🌸विश्लेषण और संश्लेषण विघि: ”किसी चीज के बारे मे गहराई से जानना ” किसी बात के अलग अलग पहलू पर चर्चा करना ही विश्लेषण कहलाता है ।ये सारे छोटे छोटे भाग किसी एक को परिपूर्ण करती है ।इकठ्ठी की गई वस्तु को अलग अलग भाग मे divide करके उसके बारे मे गहराई से जानना ही विश्लेषण विधि है । (उदाहरण – गणित विषय का कोई पश्न मे क्या दिया है ,और क्या दिया है ,क्या ज्ञात करना ह ,कैसे ज्ञात हो सकता है ,एैसै विश्लेषण करके उसके आखिरी उत्तर तक पहुँच जाते है ।) 🌸1 यह एक अनुसंधान विधि है जिसके अन्तर्गत किसी एक वस्तु को टुकडों में बाटकर उसे गहराई तक खोज कर उसका research करते है ।🌹2🌹यह विधि जटिल से सरल की ओर चलती है :- अर्थात कोई वस्तु या पकरण यदि जटिल है उसे विश्लेषित करके उसका सरलीकरण करते है। 🌺3🌺अग्यात से ग्यात की ओर : जो चीज नही पता है उसके बारे मे गहराई से खोज कर जो पता है उसकी ओर चलते है। विश्लेषण विधि के गुण :- (1)इस विधि से बच्चे की तर्क शक्ति का विकास होता है। (2) इस विधि के द्वारा बच्चे की खोज करने की क्षमता का विकास होता है।(3) इस विधि के द्वारा बच्चों में एक समस्या को लेकर उस समस्या को अलग-अलग पहलू में सोच कर उसका समाधान करने की आदत विकसित होती हैं। यदि किसी व्यक्ति में विश्लेषण करने की क्षमता है तो किसी भी वे डिसीजन को ले पाएंगे🌺 विश्लेषण विधि के दोष:- (1) समय अधिक लगता है ।2) अधिकतर क्षति की जरूरत होती है जो छोटे बच्चों के पास नहीं होती इसीलिए विधि छोटे बच्चों के लिए अनुपयोगी है🌺 🌸🌸संश्लेषण विघि🌸🌸 किसी समस्या को टुकड़ों में या भाग में या अलग-अलग करके उसे इकट्ठा या एकत्रित करना ही संश्लेषण कहलाता है । यह विधि विश्लेषण विधि के ठीक विपरीत होता है। अर्थात अनेक को एक कर देना कि संश्लेषण है। किसी समस्या के छोटे-छोटे टुकड़ों का समाधान करके पुणे एकत्रीकरण करना ही संश्लेषण कहलाता है। उदाहरण – जैसे हम हिंदी विषय में बच्चे को पहले वर्णमाला को सिखाते हैं फिर उसके बाद शब्द बनाना या वाक्य बनाना सिखाया जाता है। 🌺 संश्लेषण विधि के गुण🌺 (1) यह विधि ज्ञात से अज्ञात की ओर ले जाती है अर्थात जो पता है उसका प्रयोग करके जो नहीं पता है उसकी प्राप्ति की जाती है।(2) इस विधि में किसी समस्या का हल कर एकत्रित करने के लिए उस समस्या से संबंधित पूर्व ज्ञात सूचनाओं को एक साथ मिलाकर समस्या को हल करने का प्रयत्न किया जाता है। 🌺 विश्लेषण -संश्लेषण विधि। विश्लेषण और संश्लेषण विधि के ठीक बिल्कुल विपरीत है किसी भी समस्या के निश्चित समाधान तक पहुंचने के लिए दोनों का होना जरूरी है अर्थात विश्लेषण और संश्लेषण एक दूसरे के पूरक हैंl 🌸prof yung ke sbdo ke anusar🌸 – “संश्लेषण विधि द्वारा सूखी घास से तिनका निकाला जाता है किंतु विश्लेषण विधि से तिनका स्वयं घास से बाहर निकल आया है” अर्थात संश्लेषण विधि म जो ज्ञात है से जो ज्ञात नहीं है अर्थात अज्ञात की ओर अग्रसर होते हैं।🌸 manisha gupta 🌸


