💥समावेशी शिक्षा के उद्देश्य💥

किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम उसके
👉उद्देश्य का निर्धारण करते हैं👉 उद्देश्य में समय अनुसार परिवर्तन करते हैं

💥समेकित/ एकीकृत/integrated शिक्षा के उद्देश्य

👉बच्चों को मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना अर्थात जो बच्चे कमजोर हैं उन्हें सामान्य के बराबर लाना

👉उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना
👉बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना अर्थात ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना जिसमें बच्चे अपने क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हो

👉बच्चों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना 👉बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उचित समायोजन विकसित करनायदि बालक का समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण कौन नहीं होता है तो वह समाज से अच्छी अंत क्रिया नहीं करेगा और उसमें समायोजित नहीं हो पाएगा

👉समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता का विकास करना अर्थात समाज को भी बालकों के प्रति सकारात्मक सोच होनी चाहिए तथा संवेदनशील होना चाहिए
👉सीखने की प्रकृति का विकास करना
👉बच्चे में नवजीवन का संचार करना
👉 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का वहन करना
👉बच्चे को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना अर्थात बच्चे को ऐसी शिक्षा देना जिससे कि वह आत्मनिर्भर बन सके

💥समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय-

👉 वंचित वर्ग के लिए
👉शारीरिक रूप से विकलांग ( ये आंख ,नाक ,स्वर, चलने ,हाथ आदि शरीर के किसी भी अंग से विकलांग हो सकते)

👉मानसिक रूप से विकलांग अर्थात अधिगम विकलांगता से पीड़ित हो
👉बाल मजदूर
👉नुक्कड़ नाटक करने वाले बालक
👉स्त्री पुरुष विवेद अर्थात् लैंगिक समानता
👉जाति रंग अर्थात नस्लीय भेदभाव
👉समूह कारक

Notes by Ravi kushwah


🍁🎆🍁Menka patel 🍁🎆🍁

🌈 समेकित शिक्षा के उद्देश्य — किसी भी कार्य की सफलता के लिए पद

🎆 उद्देश्य का निर्धारण – जब हम किसी कार्य को करते हैं था उसका पहले उद्देश निर्धारित करते हैं

🎆 उद्देश में समय के अनुसार परिवर्तन — उद्देश बनने के बाद समय के अनुसार उद्देश्य में परिवर्तन करना आवश्यक है इसे उद्देश में समय के अनुसार परिवर्तन कहते हैं

🎆 समेकित शिक्षा के उद्देश्य /एकीकृत शिक्षा के उद्देश्य या इंटीग्रेटेड —

⭐ बच्चों का मुख्य धारा से अलग किए बिना उनकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना – इसमें जो बच्चे कमजोर होते हैं उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्रदान करना

⭐ उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना

⭐ बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना – बच्चे को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराने जिसमें बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकें बच्चों के अनुकूल होना चाहिए जिससे बच्चों का विकास होता है

⭐ बच्चों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल का विकसित करना — हर बच्चे का अपना एक व्यवहार होता है बच्चे को ऐसे काम कराने चाहिए जो उसकी दैनिक जीवन में आते हो

⭐ बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण/ उचित समायोजन — बच्चों का समाज के प्रति सकारात्मक व्यवहार होना चाहिए समाज के अनुसार रहना

⭐ समाज का बच्चों के प्रति संवेदनशील का विकास — समाज को बच्चों के प्रति उचित व्यवहार रखना चाहिए जिससे बच्चा समाज के प्रति संवेदनशील हो सके

⭐ सीखने की प्रकृति का विकास — बच्चे को सीखने के प्रति का विकास करना चाहिए जिसमें बच्चों की रुचि को

⭐ बच्चों में नवीन जीवन का संचार

⭐ उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का वहन

⭐ बच्चे को स्वावलंबी बनाने के लिए उसके लिए व्यवसायिक शिक्षा देना

🌈 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय —

🎇 वंचित वर्ग के लिए

🎇 शारीरिक रूप से विकलांग ( नाक ,कान स्वर ,हाथ, पैर, शरीर के किसी भी अंग में विकलांग हो सकते हैं)

🎇 मानसिक रूप से विकलांग अर्थात अधिगम विकलांगता से पीड़ित जैसे डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया, डिस्लेक्सिया आदि

🎇 बाल मजदूरी

🎇 नुक्कड़ नाटक करने वाले बालक

🎇 स्त्री पुरुष विभेद अर्थात लिंग असमानता

🎇 जाति ,रंग का भेदभाव

🎇 समूह कारक

🎇⭐🎇⭐🎇⭐🎇⭐🎇⭐🎇⭐🎇⭐🎇⭐


✍ PRIYANKA AHIRWAR ✍

समेकित शिक्षा या एकीकृत शिक्षा के उद्देश्य:-
🎯 किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम पद:-
♦️ उद्देश्य का निर्धारण:-
उद्देश्यों का निर्धारण का अर्थ है कि हमें किसी कार्य को करने के लिए सर्वप्रथम उसमें एक रूपरेखा तैयार करना होती है, उस रूपरेखा के आधार पर ही हम कार्य करते हैं रूपरेखा इस प्रकार से हैं, जैसे कि हमें क्या करना है? कैसे करना है ? एवं शुरुआत कहां से करें? यह सब हम रूपरेखा के अंतर्गत ही करते हैं जो कि उद्देश्य का निर्धारण होता है।

♦️ उद्देश्यों में समय के अनुसार परिवर्तन:-
हम किसी कार्य को करते हैं तो हमें उस में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करने होते हैं कभी हमें समय के अनुसार कार्य करना होता है तो कभी हमें परिस्थिति के अनुसार कार्य करना होता है तो इन सभी के आधार पर हम उद्देश्यों में समय-समय पर कुछ परिवर्तन भी करते हैं कुछ परिवर्तन अनुकूल होते हैं तो कुछ परिवर्तन प्रतिकूल भी होते हैं।
उदाहरण- उदाहरण के लिए हम कह सकते हैं कि हमें कल कहीं जाना है लेकिन ट्रेन ना आने के कारण हम जाने की प्रक्रिया में परिवर्तन कर लेते हैं, अतः यह उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि हम परिस्थिति के अनुसार समय के अनुसार अपने उद्देश्यों में बदलाव कर लेते हैं।
🎯 उद्देश्य:-
1. बच्चों को मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना:- मुख्यधारा से अलग किए बिना अर्थात जैसे उनकी स्थिति है। उन्हीं के अनुसार उनकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना उनकी मुख्यधारा को ही मध्यस्थ करके उनके अंदर की क्षमता को विकसित करना, उसी के आधार पर उन्हें शिक्षित करना।

  1. उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना:- प्रत्येक बालक में एक विशिष्ट शक्ति होती है। उस शक्ति का हमें अधिकतम उपयोग करवाना है, जिससे कि उनमें योग्यता विकसित हो सके। हर बालक में कुछ ना कुछ करने की शक्ति होती है। उस शक्ति का प्रयोग शिक्षकों को उसकी योग्यता विकसित करने के लिए करवाना चाहिए।
  2. बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना:- समेकित शिक्षा का उद्देश्य है कि बालक के विकास करने के लिए शिक्षकों को एक ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए , क्योंकि पालक के सीखने में सहायता प्रदान करें। जिस वातावरण से बालक कुछ अर्जित कर सकें, जिससे कि उसका विकास हो सके ।
  3. बच्चों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना:- शिक्षक को बालक के अंदर ऐसे कौशलों को विकसित करना चाहिए जो कि उसकी दिनचर्या से संबंधित हो उसके दैनिक जीवन से संबंधित हो ऐसे कार्यों को करने के प्रति शिक्षक को बल देना चाहिए जो कि बालक आपने रोज की जिंदगी में कर रहा हूं इन कार्यों के प्रति बच्चे के कौशल को विकसित करना चाहिए।
  4. बच्चे में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से उचित समायोजन करना:- शिक्षकों को बालको में समाज के प्रति ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए, जो कि सकारात्मक हो। समाज के प्रति बालक के कर्तव्यों को बताना चाहिए, एवं इनका उचित समायोजन करना। बालकों को यह ज्ञात हो कि हमें समाज के प्रति कैसा दृष्टिकोण करना और इन दृष्टिकोणोंको कैसे समायोजित करना है यह शिक्षक को बताना चाहिए।
  5. समाज का बालको के प्रति संवेदनशीलता का विकास:- जिस प्रकार से बालक का कर्तव्य है कि वह समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एवं उचित समायोजन करें। ठीक उसी प्रकार समाज का भी कर्तव्य है, कि वह भी बालक के प्रति संवेदनशील हो बालक को उचित ज्ञान दें जिससे कि बालक अपने शिक्षा में सफल हो सके।
  6. सीखने की प्रकृति का विकास:- बालक मैं सीखने की प्रकृति के विकास करना बालक जिस प्रकार से सीखता है। उसे वैसे ही प्रकृति से सिखाना चाहिए, क्योंकि बालक की जैसी प्रकृति होती है, उसी प्रकार से सीखता है।
  7. बच्चे में नवजीवन का संचार करना:- हम बालक में ऐसे ज्ञान का सृजन करना जो कि उसके नवजीवन के संचार में सहायक हो सके।
  8. उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का वहन:- बालक में ऐसे ज्ञान को देना जिससे कि मैं उत्तम नागरिक बन सकें एक उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का संवहन कर सके क्योंकि समाज में एक उत्तम नागरिक ही अपने कर्तव्य का निर्वहन कर पाता है जो कि शिक्षा से ही संभव हो सकता है।
  9. बच्चे को स्वावलंबी बनने के व्यवसायिक शिक्षा देना:- एक शिक्षक का सर्वप्रथम कर्तव्य है कि वह बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करें जिससे कि वह आत्मनिर्भर बन सकें और अपने जीवन में एक व्यवसायिक शिक्षा प्रदान कर सके।

