📖 मंद बुद्धि बालक 📖
( Mentally retarded children)

🎯 मंद बुद्धि बालकों के कुछ सामान्य लक्षण 🎯

⚡ शैक्षिक दृष्टिकोण ⚡

  1. बालक में सूझ बूझ की कमी होती है, वह किसी भी तथ्य के प्रति सोच समझ नहीं पाता है।
  2. मंदबुद्धि बालक में किसी भी कार्य को करने के प्रति क्षमता कम होती है। बालक में इतनी क्षमता का विकास नहीं होता है, जितना कि किसी कार्य को करने के लिए उचित हो।
  3. मंदबुद्धि बालकों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कम पाई जाती है। वह विषय वस्तु पर अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।

🌺🌺 A A M D – American association of mental deficiency 🌺🌺
( मानसिक कमी का अमेरिकी संघ)
इनके द्वारा मंद बुद्धि बालकों की परिभाषा ~
मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है। जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ-साथ ही पाई जाती है, जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।

🌻🌿🌻 मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं 🌻🌿🌻

🍂🍃 बौद्धिक न्यूनता~ मंदबुद्धि वालों को में बौद्धिक न्यूनता के अंतर्गत निम्नलिखित बातें हैं:-
🌿 निम्न शैक्षिक स्तर~
मंदबुद्धि छात्रों का शैक्षिक स्तर बहुत ही कम होता है, वह शिक्षा के क्षेत्र में अधिक प्रगति नहीं कर पाते हैं।

🌿 बुद्धि लब्धि 70 से कम~
मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है।
( हम सभी जानते हैं कि टर्मन के अनुसार मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से 89 के बीच होती है। लेकिन इस बीच में बालक में संभावना रहती है, कि वह उन्नति भी कर सकता है, और अवनति भी कर सकता है। इसलिए हम यह कह सकते हैं, कि मंदबुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है।)

🌿 अधिक विस्मरण~
मंदबुद्धि बालको में विषय वस्तु को याद रखने की अधिक क्षमता नहीं पाई जाती है। वह किसी चीज को अधिक समय तक स्मरण नहीं रख पाते हैं, जिसके कारण इन बालकों में अधिक विस्मरण की शक्ति जन्म ले लेती है।

🌿 दूसरो से सहायता की अपेक्षा ~
यह बालक अपने कार्यों को स्वयं करने की शक्ति नहीं पाते हैं, बल्कि अपने कार्यों की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों एवं अन्य साथियों की सहायता पर आश्रित रहते हैं। वह यह सोचते हैं, कि हम इस कार्य को न करके अन्य व्यक्ति की सहायता से पूर्ण कर पाए हैं। अतः हम कह सकते हैं, कि मंदबुद्धि बालक दूसरों से सहायता की अपेक्षा रखते हैं।

🍂🍃 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं~ अनियंत्रित मानसिक क्रियाओं के अंतर्गत कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-
🍁 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण न होना~
मंदबुद्धि बालको का अपनी मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है। वह अपने मस्तिष्क की क्रियाओं को अपने अनुसार किसी कार्य के प्रति नहीं लगा पाते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि बालकों की मानसिक क्रिया नियंत्रित होती है।

🍁 अवधान (Attention) को केंद्रित नहीं करना~
मंदबुद्धि बालक अपने ध्यान को केंद्रित नहीं कर पाते हैं। किसी एक विषय वस्तु पर अपने ध्यान को नहीं लगा पाते हैं, जिसके कारण कार्य या विषय वस्तु संपूर्ण नहीं होता है। अतः हम कह सकते हैं, कि मंदबुद्धि बालक में अवधान को केंद्रित करने की क्षमता नहीं पाई जाती है या कम पाई जाती है।

🍁 ध्यान के विस्तार में कमी~
मंदबुद्धि बालकों में अवधान को केंद्रित करने की क्षमता नहीं पाई जाती है। जिससे कि वह अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, एवं जिसके चलते वह अपने ध्यान के विस्तार में भी कमी पाते हैं, वह अपने ध्यान का विस्तार नहीं करते हैं। जिसके कारण वह अपनी समस्या समाधान नहीं कर पाते हैं।

🍁 सीमित शब्द भंडार~
मंदबुद्धि बालकों के शब्द भंडार अधिक विस्तृत नहीं होता है, बल्कि सीमित शब्द भंडार होता है। उनके शब्दकोश में अधिक शब्द नहीं होते हैं, जिसके कारण उनका शब्द भंडार सीमित ही रह जाता है।

🍂🍃हीन व्यक्तित्व ~ मंदबुद्धि बालक का व्यक्तित्व हीन भावना का होता है जिस के संबंध में कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित है:-
🌻 उदासीन/खिल मिजाज~
मंदबुद्धि बालकों का व्यक्तित्व हीन भावना से ग्रसित होता है। जिसके कारण उन बालकों में उदासीनता होने लगती है। वह अपने व्यक्तित्व के कारण किसी कार्य को नहीं कर पाते हैं, जिससे कि उनमें उदासीनता आ जाती है।।

🌻 कुछ भी कार्य करने में शिथिलता~
बालक किसी भी कार्य को करते हैं, या किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान करते हैं। तो वह इस में शिथिलता का अनुभव करते हैं। क्योंकि वह उस कार्य को पूर्ण नहीं कर पाते हैं, और कार्य को पूर्ण न करने का कारण उनका हीन व्यक्तित्व होता है। जिससे कि कार्य की पूर्ति न होने पर या समस्या का समाधान न होने पर बालको में शिथिलता आ जाती है।

🌻 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करना~
मंदबुद्धि बालक अपने उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं कर पाता है, क्योंकि उसका बौद्धिक स्तर निम्न होता है। उसमें अधिक विस्मरण शक्ति पाई जाती है एवं अवधान केंद्रित नहीं कर पाता है। जिससे कि वह अपने उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं कर पाता है। जिसके कारण वह हीन व्यक्तित्व का हो जाता है, और अपने उत्तरदायित्व को पूर्ति न होने पर उसमें आत्मविश्वास की कमी हो जाती है।

🍂🍃 शैक्षिक पिछड़ापन~ मंदबुद्धि बालक शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए होते हैं, जिसके संबंध में कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-
🌺 मंदबुद्धि बालक में शैक्षिक उपलब्धि न के बराबर होती है, वह शिक्षा से संबंधित कार्यों को नहीं कर पाता है।

🌺 मंदबुद्धि बालकों के लिए शिक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत दिए गए कार्य काफी कठिन होते हैं, क्योंकि वह इन कार्यों को करने में सक्षम नहीं होते हैं। जिससे कि उन्हें लगता है, कि शिक्षण कार्य अत्याधिक कठिन है।

🌺 यह बालक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, इनके ध्यान के विस्तार में कमी होती है। जिसके कारण यह रटने की प्रवृत्ति को अपनाते हैं। एवं समस्या समाधान के लिए यह रटन प्रणाली का सहारा लेते हैं, कुछ समय के लिए तो इन बालकों में रटने की प्रवृत्ति भी नहीं पाई जाती है

🌺 मानसिक आयु, शारीरिक आयु से कम होती है, क्योंकि यह बालक अपनी शारीरिक आयु की क्षमता के अनुसार भी मानसिक कार्य नहीं कर पाते हैं।अतः हम कह सकते हैं, कि इन में बालकों का मानसिक स्तर उनके शारीरिक स्तर के अनुसार अत्यधिक निम्न होता है।

🍂🍃 सीमित प्रेरणा और संवेग ~ इन बालकों में प्रेरणा, प्रोत्साहन और संवेग सीमित मात्रा में ही होता है। जिनमें से कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-

🌿 कल्पना शक्ति से रहित होते हैं क्योंकि यह बालक गहन चिंतन नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण इनमें कल्पना शक्ति का विकास नहीं होता है। यह अमूर्त चिंतन से विषय वस्तु के प्रति सोच नहीं पाते हैं।

🌿 इन बालकों में प्रेरणा व प्रोत्साहन बहुत ही साधारण एवं सीमित होता है। वह किसी भी विषय वस्तु को लेकर अधिक प्रेरित नहीं हो पाते हैं, क्योंकि वह किसी भी प्रकार की समस्याओं का समाधान स्वयं से करना ही नहीं चाहते हैं। वह दूसरों की सहायता लेने के लिए आश्रित होते हैं।

🌿मस्तिष्क में सूझ बूझ व जिज्ञासा ~
इन बालकों के मस्तिष्क में सूझ बूझ नहीं होती है, वह किसी विषय वस्तु को समझ नहीं पाते हैं, और न ही उस पर चिंतन कर पाते हैं। जिसके चलते इनमें जिज्ञासा भी कम ही पाई जाती है। या हम कह सकते हैं, कि जिज्ञासा भी नहीं पाई जाती हैं। यह बालक जिज्ञासु प्रवृत्ति के नहीं होते हैं।

🌿 क्रोध व मोह, लोभ इत्यादि संवेग से वंचित ~
मंदबुद्धि बालक को क्रोध मोम एवं लो इत्यादि संविधान से किसी भी प्रकार का फर्क नहीं पड़ता है, वह इन सभी संवेगो से वंचित रहना चाहते हैं।

🍂🍃कुसमायोजन की स्थिति ~ मंदबुद्धि बालक में समायोजन की स्थिति कम पाई जाती है जिस के संबंध में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-

🍁 निम्न स्तर का समायोजन~
बालको में समायोजन करने की क्षमता बहुत ही निम्न स्तर की पाई जाती है। वह अगर किसी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, तो समायोजन नहीं कर पाते हैं। अतः इस आधार पर हम कह सकते हैं, कि मंदबुद्धि वालों को में समायोजन की क्षमता कम पाई जाती है।

🍁 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं~
मंदबुद्धि बालक अपने आपको समाज के वातावरण में समायोजित नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण वह सामाजिक व्यवहारों से अनभिज्ञ रहते हैं। समाज के वातावरण के साथ व्यस्त समय व्यतीत करना या सामाजिक कार्यों में सम्मिलित होना नहीं चाहते हैं।

🍁उचित, अनुचित का ज्ञान न होना~
इन बालकों में विषय वस्तु के प्रति क्या उचित है, एवं क्या उसके लिए अनुचित है। इस बात का निर्णय नहीं ले पाते हैं। वह यह समझ ही नहीं पाते, कि क्या सही है और क्या गलत है। अतः हम यह कह सकते हैं, कि बालक को सत्य-असत्य, सही-गलत, उचित-अनुचित, का ज्ञान नहीं होता है।

🍁 समूह में समायोजन नहीं कर पाना~
बालक अपने समूह में समायोजन नहीं कर पाता है। चाहे वह समूह उसके खेल के मैदान का समूह या फिर उसकी कक्षा का समूह हो। वह अपने इस समूह के साथ अनुकूलित व्यवहार नहीं कर पाता है, क्योंकि मंदबुद्धि बालक में कुछ समायोजन की क्षमता पाई जाती है। वह वातावरण के प्रति समायोजन नहीं कर पाते हैं।

🍂🍃 असामान्य शारीरिक संरचना~ मंदबुद्धि बालकों की शारीरिक संरचना सामान्य से कुछ भिन्न होती है, जिसका वर्णन मुख्य बिंदु के माध्यम से निम्न लिखित है:-

🌻 मंदबुद्धि बालकों का शारीरिक गठन सामान्य बालकों से भिन्न होता है। जैसी शारीरिक संरचना सामान्य बालको की होती है, उस तरह की संरचना मंदबुद्धि बालको में नहीं पाई जाती है। बल्कि किसी न किसी रूप में भिन्नता होती है।

🌻 भिन्नता सामान्य से~
मंदबुद्धि बालक का कद अधिकतर छोटा होता है। कुछ सीमा तक इन बालकों के पैर छोटे एवं त्वचा मोटी होती है।यह लक्षण सामान्यतः मंदबुद्धि बालको में देखे गए हैं। जिसके आधार पर हम यह कह सकते हैं, कि यह बालक सामान बालकों की तुलना में भिन्न होते हैं। न सिर्फ मानसिक स्तर पर बल्कि शारीरिक स्तर पर भिन्नता पाई जाती है।

🌻 मंदबुद्धि बालको का चेहरा उदास होता है। इन बालकों के चेहरे में अधिकतर उदासीनता ही पाई जाती हैं, यह बालक उदासीपन से ग्रसित होते हैं।

🌻 इन बालकों के शारीरिक अंगों में शिथिलता होती है।

✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻
📗 समाप्त 📗
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🔆 मंदबुद्धि बालक ( Mentally Retarded Children) ➖

🔹ऐसे बालक जो सामान्य बालको से किसी न किसी रूप से पिछड़े होते हैं चाहे वह मानसिक तौर पर हो यहां शैक्षिक तौर पर हो पिछड़े बालक कहलाते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 90 से कम होती है |

🔹शैक्षिक दृष्टिकोण के अनुसार उनकी
उनकी सूझबूझ की क्षमता कम होती है |
किसी चीज को सीखने की क्षमता कम होती है |सीखने की प्रति नहीं होती है |
ध्यान केंद्रण की क्षमता भी कम होती है अर्थात किसी कार्य को करने में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं या एकाग्रता में कमी होती हैं |

🔹 मंदबुद्धि बालकों के संबंध में AAMD (American Association Of Mental Dificiency) ने परिभाषा दी इनके अनुसार
” मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूल व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय ही स्फुटित होती है | “

अर्थात् एक औसत बच्चा अपनी बुद्धि से कार्य करता है तो ये उस बालक कम ही कार्य कर पाते हैं उनको अनुकूलन की समस्या होती है विकास के समय | और यही से दोष उत्पन्न हो जाता है |

💫 मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं➖ इन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं

🔅 बौद्धिक न्यूनता ➖

(1) निम्न शैक्षिक स्तर ➖
इनका शैक्षिक स्तर बहुत ही कम होता है सामान्य बालकों की तुलना में शैक्षिक स्तर किसी न किसी कारणों से पीछे हो जाते हैं हैं या किसी प्रकार से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं |

(2) न्यूनतम बुद्धि लब्धि ➖
ऐसी बालकों की बुद्धि लब्धि सामान्य बालकों की तुलना में बहुत ही कम होती है लगभग 70 से नीचे |

(3) अधिक विस्मरण ➖
भूलने की शक्ति तेज होती है किसी भी चीज को या शिक्षा के क्षेत्र में कुछ भी अधिक समय के लिए याद नहीं कर पाते हैं या याद किया हुआ भी भूल जाते हैं भूलते तेज गति से हैं |

(4) दूसरों की सहायता की अपेक्षा ➖
दूसरों की सहायता की आशा करते हैं अपने ऊपर विश्वास कम रहता है या कम आत्मविश्वास ही होते हैं |

🔅 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं ➖
वे मानसिक रूप से क्रियाएँ करते हैं जो कि अनियंत्रित होती हैं
उनकी क्रियाएँ नियंत्रित नहीं होती है अर्थात

(1)मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता है ➖
जो मानसिक क्रियाएं करते हैं उन पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं उनका मन का क्रिया पर नियंत्रण नहीं नहीं कर पाता है |

(2) अवधान को केंद्रित नहीं करना ➖
इनके मस्तिष्क में सही संदेश नहीं जा पाता है करते करते भूल जाते हैं |

(3) ध्यान के विस्तार में कभी ➖
ऐसे बालकों के ध्यान करने का जो विस्तार है उसमें कमी होती है अर्थात पूर्व ज्ञान से वर्तमान ज्ञान को जोड़ने में कमी होती है ध्यान की क्षमता में कमी होती है |

(4) सीमित शब्द भंडार ➖
इनका शब्द भंडार बहुत ही कम होता है जिससे किसी चीज के बारे में नहीं बोल पाते हैं ध्यान नहीं रहने के कारण ऐसा होता है दूसरों के सामने अपने विचारों को व्यक्त नहीं कर पाते हैं |

(5) हीन व्यक्तित्व ➖
किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व ही हीन है तो वह व्यक्ति किसी भी कार्य को सही ढंग से नहीं कर पाता है जिससे वह

(1) उदासीन या खिन्न मिज़ाज के होना ➖
किसी चीज में आकर्षण ,रुचि या किसी कार्य को करने का साहस नहीं होता है जो कि बहुत ही गलत बात है|

