🌼☘️ कर्ट लेविन  के सिद्धांत की कमियां☘️🌼

🔸गणित के शब्दों की बात की➖ क्षेत्रफल ,जीवन विस्तार ,तलरूप, शक्ति ,संतुलन वास्तव में इन शब्दों को समझना बहुत कठिन है।

🔸 यह सीखने के सिद्धांत के रूप में विकसित नहीं हुआ है अभिप्रेरणा प्रत्यक्षीकरण की बात की गई है, हालांकि लेविन अपने सिद्धांतों का उपयोग सीखने की  परिस्थिति में करना चाहता है।

🔸वातावरण की शक्ति मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती है क्या व्यक्ति की आंतरिक इच्छाएं आवश्यकता यह उनके व्यवहार को प्रभावित नहीं करती ? बल्कि करती है‌

🔸वास्तव में यह सिद्धांत अधिगम का सिद्धांत नहीं बल्कि मानवीय अभिप्रेरणा के अध्ययन से संबंधित है।

🔸अनुभव से ज्यादा व्यवहार पर बल देता है।

☘️🌼 कर्ट लेविन के सिद्धांत की शैक्षणिक उपादेयता🌼☘️

1-व्यक्तित्व का अध्ययन, सामाजिक ,मनोविज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

2-सीखना जीवन को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर सीखने की प्रक्रिया है।

3-शिक्षण का विशेष महत्व है शिक्षक को चाहिए कि सीखने के लिए उचित वातावरण प्रस्तुत करें।

4-इस सिद्धांत के अनुसार–शिक्षक को प्रभावकारी ढंग से उसके बाद वातावरण उसकी रुचि,  रुचि ,दृष्टिकोण, सीमा ,क्षमता को समझना चाहिए।

5-शिक्षक को ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे कि छात्र के प्रत्यक्षीकरण का क्षेत्र विस्तृत हो।

6-शिक्षण प्रक्रिया के पूर्व बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षक को जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए हर संभव प्रयास होना चाहिए कि छात्र हताश, कुंठा, निराशा ,तनाव से दूर रहे नहीं तो छात्र से अच्छे अधिगम की उम्मीद बेकार है।

7-अभिप्रेरणा अधिगम की अनिवार्य शर्त है जितना अच्छा अभिप्रेरणा उतना अच्छा सीखना। 

8-कक्षा का वातावरण सीखने को प्रभावित करता है उसमें छात्र का भौतिक वातावरण भी महत्वपूर्ण है जिसमें प्रकाश, वायु ,सुगंध सभी शामिल है।

9-यह सिद्धांत रखने का विरोध करता है क्योंकि अंतर्दृष्टि पर बल देता है मस्तिष्क में जबरदस्ती ज्ञान डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए शिक्षण विधि को सुग्राहय बनाना चाहिए।

10- यह सिद्धांत व्यक्ति को महत्व देता है बच्चे की आवश्यकता, क्षमता ,कमी ,वातावरण, उद्देश्य इन सब से परिचित होना जरूरी है।

11- यह सिद्धांत अवरोध को स्वीकार करता है बच्चा शॉर्टकट अपनाना चाहता है व्यक्ति को उचित क्षेत्र में रखने के लिए सशक्त अवरोध की आवश्यकता है।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

कर्ट लेविन का सिद्धांत जोकि संज्ञान वादी है और यह सूज बुझ, ज्ञान व गणितीय गणना की बात करता है।

❇️ कर्ट लेविन के सिद्धांत की कमियां ➖

📍1 इस सिद्धांत के अंतर्गत कई शब्द जैसे क्षेत्रफल, जीवन विस्तार , तलरूप ,शक्ति और संतुलन की बात की गई है।

लेकिन वास्तव में इन शब्दों को समझना बहुत कठिन है।

इन्होंने इस प्रकार यह शब्द प्रयोग किए हैं उन शब्दों का अधिगम सिद्धांत में कोई आवश्यकता नहीं थी अर्थात यह सिद्धांत को बिना किसी आवश्यकता है जरूरत के जटिल बना दिया गया है।

📍2 यह सिद्धांत सीखने के सिद्धांत की तरह विकसित नहीं हुआ

इस सिद्धांत में अभिप्रेरणा (धनात्मक ऋणात्मक  शक्ति) व प्रत्यक्षीकरण पर अधिक जोर दिया गया।

हालांकि लेविन अपने सिद्धांत का उपयोग सीखने की परिस्थिति में ही करना चाहते थे।

📍3 वातावरण की शक्ति मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती है और यह मत  लेविन के द्वारा कहा गया।

क्या व्यक्ति कि जो  आंतरिक इच्छाएं व आवश्यकता है  उनके व्यवहार को प्रभावित नहीं करती?

