✍🏻Menka patel ✍🏻

🌈सतत एवं व्यापक मूल्यांकन🌈

☄सतत एवं व्यापक मूल्यांकन बच्चे के लिए आवश्यक होता है इसमें बच्चों को तनाव मुक्त होते हैं सतत एवं व्यापक मूल्यांकन हर क्षेत्र में होता है इसमें बच्चे का मूलांक करने में आसानी होती है जब भी हम सीसीई मूल्यांकन करते हैं हमें एक पाठ रचनात्मक होता है

✍🏻 व्यापक मूल्यांकन – जहां पर भी करना चाहते हैं वहां पर हम अपने काम को कर सकते हैं यह मूल्यांकन हर क्षेत्र में होता है इसका क्षेत्र विस्तृत होता है इसमें बच्चों के अनुसार व्यवस्था स्थान होती है तथा बच्चे अच्छे से प्रदर्शन कर सकते हैं

✍🏻 सतत मूल्यांकन – सतत मूल्यांकन किसी काम को निरंतर कार्य करते हैं बच्चे को निरंतर मूल्यांकन करते रहेंगे तो बच्चों का मूल्यांकन कर सकते हैं यह मूल्यांकन निरंतर चलता रहता है

लक्ष्य की प्राप्ति छोटे-छोटे और दूसरों को पूरा करके होती है

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य निम्न हैं –

⭐ हर पहलू का मूल्यांकन करना
⭐ बच्चे के तनाव को कम करना है
⭐ रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है
⭐ निदान और उपचार में मदद मिलती है
⭐ बेहद कौशल वाले शिक्षार्थियों का निर्माण

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य निम्न हैं

✍🏻 बाल केंद्रित शिक्षण करना
✍🏻 मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बना देना
✍🏻 शिक्षार्थी का विकास अधिगम प्रक्रिया, अधिगम की गति और अधिगम परिवेश सही समय पर सही निर्णय लेना
✍🏻 बच्चे को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
✍🏻 निदान/ उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार वृद्धि

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं निम्न हैं

☄ निरंतर मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है
☄ व्यापक – बच्चे का सर्वांगीण विकास
☄ सह शैक्षिक मूल्यांकन – जीवन कौशल दृष्टिकोण, मान्यताएं ,गतिविधियां
☄ मूल्यांकन एक मापदंड के आधार पर होता है इसमें कई तकनीकों का प्रयोग किया जाता है

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के कार्य निम्न हैं –

⭐ प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है
⭐ कमजोरी का निदान करना व्यक्तिगत शिक्षार्थी की जांच
⭐ बच्चे खुद भी अपनी शक्ति कमजोरी को जान सकते हैं
⭐ दृष्टिकोण ,मान्यता में परिवर्तन की पहचान
⭐ भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन दो प्रकार का होता है

(1) शैक्षिक मूल्यांकन-

👉 रचनात्मक मूल्यांकन 👉योगात्मक मूल्यांकन

(2) सह शैक्षिक मूल्यांकन –
👉 सामान्य मूल्यांकन
👉 आसपास पर्यावरण
👉 शारीरिक शिक्षा
👉 कला
👉 संगीत
👉 नृत्य
👉 कंप्यूटर आदि

🌈 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में शिक्षक को क्या करना चाहिए

⭐ बच्चे के तनाव को कम करना
⭐ व्यवस्थित तौर पर मूल्यांकन निमितता
⭐ निदान और उपचार कर सकते हैं
⭐ रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका देना
⭐ बेहद कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण

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✍🏻 Notes By-Vaishali Mishra

🔆 सतत एवम् व्यापक मूल्यांकन🔆
(Continues And Comprehensive Evaluation)

परिचय:

सतत और व्यापक मूल्यांकन (सी.सी.ई) वर्ष 2009 में भारत के शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया है। मूल्यांकन का यह दृष्‍टिकोण भारत में छठी से दसवीं कक्षा और कुछ विद्यालयों में बारहवीं के छात्रों के लिए राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पेश किया गया था।

अभिप्राय:

सतत और व्यापक मूल्यांकन (सी.सी.ई) छात्रों के विद्यालय-आधारित मूल्यांकन की एक प्रणाली है जिसमें छात्रों के विकास के सभी पहलू शामिल हैं। यह मूल्‍यांकन की एक उन्‍नतशील प्रक्रिया है जो दोहरे उद्देश्यों पर बल देती है अर्थात वैविध्‍यपूर्ण अधिगम के मूल्‍यांकन एवं आकलन में निरंतरता और अन्‍य पर व्यवहार के परिणाम।

इस योजना में ‘सतत’ शब्द का अर्थ है छात्रों के विकास के पहचान पहलुओं के मूल्यांकन पर जोर देना, और विकास एक घटना के बजाय निरंतर प्रक्रिया है, जो संपूर्ण शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया में निर्मित होती है और पूरे अकादमिक सत्र की अवधि में फैली है।

दूसरे शब्द ‘व्यापक’ का अर्थ है कि यह योजना छात्रों की वृद्धि और विकास के शैक्षिक और सह-शैक्षिक पहलुओं को शामिल करने का प्रयास करती है।

सतत और व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य:

▪️सी.सी.ई का मुख्य उद्देश्य बच्‍चे की विद्यालय में उपस्‍थिति के दौरान उसके हर पहलू का मूल्यांकन करना है।
▪️सी.सी.ई का उद्देश्य बच्चों के तनाव को कम करना है।
मूल्यांकन को व्यापक और नियमित बनाना।
▪️रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को स्‍थान प्रदान करना।
▪️निदान और उपचार के साधन प्रदान करना।
▪️बृहद् कौशल वाले शिक्षार्थियों का निर्माण करना।

सतत और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य:

सतत और व्यापक मूल्यांकन के विविध उद्देश्य हैं:

▪️शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया को एक शिक्षार्थी-केंद्रित गतिविधि बनाना।
▪️मूल्यांकन प्रक्रिया को शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग बनाना।
▪️ शिक्षार्थी के विकास, अधिगम की प्रक्रिया, अधिगम की गति और अधिगम के परिवेश के लिए समय पर निर्णय लेना।
▪️आत्म-मूल्यांकन के लिए शिक्षार्थियों को अवसर प्रदान करना।
निदान और उपचार के माध्यम से छात्र की उपलब्धि में सुधार के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया का उपयोग करना।

सतत और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं:
▪️सी.सी.ई का ‘सतत’ पहलू मूल्यांकन के ‘निरंतर’ और ‘आवधिक’ पहलू का ध्‍यान रखता है।
▪️सी.सी.ई का ‘व्यापक’ घटक बच्चे के व्यक्‍तित्‍व के सर्वांगीण विकास के मूल्‍यांकन का ध्‍यान रखता है।

▪️इसमें विद्यार्थी के विकास के शैक्षिक के साथ-साथ सह-शैक्षिक पहलुओं का मूल्यांकन शामिल है। शैक्षिक पहलुओं में पाठ्यक्रम संबंधी क्षेत्र या विषय विशिष्‍ट क्षेत्र शामिल हैं, जबकि सह-शैक्षिक पहलुओं में जीवन कौशल, सह-पाठ्यक्रम संबंधी गतिविधियां, दृष्‍टिकोण और मान्‍यताएं शामिल हैं।

