✍🏻manisha gupta ✍🏻 💫 भावात्मक, सकारात्मक, भावनात्मक डोमेन (Affective domain) 💫 ⬇️

जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति में रूचि अलग-अलग होती है यदि दो व्यक्तियों का ज्ञानात्मक पक्ष समान है लेकिन दोनों की रूचि अलग-अलग है तो उस रूचि के आधार पर व्यक्ति की भावना नजरिया भी अलग अलग होता है तो ऐसा हम कह सकते हैं कि हमारी रूचि का ज्ञानात्मक पक्ष पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

➖ जैसे दो बच्चे हैं दोनों का ज्ञान बराबर है लेकिन दोनों की रूचि अलग-अलग है तो दोनों का ज्ञान भी रुचि के आधार पर अलग-अलग होगा।

➖ भावनात्मक डोमेन के अंतर्गत वे सभी उद्देश्य शामिल होते हैं जिनका संबंध बालक की रूचि ,अभिवृत्ति ,भावना, संवेदना, मूल्य से होता है।

🌈भावनात्मक डोमेन को प्रभावित करने वाले कारक🌈
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🌸 रुचि/ अभिरुचि➖ ‌‌ रुचि अभिरुचि अर्थात नजरिया, सोच अर्थात हम किसी चीज को देखकर एक सोच या इमेज,या नजरिया बना लेते हैं कि वह चीज कैसा है इस आधार पर हम कह सकते हैं कि जैसे ही हमारी सोच होगी वैसे ही हमारी रुचि भी होगी।

➖ यदि किसी व्यक्ति के पास ज्ञान तो बहुत है लेकिन वह अभिरुचि के आधार पर ही उस ज्ञान को इंप्लीमेंट कर सकता है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि रुचि भावनात्मक पक्ष के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।हमारी अभिरुचि ही डिसाइड करती है कि हमारा भाव कब, क्या, कैसे होगा। रुचि के आधार पर ही हमारा भाव अलग- अलग होता है।

🌸 अभिवृत्ति/मनोवृति➖ अभिवृत्ति या मनोवृति भावनात्मक पक्ष का अहम हिस्सा है यह हमारे संज्ञानात्मक पक्ष को भी प्रभावित करता है।

➖ जैसे किसी व्यक्ति के पास संज्ञान तो है लेकिन यदि उसके भाव अलग-अलग हैं तो उसकी अभिवृत्ति भी अलग अलग होगी। अतः हम कह सकते हैं कि कि हमारी अभिवृत्ति का संज्ञान पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

➖ जैसा कि हम देखते हैं कि कि हम अलग अलग चीजों को देखकर हमारे मन में अलग-अलग आवृत्ति उत्पन्न होती है तो यह आवृत्ति हमारी भावना से ही आती है।

🌸 भावना➖ भावना भी संज्ञानात्मक पक्ष को प्रभावित करती है। एक ही व्यक्ति में अलग-अलग भावनाएं होती हैं।

➖ जैसे एक मां चाहती है कि उनकी बेटी अपने पति को कंट्रोल कर के रखे लेकिन वही मां यह भी चाहती है कि उनका बेटा अपनी पत्नी के कंट्रोल में ना रहे। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि एक ही व्यक्ति में किसी एक कांसेप्ट को लेकर अलग-अलग भावना होती है।

🌸 संवेदना➖ ‌‌ अगर किसी चीज को लेकर हम संवेदनशील है ।और यदि हमारी संवेदना किसी के साथ हैं उस परिस्थिति के आधार पर उस व्यक्ति के लिए हमारी संवेदनाएं या sympathy भी अलग -अलग हो जाती है।

➖जैसे किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट होता है और उस व्यक्ति के साथ हमारा कोई संबंध नहीं है तो उस व्यक्ति के प्रति हमारी संवेदना भी नहीं होगी, और हम उसी स्थिति में उस व्यक्ति को छोड़ कर चले जाते हैं, लेकिन यदि जिस व्यक्ति के एक्सीडेंट हुआ है उससे हमारा कोई संबंध है तो हमारी संवेदना भी उस व्यक्ति के प्रति होगी। कहने का अर्थ यह है की दो अलग-अलग व्यक्तियों के लिए संवेदना भी अलग अलग हो जाती हैं और यह संवेदना भी ज्ञानात्मक पक्ष पर बहुत अधिक भूमिका निभाती है।