विश्लेषण और सन्श्लेषण विधि :- (1) विश्लेषण विधि :- किसी चीज को बहुत गहराई से जानना उसको छोटे छोटे टुकडो़ में विभाजित कर उसके बारे में परीक्षण करना ही विश्लेषण है साधारण भाषा में कहा जाये तो माथापच्ची करना या पन्चायत करना | जैसे क्या गणित में क्षेत्रमिती के प्रश्नों को अलग अलग करके Solution निकालना | अर्थात (1) जटिल को सरल बनाना… (2) अज्ञात से ज्ञात की ओर जाना… (3) तर्क शक्ति का विकास होना… विश्लेषण विधि अनुसंधान विधि है इसमें विश्लेषण की क्षमता होती है जिसमें किसी परिणाम को लेना सरल हो जाता है.. …. सन्श्लेषण विधि:- किसी चीज के अलग अलग टुकडो़ को एकत्रित करना ही सन्श्लेषण है यह विधि विश्लेषण के विपरीत है अर्थात इसमें (1) ज्ञात से अज्ञात की ओर जातें हैं..(2) सरल से जटिल की ओर…(3) तर्क शक्ति का विकास होता है….दोनों विधियों में समानता :- (1) जितने भी point लिए गए हैं उनको साथ लेकर चले तो वो सफल परीक्षण होगा.. (2) सही परीक्षण वही होगा जिसका विश्लेषण और सन्श्लेषण सभी पक्षों के अनुसार किया गया हो… दोनों विधियों में तुलना :- (1) दोनों एक दूसरे के विपरीत है… (2) दोनों विधि वैज्ञानिक है परंतु विश्लेषण अनुसंधान विधि है.. (3) परिणाम के लिए दोनों विधियों का होना आवश्यक है… (4) जो शिक्षक छात्रों को समस्या का हल को विश्लेषण विधि द्वारा समझाने की कोशिश करते हैं वहीं सफल शिक्षक होते हैं.. (5) युन्ग के अनुसार ” सन्श्लेषण से सूखी से तिनका निकाला जाता है लेकिन विश्लेषण में तिनका खुद बाहर निकल जाता है….🌺🌺🌺🌺 रश्मि सावले 🌺🌺


● विश्लेषण ( Analytical Method ):-

◆ विश्लेषण से अभिप्राय है कि किसी समस्या को छोटे – छोटे भागों में विभाजित करके उसका अध्ययन करना और किसी निष्कर्ष पर पहुँचना । संश्लेषण से अभिप्राय है विश्लेषित तथ्यों को इकट्ठा करना और अभीष्ट परिणाम प्राप्त करना ।

◆ रसायन शास्त्र में पानी ( H20 ) को हाईड्रोजन व ऑक्सीजन में विभाजित करना विश्लेषण है । इसके विपरीत ऑक्सीजन का किसी विशेष ताप या दबाव पर संयुक्त कर पानी बनाना संश्लेषण है । संश्लेषण और विश्लेषण एक – दूसरे के पूरक हैं ।

◆ संश्लेशण में हमें कुछ तथ्य ज्ञात होते हैं और उनकी सहायता या उन्हें संयुक्त करके हम एक निष्कर्ष पर पहुच सकते हैं जो पहले अज्ञात था । इस प्रकार संश्लेषण ज्ञात से क्या अज्ञात की ओर बढ़ता है ।

◆ मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक यह मानते है , कि मनुष्य की बौद्विक किया का अन्तिम सोपान संश्लेषण विश्लेषण के उद्देश्य को पूरा करता है ।