(2) कुछ भी कार्य करने में शिथिल होते हैं ➖
कार्य करने का मन नहीं होता यह सुस्त होते हैं आलसी होते हैं सक्रिय नहीं रहते हैं |

(3)स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता का ना होना ➖
किसी बिंदु के बारे में विचार व्यक्त नहीं कर पाते हैं सदैव असमंजस की स्थिति में रहते हैं|

(4) उत्तरदायित्व कि पूर्ति नहीं करना ➖
स्वयं के प्रति जिम्मेदार नहीं होते हैं क्योंकि अपने दायित्व के प्रति सहज नहीं रहते हैं |

🔅 शैक्षिक पिछड़ापन ➖
जो किसी न किसी प्रकार से शिक्षा में पीछे हों जैसे

(1) शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर|

(2) इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है |

(3) इनकी रटने की प्रवृत्ति कम होती है क्योंकि वे समझ ही नहीं पाते रटा हुआ भी याद नहीं रहता है |

(4)इनकी मानसिक आयु, शारीरिक आयु से कम होती है जो उम्र के अनुसार कम होती है जैसे कि कोई बच्चा 15 वर्ष का है तो उसमें 15 वर्ष की बुद्धि नहीं रहती है और पिछड़े होते हैं |

🔅 सीमित प्रेरणा और संवेग ➖
ऐसे बच्चे की प्रेरणा और संवेग में कमी होती है किसी कार्य को करने की प्रेरणा या उस कार्य के प्रति कल्पनाशील नहीं होते हैं| जैसे

(1) कल्पना शक्ति से रहित होते हैं कल्पना शक्ति बहुत कम होती है उनके किसी कार्य के प्रति संवेग ही नहीं होते हैं कि वे उसको सोच पाए और उस कार्य को कर पाए |

(2) प्रेरणा साधारण और सीमित |
(3) मस्तिष्क शुष्क /जिज्ञासा की कमी उनको किसी कार्य उत्सुकता ही नहीं रहती है |

(4) क्रोध ,लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से भी वंचित रहते हैं उनको किसी कार्य के प्रति संवेग ही नहीं रहता है तो उस कार्य के प्रति उत्सुक भी नहीं रहते हैं उन्हें उम्मीद ही नहीं रहती है कि वे उसके कार्य को कर भी सकते हैं उसके लिए मोह ही नहीं रहता है तो वे क्रोध भी से भी वंचित रह जाते हैं |

🔅 कुसमायोजन की स्थिति➖
किसी कार्य को करते समय उसको संगठित नहीं कर पाते हैं जिससे

(1)उनका निम्न स्तर का समायोजन रहता है परिस्थिति को समझ नहीं पाते हैं और स्वयं समायोजित नहीं कर पाते हैं |

(2) सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं समाज के व्यवहार को नहीं समझ पाते ,उन्हें पता ही नहीं रहता कि क्या करना है |

(3)उचित / अनुचित का ज्ञान नहीं उन्हें सही या गलत का पता नहीं रहता अंतर समझ नहीं पाते हैं या अंतर समझ नहीं आता है |

(4) समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं उनको यह पता ही नहीं रहता है कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना है |

🔅 असामान्य शारीरिक संरचना शारीरिक संरचना में सामान्य बच्चे से भिन्न होते हैं जैसे,

(1)सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन होता है |

(2) कद नाटा, पैर छोटा, और त्वचा मोटी होती है |

(3)उदास चेहरा होता है |

(4) शारीरिक अंग शिथिल होते हैं| और ज्ञानेंद्रियां ठीक से कार्य नहीं करती हैं |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙨𝙖𝙫𝙡𝙚


🔰मंदबुद्धि बालक🔰

मंद गति से सीखने वाले बालक ऐसे बच्चे होते हैं जिनके बुद्धि लब्धि औसत से कम होती है ऐसे बालकों के विचारशीलता की क्षमता संवेदना का विकास अपेक्षाकृत कम होता है मंद गति से सीखने वाले बालक विद्यालय के कार्य सामान्य रूप से प्रगति करने में असमर्थता दिखाते हैं जब उनकी तुलना उन्हीं की आयु के समकक्ष बच्चों से की जाती है तो उन्में शैक्षिक कमी दृष्टिगत होती है 🙏 शैक्षिक दृष्टिकोण🙏

1 सूझ बूझ :- मंद बुद्धि बालक की सूझबूझ की सामान्य बालको से कम होती है

2 क्षमता:- मंदबुद्धि बालक की क्षमता सामान्य बुद्धि बालक से कम होती है

3 ध्यान केंद्रित:- मंदबुद्धि बालक में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बहुत कम होती है

AAMD American Association of mental deficiency इन्होंने मंदबुद्धि बच्चे की परिभाषा दी

AAMD ” मानसिक मंदन मुख्य रूप से और औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है”

अर्थात् एक औसत बच्चा जितना कर सकता है उससे कम मंदबुद्धि बालक करता है

1 बौद्धिक न्यूनता

a निम्न शैक्षिक स्तर:- मंदबुद्धि बालक शैक्षिक स्तर निम्न होता है बस सीखने में बहुत अधिक समय लेते हैं

b बुद्धि लब्धि <70 :- मंदबुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है

c अधिक विस्मरण:- मंदबुद्धि बालक अधिक विस्मरण होते हैं मंदबुद्धि बालक किसी भी चीज को याद तो कर लेते हैं परंतु वह जल्दी भूल जाते हैं

d दूसरों की सहायता की अपेक्षा:- मंदबुद्धि बालक दूसरों से सहायता लेने की अपेक्षा रखता है वह स्वयं में आत्मनिर्भर नहीं होता

2 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं :-

a मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है

b अवधान( अटेंशन )को केंद्रित नहीं करता:- मंदबुद्धि बालक में किसी कार्य में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बहुत कम होती है वह कार्य को करते करते भूल जाता है

c मंदबुद्धि बालकों के ध्यान में विस्तार में कमी होती है

d सीमित शब्द भंडार:- मंदबुद्धि बालकों में शब्द सीमा की कमी होती है उन्हें क्या बोलना है कैसे बोलना है यह स्पष्ट रूप से समझ नहीं आता

3 हीन व्यक्तित्व

a उदासीन या खिन्न मिजाज का होना:-
मंदबुद्धि बालकों में किसी भी कार्य के प्रति आकर्षण नहीं होता रुचि नहीं होती है किसी भी कार्य को करने का उन्हें साहस नहीं होता है ऐसे बच्चे चिड़चिड़े भी होते हैं

b कुछ भी कार्य करने में शिथिल:- मंदबुद्धि बालक किसी भी कार्य करने में शिथिलता दिखाते हैं किसी भी कार्य को करने में आलस्य दिखाते हैं यदि वह किसी कार्य को करते भी हैं तो वह ध्यान से नहीं करते किसी भी चीज को हाथ से गिरा देते हैं

c स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना:- मंदबुद्धि बालकों में अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती शब्दकोश कम होने के कारण उन्हें यह पता नहीं होता कि कौनसी सी बात किस ढंग से सही जाए

d उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते:- मंदबुद्धि बालक किसी भी कार्य को अपनी जिम्मेदारी से नहीं करते वह अपने उत्तरदायित्व को नहीं समझते

4 शैक्षिक पिछड़ापन
a मंदबुद्धि बालकों में शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है

b मंदबुद्धि बालकों के लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है

c मंदबुद्धि बालकों की मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है

5 सीमित प्रेरणा और संवेग
a कल्पना शक्ति से रहित:- मंदबुद्धि बालक में कल्पना शक्ति की कमी होती है वह किसी भी चीज पर अपने कल्पनात्मक सकती को नहीं दिखा सकते
b प्रेरणा साधारण और सीमित:- मंदबुद्धि बालकों की प्रेरणा साधारण और सीमित होती हैं

c मस्तिष्क सूझ और जिज्ञासा

d मंदबुद्धि बालक क्रोध लोभ मोह इत्यादि के संवेग से वंचित रहते है

6 कुसमायोजन की स्थिति:- a मंदबुद्धि बालकों में निम्न स्तर का समायोजन होता है वह हर जगह पर अपने आप को सामंजस्य की स्थिति मैं नहीं ढाल सकते अर्थात वह हर जगह पर समायोजन नहीं कर सकते

b मंदबुद्धि बालक सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ होते हैं

c मंदबुद्धि बालकों में उचित अनुचित का बोध नहीं होता है वह बिना सोचे समझे कुछ भी बोल सकते हैं

d मंदबुद्धि बालक समूह में समायोजन नहीं कर पाते

7 मंदबुद्धि बालकों की असामान्य शारीरिक संरचना

a सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन
b कद नाटा पर छोटा त्वचा मोटी होती है
c चेहरा उदास होता है
d शारीरिक अंग शिथिल होते हैं

🙏🙏 sapna sahu 🙏🙏🙏


🌈🌈 मंदबुद्धि बालक🌈🌈

ऐसे बालक जो शैक्षिक दृष्टिकोण से जिन बच्चे की सूझबूझ तेज नहीं होती है किसी भी चीज को समझने की क्षमता कम होती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होती है ऐसे बच्चों को मंदबुद्धि वाला कहते हैं इनकी बुद्धि लब्धि 90 से कम होती है और मानसिक गति की क्षमता भी कम होती है यह मंदबुद्धि बालक की श्रेणी में आते है
🎯A A M D-( American association of mental deficiency)
मानसिक कमी का अमेरिकन संघ ने मंदबुद्धि बालक की परिभाषा दी
” मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार के संबंधी दोषों के साथ-साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है”
🍁🍁 मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं

⭐ बौद्धिक न्यूनता :-

🌺 मंदबुद्धि बालकों में शैक्षिक स्तर की कमी होती है वह शिक्षा के क्षेत्र में अधिक प्रगति नहीं कर पाते हैहै

🌺 मंदबुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है लेकिन इस बीच में बालक की संभावना रहती है कि वह उन्नति भी कर सकता है

🌺 मंदबुद्धि बालक में विशाल को याद करने की क्षमता कम पाई जाती है वह किसी भी चीज को ज्यादा समय तक स्मरण नहीं रखता है विस्मरण की शक्ति अधिक होती है

🌺 मंदबुद्धि बालक दूसरों की सहायता की अपेक्षा करते हैं वह अपने काम सब नहीं कर पाते हैं बल्कि अपने कार्यों की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों सहायता पर आश्रित रहते है

⭐ अनियंत्रण मानसिक क्रियाएं

🌺 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण न होना –
मंदबुद्धि बालकों में अपनी मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है वह अपने मस्तिष्क की क्रियाओं को अपने अनुसार कार्य नहीं कर पाते हैं

🌺 अवधान को केंद्रित नहीं करना –
मंदबुद्धि बालक अपने ध्यान को केंद्रित नहीं कर पाते हैं वह किसी काम को करते – करते भूल जाते हैं जिसके कारण कार्य वस्तु संपूर्ण नहीं होता अच्छा हम कह सकते हैं कि मंदबुद्धि बालक मे अवधान को केंद्रित करने की क्षमता नहीं पाई जाती है

🌺 ध्यान के विस्तार में कमी :–
मंदबुद्धि बालक में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते है जिसके कारण वह अपनी समस्या समाधान नहीं कर पाते है

⭐ हीन व्यक्तित्व:–

🌺 उदासीन :- मंदबुद्धि बालक का व्यक्तित्व हीन भावना से ग्रसित होता है जिसके कारण वह उदासीनता होने लगती है वह अपने व्यक्तित्व के कारण किसी कार्य को नहीं कर पाते है

🌺 कुछ भी कार्य करने में शिथिल :–
मंदबुद्धि बालक किसी भी कार्य को करते समय किसी प्रकार की समस्या का समाधान करते है तो वह इसमें शिथिलता का अनुभव करते है

🌺 स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना :–
मंदबुद्धि बालक में अपने विचार को व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती है वह किसी भी प्रकार के विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं रखते है

🌺 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते है:–
मंदबुद्धि बालक अपने दायित्व को पूर्ति नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनका बौद्धिक स्तर निम्न होता है जिसके कारण वह अपने दायित्व की पूर्ति नहीं कर पाते हैं और आत्मविश्वास की कमी होती है

⭐ शैक्षिक पिछड़ापन

🌺 शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर:-
मंदबुद्धि बालक में शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है वह शिक्षा से संबंधित कार्य नहीं कर पाते हैं

🌺 इन बालकों के लिए शैक्षिक कार्य काफी कठिन होता है क्योंकि वह इन कार्यों को करने में सक्षम नहीं होते

🌺 रटने की प्रवृत्ति :-
मंदबुद्धि बालक में रटने की प्रवृत्ति होती है लेकिन वह किसी चीज को रख लेते हैं लेकिन कुछ समय पश्चात वह भूल जाते हैं

🌺 मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है :–
मंदबुद्धि बालक की मानसिक आयु शारीरिक आयोग से कम होती है अगर बच्चे की शारीरिक आयु 10 वर्ष है तो मानसिक आयु 8 वर्ष की होती है

⭐ सीमित प्रेरणा और संवेग

🌺 कल्पना शक्ति से रहित होते है :-
मंदबुद्धि बालक गहन चिंतन नहीं कर पाते हैं इनमें कल्पना शक्ति का विकास नहीं होता है और किसी विषय वस्तु के बारे में सोच नहीं पाते हैं

🌺 प्रेरणा साधारण और सीमित:- मंदबुद्धि बालकों में प्रेरणा और प्रोत्साहन बहुत ही साधारण और सीमित होता है वह किसी भी विषय वस्तु को लेकर अधिक प्रेरित नहीं हो पाते हैं और समस्या समाधान स्वयं से करना ही नहीं चाहते है

🌺 मस्तिक में सूझ -बूझ और जिज्ञासा:- इन बालकों में सूझबूझ और जिज्ञासा नहीं होती है वह किसी विषय वस्तु के बारे में सोच नहीं पाते इनमें जिज्ञासा की प्रवृत्ति नहीं पाई जाती है

🌺 क्रोध , मोह ,लोभ इत्यादि संवेग से वंचित :-
मंदबुद्धि बालक में क्रोध मोह लोभ इत्यादि संवेग नहीं पाए जाते है इन सभी वह वंचित होते है

⭐ कुसमायोजन की स्थिति :–

🌺 निम्न स्तर का समायोजन :-
मंदबुद्धि बालक में समायोजन करने की क्षमता कम पाई जाती है अगर वह किसी स्थान दूरी पर जाते हैं तो समायोजन नहीं कर पाते है

🌺 सामाजिक व्यवहार में अनभिज्ञ :–
मंदबुद्धि बालक में अपने समाज के वातावरण और समायोजन करने की क्षमता नहीं होती है व सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं और सामाजिक कार्यों में शामिल नहीं हो पाते है

🌺 उचित अनुचित का ज्ञान नहीं :-
मंदबुद्धि बालक में विषय वस्तु के प्रति उचित अनुचित का ज्ञान नहीं होता वह किसी समस्या के बारे में सही गलत पर निर्णय नहीं ले पाते है

🌺 समूह में समायोजन नहीं कर पाते है :-
मंदबुद्धि बालक अपने समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं चाहे वह समूह उनके खेल के मैदान का हो या कक्षा का हो वह अपने समूह के साथ अनुकूलित व्यवहार नहीं कर पाते है

⭐ असामान्य शारीरिक संरचना

🌺 सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन :- मंदबुद्धि बालक का शारीरिक गठन सामान्य बालक से भिन्न होता है

🌺 मंदबुद्धि बालक का कद छोटा होता है जिन्हें हम नाटा कहते हैं या बोना कहते हैं क्या सामान बालको से छोटे होते है

🌺 मंदबुद्धि बालक के पैर छोटे और त्वचा मोटी होती है यह बालक शारीरिक रूप से भिन्न पाए जाते है

🌺 मंदबुद्धि बालकों का चेहरा उदास होता है इन बालकों के चेहरे में अधिकतर उदासीनता दिखाई देती है

🌺 मंदबुद्धि बालक के शारीरिक अंगों में शिथिलता होती है

✍🏻✍🏻✍🏻Menka patel ✍🏻✍🏻✍🏻

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🔰Mand budhi balak🔰
🔸️Mandbuddhi Balak Aise Balak ko Kahte Hain Jiski mansik Aayu Saman aayu ke balak se kam hoti hai ya.inka IQ level samanye balak ki apecha kum hota hai.
🔸️ shaikshik drishtikon
Ke anusar

