🔆अभिप्रेरणा के स्रोत
(Sources of motivation)➖

🔸स्रोत या ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनके द्वारा भी प्रेरणा मिलती है मुख्यतः इन्हें तीन भागों में बांटा गया है।
📍1 आवश्यकता (need)
📍2 चालक /अंतर्नाद (drive)
📍3 प्रोत्साहन /उद्दीपन (stimulus)

❇️1 आवश्यकता (need)➖

🔹आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।
(Need is the mother of invention)

🔹जरूरत से आविष्कार तक का सफर अभिप्रेरणा द्वारा पूरा होता है।
🔹यदि जरूरत नहीं है तो आविष्कार नहीं हो पाएगा।
🔹और यदि जरूरत है लेकिन अभिप्रेरणा नहीं है तब इस स्थिति में भी आविष्कार नहीं हो पाएगा।

🔹किसी भी अभिप्रेरणात्मक व्यवहार की उत्पत्ति आवश्यकता से ही होती है। प्राणी के शरीर में किसी भी चीज की कमी या अति को आवश्यकता कहा जाता है । जो व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तब उसे प्यास की आवश्यकता का अनुभव होता है।

🔹मनुष्य के अंतर्गत दो प्रकार की आवश्यकता होती है।
1 जैविक आवश्यकता
2 सामाजिक आवश्यकता।

✨1 जैविक आवश्यकता➖

▪️ इसके अंतर्गत शारीरिक जरूरतें जैसे भोजन जल हवा नींद इत्यादि आती है।
▪️जैविक आवश्यकता व्यक्ति के जन्म से ही पाई जाती हैं जिनके अभाव में व्यक्ति का अस्तित्व संभव ही नहीं है। कोई भी प्राणी भूख प्यास इत्यादि जैविक आवश्यकताओं को संतुष्टि किए बिना जीवित ही नहीं रह सकता है।

▪️अर्थात जैविक आवश्यकताएं बेसिक नीड है जिनकी बिना व्यक्ति के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती प्रथम जैविक आवश्यकता है ऐसी आधारभूत आवश्यकता है कि इनकी पूरी ना होने पर मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
पूरी आवश्यकता ही नहीं बल्कि कोई एक भी जैविक आवश्यकता अगर पूरी नहीं होती है तो मनुष्य के शरीर में तनाव उत्पन्न होना शुरू हो जाता है।
जिससे मनुष्य उस आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए क्रियाशील होकर कुछ कार्य या संघर्ष करने लगता है और कार्य को करने के लिए अभिप्रेरित हो जाता है।

✨2 सामाजिक आवश्यकताएं➖

▪️जैसे प्रतिष्ठा, सुरक्षा, संग्रहता, विशिष्टता, पुष्टिकरण सामाजिकता, सामाजिक मूल्य, समुदाय के साथ एकीकरण, धनार्जन, बेहतर जीवन, संस्कृतिक कर्तव्य इत्यादि।

▪️ मनोवैज्ञानिकों ने कहा है कि आवश्यकता अभिप्रेरणा को उत्पन्न करने का पहला चरण या कदम है।
▪️क्योंकि आवश्यकता से ही अभिप्रेरणा उत्पन्न होती है और हम उस आवश्यकता को हर हाल में हर स्थिति में पूरा करना चाहते हैं या जिंदा रहना जाते हैं।

▪️सभी की अपनी-अपनी अलग-अलग आवश्यकताएं होती है और उनका अपना महत्व होता है जो उनकी सोच पर निर्भर करती है जैसे हमारी आवश्यकता की सोच होती है उसी आधार पर हम अभि प्रेरित होते है ।

▪️अभिप्रेरणा एक समय के लिए शुरू होती है और इस बात का निर्णय नहीं किया जा सकता कि वह कब तक चलती रहेगी।

▪️जैसे ही मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है उसके साथ ही उसकी क्रियाशीलता और शारीरिक तनाव की भी समाप्ति हो जाती हैं।

❇️2 चालक /अंतर्नाद (Drive)➖

▪️जब हमें किसी चीज के प्रति आवश्यकता होती है तो हम उसके लिए अधिक क्रियाशील हो जाते हैं और यही क्रियाशीलता हमारे लक्ष्य की पूर्ति करती है।

