🔆थार्नडाइक के सीखने के नियम🔆

❇️गौण नियम /सहायक नियम /द्वितीयक नियम

थोर्नडायक द्वारा सीखने के नियम के अंतर्गत  कुल 5 गौण नियम दिए गए जो कि निम्नानुसार है।

⚜️1 बहु प्रतिक्रिया का नियम

⚜️2 मनोवृति का नियम

⚜️3 आंशिक क्रिया का नियम

⚜️4 आत्मीकरण/अनुरूपता/सादृश्यता का नियम 

⚜️5 संबंधित परिवर्तन का नियम /साहचर्य परिवर्तन का नियम

🌺1 बहु प्रतिक्रिया का नियम ( Low of multiple response )➖

▪️जब हम कोई नया कार्य करते हैं तो उस कार्य को पूरा करने में कई प्रक्रियाओं या कई तरीकों को अपनाते हैं और उन सभी प्रक्रियाओं में से एक उचित प्रक्रिया का पता लगाकर भविष्य में उस से काम लेते हैं।

या

▪️किसी भी नए कार्य को करने के लिए हमारे पास नए-नए ऑप्शन या विकल्प होते हैं हमें इन्ही उचित ऑप्शन है विकल्प को चुनकर कार्य को संपन्न करते हैं।

 ▪️अर्थात जब कोई नया कार्य करने के लिए हम कई प्रकार की प्रतिक्रिया को अपनाते हैं और उसमें से सही प्रतिक्रिया का पता लगाकर उसका भविष्य में काम लेते हैं तब यह नियम बहु प्रतिक्रिया का नियम कहलाता है।

▪️अतः जब हम कोई नया कार्य करना सीखते हैं तो उसके प्रति विभिन्न प्रकार की क्रियाएं करते हैं इनमें से कुछ क्रियाएं लक्ष्य प्राप्ति में सहायक नहीं होती हैं तो उन्हें हम छोड़ देते हैं और फिर भूल जाते हैं और उन्हीं क्रियाओं का चयन करते हैं जो हमारी लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होती है।

🌺2 मनोवृति का नियम (law of attitude)➖

▪️मनोवृति हमारी अपनी मंशा या अपनी सोच पर निर्भर करती हैं।

▪️अर्थात मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। अर्थात  यदि हमने मन में हार सोच ली है तो हार निश्चित है और यदि जीत सोच ली है तो जीत निश्चित है।

▪️किसी भी कार्य को  सफल रुप से करना हमारे मन पर निर्भर या आधारित होता है।

▪️किसी कार्य को जिस मनोवृति (मन या मेहनत) से करेंगे हमें वैसे ही सफलता मिलेगी।

अर्थात जिस कार्य को जिस मन से किया जाएगा उस कार्य में वैसे ही सफलता प्राप्त होगी।

▪️यदि हम मानसिक रूप से किसी कार्य को करने के लिए तैयार नहीं है तो या तो हम उसे करने में असफल होते हैं या उस कार्य में अनेक त्रुटियां करते हैं या उस कार्य को विलंब से या देरी से करते हैं।

▪️अर्थात जिस कार्य  के प्रति हमारी अभिवृत्ति या मनोवृत्ति रहती है उसी अनुपात में हम उसको सीखते हैं। अनुकूल मनोवृत्ति होने पर बालक शीघ्र सीखता है तथा प्रतिकूल मनोवृत्ति होने पर बालक के सीखने में बाधाएँ आती हैं।

🌺3 आंशिक क्रिया का नियम (law of partial activity)➖

▪️किसी काम को पूरा एक साथ सीखना थोड़ा कष्टप्रद होता है। अर्थात पूरे कार्य को एक साथ सीखने से अच्छा उस कार्य को अंशो में विभाजित करके सीखा जाए। कार्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर उसे सीखना, उस कार्य को आसान बना देता है।

▪️इस नियम के अनुसार किसी कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करने से कार्य सुविधाजनक और सरल बन जाता है। इन सभी छोटे-छोटे भागों को शीघ्रता से और सुगमता से करके संपूर्ण कार्य को पूरा किया जाता है।

▪️अर्थात किसी कार्य को जब छोटे-छोटे भागों में बांट कर किया जाता है तो उस कार्य में अधिक सफलता प्राप्त होती है।

