होते हैं और समूह विजातीय होते हैं और पूरे समूह पर एक प्रणाली को लागू करना कठिन कार्य है। यह बहुत ही जटिल कार्य है प्रतिभाशाली बालकों के शिक्षण की प्रमुख तीन उपागम है जो इस प्रकार से हैं

🟥 प्रभाव युक्त व उपयुक्त शिक्षा(effective and. Useful education)

🟥 संवर्धित पाठ्यक्रम(enhanced curriculum).

🟥 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय(special classes and school )

🟥 त्वरण प्रक्रिया(acceleration process)

🧊 प्रभाव युक्त व उपयुक्त शिक्षा

शिक्षकों को ऐसे बालकों के लिए इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए जो इन बालकों के लिए प्रभाव युक्त या इनके स्तर के अनुरूप उपयुक्त होना चाहिए शिक्षकों को चाहिए कि वह प्रतिभाशाली बालकों की योग्यताओं का विकास करने का पूरा पूरा अवसर उपलब्ध कराएं। इसके लिए शिक्षक निम्न उपाय अपना सकते हैं➖

🧑🏻‍💼 निर्धारित आयु से पहले ही वह विद्यालय में प्रवेश कर पाए। इसकी सुविधा करानी चाहिए। अर्थात प्रतिभाशाली बालकों को उनकी शारीरिक आयु की अपेक्षा मानसिक आयु के आधार पर प्रवेश दिया जाए।

📖 एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकें। अर्थात यदि कोई प्रतिभाशाली बालक कक्षा आठवीं है तो उसे नवमी और दशवी कक्षा की पाठ्यक्रम का भी अध्ययन करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

📚 सामान्य से कम आयु में पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

🧊 संवर्धित पाठ्यक्रम

यदि कोई प्रतिभाशाली बालक है और उसके अंदर बृहद प्रतिभा निहित है तो उन्हें पढ़ाई के साथ साथ अलग-अलग गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए पूर्ण रूप से प्रेरित करके और सहयोग करके उन्हें बढ़ावा दिया जाना चाहिए प्रतिभाशाली बालकों के लिए पाठ्यक्रम को समृद्ध बनाया जाना चाहिए जिससे इन बालकों के समुचित विकास के लिए पाठ्यक्रम इतना कठिन होना चाहिए कि उसे पढ़ना बालक के लिए एक चुनौतीपूर्ण हो।

यह संवर्धन व्यक्तिगत एवं सामूहिक दो प्रकार से हो सकता है➖

🟥 व्यक्तिगत संवर्धित➖ ऐसे बालकों के लिए अतिरिक्त पाठ्यवस्तु का नियोजन करना चाहिए जिससे प्रतिभाशाली बालक स्वयं आत्मनिर्भर बनकर व्यक्तिगत रूप से उस कार्य को पूर्ण कर पाए।

🟥 सामूहिक संवर्धित➖ निर्धारित कार्य समूह प्रक्रिया में होता है। प्रतिभाशाली बालक समूह में कार्य करने से एक दूसरे के मध्य अंतः क्रिया स्थापित होता है जिससे वे एक दूसरे के सहयोग से और पूरी निष्ठा से उस कार्य को संपन्न करते हैं। प्रतिभाशाली बालक समूह में किसी भी कार्य को एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में बेहतर रूप से उस कार्य को कर पाते हैं।

🧊 विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय➖ इनके लिए सामान्य विद्यालयों या नियमित विद्यालयों में ही विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए

जिस प्रकार हम जानते हैं कि प्रतिभाशाली बालक किसी भी कार्य को बहुत आसानी से कर लेते हैं इसलिए प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य बच्चों के साथ एक साथ शिक्षा देना प्रतिभाशाली बालकों के लिए निरर्थक होगा इसीलिए ऐसे बालकों के लिए विशेष कक्षाएं या विद्यालय की व्यवस्था की जानी चाहिए यद्यपि कुछ विद्वानों ने इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था का विरोध करते हैं लेकिन यह शिक्षा प्रतिभाशाली बालकों के लिए सार्थक सिद्ध हुआ है जिसे सफलतापूर्वक लाया जा सकता है➖