▪️जब व्यक्ति में किसी चीज के प्रति आवश्यकता उत्पन्न होती है तो उस व्यक्ति में आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए क्रियाशीलता बढ़ जाती है और यही क्रियाशीलता को चालक बोला जाता है।

▪️अंतर्नाद एक ऐसी मानसिक तनाव की अवस्था है जो आवश्यकता के कारण उत्पन्न होती है और व्यक्ति को क्रियाशील बना देती है।
जैसे भूख की आवश्यकता में व्यक्ति भोजन खोजने के लिए क्रियाशील हो उठता है।

▪️चालक क्रिया को करने की एक ऊर्जा है।

▪️जब हम किसी भी क्रिया को करते हैं तो चालक की मदद से ही हमें उस क्रिया को करने में एक ऊर्जा मिलती है और हम उसी ऊर्जा से क्रिया को पूरा करते हैं।

▪️चालक शरीर की एक आंतरिक दशा या स्थिति है जो कि एक विशेष प्रकार के व्यवहार के लिए आंतरिक प्रेरणा प्रदान करता है।

❇️3 प्रोत्साहन /उद्दीपन (Stimulus)➖

▪️प्रोत्साहन का संबंध बाहरी वातावरणीय या वस्तुओं से होता है जो व्यक्ति को अपनी और आकर्षित करते हैं एक बार उसकी प्राप्ति से आवश्यकता की पूर्ति तथा चालक में कमी हो जाती है।

▪️वस्तु की आवश्यकता उत्पन्न होने पर उस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए चालक उत्पन्न होता है और जिस वस्तु से आवश्यकता पूर्ण होती है उसे उद्दीपन या प्रोत्साहन कहते हैं।

✍️Notes By-'Vaishali Mishra'

अभिप्रेरणा के स्रोत
(Sources of motivation)

✨✨✨✨✨✨✨✨✨

ऐसी कौन सी चीज है जिससे हमें अभिप्रेरणा मिलती है?

अभिप्रेरणा के मुख्यतः तीन स्त्रोत है। जो निम्नलिखित है……..

💫1. आवश्यकताएं (needs)
💫2. चालक / अंतर्नाद (drive)
💫3. प्रोत्साहन (appreciation) / उद्दीपन (stimulus)

1. आवश्यकताएं (needs)
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“Need is the mother of invention.”

“आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।”

प्रत्येक प्राणियों की कुछ मूलभूत आवश्यकताएं होती है तथा उनके प्रत्येक व्यवहार का कार्य इन्हीं आवश्यकता से अभिप्रेरित होता है। अभिप्रेरणा आवश्यकताओं की अनुभूति से उत्पन्न होती है। मनुष्य का व्यवहार भी उन्हें आवश्यकताओं से संचालित होता है।

अतः आवश्यकता व्यक्ति में निहित वह शक्ति है जो व्यक्ति को किसी विशेष प्रकार का कार्य करने के लिए अभिप्रेरित करती है।

मनुष्य की आवश्यकताएं निम्नलिखित प्रकार की है……

💫 1. जैविक आवश्यकता/शारीरिक आवश्यकता (physical needs) – जैसे- भोजन, पानी, नींद, विश्राम, ऑक्सीजन इत्यादि।

💫 2. सामाजिक आवश्यकताएं (social needs) – जैसे-सामाजिक मान्यता, आत्म सम्मान, प्रतिष्ठा, सुरक्षा, धन अर्जन, सामाजिक संबंध, शिक्षा, सांस्कृतिक कर्तव्य, बेहतर जीवन, सामाजिक मूल्यों से संबंधित आवश्यकताएं इत्यादि।

▪️जैविक आवश्यकता ऐसी आधारभूत आवश्यकता है जिनके पूरा ना होने पर मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ सकता है। सभी आवश्यकता ही नहीं बल्कि कोई एक भी जैविक आवश्यकता अगर पूरी नहीं होती है तो मनुष्य के शरीर में तनाव होना शुरू हो जाता है जिससे मनुष्य उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए क्रियाशील हो जाता है और संघर्ष करने लगता है।

आवश्यकता को अभिप्रेरणा की उत्पत्ति का पहला कदम माना जाता है। मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति के साथ ही उसकी क्रियाशीलता और शारीरिक तनाव की समाप्ति हो जाती है।