🌸 मूल्य (value, ethics)➖ यदि किसी व्यक्ति के पास संज्ञान तो संपूर्ण हैं लेकिन मूल्य हमें यह बताती है कि वह ज्ञान ठीक है या नहीं मूल्य वह चीज है जो बाह्य कारक से प्रभावित ना हो।

➖ जैसे यदि हम किसी एग्जाम हॉल में बैठकर एग्जाम दे रहे हैं और हमारा कोई दोस्त हमें नकल करने के लिए मजबूर करता है तो हमारा मूल्य हमें यह बताता है कि यह ठीक नहीं है तो कहने का अर्थ यह है कि हमारा मूल्य सही गलत डिसीजन लेना बताती है,कि हमारे लिए क्या सही है और क्या सही नहीं है।
🍁 भावनात्मक पक्ष में यह सारे उद्देश्य शामिल होते हैं🍁

🌈 भावनात्मक पक्षियों के उद्देश्यों के स्तर पर इन्हें 5 वर्गों में विभाजित किया जाता है जो इस प्रकार से हैं🌈

1️⃣ अधिग्रहण करना/ प्राप्त करना(receive )➖ यह भावनात्मक पक्ष का प्रथम या निम्नतम स्तर है यह संज्ञानात्मक पक्ष के प्रथम स्तर ज्ञान के जैसा ही है लेकिन इस ज्ञान में अंतर यह है कि संज्ञानात्मक पक्ष के ज्ञान में अवधारणा ,विचार आदि सम्मिलित होते हैं लेकिन भावनात्मक पक्ष के ज्ञान के अंतर्गत कोई भी चीज हम ग्रहण करते हैं या प्राप्त करते हैं तो उसके प्रति हमारा संवेदनशील होना जरूरी है और सीखने के इच्छुक होना भी आवश्यक है तो हम उस चीज को अवश्य ही प्राप्त कर सकते हैं।

➖ यदि हम किसी से कुछ पूछते हैं या किसी से कुछ जानकारी ग्रहण करना चाहते हैं तो हमें में उस जानकारी को जानने की जिज्ञासा होनी चाहिए,इच्छा होनी चाहिए।

2️⃣ अनुक्रिया/ प्रतिक्रिया/ जवाब(responding )➖ विद्यार्थी जिस चीज को प्राप्त कर चुके हैं उस चीज के प्रति अनुक्रिया या प्रतिक्रिया स्वयं ही देते हैं तो हमारा पूर्ण तरह से उस चीज के प्रति संलग्न हो जाना आवश्यक है और यदि हम अपनी संतुष्टि के लिए कार्य करते हैं तो उस कार्य में पूर्ण रूप से व्यस्त हो जाना चाहिए या उस कार्य में पूर्ण रूप से अपने आप को involve कर लेना चाहिए तभी हम प्रतिपुष्टि प्रदान कर पाएंगे।

3️⃣ मूल्य निरूपण /बातों का महत्व ➖ मूल्यों का निरूपण दो उद्देश्यों के आधार पर होता है प्रथम -मूल्य आंकना, द्वितीय -मूल्यों का संधारण करना

➖ मूल्य आंकना (judge) :-. जिस परिस्थिति में हम कोई चीज ग्रहण करते हैं और कुछ प्रतिक्रिया देकर वरीयता (Preference)देते हैं उसके प्रति हम वचनबद्धता(commitment) देते हैं। मूल्य व्यक्ति के विश्वास एवं सोच पर आधारित होता है इसका संबंध मूल्यों के प्रति हमारी कितनी स्वीकृति है या हम उस चीज से कितने सहमत हैं इसके अंतर्गत आता है। हम किसी चीज को वरीयता देकर उस चीज पर commitment देकर ही मूल्य को आंक सकते हैं।

➖ मूल्य का संधारण करना:-जो भी हमने पुराना ज्ञान ग्रहण किया है उससे नये ज्ञान नये मूल्यों को पुराने ज्ञान से संबंधित करके maintenance करने का प्रयास करते हैं कोई चीज हमारे लिए कितनी valuable है इसके अंतर्गत हम उस चीज का पता लगा लेते है। किसी भी चीज के बारे में मूल्यों को आंककर और उसके पश्चात मूल्यों का संधारण करके मूल्यों का निरूपण कर सकते हैं।