▪️जैसा कि हम जानते हैं कि कोई भी व्यक्ति संक्षेप में किसी समस्या के उपस्थित होने पर उसके अनावश्यक विस्तार को छोड़कर उनकी मूल तत्व पर अपनी अनुक्रिया केंद्रित कर लेता है।

और जब व्यक्ति की अनुक्रिया केंद्रित हो जाती है तो समस्या का उचित समाधान निकल आता है।

▪️शिक्षक कक्षा कक्ष में पाठ योजना को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके छात्रों को आसानी से एवं सरलता से शिक्षण कार्य कर सकता है।

🌺4 आत्मीकरण /अनुरूपता/सादृश्यता /समानता का नियम (law of analogy)➖

▪️इस नियम से तात्पर्य है कि किसी नवीन क्रिया के सीखने के पूर्व सीखें हुई की सहायता लेना।

▪️  किसी भी नए कार्य को करने के लिए हम किसी पूर्व कार्य के अनुभव ,ज्ञान या उसी के समान या उसी के अनुरूप या उसी के सदृशयो को नवीन कार्यों को करने में प्रयोग में लाते हैं।

▪️यही आत्मीकरण या अनुरूपता या सादृश्यता या समानता का नियम कहलाता है।

▪️अर्थात नया कार्य करने पर किसी पुराने किए गए कार्य का ज्ञान नए कार्य में मिला देना सादृश्यता अनुरूपता या आत्मी करण का नियम कहलाता है।

▪️इस नियम का आधार  पूर्व ज्ञान या पूर्व अनुभव है किसी नवीन परिस्थितियां या समस्या के उत्पन्न होने पर व्यक्ति उससे मिलती-जुलती परिस्थितियां या समस्या को स्मरण या याद कर लेता है जिससे कि वह पहले गुजर चुका है।

▪️छात्र नवीन परिस्थिति में वैसे ही अनुक्रिया करता है जैसी उसने पुरानी परिस्थितियों में की थी। आसान तत्व के आधार पर नवीन ज्ञान को पूर्व ज्ञान से संबंध कर या जोड़कर सिखाने से सीखना सरल हो जाता है।

🌺 5 संबंधित परिवर्तन का नियम/ साहचर्य परिवर्तन का नियम➖

(Law of association shifting)

▪️इस नियम के अनुसार किसी भी कार्य को करने की क्रिया का रूप वही रहता है लेकिन उस कार्य की परिस्थिति या वजह बदल जाती है।

▪️जैसे भोजन सामग्री को देखकर कुत्ते के मुंह से लार टपकने लगती हैं लेकिन कुछ समय बाद खाने के प्याले को ही देखकर लार टपकने लगती हैं।

▪️अर्थात क्रिया वही रही (लार का टपकना) लेकिन परिस्थिति या वजह बदल गई (भोजन के स्थान पर प्याले को देखकर)

▪️अर्थात कोई भी अनुक्रिया जिसे करने की क्षमता व्यक्ति में होती है, उसे एक नए उद्दीपन के द्वारा भी उत्पन्न की जा सकती है। इसमें क्रिया का स्वरूप वहीं रहता है पर परिस्थिति में परिवर्तन हो जाता है।

▪️शिक्षक को कक्षा में अच्छी आदतों एवं सकारात्मक अभिरुचि को उत्पन्न करना चाहिए ताकि छात्र उनका उपयोग अन्य परिस्थितियों में भी कर सकें।

❇️थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत ➖

✨यह “यूएसए” के मनोवैज्ञानिक थे।

✨यह सिद्धांत “1913” में प्रतिपादित किया गया।

✨थार्नडाइक ने “1898 ई”. में अपने पीएचडी शोध प्रबंध जिसका शीर्षक “एनिमल इंटेलिजेंस” था इसमें पशु व्यवहारों के अध्ययन के फल स्वरूप ही इन्होंने सिद्धांत दिया।

✨थार्नडाइक ने अपनी पुस्तक ‘शिक्षा मनोविज्ञान’ (education psychology)मे सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।

✨थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त का मुख्य प्रयोग “भूखी बिल्ली” पर किया।

✨थार्नडाइक के इस प्रयोग में भूखी बिल्ली के लिए उद्दीपक “मछली या मांस का टुकड़ा” था।