2. चालक / अंतर्नाद (drive)
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जब व्यक्ति में किसी चीज के प्रति आवश्यकता उत्पन्न होती है उस व्यक्ति में उस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए क्रियाशीलता बढ़ जाती है इसी क्रिया को चालक/ प्रेरक कहते हैं।

चालक क्रिया को करने की ऊर्जा है।वस्तुतः चालक शरीर की एक आंतरिक क्रिया या दशा है जो एक विशेष प्रकार के व्यवहार के कारण प्रेरणा प्रदान करता है।

व्यक्ति की आवश्यकताएं उनसे संबंधित चालकों को जन्म देती है। जैसे- भोजन की आवश्यकता से “भूख – चालक” तथा पानी की आवश्यकता से “प्यास- चालक” उत्पन्न होता है। अतः चालक व्यक्ति को एक विशेष प्रकार का कार्य अथवा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती है जिससे उसकी आवश्यकता की पूर्ति होती है।

💫 3. प्रोत्साहन (appreciation) /उद्दीपन (stimulus)
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प्रोत्साहन का संबंध बाहरी वातावरण या वस्तु से होता है जो अपनी ओर आकर्षित करता है तथा उसकी प्राप्ति से आवश्यकता की पूर्ति तथा चालक कम हो जाता है।

वस्तु की आवश्यकता उत्पन्न होने पर उस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए चालक उत्पन्न होता है। जिस वस्तु से आवश्यकता पूर्ण होती है, उसे उद्दीपन / प्रोत्साहन कहते हैं।

उदाहरण,
भोजन से भूख आवश्यकता की पूर्ति होती है। अतः भूख चालक के लिए भोजन “उद्दीपन” है।

Notes by Shreya Rai……✍️🙏

🔥 Batch-SuperTet🔥
🌟 Date-4/04/2021🌟
✨Day-Tuesday✨
🎉Time-7:45am🎉

🎊Topic -Sources of Motivation🎊
⭐⭐ (अभिप्रेरणा के स्रोत)⭐⭐

🌟अभिप्रेरणा के स्रोत निम्नलिखित हैं
💢१-आवश्यकता
💢२-चालक
💢३-प्रोत्साहन/उद्दीपक

💢१-आवश्यकता।💢
⚡”आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है”⚡

✨उदाहरण÷मनुष्य को कई वर्ष पूर्व जब भारत गुलाम था तब विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करके” स्वदेशी अपनाओ”पर जोर दिया जिसके अंतर्गत सूत काट कर कपड़ा तैयार करने की कोशिश की गई जिसमें कपड़ों को बुनने में समस्या उत्पन्न होती थी बहुत अधिक समय भी लगता था तब गांधी जी द्वारा चरखे का निर्माण किया गया और उस पर अनेक आंदोलनों द्वारा पूरे भारतवर्ष में चरखे के द्वारा सूत काटकर खादी के कपड़ों का बनाने का कर किया गया, अर्थात यहां से हमें समझ सकते हैं कि मनुष्य को जिस प्रकार की आवश्यकता होती है वह उसी के अनुरूप उसकी पूर्ति के लिए नए-नए अथक प्रयास व खोज, अविष्कार करता है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान में चरखे की जगह विभिन्न प्रकार की मशीनों का प्रयोग किया जाता है जिनसे से समय की बचत व बेहतर निर्माण , साथ ही उत्पादन में वृद्धि संभव हुई।

💢मनुष्य के अंतर्गत दो प्रकार की आवश्यकताएं होती हैं जो निम्नलिखित हैं÷
🎉१-जैविक आवश्यकता
🎉२-सामाजिक आवश्यकता

🎉१-जैविक आवश्यकता🎉🎉
मनुष्य को या अन्य जीव धारियों को पृथ्वी पर अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए कुछ जैविक आवश्यकता है महत्वपूर्ण है, 💨जैसे÷पेट भरने के लिए भोजन, प्यास बुझाने के लिए जल, सांस लेने के लिए शुद्ध वायु, ऊर्जावान व जीवित रहने के लिए नींद की आवश्यकता होती है जिसके द्वारा मनुष्य अपने शारीरिक क्षमता को बनाए रखने के लिए इन सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है वा यह सभी आवश्यकताए है मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