4️⃣ मूल्यों का संगठन /आयोजन करना (organization)➖ ‌‌ जिन मूल्यों को संधारण करके स्थापित कर लिया गया है उसे संगठित करना आवश्यक है मूल्यों को संगठित करने से ही एक मूल्य प्रणाली का निर्माण होता है तब व्यक्तियों में इन मूल्यों के प्रति अंतर्द्वंद समाप्त हो जाता है और जो हमने मूल्यों के प्रति राय बना ली है तभी हम उस मूल्य से अंर्तसंबंध , सामंजस्य स्थापित कर पाते हैं।

5️⃣ चरित्रीकरण और निरूपण ➖ यह भावनात्मक स्तर के उद्देश्यों के वर्गीकरण में उच्चतम स्थान रखता है इस स्तर में जो हमने मूल्यों को संगठित किया है उसे पूर्ण रूप से ग्रहण कर चुके होते हैं तो इस आधार पर ही हमारा व्यवहार भी नियंत्रित होता है मूल्यों का निरूपण ही हमारे व्यवहार को नियंत्रित करता है और इससे हमारा सेल्फ कॉन्फिडेंट भी बढ़ जाता है। और हम दृढ़ विश्वास से मूल्यों का निरूपण करके अपने व्यवहार को नियंत्रित या बैलेंस कर पाते हैं।

🌈🌸✍🏻🍁✍🏻🌸🌈🔹


ब्लूम टेक्सनॉमी
Taxonomy of education objective

1956 मे बेंजामीन ब्लूम ने सिखने सिखाने के लक्ष्य (शैक्षिक उद्देश्य) का वर्गीकरण किया। शैक्षिक उद्देश्य को मानकीकृत किया।
कैसे संप्रेषित किया जाए की आसानी से शुद्धता के साथ समझ मे आये की हम क्या सिखाना या सिखना चाहते हैं
हम ज्ञान को भावनात्मक रूप से क्रिया करके प्राप्त करते हैं।
ब्लूम ने शैक्षिक उद्देश्य को तीन भागो ( डोमेन / क्षेत्र) में वर्गीकृत किया

  1. संज्ञानात्मक डोमेन
  2. भावात्मक डोमेन
  3. क्रियात्मक डोमेन
  4. संज्ञानात्मक डोमेन – संज्ञानात्मक डोमेन हमारे मानसिक कौशल से जुड़ा हुआ है। इसके छः स्तर है –
  5. ज्ञान knowledge
  6. समझ /बोध /अवबोध understanding, comprehension
  7. अनुप्रयोग / प्रयोग / आवेदन application
  8. विश्लेषण analysis
  9. संश्लेषण synthesis
  10. मूल्याकंन evaluation
  11. ज्ञान – यह संज्ञानात्मक डोमेन का निम्न स्तर हैं।
    💎 विशिष्ट तत्व का ज्ञान
    💎शब्दावली का ज्ञान
    💎 तथ्यों का ज्ञान
    💎 संकेत का ज्ञान
    💎 परम्पराओ का ज्ञान
    💎प्रवृत्ति या क्रम का ज्ञान
    💎 मापदंड या कसौटी का ज्ञान
    💎 विधि का ज्ञान
    💎 श्रेणीकरण या वर्गीकरण का ज्ञान
    💎नियम और सिध्दांत का ज्ञान
  12. अवबोध – नये ज्ञान के प्रति समझ विकसित करना ही अवबोध है या नये ज्ञान को ग्रहण करना ही अवबोध है।
  13. अनुप्रयोग – समझे हुए ज्ञान का प्रयोग /उपयोग किसी नयी समस्या का समाधान करने के लिए करते हैं।
  14. विश्लेषण – निर्मित करने वाले तत्वों में विभाजित करना।
  15. संश्लेषण – विभाजित किये हुए तत्वों में से सही गलत को चुन कर जोडना।
  16. मूल्यांकन – यह संज्ञानात्मक डोमेन का सर्वोत्तम / उच्च स्तर है। विचारों या सामग्रियों के मूल्य पर निर्णय या प्रतिपुष्टि देना। यह मानदंड पर आधारित होता है।
  17. भावात्मक डोमेन –
    सकारात्मक, भावनात्मक डोमेन affective domain भावनात्मक डोमेन निम्न कारको से प्रभावित होता है –
    रूचि, अभिवृत्ति, भावना, संवेदना, मूल्य