*सह-शैक्षिक क्षेत्रों में मूल्‍यांकन पहचान मानदंडों के आधार पर
*कई तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है,

  • जबकि जीवन कौशल में आकलन और परीक्षण सूची के संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

सतत और व्यापक मूल्यांकन के कार्य:
▪️सी.सी.ई शिक्षक को प्रभावी शिक्षण की रणनीतियों को व्यवस्थित करने में सहायता करता है।
▪️सतत मूल्यांकन कमजोरियों का निदान करने में सहायता करता है और शिक्षक को कुछ व्यक्‍तिगत शिक्षार्थियों की जांच की अनुमति देता है।
▪️सतत मूल्यांकन के माध्यम से छात्र अपनी शक्‍तियों और कमजोरियों को जान सकते हैं।
▪️सी.सी.ई दृष्‍टिकोण और मान्‍यता प्रणाली में परिवर्तन की पहचान करने में मदद करता है।
▪️सी.सी.ई छात्रों की शैक्षिक और सह-शैक्षिक क्षेत्रों में प्रगति पर जानकारी प्रदान करता है जिसके परिणामस्वरूप शिक्षार्थियों की भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान।

🔅सतत और व्यापक मूल्यांकन शैक्षिक और सह-शैक्षिक दोनों पहलुओं पर विचार करता है।🔆

शैक्षिक मूल्यांकन: शैक्षिक पहलुओं में पाठ्यक्रम संबंधी क्षेत्र या विषय विशिष्‍ट क्षेत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र लेखन और वादन कौशल में सुधार के लिए मौखिक और लिखित कक्षा परीक्षण, चक्रीय परीक्षण, गतिविधि परीक्षण और सभी विषयों के दैनिक कक्षा कार्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। शैक्षिक मूल्यांकन रचनात्‍मक और योगात्‍मक दोनों होने चाहिए।

सह-शैक्षिक मूल्यांकन:
मूल्‍यांकन के सह-शैक्षिक क्षेत्र: सह-शैक्षिक मूल्यांकन के क्षेत्र छात्र के सामान्य ज्ञान, पर्यावरण शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, कला, संगीत और नृत्य और कंप्यूटर के कौशल विकास पर केंद्रित हैं। इन्हें क्विजों, प्रतियोगिताओं और गतिविधियों के माध्यम से मूल्यांकित किया जाता है।

विद्यालय आधारित सतत और व्यापक मूल्यांकन प्रणाली एक शिक्षार्थी की निम्नलिखित प्रकार से सहायता करती है:

▪️यह बच्चों के तनाव को कम करना है।
▪️यह मूल्यांकन को व्यापक और नियमित बनाता है।
▪️ निदान और उपचार के साधन प्रदान करता है।
▪️ रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को स्‍थान प्रदान करता है।
▪️यह बृहद् कौशल वाले शिक्षार्थियों का निर्माण करता है।


✴️ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन✴️ 🔆 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन बच्चे की संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक है इससे बच्चे के अंदर जो डर होता है परीक्षा को लेकर वह कम हो जाता है वह तनाव मुक्त हो जाता है सतत एवं व्यापक मूल्यांकन हर क्षेत्र में होता है ◾ सतत मूल्यांकन ➖ सतत व्यापक मूल्यांकन में सतत का अर्थ लगातार एवं वार वार से है सतत मूल्यांकन का अर्थ सीखने सिखाने की प्रक्रिया के अंतर्गत निरंतर अवलोकन करने से है जिसमें हम बच्चों के काम करने की प्रक्रिया को देखकर सतत रूप से मूल्यांकन करते हैं ◾ व्यापक मूल्यांकन ➖ व्यापक मूल्यांकन में पूरी तरह से हर क्षेत्र में मूल्यांकन करना अनिवार्य है 🔅 सतत रूप से मूल्यांकन करने पर ही हम व्यापक मूल्यांकन कर पाएंगे ✴️ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन सी सी ई आर टी ई के एक्ट के तहत 2009 में आया है ◾सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य ➖ 1️⃣ बच्चे के हर पहलू का मूल्यांकन करते हैं 2️⃣ यह बच्चे के तनाव को कम करता है 3️⃣ व्यापक और नियमित मूल्यांकन करता है 4️⃣ रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है 5️⃣ निदान और उपचार में मदद मिलती है 6️⃣ बृहद कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण होता है ◾ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य ➖1️⃣ बाल केंद्रित शिक्षण करवाना 2️⃣ मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बना लेना 3️⃣ शिक्षार्थी का विकास अधिगम प्रक्रिया अधिगम की गति अधिगम परिवेश सही समय पर सही निर्णय लेना 4️⃣ बच्चों को आत्म मूल्यांकन का भी मौका देना 5️⃣ निदान / उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया की जाती है ◾ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं ➖ 1️⃣ निरंतर मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है 2️⃣ व्यापक ➡️ सर्वांगीण विकास करने पर बल देता है 3️⃣ सह शैक्षिक मूल्यांकन ➡️ सह शैक्षिक मूल्यांकन के अंतर्गत जीवन कौशल दृष्टिकोण मान्यताएं गतिविधियां आदि हैं 4️⃣ मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है जिसमें कई तकनीकों का प्रयोग होता है ◾ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के कार्य ➖ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के कार्य निम्नलिखित हैं 1️⃣ प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है जिससे हम व्यवस्थित तरीके से पढ़ा सकें 2️⃣ कमजोरी का निदान करने में मदद करता है और व्यक्तिगत शिक्षार्थियों की जांच करता है 3️⃣ इससे बच्चे खुद भी अपनी शक्ति कमजोरी को जान पाते हैं 4️⃣ दृष्टिकोण / मान्यता में जो परिवर्तन है उसकी पहचान करने में मदद करता है 5️⃣ भविष्य में सफलता का पूर्वानुमान हो जाता है ✴️ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन शैक्षिक एवं सहस शैक्षिक दोनों प्रकार से होता है ◾ सह शैक्षिक ➖ इसमें सामान्य ज्ञान आसपास पर्यावरण की जानकारी होनी चाहिए शारीरिक शिक्षा कला संगीत नैतिक शिक्षा नृत्य कंप्यूटर एक्टिविटी आदि ◾ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का महत्व ➖ 👉यह बच्चों के तनाव को कम करता है 👉व्यवस्थित तौर पर मूल्यांकन करने से नियमितता आती है 👉 इसमें यह अवसर रहता है कि निदान उपचार हो जाए 👉 रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका मिलता है 👉 बृहद कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण करता है ✍️notes by pragya shukla


NOTES BY:- chahita acharya 🙏

Continuous and comprehensive evaluation
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन
Key points –
सीसीई अगर नहीं होगा तो इंप्रूवमेंट का कोई चांस नहीं है
सीसी में जमीनी तौर पर जान पाते हैं कि प्रॉब्लम क्या है
Is mein Mehandi intention important hai
Scene action perform karna different different work mein
फीडबैक देना
जो एक्शन हमें पसंद है हम हर काम में उसी एक्शन को ढूंढते हैं
व्यापक-
हर एंगल से देखना
सतत करेंगे तो ऑटोमेटिक अली व्यापक हो जाएगा