🎯 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय:-
♦️वंचित वर्गों के लिए:- 1. शारीरिक रुप से वंचित वर्ग:- शारीरिक रूप से विकलांग वाला कौन से जात है कि जो बालक आंख, कान, नाक, जीभ, हाथ, पैर इत्यादि किसी भी प्रकार की शारीरिक विकार से पीड़ित हो वह शारीरिक वंचित वर्ग के लिए कहे जाते हैं।

  1. मानसिक रूप से वंचित बालक:- मानसिक रूप से वंचित बालक के अंतर्गत मेरा बालक आते हैं, जिसने सीखने में क्षमता होती है। जैसे कि पढ़ने में अक्षमता, लिखने में अक्षमता इत्यादि सभी मानसिक रूप से वंचित बालकों की श्रेणी में आते हैं।
  2. बाल मजदूरी:- वह बालक जो किसी भी कारण वश 14 वर्ष की उम्र से कम में मजदूरी करना पडता हैं। बालक इस श्रेणी में आते हैं।
  3. स्त्री- पुरुष में विभेद:- हमारे समाज में आज भी लिंग भेद को लेकर विभिन्न बताएं की जाती है। समाज में आज भी लड़कों को उच्च स्थान प्रदान किए जाते हैं एवं लड़कियों को वह स्थान नहीं दिया जाता है जो कि लड़कों को प्राप्त है।
  4. जातिगत व रंग भिन्नता:- जाति एवं रंग को लेकर आज भी भेदभाव किए जाते हैं।
  5. समूह कारक:- समूह कारक से कहने का अर्थ है कि आज भी उन शब्दों को ज्यादा सम्मान दिया जाता है, जिससे लोग अधिक पाए जाते हैं जिनकी संख्या अधिक होती है।
    📗 समाप्त 📗
    🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🌺समावेशी शिक्षा के
उददेश्य—🌺

किसी भी कार्य की सफलता के लिये सर्वप्रथम पद—-
1) उददेश्य का निर्धारण — किसी कार्य को करने से पहले उददेश्य का निर्धारण करते हैं।
2) उददेश्य मे समय के अनुसार परिवर्तन करना– जैसे मान लिया जाये की ctet का एग्ज़ाम कुछ दिनो मे होने वाला तो हम अपने उददेश्य म परिवर्तनकरते हैं ।

समेकित शिक्षा के उददेश्य 🌺🌺

1) बच्चे को मुख्यधारा से अलग किये बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना।
जैसे समान्य ओर विशिष्ट बच्चे को एक समान स्तर या समान शिक्षा देना
विशिष्ट बच्चे को थोड़ा ज्यादा मेहनत करा कर एक समान स्तर पर लाना

2) बच्चे को उसकी शक्ती का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसितकरना ।
3) बालक के विकास के लिये सहायक वातावरण उपलब्ध करवाना —जिसमे बच्चे को अपनी शक्ति का अधिकतम उपयोग कर सके। जिससे बच्चा सीखता हैं ।

4) बालको मे देनिक जीवन के अनुरुप कौशल विकासित करना।
बच्चे जो प्रतिदिन कार्य करते हैं जो कुशलता हैं उनके अंडर उसमे कुशल करना।

5)बालको मे समाज के प्रति एक सकारत्मक दृष्टिकोण ओर उचित समायोजन विकसित करना।
सकारत्मक दृष्टिकोण होगा तभी हम समाज मे लोगो के साथ मिलकर रह सकते हैं। interaction कर सकते हैं ओर adjust कर सकते हैं।
हम अच्छा सोचे हमारा दृष्टिकोण है ओर हम अच्छा व्यव्हार करे हमारा समायोजन हैं।

6) समाज का बालक के प्रति सम्वेदनशीलता होना ।
बालक के प्रति सकारत्मक दृष्टिकोण होना चाहिए ।

7) बालक मे सिखने की प्रकीर्ति का विकास करना चाहिए ।
जिससे बालक सिख सके।
8) बालको मे नवजीवन का संचार करना।
हमारे अंदर जो भी आदत है कभी ना कभी को नया रहा होगा यही नवजीवन का संचार हैं । वही से शुरूआत हुई होगी।
9) उत्तम नागरिक होने का कर्तव्य वहन करना।

10) बालको को स्वावलंबी बनाने के लिये व्यवसायिक शिक्षा देना।

🌺समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय🌺🌺
समावेशि शिक्षा की जरुरत इस लिये हुई जो बच्चे अर्थिक,जाति,रंग ,दिव्यंयाग ओर पिछड़े हुए हैं उनको मुख्यधारा मे लाने के लिये हुई।
🌼 वंचित वर्ग के लिये
1) जैसे शारिरीक रुप से (नाक कान स्वर हाथ पैर, शरीरके किसी भी अंग से विकलांग हो सकता है)
2) मानसिक रुप से विकलांग डिस्लेक्सिया आदि
3) अवसर ना मिलने के कारण
🌺 बाल मजदूर
🌺नुक्कड़ नाटक के बच्चे
🌺स्त्री पुरुष विभेद के कारण
🌺जाति , रंग का विभेद के कारण
🌺समूह कारक आदि कारणोंसे बच्चे पिछड़ जाते हैं।
NOTES BY- SUNIDHI 🌺🌺🌺🌺🌺🙏🙏


Nots by sanu sanwle

समेकित शिक्षा के उद्देश्य ➖ A किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए सर्वप्रथम पद उसका उद्देश निर्धारित होना चाहिए
B उद्देश निर्धारित में समय के साथ परिवर्तन भी किया जा सकता है
🔷 समेकित शिक्षा / एकीकृत शिक्षा के उद्देश्य
1 बच्चों को मुख्यधारा से अलग किए बिना ही उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना
2 उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना
3 बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना
4 बच्चों में दैनिक जीवन के अनुसार कौशल विकसित करना
5 बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण या उचित समायोजन
6 बच्चे में सीखने की प्रगति का विकास करना
7 समाज का बालकों के प्रति संवेदना शीलता का विकास करना
8 बच्चों में नवजीवन का संचार करना
9 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का वर्णन करना
10 बच्चों को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना
🔷 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय ➖ वंचित वर्ग के लिए
1 शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे _जैसे ,आंख, नाक , कान , हाथ ,पैर स्वर आधे से विकलांग बच्चे
2 अधिगम अक्षमता
3 बाल मजदूरी
4 नुक्कड़ के बालक
5 स्त्री – पुरुष विभेद
6 जाति रंग
7 समूह कारक


✍🏻manisha gupta✍🏻

समेकित शिक्षा/एकीकृत शिक्षा के उद्देश्य (integreted education) समावेशी शिक्षा के माध्यम से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए क्या क्या प्रयास किए जा सकते हैं, क्या सिखाया जा सकता है➖

किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम जो पर आते हैं वह इस प्रकार से है

📚 उद्देश्य का निर्धारण
‌ किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए उस कार्य के उद्देश्य का निर्धारण करना चाहिए। सर्वप्रथम किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की जाती है उस रूपरेखा के आधार पर ही हम अपने कार्य को प्रारंभ करते हैं और यही उद्देश्य का निर्धारण होता है कि हमें प्रारंभ कहां से करना है या कैसे करना है या किस प्रकार से करना है।

📚 उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन उद्देश्य निर्धारण करने के बाद समय के अनुसार उद्देश्य में परिवर्तन करना आवश्यक होता है।

