🔆 समाजीकरण की एजेंसियां:-

                                              निम्नानुसार हैं।

1 परिवार

2 विद्यालय

3 सहकर्मी समूह

4 संचार मीडिया

उपर्युक्त चारों एजेंसियों का वर्णन निम्न प्रकार है।

❇️एजेंसी 1.परिवार:-

▪️हर बच्चा एक परिवार में पैदा होता है। अर्थात बच्चे की पहली दुनिया परिवार है। घर या परिवार पहली सामाजिक एजेंसी है जिसके साथ बच्चा संपर्क में आता है। परिवार के अन्य सदस्यों, माता-पिता, भाई-बहन और अन्य लोगों के साथ बातचीत, बच्चे के व्यक्तित्व और उसके सामाजिक व्यवहार पर एक स्थायी प्रभाव डालती है।

▪️बच्चों की सामान्य या आधारिय आदतों में परिवार के माता पिता की भूमिका रहती है वह लैगिक भूमिका  जो भी अंतर या भेदभाव है उसको समझते हुए बच्चे की मार्गदर्शन में सहयोग करते हैं और मूल्यों को सिखाते हैं जो बच्चे के जीवन भर साथ चलते हैं।

▪️परिवार में हम व्यक्तिगत ,भावनात्मक और अनौपचारिकता सीखते हैं।

❇️ एजेंसी 2. विद्यालय :-

▪️परिवार के बाद स्कूल एक ऐसा साधन है जहां पर बालक का सामाजिक कारण होता है स्कूल में विभिन्न प्रकार के बालक शिक्षा प्राप्त करने आते हैं बाला की विभिन्न परिवारों के बालक तथा शिक्षकों के बीच रहते हुए सामाजिक प्रतिक्रिया करता है जिससे उसका समाजीकरण तीव्र गति से होने लगता है स्कूल में रहते हुए बालक को जहां एक और विभिन्न विषयों की प्रत्यक्ष शिक्षा द्वारा सामाजिक नियमों रीति-रिवाजों परंपराओं मान्यताओं विश्वासों तथा आदर्शों एवं मूल का ज्ञान होता है वहीं दूसरी ओर से स्कूल की विभिन्न सामाजिक योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न सामाजिक गुणों का विकास होता रहता है इस दृष्टि से परिवार की भांति स्कूल भी बालक के समाजीकरण की मुख्य एजेंसी है।

▪️विद्यालय में बच्चे बौद्धिक विकास होता है  एवं  वे कई औपचारिकता सीखते हैं।

▪️विद्यालय ही सामाजिक व्यवस्था में अनुकूलन स्थापित करने में सहयोग करता है।

❇️ एजेंसी 3.सहकर्मी समूह :-

▪️प्रत्येक बालक अपने साथियों के साथ खेलता है तो खेलते समय जाती ऊंच-नीच तथा अन्य प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर दूसरे बालकों के साथ अंतः क्रिया द्वारा आनंद लेता है इस कार्य में उनके साथ ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

▪️परिवार उनके अंतर्गत बच्चे का सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण होता है जबकि सहकर्मी समूह या दोस्तों के बीच सामाजिक विकास ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

▪️बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है उसके परिवार में हुआ समाजीकरण अल्पकालीन हित को प्रभावित करता है जबकि सहकर्मी समाज द्वारा हुआ समाजीकरण बच्चे के दीर्घकालीन हित को प्रभावित करता है।

❇️ एजेंसी 4. संचार मीडिया – Mass Media

▪️वर्तमान समाज में, Mass Media एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

▪️मीडिया ऑडियो विजुअल और प्रिंट के माध्यम से जानकारी प्रदान करता है। Mass media संचार के सभी उपकरणों जैसे कि टेलीविजन, रेडियो, समाचार पत्र, पत्रिकाओं, फिल्मों और रिकॉर्ड्स को संदर्भित करता है।

▪️कई कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है, बल्कि इसके साथ साथ दुनिया भर से छवियों, घटनाओं, शैलियों और फैशन का एक त्वरित प्रसारण भी है।

🔆समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका:-

▪️बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया में परिवार के बाद स्कूल और स्कूल में विशेष रूप से शिक्षक आता है। प्रत्येक समाज के कुछ विश्वास, दृष्टिकोण, मान्यताएं, कुशलताएं और परंपराएं होती हैं। जिनको ’संस्कृति’ के नाम से पुकारा जाता है। यह संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित की जाती है और समाज के लोगों के आचरण को प्रभावित करती है। शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ कार्य है इस संस्कृति को बालक को प्रदान करना। यदि वह यह कार्य नहीं करता है तो बालक का समाजीकरण नहीं कर सकता है। शिक्षक, माता-पिता के साथ बालक के चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने में अति महत्वपूर्ण कार्य करता है।

▪️कक्षा में, खेल के मैदान में, साहित्यक और सांस्कृतिक क्रियाओं में शिक्षक सामाजिक व्यवहार के आदर्श प्रस्तुत करता है। बालक अपनी अनुकरण की मूल प्रवृति के कारण शिक्षक के ढंगों, कार्यों, आदतों और नीतियों का अनुकरण करता है। अतः शिक्षक को सदैव सतर्क रहना चाहिए, उसे कोई ऐसा अनुचित कार्य या व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिसका बालक के ऊपर गलत प्रभाव पड़े। अतः बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करने के लिए शिक्षक को मुख्यतः निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

✓ अभिभावक शिक्षक सहयोग

✓स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना

✓सामाजिक आदर्श

✓स्कूल की परंपरा

✓सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन

🔸अभिभावक शिक्षक सहयोगः- 

समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करने के लिए शिक्षक का सर्वप्रथम कार्य यह है कि वह बालक के माता-पिता से संपर्क स्थापित करके उसकी रूचियों तथा मनोवृत्तियों के विषय में ज्ञान प्राप्त करे एवं उन्हीं के अनुसार उसे विकसति होने के अवसर प्रदान करे।

🔸स्वस्थ प्रतियोगिता की भावनाः- 

बालक के समाजीकरण में प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण स्थान होता है। पर ध्यान देने की बात है कि बालक के समाजीकरण के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता का होना ही अच्छा है। अतः शिक्षक को बालक में स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करनी चाहिए।