CCE – RTE ACT 2009 मैं लागू हुआ
CCE के लक्ष्य-
1 बच्चे के हर पहलू का मूल्यांकन करना
2 बच्चे के तनाव को कम करना
3 यह मूल्यांकन को व्यापक और नियमित बनाता है
एक अच्छे विजन के साथ आगे बढ़ना
4 रचनात्मक शिक्षण
टीचर को क्रिएटिविटी से पढ़ाने का मौका भी मिलता है
5 निदान व उपचार में मदद मिलती है
प्रॉब्लम का पता चलता है
6 वृहद कौशल से कई स्किल्स का डेवलपमेंट हो सकता है

(छोटे-छोटे उद्देश्य के माध्यम से लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है)
उद्देश्य-
1 बाल केंद्रित शिक्षण करवाना
2 मूल्यांकन प्रक्रिया को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बना लेना
3 शिक्षार्थी का विकास, अधिगम प्रक्रिया, अधिगम की गति, अधिगम परिवेश, इनका सही समय पर सही निर्णय लेना
4 बच्चे को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
5 निदान का उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार करने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है

रचनात्मक मूल्यांकन/ formative assessment व CCE मैं अंतर –

रचनात्मक में यह कहीं नहीं कहा गया है कि हर पहलू का मूल्यांकन करना है रचनात्मक किसी पर्टिकुलर पॉइंट पर होता है
जबकि CCE मैं हर एंगल में मूल्यांकन किया जाता है

CCE की विशेषताएं-
1 यह निरंतर चलता है
मूल्यांकन के आवधिक ( इंटरवल) पहलू का ध्यान रखा जाता है
2 यह व्यापक है अर्थात यह सर्वांगीण विकास पर बल देता है
3 so shaikshik mulyankan जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मान्यताएं, कल्चरल एक्टिविटीज, कैपेसिटी

4 मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है और इसमें कई तकनीक का उपयोग किया जाता है
जैसे बच्चा कैसा परफॉर्म कर रहा है कैसे क्वेश्चन पूछ रहा है कैसा आंसर कर रहा है इसमें बच्चे के स्टैंडर्ड को मेंटेन कैसे रखा जा सकता है टेक्निक का यूज करके हर एंगल को समझ जा सकता है

CCE के कार्य-
1 प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है
2
कमजोरियों का निदान करने में मदद करता है व्यक्तिगत शिक्षार्थियों की जांच भी करता है,
बच्चे खुद भी अपनी शक्ति या कमजोरी को जान सकते हैं सेल्फ इवेलुएशन कर सकते हैं
3 अति मान्यताएं दृष्टिकोण में बदलाव हो रहा है या नहीं यह देखना इसमें परिवर्तन को पहचानना
4 भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान.


✍🏻 मनीषा गुप्ता✍🏻

सतत और व्यापक मूल्यांकन
[Continuous and comprehensive evaluation]

🌸 सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) जिसे 2009 में भारत के शिक्षा का अधिकार अधिनियम के द्वारा निर्देशित किया गया था। सतत और व्यापक मूल्यांकन का प्रस्ताव भारत में राज्य सरकारों ,केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा लाया गया था।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन इनिशियल स्टेज से लेकर फाइनल टेस्ट या रिजल्ट देता है। प्रत्येक परिस्थिति में हर समय लगातार मूल्यांकन करना आवश्यक होता है तभी हम व्यापक मूल्यांकन कर पाएंगे।

🌈 सतत मूल्यांकन➖ अधिगम के दौरान होने वाला मूल्यांकन यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें शिक्षार्थी का मूल्यांकन निरंतर होता रहता है। सतत अर्थात निरंतर बच्चे का शिक्षण सत्र की पूरी अवधि में मूल्यांकन करना आवश्यक होता है। सतत मूल्यांकन के अंतर्गत बच्चे के संपूर्ण पक्षों का मूल्यांकन करना बच्चे की कमियों को पहचानना आता है जिसे संपूर्ण शिक्षण अधिगम के सत्र में निरंतर या लगातार मूल्यांकन किया जाता है।

🔹 सतत मूल्यांकन के अंतर्गत शिक्षार्थियों की अधिगम संबंधी समस्याओं का विश्लेषण करने के लिए इस मूल्यांकन का प्रयोग किया जाता है और इसके उपरांत उपचारात्मक शिक्षण भी प्रदान किया जाता है इस मूल्यांकन के अंतर्गत शिक्षार्थियों को शीघ्र प्रतिपुष्टि भी प्रदान कर दी जाती है।

🌈 व्यापक मूल्यांकन➖ ‘व्यापक ‘मूल्यांकन के अंतर्गत शिक्षार्थियों के वृद्धि और विकास प्रगति के साथ-साथ अन्य गतिविधियों को भी शामिल किया जाता है।
🍁 सतत और व्यापक मूल्यांकन➖ सतत और व्यापक मूल्यांकन छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर मूल्यांकन किया जाता है सतत और व्यापक मूल्यांकन में छात्रों के अधिगम के सभी पक्षों का आकलन किया जाता है यह सबसे ज्यादा प्रभावी आकलन होता है। सतत और व्यापक मूल्यांकन एक स्कूल आधारित मूल्यांकन की प्रणाली को संदर्भित करता है जिसमें छात्र के प्रगति, गुण, और विशेषताओं को भी शामिल किया जाता है जिसमें बच्चों का निरंतर मूल्यांकन के साथ-साथ शिक्षार्थियों के अन्य गतिविधियों का भी मूल्यांकन किया जाता है।

🌈 सतत और व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य➖

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन का मुख्य लक्ष्य बच्चे का कक्षा में अधिगम के दौरान ही उसके हर पहलू पक्षों का मूल्यांकन करना है।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन का यह भी लक्ष्य है कि यह मूल्यांकन बच्चे के तनाव को कम करता है।

🔹 यह मूल्यांकन को व्यापक और नियमित बनाता है।

🔹 इस मूल्यांकन से रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन की मदद से बच्चे का निदान और उपचार किया जा सकता है।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन का यह भी लक्ष्य है जिसमें बृहद कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण भी किया जा सकता है। बृहद कौशल से तात्पर्य यह है कि बच्चे का निरंतर मूल्यांकन करने से बच्चे अपनी कमियों को पहचान कर इन कमियों को दूर करके और विभिन्न कौशल विकसित करके अन्य गतिविधियों के माध्यम से गुणों को विकसित कर लेते हैं जिससे एक ऐसे शिक्षार्थी का निर्माण होता है जो बृहद कौशल से परिपूर्ण होता है।

🌸लक्ष्य और उद्देश्य में अंतर🌸

लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे उद्देश्य बनाए जाते हैं और इन्हीं उद्देश्यों के आधार पर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

🍁 सतत और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य🍁

🔹 शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को बाल केंद्रित करवाना।

🔹 मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिगम शिक्षण का अंग बना लेना।

🔹 शिक्षार्थी का विकास अधिगम की प्रक्रिया अधिगम गति अधिगम परिवेश के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना।

🔹 बच्चे को आत्म मूल्यांकन का अवसर देना।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन का उपयोग विद्यार्थी का निदान और उपचार के माध्यम से छात्र की उपलब्धि में सुधार करने के लिए किया जाता है।