● संश्लेषण विधि ( Synthesis Method ):-

◆ विश्लेषण विधि के विपरीत हैं । इस विधि में ज्ञात से अज्ञात की तरफ जाते है ।

◆ संश्लेषण में एक तथ्य की सत्यता की जाँच होती है । परन्तु इससे पाठ का सही तथा वास्तविक ढाँचा ज्ञात नही होता है । इस प्रकार संश्लेषण विधि साध्य सिद्ध करती है लेकिन उसकी व्याख्या नही करती । इसके द्वारा विश्लेषण विधि से प्राप्त तथ्य की जाँच की जा सकती है ।

संश्लेषण विधि के गुण :-
• यह विधि विश्लेषण विधि से सरल है तथा हल या निष्कर्श निकालने की विधि से अधिक स्थान नही घेरती ।
• विश्लेषण विधि के पश्चात संश्लेषण विधि का उपयोग आवश्यक है ।
• ज्ञात से अज्ञात की ओर अग्रसर करने का सिद्वान्त मनोवैज्ञानिक है तथा विद्यार्थियों के लिए असुविधाजनक है ।
• अध्यापक के कार्य को इस विधि ने अत्याधिक सरल बना दिया है ।
• इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान विद्यार्थियों के द्वारा स्वयं ढूढाँ हुआ नही होता इसलिए वह स्थायी नही होता । यह विधि केवल सिद्ध कर सकती है , समझा नही सकती ।
• किसी साध्य अथवा समस्या का हल इस विधि से ज्ञात नही किया जा सकता ।
• इस विधि से छात्रों की तर्कशक्ति तथा सोचने की शक्ति का विकास नही हो सकता ।

🇧 🇾- ᴊᵃʸ ᴘʳᵃᵏᵃˢʰ ᴍᵃᵘʳʸᵃ


🔆 विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि🔆

  • किसी विषय को गहराई से जानने,उस विषय के अलग अलग पहलू पर चर्चा करते है या जब हम उस विषय का पूरी तरह से विश्लेषण कर लेते है तब हम उस विषय के बारे में संपूर्ण या परिपूर्ण जानकारी को एकत्र कर लेते है।

✴️ विश्लेषण विधि ➖ गणिततीय दृष्टिकोण से यदि हम किसी समस्या के समाधान को निकालना चाहते हैं तो उसके लिए हम उस समस्या का विश्लेषण यानि कि उस समस्या के दुकड़े दुकड़े कर या उस अलग अलग करते हुए समाधान निकलते है।
▪️जब हम समस्या का समाधान खोजते है तो समाधान को खोजने में के लिए हम उस समस्या का विश्लेषण करते हैं जिसके फलस्वरूप हमे समस्या का समाधान मिल जाता है।
▪️यह विधि एक अनुसंधान है क्योंकि इसमें हल को खोजने पर बल दिया जाता है।( खोज करना या समस्या पर माथा पच्ची या दिमाग लगाकर या उस समस्या पर पंचायत कर या कहे विश्लेषण कर उस समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।)
▪️किसी भी विषय या वस्तु जो हमे जटिल लगती है उनको सरल बनाने के लिए ,इसके साथ ही जो विषय या चीजे जो हम नहीं जानते है या हम उससे अज्ञात है, उन्हें जानने के लिए या उन्हें ज्ञात करने के लिए इस विधि को प्रयोग में लाते हैं।
▪️ इसके द्वारा हम अपनी तर्क शक्ति को भी विकसित कर पाते है ।जैसे कि यदि हमारे पास कोई समस्या होती है तो उसके समाधान निकालने के लिए उस समस्या पर तर्क लगाते है।

✴️ संश्लेषण विधि➖

जब हमारे पास कोई समस्या होती है या हम किसी वस्तु या विषय के बारे में जानना चाहते है तब हम उस समस्या के दुकड़े या जो अलग अलग रूप से बटी हुई है उन्हें पुनः से एकत्रित करना ही संश्लेषण कहलाता है।

🔅 जब हम संश्लेषण से विश्लेषण की ओर जाते है तो हमे इस सकारात्मक बिंदु का भी ध्यान रखना चाहिए-

