📖 मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण 📖

⚡ मंदबुद्धि बालकों का वर्गीकरण मुख्य रूप से चार प्रकार से किया गया है, जो कि निम्नलिखित हैं~

🌻 मंद गति से सीखने वाले~
इन बालकों की बुद्धि लब्धि 70-90 के बीच होती है।
यह बालक मंद गति से सीखते हैं, पर सीख जाते हैं। इस प्रकार के बालकों के लिए हम यह नहीं कह सकते हैं, कि यह बालक सीख नहीं सकते हैं। यह सीख सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे सीखते हैं, इन्हें सीखने में समय अधिक लगता है।

🌻 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना~
इन बालकों की बुद्धि लब्धि 50-70 होती है।
यह बालक मामूली रूप से मंदित होते हैं, इन बालको में कुछ हद तक सीखने की क्षमता नहीं होती है, यह सीख नहीं पाते हैं।

🌻 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना ~
इन बालकों की बुद्धि लब्धि 20-49 के बीच होती है।
इन बालकों में सीखने के गति धीमी होती है, लेकिन इनके लिए विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। विशिष्ट प्रशिक्षण मिलने पर यह बालक शीघ्र सीख जाते हैं।

🌻 पराश्रित पूर्ण मंदितमना ~
0-20 बुद्धि लब्धि के बालक इस श्रेणी में आते ।
इस श्रेणी के बालक पूर्णता दूसरो पर आश्रित होते हैं, वह स्वयं से कुछ भी नहीं कर पाता है, हमेशा दूसरों पर निर्भर रहते हैं।

🌺🌿🌺🌿🌺 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार🌺🌿🌺🌿🌺

🍂🍃पृथक्करण ~
मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को अलग रखा जाए और उन्हें विशेष संस्थानों में रखकर उनकी कमियों को दूर किया जाए। इन बालकों को सामान बालकों से अलग रखकर ही शिक्षा दी जानी चाहिए।

🍂🍃 जन्म दर पर नियंत्रण~
ऐसे माता-पिता जो गंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता-पिता हैं। उनकी नसबंदी (Sterilization) करा दी जाए, जिससे कि मंद बुद्धि लब्धि के बालक जन्म ना ले पाए। इस तरह से मंदबुद्धि बालकों की जन्म दर में कमी हो जाएगी। इसके लिए सभी को प्रयत्न करने होंगे, सभी माता-पिता एवं अभिभावकों को इसमें साथ देना होगा। तभी यह प्रयास सफल हो पाएगा।

🍂🍃 व्यक्तिगत अध्ययन~
हर बच्चे को विशिष्ट ध्यान की आवश्यकता होती है। विशिष्ट ध्यान देकर ही हम प्रत्येक वाले की कमियों को दूर कर सकते हैं। हर बच्चे पर ध्यान देकर हम उनकी कमियों का पता कर सकते हैं, एवं कमियों को जानने के बाद हम उसका निराकरण कर पाएंगे।
इसके लिए व्यक्तिगत ध्यान की आवश्यकता होती है। व्यक्तिगत ध्यान देने के लिए हमें कक्षा के आकार को छोटा रखना होगा, अधिक बच्चे होने पर हम व्यक्तिगत ध्यान नहीं दे पाते हैं, अतः कक्षा का आकार भी छोटा होना एक मुख्य पहलू है।

🍂🍃 माता-पिता को शिक्षित करना~
माता-पिता शिक्षित होते हैं, तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक के स्तर का ज्ञान होता है, तो वह बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करेंगे यह वह जानते हैं।
इसके लिए माता-पिता का शिक्षित होना अति आवश्यक है। अगर माता-पिता शिक्षक नहीं होंगे, तो वह यह नहीं जान पाएंगे, और न ही समझ पाएंगे, कि उनके बालक को किस प्रकार की समस्या है। अतः मंदबुद्धि बालको की समस्या के निराकरण के लिए माता-पिता का शिक्षित होना अति आवश्यक है।

🍂🍃 विशेष स्कूल व अस्पताल~
मंदबुद्धि बालक की सामान्य स्कूल एवं अस्पतालों में इनकी देखरेख आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण संभव नहीं है। इसके लिए आवश्यक है, कि हम मंदबुद्धि बालकों को विशेष स्कूल और अस्पताल की आवश्यकता होगी। विशेष स्कूल होने पर इन बालकों को विशेष ध्यान दिया जाएगा, एवं विशेषता अस्पताल अस्पताल होने पर इन बालको की कमियों को दूर किया जा सकता है।

🍂🍃 विशिष्ट शिक्षा विधि~
सामान्य बच्चे की शिक्षण विधियां इन बालकों के लिए ठीक नहीं होती है अतः इन बालकों को उपयुक्त विशिष्ट शिक्षण विधियों की आवश्यकता होती है सामान्य बालक को की शिक्षण विधियों से यह बालक सीख नहीं पाते हैं।

🍂🍃 विशेष पाठ्यक्रम~
मंदबुद्धि बालकों के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम की आवश्यकता होती है। इनके पाठ्यक्रम में हस्तकला से जुड़े पाठ पढ़ाए जाने चाहिए। यह बालक पुस्तकीय ज्ञान मे यह अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं। इनके लिए हस्तकला पाठ्यक्रम का आयोजन किया जाए। ताकि यह समाज पर बोझ न बने। अतः हम उपयुक्त सभी तथ्यो के आधार पर यह कह सकते हैं। कि उपचार ऐसा हो जो कि मंदबुद्धि बालक के लिए उपयुक्त हो। जिससे कि वह बाद में अपने पैरों पर खड़ा हो सके। एवं किसी अन्य व्यक्ति पर बोझ न बने। अपनी जिम्मेदारियों को स्वयं ही पूर्ण कर पाए, इसके लिए सभी माता-पिता एवं अन्य समाज के व्यक्तियों को साथ मिलकर प्रयास करने होंगे। 📗 समाप्त 📗

✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻

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[11/2, 5:08 PM] : 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

🌈मंदबुद्धि बालक का वर्गीकरण🌈

🎯मंद गति से सीखने वाले:- मंदबुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच होती है यह बालक मंद गति से सीखते हैं मंदबुद्धि बालक को सीखने में अधिक समय लगता है

🎯 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना :- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती है यह बालक मामूली रूप से मंदित होते है इन बालकों की सीखने की क्षमता बहुत कम होती है यह सीख नहीं पाते हैं

🎯 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना :-
इन बालकों की बुद्धि लब्धि 20 से 49 के मध्य होती है इन बालकों में सीखने की गति धीमी होती है लेकिन इनके लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है

🎯 परश्रित पूर्ण मंदितमना :- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 0 से 20 के माध्यम होती है इसमें बालक दूसरों पर आश्रित होते हैं वह आपने काम स्वयं नहीं कर पाते हैं या दूसरों पर आश्रित होते हैं

🌈 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार

⭐पृथक्करण :-
मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को अलग रखा जाए और उन्हें विशेष संस्था तथा विशेष सुविधा प्रदान की जाएं जिससे उनकी कमजोरियों का उपचार किया जा सके इन बालकों सामान्य बालकों से अलग रखा रखकर ही शिक्षा दी जाती है

⭐ जन्म दर पर नियंत्रण:-
ऐसे माता-पिता जो गंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े होते हैं उनकी नसबंदी करा दी जाए जिससे कि मंदबुद्धि बालक जन्म ना ले पाए इस तरह से मंदबुद्धि बालक की जन्म दर में कमी हो जाएगी

⭐ माता पिता को शिक्षित :-
माता-पिता होते हैं तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक के स्तर का ज्ञान होता है वह बच्चे के व्यवहार को समझ सकते हैं तथा उनका उचित विकास कर पाएंगे इसलिए माता-पिता का शिक्षित होना अति आवश्यक होता है मंदबुद्धि बालक की समस्याओं का निवारण के लिए माता-पिता को शिक्षित होना चाहिए

⭐ विशेष स्कूल व अस्पताल :-
मंदबुद्धि बालक की सामान्य स्कूल या अस्पताल में इनकी देखरेख आवश्यकता के अनुसार नहीं हो पाती है इसीलिए इन बालकों के लिए विशेष स्कूल और अस्पताल की व्यवस्था होनी चाहिए जिस स्कूल में इन बालकों को विशेष ध्यान दिया जाता है तथा विशेष अस्पताल में इन्हीं कमियों को दूर किया जा सकता है इन बच्चों के लिए सामान्य स्कूल में भी विशेष कक्षा की व्यवस्था की जाती है जिससे बच्चे का विकास हो

⭐ विशेष शिक्षा विधि:-
सामान्य बच्चे की शिक्षण विधियां इन बच्चों के लिए ठीक नहीं होती हैं इनके लिए विशेष प्रकार की आवश्यकता होती है यह बालक सामान्य विधियों से नहीं सीख पाते हैं

⭐ विशेष पाठ्यक्रम मंदबुद्धि बालक के लिए विशेष पाठ्यक्रम की आवश्यकता होती है इन बालकों के लिए हस्तकला की सुविधा की जाए हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाए जाने चाहिए यह बालक सुस्त किए ज्ञान से अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं हस्तकला पाठ्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे कि वह बच्चे समाज का बोझ नहीं बन पाए |

✍🏻✍🏻✍🏻Menka patel ✍🏻✍🏻✍🏻

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[11/2, 5:13 PM] : 🔆 मंदबुद्धि बालकों का वर्गीकरण

मंदबुद्धि बालकों को चार वर्गों में विभाजित किया गया है।

1 मंद गति से सीखने वाले
2 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना
3 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना
4 पराश्रित पूर्ण मंदितमना

▪️ (1) मंद गति से सीखने वाले
यह बालको के सीखने की गति मंद होती है अर्थात यह धीमी गति से सीखते हैं, लेकिन यह मंद गति के साथ धीरे धीरे सीख भी जाते हैं। इनकी बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच होती है।

▪️ (2) शिक्षा पाने योग्य मंदितमना
सीखने में मामूली रूप से मंद होते हैं इस श्रेणी के बालको की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती है।

▪️ (3) प्रशिक्षण योग्य मंदितमना
इस वर्ग में आने वाले बालको को प्रशिक्षण देना जरूरी या आवश्यक ही होता है।इनकी बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच होती है।