🎯 अलग कक्षा➖ सामान्य बालको से अलग करके इनके लिए अलग से कक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।

🎯 विस्तृत पाठ्यक्रम➖ प्रतिभाशाली बालक पाठ्यक्रम को समझने में सामान्य बालकों से कम समय लेते हैं तो ऐसे बालकों के लिए विस्तृत पाठ्यक्रम या बृहद पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाना चाहिए।

🎯 बेहतर प्रयोगशाला कार्य➖ प्रतिभाशाली बालकों के लिए बेहतर प्रयोगशाला कार्य की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे वह प्रयोगशाला में भी अपनी प्रतिभा को उजागर कर सकें और साथ ही पुस्तकालय में भी उनकी रुचि के अनुकूल व्यवस्था की जानी चाहिए।

🎯 प्रतिभा संपन्न अध्यापक➖ऐसे बालकों को शिक्षित करने के लिए अध्यापकों का भी विशेष रूप से प्रशिक्षित रहना अनिवार्य है इसलिए ऐसे बालों को के लिए प्रतिभा संपन्न शिक्षक की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।विशिष्ट प्रतिभावान व्यक्तियों को बुलाकर उनके अनुभवों से छात्रों को लाभान्वित करवाया जाना चाहिए।

📚📚 धन्यवाद📚📚

🧊 त्वरण प्रक्रिया इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को एक सत्र के मध्य या बीच में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है प्रतिभाशाली बालकों के उन्नति के लिए उन्हें एक श्रेणी से दूसरे श्रेणी में बिना देर किए त्वरित कर दिया जाता है।


✍🏻Notes by – pooja

🎯 प्रतिभाशाली बालक की नकारात्मक विशेषताएं

A. प्रतिभा का उचित संपोषण
B. उपेक्षा की गई

१. अधीरता आने लगती है।
२. समूह से अलग और अकेले रहने लगते हैं।
३.ईर्ष्यालु और स्वार्थी हो जाते है।
४. लापरवाह/ दोषपूर्ण लेखनी हो जाती है।
५. हट करना/आवयश्कता से अधिक बोलने लगते है।

🎯 प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा

. प्रभाव व उपयुक्त शिक्षा

▪️ निर्धारित आयु से पूर्व विद्यालय में प्रवेश।
▪️ एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम का अध्ययन।
▪️ समान्य से कम आयु में पाठयक्रम या कक्षा उत्तीर्ण करने की अनुमति।

. संवर्धित पाठयक्रम

▪️ *व्यक्तिगत संवर्धित–अतिरिक्त पाठ्यवस्तु का नियोजन करना तथा व्यक्तिगत रूप से आत्मनिर्भर पूर्ण करना।

▪️ सामूहिक संवर्धित– सभी की उपलब्धियों को देखते हुए तथा निर्धारित कार्य को समूह में पूरा करना।

. विशेष कक्षाएं एवं विद्यालय

▪️ अलग कक्षाएं।
▪️ विस्तृत पाठयक्रम।
▪️ बेहतर प्रयोगशाला कार्य।
▪️ प्रतिभावान सम्मान अध्यापक।

. त्वरण प्रक्रिया

▪️ इस व्यवस्था में प्रतिभाशाली छात्र को एक सत्र के मध्य में ही किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथा शीघ्र त्वरित कर दिया जाता है। ▪️▪️▪️


📚✍🏻 Notes by
Nisha sky yadav

🎯प्रतिभाशाली बालक🎯
प्रतिभाशाली बालक सामान्य बालक से अधिक उच्च बुद्धिमानी होते हैं इनकी बुद्धि लब्धी120/130से अधिक होती हैं यह बालक किसी भी नए ज्ञान को शीघ्रता से सीख लेता है इसी कारण इन्हें विशिष्ट बालक की श्रेणी में रखा गया है प्रतिभाशाली बालक बुद्धिमान होने के साथ साथ किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने वाला होता है।