🔸सामाजिक आदर्शः- 

शिक्षक को चाहिए कि वह कक्षा तथा खेल के मैदानों एवं सांस्कृतिक और साहित्यिक क्रियाओं में बालक के सामने सामाजिक आदर्शों को प्रस्तुत करें। इन आदर्शों का अनुकरण करके बालक का धीरे-धीरे समाजीकरण हो जाएगा।

🔸स्कूल की परंपराएं:- 

स्कूल की परंपराओं का बालक के समाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः शिक्षक को चाहिए कि वह बालक का स्कूल की परंपराओें में विश्वास उत्पन्न करे तथा उसे इन्हीं के अनुसार कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करे।

🔸सामूहिक कार्य को प्रोत्साहनः- 

शिक्षक को चाहिए कि वह स्कूल में विभिन्न सामाजिक योजनाओं के द्वारा बालकों को सामूहिक क्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के अवसर प्रदान करे। इन क्रियाओं में भाग लेने से उसका समाजीकरण स्वतः ही हो जाएगा।

✍️

      Notes By-‘Vaishali Mishra’

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

🚫    समाजीकरण की एजेंसियां ➖

एजेंसियां अर्थात ऐसे स्त्रोत जो हमें किसी चीज की जानकारी प्रदान करते हैं और उन जानकारियों के माध्यम से व्यक्ति का सामाजिकरण प्रभावित होता है |

समाजीकरण की  एजेंसियों को चार भागों में विभाजित किया गया है ➖ 

💮 परिवार

💮  विद्यालय 

💮 सहकर्मी संबंध

💮  संचार मीडिया

📛 परिवार ➖

परिवार प्राथमिक एजेंसी के अंतर्गत आता है इसको प्राथमिक एजेंट  भी कहते हैं जिसके माध्यम से बच्चा अपनी दैनिक जीवन की आदतों को जैसे भोजन करना, सोना, कपड़े पहनना, ब्रश करना ,नहाना आदि सभी आदतों को सीखता है |

          माता-पिता से लैंगिक भूमिका में मार्गदर्शन प्राप्त होता है जिसमें बच्चे मूल्यों को सीखते हैं और उनका जीवन भर पालन करते हैं अर्थात मूल्य जीवन भर चलते रहते हैं |

📛 विद्यालय ➖ 

विद्यालय परिवार के बाद आता है अर्थात  विद्यालय में परिवार के बाद सामाजीकरण होता है |

 परिवार के बाद बच्चे का समाजीकरण विद्यालय में होता है जिसमें अलग-अलग प्रकार के बच्चे आते हैं जिनकी अपनी संस्कृति और तौर तरीके होते हैं |

  विद्यालय के माध्यम से बच्चे, शिक्षक, एवं सहपाठी तीनों का संघ विकसित होता है आपस में काम करते हैं विद्यालय पूरी तरीके से स्थिर वयस्क जीवन के लिए तैयार करता है जिसके कारण सामाजिक व्यवस्था में अनुकूलन करते हैं |

जो घर में सीखना होता है वह अनौपचारिक व्यक्तिगत और भावनात्मक होता है लेकिन विद्यालय में बच्चे बौद्धिक और | औपचारिक रूप से सीखते हैं |

📛 सहकर्मी समूह , ➖

इसमें बच्चे अपने सम आयु समूह के साथ खेलते हैं उनके सीखने का स्तर एक समान होता है जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनके लिए परिवार सामाजिक विकास में कम महत्वपूर्ण हो जाता है | तथा मित्र अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं बच्चा अधिकांश समय दोस्तों के बीच व्यतीत करने लगता है बच्चों के बीच व्यतीत करने लगता है |

 जिससे परिवार के विपरीत अल्पकालीन हित प्राप्त करता है जो बच्चे के समजिक  आर्थिक प्रभाव छोड़ देते हैं |

💮 संचार मीडिया➖

संचार मीडिया का प्रभाव प्रद्योगिकी के साथ साथ जो चीजों को बताता है  |जैसे – रेडियो, संगीत ,टेलीविजन, समाचार पत्र, तकनीकी, नई चीजें ,इंटरनेट, आदि सब जन संचार मीडिया के मुख्य अवयव है जो  हमारे सामाजिक प्रभावित करते हैं |

🉐  बच्चे के समाजीकरण में शिक्षक की भूमिका ➖

बच्चे के समाजीकरण की प्रक्रिया परिवार से शुरू होती है जिसका विद्यालय द्वितीयक स्रोत है  जिसमे शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है प्रत्येक समाज की अपनी संस्कृति होती है जिसमें विश्वास, दृष्टिकोण,मान्यताएं , कुशलताएं और परंपराएं  होती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती रहती हैं |

 बच्चों का समाजीकरण  माता-पिता के बाद शिक्षक से प्रभावित होता है जिसमें शिक्षक का कार्य है कि सभी बच्चों को संस्कृति दे |

  बच्चों में समाजीकरण तभी संभव है जब उनमें उचित संस्कृति का विकास होगा, यदि बच्चे की संस्कृति ठीक नहीं है, उचित नहीं है तो बच्चे का समाजीकरण भी उचित नहीं होगा |

            ऐसी स्थिति में शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चे को कक्षा में, खेल के मैदान में, सांस्कृतिक कार्य में उचित व्यवहार को सिखाए |

                उनकी संस्कृति को सुधारने में अनिवार्य रूप से अपनी भूमिका अदा करें  |

क्योंकि वह अनुकरण करता है वह शिक्षक के ढंग, कार्य ,आदत और  नीति आदि सभी  क्रियाकलापों का अनुकरण करता है इसलिए  शिक्षक की सतर्कता बहुत आवश्यक है  |

इसलिए शिक्षक को चाहिए कि वह ऐसा कार्य ना करें जिससे बच्चे का समाजीकरण प्रभावित हो | 

यदि शिक्षक समाजीकरण  की प्रक्रिया को तीव्र करना चाहते हैं तो उन्हें निम्न बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है ➖

📛 अभिभावक शिक्षक सहयोग➖

 समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए बच्चे के माता-पिता से बातचीत करना बहुत आवश्यक है और जरूरी है जिससे बच्चे की सूची, व्यवहार मनोवृति ,उसके जीवन जीने के तरीके ,माता-पिता का व्यवहार, परिवार का व्यवहार ,और उसके तौर-तरीके, रीति- रिवाज, संस्कृति, आदि सभी आदतों को जानना बहुत आवश्यक है क्योंकि यह जाने बिना  शिक्षक समाजीकरण विकसित नहीं कर सकते हैं |