▪️ (4) पराश्रित पूर्ण मंदितमना
यह पूर्ण रूप से मंद होते है एवम् इन्हे अपने कार्य के लिए इन्हें दूसरों पर आश्रित या निर्भर रहना पड़ता है।इनकी बुद्धि लब्धि 0 से 20 के मध्य होती है।

🔆 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार:➖

मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार निम्न तरीकों से किया जा सकता है।

🔅 पृथक्करण (Segregation)➖:
मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को सामान्य बालकों से अलग कर दिया जाए और विशेष संस्थाओं में रखा जाए।
यदि बच्चे मंद बालक है तो हमें उनकी जरूरत या आवश्यकता के अनुरूप विशेष संस्थाओं में रखना चाहिए क्योंकि यह बच्चे मंद गति से सीखने वाले होते है जो सामान्य बच्चो की तरह नहीं सीख सकते है।

🔅 जन्म दर पर नियंत्रण➖:
यदि गंभीर व मानसिक रूप से पिछड़े माता – पिता है तो इनकी नसबंदी (Sterilization) करा दी जाए तो उनकी मंदबुद्धि संतान का जन्म ना हो पाएगा ।

🔅 माता-पिता को शिक्षित करना➖:
माता-पिता यदि शिक्षित होते हैं तो उनको अपनी मंद बुद्धि बालकों की बुद्धि का स्तर पता होता है। जिसके माध्यम से बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करना है यह निर्धारित होता है।

🔅 विशेष विद्यालय व अस्पताल➖:
सामान्य स्कूल में या अस्पताल में इनका देख रेख या आवश्यक प्रशिक्षण संभव नहीं।
क्योंकि यह बच्चे मंद गति से सीखने वाले है इसलिए इनकी इस विशेषता या आवश्यकता या जरूरत के हिसाब से विद्यालय व उनकी उचित देख रेख़ के लिए अस्पताल भी विशेष रूप से हो।

🔅 विशेष शिक्षण विधि➖:

सामान्य बच्चों की शिक्षण विधियां ठीक नहीं बल्कि उपयुक्त शिक्षण विधि बनाई जाएं
यह शिक्षण विधि इस तरह कि हो जिनके माध्यम से हम बच्चो को उनकी आवश्यकता या जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समझा पाए।अर्थात बच्चो के आसानी से या सरल रूप से समझने योग्य हो।

🔅 विशेष पाठ्यक्रम➖:
विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम के अन्तर्गत हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाएं क्योंकि पुस्तकज्ञान से मंद बुद्धि बालक अधिक उन्नति नहीं कर सकते।
यदि उन्हें हस्तकला का ज्ञान दिया जाएगा तो स्वयं से कुछ कर व्यवसायिक कार्यों के लिए तैयार होंगे और साथ ही साथ वह समाज पर बोझ ना बन सकेगे।

मंदबुद्धि बालको का उपचार ऐसा करना चाहिए जिससे यह बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सके व किसी पर निर्भर ना रहें।

✍🏻
Notes By-Vaishali Mishra


[11/2, 5:15 PM] 🍁☘️🍁 मंदबुद्धि बालक का वर्गीकरण🍁☘️🍁

🌳मंदबुद्धि बालकों से संबंधित है वर्गीकरण मुख्य रूप से चार प्रकार से किया गया है।
जो कि निम्नलिखित है :-

🌟मंद गति से सीखने वाले
🌟शिक्षा पाने योग्य मंदितपना
🌟प्रशिक्षण योग्य मंदितपना
🌟पराश्रित पूर्ण मंदितपना

🌟मंदगति से सीखने वाले :-

🌿 ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच होती है।
ऐसे बालक भले ही मंद गति से सीखते हैं लेकिन सिख जाते हैं। इनमें भी सीखने की क्षमता होती है, भले ऐसे बच्चे धीरे सीखते हो। लेकिन इन्हें हम ऐसा नहीं कह सकते कि यह बच्चे सीख नहीं सकते।

🌟शिक्षा पाने योग्य मंदितपना :-

🌿 ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती है।
ऐसे बालकों में सीखने की अक्षमता होती है। तथा यह सीख भी नहीं पाते हैं।

🌟प्रशिक्षण योग्य मंदितपना :-

🌿 ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच होती है
इनमें भी सीखने की मंद गति होती है लेकिन कुछ विशेष कार्यों/उद्देश्यों द्वारा सहायता या प्रशिक्षण देने से यथाशीघ्र सीख लेते हैं,।

🌟पराश्रित पूर्ण मंदितपना :-

🌿 ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 0 से 20 के बीच होता है।
इस श्रेणी के बालक पूर्ण रूप से किसी और पर निर्भर होते हैं उनमें खुद से कुछ करने की क्षमता नहीं होती है।

🌳☘️🌷🌲🦚 मानसिक पिछड़ेपन का रोकथाम व उपचार🦚🌲🌷☘️🌳

🌟पृथक्करण
🌟 जन्म दर नियंत्रण
🌟व्यक्तिगत अध्ययन
🌟माता-पिता को शिक्षित करना
🌟 विशेष स्कूल और अस्पताल
🌟 विशिष्ट शिक्षा
🌟 विधि विशेष पाठ्यक्रम।

🌟 पृथक्करण :-

🌿 इसके अनुसार मानसिक बच्चों को सामान्य रूप से अलग रखकर विशेष व्यवस्था द्वारा ही शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जिससे उनकी मंदता को दूर किया जा सके।

🌟 जन्म दर नियंत्रण :-

🌿 इसके अंतर्गत ऐसे माता-पिता जो मानसिक रूप से पिछड़े हो,उनका नसबंदी करा देना चाहिए ताकि मानसिक रूप से मंदित संतान को जन्म ना दे सके। इस कार्य में माता-पिता और समाज की अहम भूमिका होती है तभी मंदितपना कम करने के पहल में सफल हो सकते हैं।

🌟 व्यक्तिगत अध्ययन :-

🌿 हर एक बच्चे का व्यक्तिगत अध्ययन किया जाना चाहिए जिससे उनके हर एक कमी,गुण – दोषों और उपलब्धि के बारे में जानकारी हासिल कर उनके योग्य उपचार प्रदान किया जा सके तथा उन्हें जिस भी विशिष्ट सहयोग या जानकारी की आवश्यकता हो उसकी पूर्ति की जा सके इससे उनमें प्रेरणा का विकास और भी अपने कार्यों में दिलचस्पी ले ने लगे।

तथा व्यक्तिगत ध्यान देने का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि कक्षा यह समुदाय का आकार छोटा होना चाहिए तभी इस श्रेणी के सभी बालक ऊपर हम व्यक्तिगत ध्यान दे सकेंगे,अध्ययन कर सकेंगे। तथा उनके समस्याओं का समाधान कर सकेंगे।
इसलिए उन्हें व्यक्तिगत ध्यान देना तथा उनका व्यक्तिगत अध्ययन करना भी आवश्यक हो जाता है।

🌟 विशेष स्कूल व अस्पताल :-

🌿 मंदबुद्धि बालकों के लिए उनका विशेष रूप से विशेष स्कूल व अस्पताल होना चाहिए। ताकि उनके समस्याओं को जानकर सफलतापूर्वक समाधान किया जा सके। उन्हें विशेष स्कूलों व अस्पतालों की जरूरत इसलिए है कि उनके समस्याओं का समाधान सामान्य बच्चों के हाथ रखकर संभव नहीं हो पाएगी।

🌟 विशिष्ट शिक्षा विधि :-

🌿 मंदबुद्धि बालकों के लिए सामान्य शिक्षण विधियां उपयुक्त नहीं होती। इसमें वे सीख नहीं पाते हैं। ऐसे बालकों की विशिष्ट शिक्षण विधि की आवश्यकता होती है जिसमें उनकी भावनाओं को समझा जाए तथा उसकी पूर्ति की जाए।

🌟विशेष पाठ्यक्रम :-

🌿 मंदबुद्धि बालक को के लिए विशेष पाठ्यक्रम की आवश्यकता होती है।क्योंकि ऐसे बच्चे सामान्य पाठ्यक्रम के साथ समायोजन नहीं कर पाते हैं। इसके कारण सामान्य पाठ्यक्रम उनके लिए बोझ बन कर न रह जाए इटली मंदबुद्धि बालक को विशेष पाठ्यक्रम की आवश्यकता होती है। जिसमें उनकी गुण – दोष क्षमता – अक्षमता,भाव इत्यादि को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जाए।

अंततः उपर्युक्त तथ्यों से यह निष्कर्ष निकलता है।कि हमें मंदबुद्धि बालकों को सामान्य बालकों से अलग विशिष्ट शिक्षण पद्धति का निष्पादन करना चाहिए। जिससे वे पढ़ने या कार्य करने में रुचि ले और सफल हो सकें।तथा शिक्षण या कोई भी कार्य उनके लिए बोझ कर ना रह जाए।इसलिए उनकी विशिष्टता को देखते हुए उनके लिए विशिष्ट शिक्षण विधियों और कार्यों का निष्पादन किया जाना चाहिए। जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सफलतापूर्वक कर सके।

🌷🌷 इस कार्य में उनके माता-पिता,अभिभावक,विद्यालय,परिवार,आस-पड़ोस व अन्य और सभी की सहयोग की आवश्यकता होती है।🌷🌷 🌸🌸🌸🌸🌸समाप्त 🌸🌸🌸🌸🌸