🌸 सतत और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं🌸

🔹’ निरंतर’ -CCE का निरंतर पहलू और मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखता है।

🔹 ‘व्यापक’ -व्यापक पहलू के अंतर्गत विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास ,व्यक्तित्व के हर पक्ष या पहलू का विकास ,क्योंकि प्रत्येक बच्चे का व्यक्तित्व अलग-अलग क्षेत्र में अलग अलग होता है।

🔹 इसमें विद्यार्थी के शैक्षिक पहलुओं के साथ-साथ सहशैक्षिक पहलुओं का मूल्यांकन शामिल किया गया है।

🌸 शैक्षिक पहलुओं के अंतर्गत पाठ्यक्रम क्षेत्रों या विशिष्ट विशेष क्षेत्रों को सम्मिलित किया जाता है।
🌸 सहस शैक्षिक पहलुओं के अंतर्गत जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मान्यताएं, गतिविधि, क्षमता, मूल्य आदि शामिल किया जाता है।

🔹 यह मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है जिसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

🌸 सतत और व्यापक मूल्यांकन के कार्य🌸

🔹 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण रणनीति व्यवस्थित तरीके से करने में मदद करता है‌।

🔹 निरंतर मूल्यांकन के द्वारा बच्चे की कमजोरियों का निदान या कमजोरियों का पता लगाने के लिए कार्य करता है और शिक्षकों को व्यक्तिगत बच्चे की जांच करने में मदद करता है।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन के माध्यम से छात्र भी अपनी शक्ति और कमजोरियों को जान सकते हैं।

🔹सतत एवं व्यापक मूल्यांकन बच्चे के दृष्टिकोण और मान्यता में परिवर्तन की पहचान करने में भी मदद करता है।

🔹 सतत और व्यापक मूल्यांकन छात्रों को शैक्षिक और सह शैक्षिक क्षेत्रों में छात्रों की प्रगति के बारे में जानकारी प्रदान करके इसके परिणाम स्वरूप शिक्षार्थियों के भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लगाने का कार्य करता है।

🌸 उपरोक्त तथ्यों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सतत और व्यापक मूल्यांकन शैक्षिक और सह शैक्षिक दोनों पहलुओं पर विचार करता है। शैक्षिक मूल्यांकन के अंतर्गत रचनात्मक मूल्यांकन, योगात्मक मूल्यांकन, निदानात्मक मूल्यांकन अधिगम के लिए आकलन अधिगम का आकलन किया जाता हैं जिसके अंतर्गत मौखिक परीक्षा लिखित परीक्षण यूनिट टेस्ट त्रैमासिक परीक्षा अर्धवार्षिक परीक्षा वार्षिक परीक्षा और बच्चे के कक्षा में प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाता है।

जबकि सह शैक्षिक मूल्यांकन के अंतर्गत सामान्य ज्ञान पर्यावरण की जानकारी शारीरिक शिक्षा कला शिक्षा संगीत नैतिक शिक्षा नृत्य कंप्यूटर शिक्षा मूल्य शिक्षा को शामिल किया जाता है।

🍁 सतत और व्यापक मूल्यांकन निम्न तरीकों से सहायता करती है🍁➖

1️⃣ यह मूल्यांकन विद्यार्थी को आगे बढ़ने में मदद करती है।

2️⃣ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के माध्यम से बच्चे के तनाव को कम किया जा सकता है

3️⃣ यह मूल्यांकन व्यवस्थित तौर पर मूल्यांकन करने में मदद करती है जिससे नियमितता भी आती है।

4️⃣इस मूल्यांकन में निदान और उपचार होने का मौका मिलता है।

5️⃣इस मूल्यांकन से रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को अवसर प्राप्त होता है।

6️⃣ इस मूल्यांकन की सहायता से वृहद कौशल वाले शिक्षार्थियों का निर्माण होता है।

🌈🌸🍁💐🍁🌸🌈


✍ PRIYANKA AHIRWAR ✍️

📖सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन 📖

👉बच्चो के अधिगम का जब लगातार व्यापक मूल्यांकन किया जाता है तो उसे ”सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन” कहते हैं।
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन बच्चे के लिए आवश्यक है इसके माध्यम से बच्चो मे जो भय होता है, परिक्षा के प्रति वह भय दूर हो जाता है।

👉सतत् मूल्यांकन :- सतत् किसी कार्य को निरंतर करते रहने वाली प्रकिया है।

👉व्यापक मूल्यांकन :-व्यापक का अर्थ है विस्तृत करना होता है।

🌀सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य :- 1️⃣बच्चे के हर पहलू का मूल्यांकन करना ।
2️⃣बच्चे के तनाव को कम करना ।
3️⃣ किसी कार्य को व्यापक और नियमित करना ।
4️⃣ रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है।
5️⃣ निदान एवं उपचार में मदद मिलती है।
6️⃣ वृहद् कौशल वाले छात्रों का निर्माण होता है।

🌀 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य :-
1️⃣बालक केन्द्रित शिक्षण रखना।
2️⃣मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रकिया का अंग बनाना ।
3️⃣शिक्षार्थी का विकास, अधिगम प्रकिया अधिगम गति, अधिगम परिवेश, सही समय एवं सही निर्णय लेना ।
4️⃣बच्चो को आत्म मूल्यांकन का मौका देना ।
5️⃣निदान एवं उपचार के माध्यम से बच्चो की उपलब्धि मे सुधार करना ।

🌀सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताऐ :-
1️⃣निरंतर मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखना।
2️⃣व्यापक बच्चे का सर्वांगीण विकास करना।
3️⃣मूल्यांकन एक मापदंड के आधार पर होता है। एवं कई तकनीकों का उपयोग करना ।
4️⃣शैक्षिक एवं सह-शैक्षिक पहलूओ का होना ।

🌀सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के कार्य :-
1️⃣प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने मे मदद करता है ।
2️⃣छात्रों की कमजोरी का निदान करना एवं व्यक्तिगत शिक्षार्थी की जांच करना ।
3️⃣बच्चे खुद भी अपनी शक्ति, कमियों की जानना ।
4️⃣दृष्टिकोण , मान्यता प्रकिया में परिवर्तन की पहचान करने मे मददगार हो ।
5️⃣भाविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लगाना ।

🌀 शिक्षक द्वारा किए जाने वाले प्रयास:-
1️⃣बच्चो के तनाव को कम करना।
2️⃣मूल्यांकन को व्यापक व नियमित बनाना है।
3️⃣निदान एवं उपचार कर सकते हैं।
4️⃣रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक द्वारा छात्रों को मौका दिया जाए ।
5️⃣वृहद् कौशल वाले छात्रों का निर्माण।