भावात्मक डोमेन के उद्देश्य के स्तर –

  1. अभिग्रहण करना या प्राप्त करना receive

किसी चीज या जानकारी या तथ्य को हम अपनी इच्छा, रुचि और संवेदनशीलता से ग्रहण करते है।

  1. अनुक्रिया, प्रतिक्रिया, जवाब responding

जानकारी प्राप्त करने के बाद हम अपनी रुचि के अनुसार उस पर जबरदस्त प्रतिक्रिया या अनुक्रिया करते हैं।

मूल्य निरूपण या बातो का महत्व values

किसी कार्य या चीज से सहमत हैं या नहीं या उसका कितना महत्व है या नहीं उसका मूल्य निरूपण कहलाता हैं।
मूल्य को दो प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –

  1. मूल्य को आकना Judge – मूल्य को ग्रहण करेगे
    वरीयता देगे और
    वचनबद्ध करना
  2. मूल्य का संधारण करना maintenance – मूल्यों को बनाये रखना आवश्यक है।
  3. संगठन organization – मूल्यों का निर्धारण करने के बाद मूल्यो संगठित करना बहुत आवश्यक है।

5.निरुपण,चरित्रीकरण characterizing – संगठित हुए मूल्यो को पूर्ण रूप से ग्रहण करना और अपने व्यवहार के नियंत्रण में लाना।

रवि कुशवाह


✍🏻Notes By-Vaishali Mishra

ब्लूम की शिक्षण व्यवस्था (Bloom Taxonomy)

🔅 द्वितीय पक्ष➖

भावनात्मक पक्ष /भावात्मक/सकारात्मक/Affective domain➖
भावनात्मक रूप से कई स्तर या कारक बच्चे को प्रभावित करते है जो निम्न प्रकार है।
1 रुचि
2 अभिवृति
3 भावना
4 संवेदना
5 मूल्य
उपरोक्त पांचों कारकों का वर्णन निम्न प्रकार है।
1रुचि➖रुचि के अनुसार ही हम अपने कार्य को करते है ।यदि हम कुछ सीखते चाहते है तो यह हमारी रुचि और इच्छा पर निर्भर करता है।
रुचि ज्ञान को प्रभावित करता है। यदि किसी व्यक्ति की रुचि अलग अलग प्रकार की है तो उस व्यक्ति का ज्ञान भी अलग अलग प्रकार का होता है।

2 अभिवृति ➖ जैसी हमारी सोच,नजरिया,किसी के प्रति धारणा होगी हम वैसा ही देखते है और उसी प्रकार से ज्ञान अर्जन करते है।
हर व्यक्ति का नजरिया अलग अलग होता है।यदि हमारे पास ज्ञान है और उस ज्ञान के प्रति हमारा नजरिया या अभिवृति अलग है तो उससे हमारा ज्ञान या संज्ञान को भी प्रभावित करेगा।

3 भावना➖अलग अलग भावनाए भी ज्ञान को प्रभावित करती हैं।यदि भावनाए अलग अलग है तो ज्ञान भी अलग अलग प्रकार से होगा।

4 संवेदना➖यदि हमारी किसी कार्य के साथ होती है तो उस स्थिति में उस कार्य के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी अलग अलग हो जाती है।

5 मूल्य➖हमारे मूल्य ही हमारे कार्य के सही या ग़लत होने की पहचान करवाते है।यदि हमारे पास ज्ञान है तो उस ज्ञान का सही जगह प्रयोग ,सही रूप से किस तरह करना है यह हमारे मूल्य ही बताते है।हमारे मूल्य हमे किसी गलत कार्य को करने से रोकते है।
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भावनात्मक पक्ष के उद्देश्य के स्तर
1 अभिग्रहण करना या प्राप्त करना
2 अनुक्रिया /प्रतिक्रिया/ज़बाब देना
3 मूल्य निरूपण या बातो का महत्व
4 संगठन या आयोजन/organization
5 निरूपण/चरित्रिकरण/characterization
उपर्युक्त स्तरो का वर्णन निम्न प्रकार से है।
1️⃣ अभिग्रहण करना/प्राप्त करना➖यदि हम किसी ज्ञान को ग्रहण करना या प्राप्त करना चाहते है तो इसके लिए हमें उस ज्ञान के प्रति हमारी इच्छा ,संवेदना, जिज्ञासा है तो हम उस ज्ञान को ग्रहण कर पाते है।