(जैसे हम अभी ctet exam की तैयारी कर रहे हैं तो इस एग्जाम के लिए एक उद्देश्य निर्धारित कर लिए हैं लेकिन यदि अचानक हमें ऐसा पता चलता है कि ctet exam कुछ दिनों बाद होने वाला है तो हमारा उद्देश्य भी समय के अनुसार परिवर्तित हो जाता है। तो इस उदाहरण से यह समझ सकते हैं कि हम परिस्थिति के अनुसार यह समय के अनुसार अपने उद्देश्यों में परिवर्तन करते रहते हैं और यह परिवर्तन भी परिस्थिति के अनुकूल होती है)

🎯 समेकित शिक्षा के क्या उद्देश्य होने चाहिए

🌸 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से अलग किए बिना ही उनकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना चाहिए ➖ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ ही एक समान शिक्षा प्रदान करना चाहिए प्रत्येक बच्चे के जरूरत के हिसाब से उन्हें शिक्षा प्रदान करना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को भेदभाव किए बिना ही उन्हें शिक्षा प्रदान करना चाहिए।

🌸 बच्चों की शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना प्रत्येक बच्चे को एक समान शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी शक्ति का अधिक से अधिक उपयोग करने की क्षमता उनमें विकसित करना चाहिए। जिससे वे बच्चे अपनी शक्ति का उपयोग करके बेहतर अधिगम कर सके।

🌸 बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए बाल केंद्रित वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए पर एक ऐसा वातावरण उपलब्ध कराएं जो बच्चों के अनुकूल हो। बच्चों के पूर्ण रूप से विकास करने के लिए उनके लिए एक सहायक वातावरण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

🌸 बच्चों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना ‌ प्रत्येक बच्चे के दिनचर्या को देखते हुए या ध्यान में रखते हुए ही उनके जीवन के अनुरूप ही उनमें कौशल विकसित करना चाहिए । शिक्षक को इस बात पर जोर देना चाहिए जो बालक अपनी रोज की जिंदगी में कर रहा है इन कार्यों के प्रति उनमें कौशल को विकसित करना चाहिए।

🌸 बालकों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उचित समायोजन विकसित करना➖ शिक्षक को इस बात पर जोर देना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे में समाज को देखने का नजरिया तौर तरीका ऐसा हो जिससे वे समाज के लोगों के साथ अंतः क्रिया करके उचित समायोजन करें सामान्य शब्दों में ऐसा कह सकते हैं कि प्रत्येक बच्चे में समाज के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण लाए जिससे वे बच्चे उचित समायोजन कर सके और भी समायोजन करके समाज के लिए कुछ कर सके।

🌸 समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता का विकास➖ जब बच्चे का समाज के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो जाता है और वे समाज के उचित समायोजन कर लेते हैं तो समाज का भी यह कर्तव्य होता है की समाज भी बालकों के प्रति संवेदनशील हो इसलिए शिक्षक को इस बात पर भी जोर देना चाहिए समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना चाहिए।

🌸 सीखने की प्रकृति का विकास
प्रत्येक बच्चे में सीखने की प्रवृत्ति का विकास करना चाहिए उनके स्वभाव में या उनकी प्रवृत्ति को इस प्रकार से बनाना चाहिए कि वे बेहतर रूप से सीखने के लिए अपने रुचि और पूरे मन से उसे पढ़ने के लिए प्रेरित हो। और बच्चे की जैसी प्रकृति होगी उसी प्रकार से सीखेगा।

🌸 बच्चों में नवजीवन का संचार करना प्रत्येक बच्चे में एक ऐसे नवजीवन का संचार करना जो उसके जीवन के लिए उपयोगी हो । उन्हें ऐसे शिक्षा प्रदान करना है जिससे वे आगे की जिंदगी में भी नए जीवन मैं बेहतर रूप से समायोजन कर सके।

🌸 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का निर्वहन➖ बालक को ऐसा शिक्षा प्रदान करना है जिससे वह समाज में उत्तम नागरिक होने के साथ-साथ उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का निर्वहन कर सके और समाज में एक उत्तम नागरिक बनकर अपने कर्तव्य को तन्मयता से पूर्ण रूप से समाज के हित के लिए कार्य करे और यह सब कार्य शिक्षा के माध्यम से ही संभव हो सकता है।

🌸 बच्चों को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना बालकों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं शिक्षक को यह प्रयास करना चाहिए कि वे प्रत्येक बालक को व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करके उन्हें स्वावलंबी बनाने का प्रयत्न करें जिससे वे अपनी जिंदगी में कुछ कर सके और अपना जीवन निर्वाह कर सके।

🎯 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय

🌈 वंचित वर्गों के लिए
‌‌। समावेशी शिक्षा का मुख्य विषय यह है कि विभिन्न आवश्यकता वाले या वंचित वर्ग के लिए अर्थात शारीरिक, मानसिक या अवसर से वंचित बच्चे को केंद्र करने पर जोर दिया गया है।

🍭*शारीरिक रूप से विकलांग ➖ शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे वह होते हैं जो आंख, नाक, कान ,स्वर ,हाथ पैर आदि विकार से वंचित हो ।

🍭 मानसिक रूप से वंचित बालक➖ मानसिक रूप से वंचित बालक के अंतर्गत वे बच्चे आते हैं जिनके सीखने में अक्षमता होती है जैसे पढ़ने में अक्षमता, लिखने में अक्षमता, गणितीय कौशल अक्षमता, वाक् संबंधी अक्षमता ,चित्रांकन संबंधी अक्षमता आदि इस श्रेणी में आते हैं ।

🍭 बाल मजदूरी➖ वह बच्चे जो किसी कारण से अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए हैं और वे कम आयु में ही मजदूरी करने लगे हैं वे बालक इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

🍭 नुक्कड़ के बालक➖ नुक्कड़ के बालक के अंतर्गत भी ऐसे बच्चे आते हैं जो किसी कारणवश अपनी शिक्षा पूर्ण ना कर पाने के साथ-साथ गली मोहल्ले में नाटक करते हैं।

🍭 स्त्री पुरुष विभेद➖ जैसा कि हम जानते हैं कि समाज में लिंग भेद को लेकर बहुत बड़ी समस्या है समाज में पुरूषो का स्थान प्रमुख माना जाता है जबकि स्त्री को निम्न श्रेणी में रखा जाता है कई समाज में आज भी लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है। लड़कों एवं लड़कियों को समान रूप से अवसर दिया जाना चाहिए।

🍭 जाति रंग विभेद➖ जाति रंग विभेद को लेकर भी समाज में आज बहुत बड़ी समस्या है। जिससे दिन प्रतिदिन भेदभाव बढ़ता ही जा रहा है जाति, रंग को लेकर भी भेदभाव किए जाते हैं।

🍭 समूह कारक➖ समूह कारक मैं भी भेदभाव देखा जाता है सामान्य शब्दों में ऐसा कह सकते हैं कि यह समूह भी अपनी अपने स्टेटस के आधार पर बांट लिया जाता है। एक समूह में उच्च वर्ग के लोग तो दूसरे समूह में निम्न वर्ग के लोग तो ऐसा कह सकते हैं कि समूह कारक में भी भेदभाव किया जाता है। ✔️📚 समाप्त📚✔️