Date – 8/10 / 2020
📒 Nots by shanu sanwle 📒
सतत और व्यापक मूल्यांकन – CCE
Continuous and comprehensive
Evaluation
🔸🔷 CCE – RTE -ACT 2009
🔸 सतत और व्यापक मूल्यांकन _छात्रों के विद्यालय आधारित अवलोकन की एक प्रक्रिया हैं ।
🔸🔷 सतत का अर्थ
निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ।
जिसमें छात्रों के हर दिन , हर समय, हर पल , के सभी पहलुओं को देखा जाता है बच्चा कैसे सीखते है क्या सोचता है उसकी सिखने क्षमता कैसी हैं सभी बातों को ध्यान‌ में रखकर । अवलोकन किया जाता है
🔸🔷 व्यापक का अर्थ
किसी कार्य को बड़े स्तर पर या विस्तुत रुप से करना । अगर हम किसी काम को व्यापक रूप से करना जानते हैं तो हम दूसरा काम भी कर लेंगे। चाहे हम उस काम को नहीं जानते हैं
व्यापक मूल्यांकन करने के लिए हमें सतत मूल्यांकन करना ही होगा।
व्यापक मूल्यांकन करने से ही बच्चे के बारे में पता चलेगा कि बच्चा किस विषय में कमजोर है किस विषय में अच्छा है तभी जाकर बच्चे को आगे बढ़ाया जाएगा अगर बच्चा कमजोर है तो उसका उपचार या निदान करेगें ।
🔸 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन तभी तक होगा जब तक फाइनल एग्जाम ना हो जाए ।
🔷 CCE goal / लक्ष्य
1) हर पहलुओं का मूल्यांकन करना
2) यह बच्चे के तनाव को कम करता हैं
3 ) रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है
4 ) निदान और उपचार में मदद मिलती है
निदान में बच्चों की कमियों का पता लगाया जाता है
उपचार बच्चों के कमियों को दूर किया जाता है
5 ) व्यापक और नियमित रूप से किया जाता है
6 ) बृहद कौशल वाले विद्यार्थियों का निर्माण 🔷CCE – purpose / उद्देश्य
1 बाल केंद्रित शिक्षण करना
2 मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना लेना
3 शिक्षार्थियों का विकास , अधिगम प्रक्रिया ,अधिगम गति, अधिगम परिवेश, इसके लिए सही समय पर सही निर्णय लेना ।
4 बच्चे को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
5 निदान उपचार के माध्यम से बच्चों की उपलब्धि में सुधार के लिए मूल्यांकन प्र�


Date – 8/10 / 2020
📒 Nots by shanu sanwle 📒
सतत और व्यापक मूल्यांकन – CCE
Continuous and comprehensive
Evaluation
🔸🔷 CCE – RTE -ACT 2009
🔸 सतत और व्यापक मूल्यांकन _छात्रों के विद्यालय आधारित अवलोकन की एक प्रक्रिया हैं ।
🔸🔷 सतत का अर्थ
निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ।
जिसमें छात्रों के हर दिन , हर समय, हर पल , के सभी पहलुओं को देखा जाता है बच्चा कैसे सीखते है क्या सोचता है उसकी सिखने क्षमता कैसी हैं सभी बातों को ध्यान‌ में रखकर । अवलोकन किया जाता है
🔸🔷 व्यापक का अर्थ
किसी कार्य को बड़े स्तर पर या विस्तुत रुप से करना । अगर हम किसी काम को व्यापक रूप से करना जानते हैं तो हम दूसरा काम भी कर लेंगे। चाहे हम उस काम को नहीं जानते हैं
व्यापक मूल्यांकन करने के लिए हमें सतत मूल्यांकन करना ही होगा।
व्यापक मूल्यांकन करने से ही बच्चे के बारे में पता चलेगा कि बच्चा किस विषय में कमजोर है किस विषय में अच्छा है तभी जाकर बच्चे को आगे बढ़ाया जाएगा अगर बच्चा कमजोर है तो उसका उपचार या निदान करेगें ।
🔸 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन तभी तक होगा जब तक फाइनल एग्जाम ना हो जाए ।
🔷 CCE goal / लक्ष्य
1) हर पहलुओं का मूल्यांकन करना
2) यह बच्चे के तनाव को कम करता हैं
3 ) रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है
4 ) निदान और उपचार में मदद मिलती है
निदान में बच्चों की कमियों का पता लगाया जाता है
उपचार बच्चों के कमियों को दूर किया जाता है
5 ) व्यापक और नियमित रूप से किया जाता है
6 ) बृहद कौशल वाले विद्यार्थियों का निर्माण 🔷CCE – purpose / उद्देश्य
1 बाल केंद्रित शिक्षण करना
2 मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना लेना
3 शिक्षार्थियों का विकास , अधिगम प्रक्रिया ,अधिगम गति, अधिगम परिवेश, इसके लिए सही समय पर सही निर्णय लेना ।
4 बच्चे को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
5 निदान उपचार के माध्यम से बच्चों की उपलब्धि में सुधार के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया करना ।
🔷 CCE , featurse / विशेषताएं
1 निरंतर चलता है मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है
2 व्यापक रूप से सर्वागीण विकास पर बल देता है
3 सहस शैक्षिक मूल्यांकन ,जीवन कौशल, दृष्टिकोण मान्यताएं , अलग-अलग गतिविधि क्षमता आदि बातो का पता चलता है ।
4 मूल्यांकन एवं मापदंड के आधार पर होता है
इनमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है
🔷 CCE , work / कार्य
1 प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है व्यवस्थित तरीके से।
2 कमजोरी का निदान करता है व्यक्तिगत शिक्षार्थियों की जांच करता हैं
3 बच्चे खुद भी अपनी शक्ति या कमजोरियों को जांच कर सकते हैं
4 दृष्टिकोण या मान्यता में परिवर्तन की पहचान
5 भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लगता है
🔷 सतत और व्यापक मूल्यांकन का शैक्षिक एवं सहस शैक्षिक पहलू
🔸 शैक्षिक मूल्यांकन
यह पाठ्यक्रम संबंधी पहलू है यह लेखन पठन के कौशलों में सुधार के लिए है
मौखिक एवं लिखित परीक्षण ,चक्रिय परीक्षण,
गतिविधि परीक्षण सभी विषयों के दैनिक कक्षा कार्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं
शैक्षिक मूल्यांकन रचनात्मक और योगात्मक दोनों तरह से होना चाहिए ।
🔸🔷 सह शैक्षिक मूल्यांकन
सामान्य ज्ञान की शिक्षा , आसपास पर्यावरण की शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, कला संगीत नृत्य आदि की शिक्षा, कंप्यूटर के कौशल विकास पर केंद्रित है इन्हें
क्यूज प्रतियोगिता और गतिविधि के माध्यम से मूल्यांकन किया जाता है
🔷CCE, Student Help / छात्रों की मदद करता है।
1 बच्चे के तनाव को कम करता है
2 व्यवस्थित मूल्यांकन नियमिता में ।
3 निदान और उपचार का मौका मिलता है
4 रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका देता
5 बृहद कौशल वाले शिक्षार्थियों का निर्माण करता है