  • जब भी हम किसी विषय या किसी वस्तु के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए कई समस्या सामने आती है इन समस्याओं के समाधान निकालने से हमे जी परिणाम प्राप्त होते है वह win win situation में हो , यानि कि जब भी कोई बात बताई जाए या पता की जाए तो अंत में उसका जो भी परिणाम प्राप्त हो उससे बताने वाले ओर पूछने वाले या समझने वाले दोनों का ही फायदा या जीत हो या दूसरे रूप में कहे जी भी परिणाम प्राप्त हो वह दोनों के सकारात्मक पक्ष के लिए हो।
    ➖जैसे कि यदि कोई शिक्षक अपनी बातो को छात्रों को बताता है या उन तक input करता है और फिर उसे छात्रों द्वारा प्राप्त कर output दे देता है तो यहां पर शिक्षक और छात्र दोनों को ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते है जो कि दोनों के पक्ष में होंगे।
    ▪️जब भी हम किसी विषय का संश्लेषण करते है तो हम उस विषय के प्रत्येक बिंदु या दुकड़ो को या हर पहलु को या सभी पक्षों पर विश्लेषण कर इन सभी का पुनः एकत्रिकरण कर या मिलाकर उस विषय का उचित रूप से निर्माण या संश्लेषण कर पाते है।

🔅 विश्लेषण और संश्लेषण में अंतर➖
▪️दोनों ही एक दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर या विपरीत है इसलिए इन दोनों का ही होना जरूरी है यदि दोनों में से कोई भी रुक गया तो सही तरह से कार्य नहीं हो पायेगा।
▪️यह विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है ।इसमें अन्वेषण क्षमता या अनुसंधान या खोज करने की क्षमता का विकास होता है। इसमें छात्रों की अन्तर्दृष्टि का विकास होता है।
▪️जब भी हम किसी समस्या का विश्लेषण करते है तो हमे उस समस्या का उचित प्रकार से संश्लेषण कर समाधान निकाल लेते है।

🔅 युंग का कथन है कि किसी भूसे के ढ़ेर से एक छोटे से दुकड़े को निकालना संश्लेषण है जबकि भूसे के ढेर से दुकड़े का खुद से निकालना या प्राप्त दुकड़ा विश्लेषण कहलाता है।
हम संश्लेषण में ज्ञात से अज्ञात और विश्लेषण में इसके विपरित अज्ञात से ज्ञात की ओर जाते है।
▪️यदि हम किसी विषय या वस्तु का विश्लेषण नहीं कर रहे होते है तब हम दिए हुए विश्लेषण के आधार पर ही अपना विश्लेषण लगाकर उस विषय या वस्तु का संश्लेषण कर पाते हैं।

✍🏻 वैशाली मिश्रा


विश्लेषण- यह विषय वस्तु को विभिन्न तरीको से विभक्त करके उसमें सामिल संरचना को समझने की योग्यता है
किसी एक चीज को गहराई से जानना
और जटिल चीजो को सरल बनाना तथा कुछ चीजों को आपको पता नहीं उसे पता करना चाहते हैं
इससे बच्चों में तर्क शक्ति
का विकास होता है
संलेषण- इसमें प्राप्त उद्देश्य की प्राप्ति हर से बच्चों का सामाजिक अध्ययन विषय के प्रति
सकारात्मक दृष्टिकोण
विकसित होता है
संश्लेषण में हमे कुछ तथ्यों कि जानकारी होती है Menka patel


💫विश्लेषण विधि :-
किसी भी चीजों के बारे में जानने या समझने के लिए उसे टुकड़ों – टुकड़ों में विभाजित करके उस पर विश्लेषण करके उसके तथ्यों को समझने की कोशिश करते हैं,ये विधि, विश्लेषण विधि कहलाती है।

💫विश्लेषण विधि के गुण :-
🏝️ये विधि ज्ञात से अज्ञात की ओर चलती है।

🏝️यह एक प्रकार से अनुसंधानात्मक विधि कहलाती है,क्योंकि इस विधि में छात्र सक्रिय रूप से खोज करते हुए अपने समस्याओं को खुद से सुलझाने में सक्षम हो पाते हैं।