2️⃣ अनुक्रिया/प्रतिक्रिया/ज़बाब देना/Responding
जो ज्ञान हम प्राप्त या ग्रहण कर लेते है उस ज्ञान पर प्रतिक्रिया देते है।
जैसे जब हम क्लास में होते है तो ज्ञान लेते है और अपनी प्रतिक्रियाएं commnent या feedback के रूप में बताते है। अर्थात हम उस ज्ञान या कार्य में पूरी तरह से शामिल या संलग्न होते है।
3️⃣ मूल्य निरूपण/बातो का महत्व➖ जिस ज्ञान को हम ग्रहण कर लेते है उस पर प्रतिक्रिया देते है और उसका निरूपण दो तरह से करते है।
1 मूल्य को आंकना (value judgement)
2 मूल्य का संधारण करना (value maintenance)

1 मूल्य आंकना- जब हम ज्ञान ग्रहण करते है तो उस समय हम स्थिति या कार्य के अनुसार ज्ञान को महत्व देते है।तीन तरह से –

  • ग्रहण करना
    *वरीयता प्रदान करना
    *वचन वद्धता निभाना।
    मूल्यों को आंकना व्यक्ति के विश्वास ओर सोच पर निर्भर करता है। किसी बात का मूल्य कितना है यह व्यक्ति द्वारा स्वीकार किया गया है या नहीं इस बात पर निर्भर करता है।

2 मूल्य का संधारण करना – जो भी हमारे पास नए मूल्य आए है उन सही मूल्यों को पुराने मूल्यों से पहचान कर अपने दिमाग में व्यवस्थित कर लेते है।

जो भी बात या ज्ञान हम ग्रहण करते हैं फिर उस बात पर प्रतिक्रिया देते है।फिर उस बात का आंकन करते है और अपने दिमाग में कहा पर रखना है या व्यवस्थित करना है उसका निरूपण करते है।
कभी कभी ऐसा भी होता है हम किसी कार्य या बात को ज्यादा महत्व या वरीयता दे देते है और बाद में महसूस करते है कि उस बात की या कार्य की हमारे लिए कोई ज्यादा वैल्यू या मूल्य ही नहीं था।

4️⃣ संगठन/आयोजन/organization
उपर्युक्त समस्त स्तर पूरे होने के बाद हम जो कार्य कर रहे होते है उस कार्य को अपने दिमाग में एक व्यवस्थित और स्पष्ट रूप से संगठित कर लेते है।
संगठन हो जाने के बाद हमारे दिमाग ने जो भी मूल्यों के प्रति मानसिक द्वद
(सही या ग़लत) होते है वह पूरी तरह से खत्म हो जाते है।
संगठन हो जाने पर एक ऐसी प्रणाली का निर्माण हो जाता है जिसके द्वारा हम एक स्पष्ट ज्ञान को अपना लेते है।

5️⃣ निरूपण / चारित्रिकरण /chatacterization➖अब जो भी मूल्य वर्गीकृत हुआ है उसे पूर्ण रूप से ग्रहण कर लेते है। और यह इसमें लगे मूल्य हमारे व्यवहार में महत्वपूर्ण भूमिका योगदान देते है।
मूल्य ही हमारे व्यवहार का अनुसरण करते है और हमारे गलत या सही व्यवहार को नियंत्रित करते है।
यदि हमारे दिमाग में किसी वस्तु का कोई ज्ञान संगठित हो जाता है तो उस वस्तु की छवि दिमाग में बन जाती है तो उस छवि के अनुसार ही अपने व्यवहार का अनुसरण व नियंत्रण करने लगते है।इससे हमारे अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है कि जब भी हम इस कार्य को करेंगे तो यह हमारे दिमाग में संगठित है और उसका नियंत्रण भी अब हमारे हाथों में है।


✍Menka patel
🌈भावनात्मक
सकारात्मक भावनात्मक डोमेन🌈

जैसे हम जानते हैं कि हर व्यक्ति की अपनी एक जो चीज होती है और व्यक्ति ही सोचने का नजरिया भी अलग अलग होता है उनके ज्ञानात्मक पक्ष समान होता है लेकिन उनकी रुचियां अलग-अलग होती हैं