🟢 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन🟢
🌟सतत्:- सतत् का अर्थ है लगातार । सतत् मूल्यांकन का मतलब है सीखने की प्रकिया का निरंतर अवलोकन करना।
🌟व्यापक:-इसमें हर अलग अलग क्षेत्र में मूल्यांकन होता है। इसका क्षेत्र विस्तृत होता है।
♦️लक्ष्य की प्राप्ति छोटे छोटे उद्देश्यों से होती है♦️
☄️सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य☄️
1️⃣हर पहलू का मूल्यांकन।
2️⃣बच्चों के तनाव को कम करना।3️⃣व्यापक और नियमित।
4️⃣ रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है।
5️⃣निदान और उपचार में मदद मिलती हैं।
6️⃣ वृहद कोशाल वाले शिक्षाथी का निर्माण।
🌟 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य🌟
1️⃣बाल केंद्रित शिक्षण करवाना।
2️⃣ मूल्लाएंकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बना लेना।
3️⃣ शिक्षार्थी का विकास,अधिगम प्रक्रिया,अधिगम की गति अधिगम परिवेश, के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना।
4️⃣बच्चों को आत्म मूल्यांकन का मौका देना।
5️⃣निदान/उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार करना।
🗯️ सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं🗯️
1️⃣इसमें निरंतर मूल्यांकन के आवेधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है।
2️⃣व्यापक सर्वांगीण विकास पर बल देता है।
3️⃣सहशेक्षिक मूल्यांकन- जीवन कोसल, दृष्टिकोण, मानताए, गतिविधि
4️⃣मूल्यांकन मानदंड के आधार पर होता है इसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
🌅 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के कार्य🌅
1️⃣प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है।
2️⃣यह कमजोरी का निदान करने में मदद करता है इसमें शिक्षक व्यक्तिगत शिक्षार्थी की जांच भी करता है।
3️⃣बच्चे खुद भी अपनी कमजोरी या शक्ति की जांच कर सकता है।
4️⃣दृष्टिकोण/ मान्यता में परिवर्तन को पहचानने में मदद करता है कि परिवर्तन हो रहा है कि नहीं।
5️⃣ भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लगता है।
🌈 सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन दो प्रकार का होता है।🌈
1️⃣शैक्षिक मूल्यांकन
🅰️ रचनात्मक मूल्यांकन🅱️ योगात्मक मूल्यांकन
2️⃣ साहशेक्षिक मूल्यांकन
🔸 सामान्य मूल्यांकन
🔹आस पास का पर्यावरण
🔸शारीरिक शिक्षा
🔹कला
🔸संगीत
🔹 डांस
🔸 संस्कृति।
🌅🌅सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के दौरान शिक्षक को क्या करना चाहिए🌅🌅
1️⃣बच्चे के तनाव को कम करना।
2️⃣व्यवस्थित तौर पर मूल्यांकन करना।
3️⃣निदान व उपचार करना।
4️⃣ रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका दे ता है।
5️⃣वृहद कोशा ल वाले शिक्षार्थी का निर्माण करना।………. Raziya khan


🔆सतत व्यापक मूल्यांकन🔆 (continues and comprehensive evaluation)
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) मूल्यांकन की एक प्रक्रिया थी जिसे 2009 में भारत की शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा निर्देशित किया गया था जैसे छठी से दसवीं कक्षा दसवीं कक्षा की छात्राओं के लिए और कुछ स्कूलों में 12वीं के लिए भारत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पेश किया गया था
सतत और व्यापक मूल्यांकन सीसीई छात्रों के स्कूल आधारित मूल्यांकन की एक प्रणाली को संदर्भित करता है यह मूल्यांकन की एक एक एक विकासात्मक प्रक्रिया है जो दो दोगुना उद्देश्यों पर जोर देती है व्यापक रूप से सीखने और दूसरों के व्यवहार और दूसरों के व्यवहार के और दूसरों के व्यवहार के व्यवहार के परिणामों पर निरंतरता निरंतरता है
इस योजना के अनुसार के अनुसार सतत शब्द छात्रों की वृद्धि और विकास को समझने और मूल्यांकन करने की निरंतर प्रक्रिया है

व्यापक का अर्थ है कि यह योजना छात्रों की वृद्धि और विकास के शैक्षिक और सह शैक्षिक दोनों पहलुओं में होती है होती है व्यापक हर क्षैत्रो में होता है
◼ लक्ष्य और उद्देश्य में अंतर ◼
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे उद्देश्य बनाए जाते हैं और इन्हें उद्देश्यों के आधार पर लक्ष्य को प्राप्त किया जाता है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य-
◾सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में हर पहलू का मूल्यांकन होता है
◾बच्चे के तनाव को कम करना
◾मूल्यांकन व्यापक और नियमित बनाता बनाता नियमित बनाता है
◾रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है
◾निदान और उपचार में मदद मिलती है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य –
◾बाल केंद्रित शिक्षण रखना
◾मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बनाना
◾शिक्षार्थी का विकास अधिगम प्रक्रिया अधिगम गति अधिगम परिवेश सही समय एवं सही निर्णय लेना
◾बच्चों को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
निदान एवं उपचार के माध्यम से बच्चों की उपलब्धि में सुधार करना
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं-
◾निरंतर मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है
◾व्यापक सर्वांगीण विकास
◾सह शैक्षिक मूल्यांकन जीवन कौशल दृष्टिकोण मान्यताएं मान्यताएं गतिविधि |
◾मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है ◾इसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है
सतत व्यापक मूल्यांकन की कार्य-
◾प्रभावी शिक्षण रणनीति व्यवस्थित तरीके से करना
◾कमजोरी का निदान व्यक्ति का का का शिक्षार्थी की जांच करना
◾ बच्चे खुद भी अपनी शक्ति कमजोरी को जान सकते हैं
◾दृष्टिकोण मानवता में परिवर्तन को पहचान सकते हैं
◾ भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लग जाता जाता है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के दो पहलू पहलू हैं
शैक्षिक – रचनात्मक योगात्मक सहशैक्षिक – सामान्य ज्ञान ,आस-पास , पर्यावरण शारीरिक शिक्षा कला संगीत नैतिक शिक्षा नित्य कंप्यूटर आदि आते हैं
🔶शिक्षक द्वारा किए जाने वाले प्रयास-
◾बच्चे के तनाव को कम करता है
◾व्यवस्थित मूल्यांकन नियमितता मे किया जाता है
◾ निदान और उपचार करता है
◾रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका देता है
◾बृहद कौशल बानी शिक्षार्थी शिक्षार्थी का निर्माण करना |


☀️ सतत और व्यापक मूल्यांकन☀️
continue comprehensive evaluation

⏺ सतत मूल्यांकन- सतत का अर्थ होता है लगातार या निरंतर या बार-बार, हर समय ।बालकों का सतत मूल्यांकन हम कक्षा अवलोकन के दौरान, कक्षा शिक्षण के दौरान हर समय करते हैं ।

⏺व्यापक मूल्यांकन- व्यापक मतलब हर क्षेत्र, हर पहलू, हर तरीके से ,संपूर्ण रुप से। बालक का हर क्षेत्र में हर पहलू में मूल्यांकन किया जाता है।

☀️ सतत और व्यापक मूल्यांकन बालक के सर्वांगीण विकास के लिए करते हैं ।

⏺ बालक को प्रतिपुष्टि देने के लिए सतत और व्यापक मूल्यांकन की जरूरत होती है ।

⏺सतत और व्यापक मूल्यांकन परिणाम के पहले होता है। इसमें यह जानने की कोशिश की जाती है कि क्या समस्या है इसका क्या कारण है और उसे कैसे ठीक करेंगे ।

⏺किसी कार्य को करने की शुरुआत से लेकर अंतिम चरण जहां तक की कार्य समाप्त नहीं हो जाता और परिणाम नहीं आ जाता तब तक हम हर समय, हर पल ,हर क्षेत्र का मूल्यांकन करते हैं।