📛 स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना ➖

बच्चे के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करना अति आवश्यक है जिसमें ईमानदार और परिपक्वता विशेष रुप से झलकती हों, जिसमें इमानदारी की तीव्र रूप से वृद्धि हो  |

इसके विपरीत यदि स्वास्थ्य प्रतियोगिता नहीं होगी तो इससे समाजीकरण प्रभावित होगा तथा  इससे शिक्षक तीव्र और कुशल समाजीकरण का विकास नहीं कर सकता है   |

📛 सामाजिक आदर्श➖

 शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चे को खेल के मैदान, सामाजिक सांस्कृतिक क्रिया ,व्यवहार और कक्षा – कक्ष में सामाजिक आदर्श प्रस्तुत करें जिससे बच्चे के व्यवहार में बदलाव हो सके और उसमें सामाजिक आदर्श स्थापित हो सके क्योंकि बच्चे शिक्षक अनुकरण करते हैं यदि शिक्षक आदर्श प्रस्तुत नहीं करेगा तो  समाजीकरण ही प्रक्रिया संभव  नहीं है और इससे बच्चे के सफल समाजीकरण की कल्पना करना भी वर्जित है |

📛 स्कूल की परंपरा➖

 स्कूल की परंपरा को उन्नत बनाए रखने के लिए बच्चों में विश्वास जागृत करना अति आवश्यक है और ऐसे विश्वास को जागृत करना अनिवार्य है जिसके बच्चे अनुसरण कर सके और उसका पालन कर सकें तभी बच्चे का समाजीकरण  सफल रूप से हो सकता है |

📛 सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन➖

 शिक्षक को बच्चे के सामूहिक कार्य को उत्साहित करना अति आवश्यक है जैसे – योजना बनाना ,तौर तरीके सिखाना, सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेना ,आदि सभी को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है जिससे बच्चे का सर्वांगीण विकास हो सके और उचित समाजीकरण हो सके   |

  नोट्स बाय➖  रश्मि सावले

,, 🍀🌻🌻🌼🍁🌺🌸🌺🌸🌼🌻🍀🌹🍁🌺🌸🌼🌻🍀👪समाजीकरण की एजेंसियां👨‍👩‍👦

 समाजीकरण की एजेंसियां निम्न है

1परिवार

2विद्यालय 

3सहकर्मी संबंध 

4 संचार मीडिया

 परिवार:-  परिवार बच्चे की पहली दुनिया होती है बच्चा  अपने परिवार से बहुत कुछ सीखता है भोजन करना कपड़े पहनना आदि चीजें सीखता है माता पिता बच्चों को लैंगिक भूमिका में मार्गदर्शन करते हैं

 परिवार में जो सिखाया जाता है वह आजीवन एवं हितकर होता है बच्चे उन मूल्यों को सीखते हैं जो जीवन भर चलते हैं

परिवार बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है एवं मां उसकी प्रथम गुरु होती हैं 

 विद्यालय:- परिवार के बाद विद्यालय हैं जहां बच्चे का सामाजकरण होता है यहां पर अलग-अलग परिवार के बच्चे आते हैं और उन्हें समान प्रकार से शिक्षा दी जाती हैं

 बच्चे👉  शिक्षक

        👇

….. सहपाठी

विद्यालय बच्चों को स्थिर वयस्क जीवन के लिए तैयार करता है

सामाजिक व्यवस्था में अनुकूलन विद्यालय सिखाता है

 घर में सीखना व्यक्तिगत भावनात्मक या अनौपचारिक कहलाता है

विद्यालय में सीखना बौद्धिक एवं औपचारिक कहलाता है

 सहकर्मी  संबंध:-  सहकर्मी समूह में एक ही उम्र के बच्चे समान स्थिति के बच्चे होते हैं जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं परिवार सामाजिक विकास में कम महत्वपूर्ण होता जाता है और दोस्त ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं

 बच्चा दोस्ती में समय बिताता है इससे जो भी सीखते हैं परिवार के विपरीत अल्पकालीन हित के लिए होता है

 बच्चा तात्कालिक खुशी के लिए कुछ भी कर लेते हैं

लेकिन कभी-कभी यह किसी किसी में दीर्घकालिक प्रभात छोड़ देती है

4 मास मीडिया:-  मास मीडिया में विभिन्न प्रकार आते हैं 

रेडियो:-  वीडियो के द्वारा हम घर बैठे दूर-दूर की जानकारी प्राप्त करते हैं

 संगीत:- संगीत के माध्यम से मनुष्य अपना मनोरंजन करता है वह अपनी थकावट को दूर करता है

 टेलीविजन :- टेलीविजन की मनोरंजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है टेलीविजन के द्वारा हम अन्य देशों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

न्यूज़ चैनल:- न्यूज़ चैनल के माध्यम से विदेश की जानकारियां प्राप्त करते हैं कहां पर किस प्रकार की घटना हो रही है यह भी जानकारी हमें प्राप्त होती हैं

 समाचार पत्र:- समाचार पत्र के माध्यम से देश विदेश हमारे शहर में कौन सी घटनाएं घट रही है यह जानकारी प्राप्त होती है

 तकनीकी 

नई चीजें

 इंटरनेट:- इंटरनेट ने तो पूरी दुनिया में धमाल मचा रखा है इसके बिना आज व्यक्ति अपनी कल्पना भी नहीं करता इंटरनेट के माध्यम से हम किसी भी देश का भ्रमण कर सकते हैं

                              , कोरोना के समय में तो इंटरनेट एक वरदान साबित हुआ है इंटरनेट के माध्यम से ही अनेक व्यक्ति अपने घरों में  बैठकर काम करते रहे और विद्यार्थियों को घर में ही शिक्षण की व्यवस्था हो गई( online classes)

 समाजीकरण में शिक्षकों की भूमिका

बच्चा परिवार से विद्यालय में जाता है एवं वह शिक्षकों के संपर्क में रहकर विद्यालय में सामाजिकता का पाठ सीखता है विद्यालय में ही बच्चा संस्कृति, विश्वास ,दृष्टिकोण ,मान्यता,        कुशलता ,परंपरा आदि की जानकारी प्राप्त करता है

संस्कृति:- विद्यालय में  संस्कृति हस्तांतरण होती है बच्चे में संस्कृति बच्चों के आचरण को प्रभावित करती है