📚 समेकित शिक्षा के उद्देश्य📚
✍🏻 किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम पद!
✍🏻 उद्देश्य का निर्धारण करना— किसी कार्य को करने से पहले उद्देश्य का निर्धारण कर लेना चाहिए!
📚 समेकित शिक्षण या एकीकृत शिक्षण के उद्देश्य📚
✍🏻 बच्चों को मुख्यधारा से अलग किए बिना उनकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना—- इसके अंतर्गत जो कमजोर बच्चे हैं उनको सामान्य बच्चों के लेवल में लाना होता है!
✍🏻 बच्चों में शक्ति की अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना!
✍🏻 बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना—- इसके अंतर्गत ऐसा वातावरण जो उनके विकास में सहायता करें जिससे वह प्रदर्शन बेहतर दे सकें!
✍🏻 बालकों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना!
✍🏻 बालकों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उचित समायोजन पैदा करना—– जिससे कि वह समाज के प्रति अपनी एक पॉजिटिव सोच रख सके समाज के अनुकूल ढल सकें!
✍🏻 समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता —– समाज को चाहिए कि वह भी बालकों के प्रति अपना नजरिया संवेदनशीलता तथा सहानुभूति का रखें!
✍🏻 सीखने की प्रकृति का विकास—– बच्चों में सीखने की प्रकृति का विकास करना चाहिए जिससे वह अच्छा व स्थाई सीख सकें!
✍🏻 बच्चों में नवजीवन का संचार करना—– बच्चों का शिक्षा के क्षेत्र में नवजीवन का संचार करना चाहिए!
✍🏻 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का बहन—– इसके अंतर्गत बालकों में अपने उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का पालन करने की शिक्षा देना!
✍🏻 स्वावलंबी बनने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना—– इसके अंतर्गत बालकों को व्यवसायिक शिक्षा देना जिससे वह स्वावलंबी अर्थात अपना काम स्वयं करने वाले किसी के ऊपर निर्भर ना रहने वाले बन सके नौकरी पाने के लिए शिक्षा भी व्यवसायिक शिक्षा के अंतर्गत ही आती हैं!
📚 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय📚
✍🏻 वंचित वर्ग के लिए शिक्षा—– इसके अंतर्गत जो शारीरिक रूप से विकलांग हैं जैसे आंख से नाक से कान से हाथ से चलने में असमर्थ हैं ऐसे बच्चों को समावेशी शिक्षा दी जाए!
✍🏻 बाल मजदूरों के लिए शिक्षा— इसके अंतर्गत मजदूरी कर रहे हैंबालकों को मजदूरी से हटाकर शिक्षा प्रदान की जाए!
✍🏻 नुक्कड़ नाटक करने वाले बालक—- इसके अंतर्गत आज भी हमारे देश में ऐसे बच्चे हैं जो किसी मजबूरी के कारण पढ़ाई छोड़ कर नुक्कड़ नाटक दिखाते फिरते हैं ..ऐसे बच्चों को यह शिक्षा दी जाए!
✍🏻स्त्री पुरुष मैं विभेद— आज भी हमारे देश में स्त्री पुरुष में भेदभाव किया जाता है. हमें इस भेदभाव को हटाकर लड़कियों को भी लड़कों के समान शिक्षा प्रदान करनी चाहिए!
✍🏻 जाति व रंग के कारण भेदभाव—- हमारे देश में हो रहे जाति, रंगो के कारण भेदभाव को हटाकर सभी को समावेशी शिक्षा प्रदान करें !
✍🏻 समूह कारण—– समूह दल के कारण समान प्रकार की शिक्षा नहीं दी जा रही है (जिसकी संख्या अधिक उसका ही बोलबाला है) . . समूह कारण को हटाकर सभी को समावेशी शिक्षा प्रदान करना चाहिए!………
❗ समाप्त❗
🔏RITU YOGI🔏


✍🏻 Notes By-Vaishali Mishra

🔆 समावेशी शिक्षा के उद्देश्य
किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम इन पदों का प्रयोग किया जाता है जिससे हमे किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होती हैं-

1 उद्देश्य का निर्धारण करना।
2 उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन करना।

समेकित शिक्षा के उद्देश्य निम्नानुसार है।

▪️ 1 बच्चे को उसकी शिक्षा की मुख्यधारा से अलग किए बिना ही बच्चे की आंतरिक क्षमता को बढ़ाना।

▪️ 2 बच्चे की शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता को विकसित करना।- यदि किसी कार्य को करने के पास हमारी शक्ति होती है और उस शक्ति का हम बार-बार या अधिकतम प्रयोग करें तो उस कार्य में हम योग्य हो जाते है।

▪️ 3 बच्चे के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध करवाना।
बच्चे को ऐसा वातावरण उपलब्ध करवाना जिसमे वह बेहतर रूप से सीख पाए।

▪️ 4 बच्चों में दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना।
बच्चों का जब अधिगम दैनिक जीवन के अनुरूप करवाया जाता है तो वह बेहतर ओर रुचि पूर्ण तरीके से अधिगम करते है और साथ ही साथ दैनिक जीवन के कौशल का विकास होता है।

▪️ 5 बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एवं उचित समायोजन करने के लिए विकसित करना।
बच्चे जब समाज के साथ सकारात्मक अंतः क्रिया या उचित समायोजन करते हैं तो वह समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर पाते है।

▪️6 समाज द्वारा बालकों के प्रति संवेदनशीलता का विकास होना-
समाज के कई लोग जैसे अध्यापक, मित्र ,परिवार आदि के द्वारा बालकों के प्रति संवेदनशील या सकारात्मक संवेदनशीलता विकसित करनी चाहिए।
यदि यह लोग असंवेदनशील या नकारात्मक संवेदनशीलता रखते हैं तो बच्चे पीछे हो जाते हैं।
दूसरे रूप में हम कह सकते हैं कि संवेदनहीनता व्यक्ति की संवेदनशीलता की दिशा को बदल देती है।

▪️7 सीखने की प्रकृति का विकास करना – जब किसी कार्य को प्रकृति या स्वाभाविक रूप से किया जाता है तो वह कार्य सफलतापूर्वक पूरा होता है।
और वह कार्य केसे किया गया है यह स्थाई हो जाता है।

▪️8 बच्चों में नवजीवन का संचार करना-
नवजीवन संचार के माध्यम से बच्चे किसी कार्य को स्वाभाविक रूप से करते हैं। स्वाभाविक रूप से किया गया कार्य काफी बेहतर तरीके से पूर्ण और सफल होता है।

▪️9 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का वहन करना-

▪️10 बच्चे को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना। – बच्चे को व्यवसायिक शिक्षा देने से तात्पर्य है कि बच्चे भविष्य के लिए हर क्षेत्र में स्वावलंबी बन सकें।

🔅 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय
निम्न प्रकार है
वंचित वर्ग के लिए इसमें दो वर्ग आते हैं

  • शारीरिक रूप से विकलांग – आंख, कान , हाथ, पैर या शरीर के किसी भी अंग से विकलांग बच्चे ।

*मानसिक रूप से विकलांग – मानसिक रूप से दुर्बल बच्चे (डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया या एडी एचडी )

बाल मजदूरी के कारणों से वंचित बच्चे ➖ आज भी कई बच्चे ऐसे है जो बाल मजदूरी करते है और उसके चलते अपनी शिक्षा से वंचित हो जाते है।जैसे – नुक्कड़ नाटक करने वाले बच्चे ।

स्त्री पुरुष (लिंग) विभेद के कारणों से वंचित बच्चे ➖ लिंग विभेद बहुत बड़ी समस्या है जिसकी वजह से कई बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते है।

जाति ,रंग विभेद के कारणों से वंचित बच्चे ➖ जाति , रंग में अंतर की वजह से भी कई बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते है।

समूह कारक विभेद के कारणों से वंचित बच्चे ➖ समाज में कई कारणों के रूप में समूह विभेद किया जाता है अर्थात जिनकी संख्या अधिक है उन्हें ज्यादा वरीयता दी जाती है और जो किसी कारणों से जिनकी संख्या कम है, वे वंचित रह जाते है ,उन्हें समावेशी शिक्षा उपलब्ध करवाना है।

यह सभी विषय बच्चे को आगे बढ़ाने के लिए ,बच्चों की क्षमता का विकास करने के लिए बहुत जरूरी है।


✍ notes by
Laxmi Patle

👩‍🏫 समेकित शिक्षा के उद्देश्य :-

🔴 किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम निम्न चरण अपनाने चाहिए :-

  1. उद्देश्य का निर्धारण।

किसी भी कार्य को सफलता के स्तर तक पहुंचाने के लिए उद्देश्य का निर्धारण करना अति आवश्यक है ,क्योंकि जब उद्देश्यों का निर्धारण होगा तभी उन उद्देश्यों को पूरा करते हुए हम सफलता तक पहुंचेंगे। अर्थात उद्देश्य के निर्धारण के अंतर्गत, हमें कार्य के अनुरूप एक रूपरेखा और नियम तैयार करना चाहिए ताकि उनका अनुसरण करते हुए हैं हम अपने कार्य को सफल बना सकें।

  1. उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन करना चाहिए।

किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए हमें अपने द्वारा बनाए गए उद्देश्य के योजना में जरूरत के हिसाब से और तत्कालिक परिस्थिति के हिसाब से परिवर्तन करना चाहिए। ताकि सही ढंग से हम अपने उद्देश्य में सफलता हासिल कर सकें।
उदाहरण के तौर पर हम समझ सकते हैं कि यदि हम किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और उसके नजदीक आने पर हम अपनी तैयारी को दोगुना कर देते हैं। या नये तरीके से पढ़ाई शुरू कर देते हैं। तो यह हमारे उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन करना होगा।ताकि हम परीक्षा में अच्छा अंकों से उत्तीर्ण हो सके।

👉 समेकित शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य हो सकते हैं:-

बच्चे को मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना।

इसके अंतर्गत यह कहा गया है कि समस्त बच्चों,चाहे वे बाधित हो या सामान्य बालक ,को मुख्यधारा से अलग किये बिना अर्थात समाज की उचित व्यवस्था से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता याने की उसके कार्य करने की क्षमता को बढ़ावा देना है।