⏺सतत और व्यापक मूल्यांकन शैक्षिक के साथ-साथ सह शैक्षिक पहलु का भी किया जाता है

⏺हम उस कार्य को बेहतर ढंग से कर पाते हैं जिसमें हमारा एक्शन या क्रिया अच्छी प्रकार से संचालित होती है ।

एक्शन या क्रिया- जिसे करने पर हमें मजा आता है।

☀️सतत और व्यापक मूल्यांकन शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत आया ।

☀️सतत और व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य –
1⃣बच्चे के हर पहलू का मूल्यांकन करते हैं ।

2⃣यह बच्चे के तनाव को कम करता है क्योंकि बार-बार करते हैं इसलिए।

3⃣ व्यापक और नियमित होता है।

4⃣ रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है क्योंकि कमियों को देखते हैं और स्थिति को देखकर आगे बढ़ते हैं।

5⃣ निदान और उपचार में मदद मिलती है।

6⃣वृहद् कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण कर सकते हैं क्योंकि इसमें विद्यार्थी का हर जगह ,हर समय ,हर पहलू का मूल्यांकन किया जाता है ।बालक के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखा जाता है।

☀️ किसी भी लक्ष्य को हम छोटे-छोटे उद्देश्य स प्राप्त करते हैं।

☀️ सतत और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य

1⃣बाल केंद्रित शिक्षण करना।

2⃣ मूल्यांकन को अधिगम प्रक्रिया का अंग बना लेना।

3⃣ शिक्षार्थी का विकास, अधिगम प्रक्रिया, अधिगम गति, अधिगम प्रवेश के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना।

4⃣ बच्चे को आत्म मूल्यांकन या सो मूल्यांकन का मौका देना।

5⃣ निदान या उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि ,उसमे सुधार के लिए मूल्यांकन करना।

☀️ सतत और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं

1⃣निरंतर मूल्यांकन के अवधिक पहलु का ध्यान रखा जाता है क्योकि क्योंकि कभी-कभी एक ही कार्य को करते रहने पर हमारी उत्तेजना में कमी होने लगती है इसलिए समय-समय पर हमारी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए हमें अपनी क्रियाविधि में परिवर्तन करते रहना चाहिए

2⃣व्यापक मूल्यांकन हमारे सर्वांगीण विकास पर बल देता है। सह शैक्षिक मूल्यांकन किया जाता है जीवन कौशल ,दृष्टिकोण, मान्यता, गतिविधि क्षमता का ध्यान रखा जाता है ।

4⃣मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है ।इसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है ।

☀️सतत और व्यापक मूल्यांकन के कार्य

1⃣प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद करता है ।

2⃣कमजोरी का निदान, व्यक्तिगत शिक्षार्थी की जांच करता है ।

3⃣बच्चे खुद भी अपनी शक्ति या कमजोरी को जान सकते हैं।

4⃣ दृष्टिकोण या मान्यता में परिवर्तन की पहचान करता है। भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लग जाता है।

☀️ सतत और व्यापक मूल्यांकन शैक्षिक और सह शैक्षिक दोनों प्रकार से होता है

⏺शैक्षिक में दो प्रकार से रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन

⏺सह शैक्षिक मूल्यांकन में बालक के सामान्य ज्ञान ,अपने आसपास और पर्यावरण की जानकारी, शारीरिक शिक्षा की जानकारी, कला ,संगीत ,नैतिक शिक्षा ,कंप्यूटर आदि का टेस्ट, क्विज ,प्रतियोगिता और क्रिया के माध्यम से मूल्यांकन किया जाता है

⏹ सतत और व्यापक मूल्यांकन बच्चे के विकास में कैसे सहायता करता है ?

1⃣बच्चे के तनाव को कम करता है

2⃣व्यवस्थित तौर पर मूल्यांकन करने में मदद करता है और नियमितता लाता है

3⃣ निदान और उपचार का मौका रहता है ।

4⃣रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका देता है ।

5⃣वृहद् कौशल वाले शिक्षार्थी का निर्माण करता है।

Notes by – Ravi kushwah


💫 Notes by➖ Rashmi Savle 💫

सतत और व्यापक मूल्यांकन
Continuous and Comprehensive Evaluation

सतत और व्यापक मूल्यांकन कहता है कि यदि आप जिस कार्य को को करते हैं और उस कार्य के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं या Action करते हैं तो उस एक्शन से जुड़े सभी कार्य को हम अच्छे से कर सकते हैं चाहे वह कार्य पहले किया गया हो या न किया गया हो |

यदि हमें पर्यावरण ऐसा दिया जाए जैसा कि हम चाहते हैं तो वो हमारे एक्शन का सबसे अच्छा पार्ट होता है और यही सतत् मूल्यांकन है और यदि सतत् मूल्यांकन किया जाता है तो स्वत: ही व्यापक मूल्यांकन हो जाता है जरूरत है उस व्यापक मूल्यांकन की |

जब सतत् रूप से व्यापक मूल्यांकन किया जाता है तो उसके हर एक पक्ष को देखते हुए, उसके हर एक पक्ष के बारे में सोचते हुए राय बनाते हैं और उसके अनुसार तय करते हैं कि क्या आवश्यक है और क्या आवश्यक नहीं है |

शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत CCE की बात कही गई जिसमें बच्चे का हर पक्ष से मूल्यांकन करना आवश्यक है और ये तब तक चलता है जब तक कि उद्देश्य पूरा न हो जाए |

सतत् और व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य ➖

(1) इसके अन्तर्गत बच्चे के हर पहलू का हर पक्ष से मूल्यांकन किया जाता है कि बच्चे को क्यों , कैसे और क्या सिखाना है |

(2) ये बच्चे के तनाव को कम करता है उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है उनकी कमियों का पता चलता रहता है और उनको दूर किया जाता है |

(3) ये मूल्यांकन को व्यापक और नियमित बनाता है जो कि अच्छा तरीका है |

(4) इसमें शिक्षक को रचनात्मकता से पढा़ने का मौका मिलता है और रुचि उत्पन्न होती है तथा रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है |

(5) इसमें निदान और उपचार में मदद मिलती है बच्चे की कमियों को दूर करके उनका उपचार किया जाता है |

(6) इसमें हम वृहद कौशल विद्यार्थी का निर्माण कर सकते हैं तथा बच्चे के हर पक्ष का हर क्षेत्र का मूल्यांकन किया जाता है |

सतत् और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य➖

(1) बाल केन्द्रित शिक्षण करवाना तथा बच्चे की रूचियों का और उनके विचारों का ध्यान रखना |

(2) मूल्यांकन की प्रक्रिया को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का हिस्सा या अंग बना लेना |

(3) अधिगम की गति, अधिगम की प्रक्रिया, अधिगम का विकास और अधिगम परिवेश इन सभी चीजों के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना |

(4) बच्चे को आत्म मूल्यांकन का अवसर प्रदान करना कि वे अपने तथ्यों को स्वंम समझकर उनको इम्पलीमेन्ट कर सकें |

(5) इसके माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार होता है क्योंकि इसमें बच्चे की हर समस्या का निदान और उपचार किया जाता है अर्थात
” निदान और उपचार के माध्यम से बच्चे की उपलब्धि में सुधार के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है |