बच्चों को सही संस्कृति देना शिक्षक का कार्य है

यदि संस्कृति नहीं आएगी तो सामाजिकरण नहीं हो सकता है

शिक्षक और माता-पिता  साथ मिलकर  बच्चे के चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करते हैं

बच्चा अनुकरण करता है वह शिक्षक के तौर तरीके उनके  ढंग, कार्य ,आदत एवं नीतियों का अनुसरण करता है इसलिए शिक्षक को किसी भी प्रकार का अनुचित कार्य नहीं करना चाहिए 

ना ही बच्चों के सामने अपशब्द बोलना चाहिए बच्चे  अपनी नकारात्मक  धारणा बना लेते हैं शिक्षकों को बच्चों के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए

समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए शिक्षक को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए

 अभिभावक शिक्षक सहयोग:- 

1 रुचि:- बच्चों की रचनाओं के बारे में माता-पिता से चर्चा करेंगे एवं मिलकर उसे आगे बढ़ाएंगे

2 व्यवहार:- बच्चों के बहार के बारे में माता-पिता से चर्चा करेंगे

3 मनोवृति 

4 पास्ट लाइफस्टाइल को जानेंगे  समझेंगे 

5 माता-पिता का व्यवहार परिवार का वातावरण यह सब जाने बिना हम बच्चे को विकसित नहीं कर सकते हैं

  स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना:-  

हमें बच्चो में स्वस्थ्य  प्रतियोगिता की भावना को विकसित करना चाहिए ताकि बच्चे में अच्छे विचार तर्क करने की क्षमता विकसित हो सके

 सामाजिक आदर्श:- बच्चा जन्म से ही समाज में रहता है कि वह वह समाज की बनाए आदर्शों का अनुसरण करता है

 स्कूल की परंपरा:- स्कूल की परंपरा है कि वह बच्चों को हमेशा उन्नति के मार्ग पर पहुंचाएं बच्चों में विश्वास की भावना को जागृत करें और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करें

 सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन:-  हमें बच्चों को सामूहिक कार्य करने में आगे बढ़ाना चाहिए समूह में कार्य करने से बच्चों में सामाजिकता की भावना आती है एवं बच्चे योजना बनाना तौर-तरीके सीखते हैं जिससे उनका संपूर्ण विकास होता है

सपना साहू 

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🟢👨‍👩‍👦‍👦👩‍❤️‍💋‍👨समाजीकरण की एजेंसियां÷

एजेंसियां अर्थात ऐसे स्त्रोत जो हमें किसी चीज की जानकारी प्रदान करते हैं और उन जानकारियों के माध्यम से व्यक्ति का सामाजिकरण प्रभावित होता है |

समाजीकरण की  एजेंसियों को चार भागों में विभाजित किया गया है।

🔴परिवार

🔴 विद्यालय 

🔴 सहकर्मी संबंध

🔴संचार मीडिया

🟢परिवार ÷

परिवार प्राथमिक एजेंसी के अंतर्गत आता है। इसको प्राथमिक एजेंट  भी कहते हैं।

 जिसके माध्यम से बच्चा अपनी दैनिक जीवन की आदतों को जैसे भोजन करना, सोना, कपड़े पहनना, ब्रश करना ,नहाना आदि सभी आदतों को सीखता है |

          👩‍❤️‍💋‍👨माता-पिता से लैंगिक भूमिका में मार्गदर्शन प्राप्त होता है जिसमें बच्चे मूल्यों को सीखते हैं और उनका जीवन भर पालन करते हैं अर्थात मूल्य जीवन भर चलते रहते हैं |

🟢विद्यालय ÷

विद्यालय परिवार के बाद आता है अर्थात  विद्यालय में परिवार के बाद सामाजीकरण होता है |

 👨‍👩‍👦‍👦परिवार के बाद बच्चे का समाजीकरण विद्यालय में होता है जिसमें अलग-अलग प्रकार के बच्चे आते हैं जिनकी अपनी संस्कृति और तौर तरीके होते हैं |

  विद्यालय के माध्यम से बच्चे, शिक्षक, एवं सहपाठी तीनों का संघ विकसित होता है आपस में काम करते हैं।

      विद्यालय पूरी तरीके से स्थिर वयस्क जीवन के लिए तैयार करता है जिसके कारण सामाजिक व्यवस्था में अनुकूलन करते हैं |

जो घर में सीखना होता है वह अनौपचारिक व्यक्तिगत और भावनात्मक होता है। लेकिन विद्यालय में बच्चे बौद्धिक और  औपचारिक रूप से सीखते हैं |

🟢सहकर्मी समूह ÷

इसमें बच्चे अपने सम आयु समूह के साथ खेलते हैं उनके सीखने का स्तर एक समान होता है जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनके लिए परिवार सामाजिक विकास में कम महत्वपूर्ण हो जाता है | तथा मित्र अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं बच्चा अधिकांश समय दोस्तों के बीच व्यतीत करने लगता है बच्चों के बीच व्यतीत करने लगता है |

           जिससे परिवार के विपरीत अल्पकालीन हित प्राप्त करता है जो बच्चे के समजिक  आर्थिक प्रभाव छोड़ देते हैं |

🔴 संचार मीडिया÷

संचार मीडिया का प्रभाव प्रद्योगिकी के साथ साथ जो चीजों को बताता है  |जैसे – रेडियो, संगीत ,टेलीविजन, समाचार पत्र, तकनीकी, नई चीजें ,इंटरनेट, आदि सब जन संचार मीडिया के मुख्य अवयव है जो  हमारे सामाजिक प्रभावित करते हैं |

🔴  बच्चे के समाजीकरण में शिक्षक की भूमिका ÷

बच्चे के समाजीकरण की प्रक्रिया परिवार से शुरू होती है जिसका विद्यालय द्वितीयक स्रोत है  जिसमे शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है प्रत्येक समाज की अपनी संस्कृति होती है जिसमें विश्वास, दृष्टिकोण,मान्यताएं , कुशलताएं और परंपराएं  होती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती रहती हैं |

 बच्चों का समाजीकरण  माता-पिता के बाद शिक्षक से प्रभावित होता है जिसमें शिक्षक का कार्य है कि सभी बच्चों को संस्कृति दे |

  बच्चों में समाजीकरण तभी संभव है जब उनमें उचित संस्कृति का विकास होगा, यदि बच्चे की संस्कृति ठीक नहीं है, उचित नहीं है तो बच्चे का समाजीकरण भी उचित नहीं होगा |