बच्चों में शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना।

इसके अंतर्गत यह कहा गया है कि बच्चों को उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वे अपने अधिगम कार्य को अच्छे से कर सके तथा समाज में सामान्य बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

बच्चों के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना।

बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध करा कर उनके अनुकूल वातावरण निर्मित करना चाहिए। ताकि वे आसानी से अधिगम कार्य कर सके एवं उनका विकास हो सके। इसके लिए हमें असमर्थ बालकों की असमर्थताओं का पता लगाकर उनको दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

बच्चों में दैनिक जीवन के आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकसित करना।

प्रत्येक बच्चे को चाहे वह सामान्य बालक हो या असमर्थ बालक उनको अपने दैनिक जीवन में होने वाले कार्यों के प्रति जागरूक करना चाहिए तथा उनके सामर्थ्यता एवं आवश्यकता के अनुसार उनके अंदर कौशल विकसित करना चाहिए ताकि वे आसानी से अपना कार्य कर सके।

बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एवं उचित समायोजन की भावना विकसित करना।

यदि बच्चों में दैनिक जीवन की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकसित होगा, तो उनके अंदर समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण या समाज के लिए अच्छा सोचने की प्रवृत्ति उत्पन्न होगी। इसके अलावा उनमें समाज के साथ उचित समायोजन बना पाने की भावना का विकास होगा। अतः इसके लिए हमें बच्चों को जागृत करना चाहिए।

समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशीलता का विकास होना चाहिए।

इसके अंतर्गत यह कहा गया है कि समाज को भी यह आवश्यकता है कि वे बच्चों के प्रति, चाहे वे सामान्य हो या असामान्य सबके साथ उचित व्यवहार करना चाहिए तथा संवेदनशील होना चाहिए।ताकि वे कुंठा का शिकार ना हो और उनमें अच्छे से समानता के साथ विकास हो सके।

बच्चों में सीखने की प्रकृति का विकास करना।

इसके अंतर्गत या कहा गया है कि बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति जागृत करना चाहिए। ताकि वे सीखने के लिए तत्पर हो और उनका विकास हो सके। हम जानते हैं कि बच्चे की जैसी प्रकृति होती है वह वैसा ही सीखते हैं।अतः हमे चाहिए कि बच्चों में सीखने की ललक जागृत हो और जिसके लिए उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

बच्चों में नवजीवन का संचार करना होगा।

यह उद्देश्य उन बच्चों के लिए निर्धारित किया गया है जो अपने जीवन से निराश हो गए हैं। मुख्यधारा से पिछड़ गए हैं। हमें चाहिए कि हम उन बच्चों में नवजीवन का संचार कर सके और उन्हें नए सिरे से अपने जीवन को उल्लास और प्रेरणा से ओतप्रोत कर आगे बढ़ने का अवसर दें।

सम्पूर्ण जीवन में उत्तम नागरिक होने का कर्तव्यों का वहन करना।

इस उद्देश्य के तहत यह कहा गया है कि शिक्षा के द्वारा ऐसे चरित्रवान उत्तम नागरिक का निर्माण करना है। जो समाज के हित के लिए कार्य कर सकें एवं सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से अपने आप को जोड़ सके। उत्तम नागरिक होने के तहत उनका जीवन सुखमय एवं प्रभावी बन सके।

बच्चे को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना।

यह उद्देश्य बच्चे को आत्म निर्भर बनाने के ओर इंगित करता है। जिसमें यह कहा गया है कि हमें बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे वे अपने सुचारू रूप से जीवन निर्वहन करने के योग्य हो सके अथवा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए काबिल हो सके।

🦋 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय:-

समावेशी शिक्षा में समस्त वर्गों जिनमें विभिन्न आवश्यकता वाले या वंचित वर्ग के बच्चे को केंद्रित करने पर जोर दिया गया है।

👧 वंचित वर्ग के बच्चे🧑

वंचित एक विस्तृत पद है जिसका सामान्य अर्थ जीवन की समस्त सुख-सुविधाओं से अलाभान्वित रह जाना होता है। ऐसे तो हर बच्चे को वंचित बालक कहा जा सकता है क्योंकि कुछ-ना-कुछ सुविधाओं से प्रत्येक बच्चे वंचित है किंतु शिक्षा मनोवैज्ञानिकों द्वारा वंचित वर्ग का मतलब ऐसे बच्चों से है जो सामाजिक,आर्थिक रूप से तथा सांस्कृतिक रूप से अलाभान्वित समुदाय से आते हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग

शारीरिक रूप से विकलांग वे बच्चे होते हैं जो आंख, कान ,स्वर ,हाथ, पैर आदि का संचालन नहीं कर पाते या इनसे वंचित होते हैं।

🤯 मानसिक रूप से वंचित बालक

मानसिक रूप से वंचित बालक के अंतर्गत वे बच्चे आते हैं जिनमें, मानसिक मंदता एवं अधिगम में अक्षमता होती है।जैसे पढ़ने में अक्षमता, लिखने में अक्षमता, गणितीय कौशल अक्षमता, वाक् संबंधी अक्षमता ,चित्रांकन संबंधी अक्षमता आदि।

🧎‍♀️ बाल मजदूर🧎‍♂️

वे बच्चे जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तथा किसी कारण वश अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते हैं।अपने जीवन का निर्वहन करने के लिए कम आयु में ही मजदूरी करने लगते हैं ऐसे बालक इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

🙇‍♂️ नुक्कड़ के बालक🙇‍♀️

नुक्कड़ के बालक के अंतर्गत ऐसे बच्चे आते हैं जो किसी कारणवश अपनी शिक्षा पूर्ण ना कर पाते एवं थोड़ी कमाई के लिए गली मोहल्ले में नाटक करते हैं।

🤷‍♂️ स्त्री पुरुष विभेद🤷‍♀️

जैसा कि हम जानते हैं कि हमारे समाज में लिंग भेद अभी भी अपने चरम पर बना हुआ है,जो कि बहुत बड़ी समस्या है। समाज में पुरूषो का स्थान प्रमुख माना जाता है जबकि स्त्री को निम्न श्रेणी में रखा जाता है। कई समाज में आज भी लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है।

👥 जाति रंग विभेद👥

जाति,रंग,स्थान को लेकर आज भी लोग भेद भाव करने से पिछले नहीं हटते।यह समाज की बहुत बड़ी समस्या है। जिससे दिन प्रतिदिन भेदभाव बढ़ता ही जा रहा है।

🚹 समूह कारक🚺

समूह कारक जो कि एक विशेष समूह को दर्शाता है, इनमें भी भेदभाव व्याप्त है।सामान्य शब्दों में ऐसा कह सकते हैं कि समूह भी अपनी अपने स्टेटस के आधार पर बांट लिया जाता है। एक समूह में उच्च वर्ग के लोग आते हैं तो दूसरे समूह में निम्न वर्ग के लोग आते हैं।

🙏 समाप्त🙏


💫Notes by➖ Rashmi Savle💫

🍀समेकित शिक्षा के उद्देश्य🍀
जब हम कोई कार्य करते हैं तो उसमें हमें कहां जाना है, कहां पहुंचना है, क्या करना है ,क्या चाहिए , किस प्रकार से उस में परिवर्तन करना हैं जो उद्देश्य निर्धारण के लिए जरूरी है |

किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम इन पदों का प्रयोग किया जाता है जिससे कि हमें किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होती है —

(1) उद्देश्य का निर्धारण करना | और,

(2) उस उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन करना ही समेकित शिक्षा के मुख्य उद्देश्य में शामिल हैं |

🌟 समेकित शिक्षा/ एकीकृत शिक्षा/Integrated Education के उद्देश्य➖

🔅 शिक्षा को क शिक्षा की मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना ➖
सभी विद्यार्थियों को जो विशिष्ट रूप से पिछड़े हो या वंचित हो सभी को पूरी तरीके से मुख्यधारा में रखकर आवश्यकता के अनुसार शिक्षा देना | यदि किसी बच्चे को किसी क्षेत्र में समस्या है तो उनको बिना भेदभाव किए उनकी समस्या का निवारण कर बराबर करना और समान शिक्षा प्रदान करना है |

🔅 बच्चों में उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना ➖
हम सब अपनी क्षमता का बहुत कम उपयोग करते हैं जिसके लिए हमें कोशिश करना चाहिए कि उस क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए अर्थात क्षमता के अनुसार हम अपनी शक्ति का उपयोग कर रहे हैं या नहीं उसका उपयोग करना अति आवश्यक है तथा यही योग्यता बच्चे में विकसित करना ही एक शिक्षक का प्रमुख कर्तव्य एवं कार्य है कि उसको बच्चों की क्षमता को कैसे बढ़ाना है तथा उसका अधिकतम प्रयोग कैसे करना है यह सिखाना ताकि वे उसका उपयोग कर सकें |