🌟Notes by :- Neha Kumari 😊

🌿🌿धन्यवाद् 👏👏

[11/2, 5:45 PM] : ➡️Mand budhi balak ka vargikaran-
🔸️Mand budhi balak ko 4 pirkar se vargikrt kia gaya hai.
1-Mand gati se sikhne wale balak.
inki I.q (70-90) hoti hai.isi karan ye dhire dhire shikte hai.in balko ko sikhne me thoda samye lagta hai.
2-sikcha pane yogya mandit mana.
In balko ki I.q(50-70) hoti hai.ye balak mamoli roop se mandit hote hai.
3-Pirsichan yogya mandit mana.
In balko ki I.q(20-49)hoti hai.in balko ko pirsichan ki jarrort hoti hai.jisse inhe sikhne yogya banaya ja sakta hai.
4-purn mandit mana.
Is pirkar ke balak ki I.q (20 se kum hoti hai).
Yebalak paraasrit hote hai.ye sikhne ke lie dusro pr nirbhar rahte hai.
🔸️ mansik pichhdepan Ki roktham or upchar.
✔ prithakkaran- mansik Roop se Pichde bacche ko Samanya Balak Se Alag kar diya Jaaye aur Vishesh Sansthan Mein Rakha Jaaye.
✔ Janm Dar per niyantran- Gambhir va mansik Roop se Pichde Mata Pita ki nasbandi kara dijiye jisse mandbuddhi bacche ka Janm na ho.isse nai generation me mand budhi balako ki sankhya kum ho.
✔Vyaktigat Dhyan- Saychik Roop Se Har Ek bacche per personal Dhyan Dena chahie. Class ka Aakar Chota rakhkar inper Dhyan Diya Ja sakta hai.pirtyek balak pr vyaktik taur pr dhyan dia ja sakta hai.
✔Mata Pita Ka shikshit Hona- Balak adhiktar Samay Apne maa baap ke sath rahte hai.islie agar maa baap sikchit honge to unhe aise balko ka bhaudhik istar pata hoga.or unhe bacho se kaisa viyvhar krna hai unhe is baat ka dhyan rahega.
✔Vishesh school aur aspataal- Samanya school ya aspataal Mein Inka dekhrekh ya avashyak Prashikshan Sambhav Nahin isliye inke liye vishesh jarurto ko pura krne ke lie vises school or aspatal hone chahiye.
✔ Vishesh Shikshan Vidhi- Samanye Shikshan Vidya ine bacchon ke liye upyukt nahin hai isliye inke liye upyukt Shikshan vidhiyan tayar ki Jaaye jisse inhe sikchan me asani ho.
✔ Vishesh pathykram- hast kala se Jude path padhayn.

  • Ye Balak Pustak Gyan Mein Adhik Unnati nahin kar sakte Aise balkon ko Hasth Kala se Jude Karya karvayen Taki yah samaj me Bojhe na Ban sake.
  • in balkon Ka Aisa upchar Karen Taki Apne Pairon per khade ho sake.
    🖊 Krishna gangwar…

  • [11/2, 6:36 PM] : 🌞मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण :-

🌹मंद गति से सीखना :- ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 70-90 के बीच होती है ये किसी भी कार्य को बहुत ही धीरे – धीरे करते हैं तथा किसी की बात को देरी से समझते हैं लेकिन हम यह नहीं कह सकते हैं कि यह नहीं कर सकते हैं ये उस कार्य को धीरे – धीरे सीख जाते हैं |

🌹शिक्षा पाने योग्य मदिंतमना :-
ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 50-70 के मध्य होती है ये मूल रूप से मदिंत होते हैं इनमें सीखने की क्षमता बहुत कम होती है यह सीख नहीं पाते हैं |

🌹प्रशिक्षण योग्य मदिंतमना :- ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 20-49 के मध्य होती है इनकी सीखने की गति धीमी होती है लेकिन इनको प्रशिक्षण द्वारा सिखाया जा सकता है जो कि इनके लिए आवश्यक है|

🌹पराश्रित पूर्ण मदिंतमना :- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 0-20 के मध्य होती है ये हमेशा दूसरे पर आश्रित होते हैं अपने काम दूसरो से करवाते हैं |

🌞मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार :-

🌷पृथक्करण :- इसमें मानसिक रूप से पिछड़े बालक को सामान्य बालकों से अलग कर दिया जाता है और विशेष संस्थाओं या कक्षाओं में रखा जाये जिससे कि इनकी कमजोरी का पता लगाकर इनका उपचार किया जा सके ताकि इन्हें इनके अनुसार शिक्षा दी जा सके|

🌷जन्मदर पर नियंत्रण :- ऐसे माता – पिता जो कि गंभीर रूप से मानसिक रूप पिछड़े हो उनकी नसबंदी करा दी जाए जिससे कि मंद बुद्धि बालक का जन्म न हो और जन्मदर पर नियंत्रण हो सके |

🌷व्यक्तिगत ध्यान :- माता – पिता को चाहिए कि मंद बुद्धि वाले बालक पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देना चाहिए ताकि उसकी कमियों को जाना जा सके और उसका निवारण किया जा सके तथा कक्षा का आकार छोटा व बच्चे कम होने चाहिए |

🌷माता – पिता को शिक्षित करना :- अगर माता – पिता शिक्षित होगे तो वे बालक की बुद्धि के स्तर का पता लगा पायेंगे और बालक के साथ कैसा व्यवहार करना है कर पायेंगे और उसमें सुधार कर सकेंगे |

🌷विशेष स्कूल व अस्पताल :- ऐसे बालक की देखरेख सामान्य स्कूल व अस्पताल में नहीं हो सकती है इनके लिए विशेष स्कूल व अस्पताल कि व्यवस्था कि जानी चाहिए जिससे कि इनके उपर विशेष रूप से ध्यान दिया जा सके|

🌷विशेष शिक्षण विधि :- सामान्य बच्चे कि शिक्षण विधियाँ इनके लिए ठीक नहीं है इनके लिए उपर्युक्त शिक्षण विधि बनाने जाने चाहिए ताकि जिसको जिस प्रकार कि शिक्षा की आवश्यकता हो , उसे उस प्रकार कि शिक्षा दी जा सके जिससे कि वह आसानी से सीख सके |

🌷विशेष पाठ्यक्रम :- ऐसे बालकों के लिए विशेष पाठ्यक्रम होने चाहिए जिससे कि कि वे खुद का व्यवसाये शुरू कर सके और आत्मनिर्भर बन सके और समाज पर बोझ न बने |
जैसे – हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाए , पुस्तक ज्ञान में ये अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं

🌹🌹Thank you 🌹🌹

👩‍🏫Meenu Chaudhary👩‍🏫

◼️ मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण ( classification of mentally retarded children’s)–

मंद बुद्धि बालक को चार प्रकार से वर्गीकृत किया गया है , जो निम्न है–

▪️ १. मंद गति से सीखने वाले बालक– मंद गति से सीखने वाले बालक किसी भी कार्य को मंद गति से या धीमी गति से सीखते हैं परन्तु सीखते जरूर है । इसमें पूर्ण रूप से यह नहीं कहा जा सकता है ,कि बालक सीख नहीं सकता, बालक मंद गति से ही सीखेगा या उसे सीखने में अधिक से अधिक समय भी लग सकता है लेकिन सीख जाता है । इसमें बालक की बुद्धि–लब्धि 70–90 के बीच की होती है।

▪️ २. शिक्षा पाने योग्य मन्दितमना– इसमें बालक शिक्षा पाने में मामूली रूप से मंदित होते हैं ये बालक कुछ चीजें नहीं सीख सकते , इसलिए इनके सीखने की क्षमता मन्दित और उस योग्य नहीं होती है तथा इनकी बुद्धि–लब्धि 50–70 के बीच होती है ।

▪️ ३. प्रशिक्षण योग्य मन्दितमना– इसमें बच्चा अति मंद गति से सीखता है , इसमें बच्चे को प्रशिक्षण के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है इसलिए बच्चे को प्रशिक्षण देना बहुत आवश्यक हो जाता है। इनकी बुद्ध- लब्धि 20 से 49 के बीच होती है।

▪️ ४. पराश्रित पूर्ण मन्दितमना– इसमें बालक पूरी तरह से मंद और ये पूरी तरह से दूसरों पर आश्रित/निर्भर होते हैं , इनकी बुद्धि–लब्धि 0 से 20 होती है , जिसके कारण इनका कुछ नहीं किया जा सकता है।

◼️ मानसिक पिछड़ेपन का रोकथाम व उपचार–

मानसिक रूप से पिछड़ेपन का रोकथाम व उपचार निम्न तरीकों से किया जा सकता है–

▪️ १. पृथक्करण ( Segregation)– यहां पृथक्करण से यह तात्पर्य है कि मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की पहचान कर ,उनको सामान्य बालको से अलग कर दिया जाए और विशेष संस्थाओं में रखा जाए। जिससे मानसिक रूप से मंद बालक को उनके आवश्यकता अनुसार शिक्षा दी जाए और वह सरलता से सीख सके ।

▪️ २. जन्म दर पर नियंत्रण– जो गंभीर व मानसिक रूप से पिछड़े माता-पिता है उनकी नसबंदी (sterilization) करा दी जाए, जिससे उनके मंदबुद्धि बच्चे का जन्म न हो पाए , क्योंकि मानसिक रूप से मंदबुद्धि बच्चे के मंद होने का सबसे ज्यादा कारण अनुवांशिकता ही है, जो बच्चे के माता–पिता या उनके पूर्वजों से प्राप्त होती है ।

▪️ ३. व्यक्तिगत ध्यान– कक्षा में अध्यापक द्वारा प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जाए और कक्षा का आकार छोटा तथा बच्चों की संख्या कम रखी जाए , जिससे प्रत्येक बच्चे की छोट– छोटी गतिविधियों पर ध्यान दिया जा सके और बच्चे की कमियों का पता लगाकर उचित तरीके से उपचार किया जा सके।

▪️ ५. माता-पिता को शिक्षित करना– अगर माता– पिता शिक्षित होंगे तो उनको अपने मंद बुद्धि बालक के स्तर का पता होगा , जिससे वह अपने बच्चे के साथ कैसा व्यवहार करेंगे यह निर्धारित कर सकते हैं।

▪️ ५. विशेष स्कूल व अस्पताल– इनकी विशेष आवश्यकताओं और जरूरतों के हिसाब से इनको पढ़ने–लिखने के लिए तथा इनके स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखने के लिए विशेष विद्यालय व अस्पताल की व्यवस्था की जाए क्युकी सामान्य स्कूल या अस्पताल में इनकी देख– रेख या प्रशिक्षण संभव नहीं है।

▪️ ६. विशेष शिक्षण विधि– इनके लिए सामान्य बच्चो की शिक्षण विधियों ठीक नहीं इसलिए उपर्युक्त शिक्षण विधि बनाई जाए। जिससे बच्चे को आसानी से शिक्षण प्रक्रिया पूरी की जाय।