        ऐसी स्थिति में शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चे को कक्षा में, खेल के मैदान में, सांस्कृतिक कार्य में उचित व्यवहार को सिखाए |

       उनकी संस्कृति को सुधारने में अनिवार्य रूप से अपनी भूमिका अदा करें  |

क्योंकि वह अनुकरण करता है वह शिक्षक के ढंग, कार्य ,आदत और  नीति आदि सभी  क्रियाकलापों का अनुकरण करता है इसलिए  शिक्षक की सतर्कता बहुत आवश्यक है  |

इसलिए शिक्षक को चाहिए कि वह ऐसा कार्य ना करें जिससे बच्चे का समाजीकरण प्रभावित हो | 

👉🏻यदि शिक्षक 🧑‍🏫समाजीकरण  की प्रक्रिया को तीव्र करना चाहते हैं तो उन्हें निम्न बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है ।

🔴अभिभावक शिक्षक सहयोग÷

समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए बच्चे के माता-पिता से बातचीत करना बहुत आवश्यक है और जरूरी है जिससे बच्चे की सूची, व्यवहार मनोवृति ,उसके जीवन जीने के तरीके ,माता-पिता का व्यवहार, परिवार का व्यवहार ,और उसके तौर-तरीके, रीति- रिवाज, संस्कृति, आदि सभी आदतों को जानना बहुत आवश्यक है क्योंकि यह जाने बिना  शिक्षक समाजीकरण विकसित नहीं कर सकते हैं |

🔴स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना ÷

बच्चे के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करना अति आवश्यक है जिसमें ईमानदार और परिपक्वता विशेष रुप से झलकती हों, जिसमें इमानदारी की तीव्र रूप से वृद्धि हो  |

          इसके विपरीत यदि स्वास्थ्य प्रतियोगिता नहीं होगी तो इससे समाजीकरण प्रभावित होगा तथा  इससे शिक्षक तीव्र और कुशल समाजीकरण का विकास नहीं कर सकता है   |

🔴सामाजिक आदर्श÷

 शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चे को खेल के मैदान, सामाजिक सांस्कृतिक क्रिया ,व्यवहार और कक्षा – कक्ष में सामाजिक आदर्श प्रस्तुत करें जिससे बच्चे के व्यवहार में बदलाव हो सके और उसमें सामाजिक आदर्श स्थापित हो सके क्योंकि बच्चे शिक्षक अनुकरण करते हैं यदि शिक्षक आदर्श प्रस्तुत नहीं करेगा तो  समाजीकरण ही प्रक्रिया संभव  नहीं है और इससे बच्चे के सफल समाजीकरण की कल्पना करना भी वर्जित है |

🔴 स्कूल की परंपरा÷

स्कूल की परंपरा को उन्नत बनाए रखने के लिए बच्चों में विश्वास जागृत करना अति आवश्यक है और ऐसे विश्वास को जागृत करना अनिवार्य है जिसके बच्चे अनुसरण कर सके और उसका पालन कर सकें तभी बच्चे का समाजीकरण  सफल रूप से हो सकता है |

🔴 सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन÷ शिक्षक को बच्चे के सामूहिक कार्य को उत्साहित करना अति आवश्यक है 

         जैसे – योजना बनाना ,तौर तरीके सिखाना, सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेना ,आदि सभी को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है जिससे बच्चे का सर्वांगीण विकास हो सके और उचित समाजीकरण हो सके   |

 📖🖊️Notes by shikha tripathi💐🌷🌸

🌌🍀🍀सामाजीकरण की एजेंसिया🍀🍀🌌

निम्नलिखित हैं➖️

 🔅परिवार

🔅विद्यालय

 🔅सहकर्मी संबंध

🔅संचार मीडिया

🌲 ⚜️परिवार ➖️   यह प्राथमिक एजेंट होता है क्योंकि परिवार से ही बच्चा सीखने की शुरुआत करता है जैसे कपड़े पहनना, ब्रश करना,बातचीत करना,कई प्रकार की क्रिया करना यहीं से शुरू करता है 

              परिवार के माध्यम से ही बच्चा  यह सब कुछ कार्य सीखता है

        माता पिता

माता पिता के द्वारा ही हम  लैंगिक भूमिका में मार्गदर्शन करते हैं इन्हीं के द्वारा हम मूल्यों को सीखते हैं और हमारे साथ जीवन भर यही मूल्य चलते जाते हैं

🌲⚜️विद्यालय    ➖️परिवार से हम सामान्य गुण सीखते हैं उसके उसके बाद जब हम विद्यालय जाते हैं तो विद्यालय हमारे व्यस्त जीवन के लिए हम को तैयार करते हैं और सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल बनाता है

(⚜️घर में सीखना  ➖️      व्यक्तिगत,भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक होता है

⚜️विद्यालय में सीखना➖️ बौद्धिक औपचारिक होता है)

🌲⚜️सहकर्मी समूह  ➖️  एक उम्र के बच्चे एक साथ रहते हैं और उनकी स्थिति समान होती है जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं इसके लिए परिवार सामाजिक विकास महत्वपूर्ण होता है

और उनके सहकर्मी मित्र ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं और दोस्तों के साथ बच्चे ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं

दोस्तों के साथ मिलकर कार्य करना यह दीर्घकालीन नहीं होता है अल्पकालीन होता है परिवार के विपरीत यह अल्पकालीन हित को प्रभावित करता है लेकिन यह जो तत्कालीन हित हैं वह कुछ हित दीर्घकालीन व्यवहार छोड़ देते हैं जैसे कोई अच्छी बुरी आदत पकड़ लेना।

🌲⚜️मास मीडिया ➖️इसमें रेडियो,संगीत, टेलीविजन,न्यूज़ चैनल,समाचार पत्र,तकनीकी नई चीजें इंटरनेट आदि यह सब इस में आते हैं

इन सब का काम प्रभावित करना होता है इन सब के माध्यम से बच्चों को सूचनाओं का आदान प्रदान किया जाता है इससे सामाजीकरण मे बच्चे को सहायता मिलती है

सामाजीकरण में शिक्षकों की भूमिका सामाीकरण मे पहले परिवार आता है और फिर विद्यालय मे विद्यालय में सामाजीकरण शिक्षक कराता है शिक्षक,समाज से जुड़ा है समाज, की अपनी संस्कृति होती है संस्कृति में कई चीज जुड़ी हुई हैं जैसे विश्वास,मान्यता,कुशलता,परंपरा, दृष्टिकोण यह सब संस्कृति का हिस्सा है