➖ Aise Balko me sojh boojh ki chamta kam Hogi.
➖ Kisi bhi chij ko sikhane yah samajhne ki chamta kam hoti hai.
➖ Kisi bhi Karya ko karne mein Inki Dhyan Kendrit karne ki chamta kam hoti hai.
🔸️AAMD➡️American Association of Mental Deficiency-ke anusar mansik mundan mukhya Roop se ausat se kam baudhik karye nishpadan ka Sanket Deti Hai joki anukulan vyavhar sambandhit doso Ke Saath Saath Ho Pai jaati hai jo ki Vikas Kal ke Samay isphutit hoti hai.
🔸️ mandbuddhi Balak ki visheshta-
1- baudhik newnta
(a) Aise balkon ka Sachik istar nimn hota Hai
(b)aise balko ki budhi labdhi samnye balko ki budhi labdhi se kum hoti hai inki buddhi labdhi 70 se kum hoti hai.
(c)aise balko ki me vismaran sakti adik hoti hai ye kisi bhi yaad ki gai chij ko juldi bhul jate hai.
(d)aise balko ko dusro se sahayta ki apecha adik hoti hai inhe apne uper viswas nahi hota hai.
2-Aniyantrit mansik kiryaye
(a) Aise balko ki mansik Kriyao Me niyantran Nahin Hota Hai.
(b)Kisi bhi kaam me ye dhyan ko kendrit nahi kr pate.
(c)aise balako me dhyan ke vistar me kami hoti hai.ye porv gyan ko naye gyan se jodne me asmarth hote hai.
(d)inke sabdbhndar me kami hoti hai.jiske karan ye apni baat sahi se viyakt nahi kr pate.
3- Heen vyaktitva
(a)aisye balak udaseen ya khinn mijaj ka hai.
(b)Kisi bhi karye ko krne me sithil hote hai.
(c)aise balako me apne vicharo ko ispasth roop se viyakt krne ki chamta nahi hoti hai.
(d)aise balak apne uttardaitua ke pirt laprvaha hote hai.ye utterdaitua ki porti nahi krte hai.
4-saychik pichrapan-aise balak saychik roop se pichre hote hai.
(a)inki saychik uplabdhi na ke baraber hoti hai.
(b)inke lie sikchan karye kafi kathin hota hai.
(c)ratne ki pirvarti kum hoti hai.
(d)inki mansik aayo saririk aayo se kum hoti hai.inka iq level kum hota hai.
5-simit pirerna or sanveg-
(a)aise balko me kalpna sakti bahut kum hoti hai.
(b)pirerna sadharan or simit hoti hai
(c) Krodh lobh Moh Ityadi ke sanveg se vanchit Hote Hain.
(d)mastisk me sujh bujh or jigyasa me kami hoti hai.
6-Kusamayojan ki isthti-
(a)aise balko me samayojan(adjust)krne ki chamta nimn istar ki hoti hai.ye kisi nai paristhti samayojan nahi kr pate.
(b)samajik viyvhar se anbhigya rahte hai.
(c)aise balako ko uchit or anuchit ka gyan nahi hota.
(d)aise balak samho(group)me samayojit nahi ho pate.
7-Saririk sanrachna asamanya hoti hai-
(a)aise balko ki saririk sanrachna samanya balko ki apecha bhinn hoti hai.
(b)inki saririk banvat me bhinnta hoti hai inka kad chota,tange choti or tuacha moti hoti hai.
(c)aise balak humesha udas or asaant rahte hai.
(d)sarir ke ang sithil hote hai,inki gyanendriya thik se kaam nahi krti hai.
Krishna gangwar 🙏🙏🙏


मंदबुद्धि बालक
(Mentally Retarded Children)

ऐसे बालक से है जो ” मानसिक” रूप से कमजोर होते है, जिनके मानसिक और बुद्धि इतनी कम विकसित हैं कि उनमें मानसिक क्षमताएँ भी कम विकसित हो पाती है, ऐसे बालको को मन्द-बुद्धि बालक, धीमी गति से सीखने वाले बालक, मानसिक रूप से पिछड़ा बालक तथा मानसिक रूप से विकलांग बालक इन सभी नामों का प्रयोग किया जाता है।

शैक्षिक दृष्टिकोण के आधार पर मुख्य रूप से मंद बुद्धि बालकों में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।
जैसे
✓बच्चे की सूझबूझ बहुत तेज नहीं होती है।
✓ किसी भी विषय या वस्तु को समझने की क्षमता कम होती है।
✓ध्यान केंद्रण की क्षमता में कमी होती है।

American association of mental deficiency (AAMD) संस्थान में मंदबुद्धि बालकों के विषय में बताया कि –
“मानसिक मंदता मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है, जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है, जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।”

मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं निम्न लिखित है ।

🔅 1 बौद्धिक न्यूनता – निम्न रूप में देखी जाती है।

*✓निम्न शैक्षिक स्तर – शिक्षा का स्तर काफी निम्न होता है।

*✓बुद्धि लब्धि 70 से कम

*✓अधिक विस्मरण करने की क्षमता
किसी भी कार्य को या बात को अधिक समय तक याद नहीं रख पाते है या अपने भूतकाल के अनुभवों को चेतन मन में लाने में असफल होते हैं या पूर्व अनुभव या सीखे हुए कार्य को करने में असफल रहते हैं।

*✓दूसरों की सहायता की अपेक्षा
अपने किसी भी सामान्य कार्य को करने के लिए दूसरों से मदद की अपेक्षा या उम्मीद रखते हैं।

🔅 2 अनियंत्रित मानसिक क्रियाए –

*✓ मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता।

*✓अवधान (Attention) को केंद्रित नहीं कर पाते।
किसी वस्तु पर चेतना केंद्रित करना ही ध्यान है जोकि मंदबुद्धि बालक में नहीं कर पाते है।

*✓ध्यान की विस्तार में कमी रहती है।

*✓सीमित शब्द भंडार

🔅 3 हीन व्यक्तित्व –

व्यक्ति का व्यक्तित्व ही उस व्यक्ति के व्यक्ति होने की संभावना को दर्शाता है,
लेकिन मंदबुद्धि बालकों का हीन व्यक्तित्व होता है।

*✓उदासीन या खिन्न मिजाज का होना।

*✓कुछ भी कार्य करने में शिथिल।

*✓स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं रहती।

*✓उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं कर पाते।

🔅 4 शैक्षिक पिछड़ापन –
शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रहते है।

*✓शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर
शैक्षिक उपलब्धि के आधार पर ही छात्र द्वारा ग्रहण किए हुए ज्ञान का अथवा किसी कौशल में निपुणता का मापन होता है, लेकिन मंदबुद्धि बालक शैक्षिक उपलब्धि नहीं हासिल कर पाते ।
*✓इनके लिए शिक्षण कार्य आयोजित करना काफी कठिन होता है।

*✓रटने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

*✓मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है।

🔅 5 सीमित प्रेरणा और संवेग –

*✓कल्पना शक्ति से रहित।
कल्पना वह शक्ति है जिसके द्वारा हम अपनी प्रतिमाओं का नया प्रकार से प्रयोग करते हैं।कल्पना के द्वारा हम को पूर्व अनुभव को किसी ऐसी वस्तु का निर्माण करने में सहायता मिलती है जो पहले कभी नहीं थी।
मंदबुद्धि बालकों में कल्पना शक्ति नहीं पाई जाती है।

*✓प्रेरणाएं साधारण और सीमित।

*✓मस्तिष्क सुप्त/जिज्ञासा कम

*✓क्रोध ,लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से वंचित।

🔅 6 कुसमायोजन की स्थिति –

व्यक्ति अपने आप को परिवेश के अनुकूल बनाने में असमर्थ या अपने विकास में ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं जो उनकी इच्छा आवश्यकता की पूर्ति में बाधक होती है यही कुसमयोजन कहलाता है।

*✓निम्न स्तर का समायोजन
-समायोजन करने में की प्रवृत्ति काफी कम होती है।

*✓सामाजिक व्यवहार में अनभिज्ञ
समाज के द्वारा होने वाले व्यवहार से अनभिज्ञ या अपरिचित या अनजान रहते हैं।

*✓उचित अनुचित का ज्ञान नहीं रहता
क्या सही है या क्या गलत इसका ज्ञान नहीं रहता है।

*✓समूह में समायोजन नहीं कर पाते।
समूह समायोजन से हम सभी एक दूसरे के प्रति अपने विचारों में समायोजन के माध्यम से परिवर्तन लाकर परस्पर सहयोग की दिशा में आगे बढ़ पाते हैं ,लेकिन मंदबुद्धि वालों को में समूह समायोजन की क्षमता नहीं होती है।

🔅 7 असामान्य शारीरिक संरचना-
*✓सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन

*✓कद नाटा , पैर छोटे ,त्वचा मोटी

*✓उदास चेहरा

*✓शारीरिक अंग शिथिल होता है।

✍🏻
Notes By-Vaishali Mishra


🍁 मंदबुद्धि बालक🍁
Mentally retarded children

🌈 ऐसे बालक जिनका शैक्षिक दृष्टिकोण जैसे सूझबूझ ,क्षमता तथा ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं ,इनके सीखने की गति धीमी होती है, और सीखकर भूल भी जाते हैं, अर्थात् इनके स्मरण क्षमता का अभाव होता है, नवीन समस्याओं पर विचार नहीं कर सकते हैं और इनमें मौलिकता का अभाव भी पाया जाता है, ऐसी बालक मंदबुद्धि बालक कहलाते हैं।

🍁AAMD- ( American Association of mental Deficiency)
के द्वारा मंदबुद्धि बालक की परिभाषा दी गई है

🖊️ मानसिक मंडल मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ-साथ ही ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होता है।

🌈मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं:-

🌺बौद्धिक न्यूनता:-

✍🏻 मंदबुद्धि बालकों में शैक्षिक स्तर की कमी होती है वह शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति नहीं कर पाते हैं।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है लेकिन अगर उन्हें शिक्षा अच्छी तरह से दी जाए तो यह संभावना रहती है कि वह भविष्य में उन्नति भी कर सकता है।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक में याद करने की या याद रखने की क्षमता कम पाई जाती है वह किसी भी चीज को याद रखने के लिए उसे रटते हैं तथा उसको जल्दी ही भूल जाते हैं अर्थात इनकी विस्मरण क्षमता बहुत ही कम होती है।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक को मे दूसरों की सहायता की अपेक्षा करते हैं वह अपने काम को खुद नहीं कर पाते हैं बल्कि अपने कार्य को करने के लिए दूसरों का सहारा लेते हैं।

🌺 अनियंत्रण मानसिक क्रियाएं:-

✍🏻 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण ना होना- मंदबुद्धि बालको में अपनी मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है।
✍🏻 अवधान /ध्यान को केंद्रित नहीं करना:- मंदबुद्धि बालक अपने ध्यान को केंद्रित नहीं कर पाते हैं किसी एक विषय वस्तु को अपने ध्यान को नहीं लगा पाते हैं जिसके कारण कार्य या विषय वस्तु संपूर्ण नहीं होती है इनमें ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का अभाव होता है।

✍🏻 ध्यान में विस्तार में कमी:- मंदबुद्धि बालकों में ध्यान का विस्तार की छमता का जवाब होता है जिससे वह अपना ध्यान केंद्रीय नहीं कर पाते हैं जिसके कारण वह अपनी समस्या समाधान नहीं कर पाते है।

✍🏻 सीमित शब्द भंडार:- मंदबुद्धि बालकों में सीमित शब्द भंडार पाया जाता है, इन बालों को के शब्द भंडार अधिक विस्तृत नहीं होते हैं इनके कारण शब्दकोश में अधिक शब्द नहीं पाए जाते हैं।

🌺 हीन व्यक्तित्व :-

✍🏻 उदासीन खिन्न मिजाज का होना:-

मंदबुद्धि बालक हीन भावना से ग्रसित होते हैं जिसके कारण उनमें उदासीनता आ जाती है और उनके स्वभाव भी खिन्न मिजाज का हो जाता है।
✍🏻 कुछ भी कार्य करने में शिथिलता/ सुस्त :- बालों किसी कार्य को करते हैं या किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान करते हैं तो वह इस शिथिलता का अनुभव करते हैं क्योंकि वह उस कार्य को पूर्ण नहीं कर पाते हैं और कार्य को पूर्ण ना करने का कारण उसका हीन व्यक्तित्व है।
जैसे कि किसी कार्य को अगर करवाएं भी तो उस कार्य में शिथिलता होती है और अगर कोई चीज मंगाई भी जाए तो उसको गिरा देते हैं।

✍🏻 स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना:- मंदबुद्धि बालक अपने विचारों को दूसरों के सामने स्पष्ट नहीं रख पाते हैं जिससे उनकी मन की बात दूसरों तक नहीं पहुंच पाती है जिससे उनमें हीन व्यक्तित्व का विकास होता है।

✍🏻 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करना:- मंदबुद्धि बालकों में विस्मरण शक्ति पाई जाती है तथा वह किसी चीज को लंबे समय तक याद नहीं रख पाते हैं क्योंकि उनका बौद्धिक स्तर निम्न होता है अगर मंदबुद्धि बालक को कोई कार्य दिया जाए तो वह उसको करने में असमर्थ रहते हैं और वह किसी भी कार्य के प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूरा नहीं कर पाते हैं।

🌺 शिक्षक पिछड़ापन:- मंदबुद्धि बालक शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए होते हैं।

✍🏻 मंदबुद्धि बालकों की शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है वह शिक्षा से संबंधित कार्य को नहीं कर पाते हैं।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक के लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होते हैं क्योंकि वह इन कार्यों को करने मे असमर्थ होते हैं।

✍🏻 मंदबुद्धि बालकों में रटने की प्रवृत्ति पाई जाती है, क्योंकि ऐसे बालकों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता नहीं होती है वह कुछ समय के लिए तो इन बालकों में रटने की प्रवृत्ति पाई जाती है लेकिन वह कुछ समय बाद ही याद करे हुए को भी भूल जाते हैं।
✍ मंदबुद्धि बालक की मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है क्योंकि यह बालक अपनी शारीरिक आयु की क्षमता के अनुसार मानसिक कार्य करने में असमर्थ होते हैं तथा इनका मानसिक स्तर निम्न कोटि का होता है।

🌺 सीमित प्रेरणा और संवेग:-

🍁 कल्पना शक्ति से रहित होते हैं क्योंकि यह बालक गहन चिंतन नहीं कर पाते हैं जिसके कारण इनमें कल्पना शक्ति का विकास नहीं होता है।
🍁 मंदबुद्धि बालक को में प्रेरणा व प्रोत्साहन बहुत ही साधारण और सीमित होता है, यह किसी भी विषय वस्तु या क्षेत्र को लेकर अधिक प्रेरित नहीं होते हैं, वह दूसरों की सहायता लेने के लिए आश्रित होते हैं।

🍁 मंदबुद्धि बालकों के मस्तिष्क में सूझबूझ मैं कमी तथा जिज्ञासा या उत्सुकता नहीं होती है सूझबूझ ना होने के कारण यह किसी भी चीज पर विचार या गहन चिंतन नहीं कर पाते हैं यह बालक बिल्कुल भी जिज्ञासु नहीं होते है।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक में क्रोध लोभ व मोह इत्यादि के संवेग से वंचित होते हैं।

🌺 कुसमायोजन की स्थिति:-

✍🏻 निम्न स्तर का समायोजन:- मंदबुद्धि बालक अगर किसी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो वहां समायोजन नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनमें समायोजन करने की क्षमता बहुत ही निम्न स्तर पर होती है।

✍🏻 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहना:- मंदबुद्धि बालक अपने आपको समाज के वातावरण में समायोजित नहीं कर पाते हैं जिसके कारण वह समाज के व्यवहार से अनभिज्ञ (नहीं पता होना) रहते हैं वह किसी भी प्रकार से सामाजिक कार्य में अपना सहयोग नहीं देना चाहते हैं।

✍🏻 उचित- अनुचित का ज्ञान न होना:- इन बालकों में उचित और अनुचित करने की निर्णय शक्ति नहीं होती है कौन इनके साथ उचित व्यवहार करता है और कौन इनके साथ अनुचित व्यवहार करता है इसका निर्णय किए नहीं कर पाते हैं और क्या गलत है क्या सही है इसके बारे में भी इनको कोई ज्ञान नहीं होता है।

✍🏻 समूह में समायोजन ना कर पाना:- मंदबुद्धि बालक अपनी समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं क्योंकि इनमें समायोजन करने की क्षमता का अभाव होता है मंदबुद्धि बालक चाहे समूह खेल के मैदान का हो चाहे कक्षा का किसी में भी समायोजन नहीं करते है।

🌺 असामान्य शारीरिक संरचना:-

✍🏻 सामान्य से बिना शारीरिक गठन:- मंदबुद्धि बालकों का शारीरिक गठन सामान्य बालक से भिन्न होता है जैसी शारीरिक संरचना सामान्य बालकों की होती है उससे अलग संरचना इन बालकों की होती है मंदबुद्धि बालक किसी ना किसी रूप में सामान्य बालक से भिन्न होता।

✍🏻 मंदबुद्धि बालक की शारीरिक संरचना मे कद नाटा, पैर छोटे,त्वचा मोटी तथा उदासी चेहरा होता है।

✍🏻 मंदबुद्धि बालकों के शारीरिक अंगों में शिथिलता पाई जाती है।

🌺🌺 Notes by Shashi Choudhary🌺🌺 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


🌼 मंदबुद्धि बालक 🌼
(Mentally Retarted Children)
ऐसी बालक जो मानसिक रूप से कमजोर हैं अर्थात जिसमें मानसिक क्षमताएं कम विकसित होती हैं! ऐसे बालकों को मंदबुद्धि बालक, धीमी गति से सीखने वाला बालक, मानसिक रूप से पिछड़ा बालक और मानसिक रूप से विकलांग बालक कहा जाता है!