🔅 बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना ➖
एक ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना कि बच्चे उसका उपयोग कर सकें ,उन्हें ऐसा महसूस हो कि हां हम भी कर सकते हैं यदि हम बच्चे के अनुकूल वातावरण उपलब्ध नहीं कराएंगे तो उसका सही उपयोग नहीं हो पाएगा बच्चे उसका सही उपयोग उपयोग नहीं कर पाएंगे जिससे उनके मन में समस्या का समाधान नहीं होगा |

🔅 बच्चों में दैनिक जीवन की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकसित करना ➖
बच्चों की दैनिक दिनचर्या के अनुसार उनमें ऐसे कौशल विकसित करना कि उनके लिए क्या आवश्यक है ,और क्या नहीं , इससे उनकी प्रगति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तथा उनकी प्रगति सकारात्मक होगी |

🔅 बच्चे में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उचित समायोजन ➖
हम सब यह मानते हैं कि हम समाज में रहते हैं उसके लिए आवश्यक है कि समाज के प्रति अच्छा नजरिया हो ताकि उसके साथ एक अच्छी अंत :क्रिया हो सके और यही सकारात्मक दृष्टिकोण को लाता है और समाज के मानदंडों का पालन कर उसके साथ उचित समायोजन कर सकें, उसके लिए आवश्यक है कि हम अच्छा सोचे और अच्छा करें |

🔅 समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता का विकास ➖
समाज का बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो सके ताकि अच्छे समाज का निर्माण हो सके इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी सोच को बदलें ,ताकि बच्चे समाज के साथ अंत: क्रिया कर सके और उसको समझ सके तब समाज को भी यह समझने की आवश्यकता है कि वह बच्चे की भावनाओं को समझें उनके प्रति संवेदनशील तथा सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करें |

🔅 सीखने की प्रकृति का विकास ➖
यदि हमारी प्रकृति सीखने की है तो हम सीखेंगे और यदि नहीं है तो हम नहीं सीखेंगे | शिक्षक को यह प्रयास करना चाहिए कि बच्चों में सीखने का स्वभाव या प्रकृति उत्पन्न हो ताकि वे सीख सकें |

🔅 बच्चों में नवजीवन का संचार ➖
बालकों के स्वभाव को ऐसा बनाना है कि वे अपने जीवन के प्रति सकारात्मक विचार ला सकें जिससे कि ये समझ पाए कि बच्चा कुछ कर सकता है इसके लिए उनमें आधुनिकीकरण करना अति आवश्यक है ताकि उनके मस्तिष्क पर सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो सके |

🔅 नागरिक होने के कर्तव्यों का वहन करना ➖
बच्चों को सिखाना चाहिए एक अच्छे नागरिक के कर्तव्य क्या हैंउनको अपने कर्तव्यों का कैसे पालन करना है ताकि वे उसको समझ पाए और अपने जीवन में अच्छे नागरिक बन पाएं |

🔅 स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना ➖
बच्चों को व्यवसाय शिक्षा देना ताकि वे स्वावलंबी बन सकें उनको ऐसी शिक्षा देना कि वे अपने उद्देश्य के लिए कार्य कर सकें कार्य कर सकें |

🍀 समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय➖

⭐ वंचित वर्ग के लिए➖

(1) शारीरिक रूप से विकलांग ➖
इसमें इस प्रकार के बच्चे आते हैं जो आंख ,कान, नाक ,हाथ ,पैर, स्वर ,चलने ,आदिमें वंचित है यि कि समस्या का अनुभव करते हैं अर्थात विकलांगों को शिक्षा देना |

(2) मानसिक रूप से विकलांग➖
इसमें मुख्यत: अधिगम विकार जैसे डिस्लेक्सिया , डिस्ग्राफिया, डिस्केलकुलिया ,डिस्टेक्सिया, डिस्फेसिया आदि प्रकार के विकारों से पीड़ित बच्चे हों |

(3) बाल मजदूर ➖
इसमें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे होते हैं जैसे नुक्कड़ के बालक |

(4) स्त्री पुरुष के भेद ➖
यह विभेद करना कि स्त्री को शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है तथा पुरूष कर सकता है यह सोच लैंगिक रूढ़िवादिता को दर्शाती है जो कि महिलाओं के शिक्षा एक मुख्य समस्या है

(5) जाति, रंग

(6) समूह कारक आदि

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Notes by Sapna sahu
समेकित शिक्षा के उद्देश्य➖

किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम निम्न पदों से गुजरना अनिवार्य है
1 उद्देश्य का निर्धारण :- इसी प्रकार को करने से पहले हमें अपने उद्देश्य का निर्धारण कर लेना चाहिए बिना उद्देश्य कि हम किसी भी कार्य को नहीं कर सकते
2 उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन:- उद्देश्य में हमें समय के अनुसार परिवर्तन करना चाहिए जहां जिस समय जैसी स्थिति आती है हमें उस समय वैसा कार्य करना चाहिए
समेकित शिक्षा के उद्देश्य
1 बच्चे को मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना:– बच्चे को मुख्यधारा से अलग किए बिना उसके आंतरिक शक्तियों को बढ़ाना ही ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए जिससे बच्चे अपनी क्षमताओं को अधिक प्रभावी बना सकें और अपने आप में आत्मनिर्भर बन सकें
2 अपनी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना:- हमें बच्चों को अपनी शक्ति का अधिक से अधिक उपयोग करना सिखाना चाहिए क्योंकि जब हम किसी कार्य को करने की क्षमता रखते हैं और उसे बार-बार करते हैं तो वह कार्य हमारे लिए सरल हो जाता है और हम उस कार्य को भूलते नहीं हैं तथा हम उस कार्य में योग्य एवं निपुण हो जाते हैं
3 बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना:- बच्चों के विकास के लिए हमें उनके अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए जिससे बच्चे उस अनुकूल वातावरण में अच्छे से सीख सकें एवं अधिगम कर सकें बच्चों के अनुकूल वातावरण में वे जल्दी सीखते हैं एवं जो कार्य कर रहे हैं वह कार उनको सरल लगता है
4 बच्चों के दैनिक जीवन के अनुरूप कौशल विकसित करना कौशल विकसित करना:- बच्चों को दैनिक जीवन से जोड़कर हमें उन में में विभिन्न कौशलों का विकास करना चाहिए
5 बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उचित समायोजन :- बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह समाज में रहकर सब कुछ सीखता है एवं समाज के विभिन्न नियमों का पालन करता है हमें समाज में समायोजन करना चाहिए
6 समाज का बालकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार का विकास :– समाज का बालकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए क्योंकि बालक ही आने वाले वाले समय के भविष्य हैं संवेदनशील व्यवहार से वह अपने आप को वह अपने आप को समाज में समायोजन कर सकते हैं बच्चे अनुकरण के माध्यम से ही सीखते हैं वह अपने बड़ों को जैसे देखते देखते हैं वैसा करते हैं
7 सीखने की प्रकृति का विकास:- बच्चों में सीखने के प्रति विकास करना चाहिए उन्हें नए नए कार्य का अनुभव देना नए कार्य का अनुभव देना कार्य का अनुभव देना चाहिए
8 नवजीवन का संचार:- बच्चों में नवजीवन का संचार करना चाहिए नवजीवन के संचार से बच्चे किसी भी कार्य को स्वभाविक रूप से करते हैं एवं कार्य को अच्छी तरह से अच्छी तरह से को अच्छी तरह से करते हैं
9 उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का वहन:- बच्चों को समाज में उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का वहन करना चाहिए करना चाहिए
10 स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना:- बच्चों को स्वयं में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए जो उनके जीवन में काम आए और उन्हें आगे व्यवसाय के लिए तैयार करें जिससे वे स्वयं में आत्मनिर्भर बन सके एवं अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकें
समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय
समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय निम्न प्रकार हैं प्रकार हैं
1 वंचित वर्ग के लिए:- भी बच्चे जो शारीरिक रूप से एवं मानसिक रूप से वंचित हैं उनको मुख्यधारा में लाना में लाना
1 शारीरिक रूप से वंचित:- चलने में परेशानी होना
दिखाई ना देना सुनाई ना देना आदि आते हैं
2 मानसिक रूप से दुर्बलता:- मानसिक रूप से दुर्बलता में भी व्यक्ति आते हैं जो किसी कार्य को को सही तरीके से नहीं कर पाते जैसे यदि वह किसी विषय में अच्छे से जानता तो है परंतु वह उस विषय को दूसरों के सामने उस तरीके तरीके से व्यक्त करने में असमर्थ होता है
3 बाल मजदूरी:- ऐसे बच्चे जो फुटपाथ पर रहते हैं और अपना गुजारा करने के लिए मजदूरी करते हैं हमें उनको इस मुख्यधारा में लाना है जैसे नुक्कड़ के बालक खेल दिखा कर अपना जीवन यापन करते हैं।
4 स्त्री पुरुष विभेद विभेद:- हमारे समाज में तथा समावेशी शिक्षा को अपनाकर इन्हें मुख्यधारा में जोड़ना में जोड़ना चाहिए
।। ।। ।।।।।। समाप्त ।।।।।।।।।।।