☄भावनात्मक डोमेन को प्रभावित करने वाले कारक
1 रुचि interest
2 अभिव्यक्ति/ मनोवृत्ति
3 भावना
4 संवेदना
5 मूल्य
🌟 भावनात्मक पक्षयों के उद्देश्यों के स्तर पर इन पांच भागों में विभाजित किया गया है जो निम्न प्रकार है
👉 अधिग्रहण करना/ प्राप्त करना
या भावनात्मक पक्ष के प्रथम स्तर ज्ञान की जैसी ही है लेकिन इस ज्ञान में इतना अंतर है कि इसमें संज्ञानात्मक पक्ष की विचार आदि सम्मिलित होते हैं और भावनात्मक ज्ञान के अंतर्गत कोई चीज को हम सीखते हैं जब उसे प्राप्त करते हैं तो वह हमारे लिए संवेदनशील होती है और उसकी हमें आवश्यकता होती है
👉 अनुप्रिया प्रतिक्रिया जवाब जो हम किसी चीज को प्राप्त करते हैं तो उस चीज के प्रति हम अनुप्रिया करते हैं और जवाब देते हैं यदि हम अपनी संतुष्टि के लिए किसी कार्य को करते हैं तो काम के प्रति अपने आप को पूर्ण रूप से लग जाते हैं हम अपनी पुष्टि प्रधानता देते हैं

👉 मूल्य निरूपण – जब हम किसी चीजों को प्राप्त कर लेते हैं तब हम उसके बारे में सुनते हैं किसको कितनी बारिश आ देनी है या कितना महत्वपूर्ण हैं उसी के आधार पर हम मूल निरूपण करते हैं

👉 संगठन /आयोजन-
हम उस चीज को संगठित कर लेते हैं यह काम हमारा ऐसा होगा
👉 चरित्र करण और निरूपण – है भावनात्मक स्तर के उद्देश्यों का वर्गीकरण करने में आवा बहुत आवश्यक है इस स्थान में जो हम मूल्य को संगठित करते हैं उस रूप में ग्रहण कर चुके होते हैं और हम इस आधार पर व्यवहार का नियंत्रण करते है मूल्य का निरूपण करके अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं


बलूम के वरगीकरण का दूसरा पक्ष-………-भावनात्मक डोमेन- (सकारात्मक डोमेन, भावात्मक डोमेन) ।….. भावनात्मक रुप से कई कारक बच्चे को प्रभावित करते है जो निम्न प्रकार हैं।…..1 रुचि:- हम अपनी रुचि के अनुसार हि कोई कार्य करते है।…..2 अभिवृत्ति:- अभिवृत्ति हमारी सोच ,हमारा नजरिया हैं।(किसी चीज को हम कैसे देखते है)….3 भावना :- हमारी अभिवृत्ति भावनात्मक पक्ष का एक अहम हिस्सा हैं।…..,,भावना के कारण भी संगयानातमक डोमेन मे प्रभाव पड़ता हैं।……4 संवेदना:- जहाँ पर हमारी संवेदना होती है वहाँ पर संवेदना और भाव के कारण भी प्रभाव पड़ता है।……5 मूल्य:- अपने एथिक्स ,,हमारे मूल्य ये बताते है कि नहीं ये गलत है ऐसा नही कर सकते हैं।….* इसमे अच्छा भी आता है और खराब भी कनडीशन के अनुसार सकारात्मक या नकारात्मक होता है।।…………….//भावनात्मक पक्ष के उद्देश्य के सतर//…💐…..1 अभिग्रहण करना :-(प्राप्त करना या रिसीव करना)….2 अनुक्रिया :- (प्रतिकि्या ,जबाब ,रिसपोडिंग)…..3 मूल्य निरुपण:- (बातों का महत्व )..मूल्य को दो भागों में बाटते है;…..1 मूल्य आंकना ।…2 मूल्य का संधारण करना।…**मूल्य को फिर से तीन भागों में बाटा गया है–1 ग्रहण ..2 वरीयता…3 वचनबद्धता ……।।।।।।।।।।ःःःः …..4 संगठन :- (आयोजन)……5 निरुपण:- (चारित्रीकरण,)…. ….×अभिग्रहण किए , फिर अनुकि्या किए उसके बाद मूल्य निरुपण किए उसको संगठन किए फिर अंतिम मे निरुपण या चारित्रीकरण हुआ । जिसके आधार पर वयवहार मे नियंत्रण किया जा सकता हैं। …….By Pragya shukla…..