🎯प्रतिभाशाली
बालको की नकारात्मक विशेषताएं🎯
प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा का उचित संपोषण या उचित उपयोग न हो पाना , और उसकी उपेक्षा की जाने के कारण उसकी प्रतिभा दब कर रह जाती हैं

✒️उसके विचारों में नकारात्मकता आ जाती हैं
✒️ अधीरता आ जाती हैं।
✒️ आवश्यकता से अधिक बोलने लगते हैं।
✒️ हट्ट (ज़िद्द) करने की प्रवृत्ति आ जाती हैं।
✒️ लापरवाह हो जाते हैं।
✒️ उनकी लेखनी दोषपूर्ण हो जाती हैं।
✒️ इर्ष्यालु और स्वार्थी हो जाते हैं।
✒️समूह से दूर व अकेले रहने लग जाते है।

💎 प्रतिभाशालीबालकों
की शिक्षा💎
प्रतिभाशाली बालक अधिक बुद्धि वाला होने के कारण उसे विशेष शिक्षा की भी आवश्यकता पड़ती हैं इसीलिए प्रतिभाशाली बालको को पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए उचित शिक्षा का प्रबंध भी किया जाना चाहिए।

🌸कक्षा में प्रतिभावान बालकों की उपस्थिति अध्यापकों के लिए बहुत – सी समस्याएं उत्पन्न कर देती हैं अतः ऐसे बालकों के लिए विशेष शिक्षा की आवश्यकता पड़ती हैं, और अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण की। 🌸

🎯प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए- 🎯
💫सभी सामान्य और प्रतिभाशाली बालकों को सीखने के समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालको को अपनी अपनी प्रतिभा के विकास की पूरी स्वतंत्रता देना।

💫प्रतिभाशाली बालकों को ऐसी शिक्षा दी जाएं जो उनके लिए प्रभावकारी हो, उनके लिए उपर्युक्त हो।

💫प्रतिभाशाली बालकों को उनकी योग्यता और क्षमता के अनुसार विशेष गृहकार्य देना चाहिए जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिले और और मानसिक रूप से संतोष भी मिल सकें।

💫प्रतिभाशाली बालकों को नए ज्ञान की आवश्यक्ता सदैव रहती हैं।उन्हें कक्षा की पुस्तकों के अतिरिक्त और भी पुस्तकें पढ़ने में अधिक मज़ा आता है। अतः उनकी रुचि को पूरा करने के लिए पुस्तकालय सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिएं।

💫प्रतिभाशाली बालकों के लिए विशेष शिक्षा की आश्यकता पड़ती हैं। ऐसे बालकों को शिक्षित करने के लिए अध्यापकों का भी विशेष रूप से प्रशिक्षित रहना अनिवार्य है।

💫प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य से कम आयु में पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करने की अनुमति दी जाएं।

💫 प्रतिभाशाली बालकों को आयु से पूर्व विद्यालय में प्रवेश दिया जाना चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालकों को एक ही समस्या को विभिन्न तरीके से हल करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए।

💫 प्रतिभाशाली बालकों के सामने कुछ समस्याओं को चुनौतीयों के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ।

💫प्रतिभाशाली बालकों को कभी कभी कक्षा को पढ़ाने का कार्य भी सौंपा जाना चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालकों के मूल्यांकन हेतु विशेष परीक्षाओं का आयोजन किया जाना चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालकों से अध्यापकों को विषय शिक्षण संबंधी आकर्षक सहायक सामग्री बनवानी चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालकों के शिक्षण में निगमन, संश्लेषण,प्रयोगशाला, हुरिस्टिक, एवं प्रोजेक्ट विधियों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

💫प्रतिभाशाली बालकों को व्यवस्थित पाठ्य सामग्री के माध्यम से पड़ाया जाना चाहिए।

💫 प्रतिभाशाली बालको को सुनियोजित कार्यक्रम के माध्यम से व्यवस्थित ढंग से कार्यरत रखा जाना चाहिए।