यह सब संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती है

 यह सब संस्कृति बच्चों के आचरण को प्रभावित करती है तो शिक्षक का इसमें प्रमुख कार्य होता है कि बच्चे को सही तरीके से देना बच्चों को सही तरीके से बताना यह शिक्षक का महत्व पूर्ण कार्य होता है

अगर संस्कृति सही नहीं आई बच्चों में तो उसका सामाजीकरण सही तरीके से नहीं हो सकता है इसमें शिक्षक बच्चे को चरित्र व्यक्तित्व का विकास माता-पिता के साथ लेते हैं

 कक्षा में खेल के मैदान संस्कृति के कार्य में इत्यादि में जो सामाजिक व्यवहार होता है उसमें शिक्षा का अच्छा होना चाहिए     

 क्योंकि बच्चा शिक्षक का अनुकरण करता है जैसा शिक्षा का ढंग कार्य ,आदत ,नीति करेगा तो इन सब में शिक्षक को सतर्क रहना चाहिए और खुद भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जो अनुकूल हो

🌌⚡️समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए शिक्षकों ने अपने बातोंका ध्यान रखना चाहिए⚡️🌌➖️➖️➖️

 🌲🔅 एक अभिभावक शिक्षक सहयोग➖️ सामाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करने के लिए बच्चों के माता पिता उससे मिले उनके सहयोग से बच्चों की रुचि जानने बच्चों के व्यवहार ,मनोवृति, लाइफस्टाइल, को समझना अगर शिक्षक इन सब को नहीं जानेंगे तो बच्चे का विकास नहीं कर सकते हैं

🌲🔅स्वस्थ्य प्रतियोगिता की भावना ➖️    विद्यार्थी के अंदर स्वस्थ प्रतियोगिता जगानी है प्रतियोगिता गलत नहीं होती है अच्छी होती है लेकिन जब तक कि वह अच्छी हो प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत ना करें बच्चे में प्रतियोगिता स्वस्थ होनी चाहिए इसमें उन बच्चों के अंदर द्वेष भावना जैसी भाव उत्पन्न नहीं होना चाहिए बच्चे एक-दूसरे से अच्छे अच्छे कार्य अच्छी अच्छी आदत सीखे ना कि बुरी आदते अच्छे कार्य को देखकर उनके अंदर देश भावना उत्पन्न नहीं होनी चाहिए

🌲🔅सामाजिक आदर्श ➖️शिक्षक बच्चे को सामाजिक आदर्श करें क्योंकि बच्चा शिक्षकों के सामाजिक आदर्श का अनुकरण करता है सबके अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श होते हैं और बच्चे उसी को देख कर ही सीखता है

🌲🔅स्कूल की परंपरा ➖️स्कूल का वातावरण अच्छा होना चाहिए स्कूल की परंपरा को अनंत रखना उस समय विश्वास जागृत करना अगर परंपरा अच्छी रहेगी तो बच्चा भी अच्छा सीखेगा

🌲🔅सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन➖️ शिक्षकों को समूह में रहना चाहिए क्योंकि समूह की योग्यता तौर तरीका अलग ही  है समूह में रहने से उसके तौर तरीके से बच्चे सीखते हैं इस प्रकार का समूह में व्यापार करता है उसी प्रकार से सीखता है

Notes by sapna yadav📝📝📝📝📝📝📝

26/03/2021…………friday 

         सामाजिकरण की एजेंसियां 

हमारे जीवन भर में सामाजिकरण होता है, हमारे जीवन के चरण के दौरान समाजीकरण के सबसे  प्रभावशाली एजेंट निम्नलिखित है….

(1) परिवार 

(2)विद्यालय 

(3)सहकर्मी संबंध

(4) संचार मीडिया

🔥 यह सभी हमें हमारी सामाजिकरण कराने में सहायक होते हैं

(1) परिवार➖

इसे सामाजिकरण के प्राथमिक एजेंट बोलते हैं ।यह बच्चे की पहली दुनिया है इसमें बच्चे अपने दैनिक जीवन की जरूरतें सीखते हैं 

 जैसे  ➖स्वयं से खाना ,कपड़े पहनना ,सोने  जैसी आदत प्रशिक्षण की प्रारंभिक भावना विकसित करता है 

अर्थात :–परिवार का वातावरण, संस्कृति ,सदस्यों का आचरण ,शिक्षा स्तर ,आर्थिक स्तर, पारिवारिक संरक्षण ,सहयोग ,पालन पोषण आदि बालकों के सामाजिक विकास पर प्रभाव पड़ता है ।बालक अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के जैसा आचरण तथा व्यवहार करने का प्रयास करता है

 माता-पिता बच्चों को समाज में उपयुक्त माने जाने वाले अपने लैंगिक भूमिकाओं में मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।बच्चे मूल्यों को सीखते हैं जो जीवन भर चलता है

(2) विद्यालय➖

बालक के सामाजिक विकास में विद्यालय का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हें द्वितीय एजेंट बोलते हैं।

 परिवार के बाद शिक्षण संस्था समाजीकरण का कार्यभार संभालते हैं यह इस स्थान पर है कि विभिन्न परिवारों के बच्चे एक सामान्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए इकट्ठा होते हैं बच्चे शिक्षकों के साथ और सहपाठियों के बीच स्कूल में संबंध का एक सेट विकसित करते हैं स्कूल बच्चे को एक स्थिर व्यस्त जीवन के लिए तैयार सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल होने में मदद करता है

 यह कहा गया है कि➖ घर पर सीखना व्यक्तिगत, भावनात्मक और अनौपचारिक स्तर से है

 जबकि स्कूल➖ में सीखना मूल रूप से बौद्धिक और औपचारिक रूप से है

(3) सहकर्मी समूह➖

बच्चों के समाजीकरण के लिए सहकर्मी समूह भी एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इन्हें तृतीय एजेंडा कहा गया

सहकर्मी समूह के सदस्य आमतौर पर एक ही उम्र के बच्चे होते हैं और सामान स्थिति रखते हैं ।जैसे जैसे बड़े होते हैं ,परिवार उनके सामाजिक विकास में कम महत्वपूर्ण हो जाता है बच्चे अपने सहकर्मी समूहों के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं और अपने कंपनी में ज्यादा समय बिताते हैं हालांकि सहकर्मी में समूह आमतौर पर परिवार के विपरीत केवल अल्पकालीन हितों को प्रभावित करता है जिसका जिसका दीर्घकालिक । यह बच्चे के  अच्छे हित में भी हो सकते हैं और बुरे हित में भी होता है यह बच्चे के अच्छे हित में भी हो सकते हैं और बुरे हित में भी