 बल्कि ऐसा नहीं है आंतरिक इच्छाएं और आवश्यकता है व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।

📍4 वातावरण में यह सिद्धांत अधिगम का सिद्धांत नहीं बल्कि यह मानवीय अभिप्रेरणा के अध्ययन से संबंधित है।

📍5 यह अनुभव से ज्यादा व्यवहार पर बल देता है।

 जिसमें अनुभव में:- मुख्यता अधिगम पर जोर दिया जाता है जबकि व्यवहार में:- मुख्यतः प्रेरणा पर जोर दिया जाता है।

❇️ कर्ट लेविन के सिद्धांत की शैक्षिक उपादेयता या उपयोगिता या महत्वता➖

✨1 यह सिद्धांत व्यक्तित्व का अध्ययन करने से सामाजिक मनोवैज्ञानिक की दृष्टि से इस सिद्धांत का महत्व बढ़ गया है।

अर्थात इस सिद्धांत में व्यक्तित्व का अध्ययन किया गया है जो कि सामाजिक मनोवैज्ञानिक की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

✨2 सीखना जीवन क्षेत्र के छोटे-छोटे क्षेत्र में बांटकर सीखने की प्रक्रिया है।

✨3 शिक्षण का विशेष महत्व शिक्षक को चाहिए कि वह सीखने के लिए  बच्चों के समकक्ष तूउचित वातावरण प्रस्तुत करें

✨4 इस सिद्धांत के अनुसार शिक्षक को प्रभावकारी  ढंग से बच्चे के वातावरण, उनकी आवश्यकता ,रुचि दृष्टिकोण ,सीमा, क्षमता को समझना चाहिए।

✨5 शिक्षक को ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि छात्रों के प्रत्यक्षीकरण का क्षेत्र विस्तृत हो 

 प्रत्यक्षीकरण से तात्पर्य जीवन को देखने का जो नजरिया है या दृष्टिकोण है उसे विस्तृत करने से है।

जिसके परिणाम स्वरुप छात्रों की जीवन लंबा चौड़ा हो जाए अर्थात किसी भी चीज या बात के लिए उसके प्रत्येक पहलू को देखा जाए या किसी भी विषय की गहरी समझ हो जाए।

✨6 बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य जिसको हम सिखाना चाहते हैं उसका मानसिक स्वास्थ्य जालना भी बहुत आवश्यक है यदि बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य नहीं जाना गया तो बच्चे के बेहतर करने की कल्पना ही नहीं की जा सकती।

अर्थात बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षक को जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए और हर संभव प्रयास होना चाहिए कि छात्र निराशा, हताशा ,कुंठा निराशा ,तनाव से दूर रहे।

अन्यथा छात्र से अच्छे की उम्मीद बेकार है।

✨7 अभिप्रेरणा अधिगम की अनिवार्य शर्त है।

जितनी अच्छी अभिप्रेरणा होगी उतना अच्छा अधिगम होगा तथा साथ ही साथ छात्र में किसी भी चीज को सीखने का उत्साह ध्यान व रुचि उतनी ही अच्छी होगी।

मात्र आवश्यकता है किसी चीज को सीखने के लिए अभिप्रेरणा नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ कुछ और ध्यान और रुचि भी है जिससे हम अधिगम को पाना चाहते हैं या अपनी आवश्यकता की पूर्ति करना चाहते हैं।

आवश्यकता के साथ-साथ अवरोधक भी एक अभिप्रेरणा का कार्य करता है जब भी हमारे अधिगम के बीच में कुछ अवरोध यह रुकावट है या परेशानी आ जाती हैं तो इन अवरोधों को पार करने के लिए हम अभी प्रेरित रहते हैं अर्थात अवरोध अभिप्रेरणा के रूप में कार्य करता है जिससे हम अधिगम को प्राप्त कर लेते हैं।

✨8 कक्षा का वातावरण या माहौल भी सीखने को प्रभावित करता है इसमें कक्षा का भौतिक वातावरण भी महत्वपूर्ण है।

भौतिक वातावरण जैसे प्रकाश, वायु ,सुगंध बैठने की उचित व्यवस्था, ध्यान भंग करने वाली चीजें इत्यादि महत्वपूर्ण होती हैं।

✨9 मनोवैज्ञानिक वातावरण भी महत्वपूर्ण है मनोवैज्ञानिक वातावरण जैसे स्नेह ,सहयोग इत्यादि।

✨10 यह सिद्धांत रटने का विरोध करता है क्योंकि यह अंतर्दृष्टि पर बल देता है।

किसी भी प्रकार का ज्ञान मस्तिष्क में जबरदस्ती  डालने की कोशिश नहीं करना चाहिए तथा शिक्षक को शिक्षण विधि को सुग्राह्य या आसानी से समझने योग्य या सरलता या प्रभावी बनाना चाहिए।