🏝️इस विधि में किसी भी चीज के हर एक पहलू को गहराई से जानने पर जोर दिया जाता है।इसे रचनात्मक विधि भी कहा जा सकता है।

🏝️इस विधि में बच्चे को भरपूर मौका दिया जाता है,जिससे उनमें चिंतन शक्ति का विकास होता है,उनमें किसी बात को लेकर किसी भी समस्या का समाधान ढूंढने की क्षमता भी विकसित होती है।

🏝️इस विधि के अन्तर्गत बच्चे अपनी तार्किक चिंतन शक्ति का प्रयोग करते हैं,जिससे उनमें चिंतन करने की क्षमता का विकास होता है।इसे एक प्रकार से समस्या समाधान विधि भी बोला जा सकता है।

💫विश्लेषण विधि के दोष :-
🏝️इस विधि में कार्य करने में समय अधिक लगता है।

🏝️इसमें अधिकतर तर्क शक्ति की आवश्यकता होती है,इसलिए ये विधि छोटे बच्चो के लिए अनुपयोगी हो सकती है।

💫संश्लेषण विधि :-
🏝️किसी भी समस्या को छोटे -२ भागों में करके उसे एकत्रित करना अथवा अनेक को एक करना ही,संश्लेषण विधि कहलाता है।

संश्लेषण विधि के गुण :-
🏝️ये विधि विश्लेषण विधि के बिल्कुल विपरीत होता है।

🏝️ये विधि ज्ञात से अज्ञात जी ओर के जानेवाली विधि है, इसके द्वारा हमे जो पता है उसका उपयोग करके को नहीं पता है उसे खोज करने की कोशिश करते हैं।

💫इस विधि के अन्तर्गत प्रोफेसर YUNG के द्वारा कहा गया कि :-
🌅संश्लेषण विधि सूखी घास से तिनका बाहर निकालने जैसा है,बल्कि विश्लेषण विधि से तिनका घास से स्वयं ही बाहर निकल आता है।

नेहा कुमारी☺️


विश्लेषण == किसी विषय पर बहुत गहराई से जानकारी प्राप्त करना। अर्थात् किसी विषय पर उसे छोटे- छोटे भागो में विघटित करके विषय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना। तथा यह विषय की संपूर्ण जानकारी सुदृढ होगी।
जैसे- जब बच्चा स्कूल में एडमिशन लेता है तब उसके सामने बहुत से ऑप्शन होते है जिनमे से वो सभी को उनके गुणों के आधर पर विघटित करके एक स्कूल को सेलेक्ट करता है ।।।
✍️ विश्लेषण जटिल चीजों को सरल बनाता है।
✍️यह अज्ञात चीजों से ज्ञात पर ले जाता है।
✍️इससे तर्कशक्ति का विकास होता है , बच्चे में सोचने तथा तर्क करने की क्षमता का विकास होता है।
संश्लेषण== किसी विषय पर उसको छोटे छोटे भागो में बांटकर परीक्षण करके एक तर्क पर पहुंचना । अर्थात् बच्चो के द्वारा किसी विषय की समस्या के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करके एक निश्चित हल पर पहुंचना ही संश्लेषण है।।।
जैसे – बच्चा जब बच्चे को कोई खिलौना चाहिए होता है तो वह चिंतन करके तर्क लगाता है कि मेरे रोने पर पापा मुझे खिलौना दिला देंगे ,इसमें पापा उसे खिलौना कब दिला देंगे उस समस्या का उसने एक हल निकाल लिया ।।।
✍️ समस्याओं के सभी पहलु को पुनः एकत्रित करके हल निकालना।
✍️ यह ज्ञात से अज्ञात की जाती हैं।
✍️इसमें बच्चे के पास पूर्व ज्ञान होता है जिसके आधार पर एक तर्क पर पहुंचना।
विश्लेषण- संश्लेषण विधि ==किसी विषय की समस्या को बहुत गहराई से जानकर संपूर्ण परीक्षण करके एक तर्क पर पहुंचना या सभी हलो को पुनः एकत्रित करके एक हल प्राप्त करना या पहले विघटित ( तोड़कर) करके फिर जोड़ना ही विश्लेषण- संश्लेषण विधि हैं।✍️✍️
युंग के अनुसार== ‘ सुखी घास में से तिनका निकालना’ अर्थात् घास में से तिनका अलग करना संश्लेषण होगा और घास को विघटित करने पर तिनका स्वयं बाहर आ जाए उसे विश्लेषण कहेंगे।
✍️ अनामिका राठौर ✍️