Notes by – Ranjana sen

🔆 समावेशी शिक्षा के उद्देश्य 🔆
किसी भी कार्य को करने के लिए हमें उद्देश्य बनाना चाहिए किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम पद –
▪ उद्देश्य का निर्धारण करना
▪ उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन करना
समेकित शिक्षा के उद्देश्य –
(एकीकृत integrated)
सभी को एक साथ मिलाकर समान शिक्षा देना -:

  1. बच्चे को शिक्षा की मुख्य धारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना
  2. उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना किसी भी कार्य को करते हैं तो हमें शक्ति की आवश्यकता होती है शक्ति का उपयोग करेंगे तो कार्य करने के योग्य होंगे.
  3. बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना एक ऐसा वातावरण देना कि बच्चा शक्ति की क्षमता का उपयोग करता है जो बच्चे के अनुकूल है ताकि बच्चे सीख सकें.
  4. बच्चों ने दैनिक जीवन के अनुसार कौशल विकसित करना- बच्चों में दिनचर्या के अनुसार कौशल विकसित करना अलग अलग तरह से बच्चे सीखते हैं.
  5. बच्चों में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उचित समायोजन- जिस समाज में हम रहते हैं तो सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है तो वह समाज में नहीं रखा जाएगा के कारण सकारात्मक दृष्टिकोण अच्छा होना जरूरी होगा तो समाज मे समायोजन भी करेगा जिससे व्यक्ति की अच्छी सोच और वह अच्छा करें |
  6. समाज का बालकों के प्रति संवेदनशील का विकास – जिस समाज या सोसाइटी में हम रहते हैं समाज को भी बच्चों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए जिससे समायोजन होगा तो बच्चे खुद को बेहतर समझेगा सभी बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें |
  7. सीखने की प्रकृति का विकास – बच्चे एक दूसरे के प्रति होना आवश्यक है और बच्चे में खुद प्रकृति होगी सीखने और कोई कार्य करने की तो उसका विकास होगा |
  8. बच्चों में नवजीवन का संचार करना – जब बच्चा गुरूकुल जाता था तो उसे उसको तैयार किया जाता था उसे बच्चे में नया जीवन आता था कि प्रकृति में आने के लिए नवजीवन का होना अनिवार्य है जिससे बच्चा का विकास होगा |
  9. उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का वहन- व्यक्ति अपने आप में उत्तम होता है उसे कर्तव्य का पालन करना चाहिए जिससे उत्तम नागरिक कहलाएगा |
  10. बच्चे को स्वाबलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना – अलग-अलग शिक्षा देना स्वावलंबी बनाने के लिए वेबसाइट जानकारी देना बच्चे की आत्मनिर्भर बनाना |
    समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय –
    विकलांग बच्चे विशेष शिक्षा की आवश्यकता वाले विद्यार्थी बच्चों की बौद्धिक विकलांगता |
    वंचित वर्ग के लिए – शारीरिक रूप से विकलांग : विकलांग बच्चे आंख कान हाथ पैर से विकलांग होते हैं
    मानसिक रूप से वंचित बच्चे इसमें डिस्लेक्सिया डिसग्राफिया से संबंधित बच्चे आते हैं |
    बाल श्रम बाल मजदूरी वंचित वर्ग –
    जो बच्चे बाल मजदूरी करते हैं वह शिक्षा से वंचित रह जाते हैं जैसे नुक्कड़ नाटक
    स्त्री- पुरुष विभेद , जाति रंग इसमें बच्चे अन्तर नही कर पाते जिससे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं
    समूह कारक विभेद के कारण से वंचित बच्चे – समाज कई कारणों अर्थात जिसकी संख्या अधिक है उसे प्राथमिकता दी जाती है जो किसी कारण से इसकी संख्या कम है वे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं
    समावेशी शिक्षा सभी बच्चों की मदद करने के लिए आवश्यक है

By Vandana Shukla


🌸 समेकित शिक्षा के उद्देश्य 🌸

किसी भी कार्य की सफलता के लिए जो सर्वप्रथम पद आता है वह है -:
1️⃣ उद्देश्य का निर्धारण – उद्देश्य का निर्धारण कि हमको क्या करना है।
सबसे पहले हम एक रूपरेखा बनाते हैं । और उस रूपरेखा के अनुसार अपने कार्य को आगे बढ़ाते हैं ।

2️⃣उद्देश्य में समय के अनुसार परिवर्तन – कई बार अलग-अलग कारण से या समय के अनुसार उद्देश्य में परिवर्तन करते हैं।

जब समेकित शिक्षा का विकास हुआ तो उसका कुछ उद्देश्य था क्योंकि बिना उद्देश्य के नियम या नीति बनाना असंभव है।

☘️ उद्देश्य ☘️
1️⃣ बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को बढ़ाना -:
जैसे समेकित शिक्षा कहता है कि अगर बालक मुक बधीर है तो उसी के हिसाब से पढ़ाओ लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उस बालक को मुख्यधारा से अलग कर दें और यह भी मतलब नहीं है कि आप उसे सामान्य बालक के साथ शिक्षा दें चाहे बालक को कुछ समझ आए या ना आए।
अगर एक साथ बैठा दिया तो वह समावेशी शिक्षा हो जाएगी समेकित शिक्षा नहीं होगी ।
जैसा जरूरी है वैसा एजुकेशन देना । इसमें हम बच्चे की अक्षमता को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

2️⃣ उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना-:
हमारे अंदर क्षमता एक ही होती है, पर कभी हम किसी एक सिचुएशन में बहुत अच्छा करते हैं और किसी दूसरी सिचुएशन में अच्छा नहीं कर पाते हैं । क्षमता एक ही है पर आप क्षमता का (अपनी शक्ति )का कितना उपयोग कर रहे हैं यह जानना बहुत जरूरी है। जितना आपके अंदर क्षमता जरूरी है उतनी ही जरूरी है या उससे ज्यादा जरूरी शक्ति का उपयोग करना है।

कई बार आप किसी काम को करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देते हैं फिर आपको पता चलता है कि अरे मेरे अंदर इतनी पावर थी कि मैं यह काम कर सकता हूं, तो इसीलिए जब आप अपने पूरी शक्ति लगा देंगे तब तो पता चलेगा कि आप कहां तक कर सकते हैं अगर शक्ति नहीं लगाएंगे तो कैसे पता चलेगा कि आप के अंदर कितनी शक्ति है। इसलिए सिचुएशन के आधार पर अपनी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करनी है।

3️⃣ बालक के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना -:
एक ऐसा वातावरण का निर्माण करना या देना जिससे जो बच्चा अपनी अधिकतम क्षमता का उपयोग कर रहा है उसमें उसको सहायता मिले उस वातावरण से अपने आप को कनेक्ट करें और ज्ञान ग्रहण कर सके , सीख सके यह वातावरण बालक के अनुकूल होना चाहिए।

4️⃣ बच्चों में दैनिक जीवन की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकसित करना -:
हर बच्चे की skills अलग-अलग होती है, सब बालकों की दिनचर्या अलग अलग होती है, सब की चीजों के प्रति सोच, नजरिया भी भिन्न भिन्न होता है जीवन का उद्देश्य भी भिन्न होता है, सबका
अस्तित्व भी अलग अलग होता है, सब बालकों की अपनी अलग-अलग कुशलता होती है।
बालकों की जो अपनी दिनचर्या है उसके हिसाब से कौशल विकसित करना यह महत्वपूर्ण है जो उसके जीवन यापन के लिए आवश्यक है।

5️⃣ बच्चों के समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उचित समायोजन विकसित करना-:

मनुष्य एक समाज में रहता है उस समाज के प्रति अगर हमारा सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं होगा तो हम सही से सामाजिक अंतर क्रिया नहीं कर पाएंगे इसलिए हमें समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करनी चाहिए लेकिन सिर्फ सोच ही रखने से कुछ नहीं होगा उसे फॉलो करना होगा तब जाकर वह उचित समरूप में समायोजित होगा ।हमें अच्छा सोचना भी चाहिए और करना भी चाहिए ।अच्छा सोचना हमारा दृष्टिकोण है और अच्छा करना हमारा समायोजन।