✨11 यह सिद्धांत व्यक्ति को महत्व देता है।

यह बच्चे की स्व आवश्यकता, स्व इच्छा ,स्व क्षमता  स्व कमी, स्व वातावरण, स्व उद्देश्य  इन सब से परिचित होना जरूरी है।

यदि बच्चा इन सभी चीजों से स्वयं परिचित होगा जिससे वह यह समझ पाएगा कि उसमें क्या कमी है या किस की आवश्यकता है और क्या सुधार किया जाना चाहिए जिससे वह वृद्धि या सही तरीके से अधिगम कर पाए।

✨12 यह सिद्धांत अवरोध को स्वीकार करता है।

लेविन के अनुसार व्यक्ति लक्ष्य तक पहुंचने के लिए छोटे से छोटा रास्ता अपनाना चाहता है जिससे वह अपने लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचने की कोशिश करता है।

यदि हम छोटे छोटे रास्ते या जल्दबाजी की वजह से लक्ष्य तक पहुंच भी गए तो हम कभी भी अपने लक्ष्य के हिसाब से कुछ भी बेहतर नहीं कर पाएंगे।

हर व्यक्ति को उचित क्षेत्र में रखने के लिए सशक्त अवरोध की भी आवश्यकता है।

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    Notes By-‘Vaishali Mishra’

कर्ट लेविन के सिद्धांत की कमियां

1. लेविन ने गणित के शब्द की बात की जैसे क्षेत्रफल, जीवन विस्तार, तलरूप ,शक्ति ,संतुलन

वास्तव में इन शब्दों को समझना बहुत कठिन है।

2. यह सीखने के सिद्धांत के रूप में विकसित नहीं हुआ।

इसमें अभिप्रेरणा ,प्रत्यक्षीकरण की बात की गई।

हालांकि लेविन अपने सिद्धांत का उपयोग सीखने की परिस्थिति में करना चाहते हैं।

3. वातावरण की शक्ति मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं। – लेविन के अनुसार

क्या व्यक्ति की आंतरिक इच्छाऐ ,आवश्यकता   उसके व्यवहार को प्रभावित नहीं करती हैं?

बिल्कुल करती हैं।

4. वास्तव में यह सिद्धांत अधिगम का सिद्धांत नहीं है बल्कि मानवीय अभिप्रेरणा के अध्ययन से संबंधित है।

5. यह  अनुभव से ज्यादा व्यवहार पर बल देता है।

कर्ट लेविन के क्षेत्र सिद्धांत की शैक्षिक उपादेयता

1. व्यक्तित्व का अध्ययन, सामाजिक मनोविज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

2. सीखना जीवन क्षेत्र को छोटे-छोटे क्षेत्र में बांटकर सीखने की प्रक्रिया है।

3. शिक्षण का विशेष महत्व है शिक्षक को चाहिए कि सीखने के लिए उचित वातावरण प्रस्तुत करें।

4. इस सिद्धांत के अनुसार शिक्षक को प्रभावकारी ढंग से उसके  ( बालक के) वातावरण, उसकी आवश्यकता ,रुचि, दृष्टिकोण ,सीमा, क्षमता को समझना चाहिए।

5. शिक्षक को ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि छात्रों के प्रत्यक्षीकरण का क्षेत्र विस्तृत हो। जिससे जीवन लंबा चौड़ा हो जाए।

6. बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षक को जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

 जिससे हर संभव प्रयास होगा कि छात्र हताशा, निराशा, तनाव से दूर रहे।

7. अभिप्रेरणा, अधिगम की अनिवार्य शर्त हैं।

जितना अच्छी अभिप्रेरणा होगी उतना ही अच्छा सीखना होगा।

अभिप्रेरणा  से छात्र के सीखने में उत्साह होगा, उसका ध्यान ,रुचि आदि होगा।

8. कक्षा का वातावरण सीखने को प्रभावित करता है इसमें कक्षा का भौतिक वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है भौतिक वातावरण में उपयुक्त प्रकाश ,अच्छी वायु, सुगंधित वातावरण, बैठने की उचित व्यवस्था , अच्छा श्यामपट्ट आदि आते हैं।

मनोवैज्ञानिक वातावरण में सहयोग ,स्नेह आदि आते हैं।

9. रटने का विरोध करता है क्योंकि अंतर्दृष्टि पर बल देता है 

मस्तिष्क में जबरदस्ती ज्ञान डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