ःविशलेषण विघि और सशलेषण विघि 🌸🌸🌸🌸
विश्लेषण विघि को अनुसघान विधि भी बोलते है ः
ःविशलेषण मतलब टुकड़ों में बाटना ः
विश्लेषण विधि में समस्या को टुकड़े टुकड़े में बाटना जो स्थित रहती है उसको भागो में करना
विश्लेषण की क्षमता होती हैं तो हम निणय सही तरीके से ले सकते हैं इससे हमारा तक् सक्ति का विकास होता है इसमें हम कोई भी बात को डिटेल में प्रस्तुत करते है
इस विघि मे दिमाग भी ज्यादा लगाना पड़ता है ज्यादा सोचते हैं जिससे तक् सक्ति का विकास होता है
ःजटिल से सरल 🌸🌸🌸🌸
इस विघि में कोई काय् को जटिल से सरल की ओर करते हैं जैसे -आज क्लास है कल भी होगा परसो भी होगा बाद में फिर बाद में क्लास प्रतिदिन होती है
ःअज्ञात से ज्ञात 🌸🌸🌸
इसमे पहले जो नही जानते है उसके बारे में बात करेगे और फिर जो जानते है उसके बारे में विश्लेषण करेगे
ःइस विधि में टुकड़े टुकड़े जो किये गये उसे एकत्रित करके समस्या से जुड़ी हुई जितने भी पुव्र ज्ञान है सभी को मिलाकर एकत्रित करते है
ः win win situation को विश्लेषण का साकारातमक परिणाम हैः win win situation matlab मतलब दोनों तरफ से विश्लेषण और सशलेषण दोनों है दोनों पक्षों में होगा तब साकारातमक होगा ः
ःसशलेषण विघि 🌸🌸🌸🌸
ःसशलेषण विधि मतलब जोड़ना ः
ःटुकडो मे बाटना उसको एकत्रित करना ही सशलेषण कहलाता है
ःविशलेषण के विपरीत होता है सशलेषण
ःसशलेषण करना बहुत ही आवश्यक है
ःसशलेषण में एकपक्षीय निणय लेना गलत है विश्लेषण के बाद अगर सशलेषण नही करते है तो कोई भी सही निणय नही ले पाते है जितनी भी बातें है जैसे u academy पे पहले अच्छे से विश्लेषण किये कोन सर से पढना हैं और कब पढना है उसके बाद शसलेषण कि हमे अब दिपक सर से ही cdp पढना है
ःविशलेषण सशलेषण ये दोनों एक दूसरे के पूरक भी बोलते हैं मगर opposite भी बोलते हैं
किसी चीज को output तक पहुँचना विश्लेषण के बाद सशलेषण करना जरुरी है दोनों पक्षों के कुछ साकारातमक है तो नाकारातमक भी है ः
YUNG के अनुसार ः 🌸🌸🌸
ःविशलेषण विधि में सवय से घास से तिनका निकालना पड़ता है
ःसशलेषण विधि में सुखी घास से तिनका निकलता है
ःज्ञात से अज्ञात
ःबच्चो को पढाने के लिए दोनों विघि सही है मगर देखेगे बच्चो के आवश्यकता के अनुसार जहा जो जरूरत हो उसी के माध्यम से बच्चो को ज्ञान देगे 🌸🌸🌸

NEHA ROY 🙏🙏🙏🙏


विश्लेषण विधि= विश्लेषण विधि का अर्थ है…. किसी चीज को बहुत गहराई से जानना

🌸 किसी समस्या को हल करने के लिए उसे टुकड़े में बहुत बांटना या इकट्ठी की गई वस्तुओं को अलग अलग भागों में बांटना व उनका परिक्षण करना विश्लेषण विधि कहलाता है |✍✍✍✍✍✍