6️⃣ समाज का बालकों के प्रति संवेदनशीलता का विकास -:
समाज को भी बच्चों के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है और संवेदनशीलता से ही बालक अपने आप को बेहतर से समझ सकेंगे।वह ये सोचेंगे कि उनको स्वीकारा जा रहा है और उनके अंदर से पॉजिटिविटी आएगी।

7️⃣ सीखने की प्रकृति का विकास -:
सभी बालक की अलग-अलग प्रकृति होती है । कुछ की प्रकृति सीखने वाली होती है और अगर सीखने वाली है तो वह सीखेंगे और कुछ विधि सीखने वाली नहीं होती तो उनको कितना भी सिखाया जाए वह नहीं सीख पाएगा । तो इस सीखने की प्रकृति का विकास करना है। हमारी सोच में लाना चाहिए कि हमें सीखना है और प्रकृति का विकास करना चाहिए ।

8️⃣बच्चों में नवजीवन का संचार -:
किसी भी चीज को प्रकृति में आने के लिए नवाचार की जरूरत है नए जीवन की जरूरत है । शुरू – शुरू में बच्चे का कोई बेसिक नेचर नहीं रहता लेकिन जैसे-जैसे वह सीखता है वैसे वैसे नेचर डिवेलप होता है ।नवजीवन नया जीवन कुछ सीखता जाता है। बच्चों में नया जीवन का संचार होता है और यह संसार होना जरूरी भी है।

9️⃣ उत्तम नागरिक होने के कर्तव्य का वहन -:
हमारे पुरे जीवन में एक सही इंसान ,एक सही नागरिक होने के कर्तव्य का गठन करना भी समेकित शिक्षा का एक भाग है, जो हमें बच्चे को बताना चाहिए। कोई भी उत्तम नहीं है सब में इंप्रूवमेंट करने की आवश्यकता है। तो समय के हिसाब से उस समय में जो उत्तम हो उसके हिसाब से कर्तव्यों का वहन करना चाहिए।

🔟 बच्चे को स्वावलंबी बनाने के लिए व्यवसायिक शिक्षा देना-:

बच्चे को व्यवसायिक शिक्षा देना जिससे वह अपने भविष्य के लिए व्यवसाय का चयन कर उसमें आगे की ओर बढ़े और स्वावलंबी बने । हम बालक का मार्ग अभी से प्रशस्त करें ताकि वह अपने भविष्य का चुनाव अभी से कर सके और अपने लक्ष्य का निर्माण कर सकें।

☘️ समावेशी शिक्षा का मुख्य विषय

वैसे तो सभी के लिए है लेकिन वो बालक जो किसी भी रूप से वंचित है (कुछ ना कुछ कमी है)। कुछ ना कुछ कमी रहने से वंचित रह गए तो उस वंचित वर्ग के लिए ही समावेशी शिक्षा है ।
शरीरिक रूप से ,मानसिक रूप से, अपॉर्चुनिटी से वंचित।

1️⃣ शारीरिक रूप से विकलांग -: जैसे आंख, कान, स्वर, हाथ से ,पैर से, नाक से विकलांग आदि । इन सभी के कारण आप सामान्य बालक की तरह शिक्षा को प्राप्त करने में असमर्थ हैं या वंचित रह जाते हैं, या सामान्य बालक की भांति आप कार्य नहीं कर पाते हैं ।

2️⃣मानसिक -: इसमें सभी प्रकार की लर्निंग डिसेबिलिटी आती है जैसे कि डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया, ए डी एच डी ,आदि।

3️⃣बाल मजदूर -: जो बालक आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं उन्हें काम करके अपने घर का भरण पोषण करना पड़ता है ,यह बालक कई प्रकार के कार्य करते हैं जैसे नुक्कड़ करते हैं होटलों में छोटे-मोटे कार्य करते हैं किराना की दुकानों पर छोटे मोटे कार्य करते हैं यह भी सामान्य बालक की तरह शिक्षा की मुख्यधारा में नहीं जुड़ पाते ।

4️⃣स्त्रि -पूरूष विभेद -: यह हमारे भारत में बहुत बड़े स्तर में फैला है, और यह लैंगिक असमानता आज की नहीं है यह बहुत पुराने समय से चली आ रही है इसे खत्म करने के प्रयास जारी है पर यह पूर्णता खत्म नहीं हुआ है ।

5️⃣जाति रंग -: आज भी हमारे समाज में जाति और रंग का बहुत बड़ा प्रभाव है आज भी लोग जातियों को मानते हैं। गोरे वर्ण के लोगों से बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते हैं ।

6️⃣समूह कारक -: लोग अपने आप को समूह में बांट लेते हैं जैसे अमीर ,गरीब और इसके आधार पर विभेद करते हैं।

धन्यवाद


🔅समेकित शिक्षा के उद्देश्य🔅

किसी भी कार्य की सफलता के लिए सर्वप्रथम पद निम्न हैं:-
🔹 उद्देश्य का निर्धारण।
🔹उद्देश्य के समय के अनुसार परिवर्तन।

◻️बच्चों को मुख्य धारा से अलग किए बिना उसकी आंतरिक क्षमता को
बढ़ा वा देना।

◻️उनकी शक्ति का अधिकतम उपयोग करने की योग्यता विकसित करना:- बच्चों की शक्ति का अधिकतम उपयोग करने के लिए उन्हें प्रेरित करना चाहिए जिससे वे अधिगम करने में अपनी शक्ति का अधिक से अधिक उपयोग करें

◻️ बच्चों के विकास के लिए सहायक वातावरण उपलब्ध कराना :- बच्चों को उनके अनुसार वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए ताकि बालक आसानी से अधिगम कर सकें।

◻️ बच्चों में देनिक जीवन के अनुसार कौशल विकसित करना।:- शिक्षा को बच्चों के देनिक जीवन से जुड़ के पढ़ाने से बालक सही वा असाना तरीके से अधिगम कर सकता है जो स्थिर अधिगम होगा।

◻️ बच्चे में समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण/उचित समायोजन:- बच्चे को समाज की महत्ता को समझना चाहिए जिससे बालक अधिगम करने में सक्रीय हो सके।

◻️समाज का बच्चों के प्रति संवेदशीलता का विकास:- समाज को बच्चों के साथ समायोजन करने के लिए उनके साथ संवेदनशील होना होगा बालक समाज को अपना सहायक समझेगा जिससे उसमे समाज को लेकर कोई हिचकिचाहट नहीं होगी, वह अपने विचार या किसी कमी को आसानी से समाज के साथ साझा कर सकेगा।

◻️ सीखने की प्रवृति का विकास:- बालक को सीखने की प्रवृति का होना चाहिए उसमें किसी काम को करने का उत्साह होना चाहिए एक बार असफल होने पर बालक को ये नहीं सोचना चाहिए कि अब उससे नहीं होगा बल्कि उसे सीखते रहना चाहिए बार बार किसी काम को करने से हम उस कार्य ने निपुण हो सकते हैं।

◻️बच्चों में नवजीवन का संचार करना चाहिए:- हमे बालक में नवजीवन का संचार करना चाहिए जिससे बालक नए नए कार्यों को करने से वह उस वातावरण में खुद को समायोजित कर सके।

◻️उत्तम नागरिक होने के कर्तव्यों का वहन:- देश में बालक की स्तिथि और आगे देश के लिए बालक की आवश्यकता क्या है? उसे समझाना चाहिए ताकि बालक कभी देश के विरूद्ध ऐसा कोई काम न करे जिससे देश के मान मर्यादा को ठेस पहुंचे।

◻️ स्वावलंबी बनाने के लिए व्यहारिक शिक्षा देना:- खुद के कामों को खुद करना सिखाना चाहिए ये सभी हम बालक को व्यावहारिक शिक्षा से प्रदान कर सकते हैं।

🌟समावेशी शिक्षा के मुख्य विषय🌟
1️⃣ वंचित वर्ग के लिए चाहे वह शारीरिक रूप में हो या मानसिक रूप में
2️⃣बाल मजदूरी के रूप में वंचित बालक।
3️⃣
नुक्कड़ नाटक करने वाले बालक भी वंचित बालक ने आते हैं।
4️⃣स्त्री पुरुष विभेद
5️⃣ जाति रंग समुहकारक
ये सभी वंचित बालक की श्रेणी में आते हैं इनके लिए समावेशी शिक्षा का उपयोग बहुत आवश्यक हैं। Raziya khan🖊️🖊️

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