❇️थार्नडाइक के सीखने के सिद्धांत के अन्य नाम या उप नाम -➖

📍(1)उद्दीपन अनुक्रिया सिद्धांत

📍(2) प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत

📍(3) संयोजन वाद का सिद्धांत

📍(4) अधिगम का बंध सिद्धांत

📍(5) प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत

📍(6) उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत (stimulus response theory)

📍(7)  एस आर थ्योरी

📍(8) संबंध वाद का सिद्धांत

📍(9) आवृत्ति का सिद्धांत

✍️

      Notes By-‘Vaishali Mishra’

☘️थार्नडाइक के गौण नियम☘️

💫1-बहु प्रतिक्रिया का नियम➖ इस नियम के अनुसार जो व्यक्ति के सामने कोई भी समस्या आती है तो वह उसे समझाने के लिए अनेक प्रकार की अनुक्रिया करता है और इन अनु क्रियाओं के करने का क्रम तब तक चलता रहता है 

जब तक वह सही अनुक्रिया के रूप में समस्या का समाधान नहीं कर लेता इस प्रकार अपनी समस्या को सुलझाने में व्यक्ति संतोष का अनुभव करता है।

💫2-मनोवृति का नियम➖

किसी कार्य को जिस मनोवृति (मन मेहनत )से करेगा वैसी ही सफलता मिलेगी हम किसी भी कर्म को उस समय तक ठीक से नहीं  सीख पाते हैं जब तक कि हमारा दृष्टिकोण स्वस्थ एवं विकसित मनोवृति का नहीं होता है।

💫3-आंशिक क्रिया का नियम➖ किसी कार्य को छोटे-छोटे भागों में बांट कर किया जाता है तो उस कार्य में अनेक सफलता मिलती है और शीघ्रता से सीखा जा सकता है।

💫4-आत्मीकरण का नियम (अनुरूपता सदृश्यता)➖ इस नियम का आधार पूर्व अनुभव है। कोई नया कार्य करने पर किसी पुराने कार्य के किए गए उसका ज्ञान नए कार्य में मिला देना।

💫5-संबंधित परिवर्तन का नियम ( साहचर्यात्मक स्थानांतरण)➖ क्रिया का रूप तो रखा जाता है लेकिन परिस्थिति में परिवर्तन कर दिया जाता है इस नियम के अनुसार जो अनुक्रिया किसी एक उत्तेजक के प्रति होती है वही अनुक्रिया बाद में उस उत्तेजना से संबंधित तथा किसी अन्य उद्दीपक के प्रति भी होने लगती है।

☘️थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत☘️

🔸थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत सन् 1913 में अमेरिका दिया गया।

🔸 थार्नडाइक ने Education psychology पुस्तक लिखी।

🔸थार्नडाइक ने भूखी बिल्ली पर प्रयोग किया इस प्रयोग में उद्दीपक था मछली या मांस का टुकड़ा

☘️थार्नडाइक के सिद्धांत के उपनाम☘️

🟣 प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत

🟣 प्रयत्न और भूल का सिद्धांत

🟣 उद्दीपन अनुक्रिया

🟣 संबंध वाद का सिद्धांत

🟣 आवृत्ति का सिद्धांत

🟣 अधिगम का बंध सिद्धांत

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

*थार्नडाइक के गौण नियम*

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थार्नडाइक के निम्नलिखित 5 गौण नियम है………

1. बहु प्रतिक्रिया का नियम (law of multiple responses)

2. मनोवृति का नियम (law of attitude)

3. आंशिक क्रिया का नियम (law of selective response)

4. समानता का नियम (law of analogy)

5. साहचर्य परिवर्तन का नियम (law of association shifting)

*1. विविध प्रतिचारों का नियम/बहु प्रतिक्रिया का नियम (law of multiple responses)*

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इस नियम के अनुसार जब व्यक्ति के सामने कोई भी समस्या आती है, तो वह उससे सुलझाने के लिए अनेक प्रकार के अनुक्रिया करता है और इन अनुक्रियाओ के करने का क्रम तब तक चलता रहता है जब तक वह सही अनुक्रिया के रूप में समस्या का समाधान नहीं कर लेता इस प्रकार अपनी समस्याओं को सुलझाने में व्यक्ति संतोष का अनुभव करता है।