🌸 शैक्षिक दृष्टिकोण से:➖
1~ सूझबूझ तेज नही होती है:➖
ऐसे बालकों में सूझबूझ की कमी होती है वह किसी भी चीज को गहराई से सोच समझ नहीं सकता है!
2~ समझने की क्षमता कम होती है:
ऐसे बालक किसी भी चीज को आसानी से नहीं समझ सकता उसके अंदर किसी भी कार्य को करने के लिए उचित सोच क्षमता का विकास नहीं होता
3~ ध्यान केंद्रन:
मंदबुद्धि बालक किसी भी चीज के लिए एकाग्र ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते उसके दिमाग में अधिक समय तक कोई भी बात टिक नहीं पाती कभी कुछ तो कभी कुछ चलते रहता है।

“AMARICAN ASSOCIATION OF MENTAL DIFICIENCY “(AAMD)
इस संस्थान के अनुसार➖
” मानसिक मंदन मुख्य रूप से और सबसे कम बौद्धिक कार्य का निष्पादन का संकेत देती है जोकि अनुकूल व्यवहार संबंधी दोषों के साथ-साथ साथ ही पाई जाती हैं जो विकास काल के समय स्फुटित होती हैं!”

🎯 मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं🎯

1- बौद्धिक न्यूनता:➖
A)बच्चे का निम्न शैक्षिक स्तर:-
ऐसे बालक सामान्य बालकों की तुलना में शैक्षिक स्तर से काफी पीछे होते हैं किसी ना किसी कारणवश शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं।

B) न्यूनतम बुद्धि लब्धि<70:-
ऐसे बालकों की बुद्धि लब्धि सामान्य बालकों से कम होती है अर्थात 70 से नीचे !

C) अधिक विस्मरण:-
ऐसे बोलक किसी भी चीज को ज्यादा देर तक याद नहीं रख सकते हैं अगर वह याद करती भी है तो वह तुरंत भूल जाते हैं अर्थात याद किया वह भी तुरंत भूल जाना।

D) दूसरों की सहायता की अपेक्षा:-
मंदबुद्धि बालक हमेशा दूसरों पर आश्रित रहते हैं और हमेशा दूसरों की सहायता पर उम्मीद रखते हैं।

2) अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं:➖

A )मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं:-
ऐसे बालकों को मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होते हैं उसे क्या करना है नहीं करना है उसे खुद पर नियंत्रण ही नहीं होता करना कुछ और करते कुछ और हैं बाद में सोचते हैं ऐसा नहीं होना था।

B )अवधान को केंद्रित नहीं करना:-
अवधान अर्थात ध्यान इसे बालकों के मस्तिष्क में सही संदेश ना जाने के कारण वह किसी चीज को सही ढंग से नहीं कर पाते हैं या करते करते भूल जाते हैं कि करना क्या है?

C) ध्यान के विस्तार में कमी:-
ऐसे बोला किसी भी काम को कहीं ना कहीं किसी और काम में जोड़ देते हैं आधार पूर्व ज्ञान को वर्तमान में जोड़ना।

D )सीमित शब्द भंडार:-
ऐसे बालों को के पास शब्द का भंडार बहुत कम होता है इनको कोई भी चीज जानने के बावजूद इनके पास शब्द की कमी के कारण ध्यान ही नहीं रहता।

3) हीन व्यक्तित्व:➖

A )उदासीन / खील मिजाज का होना :-
ऐसे बालक हमेशा परेशान रहते हैं उन्हें किसी भी चीज में ना रुचि आकर्षण या किसी भी काम के प्रति उत्सुकता ही नहीं होती अगर कुछ गलत हो भी रहा है इसके अंदर इतना साफ ही नहीं होता है कि वह उस गलती का साहस या सामना करें
अर्थात ऐसे बालकों को खुद के जीवन के प्रति कोई आकर्षण ही नहीं रहता।

B) कार्य करने में शिथिल होते हैं:-
बालकों को किसी भी काम में मन नहीं लगता आलसी होते हैं किसी भी कार्य को करने से पहले यह 10 बार सोचते हैं करें या नहीं करें या करें भी तो कैसे वह सक्रिय नहीं होते हैं।

C) स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने में क्षमता ना होना:-
वह अपने विचार भाव अपने अंदर की अच्छाई या बुराई कमी को जल्दी किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पाते हैं सदैव असमंजस में रहते हैं।

D)उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं करते:-
ऐसे बालकों के अंदर खुद के प्रति अपनी जिम्मेदारी ही नहीं होती हैं अगर कोई इसे कोई उत्तरदायित्व दे भी तो आत्मविश्वास की कमी के कारण वह उस उत्तरदायित्व को पूरा नहीं कर पाता है।

4 शैक्षिक पिछड़ापन:➖
A )मंदबुद्धि बालक ने शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती हैं ऐसे बालकों को कभी भी कोई बड़ा कामयाबी नहीं मिल पाता।

B) ऐसे बालकों के लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है क्योंकि वह उस शिक्षण कार्य को करने के लिए सक्षम ही नहीं होते हैं।

C )वह हमेशा रटने की प्रवृत्ति का सहारा लेते हैं वह सोच कर चलत है कि हम कोई भी समस्या का समाधान रटने की प्रक्रिया से पूरी कर लेंगे लेकिन ध्यान केंद्र ना होने के कारण वह रटे हुए चीज को भी जल्दी भूल जाते हैं।

D) मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती हैं अर्थात ऐसे बालकों की मानसिक आयु उम्र के हिसाब से काफी कम होती है।

5)सीमित प्रेरणा और संवेग:➖
A )कल्पना शक्ति से रहित:-
ऐसे बालकों में कल्पना शक्ति बहुत कम होती हैं उनके अंदर किसी भी चीज को सोचने की गहन क्षमता नहीं होती है।

B )प्रेरणाए साधारण और सीमित होती हैं।

C) मस्तिष्क की सूझबूझ या जिज्ञासा नहीं:-
ऐसे बालकों के मस्तिष्क में ना जिज्ञासा और ना ही सूझबूझ होती है। वह किसी भी चीज को आसानी से नहीं समझ पाते ना उन पर गहन चिंतन कर पाते हैं अतः इन सब के कारण ऐसे बालक जिज्ञासु नहीं होते।

D क्रोध लोभ मोह आदि के संवेग से भी वंचित रहते हैं:~
ऐसे बालकों को क्रोध ,लोभ ,मोह, ईष्या, घमंड से कोई मतलब ही नहीं होता क्योंकि इसके अंदर कोई संवेग ही नहीं होता है।

6] कुसमायोजन की स्थिति ➖

A )निम्न स्तर का समायोजन:-
ऐसे बालकों का समायोजन निम्न स्तर का होता है अर्थात परिस्थिति के अनुरूप। जिसके कारण यह समाज में हो रहे गतिविधियों में या कोई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेना नहीं चाहते हैं।

B) सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहना:➖
ऐसे बालक समाज से दूर रहते हैं वह समाज के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाते जिसके कारण वह सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं समाज में हो रहे क्रियाकलाप को वह समझ नहीं पाते और जिस कारणवश वह समाज से दूर होते चले जाते हैं।

C उचित अनुचित का ज्ञान:➖
मंदबुद्धि बालक में खुद के प्रति उचित अनुचित का कोई ज्ञान ही नहीं होता उसके लिए क्या सही है क्या गलत यह निर्णय नहीं ले पाता है।

D समूह में समायोजन नहीं:➖
वह अपने आप को हमेशा समूह से दूर रखता है फिर वह विद्यालय हो या घर हो या फिर कोई सामाजिक वातावरण ।वह खुद को समूह में समायोजित नहीं कर पाता है।

7 शारीरिक संरचना असामान्य:➖
मंदबुद्धि बालक की शारीरिक संरचना असामान्य होती हैं। अर्थात अगर कहीं सामान्य बालक और मंदबुद्धि बालक दूर खड़ा हो तो मंदबुद्धि बालक की पहचान उसकी शारीरिक बनावट के अनुसार ही कर ली जाती है।

ऐसे बालकों की शारीरिक संरचना असामान्य होने के निम्न कारण है:➖
A➖ सामान्य बच्चे की शारीरिक गठन अलग होती है।

B➖ कद नाटा, पैर छोटी ,त्वचा मोटी होती है। लेकिन इसकी तुलना हम सामान्य बालकों में नहीं कर सकते हैं।

C ➖चेहरा उदास होता है!

D ➖शारीरिक अंग शिथिल होती है! 🌸🌸MAHIMA KUMARI🌸🌸🌸


मंदबुद्धि बालक🍁🌲

🌸 ऐसे बालक जो सामान्य बच्चों से किसी भी क्षेत्र में अन्य सामान्य बालको से किसी ना किसी रूप में पिछड़े होते हैं।चाहे,वो शारीरिक,मानसिक,सामाजिक,शैक्षिक व अन्य किसी भी क्षेत्र में हो।
ऐसे बच्चों कि बुद्धि लब्धि ७० से कम होती है।ऐसे बालक मंद बुद्धि बालकों की श्रेणी में आते हैं।

🍀अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं🍀

🌳शैक्षिक दृष्टिकोण :-

🌿 सूझ – बुझ :-
मंद बुद्धि बालकों में सूझ – बुझ की कमी होती है।जिसके कारण वो किसी भी चीज,व्यक्ति या वस्तु के बारे में सोच – समझ और स्मरण नहीं कर पाता है।

🌿क्षमता :-
ऐसे बालकों में किसी भी कार्य को करने की क्षमता कम होती है।इनमें क्षमता की विकास नहीं हो पाती।जो कि उनके कार्य करने के लिए उचित हो।

🌿 ध्यान केन्द्रण :-
मंद बुद्धि बालकों में ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति भी कम होती है।इनका ध्यान कभी भी एक जगह नहीं रहता।ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।

🌸🌸AAMD :- American association of mental deficiency🌸🌸

🎄🎄मंद बुद्धि बालकों के विषय में AAMD ने परिभाषा दिया।

🦚इनके अनुसार :-

🌟”मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है। जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ -२ ही पाई जाती है। जो कि विकास काल के समय स्फूटित्त होती है।”

🌳मंद बुद्धि बालक की विशेषता यें :-

1️⃣ बौद्धिक न्यूनता :-

🌿निम्न शैक्षिक स्तर :-
अन्य बालकों की तुलना में इनका शैक्षिक स्तर बहुत ही कम होता है।जिसके कारण इन्हें शिक्षा ग्रहण करने में कठिनाई आती है और पीछे रह जाते हैं।

🌿 न्यूनतम बुद्धि लब्धि :-
ऐसे बालकों की बुद्धि सामान्य बालकों की अपेक्षा बहुत कम होती है।
यानी कि :- इनकी बुद्धि …… ७० से कम होती है।

🌿 अधिक विस्मरण :-
मंद बुद्धि बालकों में भूलने की क्षमता बहुत ही अधिक होती है।ये किसी भी चीज,कार्य,विषय,क्षेत्र और अन्य चीजों में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते तथा कोई भी चीज जल्दी भूल जाते हैं।

🌿 दूसरों की सहायता की अपेक्षा :-
ऐसे बालकों को खुद पर विश्वास नहीं होता है।वे दूसरों से सहायता की अपेक्षा रखते हैं।उनका खुद पर नियंत्रण नहीं होता।

2️⃣ अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं :-

🌟वे मानसिक रूप से ऐसी क्रियाएं करती हैं।जो कि अनियंत्रित होती है।उन्हें अपनी खुद की क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता।

🦚जैसे कि :-
🌿 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है।
🌿 अवधान को केंद्रित नहीं कर सकते।
🌿 ध्यान के विस्तार में कमी।
🌿 सीमित शब्द भंडार।

3️⃣हीन व्यक्तित्व :-

🌿उदासीन/खिन्न मिजाज होना :-
मंद बुद्धि बालक हीन भावना से ग्रसित होते हैं।जिसके कारण उनमें उदासीनता होने लगती है।
उनका अपने खुद के व्यक्तित्व पर नियंत्रण नहीं होता तथा उदासीनता आ जाती है।

🌿कुछ भी कार्य करने में शिथिल :-
ऐसे बालक किसी भी कार्य को करने या समस्या समाधान करने में अगर वो कार्य पूर्ण नहीं कर पाते तो शिथिलता का अनुभव करते हैं।इस कारण भी उनमें हीन भावना आती है।अंत: उनमें शिथिलता आ जाती है।

🌿स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना :-
मंद बुद्धि बालक अपने विचारों को खुलकर प्रकट नहीं कर पाए अर्थात् ये कहा जाए कि ऐसे बालक अंतर्मुखी होते हैं।इनमें विचारों को व्यक्त करने की क्षमता की कमी के कारण स्पष्ट रूप से विचाराभिव्यक्ति नहीं कर पाते।

🌿 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं कर पाना :-

4️⃣ शैक्षिक पिछड़ेपन :-

🌿 इनमें शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है :-
किसी भी व्यक्ति के उपलब्धि के आधार पर ही उसके ग्रहण किए गए ज्ञान का मापन या अनुमान लगाया का सकता है। कि उन्होंने ने किस क्षेत्र में कितनी निपुणता प्राप्त की या नहीं की।
लेकिन मंद बुद्धि बालक इस प्रकार की शैक्षिक मानसिक उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते हैं।

🌿 इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है :-
मंद बालकों में इनके कम मंद मानसिक प्रक्रिया और उनकी मंद प्रक्रियाओं के कारण उन्हें कोई भी कार्य अन्यमनास्क भाव से करते हैं।जिससे उन्हें हर कार्य कठिन लगता है।

🌿 इनमें रटने की प्रवृत्ति होती है :-
मंद बुद्धि बालकों में सोचने – समझने की क्षमता कम होने के कारण ये रट्टा मारकर ही अपना कार्य करते हैं।इस प्रकार इनमें रटने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

🌿किसी भी अन्य सामान्य बालकों की अपेक्षा इनकी मानसिक आयु,शारीरिक आयु से कम होती है।

5️⃣ सीमित प्रेरणा और संवेग :-

🌿 कल्पना शक्ति से रहित :-
🌟कल्पना शक्ति एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम अपने विचारों,भावनाओं, संवेगों और अपने प्रतिमाओं का नया प्रयोग करते हैं।कल्पना एक ऐसी अनुभव है।जिसके द्वारा हम अपने पूर्व अनुभव को किसी ऐसी नई अनुभव या वस्तु से जोड़ने की कोशिश करते है।जिसमे हम सहायता मिलती है,जो कि इसके पहले शायद कभी ना रही हो।