ब्लूम texonomy
ब्लूम टेक्सओसोनोम का दूसरा छेत्र भावनात्मक डोमेन है
Affective domen
इसके अन्य नाम है
सकारात्मक डोमेन
भावत्मक डोमेन
भाव व रुछि के अनुसार ये दो दोस्तों में अलग अलग हो सकते है
प्रभावित करने वाले कारक
1 रूचि (अभिरुचि):- हर बच्चे की रुचि अलग अलग होती है जिससे उनका ज्ञान व् अलग अलग होता है
उदाहरण के लिए दो जुड़वाँ बच्चे होते है तो व् उनकी रूचि अलग अलग होती है किसी को खाना खाना पसंद है तो किसी को खाना बनाना
100 बच्चों में किसी को 40 नम्बार वरदान है तो किसी को अभिशाप
2 अभिवृति (सोच ,नजरिया) :- किसी भी विषय के लिए हमरा नजरिया हमारी सोच बहुत मेंटर करता है
एक समस्या को देखने का नजरिया दो लोगो का अलग लग हो जाता है परंतु कभी कभी ऐसी परिस्थितियां अति है कि एक ही व्यक्ति का नजरिया एक ही समस्या के लिए अलग अलग हो जाता है
नोट :- हमारी अभिवृति अहम हिस्सा है ये संज्ञानात्मक को व् प्रभावित करती है
3 भावना :- हमारी भावना का रोल बहुत होता है किसी कार्य को करने सिखनेके लिए हमारी भावनाये जुडी होती है
4 संवेदना:- हमारी संवेदना जिससे जुडी होती है हम उसे दुखी नही देख पाते जैसे यदि सड़क पर कोई हादसा हो गया यदि वो व्यकि हमारी पहचान या हमारा करीबी नही है तो हमे उसके लिए कुछ पल के लिए संवेदना अति है परंतु यदि वः व्यक्ति हमारा करीबी है तो हमे उसके लिए संवेदना अति है हमारी आँखों से आशु आने लगेंगे
5 मूल्य values :- हमारी आंतरिक नैतिकता हमें लागत कार्य करने से रोकती है

नोट:– Ethice अच्छी व अति है बुरी भी

भावनात्मक डोमेन के उद्देश्य या स्तर
1 अभिग्रहण करना ( प्राप्त करना) :– जब हम कोई भी चीज प्राप्त करते है तो हम उसके लिए संवेदनशील होते है
यदि हमारी इच्छा है उस कार्य को सीखने की करने की तो हम ध्यान लगाते है अच्छे से सुनते है और जल्दी सीख जाते
2 अनुक्रिया/प्रतिक्रिया/ जबाब (responding ) :–
जब कोई चीज हमारे लेवल की होती है हमें उसमे र


Notes By Ashwany Dubey

🪕Part – 2- Bloom Taxonomy का भावात्मक क्षेत्र (domain) 🪕

🏵️भावात्मक /सकारात्मक पक्ष :-

✍️इस पक्ष मे बच्चे की अधिगम शैली को भावात्मक रूप से प्रभावित करने वाले कारक कुछ निम्न प्रकार से है :-

👉रुचि /अभिरुचि (Interest) :-

प्रत्येक बच्चे की रुचि पर यह निर्भर करता है कि वो ज्ञान को कैसे ग्रहण करे! विभिन्न रुचि वाले बच्चों के अधिगम शैली मे भी भिन्नता पाई जाती है जो कि ज्ञान यह दर्शाता है कि रुचि ज्ञान को अपने अनुसार भाव प्रदान करती है!

👉 अभिव्रत्ति(Habitual Thinking) :-

यह बच्चे की उस धारणा या अवधारणा पर बल देती है जो उसने पूर्व से निहित है जिसके बल पर वह नए ज्ञान को सीखने और समझने का दृष्टिकोण रखता है! प्रत्येक बच्चे का दृष्टिकोण भिन्न होता है इसीलिए उनमे ज्ञान का स्तर और प्रकृति भी भिन्न पायी जाती है, जो यह दर्शाती है कि अभिवृति ज्ञान को प्रभावित करती है!