▪️ ७.विशेष पाठ्यक्रम – मंद बुद्धि बालक पुस्तक के ज्ञान में अधिक उन्नति नहीं कर सकते है इसलिए इनको ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना चाहिए जिसके माध्यम से कुछ व्यवसायिक कार्य या हस्त कला के लिए तैयार करना चाहिए जिससे ये समाज पर बोझ ना बन सके । तथा मंद बुद्धि बालक का उपचार ऐसे करे की ये बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सके और आत्मनिर्भर बन सके।

✍🏻 Notes by–pooja

💫 मंदबुद्धि बालकों का वर्गीकरण ➖

मंदबुद्धि बालकों का वर्गीकरण चार प्रकार से किया गया है जो कि निम्न प्रकार से है ➖

1) मंद गति से सीखने वाले
2) शिक्षा पाने योग्य मंदितमना
3) प्रशिक्षण योग्य मंदितमना
4) पराश्रित, पूर्ण मंदितमना

🔹 (1) मंद गति से सीखने वाले

ऐसे बालकों की सीखने की गति बहुत मंद होती है सीखने की क्रिया बहुत धीमी होती है अर्थात धीरे धीरे सीखते हैं लेकिन सीख जाते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच होती है |

🔹 2 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना

ऐसऐसे बालक मामूली रूप से मंद होते हैं अर्थात इनकी सीखने की गति मामूली रूप से मंद होती है या धीमी होती है ऐसे बालक धीमी गति से सिखाने पर भी नहीं सीखते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती है |

🔹 (3) प्रशिक्षण योग्य मंदितमना

इस श्रेणी में आने वाले बालकों को प्रशिक्षण देना अनिवार्य या आवश्यक होता है इनके लिए बिना प्रशिक्षण के सीखना मुश्किल होता है इनकी बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच होती है |

🔹 (4) पराश्रित,पूर्ण मंदितमना

ऐसे बालक पूर्ण रूप से दूसरों पर आश्रित होते हैं ये पूर्ण रूप से मंद होते हैं इन्हें दूसरों पर आश्रित होना पड़ता है क्योंकि इनकी बुद्धि लब्धि 0 से 20 के बीच होती है |

💫 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार

मानसिक रूप से पिछड़े बालकों के मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम वा उपचार निम्न प्रकार से किया जा सकता है ➖

1) पृथक्करण
2) जन्म दर पर नियंत्रण
3) व्यक्तिगत ध्यान
4) माता पिता को शिक्षित करना
5) विशेष स्कूल व विद्यालय
6) विशेष शिक्षण विधियाँ
7) विशेष पाठ्यक्रम

🔸 पृथक्करण(𝙎𝙚𝙜𝙧𝙚𝙜𝙖𝙩𝙞𝙤𝙣) ➖

मानसिक रूप से पिछड़े बालक को सामान्य बालक से अलग कर दिया जाए और उसे विशेष संस्थाओं में रखा जाए |
यदि बालक मंद है तो उसे उसकी जरूरत के अनुसार विशेष संस्थाओं में रखा जाए और उसके अनुसार शिक्षा दी जाए क्योंकि वह सामान्य बच्चे की तरह नहीं सीख सकता है |

🔸 (2) जन्म दर पर नियंत्रण

यदि गंभीर व मानसिक रूप से पिछड़े माता-पिता है तो उनकी नसबंदी करा दी जाए जिससे उनकी पीढ़ी मंदबुद्धि ना हो, या मंदबुद्धि बच्चे का जन्म ना हो |

🔸 (3) व्यक्तिगत ध्यान

ऐसे प्रत्येक बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देना अति आवश्यक है जो मंदबुद्धि हो एवं उनकी कक्षा का आकार छोटा होना चाहिए जिससे उन पर ध्यान दिया जा सके और उनकी हर गतिविधि पर ध्यान दिया जा सके तथा उचित शिक्षा दी जा सके |

🔸 (4) माता-पिता को शिक्षित करना

यदि माता-पिता शिक्षित होते हैं तो वह अपने मंदबुद्धि बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देकर उनके स्तर का पता कर सकते हैं जिसके कारण भी मानसिक मंदता को दूर किया जा सकता है तथा इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि उसका साथ कैसा व्यवहार करना है |

🔸 (5) विशेष स्कूल व अस्पताल

ऐसे बालकों को पढ़ने के लिए व स्वास्थ्य के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए जो कि सामान्य स्कूल या अस्पताल मे संभव नहीं है इसलिए उनके लिए विशेष स्कूल व अस्पताल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए जहां पर उचित देखरेख के साथ आवश्यक प्रशिक्षण संभव हो सके |

🔸 (6) विशेष शिक्षण विधियां

ऐसे बालकों लिए सामान्य बालकों की शिक्षण विधियां उपयुक्त नहीं है इसलिए इनके लिए उपयुक्त शिक्षण विधियां बनाई जाएं जिनके माध्यम से प्रत्येक बच्चे को उसकी आवश्यकता के अनुसार समझाया जा सके |
अर्थात ऐसी शिक्षण विधि जो उनको आसानी से या सरल रूप से समझाने योग्य हो सके |

🔸 (7) विशेष पाठ्यक्रम

ऐसे बच्चों को विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से हस्त कला से जुड़े पाठ पढा़ये जाएं, क्योंकि पुस्तकीय ज्ञान में यह अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं इसलिए उन्हें ऐसी शिक्षा दी जाए जो उनके लिए आवश्यक हो ताकि वे समाज पर बोझ ना बन सकें और व्यवसायिक कार्यो के लिए तैयार हो सकें |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙨𝙖𝙫𝙡𝙚

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🌻मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण 🌻
🌱मंदगति से सीखने वाला🌱
मंद गति से सीखने वाला बालक बहुत घीमी से सीखते हैं उन्हें समय लगता है मगर सीख जाते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 70 -90 होता है
🌱शिक्षा पाने योग्य मंदितमना
ःमामूली रूप से मंद होते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती हैं
🌱प्रशिक्षण योग्य मंदितमना
ः मंद बुद्धि बालक को प्रशिक्षण देना जरूरी भी है और आवशयक भी है इनकी बुद्धि लब्धि 20 से 49 होती हैं
🌱पराश्रित, पूर्ण मंदितमना 🌱
ःयह पूरी तरीके से दूसरो पे निर्भर रहते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 0से 20 रहती हैं

🌻मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार
🌱पृथक्करण (segregation)
मानसिक रूप से पिछड़े बच्चे को सामान्य बालक से अलग कर दिया जाए और विशेष संस्थानों में रखा जाए यदि बालक मंद बुद्धि के है तो उन्हें अलग रखा जाए कयोंकि वो सामान्य बालको की तरह नहीं सीखते हैं
🌱जन्म पर नियंत्रण 🌱
ःगंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता पिता है तो इनकी नसबंदी करा दी जाए जिससे मंद बुद्धि बच्चे का जन्म ना हो
🌱वयक्तिगत घ्यान 🌱
ःहर एक बच्चे पर वयक्तिगत घ्यान देना आवशयक है ।
ःकक्षा का आकार छोटा रखेगे तभी सभी बच्चो पर घ्यान दे पायेगे। प्रत्येक बच्चे का छोटी छोटी बातो का घ्यान रखेगे और समझेगे उन्हें क्या दिक्कत है कैसे समझते है सभी पहलुओं पर घ्यान देगे ।
🌱 माता पिता को शिक्षित करना 🌱
ःमाता पिता शिक्षित होते हैं तो उन्मे मंद बुद्धि बालक के बुद्धि का स्तर पता होता है तो वह बच्चो से कैसे व्यवहार यह निर्धारित होता है
ःमाता पिता बच्चो को समझते हैं कयोंकि सबसे ज्यादा माता पिता के पास ही बच्चा रहता है।
🌱विशेष स्कूल व अस्पताल 🌱
ः सामान्य स्कूल या अस्पताल में इनका देख रेख या आवशयक प्रशिक्षण संभव नहीं कयोंकि ये बच्चे बहुत मंद गति से सीखते हैं इसलिए इन्हें विशेष स्कूल व अस्पताल में भेजेगे।
🌱विशेष शिक्षण विधि 🌱
ः सामान्य बच्चे की शिक्षण विधियां ठीक नहीं बल्कि उपयुक्त शिक्षण विघि बनाये जाए जिसमे बच्चे रुचि ले और आसानी से समझ सके ऐसा शिक्षण विघि अपनायेगे।
🌱विशेष पाठ्यक्रम 🌱
ःहस्त कला से जुड़े पाठ पढाए कयोंकि पुस्तक ज्ञान में अघिक उन्नति नही कर सकते। हस्त कला का ज्ञान मिलने से बच्चे किसी पे निर्भर नही रहेगे और वो आगे वय्वसायिक कार्य के लिए तैयार रहेगे और किसी पे बोझ नही बनेगे।
🌱उपचार 🌱
मंद बुद्धि बालक का उपचार ऐसा करना चाहिए जिससे वो अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

Notes By :- Neha Roy

▪मंदबुद्धि बालक का वर्गीकण▪ मंदबुद्धि बालक को निम्नलिखित चार भागों में बांटा गया है । (क) मंदबुद्धि से सीखने वाला :- इसमें बालक मंद गति से सीखता है । ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच में होती है । (ख) शिक्षा पाने योग्य मंदित मना :- इसमें बालक मामूली रुप में मंदित होते हैं । इनकी बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच में होती है। (स) प्रशिक्षण योग्य मंदित मना :- ऐसे बालकों को प्रशिक्षण देना आवश्यक हैं ।इनकी बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच में होती है । (द) पराश्रित पूर्ण मंदितमना :- इनकी बुद्धि लब्धि 0 से 20 के बीच में होती है ये पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होते हैं। ▪मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार :- (1) पृथक्करण :- मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों को सामान्य बालक से अलग कर दिया जाए। और विशेष संस्था में रखा जाए । (2) जन्म दर पर नियंत्रण :- इसमें गंभीर रूप से या मानसिक रूप से पिछड़े माता-पिता की नसबंदी करा दी जाए । जिससे मंदबुद्धि बच्चे का जन्म ना हो। (3) व्यक्तिगत ध्यान :- इसमें हर एक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान देने की जरूरत है। कक्षा का आकार छोटा रखना है । (4 ) माता-पिता को शिक्षित करना :- माता-पिता शिक्षित होते हैं ।तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक की बुद्धि का स्तर पता होता है तो वह बच्चों से कैसे व्यवहार करेंगे यह निर्धारित होता है । ( 5 ) विशेष स्कूल व अस्पताल :- ऐसे बालक की देखरेख सामान्य स्कूल व अस्पताल में नहीं हो सकती है। अतः इनके लिए विशेष स्कूल व अस्पताल की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे कि इनके ऊपर विशेष रुप से ध्यान दिया जा सके। (6) विशेष शिक्षण विधि :- सामान्य बच्चे की शिक्षण विधियां ठीक नहीं है अतः इन बच्चों के लिए उपयुक्त शिक्षण विधि की व्यवस्था की जाए। (7) विशेष पाठ्यक्रम :- हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाएं । पुस्तक ज्ञान में अधिक उन्नति नहीं कर सकते ताकि वह समाज पर बोझ ना बने इसलिए ऐसा उपचार करें कि मंदबुद्धि बच्चे अपने पैरों पर खड़ा हो सके । धन्यवाद ✍️ 📘 notes by pragya shukla …….