असफल होने के बाद व्यक्ति को हतोत्साहित नहीं होना चाहिए बल्कि एक के बाद एक उपाय करना चाहिए

जब तक कि सफलता प्राप्त ना हो जाए। यह नियम *प्रयत्न एवं भूल सिद्धांत* पर आधारित है।

*2. मनोवृति का नियम/ अभिवृत्ति का नियम (law of attitude)*

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किसी कार्य को जिस मनोवृति से किया जाता है वैसा ही सफलता भी मिलता है। हम किसी कार्य को उस समय तक नहीं सीख सकते, जब तक कि हमारा दृष्टिकोण स्वस्थ एवं विकसित मनोवृति का नहीं होता।

व्यक्ति को सीखने की ओर अभि प्रेरित करने के लिए पूर्व अनुभव, आत्मविश्वास, मनोवृत्तियां और पूर्व वृत्तियां आदि पूर्ण सहायता देती हैं।

इस नियम को *तत्परता या अभिवृत्ति का नियम* भी कहते हैं।

इस नियम के अनुसार यदि व्यक्ति मानसिक रूप से सीखने के लिए तैयार है, तो नवीन क्रिया को आसानी से सीख सकता है।

और यदि वह मानसिक रूप से सीखने के लिए तैयार नहीं है तो उस कार्य को नहीं सीख सकेगा। निद्रा, थकावट, आकांक्षाएं, भावनाएं, आदि सभी हमारी मनोवृति को प्रभावित करती है।

*3. आंशिक क्रिया का नियम/वर्णनात्मक अनुक्रिया का नियम (law of selective response)*

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किसी कार्य को छोटे-छोटे भागों में बांट कर किया जाता है तो उसका कार्य को सीखने में शीघ्र ही सफलता मिलती है। इस नियम में *अंश से पूर्ण की ओर* शिक्षण सूत्र का अनुसरण किया जाता है।

*4. समानता का नियम/आत्मीकरण का नियम (law of analogy)*

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इस नियम का आधार पूर्व अनुभव है। किसी नवीन परिस्थिति या समस्या के उपस्थित होने पर व्यक्ति उससे मिलती-जुलती अन्य परिस्थिति या समस्या का स्मरण करता है जिससे वह पहले ही गुजर चुका है। उदाहरण-

जब कोई बच्चा पूर्व में साइकिल चलाना सीख चुका था उसके आधार पर ही वह बाइक चलाना भी सीख लेता  है। यह नियम *ज्ञात से अज्ञात की ओर* शिक्षण सूत्र पर आधारित है।

*5. साहचर्य परिवर्तन का नियम/संबंधित परिवर्तन का नियम/साहचर्य आत्मक स्थानांतरण (law of association shifting)*

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इस नियम के अनुसार जो अनुक्रिया किसी एक उत्तेजक के प्रति होती है वही अनुक्रिया बाद में उस उत्तेजना से संबंधित तथा किसी अन्य उद्दीपक के प्रति भी होने लगती है। यह नियम *पावलव* के *साहचर्य के द्वारा सीखने के सिद्धांत* पर आधारित है।

इसमें सीखने की अनुक्रिया का स्थान परिवर्तन होता है यह स्थान परिवर्तन मूल उद्दीपक से जुड़ी हुई अथवा उसकी किसी सहचारी उद्दीपक वस्तु के प्रतिक्रिया करता है।

उदाहरण,

भोजन सामग्री को देखकर कुत्ते के मुंह से लार का टपकना लेकिन कुछ समय बाद खाने के प्याले को देखकर ही लार टपकने लगना।

*E. L. Thorndike का सीखने का सिद्धांत*

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यह सिद्धांत सन 1913 ई. में अमेरिका में दिया गया था। थार्नडाइक ने अपनी पुस्तक *”शिक्षा मनोविज्ञान” (education psychology)* में सीखने का सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसे *thorndike theory of learning* के नाम से जाना जाता है।

*इस सिद्धांत के उपनाम* निम्नलिखित है……….✍️

⚡ प्रयास एवं भूल का सिद्धांत

⚡ उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत

⚡ संबंधवाद का सिद्धांत

⚡ आवृत्ति का सिद्धांत

⚡ अधिगम का बंध सिद्धांत

*Notes by Shreya Rai*…….✍️🙏

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