शिक्षण विधि को सुग्राही ( जिसे आसानी से ग्रहण किया जा सके) बनाना चाहिए।

10.  यह सिद्धांत व्यक्ति को महत्व देता है

इससे व्यक्ति की  स्वआवश्यकता,स्वक्षमता,स्वकमी, स्व वातावरण,स्व उद्देश्य इन सब से परिचित होना जरूरी है।

11. अवरोध को स्वीकार करता है अर्थात यदि बच्चा शॉर्टकट अपनाना चाहता है अर्थात परीक्षा में नकल करता है तो उसे उपयुक्त या वांछनीय या जरूरी दंड या अवरोध दिया जाता है।

व्यक्ति को उचित क्षेत्र में रखने के लिए सशक्त अवरोध की आवश्यकता होती है।

Notes by Ravi kushwah

*कर्ट लेविन के सिद्धांत की कमियां*

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1. कर्ट लेविन ने गणित के शब्द की बात की जैसे क्षेत्रफल, जीवन विस्तार, तल रूप, शक्ति, संतुलन आदि।

          वास्तव में इन शब्दों को समझना बहुत कठिन है।

2. यह सीखने के सिद्धांत के रूप में विकसित नहीं हुआ बल्कि इसमें अभिप्रेरणा, प्रत्यक्षीकरण की बात की गई है।

             हालांकि लेविन अपने सिद्धांत का उपयोग सीखने की परिस्थिति में करना चाहते हैं।

3.  लेविन कहते हैं कि वातावरण की शक्ति मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती है।

क्या व्यक्ति की आंतरिक इच्छाएं, आवश्यकताएं उनके व्यवहार को प्रभावित नहीं करती है?

बिल्कुल करती है।

4. वास्तव में यह सिद्धांत अधिगम का सिद्धांत नहीं बल्कि मानवीय अभिप्रेरणा के अध्ययन से संबंधित है।

5. यह सिद्धांत अनुभव (अधिगम) से ज्यादा व्यवहार(अभिप्रेरणा) पर बल देता है।

*कर्ट लेविन के सिद्धांत की शैक्षिक उपादेयता*

💫💫💫💫💫💫💫💫💫

1. व्यक्तित्व का अध्ययन, सामाजिक मनोविज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है

2. सीखना, जीवन क्षेत्र को छोटे-छोटे क्षेत्र में  बाटकर सीखने की प्रक्रिया है।

3. शिक्षण का विशेष महत्व है, शिक्षक को चाहिए कि सीखने के लिए उचित वातावरण प्रस्तुत करें।

4. इस सिद्धांत के अनुसार,

 शिक्षक को प्रभावकारी ढंग से उसके वातावरण, उसकी आवश्यकता, रूचि, दृष्टिकोण, सीमा, क्षमता को समझना चाहिए।

5. शिक्षक को ऐसे प्रयास करना चाहिए जिसमें कि छात्रों के प्रत्यक्षीकरण का क्षेत्र विस्तृत हो। जिससे जीवन लंबा चौड़ा हो जाए।

6. बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षक को जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। हर संभव प्रयास होना चाहिए कि छात्र हताशा, कुंठा, निराशा, तनाव से दूर रहे नहीं तो छात्र से अच्छे अधिगम की उम्मीद करना बेकार है।

7. अभिप्रेरणा अधिगम की अनिवार्य शर्त है। जितना अच्छा अभिप्रेरणा (छात्र के सीखने में उत्साह, ध्यान, रूचि इत्यादि)  होगा उतना अच्छा सीखना।

8. कक्षा का वातावरण सीखने को प्रभावित करता है। इसमें कक्षा का भौतिक वातावरण भी महत्वपूर्ण है। जैसे प्रकाश, वायु , बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था इत्यादि।

        मनोवैज्ञानिक वातावरण में सहयोग, स्नेह आदि आते हैं।

9. यह सिद्धांत रटने का विरोध करता है क्योंकि अंतर्दृष्टि पर बल देता है।

मस्तिष्क में जबरदस्ती ज्ञान डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि शिक्षण विधि का प्रयोग करके अधिगम को सुग्राह्य बनाया जाए।

10. यह सिद्धांत व्यक्तित्व को महत्व देता है। बच्चे को स्व -आवश्यकता, स्व- क्षमता, स्व -कमी , स्व- वातावरण, स्व- उद्देश्य आदि सब से परिचित होना जरूरी है।

11. यह सिद्धांत अवरोध को स्वीकार करता है। इसके अनुसार बच्चा शॉर्टकट अपनाना चाहता है। जैसे- परीक्षा में नकल करना। ऐसे में बच्चे को दंड (अवरोध) देना आवश्यक है।

अर्थात व्यक्ति को उचित क्षेत्र में रखने के लिए सशक्त अवरोध की आवश्यकता होती हैं।

*Notes by Shreya Rai* ……. ✍️🙏

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