(4) संचार मीडिया➖

मीडिया प्रभाव प्रौद्योगिकी की प्रगति के साथ तेजी से बढ़ा है पिछली शताब्दी के बाद रेडियो, गति चित्र, संगीत , टेलीविजन, न्यूज़ चैनल, समाचार पत्र ,तकनीकी नई चीजें

 इंटरनेट सामाजिकरण के महत्वपूर्ण एजेंटा बन गए हैं इन्हें चतुर्थ एजेंट भी हो जाता है ।मास मीडिया ने दुनिया भर की संस्कृतियों और मानदंडों को पेश किया, जिससे बच्चे की जागरूकता में काफी मदद मिली। सामाजिकरण परिवार ,सहकर्मी समूह और स्कूल के एजेंट आमतौर पर एक समाज और एक संस्कृति का हिस्सा होते हैं लेकिन बड़े पैमाने पर मीडिया समाजिक दुनिया में किसी के संपर्क में आ जाता है

🔥 सामाजिकरण में शिक्षकों की भूमिका

बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया में परिवार के बाद स्कूल और स्कूलों में विशेष रूप से शिक्षक आते हैं।

 प्रत्येक समाज के कुछ विश्वास, दृष्टिकोण, मान्यताएं , कुशलता है और परंपराएं होती है ।जिनको ,संस्कृति, के नाम से पुकारा जाता है यह संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को स्थानांतरित की जाती है और समाज के लोग के आचरण को प्रभावित करती है शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ कार्य है बच्चों को यह संस्कृति प्रदान करना यदि वह वह कार्य करने में असफल हो जाते हैं तो बालक का सामाजिक कारण नहीं हो सकता है शिक्षक माता पिता के साथ बालक के चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने में अति महत्वपूर्ण कार्य करता है

कक्षा में , खेल के मैदानों में ,साहित्य और संस्कृति क्रियाओं में शिक्षक सामाजिक व्यवहार के आदर्श प्रस्तुत, करते हैं बालक अपने अनुकरण की मूल प्रवृत्ति के कारण शिक्षक के ढन्गो ,कार्यों,विषय वस्तु, आदतों और नीतियों का अनुकरण करता है अतः शिक्षक को सदैव सतर्क रहना चाहिए उन्हें ऐसा अनुचित कार्य या व्यवहार नहीं करना चाहिए इसका गलत प्रभाव बालक के ऊपर पर है अतः बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करने के लिए शिक्षक को मुख्यतः निम्न बातों पर ध्यान रखना चाहिए

🔥अभिभावक शिक्षक सहयोग➖

समाजीकरण की प्रक्रिया को तेज गति प्रदान करने के लिए शिक्षक का सर्वप्रथम कार्य यह है कि बालक के माता-पिता से संपर्क स्थापित करके उसकी रुचियां और मनोवृति के विषय में ज्ञान प्राप्त करें एवं उन्हीं के अनुसार उसे विकसित होने का अवसर प्रदान करें

🔥 स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना➖

बालक के समाजीकरण में प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण स्थान होता है पर ध्यान देने की बात है कि बालक के समाजीकरण के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता का होना ही अच्छा है। अतः शिक्षक को बालक में स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करनी चाहिए

🔥 सामाजिक आदर्श➖

शिक्षा को चाहिए कि वह कक्षा तथा खेल के मैदानों एवं संस्कृति और साहित्य क्रियाओं में बालकों के सामने सामाजिक आदर्शों को प्रस्तुत करें। इन आदर्शों का अनुकरण करके बालक का धीरे-धीरे सामाजिकरण हो जाएगा।

🔥 स्कूल की परंपराएं➖ स्कूल की परंपराओं का बालक के समाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है ।अतः शिक्षक को चाहिए कि वह बालक स्कूल की परंपराओं में विश्वास उत्पन्न करें तथा इसे इन्हें के अनुसार कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें।

🔥 सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन➖

शिक्षक को चाहिए कि वह स्कूल में विभिन्न सामाजिक योजनाओं के द्वारा बालक को को सामूहिक क्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान करें इन क्रियाओं में भाग लेने से उसका सामाजिकरण सोता ही हो जाएगा

➖ उपयुक्त बातों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक बालक के समाजीकरण को प्रभावित करता है शिक्षक का स्नेह, पक्षपात ,बुरे व्यवहार ,दंड आदि का बालक पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है और उसका सामाजिक विकास उत्तम या विकृत हो जाता है। यदि शिक्षक मित्रता और सहयोग में विश्वास करता है तो बच्चों में भी इन गुणों का विकास होता है यदि शिक्षक छोटी-छोटी बातों पर बच्चों को दंड देता है तो उनके सामाजिकरण में संस्कृत नेता आ जाती है यदि शिक्षक अपने छात्रों के प्रति सहानुभूति रखता है तो छात्रों का सामाजिकरण सामान्य रूप से होता है

notes by:–✍ संगीता भारती✍

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🌼☘️ समाजीकरण की एजेंसियां☘️🌼

🟣 बालक जन्म के समय कोरा पशु होता है जैसे-जैसे और समाज के अन्य व्यक्तियों तथा सामाजिक संस्थाओं के संपर्क में आकर विभिन्न प्रकार की सामाजिक क्रियाओं में भाग लेता रहता है वैसे वैसे वह अपनी पार्श्विक प्रवृत्तियों परिवर्तन करते हुए सामाजिक आदर्शों मूल्यों को सिखाता रहता हैं।

🟣इस प्रकार बालक के समाजीकरण की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है बालक के समाजीकरण में उसके निम्नलिखित का महत्वपूर्ण योगदान होता है जैसे–

🌼 परिवार

🌼 विद्यालय

🌼 सहकर्मी संबंध

🌼 संचार मीडिया

🌼 परिवार➖ बालक के समाजीकरण के विभिन्न तत्वों में परिवार का महत्वपूर्ण स्थान है इसका कारण यह है कि प्रत्येक बालक का जन्म किसी न किसी परिवार में ही  होता है