💫 त्वरण- शिक्षा के क्षेत्र में त्वरण का अर्थ है – प्रतिभाशाली बालकों को कम समय में अधिक कक्षाएं उत्तीर्ण करवाना। इस प्रक्रिया द्वारा प्रतिभाशाली बालकों को एक सत्र में किसी एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में यथाशीघ्र त्वरित कर दिया जाता है।

💫 समृद्धिकरण-
समृद्धिकरण का तात्पर्य है कि नियमित कक्षाआे मे दिये जाने वाले पाठ्यक्रम मे शैक्षिक अनुभव अधिक देकर उसे समृद्ध बनाया जाना। प्रतिभाशाली बालको के समुचित विकास के लिए पाठ्यक्रम इतना कठिन होना चाहिए कि उसे पढ़ना बालक के लिए एक चुनौतिपूर्ण हो।

💫 विशिष्ट कक्षाएं – इनमे सामान्य विद्यालायो मे ही विशेष कक्षाए आयोजित कर विशेष रूप से नियोजित पाठ्यक्रमो को प्रस्तुत किया जाता है। विशिष्ट प्रतिभावान व्यक्तियों को बुलाकर उनके अनुभवो से छात्रो को लाभान्वित करवाया जाता है।

🙏🏻🙏🏻 धन्यवाद्🙏🏻🙏🏻


👩‍🎓 Meenu Chaudhary 👩‍🎓
👩‍💻 प्रतिभाशाली बालक की नकारात्मक
विशेषताएं-
🌹प्रतिभा का उचित संपोषण-
यदि प्रतिभाशाली बालक प्रश्न पूछता
है और उसे डाट कर बैठा दिया जाता है
तो उसकी प्रतिभा दब जाती है और
उसकी प्रतिभा का उचित संपोषण नहीं
पाता तथा बालक में नकारात्मक विचार
आ जाते हैं |
🌹उपेक्षा की गई –
प्रतिभाशाली बालकों की उपेक्षा करने
से उनका किसी भी कार्य में मन नहीं
लगता है इनमें चिड़चिड़ापन आ जाता
है
🌹समूह से अलग एकांकी रहना –
यदि प्रतिभाशाली बालक की प्रतिभा
दबा दी जाती है तो वह समूह से
अलग रहने लगते है ज्यादा किसी से
बात नहीं करते है वे अकेले रहना पसंद
करते हैं |
🌹ईष्यालू और स्वार्थी –
ऐसे बालक ईष्यालू और स्वार्थी हो
जाते हैं |
🌹जब प्रतिभाशाली बालक की प्रतिभा
दबा दी जाती है तो बालक अपने कार्य
के प्रति लापरवाह हो जाता हैं तथा हठ
करने लगता हैं |
👩‍💻प्रतिभाशाली बालक और शिक्षा –
प्रत्येक विधालय में शिक्षा प्राप्त करने के
लिए सामान्य बालक के अलावा भी
ऐसे बालक होते है जो प्रतिभाशाली
होते हैं जिनकी योग्यताओं का उचित
विकास किया जाना चाहिए विभिन्न
तरीको से जो इस प्रकार है
1- इन्हें जो भी शिक्षा दी जाये प्रभाव
यूक्त व उपयोगी हो |
2- यदि बालक में कोई अन्य प्रतिभा है
तो उसे सहयोग करे ताकि वह बालक
अपनी प्रतिभा को निखार सके तथा
व्यक्ति रुप से आत्मनिर्भर होकर उसे
पूर्ण करे|
3- ऐसे बालक अपने कार्य को समूह में
करते हैं |
👩‍💻त्वरण प्रक्रिया –
इसमें प्रतिभाशाली बच्चों को एक कक्षा
से दूसरे कक्षा में प्रोन्नत कर दिया जाता
हैं | 🌹 🙏Thanku 🙏🌹


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