🌤️मंदबुद्धि बालकों का वर्गीकरण➖

🌻मंदबुद्धि बालको का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है:-

A} मंद गति से सीखने वाला :➖
मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70-90 के बीच होती है ऐसे बालको को किसी भी चीज को सीखने या समझने में अधिक समय लगता है अर्थात् यह मंद गति से सीखते हैं इनके लिए हम ऐसा नहीं कह सकते कि यह कोई भी चीज सीख ही नहीं सकता ! सीखता है लेकिन बहुत ही धीमी गति से ।
अर्थात मंदबुद्धि बालकों की सीखने और समझने की क्षमता बहुत ही धीमी गति से होता है लेकिन वह सीख और समझ जाते हैं।

B} शिक्षा पाने योग्य मंदितमना :➖
ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती है ऐसे बालक किसी भी चीज को सीखने में बहुत अधिक समय लेते हैं वह मामूली रूप से नहीं सीख पाते ।

C } प्रशिक्षण योग्य मंदितमना :➖
इस वर्ग के बच्चों की बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच होती है ऐसे बच्चे बिना प्रशिक्षण के कुछ सीख ही नहीं सकते हैं इसलिए एक शिक्षक होने के नाते ऐसे बच्चों की कमियों को जानना तथा उन कमियों के द्वारा उन्हें उचित प्रशिक्षण देना अनिवार्य है ऐसे बच्चे बिना प्रशिक्षण के सीख ही नही पाते हैं।

D} पाश्रित ,पूर्ण मंदितमना :➖
ऐसे बालक पूर्ण रूप से दूसरों पर आश्रित या निर्भर होते हैं बिना दूसरों की मदद लिए वह कुछ भी नहीं कर सकते ऐसे बच्चों की बुद्धि लब्धि 0 से 20 होती है।
अर्थात ऐसे बच्चे खुद से ना लिख पाते हैं पढ़ पाते हैं उनके रोजमर्रा की जिंदगी में हो रहे कार्यों को भी वह खुद से नहीं कर पाते हमेशा किसी ना किसी की मदद का सहारा लेने का प्रयास करते हैं।

🌼मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार :-

1) पृथक्करण (Segeration) :➖
मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को हम सामान्य बालकों के साथ रख नहीं सकते या उनके साथ उनकी जैसी शिक्षा नहीं दे सकते। इसलिए ऐसे बालकों को सामान्य बालकों से अलग कर विशेष संस्थान में रखा जाता है क्योंकि यह बच्चा मानसिक रूप से सामान्य बच्चों से अलग होता है।

2) जन्म दर पर नियंत्रण :➖
मंदबुद्धि बालकों का जन्म का कारण अनुवांशिकता (Heredity) ही है। ऐसे माता-पिता जो मानसिक रूप से गंभीर तथा पिछड़े हैं इनके संतान भी अपने माता पिता जैसे ही होंगे जिस कारणवश उस बच्चों को आगे चलकर बहुत ही ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसलिए हम ऐसे बच्चों की रोकथाम जन्म से पहले ही कर सकते हैं इसके लिए हमें उसके माता पिता की नसबंदी (Sterilization) करा देनी चाहिए जिससे भविष्य में बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े ।

3) व्यक्तिगत ध्यान :➖
ऐसे बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देना एक शिक्षक होने के नाते उनका परम कर्तव्य है । शिक्षक को ऐसे बच्चों की हर छोटी-मोटी गतिविधियों पर ध्यान रखना पड़ेगा तथा वह जो पढ़ा रहे हैं ऐसे बच्चे उन्हें आसानी से समझ सके इसके लिए शिक्षक को अपनी कक्षा कक्ष का आकार छोटा रखना पड़ेगा जिससे वह बच्चों की कमियों का पता आसानी से लगाकर की समस्या को दूर कर सकते हैं।

4) माता-पिता को शिक्षित करना :➖
बालक मंदबुद्धि हो या सामान्य माता-पिता का शिक्षित होना बहुत ही अनिवार्य है क्योंकि शिक्षक के बाद माता-पिता का ही वह स्थान है जिसके साथ बच्चे आसानी से घुल मिल जाते हैं और अपनी परेशानियों को रखने का साहस करते हैं।
लेकिन अगर मंदबुद्धि बच्चों के माता-पिता शिक्षित होते हैं तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक की बुद्धि का स्तर का पता होता है और वह अपने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करेंगे यह भी निर्धारित होता है। ऐसे बालकों को कैसा परीक्षण मिल रहा है उनके साथ कैसा व्यवहार हो रहा है शिक्षित होने के नाते उनके माता-पिता को बच्चों के साथ हो रहे सारी गतिविधियों के बारे में पता होता है इसलिए माता-पिता का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।

5) विशेष स्कूल और अस्पताल :➖
ऐसे बालकों का प्रशिक्षण या उनका देखरेख समान स्कूल या अस्पताल में होना संभव नहीं होता है क्योंकि सामान्य बच्चों के साथ मंदबुद्धि बच्चों को शिक्षित करना संभव नहीं और सामान्य अस्पताल में ऐसे बच्चों का इलाज संभव नहीं होता । ऐसे बच्चों के लिए विशेष प्रकार की विद्यालय या अस्पताल होती है।

6) विशेष शिक्षण विधि :➖
मंदबुद्धि बालकों की शिक्षण विधियां सामान्य बालकों के शिक्षण विधियों से काफी अलग होती है अर्थात हम मंदबुद्धि बच्चों का उसी के अनुरूप शिक्षा या शिक्षण विधि को अपना सकते हैं जैसे – खेलकूद द्वारा ,ड्राइंग प्रतियोगिता अर्थात् किसी भी विधि के द्वारा। ऐसे बच्चे रुचि लेकर सीख या समझ सके और आगे बढ़ सके। इसलिए हमें उन्हीं के अनुरूप शिक्षा देना चाहिए।

7) विशेष पाठ्यक्रम:➖
ऐसे बालक केवल पुस्तक के ज्ञान से उन्नति या आगे नहीं बढ़ सकते हैं बल्कि उन्हें हस्तकला से जुड़े हुए भी पाठ पढ़ाने चाहिए ताकि वह उस माध्यम से खुद के लिए कोई व्यवसाय शुरू कर सकें और खुद को उस व्यवसाय के अनुरूप तैयार कर आगे बढ़ सके ताकि वह समाज पर बोझ ना बन सके।
अर्थात , हम कह सकते हैं कि उपचार ऐसा करें कि मंदबुद्धि बच्चे अपने पैरों पर खड़ा हो सके ।

🌸Notes by➖Mahima kumari🌸

💫मंदबुद्धि बालक का वर्गीकरण💫

🔅 मंदबुद्धि बालक मंद गति से सीखने वाले होते हैं। इनकी बुद्धि लब्धि 70 से 90 के बीच होती हैं।

🔅 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना:-ऐसी बालक की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के बीच होती हैं यह बालक किसी विषय को सीखने में अधिक समय देते हैं लेकिन उस विषय को सीख लेते हैं।

🔅 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना:- ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 20 से 49 के बीच होती हैं ऐसे लोगों को विशेष प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए जिससे वह प्रशिक्षण प्राप्त करके आगे बढ़ सके एवं सामान्य बालको की श्रेणी में खड़े हो सकें।

🔅 पराश्रित पूर्ण मंदितमना:-ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि 0 से 20 होती है ऐसे बालक पूर्ण रूप से दूसरों पर आश्रित होते हैं।ऐसी बालक ना ही खुद कुछ लिख पाते हैं और ना ही खुद कुछ पढ़ पाते हैं अतः वह हर कार्य के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर आश्रित होते हैं।

🔆 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार🔆

🔅 पृथक्करण:-मानसिक रूप से पिछड़े बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा बहुत अधिक अलग होते हैं इसलिए हमें कभी-कभी उन्हें सामान्य बालको से पृथक भी करना पड़ता है मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को सामान्य बालक के साथ पढ़ाना संभव नहीं है इसलिए हमें पृथक्करण जैसे कदम उठाने पड़ते हैं।

🔅 जन्म दर पर नियंत्रण:-मंदबुद्धि बालक का जन्म का कारण अनुवांशिकता होती है इसलिए अब ऐसे माता पिता जो मानसिक रूप से पिछड़े होते हैं इसलिए उनके बच्चे भी उनके जैसे ही पैदा होते हैं जिससे आगे चलकर बच्चों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है इसीलिए ऐसे बच्चों की रोकथाम के लिए उसके माता-पिता की नसबंदी करा दी जाती है जिससे भविष्य में बच्चों के साथ साथ माता-पिता को भी किसी प्रकार की परेशानी ना हो।

🔅 व्यक्तिगत ध्यान:- यदि हम शिक्षक हैं और हमारे सामने मंदबुद्धि बालकों की समस्या आती है तो हमें शिक्षक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि कक्षा में प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जाए जिससे हमें बालक की खूबियों और कमियों का पता चलेगा और हम उनकी खूबियों और कमियों को अच्छे से उभार सकेंगे यदि कमियां है तो उन्हें हल करने की कोशिश करेंगे और यदि खूबियां हैं तो उन्हें और निखारने की कोशिश करेंगे।
हम व्यक्तिगत ध्यान तभी दे पाएंगे जब हमारी कक्षा का आकार छोटा होगा