👉भावनाए(Emotions):-

भावनाए ही बच्चे मे निहित उसके ज्ञान का सही प्रयोग उसको सिखलाती है और उनकी कार्य क्षमता मे भिन्नता प्रदर्शित करती है जिसके द्वारा प्रत्येक बच्चा व्यक्तिगत भिन्नता को प्रदर्शित करता है!

👉 संवेदना(sensitivity):-

बच्चे का अधिगम के प्रति सक्रीयता का प्रदर्शन करना और किसी भी कार्य मे संवेदनशील होकर उसको पूरा करना ये हर एक बच्चे मे या अधिगम कर्ता मे विषय अनुसार भिन्न होता है!

👉 मूल्य (Values and Ethics) :-

हमारे भावनात्मक पक्ष मे हमारे सिद्धांतों और मूल्यों का बड़ा महत्व है!भाव ही हमे किसी कार्य को करने का सही या गलत होने का बोध कराते है और हमारे मूल्य निर्धारण करने मे सहायता करते है! भिन्न अधिगम कर्ता मे भिन्न भाव के अनुसार भिन्न मूल्यों का प्रदर्शन देखा जाता है!

🌻🌻🌻भावात्मक पक्ष के उद्देश्य के स्तर 🌻🌻🌻

1)अभिग्रहण करना / प्राप्त करना :-
✍️भावनात्मक रूप से किसी भी ज्ञान प्राप्त करने की जो इच्छा, चाह, और उसके प्रति हमारी सच्ची निष्ठा उस ज्ञान की प्राप्ति का मुख्य साधन बनती है जिसे हम अभिग्रहण करना भी कहते है!

2)अनुक्रिया /प्रतिक्रिया /जवाब (Response) :-

✍️जो ज्ञान हम ग्रहण करते है उसके प्रति हमारी प्रतिक्रियाएं और उसके लिए हमारी ओर से उसके संदर्भ मे अपने ज्ञान को प्रदर्शित करते है!

3)मूल्य निरूपण:-

किसी विषय को कितना महत्व देना है इसका आंकलन हमारे ग्रहण करने और प्रतिक्रिया के दौरान ही आती है!

👉इनको दो भागों मे बांटा गया है!

a)मूल्यआकना(judgement):-

किसी अभिगृहीत ज्ञान पर
अपने द्वारा दी गयी प्रतिक्रिया को परखना की जो हम प्रतिक्रिया दिए है वो कितना सही है और महत्वपूर्ण है!

इसके तीन चरण है कि किसी ज्ञान को ग्रहण करके उसको कितना वरीयता देना है उसके प्रति हमे कितना सजग और वचन वद्ध रहना है! ये हमारे उस विषय के साथ भावनात्मक जुड़ाव पर निर्भर करता है!

ग्रहण #वरियता # वचनबध्दता

ये व्यक्ति की सोच और विश्वास पर अधारित है!

b) मूल्य संधारण :-

हम जब नए ज्ञान को अपने पुराने मूल्यों के आधार पर अपने सन्ज्ञान मे व्यवस्थित करते है उसको भी उतनी ही वरीयता देते है जितना हम अपने पुराने ज्ञान को देते है, लेकिन हम परखते है कि वो हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है! कभी कभी हमे लगता है कि हम किसी विषय को इतना महत्व दे रहे जितना जरूरी नहीं! इसके लिए फिर हम परिवर्तन करते है जिसको मूल्य संधारण कहा जाता है!

4)संगठन करना / आयोजन करना –
इसमे एक ऐसे मूल्यों का संगठन करते है जिसमे हमारे मूल्यों का अंतरद्वंद समाप्त हो जाता है, जिनके आधार पर हम उनके अनुसार आगामी परिस्थिति से समायोजन करने की क्षमता विकसित कर सकते है!

5)निरूपण / चारित्रिकरण (Characterization):-

जिस ज्ञान को हम भावनात्मक क्षेत्र के द्वारा प्राप्त कर अपने अंदर पूर्ण रूप से समाहित कर लेते है उससे जो परिवर्तन हमारे अंदर आते है उनके अनुसार हम सही और गलत प्रतिक्रिया का प्रदर्शन करते है जिससे हमारे व्यवहार मे नियंत्रण आता है!

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