   जैसे-जैसे बालक बड़ा होता जाता है वैसे वैसे वह अपने माता-पिता, भाई-बहन तथा परिवार के अन्य सदस्यों के संपर्क में आते हुए प्रेम सहानुभूति, सहनशीलता तथा सहयोग आदि अनेक सामाजिक गुणों को सीखता रहता है।

  यही नहीं वह अपने परिवार में रहते हुए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपने परिवार के आदर्शों,  रीति-रिवाजों, परंपराओं तथा मान्यताओं एवं विश्वासों को भी धीरे-धीरे सीखता जाता है।

🌼 विद्यालय➖ बालक के सामाजिक विकास में विद्यालय का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान होता है इसे हम बालक के सामाजिक विकास की द्वितीय एजेंसी भी कह सकते हैं।

   स्कूल विविध परिवारों के बालक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं बालक इन विभिन्न परिवारों के बालक तथा शिक्षकों के बीच रहते हुए सामाजिक प्रतिक्रिया करता है जिससे उसका सामाजीकरण तेज गति से होने लगता है।

    स्कूल के विविध सामाजिक योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न सामाजिक गुणों का विकास होता रहता है इस दृष्टि से परिवार तथा पड़ोस की भांति स्कूल भी बालक के समाजीकरण का प्रमुख साधन है।

🌼 सहकर्मी समूह➖ एक उम्र के बच्चे एक साथ रहते हैं और उनकी स्थिति समान होती है जैसे- जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं इसके लिए परिवार सामाजिक विकास महत्वपूर्ण होता है।

    बालक के साथ ही प्रत्येक बालक अपने साथियों के साथ खेलते हैं वह खेलते समय जाति-पाति , ऊंच – नीच तथा अन्य प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर दूसरे बालकों के साथ अंतः क्रिया  कर आनंद लेना चाहते हैं इस कार्य व उनके साथी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🌼 संचार मीडिया➖ इसमें रेडियो ,संगीत, टेलीविजन ,न्यूज़, चैनल समाचार, पत्र, तकनीकी नई चीजें इंटरनेट आदि यह सब आते हैं। जो हमारे सामाजिक विकास को प्रभावित करता है।

  🌼☘️  बच्चों के समाजीकरण में शिक्षक की भूमिका☘️🌼

अध्यापक भी बच्चों के व्यक्तिगत व सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है स्कूल शिक्षा एक औपचारिक साधन है तथा क्रमबद्ध रूप से बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान करता है वास्तव में स्कूल बच्चों को वहां से उठाता है जहां से उसका परिवार उसे छोड़ता है।

    अध्यापक शिक्षा के द्वारा बच्चों पर वह सांस्कृतिक मूल्य पैदा करता है जो इस समाज व संस्कृति में मान्य  होता है स्कूल में खेल प्रक्रिया द्वारा बच्चे सहयोग, अनुशासन, सामूहिक कार्य आदि सीखते हैं इस प्रकार स्कूल बच्चों में आधारभूत सामाजिक व्यवहार तथा व्यवहार के सिद्धांतों की नींव डालता है।

    इसके साथ शिक्षक के स्नेह, पक्षपात ,अच्छे और बुरे व्यवहार आदि का बच्चे पर प्रभाव पड़ता है वह कक्षा और खेल के मैदान में, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक प्रयोग में बालकों के सामने सामाजिक व्यवहार के आदर्श प्रस्तुत करता है बालक अपने अनुकरण की मूल प्रवृत्तियों के कारण शिक्षकों के कार्यों, आदतों, और नीतियों का अनुसरण करता है अतः वह अध्यापक का कर्तव्य बन जाता है कि बच्चे के सामान आदर्श प्रस्तुत करें क्योंकि अध्यापक के कथनों तथा कार्यों की छाप बालक पर लग जाती है।

👉🏼 यदि शिक्षक समाजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करना चाहता है तो उन्हें इन बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है।

🟣 अभिभावक शिक्षक सहयोग➖उसे समय-समय पर अभिभावक के संपर्क स्थापित करना चाहिए तथा मिलजुलकर बच्चों के विकास के संबंध में सोचना चाहिए तथा कार्य करना चाहिए।

बालकों /छात्रों के सभी सामाजिक आदर्श स्थापित करना चाहिए।छात्रों को स्कूल की परंपराओं से परिचित कराना चाहिए विभिन्न सामाजिक योजनाओं तथा सामूहिक क्रियाओं के भाग लेने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों को सामाजिक सांस्कृतिक व समाज में प्रचलित बातों का ध्यान देना चाहिए।

 🟣 स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना➖ बच्चों के लिए स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करनी चाहिए जिससे उन्हें इमानदारी और परिपक्वता की भावना विकसित हो।

    इसके विपरीत यदि स्वस्थ प्रतियोगिता नही होगी तो उनमें समाजीकरण का विकास नहीं होगा इससे शिक्षक तीव्र और कुशल समाजीकरण का विकास नहीं कर सकता।

🟣 सामाजिक आदर्श➖ शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चों को खेल के मैदान सामाजिक सांस्कृतिक क्रिया व्यवहार और कक्षा -कक्ष वे सामाजिक आदर्श स्थापित कर सके। बालकों के साथ स्नेह तथा सहानुभूति का बर्ताव करना चाहिए।

   अध्यापक को सहयोगियों छात्रों तथा प्रधानाचार्य के साथ मानवीय संबंध स्थापित करना चाहिए। स्कूलों में विभिन्न परिवारों के बच्चे आते हैं ,उनकी संस्कृति भिन्न- भिन्न  होती हैं अतः अध्यापक को बच्चों के अन्त:सांस्कृतिक भावना का विकास करना चाहिए।

🟣 स्कूल की परंपरा➖ स्कूल की परंपरा को उन्नत बनाए रखने की लिए बच्चों में विश्वास जागृत करना अति आवश्यक है और ऐसा विश्वास जागृत करना चाहिए जिसका बालक अनुसरण कर कर अपना सामाजिक विकास कर सके।

🟣 सामूहिक कार्य को प्रोत्साहन➖सामाजिक योजनाओं तथा सामूहिक प्रयोग में भाग लेने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

     जैसे सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेना, योजना बनाना, अच्छे तौर-तरीके सिखाना आदि सभी चीजों में भाग लेना चाहिए जिससे बालक का सर्वांगीण विकास हो सके तथा व समाज पर एक श्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर सके।

✍🏻📚📚📚 Notes by…. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

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