सतत् और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं ➖

ये निरंतर चलता है और बच्चे के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है और बच्चे के हर क्षेत्र का मूल्यांकन किया जाता है और इसके लिए आवश्यक है कि बच्चे मे रूचि कैसे उत्पन्न की जाए |

(2) ये व्यापक मूल्यांकन है जो बच्चे के सर्वांगीण विकास का कार्य करता है बच्चे में क्या, कितना और कैसे विकास होगा इसका मूल्यांकन किया जाता है |

(3) इसके द्वारा बच्चे का सह-शैक्षिक मूल्यांकन किया जाता है जिसमें बच्चे के जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मान्यताएँ, गतिविधियों और सोच आदि सभी पहलू से मूल्यांकन किया जाता है |

(4) ये मूल्यांकन का एक मानदण्ड (Standard) के आधार पर होता है इसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है जैसे पुरूस्कार देना, दण्ड देना, उत्सुकता लाना, रूचि उत्पन्न करना आदि |
इसमें अलग अलग तकनीकों का प्रयोग करके बच्चे का इम्प्रूवमेंट किया जाता है |

सतत् और व्यापक मूल्यांकन के कार्य ➖

(1) ये प्रभावी शिक्षण रणनीति बनाने में मदद करता है कि बच्चे को कैसे पढा़ना है |

(2) ये बच्चे की कमजोरियों का निदान करने में मदद करता है और शिक्षक को बच्चे के व्यक्तिगत व्यवहार की जांच करने में मदद करता है |

(3) बच्चे खुद भी अपनी शक्ति व कमजोरी को जान सकते हैं और उसे दूर कर सकते हैं |

(4) दृष्टिकोण और मान्यता मे जो परिवर्तन है इसकी पहचान करने में मदद करता है कि परिवर्तन हो रहा है या नहीं |

(5) भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और ये तय किया जा सकता है कि बच्चे की क्षमता क्या है वह आगे क्या कर सकता है |

(6) ये शैक्षिक मूल्यांकन और सह-शैक्षिक मूल्यांकन दोनों करता है —-
शैक्षिक अर्थात जो स्कूली शिक्षा या शिक्षण से जुड़ा होता है दो प्रकार का होता है
रचनात्मक
योगात्मक

तथा सह-शैक्षिक मतलब जो शिक्षण के दौरान किया जाता है जिसमें,

🔹 सामान्य ज्ञान

🔹 अपने आस पास के पर्यावरण की जानकारी

🔹 शारीरिक शिक्षा की जानकारी

🔹 कला शिक्षा की जानकारी

🔹 संगीत

🔹 नैतिक शिक्षा

🔹 नृत्य

🔹 कम्प्यूटर

आदि के लिए टेस्ट ,काम्पीटिशन क्विज , एक्टिविटी आदि का आयोजन किया जाता है |

ये एक शिक्षक की मदद या सहायता कैसे कर सकता हैं➖

(1) ये बच्चे के तनाव को कम करता है |

(2) व्यवस्थित मूल्यांकन में नियमितता लाता है |

(3) इसमें अवसर रहते हैं कि निदान और उपचार कैसे करना है |

(4) रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को अवसर प्रदान करता है |

(5) यह वृहद या बड़े कौशल वाले विद्यार्थी का निर्माण करता है |

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Notes by-Ranjana sen
🔆सतत व्यापक मूल्यांकन🔆
(continues and comprehensive evaluation)
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) मूल्यांकन की एक प्रक्रिया थी जिसे 2009 में भारत की शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा निर्देशित किया गया था जैसे छठी से दसवीं कक्षा दसवीं कक्षा की छात्राओं के लिए और कुछ स्कूलों में 12वीं के लिए भारत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा पेश किया गया था
सतत और व्यापक मूल्यांकन सीसीई छात्रों के स्कूल आधारित मूल्यांकन की एक प्रणाली को संदर्भित करता है यह मूल्यांकन की एक एक एक विकासात्मक प्रक्रिया है जो दो दोगुना उद्देश्यों पर जोर देती है व्यापक रूप से सीखने और दूसरों के व्यवहार और दूसरों के व्यवहार के और दूसरों के व्यवहार के व्यवहार के परिणामों पर निरंतरता निरंतरता है
इस योजना के अनुसार के अनुसार सतत शब्द छात्रों की वृद्धि और विकास को समझने और मूल्यांकन करने की निरंतर प्रक्रिया है

व्यापक का अर्थ है कि यह योजना छात्रों की वृद्धि और विकास के शैक्षिक और सह शैक्षिक दोनों पहलुओं में होती है होती है व्यापक हर क्षैत्रो में होता है
◼ लक्ष्य और उद्देश्य में अंतर ◼
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे उद्देश्य बनाए जाते हैं और इन्हें उद्देश्यों के आधार पर लक्ष्य को प्राप्त किया जाता है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लक्ष्य-
◾सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में हर पहलू का मूल्यांकन होता है
◾बच्चे के तनाव को कम करना
◾मूल्यांकन व्यापक और नियमित बनाता बनाता नियमित बनाता है
◾रचनात्मक शिक्षण को बढ़ावा मिलता है
◾निदान और उपचार में मदद मिलती है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य –
◾बाल केंद्रित शिक्षण रखना
◾मूल्यांकन को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का अंग बनाना
◾शिक्षार्थी का विकास अधिगम प्रक्रिया अधिगम गति अधिगम परिवेश सही समय एवं सही निर्णय लेना
◾बच्चों को आत्म मूल्यांकन का मौका देना
निदान एवं उपचार के माध्यम से बच्चों की उपलब्धि में सुधार करना
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं-
◾निरंतर मूल्यांकन के आवधिक पहलू का ध्यान रखा जाता है
◾व्यापक सर्वांगीण विकास
◾सह शैक्षिक मूल्यांकन जीवन कौशल दृष्टिकोण मान्यताएं मान्यताएं गतिविधि |
◾मूल्यांकन एक मानदंड के आधार पर होता है ◾इसमें कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है
सतत व्यापक मूल्यांकन की कार्य-
◾प्रभावी शिक्षण रणनीति व्यवस्थित तरीके से करना
◾कमजोरी का निदान व्यक्ति का का का शिक्षार्थी की जांच करना
◾ बच्चे खुद भी अपनी शक्ति कमजोरी को जान सकते हैं
◾दृष्टिकोण मानवता में परिवर्तन को पहचान सकते हैं
◾ भविष्य की सफलता का पूर्वानुमान लग जाता जाता है
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के दो पहलू पहलू हैं
शैक्षिक – रचनात्मक योगात्मक सहशैक्षिक – सामान्य ज्ञान ,आस-पास , पर्यावरण शारीरिक शिक्षा कला संगीत नैतिक शिक्षा नित्य कंप्यूटर आदि आते हैं
🔶शिक्षक द्वारा किए जाने वाले प्रयास-
◾बच्चे के तनाव को कम करता है
◾व्यवस्थित मूल्यांकन नियमितता मे किया जाता है
◾ निदान और उपचार करता है
◾रचनात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक को मौका देता है
◾बृहद कौशल बानी शिक्षार्थी शिक्षार्थी का निर्माण करना |


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