🔅 माता-पिता को शिक्षित करना:-माता-पिता शिक्षित होते हैं तो इन्हें बालक के मंदबुद्धि होने का स्तर पता होता है जिससे वह बालक के साथ कैसा व्यवहार करना है यह निर्धारित। कर सकते हैं इसलिए हमें मंदबुद्धि बालक उनके माता-पिता को शिक्षित करना आवश्यक है।

🔅 विशेष स्कूल व अस्पताल की स्थापना:-मंदबुद्धि बालकों के लिए हमें विशेष स्कूल व अस्पताल की स्थापना करना चाहिए क्योंकि हम सामान्य बालकों के साथ मंदबुद्धि बालकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते यदि मंदबुद्धि बालक विशेष स्कूल में होगा तो वहां का वातावरण उस बालक की अनुकूल होगा वहां पर सारे बच्चे उसके जैसे ही होंगे जिससे उसमें हीन भावना नहीं आएगी वह अपनी समस्या को अपने दोस्तों व शिक्षकों के साथ साझा कर सकेगा सामान्य बालको के साथ रहने पर मंदबुद्धि बालक ऐसा नहीं करता है विशेष अस्पताल होने से जो इलाज हम स्कूलों में नहीं कर सकते उसका उचित उपचार हम अस्पतालों में करवा सकते हैं।

🔅 विशेष शिक्षण विधि का प्रयोग:-मंदबुद्धि बालक उनको सामान्य स्कूलों में सामान्य शिक्षण विधियों से पढ़ाना आसान नहीं होता है इसलिए ऐसे लोगों को विशेष शिक्षण विधियों का प्रयोग करके पढ़ाना चाहिए जिसमें दृश्य श्रव्य सामग्रियों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए जिससे बालक किसी वस्तु को देखकर या महसूस करके यह सुनकर समझ सके ऐसे वालों को ड्राइंग पेंटिंग खेलकूद आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पढ़ने के लिए कहना चाहिए।

🔅 विशेष पाठ्यक्रम:-हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाना चाहिए ऐसे बालक पुस्तक के ज्ञान से अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं ऐसे बालकों का पाठ्यक्रम सरल एवं लचीला जिससे बालक आसानी से सीख जाए हस्तकला से जुड़ी पाठ पढ़ाने से बालक भविष्य में व्यवसायिक रूप से भी मजबूत हो सकता है।

✍🏻✍🏻Notes by Raziya khan✍🏻✍🏻

🌷मंद बुद्धि बालकों का 🌷
🌷 वर्गीकरण। 🌷

मंद बुद्धि बालकों को निम्नलिखित चार प्रकार से वर्गीकृत किया गया है :-

  1. मंद गति से सीखने बाला :-
    सामान्य बालकों की तरह जल्दी ना सीख कर मंद बुद्धि बालक मंद गति (धीरे) सीखते हैं, पर सीख जरूर लेते हैं। अतः इस श्रेणी के बालकों की IQ [ 70-90 ] के अंतर्गत मानी जाती है।
  2. शिक्षा पाने योग्य मंदितमना :-
    मामूली रूप से मंदित, अर्थात इस श्रेणी के बालक थोड़े कम (न्यून) रूप से मंदित होते हैं और इनको सिखाने में बहुत कठिनाई होती है। अतः इस श्रेणी के बालकों की IQ [ 50-70 ] के अंतर्गत मानी जाती है।
  3. प्रशिक्षण योग्य मंदितमना :-
    इस श्रेणी के बालकों को प्रशिक्षण (सिखाने) की आवश्यकता होती है, अतः इस श्रेणी के बालकों की IQ [ 20-49 ] के अंतर्गत मानी जाती है।
  4. पराश्रित , पूर्ण मंदितमना :-
    इस श्रेणी के बालक पूर्णतः मंदित (मंदबुद्धि) के होते हैं, और ऐसे बालक अपने प्रत्येक कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं अर्थात ये स्वयं करने में अक्षम होते हैं। अतः इस श्रेणी के बालकों की IQ [ 0-20 ] के अंतर्गत मानी जाती है।

🌷 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम एवं उपचार 🌷

  1. पृथक्करण ( segregation ):-

मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों को सामान्य बच्चों से अलग रखा जाये। ऐसे बालकों को उनके अनुकूल विशेष संस्थानों में रखकर उन्हें उनके अनुकूल वातावरण दिया जाये।

  1. जन्म दर पर नियंत्रण :- जो गंभीर रूप से , मानसिक रूप से ग्रसित माता-पिता है उनकी नसबंदी Sterilization, करा दी जाए जिससे मंदबुद्धि बच्चे का जन्म ना हो सके। और मंद बुद्धि बालकों के जन्म दर पर नियंत्रण हो सके।
    अतः इसके लिये हमारे समाज को व्यर्थ का भावनात्मक रूप से न सोचकर वल्कि वास्तविकता को समझना चाहिए तभी हम इस पर नियंत्रण पा सकेंगे।
  2. व्यक्तिगत ध्यान :-

शिक्षक को प्रत्येक बच्चे पर ( Personal ) व्यक्तिगत रूप से विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, और कक्षा का आकार छोटा रखना चाहिये।
ताकि मंद बुद्धि बालकों को सही और व्यवस्थित वातावरण दे सकें।

  1. माता -पिता को शिक्षित करना :-

जब माता पिता शिक्षित होते हैं तो उनको अपने मंद बुद्धि बच्चे की बुद्धि के स्तर का पता होता है।
यदि माता – पिता शिक्षित होंगे तो वह बच्चे से कैसा व्यवहार करेंगे यह निर्धारित होता है। माता पिता का शिक्षित होना भी मंद बुद्धि बालकों को अनुकूल शिक्षा व्यवस्था आदि देने के लिये बहुत जरूरी है।

  1. विशेष विद्यालय व अस्पताल :- सामान्य विद्यालयों एवं अस्पतालों में इनकी देखरेख या आवश्यक प्रशिक्षण संभव नहीं है इसीलिए , मंदबुद्धि बालकों के लिए विशेष विद्यालय व अस्पताल की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  2. विशेष शिक्षण विधि :-

मंद बुद्धि बालकों के लिये सामान्य बच्चे की शिक्षण विधि न अपनाकर बल्कि मंद बुद्धि बालकों के लिऐ उपयुक्त शिक्षण विधि बनाई जाए , क्योंकि ऐसे बालकों को पढ़ने सीखने आदि में सामान्य बालकों से ज्यादा समस्या होती है इसीलिये इनको विशेष शिक्षण विधि के द्वारा शिक्षा दी जाये।

  1. विशेष पाठ्यक्रम :-

मंद बुद्धि बालकों को हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाएं, पुस्तकीय ज्ञान में ये बालक अधिक उन्नति नहीं कर सकते हैं।
अतः इसीलिये मंद बुद्धि बालकों को हस्त कला आदि से जुड़े प्रशिक्षण दें और उन्हें स्वयं से करना भी सिखायें और उनके अनुकूल उपचार व्यवस्था करें ताकि ऐसे बालक समाज पर बोझ न बनकर बल्कि अपने पैरों पर खड़े हो सकें और सही ढंग से अपना जीवन यापन कर सकें।

🌹 जूही श्रीवास्तव 🌹

🔵 मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण 🔵

➖मंद बुद्धि बालकों को चार भागों में बांटा गया है –

  1. मंद गति से सीखने वाला।
  2. शिक्षा पाने योग्य मंदितमना।
  3. प्रशिक्षण योग्य मंदितमना।
  4. पराश्रित, पूर्ण मंदितमना।

🔷 मंद गति से सीखने वाले बालक ~ मंद बुद्धि बालकों के प्रकार में एक प्रकार यह है। जिसपे बालक की सीखने की प्रक्रिया धीमी होती है। यह बच्चों की समस्या होती है, लेकिन ये बच्चे धीरे – धीरे ही मंद गति से सीख जाते हैं। मंद बुद्धि बालकों में सीखने की प्रक्रिया ही मंद गति से होती है।
“इस श्रेणी के बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से 90 के मध्य होती है।”

🔷शिक्षा पाने योग्य मंदितमना ~ इस वर्ग के बालकों में शिक्षा पाने की योग्यता ‘मामूली रूप से मंदित’ होते हैं। ऐसे बालक की सीखने की गति मंद तो होती ही है लेकिन शिक्षा में इनकी क्षमता मंद होने के कारण ये कुछ स्तर में पिछे भी हो सकते हैं।
” इस श्रेणी के बालकों की बुद्धि लब्धि 50 से 70 के मध्य में होती है।”

🔷 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना ~ इस वर्ग के बालकों को उचित रूप से प्रशिक्षण देना आवश्यक होता है।
“इस श्रेणी के बालकों की बुद्धि 20 से 49 के मध्य में होती है। ” इस श्रेणी में बालक सामान्य बच्चों की अपेक्षा में बहुत कम प्रशिक्षित होते हैं जिससे इन्हें शिक्षा प्राप्त करने के लिए पूर्ण रूप से प्रशिक्षण देना जरूरी होता है।

🔷 पराश्रित, पूर्ण मंदितमना ~ “इस श्रेणी में बालक की बुद्धि लब्धि 0 से 20 के मध्य होती है “
इस वर्ग के बालक पूर्ण रूप से मंदित या पराश्रित होते हैं, और पूरी तरह से दूसरों पर आश्रित या दूसरों पर निर्भर होते हैं।

मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार

मानसिक रूप से पिछड़े हुए बालकों के रोकथाम व उपचार को निम्न प्रकार से बताया गया है –

  1. पृथक्करण।
  2. जन्म – दर पर नियंत्रण।
  3. व्यक्तिगत ध्यान।
  4. माता-पिता को शिक्षित करना।
  5. विशेष स्कूल व अस्पताल।
  6. विशेष शिक्षण विधि।
  7. विशेष पाठ्यक्रम।