🎉🎉२-सामाजिक आवश्यकता🎉🎉

✨मनुष्य को अपना जीवन शांतिपूर्ण, सुगमतापूर्वक, सूट एंड तरीके से व्यतीत करने के लिए कुछ सामाजिक आवश्यकताओं की जरूरत होती है जन सेवा समाज में अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम रहता है, जैसे धर्म का अर्जन करना, सामाजिक संबंध स्थापित करना है, अच्छी शिक्षा ग्रहण करना, बेहतर जीवन की कामना करना है, अच्छी आदतों का समाज में समावेशन करना है, सामाजिक संस्कृति का पालन करना, सांस्कृतिक कर्तव्यों का निर्वहन करना इत्यादि है।

💨💨💨कुछ महत्वपूर्ण तथ्य💨💨💨

🌟मनुष्य की जैविक आवश्यकता है ऐसी आधारभूत आवश्यकता है जिनका पूरा ना होने पर मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ सकता है सभी आवश्यकताओं की पूर्ति ना होने पर ही नहीं बल्कि किसी भी एक जैविक आवश्यकता की पूर्ति नहीं होती है तो मनुष्य के शरीर में तनाव उत्पन्न होना शुरू हो जाता है जिससे मनुष्य उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए क्रियाशीलता के साथ अथक प्रयासरत रहता है और उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए संघर्ष, परिश्रम भी करने लगता है;यदि किसी मनुष्य को भूख या प्यास लगती है तो वह उसकी शांत करने के लिए भोजन वा जल की खोज करना प्रारंभ कर देता है और वह भूख प्यास की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है जब तक उसकी आवश्यकता (भूख, प्यास इत्यादि) की पूर्ति नहीं होती , जैसे ही वह आवश्यकता की पूर्ति कर लेता है तो वह तनाव की स्थिति से बाहर आ जाता है,या तनाव की स्थिति समाप्त हो जाती है।

🎉🎉२-चालक🎉🎉

✨जब व्यक्ति में किसी चीज के प्रति आवश्यकता उत्पन्न होती है तो वह उस व्यक्ति में उस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए क्रियाशीलता को बढ़ा देता है किसी क्रियाशीलता को ही चालक कहते हैं।

💨उदाहरण÷अर्थात पिंजरे में बंद बिजली को भूख लगने पर पिंजड़े के बाहर रखे भोजन की प्राप्ति के लिए अनेकों प्रकार की क्रियाएं (उछलना कूदना वाह लोहे की दीवारों को काटना) करना शुरू कर देती है बिल्ली को या क्रिया भूख लगने के कारण करनी पड़ी अर्थात बिल्ली की भूख चालक हुई जिसके कारण उसने उछल कूद वा अन्य क्रियाएं की।

🎉वस्तुतः चालक शरीर की एक आंतरिक क्रिया है जो एक विशेष प्रकार के व्यवहार के लिए प्रेरणा प्रदान करती हैं।

🌟🌟3-प्रोत्साहन या उद्दीपक 🌟🌟
🌟🌟 Appreciation🌟🌟

🎉प्रोत्साहन का संबंध बाहरी वातावरण या वस्तु से होता है जो व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है उसकी प्राप्त से आवश्यकता की पूर्ति तक चालक कम हो जाता है।

💨अर्थात यदि दिल्ली को भूख लगने पर हुआ भोजन की तरफ से कर लेती है तो वह दोबारा पिंजरे में उछल कूद या पिंजरे को काटना या भगदड़ मचा ना जब तक कि उसको दोबारा से भूख ना लग जाए या भोजन की आवश्यकता ना हो भोजन की प्राप्ति के बाद उसकी आवश्यकता की पूर्ति हो चुकी है और चालक शांत हो चुका है, अर्थात उसको प्रोत्साहन प्राप्त हो चुका है।

💢वस्तु की आवश्यकता उत्पन्न होने पर उस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए चालक उत्पन्न होता है और जिस वस्तु से आवश्यकता की पूर्ति होती है उसे उद्दीपन या प्रोत्साहन कहते हैं।

🔥Thank you 🔥
🤗handwritten by-Shikhar Pandey🙏

By admin

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