🌿 प्रेरणा साधारण और सीमित।
🌿 मस्तिष्क सूझ/जिज्ञासा।
🌿 क्रोध,मोह,लोभ आदि के संवेग से वंचित रह जाना।

6️⃣ कुसमायोजन की स्थिति :-
🌟अगर व्यक्ति खुद को किसी भी परिवेश,कार्य या समस्याओं के प्रति उनके अनुकूल समायोजन ना के पाए या असमर्थ हों तो,ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं जो उनके इच्छा या आवश्यकता पूर्ति में बाधा उत्पन्न करती है उसे कु समायोजन कहते हैं।

🦚जैसे कि :-
🌿 निम्न स्तर का समायोजन :-
मंद बुद्धि बालकों में सामान्य से निम्न स्तर का समायोजन क्षमता पाई जाती है।

🌿समाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ :-
मंद बुद्धि बालकों में सामाजिक स्तर में भी कमी पाई जाती है।ऐसे बालक किसी भी समाज या व्यवहार में भाग लेना नहीं चाहते।तथा इन सब से अनभिज्ञ होते हैं।

🌿उचित – अनुचित का ज्ञान नहीं होता है :-
ऐसे बालकों में उचित – अनुचित का ज्ञान नहीं होता है।

🌿समूह में समायोजन नहीं कर पाते :-
ऐसे बालकों को एकांत में रहने की आदत होती है।इनमें अन्य सामान्य बालकों के तरह परस्पर सहयोग द्वारा सामाजिक क्रिया करना या समाज में रहकर उसके नियमों का पालन करना या किसी समूह विशेष में रहकर समायोजन करने की क्षमता नहीं होती है।

7️⃣ असामान्य शारीरिक संरचना :-

🌿 सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन।
🌿 कद नाटा,पैर छोटा, त्वचा मोटी।
🌿 उदास चेहरा।
🌿अंग शिथिल होती है।

🌟Notes by :- Neha Kumari☺️

🌸🌿🌸 धन्यवाद्🌸🌿🌸




मंद बुद्धि बालक (Mentally Retarded Children’s)–

मंदबुद्धि बालक वे बालक होते हैं ,जो मानसिक रूप से कमजोर तथा जिनकी बुद्धि –लब्धि सामान्य बालक से कम होती है ऐसे बालक “मंदबुद्धि बालक” कहलाते हैं।

◼️ शैक्षिक दृष्टिकोण से मंदबुद्धि बालक के निम्न लक्षण है–

▪️ १. सूझ–बूझ में कमी –

ऐसे बच्चे की सूझ– बूझ बहुत कम होती है वह किसी चीज पर सरलता से सोच समझ नहीं सकते हैं।

▪️ २. कम समझने की क्षमता–

मंदबुद्धि बालक में किसी चीज को समझने की क्षमता भी कम होती है , जिससे वह किसी कार्य को सही तरीके से नही कर पाते है।

▪️ ३. ध्यान केंद्रण करने की क्षमता में कमी–

मंदबुद्धि बालक अपने एक विचार पर एकाग्रित नहीं हो पाते हैं, जिससे उनमें ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होती है।

◼️ AAMD=(American Association Of Mental Dificiency) के द्वारा मंद बुद्धि की यह परिभाषा अपने शब्दों में स्पष्ट की है कि–“मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम”बौद्धिक कार्य निष्पादन”का संकेत देती है, जो कि“अनुकूल व्यवहार संबंधी ” दोषों के साथ– साथ ही पाई जाती है, जो कि विकास काल के समय “स्फूटित” होती है।”

◼️ मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं– मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं निम्नलिखित हैं–

▪️ १.बौद्धिक न्यूनता–

(i).निम्न शैक्षिक स्तर का कम होना– मंदबुद्धि बालक शैक्षिक स्तर मैं बहुत ही पिछड़े होते है, अपनी कक्षा के बच्चों से पढ़ाई –लिखाई व शिक्षा के अन्य क्षेत्र में भी बहुत ही पीछे रहते है ।

(ii).IQ कम होना– मंदबुद्धि बालकों में बुद्धि–लब्धि 70 से कम पाई जाती है।
( वही टर्मन के अनुसार–मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि–लब्धि 70–90 के बीच की होती है परंतु इसमें यह संभावना रहती है कि बालक उन्नति कर सकता है इसीलिए मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि –लब्धि 70 से कम रखी गई है।)

(iii).अधिक विस्मरण–
इसमें बच्चा चीजों को बहुत जल्दी भूल जाता है किसी चीज को ज्यादा समय के लिए याद नहीं रख पाता है।

(iv). दूसरों की सहायता की अपेक्षा– बच्चा हमेशा दूसरों की सहायता पर निर्भर रहता है, बच्चे को खुद अपने आप पर भरोसा/ विश्वास नहीं होता है । इसलिए वह दूसरों की सहायता पर निर्भर रहता हैं।

▪️ २. अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं– मंदबुद्धि बच्चे में अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं भी पाई जाती हैं जो निम्न है–

(i). मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण न कर पाना– जैसे बच्चे को कब ,क्या और कैसे करना है इन सभी चीजों पर मानसिक रूप से नियंत्रण नहीं कर पाते हैं।

(ii). अवधान/ध्यान को केंद्रित न कर पाना– इसमें बच्चे का ध्यान हमेशा इधर-उधर चीजों पर भटकता रहता है जिसके कारण वह एक जगह ध्यान केंद्रित करने में असफल रहते हैं।

(iii). ध्यान के विस्तार में कमी– मंदबुद्धि बालक किसी चीज को या अपने नए ज्ञान को पुराने ज्ञान से जोड़ने में असमर्थ रहते है।

(iv). सीमित शब्द भंडार– मंदबुद्धि बालकों के शब्द भंडार में भी कमी रहती है ये ज्यादा सीख भी नहीं पाते हैं क्योंकि इनके ध्यान में ही नहीं रहेगा और जिसके कारण अपने विचार को दूसरों के सामने व्यक्त नहीं कर पाते हैं।

▪️ ३. हिना व्यक्तित्व– जब किसी इंसान या व्यक्ति का व्यक्तित्व ही हीन है तो वह चीजों को सही तरीके से नहीं कर पाता है , जैसे–अपने काम को सही तरीके से न कर पाना, अपने शरीर की साफ-सफाई न कर पाना , किसी से सही ढंग से बात न कर पाना इत्यादि हीन व्यक्तित्व के लक्षण है जो निम्न है –
(i). उदासीन/खिन्न मिजाज का होना– किसी भी कार्य के प्रति रुचि , उत्साहित या अभिप्रेरित न होना , हमेशा निराश व उदास रहना , किसी कार्य को करने का साहस न कर पाना आदि।

(ii). किसी भी कार्य को करने में शिथिल होते हैं– मंदबुद्धि बालकों में किसी भी कार्य करने की इच्छा नहीं होती है , हमेशा सुस्त अवस्था में पाए जाते हैं । चंचल प्रवृत्ति के नहीं होते हैं।

(iii). स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता न होना– भाषा कौशल /संप्रेषण के ज्ञान में कमी ,जिसके कारण इनमें अपने विचारों की अभिव्यक्ति दूसरों के सामने सही तरीके से व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती है।

(iv). उत्तरदायित्व की पूर्ति न करना– मंदबुद्धि बालक अपने कार्य के प्रति लापरवाह होते हैं जिसके कारण ये अपनी जिम्मेदारियों की पूर्ति ठीक से नहीं कर पाते हैं।

▪️ ४. शैक्षिक पिछड़ापन– शैक्षिक क्षेत्र में किसी न किसी रूप से पिछड़े होते हैं –

(i). मंदबुद्धि बालकों की शैक्षिक उपलब्धि न के बराबर होती है , ऐसे बच्चों को किसी भी रूप में सफलता प्राप्त नहीं होती है। जिससे ये पिछड़े रह जाते है ।

(ii). ऐसे बच्चों के लिए शिक्षण कार्य करना काफी कठिन होता है।

(iii). इनमें रटने की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है क्योंकि ये चीजों को आसानी से समझ नहीं पाते हैं और रटा हुआ ज्ञान भी शीघ्र ही भूल जाते हैं।

(iv). मंदबुद्धि बालकों की मानसिक आयु उनके शारीरिक आयु या उम्र के हिसाब से कम होती है ।

▪️ ५. सीमित प्रेरणा और संवेग– मंदबुद्धि बालकों में और संवेग की कमी होती है जो किसी कार्य को करने के लिए बहुत ही आवश्यक होती है ।

(i). जैसे इनमें सोच , विचार या किसी चीज को इमैजिनेशन, विजुलाइज नहीं कर पाते हैं कल्पना शक्ति से रहित होते हैं।

(ii). इनकी प्रेरणा साधारण और सीमित होती है।

(iii). मस्तिष्क सुप्त/जिज्ञासा में कमी होती है।

(iv). क्रोध, लोभ , मोह इत्यादि के संवेग से भी वंचित रहते है ।

▪️ ६. कुसमायोजन की स्थिति– मंदबुद्धि बालक अपने सामान्य व्यवहार अपनी परिस्थितियों सही तरीके से समायोजित नहीं कर पाते है,जो कुसमायोजन कहलाता है।

(i). निम्न स्तर का समायोजन– बहुत ही कम समायोजन करने की क्षमता होती है।

(ii). सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं– समाज में होने वाले व्यवहार या कार्यों से अनजान होते हैं और समाज के नियम , कानून व्यवस्थाओं से भी अपरिचित रहते हैं।

(iii). उचित–अनुचित का ज्ञान न होना – सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते हैं।

(iv). समूह में समायोजित न कर पाना– मंदबुद्धि बालक समूह में खुद को समायोजित नहीं कर पाते हैं जिसके कारण वे सबसे अलग रहने लगते हैं।

▪️ ७. असामान्य शारीरिक संरचना– ऐसे बच्चों की शारीरिक संरचना सामान्य बच्चों की शारीरिक संरचना की तुलना में भिन्न होती है जैसे–

(i). सामान्य बच्चों से भिन्न होते हैं।

(ii). इनका कद नाटा या बौना हो सकता है तथा पैर छोटे –छोटे , त्वचा मोटी होती है।

(iii). चेहरा उदास , आंखें बड़ी –बड़ी, अजीब सी होती है।

(iv). शारीरिक अंग शिथिल होता है।

✍🏻Notes by – Pooja


♦️ 📗मंदबुद्धि बालक📗♦️

🌺 मंदबुद्धि बालकों के सामान्य गुण🌺

📖 शैक्षणिक दृष्टिकोण📖

1️⃣ मंदबुद्धि बालक sujh-bujh के मामले में कमजोर होते हैं, वह किसी भी टॉपिक पर गहराई से चिंतन नहीं कर सकते ,उनके अंदर सूझबूझ से तर्क लगाने की इतनी क्षमता नहीं होती है!

2️⃣ मंदबुद्धि बालकों में शैक्षणिक क्षमता कम होती है ,किसी भी कार्य के प्रति उपर्युक्त क्षमता का अभाव होता है!

3️⃣ मंदबुद्धि बालकों में ध्यान केंद्रन का आभाव पाया जाता है, वह किसी भी कार्य में पर्याप्त समय तक ध्यान केंद्रित नहीं रख सकते!

🌺AAMD🌺 = ‘American association of mental deficiency’ यह मानसिक मंदता का अमेरिकी संघ है! AAMD - के अनुसार मानसिक मंदता वाले बालकों के संदर्भ में परिभाषा दी गई है जो अग्रलिखित है - 'मानसिक मंथन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जोकि अनुकूल व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय isfutit होती है'..!

🌺मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं🌺

1️⃣ बौद्धिक न्यूनता = (a)- निम्न शैक्षिक स्तर / शैक्षिक स्तर निम्न दर्जे का होता है,जिससे वह शिक्षा के क्षेत्र में खरे नहीं उतर पाते,कुछ विशेष प्रगति हासिल नहीं कर पाते !

(b)- मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि/
टर्मन के अनुसार 70 – 89 बताइ है, लेकिन बुद्धि लब्धि का 70 से 8 9 स्तर होने पर बालक उन्नति और अवनति करने में सक्षम रहता है,
तो हम मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम कह सकते हैं!

(C) अधिक विस्मरण/ मंदबुद्धि बालकों में स्मरण शक्ति का अभाव होता है वह अधिक समय तक किसी भी चीज को याद नहीं रख सकते ,जिसके कारण इन बालकों में विस्मरण शक्ति पनपती है! अतः धीरे-धीरे विस्मरण की अधिकता होने लगती है!

(D) दूसरों से सहायता की अपेक्षा/ मंदबुद्धि बालकों में किसी भी कार्य को खुद से करने की क्षमता नहीं रहती है,वह हमेशा इसी उम्मीद में रहते हैं कि उनकी सहायता उनका साथी कर देगा! अपनी सहायता के लिए दूसरों पर आश्रित रहते हैं,उन्हें अपने आप पर भरोसा नहीं रहता,उनकी मानसिक धारणा रहती है कि हम किसी भी काम को दूसरों की सहायता से ही कर पाए हैं! उपरोक्त लाइनों को पढ़ने के बाद हम कह सकते हैं कि मंदबुद्धि बालक दूसरों से सहायता की अपेक्षा रखते हैं!

2️⃣ नियंत्रित मानसिक क्रियाएं=
(A) मंदबुद्धि बालकों का मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है,वह अपनी मानसिक गतिविधि पर काबू नहीं पा सकते .
अर्थात ऐसे बालक अपने अनुसार कार्य के प्रति अपना मन नहीं लगा सकते!

(B) अवधान को केंद्रित नहीं कर पाना=
मंदबुद्धि बालकों में अवधान अर्थात ध्यान को एकाग्र करने की क्षमता नहीं पाई जाती, वह किसी कार्य में अपना ध्यान केंद्रित नहीं रख सकते हैं, उनका ध्यान भटकता रहता है!
इससे स्पष्ट है कि मंदबुद्धि बालक अवधान को केंद्रित नहीं कर सकते!

(C). ध्यान के विस्तार में कमी/ जैसा कि हमने उपरोक्त point मैं पढ़ा की मंदबुद्धि बच्चों में अवधान केंद्रित करने की क्षमता नहीं होती, इसी कारणवश वह अपना ध्यान केंद्रित नहीं रख सकते अर्थात हम कह सकते हैं की जब वह ध्यान ही केंद्रित नहीं रख सकते तो ध्यान का विस्तार कैसे हो सकता है ! अतः ध्यान के विस्तार में कमी पाई जाएगी!

(D) सीमित शब्द भंडार/ मंदबुद्धि बालकों के शब्द भंडार में कमी पाई जाती है, ऐसे बालक गिने चुने शब्दों का ही प्रयोग करते हैं , उच्च ग्रेड के शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते! अतः सीमित शब्द भंडार पाया जाता है!

3️⃣ हीन व्यक्तित्व=
मंदबुद्धि बालकों में हीन व्यक्तित्व का समावेशन होता है जिसके संदर्भ में निम्न बिंदु दिए गए हैं
(A) उदासीन/khinn का होना/
मंदबुद्धि बालकों में हीन व्यक्तित्व पाया जाता है ,जिसके चलते वह अपने आपको दूसरों की अपेक्षा बहुत ही निम्न श्रेणी का समझते हैं ,जिसके कारण वह उदास रहते हैं!

(B) कुछ भी कार्य करने में शिथिल होना/
मंदबुद्धि बच्चों में हीन व्यक्तित्व के रहते हुए कार्य करने की शिथिलता पाई जाती है ,जिसके रहते वह किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकते, वह किसी कार्य को पूरा नहीं कर सकते और उनमें कार्य करने की शिथिलता उत्पन्न हो जाती है!

(C) स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता का ना होना/
मंदबुद्धि बालक अपने अंदर जागृत हो रहे विचारों को स्पष्ट तौर पर व्यक्त नहीं कर पाते ऐसे बालकों में अपने भाव विचार दूसरों के सामने रखने में झिझक या शब्दों का अभाव रहता है
वह असमंजस में रहते हैं कि हम अपने विचारों को किस प्रकार रखें!