1) किसी वस्तु या चीज की पुरी तरह विश्लेषण करने से उनके छोटे छोटे पार्ट के बारे में जानकारी सुदृढ़ हो जाती हैं ✍

2) विश्लेषण किए बिना कोई भी उसका सारांश नहीं निकल सकता ✍

3) जब कोई भी चीज हमारे लिए जटिल होती है और उसे हम सरल बनाना चाहते हैं या जो चीजें पता नहीं है उसके बारे में जानना ही विश्लेषण करना है✍

4) विश्लेषण हमारे लिए एक अनुसंधान विधि है क्योंकि इसमें ( माथापच्ची व पंचायत) दिमाग ज्यादा लगाना पड़ता हैं✍
5) विश्लेषण विधि से पढ़ाने का मतलब है किसी पाठ को अलग अलग भागों में बांटना व विश्लेषण करना ✍

संश्लेषण विधि= विश्लेषण विधि का विपरीत संश्लेषण विधि है
1) किसी भी वस्तु को जिसे छोटे छोटे टुकड़े में बांटा गया हो उस सभी छोटे टुकड़े को फिर से एकत्रित करना संश्लेषण विधि है

2) इसमें किसी भी समस्या का हल उस समस्या से जुड़ी हुई जितनी भी पूर्व ज्ञान सुचनाएं है उसे मिलाकर हम उस समस्या का हल करते हैं✍

“Yung ” ने कहा है कि…..
संश्लेषण विधि से सुखी घास से तिनका निकाला जा सकता है लेकिन विश्लेषण विधि से तिनका स्वयं घास से बाहर निकल आता है✍✍✍✍✍✍

विश्लेषण व संश्लेषण में अन्तर……..
1) ये दोनों एक दूसरे के विपरीत है 1
2) विपरीत है इसलिए दोनों का होना जरूरी है 1
3) ये दोनो वैज्ञानिक विधि है परन्तु विश्लेषण अनुसंधान विधि है जो बहुत महत्वपूर्ण है✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍

🌸🌸Varsha sharma🌸🌸


🔶विश्लेषण विधि और संश्लेषण विधि 🔸
✳️ विश्लेषण विधि (analysis)

🔅विश्लेषण विधि वह विधि है जिसके द्वारा हम किसी भी समस्या या विषय वस्तु को टुकड़ों में विभाजित करके उसके एक-एक पहलू का निरीक्षण करते हैं हम समस्या को खंडों में करके उसके पीछे छुपे तर्कों को खोजते हैं और अनुसंधान करते हैं।

जटिल वस्तु को सरल वस्तु बनाते हैं।और अज्ञात वस्तु को ज्ञात की ओर ले जाते हैं।

सरल शब्दों में हम ब्रेनस्टॉर्मिंग करते हैं अपने दिमाग की माथापच्ची करते हैं इसके द्वारा हम अपनी तर्क वितर्क लगाते हैं तर्क शक्ति को बढ़ाते हैं चिंतन को बढ़ाते हैं ।

🔅 संश्लेषण विधि🔅

संश्लेषण विधि में जो समस्या को हमने टुकड़ों में किया है उसे जोड़ कर समाधान निकलते हैं उन्हें एकत्रित करते हैं।
संश्लेषण विधि में हमें दोनों पहलुओं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पर विचार करना चाहिए कि किसी भी स्थिति में परिणाम win win में हो किसी को नुकसान ना हो संश्लेषण के समय हमें प्रत्येक बिंदु को अपने निष्कर्ष में शामिल करना चाहिए।
संश्लेषण और विश्लेषण दोनों विधि एक दूसरे से विपरीत हैं।

इसीलिए दोनों ही विधि आवश्यक हैं दोनों विधि मनोवैज्ञानिक विधि है।

धन्यवाद
वंदना शुक्ला

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