🔷 पृथक्करण [segregation] ~ पृथक्करण यानि ‘अलग करना’। “मानसिक रूप से पिछड़े बालक को सामान्य बालकों से अलग (separate) कर दिया जाए।” और उन्हें विशेष संस्थाओं में रखा जाए।
मानसिक रूप से ग्रसित बालक सामान्य बच्चों की तरह नहीं सीख सकते है इसलिए उन्हें उनके अनुरूप ही विशेष शिक्षा प्रदान करायी जानी चाहिए।

🔷 जन्म-दर पर नियंत्रण ~मंद बुद्धि बालक के जन्म दर पर नियंत्रण कराया जाना चाहिए ऐसे बालक के माता पिता गम्भीर रूप से, मानसिक रूप से पिछड़े होते हैं।
ऐसे माता-पिता की नसबंदी [sterilization] करा दी जाए जिससे कि मंद बुद्धि बच्चे का जन्म ही ना हो पाए।

🔷 व्यक्तिगत ध्यान ~ इस वर्ग में बच्चों पर ध्यान विशेष रूप दिया जाना चाहिए। बच्चे की हर छोटी – छोटी बात को जानना, बच्चे किस माहौल में एवं बच्चे कैसे सीखते हैं और बच्चा किस चीज में ज्यादा रुचि रखते हैं ऐसी सभी बच्चे की पूर्ण रूप से जानकारी रखनी चाहिए।
‘हर एक बच्चे का व्यक्तिगत ध्यान रखना आवश्यक हो।’ और कक्षा का आकार छोटा रखना होगा। जिससे हर बच्चे में बेहतर तरीके से ध्यान दिया जा सके और उनकी समस्याओं को दूर किया जा सके।

🔷 माता-पिता को शिक्षित करना ~ यदि माता-पिता शिक्षित होते हैं तो उनको अपने मंद बुद्धि बालक की बुद्धि का स्तर पता होता है। इससे वह बच्चों से कैसे व्यवहार करेंगे यह निर्धारित होता है।
माता-पिता के शिक्षित होने से वातावरण में प्रभाव होता है और बच्चे को अच्छा वातावरण, माहौल मिलता है।

🔷 विशेष स्कूल व अस्पताल ~ मंद बुद्धि बालक का सामान्य स्कूल में और अस्पताल में सही देख-रेख या आवश्यक प्रशिक्षण सम्भव नहीं है, इसलिए इस वर्ग के बच्चों को इनकी जरूरत के अनुसार विशेष प्रकार के स्कूल की व्यवस्था करायी जाए और उपचार के लिए अस्पताल का आयोजन कराया जाए।

🔷 विशेष शिक्षण विधि ~ मंद बालकों के लिए सामान्य बच्चे की शिक्षण विधियां ठीक नहीं होती है।
ऐसे बालकों के लिए उपयुक्त शिक्षण विधि को बनाई जाए जिससे हर बच्चा जिसको अपनी जरूरत के हिसाब से सीखने में सफल हो।
व्यक्तिगत क्षमता ध्यान में रख कर शिक्षा में ऑडियो, वीडियो, ब्रेल इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध करायी जाए।

🔷 विशेष पाठ्यक्रम ~ मंद बुद्धि बालक सामान्य बालक की तरह पुस्तकीय ज्ञान में सुधार या उन्नति नहीं कर सकते हैं इन्हें इनके अनुरूप ही विशेष पाठयक्रम बनाया जाना चाहिए। जेसे हस्तकला से जुड़े हुए पाठ पढ़ाए। इस वर्ग के बालक को व्यावसायिक रूप से भी शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे ये समाज पर बोझ न बने।
‘उपचार करें ऐसा की मन्द बुद्धि बच्चे अपने पैरों पर खड़ा हो सके।।

➖ 02/ नवंबर /2020
➖ पूर्वी हल्दकार

धन्यवाद 🌼👏🏻🤟🏻

समाप्त 🌸🌸🙏🏻

🔅(मंदबुध्दिबालक ) 🔅
हर मंदबुध्दि बालक एक जैसा नही होगा | उसका IQ लेविल सोचने समझने का तरीका अलग – अलग होता है|
मंदबुध्दि बालक का वर्गीकरण
मंदबुध्दि बालक को चार प्रकार मे वर्गीकरण किया गया है |

  1. मंद गति से सीखने वाला – बालको में सीखने की गति बहुत धीमी होती है यह मंद गति (धीरे-धीरे) से सीखते हैं लेकिन वह सीख जाता है इनकी बुद्धि लब्धि 70 से 90 तक होती है|
  2. शिक्षा पाने योग्य मंदितमना – यह बालक मामूली रूप से मजबूत होते हैं बहुत ही मंद गति से सीखते हैं वह सीखाने पर भी नहीं सीख रहा है इनकी बुद्धि लब्धि 50 से 70 के मध्य होती है|
  3. प्रशिक्षण योग मंदितमना – बालक मंद बुद्धि वाले होते हैं वह नहीं सीख रहे है तो प्रशिक्षण देना आवश्यक या जरूरी है बिना प्रशिक्षण के नहीं सीखेंगे इनकी बुद्धि लब्धि 20 से 49 के मध्य होती है |
  4. पराश्रित पूर्ण मंदितमना – इसमें बच्चों को दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है तो पूर्ण मंदितमना होता है जैसे की कोई बच्चा खुद से कार्य नहीं कर पाता तो दूसरों पर आश्रित रहता है धीरे-धीरे सीखने लगता है इनकी बुद्धि लब्धि 0 से 20 के मध्य होती है |

मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार –
◼ पृथक्करण (segregation) –
मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों को सामान्य बालकों से अलग कर दिया जाए और विशेष संस्थाओं में रखा जाता है मंदबुद्धि बालक है तो हमें उनकी जरूरत है आवश्यकता के अनुरूप विशेष संस्थाओं में रखना है वह मंद गति से सीखने वाले होते हैं जो सामान्य की तरह सीखते है|
◼ जन्म दर पर नियंत्रण – जो सामान्य गंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता पिता है उनकी नसबंदी (sterilization) करा दी जाए जिससे मंदबुद्धि बच्चे का जन्म ना हो |
◼ व्यक्तिगत ध्यान – मंदबुद्धि बालक पर हर एक बच्चे पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है कक्षा का आकार छोटा रखना होगा तभी बच्चों पर ध्यान दे पाएंगे बच्चों की हर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए |
◼ माता-पिता को शिक्षित करना -जिन बच्चों के माता-पिता शिक्षित होते हैं तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक की बुद्धि का स्तर पता होता है तो वह बच्चों को कैसे व्यवहार करेंगे यह निर्धारित होता है
◼ विशेष स्कूल व अस्पताल – बच्चों को पढ़ाने के लिए उनकी आवश्यकता के हिसाब से विद्यालय व उसकी उचित देखरेख के लिए विद्यालय व अस्पताल की विशेष व्यवस्था की जाए सामान्य स्कूल या अस्पताल में इनका देख-रेख या आवश्यक प्रशिक्षण संभव नहीं है उसकी आवश्यकता के अनुसार आगे बढ़ाएंगे |
◼ विशेष शिक्षण विधि – सामान्य बच्चों की शिक्षण विधियां ठीक नहीं है उपर्युक्त शिक्षण विधि बनाई जाए जिसको जिस प्रकार की बच्चों को उनकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए समझाएं और बच्चों को आसानी और सरल रूप से समझने योग्य हो जाये |
◼ विशेष पाठ्यक्रम – विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से बालक को हस्तकला से जुड़ी पाठ पढ़ाएं जिससे उनको पुस्तक ज्ञान में यह अत्यधिक उन्नति नही कर सकते| इसलिए हस्तकला का ज्ञान देना चाहिए ताकि बच्चे व्यवसाय कार्यों को स्वयं कर सके और समाज पर बोझ ना बने |
उपचार ऐसा करेगी मंदबुद्धि बालक अपने पैरों पर खड़ा हो सके और दूसरों पर निर्भर ना रहे |
Notes by – Ranjana Sen

🔰मंदबुद्धि बालक का वर्गीकरण🔰

मंदबुद्धि बालक का वर्गीकरण चार प्रकार से किया जाता है
1 मंद गति से सीखने वाला बालक
2 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना बालक
3 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना
4 पराश्रित पूर्ण मंदितमना

1 मंद गति से सीखने वाला बालक:- मंद गति से सीखने वाला बालक धीरे-धीरे सीखता है मगर सीख जाता है अर्थात स्पीड कम होती है पर सीख जाता है इनका आई क्यू लेवल 70 से 90 होता है

2 शिक्षा पाने योग्य मंदितमना बालक:- ऐसे बालक मामूली रुप में मंदित होते हैं हमसिखाने पर भी नहीं सीखते हैं इनका आई क्यू लेवल 50 से 70 होता है

3 प्रशिक्षण योग्य मंदितमना :- ऐसे मंद बुद्धि बालक के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक होता है इनका आई क्यू लेवल 20 से 49 होता है

4 पराश्रित पूर्ण मंदितमना:- ऐसे मंदबुद्धि बालक का हमेशा दूसरे पर ही निर्भर रहते हैं वह किसी भी प्रकार का कार्य स्वयं नहीं कर सकते

🔰मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार

1 पृथक्करण(segregation ) :- मानसिक रूप से पिछड़े बालक को सामान्य बालक से अलग करके विशेष शिक्षा दी जाए विशेष संस्थानों में रखा जाए जहां पर सभी बच्चे एक प्रकार की होंगे जिससे बच्चों में हीन भावना नहीं आएगी वह किसी भी प्रकार से अपने आप को कमजोर नहीं समझेंगे

2 जन्म दर पर नियंत्रण:- गंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता पिता की नसबंदी(sterilization ) करा दी जाए जिससे मंदबुद्धि बच्चे का जन्म ही ना हो और यह सभी को समझना चाहिए सभी को भावनात्मक नहीं होना चाहिए

3 व्यक्तिगत ध्यान:- मानसिक रूप से पिछड़े बालक पर हम व्यक्तिगत ध्यान देना आवश्यक है
a हर एक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान देना आवश्यक है इससे हमें बच्चों की कमियों के बारे में पता लगेगा और हम उनकी कमियों को दूर करने के उपाय कर सकते हैं एवं बच्चों की क्षमताओं के बारे में पता लगेगा जिससे हम उन्हें उस क्षमता में आगे बढ़ा सकते हैं जिससे और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं

4 माता-पिता को शिक्षित करना:- माता-पिता शिक्षित होते हैं तो उनको अपने मंदबुद्धि बालक की बुद्धि का स्तर पता होता है वह बच्चों से कैसे व्यवहार करेंगे या निर्धारण होता है उनको पता होता है कि बच्चे को कब किस तरह से ट्रीट करना है

5 विशेष स्कूल और अस्पताल:- सामान्य स्कूल या अस्पताल में इनका देखरेख है या आवश्यक प्रशिक्षण संभव नहीं होता इसलिए इनके लिए विशेष स्कूल और विशेष अस्पताल की आवश्यकता होती है जहां पर उनको आवश्यकता के अनुसार शिक्षा एवं उपचार के साधन उपलब्ध होते हैं

6 विशेष शिक्षण विधि:- सामान्य बच्चों की शिक्षण विधियां उनके लिए ठीक नहीं है उपयुक्त शिक्षण विधि अपनाई जाएं उनकी रूचि जिस पर लगे ऑडियो वीडियो इंटरेस्टेड बनाकर शिक्षा देना चाहिए उन्हें विशेष विधि के अनुसार पढ़ाना चाहिए

7 विशेष पाठ्यक्रम:- मंदबुद्धि बालक को हस्त कला से जुड़े पाठ पढ़ाए जाने चाहिए जिससे वह उनको सीख कर आगे व्यवसाय कर सकता है और अपना जीवन यापन कर सकता है ताकि वह समाज पर बोझ ना बन सके

मंद बुद्धि वाले बालक पुस्तक ज्ञान में से अधिक उन्नति नहीं कर पाते
उपचार ऐसा करें कि मंदबुद्धि बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सकें 🙏🙏🙏sapna sahu 🙏🙏🙏

✍️मंद बुद्धि बालक ✍️

टर्मन के अनुसार ‘वो बालक जिनकी बुद्धि लब्धि <90 है वो मंद बुद्धि की श्रेणी मे आते है!’

American association of mental deficiency (AAMD) => के अनुसार ‘मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है! जो कि अनुकूल व्यवहार संबंधी दोषों के साथ – 2 ही पायी जाती है! जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है!

👉 मंद बुद्धि बालक की विशेषताएं =>

1)🌼 बौद्धिक न्यूनता =>

ऐसे बालक जिनका
a) शैक्षिक स्तर,
b) बुद्धि लब्धि <70,
c) अधिक विस्मरण,
d) दूसरों से सहायता की अपेक्षा करना

🌷मंद बुद्धि बालक बनने से पहले और मंद बुद्धि बालक की श्रेणी से उबरने और बाहर आने की बुद्धि लब्धि की एक सीमा है अगर बालक 70 से 90 बुद्धि लब्धि का है तो बह ना पूर्ण रूप से मंद बुद्धि है ना ही पूर्ण रूप से सामान्य है! ऐसी स्थिति से बालक को निकाला भी जा सकता है और सामान्य बनाया जा सकता है! अगर ऐसी परिस्थिति पर ध्यान ना दिया गया तो बालक मंद बुद्धि की श्रेणी मे पहुंच सकता है!

2)🌼 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं =>
a)मानसिक क्रियाएं जैसे कि किसी विषय पर विचारों की कोई सीमा नहीं है!
b)अवधान को केंद्रित नहीं करना!
c) ध्यान के विस्तार मे कमी का ये मतलब है कि बालक मे अपने मानसिक एकाग्रता को लंबे समय तक बनाने में अक्षमता महसूस होती है!
d) इन बालकों में शब्दकोश की कमी पायी जाती है जिसकी वजह से ये अपने विचारों को भाषा के रूप मे व्यक्त करने में समर्थ नहीं होते है!

3)🌼 हीन व्यक्तित्व =>

a) उदासीन /खिन्न मिजाज का होना!
b) कुछ भी कार्य करने में शिथिल होना!
c) स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना!
d) उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं करपाते है!

4)🌼 शैक्षिक पिछड़ापन =>

a) शैक्षिक उपलब्धि न के बराबर
b) इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन!
c) रटने की प्रवृत्ति
d) मानसिक आयु, शारीरिक आयु से कम होती है!

5)🌼 सीमित प्रेरणा और संवेग =>
a) कल्पना शक्ति से रहित
b) प्रेरणा साधारण और सीमित
c) मस्तिष्क मे उत्सुकता /जिज्ञासा की कमी
d) क्रोध, लोभ, मोह, इच्छा इत्यादि के संवेग से वंचित!

6)🌼 कुसमायोजन की स्थिति =>

a) बालक द्वारा अलग अलग परिस्थिति मे निम्न स्तर का समायोजन क्षमता का प्रदर्शन!

b) सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञता का प्रदर्शन!
c) उचित – अनुचित का ज्ञान ना होना!
d) समूह में समायोजन ना करपाना!

7)🌼 असामान्य शारीरिक संरचना =>

a) सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन /संरचना
b) कद – काठी में नाटा, पैर ज्यादा छोटे, या ज्यादा बड़े होने, शरीर की त्वचा मोटी होना!
C) उदास चेहरा, और चेहरे में क्रियाशीलता के सामान्य स्तर की कमी होना!
d) शारीरिक अंगों में शिथिलता के लक्षणों का hona!

👉 मंद बुद्धि बालक का वर्गीकरण =>

1)मंद गति से सीखने वाला =>मंद गति से सीखता है सीखने की गति सामान्य से कम होती है जिस कार्य मे सामान्य बच्चा एक घंटा लेता है मंद बुद्धि बालक उसमे दो घंटे लगा देता है!

इनका intelligence quotient (IQ) =>70 से 90 होता है!

2)शिक्षा पाने योग्य मंदितमना –

मंद बुद्धि बालक सिखाने पर भी बहुत कम सीख पाता है या मंद रूप से सीखता है! और किसी किसी क्षेत्र मे कही कही मंदता पायी जाती है! मतलब किसी किसी क्षेत्र मे पूर्ण ज्ञान ना मिल पाना और सीखने मे मंद गति का प्रदर्शन करना!

इनकी बुद्धि लब्धि(IQ) =50 से 70 के बीच में होती है!

3)प्रशिक्षण योग्य मनदितमना – इस प्रकार के बच्चे को शिक्षक के द्वारा प्रशिक्षण देना ही आवश्यक है, इनकी बुद्धि लब्धि 20-49 के बीच में रहती है!

4)पराश्रित, पूर्ण मनदितमना =>

ऐसे बालक जो पूर्ण रूप से मंद होते है जिनको कुछ समझ नहीं आता और ऐसे बालकों का बुद्धि लब्धि 0-20 के बीच में होती है!
साधारण भाषा मे कहे तो पूर्णरूप से किसी योग्य ना होना!

👉 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार 🌷✍️

1)प्रथक्करण {segregation}=>
मानसिक रूप से पिछड़े बालक को सामान्य बालक से अलग कर दिया जाए और उनको अलग संस्थाओं में पढ़ाया जाए और विशेष शिक्षा दी जाए, जिसमे उनके रुचि और सामंजस्य के अनुसार शिक्षण विधि और पाठ्यक्रम अपना कर पढ़ाना चाहिए! ऐसे बच्चों को विशेष संस्थाओं का प्रबंध ना हो पाए तो विशेष कक्षा का प्रबंध कराया जाना चाहिए!

2)जन्म दर पर नियंत्रण =>

गंभीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता पिता हुए है ऐसे अभिभावकों की नसबंदी(sterilization) करा दी जाए जिससे मंद बुद्धि बच्चों का जन्म ना हो और उनकी जन्मदर कम हो जाए! क्योकि मंद बुद्धि होने का विशेष कारण अनुवांशिकता ही है!

3)व्यक्तिगत ध्यान =>

मंद बुद्धि हर एक बालक पर व्यक्तिगत ध्यान देना शिक्षक का कर्तव्य है और उनके कक्षा कक्ष का आकार छोटा रखना होगा जिससे हर एक बच्चे की हर व्यक्तिगत छोटी छोटी समस्याओं और गति विधियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए!

4)माता – पिता को शिक्षित करना =>
माता पिता ही ऐसे व्यक्ति है जो बच्चे के साथ ज्यादा समय तक रहते है और माता पिता ही प्रथम गुरु होते है इसलिए अगर माता पिता ही शिक्षित होते तो उनको अपने मंद बुद्धि बालक के बुद्धि का स्तर पता रहता है और वे उसको सही दिशा मे सुधारने का प्रयास करेंगे!

शिक्षित माता पिता का व्यवहार भी अशिक्षित माता पिता से भिन्न होता है!

5)विशेष स्कूल व अस्पताल =>

सामान्य स्कूल या अस्पताल मे इन बच्चों की देखरेख या आवश्यक शिक्षण /प्रशिक्षण संभव नहीं है! क्योकि सामान्य विद्यालय या सामान्य अस्पताल मे इन बच्चों के अनुरूप सुविधाए नहीं होंगी!

6)विशेष शिक्षण विधि (special teaching method) =>

इन बच्चों के लिए विशेष शिक्षण विधि बनायी जाये जिसमें व्यक्तिगत विभिन्नता को ध्यान मे रखकर बनायी जाये जिसमे ध्यान रखा जाए कि हर एक बच्चे के कमजोर पक्ष का पता लगा कर उसको दूर किया जा सके!
जो कि सामान्य से भिन्न क्योकि इनके लिए साधारण बच्चे के लिए उपयुक्त शिक्षण विधि ठीक नहीं होती है!

7)विशेष पाठ्यक्रम =>

हस्तपरक से जुड़े पाठ पढ़ाये जाए,जिससे ऐसे बालक व्यावसायिक रूप से सुदृढ़ होकर अपनी अजीविका चला सके और समाज पर बोझ ना बने, इसका आशय यह है कि पुस्तक के ज्ञान मे अधिक उन्नति नहीं कर सकते है इनको व्यावसायिक ज्ञान दिया जाना चाहिए!

🌷🌷🌷🌷मंद बुद्धि बालक के लिए ये सारा जानकारी का सार यही है कि इनको ऐसा उपचार दे या मिले की मंद बुद्धि बच्चा अपने पैरों पर खड़ा हो सके! 🌷🌷🌷🌷

Notes By Ashwany Dubey

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