(D) उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते/
मंदबुद्धि बालक दिए हुए उत्तरदायित्व की पूर्ति करने में सक्षम नहीं रहते क्योंकि उनके अंदर जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता नहीं होती!

4️⃣ शैक्षिक पिछड़ापन= मंदबुद्धि बालकों में शैक्षिक पिछड़ापन पाया जाता है जो इस प्रकार है- (A) शैक्षिक उपलब्धि न के बराबर होती है/ मंदबुद्धि बालकों में शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर पाई जाती है, वह शिक्षा में अच्छी उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते उनमें शिक्षा से जुड़े हुए कार्यों को करने की क्षमता भी नहीं होती है!

(B) शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है/
जैसा कि आप जानते हैं,मंदबुद्धि बालक शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े होते हैं,जिससे कि उनके लिए शिक्षण संबंधी कार्य काफी कठिन हो जाता है!

(C) ratne की प्रवृत्ति/
ऐसे बालकों में सोचने ,समझने , तर्क करने की क्षमता नहीं पाई जाती है, इस कारण वह किसी भी विषय वस्तु को समझकर नहीं सीख सकते अर्थात उन्हें ratne की प्रवृत्ति प्रयोग में लानी पड़ती है!

(D) मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम/
मंदबुद्धि बालकों में मानसिक आयु कम पाई जाती है ,उनका बुद्धि स्तर कम रहता है, ऐसे बालकों की शारीरिक वृद्धि होती रहती है पर मानसिक आयु स्तर सीमित ही रहता है!

5️⃣ सीमित प्रेरणा और संवेग=
मंदबुद्धि बालकों में सीमित मात्रा में प्रेरणा और संवेग रहता है इस संदर्भ कुछ खास बिंदु इस तरह हैं-
(A) कल्पना शक्ति से रहित/
मंदबुद्धि बालकों में कल्पना शक्ति का अभाव रहता है, वह किसी भी विषय पर अमूर्त चिंतन नहीं कर पाते क्योंकि उनमें इतनी बौद्धिक क्षमता नहीं होती है!

(B) प्रेरणा साधारण और सीमित/
ऐसे बालकों में प्रेरणा साधारण तरीके की और सीमित मात्रा में होती है , उनमें अत्यधिक प्रोत्साहन नहीं रहता है, जिसके कारण वह कम जिज्ञासु भी होते हैं!

(C) मस्तिष्क sujh/ जिज्ञासा / मंदबुद्धि बालकों के मस्तिष्क में सोचने समझने तथा जिज्ञासा की कमी होती है, जिस वजह से वह किसी विषय वस्तु पर तर्क व गहन चिंतन नहीं कर पाते और जिज्ञासु भी नहीं रहते हैं!

(D) क्रोध , लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से वंचित/
मंदबुद्धि बालकों के जीवन पर संवेग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता वह इन सब के परे होते हैं!

6️⃣ कुसमायोजन की स्थिति = मंदबुद्धि बालकों में समायोजन ना कर पाने की स्थिति पाई जाती है-

(1) निम्न स्तर का समायोजन/
मंदबुद्धि बालकों में किसी भी परिस्थिति में समायोजन करने की योग्यता नहीं पाई जाती!

(2) सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ/
ऐसे बालक समाज से ज्यादा लगाव नहीं रखते वे सामाजिक कार्यों में भाग लेना नहीं चाहते ,समाज के वातावरण में समायोजन नहीं कर पाते जिसके कारण वह सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं!
(3) उचित अनुचित का ज्ञान नहीं रहता/
ऐसे बालकों को उचित अनुचित का ज्ञान नहीं रहता क्या अच्छा है और क्या सही यह जानने में उनकी बुद्धि काम नहीं करती!
(4)समूह में समायोजन ना कर पाना/
ऐसे बालक समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं चाहे वह खेल का मैदान हो कक्षा कक्ष या किसी भी प्रकार का समूह उसमें समायोजन नहीं कर पाते क्योंकि उनमें इस क्षमता का अभाव होता है!
7️⃣ असामान्य शारीरिक संरचना=
मंदबुद्धि बालकों में शारीरिक संरचना सामान्य नहीं पाई जाती-
(1) सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन/
मंदबुद्धि बच्चों में सामान्य बालकों की अपेक्षा शारीरिक गठन अलग पाया जाता है जैसे कि सिर बड़ा गर्दन छोटी और भी कई प्रकार की भिन्नता पाई जाती है!
(2) कद छोटा होता है/
ऐसे बालकों में सामान्य बालकों की अपेक्षा कद छोटा पाया जाता है उनकी शारीरिक वृद्धि /ग्रोथ अच्छी नहीं हो पाती!

(3) pair छोटे तथा त्वचा मोटी/
ऐसे बालकों में सामान्य बालकों की अपेक्षा पैर छोटे -छोटे होते हैं तथा त्वचा मोटी होती है!

(4) उदासीन चेहरा/ ऐसे बालकों का चेहरा उदासीन रहता है क्योंकि वह हीन व्यक्तित्व के कारण सुस्त रहते हैं!

(5) शारीरिक अंग स्थिर/
मंदबुद्धि बालकों में शारीरिक अंग स्थिर रहते हैं उनमें अधिकाधिक स्थिरता देखी जाती है!
🌺RITU YOGI🌺
🙏🏻 समाप्त🙏🏻


💫मंदबुद्धि बालक💫

शैक्षिक दृष्टिकोण:-ऐसे बालकों की सूझबूझ बहुत तेज नहीं होती है। ऐसी बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा पढ़ने में बहुत ही धीमे होते हैं।
२)ऐसे बालकों की शैक्षिक क्षमता बहुत ही कम होती है
३) ऐसी बालकों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होती हैं।

AAMD(American association of mental deficiency) के अनुसार मंदबुद्धि बच्चों की मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूल व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।

🔅 मंद बालक की विशेषताएं🔅

  1. बौद्धिक न्यूनता:-
    i. निम्न शैक्षिक स्तर:-ऐसी बालकों का शैक्षिक स्तर निम्न होता है।
    ii. बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है।
    iii. अधिक विस्मरण:-मंद बुद्धि बालकों में भूलने की क्षमता बहुत ही अधिक होती है ये किसी भी चीज कार्य विषम क्षेत्र और अन्य चीजों में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते तथा कोई भी चीज जल्दी भूल जाते है।

2) अनियंत्रित मानसिक क्रिया:-
1) मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है:-ऐसे बालकों की मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता है।
2) अवधान को केंद्र नहीं करना
3)ध्यान से विस्तार में कमी।
4) ऐसे बालक का शब्द भंडार सीमित होता है।

💫हीन व्यक्त्तिव💫
1)ऐसा बालक उदासीन खिन्न मिजाज का होता है।
2) ऐसी बालक कोई भी काम करने में शिथिल रहते हैं।
3)स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना।
4) उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं कर सकते है।

🔆शैक्षिक पिछड़ापन🔆

  1. शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है।
    2.इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होती है।
    3.ऐसे बालक की रटने की प्रवृत्ति होती थी।
  2. मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है।

🔆सीमित प्रेरणा और संवेग🔆

  1. कल्पनाशक्ति से रहित होते है।
    2.प्रेरणाएं साधारण व समिति होती है।
  2. मस्तिष्क सूक्ष्म जिज्ञासा होती है।
    4.क्रोध लोभ मोह,इत्यादि के संवेग से वंचित

🔅 कुसमायोजन की स्थिति🔅

  1. ऐसी बालक निम्न स्तर का समायोजन कर पाते हैं।
  2. मंदबुद्धि का बालक सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहता है।
  3. ऐसे बालकों को उचित और अनुचित का ज्ञान नहीं रहता है।
  4. समूह में समायोजन:- ऐसे बालक को समूह में समायोजन करने में दिक्कत होती है वह समाज में रहकर भी समाज के नियमों का पालन करने में हिचकीचाता है।
  5. असामान्य शारीरिक संरचना:-
    1) सामान्य बच्चों से भिन्न होते हैं।
    2) ऐसे बाला को का कद नाका हो सकता है पर छोटे तथा त्वचा मोटी होती है।
    3) मंदबुद्धि बालकों के चेहरे में हमेशा उदासी रहती है।
    4) मंदबुद्धि बालकों के शारीरिक अंग शिथिल होते हैं।

✍🏻✍🏻 Notes by Raziya khan✍🏻✍🏻


🌻मंद बुद्धि बालक 🌻
मंद बुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 90से कम होता है मंद गति से सीखने वाला बालक अपने कार्य को करने में संक्षम नही हो पाता है और उन्हें दिक्कतो का सामना करना पड़ता है
🌱शैक्षिक दृष्टिकोण के कारण मंद बुद्धि बालक में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं जैसे –

मंद बुद्धि बालक की सुझ बुझ कम होती है

मंद बुद्धि बालक में किसी कार्य को करने में क्षमता कम होती हैं

ध्यान केंद्र की क्षमता कम होती हैं

American Association of Mental Dificiency (AAMD) परिभाषा दी है मंद बुद्धि के बालको के बारे में बताया हैं
“मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषो के साथ साथ ही पाई जाती हैं, जो कि विकास काल के समय स्फुटित होता है
🌻मंद बुद्धि बालक की विशेषताएँ 🌻
🌸बौद्धिक न्यूनता🌸 बौद्धिक न्यूनता कम पायी जाती हैं।

निम्न शैक्षिक स्तर -मंद बुद्धि बालक शैक्षिक स्तर पर निम्न होते है

बुद्धि लब्धि <70- मंद बुद्धि बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती हैं

अघिक विस्मरण -मंद बुद्धि बालक अघिक विस्मरण होते हैं किसी भी चीज को जल्दी याद करते है और उतनी ही जल्दी भूल जाते हैं

दूसरो की सहायता की अपेक्षा -मंद बुद्धि बालक दूसरो की सहायता लेने चाहते हैं वो खुद से काम करने में असमर्थ होते है उन्हें आत्म विश्वास की कमी होती हैं

🌸अनियंत्रित मानसिक क्रियाए

मानसिक क्रियाओ पर नियंत्रण नही होता है

अवघान (टेशन) को केंद्रित नही करते पाते हैं -मंद बुद्धि बालक में घ्यान देने की क्षमता कम होती हैं

मंद बुद्धि बालक के घ्यान में विस्तार की कमी होती हैं

सीमित शब्द भंडार -मंद बुद्धि बालक में शब्द सीमा कम होती हैं वो बहुत सोचकर बोलते हैं

🌸हीन व्यक्तित्व 🌸
वयक्तति का हाव भाव से ही हम पता कर लेते हैं जैसे –
ःउदासीन, खीन मिजाज का होना
ःकुछ भी कार्य में शिथिल (सुस्त होते है) घीरे घीरे करते है
ः स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती हैं
ःउतरदायितव की पूर्ति नही कर पाते
🌸शैक्षिक पिछड़ापन 🌸
ःशैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती हैं शिक्षा में बहुत पीछे रहते हैं वो ज्ञान उपलब्ध नहीं कर पाते हैं
ःइनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है
ःरटने की प्रवृति अधिक होती हैं
ःमानसिक आयु से शारीरिक आयु से कम होती हैं
🌸सीमित प्रेरणा और संवेग 🌸
ःकल्पना सहित से रहित
क्लपना शक्ति मंद बुद्धि बालक में नहीं होती हैं वो उतना सोच ही नहीं पाते है
ःप्रेरणा साघारण और सीमित रहती हैं
ःमसितष्क सुझ बुझ में कमी /जिज्ञासा उत्सुकता ना होना
ःक्रोघ ,लोभ ,मोह इत्यादि के संवेग से वंचित रह जाते है
🌸कुसमायोजन की स्थिति 🌸
जब बालक कोई काम करता है तो उन्हें ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जो सोचते भी नहीं है उनके अनुकूल कुसमायोजन होती हैं
ःनिम्न स्तर का समायोजन कम होती हैं
ःसामाजिक व्यवहार में अनभिज्ञ (नही पता होना) रहते हैं -समाज में जो कार्य होते है उससे वो अनभिज्ञ रहते हैं
ः उचित अनुचित का ज्ञान नहीं – क्या सही है क्या गलत है इसका उनको ज्ञान नही होता है
ःसमुह में समायोजन नही कर पाते है – समुह समयोजन से बच्चे बहुत कुछ सीखते है एक साथ रहना सीखते है अपने विचार को वयक्त करते है मगर मंद बुद्धि बालक ऐसा करने में सक्षम नही होते है
🌸असामान्य शारीरिक संरचना
ः सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन
ःकद नाटा, पैंड़ छोटा, त्वचा मोटी
ःउदासीन चेहरा
ःशारीरिक अंग शिथिल होती हैं
🖊
Notes By -Neha Roy


मंदबुद्धि बालक
*शैक्षिक दृष्टिकोण
-सूझबूझ से काम नहीं लेते हैं (जैसे-किसी भी कार्य करने की कैपेसिटी कम होती है)
ध्यान केंद्रण की क्षमता कम होती है
*American association of mental deficiency
-मानसिक मतदान मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो के अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ- साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फूटित होती है
मंदबुद्धि बालक की विशेषता-
बौद्धिक न्यूनता
निम्न शैक्षिक स्तर
बुद्धि लब्धि Less then 70 होती है
अधिक विस्मरण
दूसरों से सहायता की अपेक्षा
अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं-
(1) मानसिक क्रियाएं पर नियंत्रण नहीं है
(2) अवधान या ध्यान को केंद्रित नहीं करना
(3) ध्यान के विस्तार में कमी (जैसे-ध्यन कैसे भी लिंक करके बढ़ाएं)
(4) सीमित शब्द भंडार (जैसे-जानने पर भी शब्द का भंडार नहीं हो पाता है)

हीन व्यक्तित्व-
(1) उदासीन, खिन्न मिजाज का होना (जैसे-अपने जिंदगी में उदास रहना या upset रहना
(2) कुछ भी कार्य करने में शिथिल होते हैं (जैसे-शुस्थ रहता है, बालक आलसी होता है, लेजी रहता है, सक्रिय नहीं होता है)
(3) स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना
(4) उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं कर पाता है

शैक्षिक पिछड़ापन-
(1) शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है(मतलब-ऐसे बच्चों को कोई भी उपलब्धि नहीं मिलती है)
(2) ऐसे बच्चों के लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होते हैं (शिक्षक समझाते -समझाते परेशान हो जाते हैं फिर भी बचा नहीं समझते है)
(3) रखने की प्रवृत्ति रहती है (समझने की क्षमता नहीं होती है)
मानसिक आयु शारिरिक आयु से कम होती है (जैसे बच्चा 10 साल का है तो 10 साल की तरह बुद्धि होनी चाहिए)

सीमित प्रेरणा और संवेग
(1) किसी भी कार्य के प्रति इमेजिंग नहीं कर पाते हैं
(2) कल्पना शक्ति से रहित होते हैं
(3) प्रेरणा साधारण और सीमित होती है
(4) मस्तिष्क की सूझबूझ या जिज्ञासा नहीं होती है
(5) क्रोध, लोभ, मोह, इत्यादि।
संवेग से वंचित रहते हैं।

कुसमायोजन की स्थिति-
(1) निम्न स्तर का समायोजन (कोई भी चीज को एडजस्ट नहीं कर पाना)
(2) सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं।
(3) उचित अनुचित का ज्ञान नहीं है (मतलब अच्छा बुरा का ज्ञान नहीं होता)
(4) समूह में समायोजन नहीं हो पाना

असामान्य शारीरिक संरचना-
(1) सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन (मतलब और असामान्य रहती है)
(2) कद नाटा, पैर छोटे व त्वचा मोटी हो सकती है
(3)उदास चेहरा (फेस अजीब रहता है)
(4) अंग शिथिल होता है।

Notes By-Sriram Panjiyara


🌷 मंद बुद्धि बालक 🌷
🌷 ( Mentally Retarded Children ) 🌷

ऐसे बच्चे मानसिक रूप से पिछड़े होते हैं, एवं मानसिक रूप से अक्षम होने के साथ-साथ इनकी बुद्धि लब्धि भी सामान्य से कम होती है।

मंद बुद्धि बालकों में शैक्षिक रूप से निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं –

👉मंदबुद्धि बालकों में सूझबूझ की क्षमता तेज नहीं पाई जाती है;
👉 मंदबुद्धि बालकों में सोचने और समझने की क्षमता न्यून पाई जाती है;
👉मंदबुद्धि बालकों का ध्यान केंद्रित नहीं रह पाता है।

🌺( American Association of Mental Deficiency, (AAMD) )🌺
द्वारा मंदबुद्धि बालकों के विषय में परिभाषा दी गई कि –

🌺” मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है, जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ-साथ ही पाई जाती है, जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।”🌺

🌲🌲🌷 मंद बुद्धि बालकों की विशेषताएं 🌷🌲🌲

  1. 🌺 बौद्धिक न्यूनता :-🌺

👉 निम्न शैक्षिक स्तर , मंदबुद्धि बालकों का शैक्षिक स्तर सामान्य से भी निम्न होता है।

👉मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि IQ 70 से भी कम होती है।

👉अधिक विस्मरण , अर्थात मंदबुद्धि बालक न तो जल्दी सीख ही पाते हैं और यदि कुछ सीख भी लिया तो इनमें जल्दी भूलने की प्रवृत्ति होती है। अपनी पूर्व ज्ञान और अनुभवों को याद रखने में और दोहराने में अक्षम होते हैं

👉 दूसरों की सहायता की अपेक्षा , अर्थात् मंदबुद्धि बालक अपने हर कार्य में दूसरों की सहायता की उम्मीद रखते हैं।

  1. 🌺 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं :-🌺

👉 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता है।

👉 अवधान ( Attention ध्यान )को केंद्रित नहीं कर पाते हैं। चूँकि ऐसे बालकों में स्मरण की क्षमता कम पाई जाती है इसीलिए ये किसी भी चीजों, बातों आदि पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
👉 ध्यान विस्तार में कमी। अतः ऐसे बालकों के साथ जब कुछ नया होता है तो उस समय बो सामान्य बालकों की तरह अपने पुराने ध्यान को वर्तमान समय से जोड़ ( Link) ) नहीं कर पाते हैं।

👉 सीमित शब्द भंडार । ये मानसिक और शैक्षिक स्तर से पिछड़े होने के कारण इनके पास शब्द भंडार ( Vocabulary ) की कमी होती है।

  1. 🌺 हीन व्यक्तित्व :- 🌺 ‘व्यक्तित्व ( Personality ) ही एक व्यक्ति को समाज में एक विशेष रूप प्रदान करता है परंतु , …
    मंद बालकों में व्यक्तित्व की हीनता पाई जाती है।’

👉 उदासीन या मिजाज का खिन्न होना , ये उदास और एकाकी स्वभाव के होते हैं।

👉 ये कुछ भी कार्य करने में शिथिल और आलसी होते हैं।

👉 ऐसे बालकों में स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं होती है।

👉 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते, अर्थात ये ( Irresponsible गैर जिम्मेदार ) होते हैं।

  1. 🌺 शैक्षिक पिछड़ापन :- 🌺 👉 शैक्षिक उपलब्धि न के बराबर , ऐसेबालकों का मानसिक स्तर और बुद्धि लब्धि कम होने के कारण इनकी शैक्षिक उपलब्धि बहुत कम होती है।

👉 ऐसे बच्चों के लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है क्योंकि इनका IQ बुद्धि लब्धि बहुत कम होती है इसलिए इनको शिक्षा देना सामान्य से बहुत कठिन होता है।

👉 मंदबुद्धि बालकों में रटने की प्रवृत्ति होती है।

👉 मंदबुद्धि बालकों की मानसिक आयु, शारीरिक आयु से कम होती है।

  1. 🌺 सीमित प्रेरणा और संवेग🌺 👉 कल्पना शक्ति से राहित, चूँकि मंदबुद्धि बालक मानसिक रूप से निम्न स्तर के होते हैं तो इनकी सोचने , कल्पना ( Imagination ) करने की क्षमता बहुत ही कम होती है।

👉 ऐसे बालकों की प्रेरणायें साधारण और सीमित होतीं हैं।

👉 ऐसे बलकों का मस्तिष्क सुप्त और जिज्ञासा ( Curiosity ) कम होती है।

👉 मंद बुद्धि बालक क्रोध, लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से वंचित होते हैं।

  1. 🌺 कुसमायोजन की स्थिति 🌺

👉 निम्न स्तर का समायोजन, मंदबुद्धि बालक( Adjustment )करने में अक्षम होते हैं।
👉 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ, ऐसे बालक सामाजिक व्यवहार और सामाजिक वातावरण से अपरचित होते हैं।

👉 उचित अनुचित का ज्ञान नहीं होता, मंद बुद्धि बालक सही और गलत में ठीक से विभेद नहीं कर पाते हैं।

👉 समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं, अर्थात मंद बुद्धि बालक किसी भी समूह में खुद को समायोजित करने में असमर्थ होते हैं।

7, 🌺 असामान्य शारीरिक संरचना 🌺

👉 सामान्य से भिन्न , शारीरिक गठन, अर्थात मंदबुद्धि बालक सामान्य बालकों से शारीरिक रूप से भी भिन्न होते हैं।

👉 मंद बुद्धि बालकों का कद छोटा, त्वचा मोटी और पैर छोटे होते हैं।

👉 मंद बुद्धि बालकों का चेहरा अधिकतर उदास रहता है।

👉 मंद बुद्धि बालकों का शारीरिक अंग शिथिल होता हैं। ✍️🏼 जूही श्रीवास्तव ✍️🏼


🎯मन्द- बुद्धि बालक🎯
ऐसे बालक से है जो ” मानसिक” रूप से कमजोर होते है, जिनके मानसिक और बुद्धि इतने कम विकसित हैं कि उनमें मानसिक क्षमताएँ कम विकसित होती है, ऐसे बालको को मन्द-बुद्धि बालक, धीमी गति से सीखने वाले बालक, मानसिक रूय से पिछड़ा बालक तथा मानसिक रूप से विकलांग बालक इन सभी नामों का प्रयोग किया जाता है
🎯शैक्षिक दृष्टिकोण🎯
🌸इनकी सूझ- बुझ की क्षमता में कमी होती हैं।
🌸इनकी समझने की क्षमता में कमी होती हैं।
🌸इनकी ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता में कमी।

🎯 AAMD(American Association_of_mental_Deficiency) 🎯
🌸मानसिक मंदता मुुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती हैं जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ-साथ ही पाई जाती हैं जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती हैं🌸

🎯 मन्द बुद्धि बालक की विशेषताएं🎯
मन्द बुद्धि बालक की विशेषताओं को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है-

🌸 बौद्धिक न्यूनता_🌸
💫इनका शैक्षिक स्तर निम्न प्रकार का होता है।
💫इनकी बुद्धि लब्धी 70 से कम होती हैं।
💫इनमे दूसरों से सहायता की अपेक्षा रहती हैं।
💫 ये अधिक समय तक किसी भी चीज़ को याद नहीं रख पाते।

🌸 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं_🌸
💫इनमे ध्यान के विस्तार में कमी होती हैं।
💫इनका शब्द-भण्डार सीमित होता है।
💫इनका मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता।
💫ये अवधान को केन्द्रित नहीं कर पाते।

🌸हीन व्यक्तित्व🌸_
💫 उदासीन व खिन्न मिजाज़ का होना।
💫कोई भी कार्य करने में शिथिल होना।
💫 स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना।
💫 उत्तरदायित्व की पूर्ति नहीं कर पाना।

🌸 शैक्षिक पिछड़ापन🌸
💫इनकी शैक्षिक-उपलब्धि ना के बराबर होना।
💫इनके लिए शिक्षण कार्य काफ़ी कठिन होता है।
💫इनके अन्दर रटने की प्रवृति होती है।
💫इनकी मानसिक आयु , शारीरिक आयु से कम होती हैं।

🌸 सीमित प्रेरणा और संवेग🌸
💫 कल्पना शक्ति से रहित।
💫 प्रेरणा साधारण और सीमित।
💫 क्रोध, लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से वंचित।

🌸कुसमायोजन की स्थिति🌸
💫निम्न स्तर का समायोजन होता है।
💫 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ होते है।
💫 उचित व अनुचित का ज्ञान नहीं होता है।
💫 समुह में समायोजन नहीं कर पाते हैं।

🌸असामान्य शारीरिक संरचना🌸
💫इनका शारीरिक गठन सामान्य से भिन्न होता है।
💫 इनका चेहरा उदास दिखाई देता है।
💫इनका शारीरिक अंग शिथिल होता है।
💫इनका कद्द नाटा, पैर छोटे, त्वचा मोटी होती हैं।

📚✍🏻
Notes by NishaYadav
🙏🏻🙏🏻 धन्यवाद् 🙏🏻🙏🏻


🔸मंदबुद्धि बालक ( mentally retarded children )🔸 मंदबुद्धि बालक वह बालक होते हैं जो मानसिक रूप से कमजोर तथा जिन की बुद्धि लब्धि सामान्य बालक से कम होती हैं। अर्थात हम यह कह सकते हैं कि मंदबुद्धि बालक वह है जो सामान्य बालक से भिन्न है वह बालक कोई भी कार्य सामान्य बालक की तरह नहीं कर सकता और यदि करता भी है तो बहुत समय लगाएगा । मंदबुद्धि बालक सामान्य बालक की तुलना में शैक्षिक एवं मानसिक दोनों दृष्टिकोण से कमजोर होता है । ➡शैक्षिक दृष्टिकोण :- अ) इनकी सूझ – बूझ कम होती है ब) क्षमता कम होती है स) ध्यान केंद्रण की कमी होती है *** A A M D — American Association of mental deficiency ↔ के अनुसार – मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत करती है। जो की अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ ही पाई जाती है ।जो कि विकास काम के समय स्फुटित होती है । मंदबुद्धि बालक की विशेषता :- 1 बौद्धिक क्षमता :– अ) निम्न शैक्षिक स्तर । ब) बुद्धि लब्धि 70 से कम । स) अधिक विस्मरण करने की क्षमता । द)दूसरों की सहायता की अपेक्षा । 2 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं :– अ) मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है। ब) अवधान को केंद्रित नहीं कर पाता है । स) ध्यान के विस्तार में कमी होती है। द ) सीमित शब्द भंडार होता है। 3 हीन व्यक्तित्व :– अ) उदासीन ,खिन्न मिजाज का होना ।ब) कुछ भी काम करने में शिथिल । स) स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना। द) उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करना । 4 शैक्षिक पिछड़ापन :– अ) शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर। ब) इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है। स)ये रटने की प्रवृत्ति रखते हैं ।द) मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है। 5 सीमित प्रेरणा और संवेग :– अ) कल्पना शक्ति से रहित। ब) प्रेरणा साधारण और सीमित होती है। स) मस्तिष्क की सूझ – बूझ में कमी / जिज्ञासु प्रवृत्ति का ना होना द)क्रोध , लोभ ,मोह इत्यादि से वंचित होना । 6 कुसमायोजन की स्थिति :– अ) निम्न स्तर का समायोजन। ब)सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ स) उचित अनुचित का ज्ञान नहीं होता है ।द) समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं। 7 असामान्य शारीरिक संरचना :– अ )सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन । ब) कद नाटा, पैर छोटा, त्वचा मोटी स) उदास चेहरा । द) अंगों में शिथिलता होती है । ✍️notes by Pragya shukla…… धन्यवाद 🙏🙏


मंदबुद्धि बालक

शैक्षिक दृष्टिकोण-

👉ऐसे बालकों की सूझ बूझ तेज नहीं होती हैं
👉इनमें समझने की क्षमता कम होती है
👉इनकी ध्यान केंद्रण की क्षमता कम होती है

💥AAMD-American association of mental deficiency

💥AAMD ने मंदबुद्धि बालक की परिभाषा निम्न प्रकार दी
मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती हैं ,जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ ही पाई जाती है, जो कि विकास के काल के समय स्फुटित होती है

💥मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं –

1.बौद्धिक न्यूनता-

👉निम्न शैक्षिक स्तर -मंदबुद्धि बालकों का शैक्षिक स्तर बहुत निम्न होता हैं।
👉बुद्धि लब्धि -मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है ।टर्मन के अनुसार मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 90 से कम बतायी है। लेकिन 70 से ऊपर की बुद्धि लब्धि वाले बालकों की उन्नति हो सकती हैं ,शैक्षिक प्रगति हो सकती है परंतु 70 से नीचे वाले की बहुत कम प्रगति हो सकती है।
👉अधिक विस्मरण -ऐसे बालकों को ज्यादा बातें याद नहीं रह पाती है यह बातों को जल्दी भूल जाते हैं
👉दूसरों की सहायता की अपेक्षा -ऐसे बालक अपने कार्यों को करने के लिए ज्यादातर दूसरों पर निर्भर रहते हैं, दूसरों से अपेक्षा रखते हैं

2.अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं-

👉ऐसे बालकों का मानसिक क्रिया पर नियंत्रण नहीं होता है अर्थात जैसे इन्हें साबुन लेने के लिए भेजा गया था लेकिन साबुन की जगह यह टूथपेस्ट लेकर आ गया। इस प्रकार इनकी मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रहता है।

👉अवदान या ध्यान को केंद्रित नहीं कर पाते –
ऐसे बालक किसी कार्य में अपना ध्यान ज्यादा समय के लिए नहीं लगा सकते हैं

👉ध्यान के विस्तार में कमी होती है।

👉सीमित शब्द भंडार होता है -ऐसे बालकों के पास शब्द भंडार की कमी होती है। अपने विचारों को प्रकट करने के लिए इनके पास लिपिबद्ध तरीके से शब्द नहीं होते हैं

3.हीन व्यक्तित्व-

👉उदासीन, खिन्न मिजाज का होना -ऐसे बालक किसी भी कार्य में रुचि नहीं लेते हैं ,उदासीन बैठे रहते हैं
👉कुछ भी कार्य करने में शिथिल होते हैं अर्थात यह किसी का कार्य को करने करने में सुस्ताते हैं, आलस करते हैं, सक्रिय नहीं रहते हैं
👉स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना अर्थात अपने विचारों को व्यक्त करने में यह असमंजस में पड़े रहते हैं।
👉उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते हैं -ऐसे बालक किसी भी कार्य का उत्तरदायित्व लेने से पीछे हटते हैं उसमें ज्यादा रुचि नहीं लेते हैं ,सक्रिय होकर कार्य नहीं करते है

4.शैक्षिक पिछड़ापन-

👉ऐसे बालकों की शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है 👉इनके लिए शिक्षण कार्य करना काफी कठिन होता है 👉यह रटने की प्रवृत्ति रखते हैं
👉इनकी मानसिक आयु ,शारीरिक आयु से कम होती है

5.सीमित प्रेरणा और संवेग-

👉यह कल्पना शक्ति से रहित होते हैं
👉 इनकी प्रेरणा साधारण और सीमित होती है ज्यादा उत्साहित नहीं होते हैं।
👉 मस्तिष्क में सूझ -बूझ, उत्सुकता, जिज्ञासा में कमी होती है
👉 क्रोध ,लोभ ,मोह इत्यादि संवेग से वंचित होते अर्थात इनकी किसी कार्य को करने में जिज्ञासा नहीं होती है इस कारण यह क्रोध ,खुशी जैसे सभी अवसरों पर समान रहते हैं।

6.कुसमायोजन की स्थिति-

👉निम्न स्तर का समायोजन-ऐसे बालक किसी भी परिस्थिति में अपने आप को समायोजित नहीं कर पाते हैं।
👉 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ (अनजान) रहते हैं
👉ऐसे बालकों को उचित -अनुचित का ज्ञान नहीं होता है
👉 समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं।

7.सामान्य शारीरिक संरचना –

👉ऐसे बालकों की शारीरिक संरचना सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन की होती है।
👉 इनका कद नाटा या छोटा, पैर छोटे तथा त्वचा मोटी होती है
👉चेहरा उदास होता है इनके चेहरे पर उत्सुकता का तेज कभी दिखाई नहीं देता है
👉 इनके शारीरिक अंग शिथिल होते हैं।

Notes by Ravi kushwah


🔘 मंदबुद्धि बालक
mentally retarded children
🔹 मंदबुद्धि बालक मानसिक रूप से कमजोर होते हैं वह किसी भी कार्य को नहीं कर पाते हैं ऐसे बालकों का जीवन एक समस्या बन जाता है यह दूसरों पर निर्भर होते हैं ऐसे बालकों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है

🔘 मंदबुद्धि बालक शैक्षिक दृष्टिकोण से

🔹 मंदबुद्धि बालक अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं ऐसे बालक सूझबूझ से काम नहीं लेते हैं और सोचने समझने की क्षमता कम होती है

🔘 मंदबुद्धि बालकों की परिभाषा
🔹AAMD के अनुसार
American association of mental deficiency
मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथी पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है

🔘 मंदबुद्धि बालक की विशेषता

1️⃣ बौध्दिक न्यूनता
🔹मंदबुद्धि बालक की बौद्धिक क्षमता निम्न स्तर की होती है
ऐसे बालक की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है अधिक विस्मरण की क्षमता होती है ऐसे बालक दूसरों पर आश्रित होते हैं उन्हें अधिक सहायता की जरूरत होती है

2️⃣ अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं
🔹 मन बुद्धि बालक मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं
🔹 वह अवधान या ध्यान को अधिक देर तक केंद्रित नहीं कर पाते
🔹 ऐसे बालकों का शब्द भंडार बहुत ही कम या सीमित होता है

3️⃣ हीन व्यक्तित्व
🔹 मंदबुद्धि बालक का व्यक्तित्व बहुत हीन भावना से ग्रस्त होता है
🔹 वह हमेशा उदासीन एवं खिन्न मिजाज के होते हैं
🔹 ऐसे बालक अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर पाते हैं
🔹 मंदबुद्धि बालक अपने विचार को स्पष्ट रूप से किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पाते हैं
🔹 ऐसे बालक में कुछ भी कार्य करने में शिथिलता होती है

4️⃣ शैक्षिक पिछड़ापन
🔹 मंदबुद्धि बालक की शिक्षा या उपलब्धि ना के बराबर होती है
🔹इनके लिए शिक्षण कार्य बहुत ही कठिन काम होता है
🔹ऐसे बालक में रटने की प्रवृत्ति होती है और कुछ समय बाद भूल जाते हैं
🔹 ऐसे बालको की मानसिक आयु , शारीरिक आयु से बहुत ही कम होती हैं

5️⃣ सीमित प्रेरणा और संवेग
🔹 ऐसे बालों को में कल्पना करने की शक्ति नहीं होती है
🔹प्रेरणा साधारण और सीमित होती है
🔹 मस्तिक में सूझबूझ या जिज्ञासा उत्पन्न करने की शक्ति नहीं होती है
🔹ऐसे बालकों में क्रोध, लोभ ,मोह, इत्यादि से उन्हें कोई मतलब नहीं होता हैं वह इससे वंचित होते हैं

6️⃣ कुसमायोजन की स्थिति
🔹 मंदबुद्धि बालकों में निम्न स्तर का समायोजन होता है वह सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ होते हैं उचित ,अनुचित का उन्हें ज्ञान नहीं होता है समूह में समायोजन नहीं कर पाते हैं

7️⃣ असामान्य शारीरिक संरचना
🔹ऐसे बालकों को की शारीरिक संरचना सामान्य बच्चों से भिन्न होती है कद नाटा ,पैर छोटे , त्वचा मोटी होती है उदास चेहरा अंग शिथिल होता है
Nots by sanu sanwle

—–🌺 मंदबुद्धि बालक🌺
ऐसे बालक जो मानसिक रूप से कमजोर है जो सामान्य बालकों की तुलना में अत्यंत पिछड़े हैं जिनका मानसिक विकास सुचारू रूप से संचालित नहीं हुआ है जो कार्य को अति धीमी गति से करते हैं यह बालक मानसिक रूप से मंद बालक , मानसिक रूप से विकलांग बालक, धीमी गति से सीखने वाले बालक, के रूप में जाने जाते हैं यह मंदबुद्धि बालक कहलाते हैं🌺
🌺 सूझबूझ का अभाव🌺– ऐसे बालकों की सूझबूझ एवं तर्कशक्ति का अभाव होता है वह गहराई से तर्क विश्लेषण करने में सक्षम नहीं होते हैं।
🌺 समझने की क्षमता का कमजोर होना–मंदबुद्धि बालक में समझने की क्षमता का विकास नहीं होता है वह चीजों को जल्दी नहीं समझ पाते।
🌺 ध्यान केंद्रण– मंदबुद्धि बालक में ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति नहीं पाई जाती है वह अपनी एकाग्रता को अधिक समय तक नहीं बनाए रख पाते हैं एकाग्रता न होने से समझ का विकास नहीं हो पाता।
🌺AAMD:- American Association of mental deficiency 🌺🌺🌺
मंदबुद्धि बालक के संबंध मेंAAMD ने निम्न परिभाषा प्रस्तुत की है:-
✍🏻 मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषो के साथ -साथ ही पाई जाती है जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।
🌺 मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं🌺
(1)बौद्धिक न्यूनता:-मंदबुद्धि बालक का शैक्षिक स्तर निम्न होता है सामान्य बालकों की तुलना में शिक्षा में काफी पीछे रह जाते हैं।
🌺 बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है:- मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है जो मानसिक मंदता का एक प्रमुख कारण है।
🌺 अधिक विस्मरण🌺 मंद बुद्धि बालक सीखी हुई बातों को लंबे समय ताकि स्मृति में भंडारित नहीं कर पाते हैं अर्थात यह कह सकते हैं कि सीखी हुई बातें इन्हें कुछ ही समय मे विस्मृत हो जाती हैं यह ज्यादा समय तक याद नहीं रख पाते हैं।
🌺 दूसरों की सहायता की अपेक्षा:- मंदबुद्धि बालक हमेशा दूसरों पर आश्रित रहते हैं उन्हें लगता है कि वह यह कार्य खुद से नहीं कर सकते जब उनका दूसरा कोई सहयोग करेगा तभी वह कार्य को संपन्न कर पाएंगे इस सोच की वजह से वह हर वक्त दूसरे पर आश्रित रहते हैं और स्वयं के द्वारा कोई कार्य नहीं करना चाहते।
(2)🌺 अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं🌺:-
🌺 मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होना:-मंदबुद्धि बालकों का मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता है वह क्या कार्य करते हैं और क्यों करते हैं इसका ज्ञान ही नहीं होता वह किसी कार्य को सही तरीके से नहीं कर पाते मंदबुद्धि बालक सोचते अलग है और करते कुछ अलग है अर्थात कार्य में सामंजस्य और नियंत्रण नहीं होता।
🌺 अवधान को केंद्रित नहीं करना:- मंदबुद्धि बालक ज्यादा देर तक किसी कार्य पर अवधान नहीं बना पाते कोई किसी कार्य को अगर कर रहे तो क्यों कर रहे हैं या उन्होंने कितना कार्य किया और कितना नहीं किया इन सब में अंतर स्थापित नहीं कर पाते।
🌺 ध्यान विस्तार में कमी🌺
🌺 सीमित शब्द भंडार:- सामान्य बालकों की तुलना में मंदबुद्धि बालक का शब्द भंडार बहुत कम होता है अपनी बातों को अभिव्यक्त करने के लिए नए-नए शब्दों एवं विचारों को प्रयोग नहीं कर पाते उनके पास ज्यादा शब्द भंडार नहीं होता है कि वह उन शब्दों का उचित प्रयोग कर अपनी बातों को अभिव्यक्त कर सकें।
(3)🌺 हीन व्यक्तित्व:-
✍🏻 मंदबुद्धि बालक उदासीन एवं खिन्न मिजाज के होते हैं उनके अंदर किसी कार्य को करने का साहस नहीं होता है वह किसी कार्य को मन लगाकर नहीं कर पाते
✍🏻 कोई भी कार्य करने में शिथिल होते हैं।
✍🏻 स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना।
✍🏻 उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते हैं।
(4)🌺 शैक्षिक पिछड़ापन🌺:- शैक्षिक उपलब्धि निम्न स्तर की होती है जिसके कारण ग्रहण किए हुए ज्ञान कौशल और कार्य के प्रति निपुणता का अभाव होता है यह बालक शैक्षिक उपलब्धि नहीं हासिल कर पाते।
🌺 इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है
🌺 मंदबुद्धि बालकों में रटने की प्रवृत्ति अधिक होती है वह चीजों को समझने की बजाय रटने पर अधिक बल देते हैं और रटे हुए बातों को ज्यादा समय तक याद भी नहीं कर पाते।
🌺 मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है अगर बालक की आयु 15 वर्ष है तो इनकी मानसिक आयु 5 वर्ष के बालक के समान होना।
(5)🌺🌺 सीमित प्रेरणा और संवेग:- मंद बुद्धि बालकों में कल्पना शक्ति नहीं पाई जाती हैं कल्पना के माध्यम से हम अपने अनुभवो के द्वारा नए विचारों का निर्माण करते हैं और हमें आगे क्या करना है या भविष्य की योजनाएं कैसी होगी इसके बारे में समझ पाते हैं जो कि मंदबुद्धि बालक नहीं कर सकते।
🌺 ऐसे बालकों की प्रेरणाएं साधारण और सीमित होती हैं।
🌺 जिज्ञासा और संवेग का सीमित होना:-ऐसे बालक की जिज्ञासा सीमित होती है वह अधिक जानने के इच्छुक नहीं होते हैं संवेग सीमित होने की वजह से अधिक सूझबूझ नहीं कर पाते
🌺 क्रोध लोभ मोह इत्यादि के संवेग से वंचित होते हैं।
(6)✍🏻✍🏻 कुसमायोजन की स्थिति:-
🌺 निम्न स्तर का समायोजन:-परिस्थिति के अनुसार समायोजन स्थापित नहीं कर पाते हैं उन्हें किस समय पर क्या निर्णय लेना चाहिए क्या उनके लिए सही होगा और क्या नहीं इन सब बातों में अंतर नहीं कर पाते अर्थात सामंजस्य का अभाव होता है।
🌺 सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ रहते हैं:-समाज के नीति नियमों का ज्ञान नहीं होता है समाज के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए क्या समाज के लिए सही है और क्या नहीं इन सब का ज्ञान मंदबुद्धि बालकों को नहीं होता
🌺 उचित अनुचित का ज्ञान न होना
(7)✍🏻✍🏻 असामान्य शारीरिक संरचना:-
🌺 सामान्य बालकों की तुलना में भिन्न शारीरिक गठन।
🌺 कद नाटा पैर छोटे त्वचा मोटी।
🌺 उदास चेहरा।
🌺 अंग शिथिल होते हैं। 🌺 धन्यवाद🌺

Notes by- Abhilasha pandey
—-

🍁 मंदबुद्धि बालक 🍁

शैक्षिक दृष्टिकोण से मंदबुद्धि बालकों की सूझबूझ बहुत तेज नहीं होती है।
यह धीमी गति से सोचते हैं किसी भी चीज को समझने की क्षमता कम होती है ।
ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कम होती है।

🍁AAMD — American association of mental deficiency.
इस संस्था ने मंदबुद्धि बालकों की परिभाषा दी । जो है➖

⛔मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है, जो कि अनुकूलन व्यवहार संबंधी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है ,जो कि विकास काल के समय स्फुटित होती है।

🍁 मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं

1️⃣ बौद्धिक न्यूनता
▪️ बच्चे का निम्न शैक्षिक स्तर — मंदबुद्धि बालकों का शैक्षिक स्तर बहुत कम होता है।
▪️ बुद्धि लब्धि < 70 — बुद्धि लब्धि 70 से कम होना।
टर्मन के अनुसार मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 90 से कम होती है ,0 से 90 के बीच में मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि होती है। किंतु 70 से 90 के बीच के बालक अपने अभ्यास से या प्रयास से सामान्य श्रेणी में आ सकते हैं इसीलिए 70 से कम वाले बच्चों को मंदबुद्धि की श्रेणी में रखा जाता है।

▪️ अधिक विस्मरण — बहुत जल्दी ही चीजों को भूल जाते हैं स्मृति अच्छी नहीं होती।

▪️दूसरों की सहायता की अपेक्षा–ऐसे बालक दूसरों से अपेक्षा रखते हैं कि वह उनकी आकर मदद करें। पढ़ाई में और अन्य कामों में दूसरों की मदद चाहते हैं।

2️⃣ अनियंत्रित मानसिक क्रियाएं
▪️ मानसिक क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता — ऐसे बालक अपनी क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं। वह करना कुछ और चाहते है और कर कुछ और देते हैं।

▪️अवधान को केंद्रित नहीं करना –ऐसे बालक अपने ध्यान को केंद्रित नहीं कर पाते, किसी एक विषय में लगातार सोच नहीं पाते एवं अधिगम नहीं कर पाते।
▪️ध्यान के विस्तार में कमी — किसी एक कार्य को करने में इनका ध्यान नहीं लगता है बहुत देर तक किसी एक विषय के बारे में चिंतन नहीं कर पाते‌।

▪️सीमित शब्द भंडार — क्योंकि यह किसी भी कार्य में ध्यान नहीं लगा पाते , अधिगम में ध्यान नहीं लगा पाते एवं इनके स्मृति भी कमजोर होती है इसलिए यह किसी भी शब्द को बहुत देर तक याद नहीं रख पाते और इनके शब्दकोश में कमी आती है।

3️⃣ हिन व्यक्तित्व
▪️उदासीन या खिन्न मिजाज स्वभाव का होना
▪️कुछ भी कार्य करने में शिथिल होते हैं।
▪️ स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त करने की क्षमता ना होना ।
▪️उत्तर दायित्व की पूर्ति नहीं करते।

4️⃣ शैक्षिक पिछड़ापन
▪️ शैक्षिक उपलब्धि ना के बराबर होती है — क्योंकि यह मंद गति से सीखते हैं एवं ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते इसलिए इनकी कोई शैक्षिक उपलब्धि नहीं होती।

▪️इनके लिए शिक्षण कार्य काफी कठिन होता है — ध्यान केंद्रित ना कर पाने के कारण इनका अधिगम बहुत लंबा हो जाता है और स्मृति कम होने के कारण किया गया अधिगम भूल जाते हैं।

▪️इनको शिक्षा देना काफी मुश्किल होता है — लगातार एक ही पाठ को पढ़ाने से शिक्षक भी थक जाते हैं और उनके लिए अधिगम कराना कठिन हो जाता है।

▪️रटने की प्रवृत्ति — रटा हुआ भी भूल जाते हैं याद नहीं रहता पर सोचते यहीं है कि रट ले। पर रट नहीं पाते।
▪️ मानसिक आयु शारीरिक आयु से कम होती है।

5️⃣ सीमित प्रेरणा और संवेग
▪️कल्पना शक्ति से रहित होते हैं — कल्पना शक्ति बहुत कम होती है
▪️ प्रेरणा साधारण और सीमित ▪️मस्तिष्क सूझबूझ में कमी/ जिज्ञासा में कमी /उत्सुकता ना होना
▪️ क्रोध, लोभ, मोह इत्यादि के संवेग से वंचित रहते हैं।

6️⃣ कुसमायोजन की स्थिति
▪️निम्न स्तर का समायोजन — यह किसी भी वातावरण में आसानी से समायोजित नहीं हो पाते हैं, वातावरण के अनुसार अपने आप को बदल नहीं पाते हैं।
▪️सामाजिक व्यवहार से अनभिज्ञ — समाज के बीच कैसा आचरण , कैसा व्यवहार करना चाहिए इसका ज्ञान नहीं होता है।
▪️उचित अनुचित का ज्ञान नहीं — क्या सही है क्या गलत है , किस जगह पर क्या बोलना है, किसी से कैसी बात करनी है इन सब चीजों का ज्ञान नहीं होता है

▪️समूह में समायोजन नहीं कर पाते — यह किसी भी समूह में आसानी से समायोजित नहीं हो पाते हैं ।

7️⃣ असमान्य शारीरिक संरचना
▪️ सामान्य से भिन्न शारीरिक गठन — मंदबुद्धि बालकों का शारीरिक गठन सामान्य बालकों की तुलना में अलग होता है।
▪️ कद नाटा , पैर छोटा, त्वचा मोटी होती है ।
▪️उदास चेहरा
▪️शारीरिक अंग में शिथिलता होती है।

धन्यवाद

द्वारा
वंदना शुक्ला

By admin

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