वंशानुक्रम और वातावरण

              11/03/2021

👉  मनुष्य का विकास इन दो कारकों से हुआ…..

1) जैविक विकास 

 2)सामाजिक विकास

👉 जैविक विकास का दायित्व माता-पिता से होता है

👉 सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण से होता है

➡️ गर्भ:— heridty 

➡️ जन्म:—Enviroment

➡️ वंशानुक्रम :—- प्रकृति (nature)

➡️ वातावरण :—-पोषण (nurture)

😎 वुड बर्थ के अनुसार :—-एक पौधा का वंशानुक्रम उसके बीच में निहित है, और उसके पोषण का दायित्व वातावरण पर निर्भर है

अतः वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण का अंतर क्रिया का फल है

👉 मनोवैज्ञानिक ने यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किस का सहयोग ज्यादा है अतः इन दोनों को मापा नहीं जा सकता

                🚻वंशानुक्रम🚻

जैसे माता-पिता होते हैं वैसे संतान होती है बालक शारीरिक गुण में माता-पिता के अनुरूप होते हैं

 👉मनोवैज्ञानिक का मत यहां तक है, बालक अपने माता पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक गुण प्राप्त करते हैं

                🤔अपवाद🤔

👉 इस मत के अनुसार स्वस्थ एवं विद्वान माता-पिता के बच्चे स्वस्थ एवं विद्वान जन्म लेते हैं l

👉 कई बार विद्वान माता-पिता के बच्चे मंद- बुद्धि और मंद -बुद्धि माता पिता के बच्चे विद्वान होते हैं

👉 इसका कारण अन्य पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता के द्वारा ही होता है

अतः  शारीरिक, मानसिक गुण अपने माता-पिता से नहीं ,बल्कि पूर्वजों से भी प्राप्त होता है lयह कुछ ऐसे गुण है जो आया था माता-पिता से लेकिन वह प्रबल नहीं थे लेकिन वह गुण जो बच्चों में आया वह प्रबल हो गया l

😎  वुडबर्थ के अनुसार:— वंशानुक्रम में वे सभी बातें आ जाती है जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थे । यह जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के समय जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चा पैदा हो जाता है

😎 ज. ए . थॉम्पसन:— वंशानुक्रम,  कर्मवध पीढ़ियों  के बीच उत्पत्ति संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है।

😎H. A. पीटरसन:— वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है

😎 P .gisbert:— प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविकीय या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्थानांतरण करना है । इस प्रकार हैं हस्थानांतरित विशेषताओं की मिली जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है

😎 डगलस/ हॉलैंड के अनुसार:— माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं, विशेषताएं, क्रियाएं अथवा क्षमताओं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित हैं

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Notes by :— संगीता भारती 🙏

*Heredity and Environment*

  मनुष्य का विकास इन दो कारकों से हुआ □

■जैविक विकास 

 ■सामाजिक विकास

 *जैविक विकास का दायित्व माता-पिता से होता है।*

*सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण से होता है।*

 *गर्भाधान के समय — Heredity  जन्म के बाद—Enviroment*

 *वंशानुक्रम — प्रकृति — Nature                          वातावरण — पोषण — Nurture*

 🧱 *Woodworth*:—- एक पौधा का *वंशानुक्रम उसके बीज़ में निहित है और उसके पोषण का दायित्व वातावरण* पर निर्भर है।

अतः वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण का अंतर क्रिया का फल है।

 मनोवैज्ञानिक ने यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किसका सहयोग ज्यादा है, अतः इन दोनों को मापा नहीं जा सकता हैं। 

                *Heredity*

*जैसे माता-पिता होते हैं वैसे संतान* होती है । बालक शारीरिक गुण में माता-पिता के अनुरूप होते हैं।

💡 मनोवैज्ञानिक का मत यहां तक है, बालक अपने माता पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक व सामाजिक गुण भी प्राप्त करते हैं।

 इस मत के अनुसार स्वस्थ एवं विद्वान माता-पिता के बच्चे स्वस्थ एवं विद्वान जन्म लेते हैं — *Heredity ka sidhyant* 

 विद्वान माता-पिता के बच्चे मंद- बुद्धि और मंद -बुद्धि माता पिता के बच्चे विद्वान होते हैं — *Pratyagaman ka sidhyant* 

🕯️ इसका कारण अन्य पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता के द्वारा ही होता है।

अतः  *शारीरिक, मानसिक गुण अपने माता-पिता से नहीं ,बल्कि पूर्वजों से भी प्राप्त होता है* l यह कुछ ऐसे गुण है जो आया तो दादा दादी  व नाना नानी से माता-पिता में लेकिन वह प्रबल नहीं थे परन्तु जब वह गुण बच्चों में आया तो वह प्रबल हो गया , जिससे वह दिखने लगा l

🧱  *Woodworth*:— वंशानुक्रम में वे सभी बातें आ जाती है जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थे । यह *जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के समय जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चो में पैदा हो जाता है*।

 🥸 *J•A•Thompson*:— वंशानुक्रम,  क्रमबद्ध पीढ़ियों  के बीच उत्पत्ति संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है।

👶🏻 *H. A. Piterson*:— वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है।

 👽 *P•Gisbert*:— प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविकीय या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्थानांतरण करना है । इस प्रकार हैं हस्थानांतरित विशेषताओं की मिली जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है

👿😈 *डगलस और हॉलैंड के अनुसार* :— माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं, विशेषताएं, क्रियाएं अथवा क्षमताओं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित हैं।

📜 _*Deepika Ray*_

💞  New chapter💞

  🗣️(Effects of Hereditary and Environment on      children)

💦🧠वंशानुक्रम और वातावरण🧠

🤷🏻‍♂️मनुष्य का विकास जिन दो कारणों की वजह से होता है उन्हें समानता हम निम्नलिखित नामो से  पुकारते हैं;

🌸१- जैविक कारक ( अनुवांशिकता)

🌸२-सामाजिक कारक (वातावरण)

🌸जैविक कारक का दायित्व माता-पिता पर होता है।

🌸सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण पर होता है।

🌸माता पिता जी शिशु को जन्म देते हैं उसका शारीरिक विकास गर्भकाल से ही शुरू हो जाता है और  विकास जन्म के उपरांत वातावरण में भी होता है।

🌸जब बच्चा गर्भ में रहता है तो उस पर अनुवांशिकता का महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है।

🌸जन्म के उपरांत बच्चे पर वातावरण का अधिक प्रभाव पड़ता है अनुवांशिकता के परिप्रेक्ष्य में, क्योंकि जीन के  द्वारा जो भी गुण आने थे आ चुके है।

🌸वंशानुक्रम अर्थात अनुवांशिकता का अन्य नाम प्रकृति भी है जिसको( Nature) कहते हैं;

🌸वातावरण का अन्य नाम पोषण है जिसको (Nuture) कहते हैं।

🌺वुडवर्थ के अनुसार÷  एक पौधे का वंशानुक्रम उसके बीच में निहित है और उसके पोषण का दायित्व उसके वातावरण पर निर्भर करता है।

🌸वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।

🌸मनोवैज्ञानिकों में अनेकों मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किस का सहयोग कितना है प्राणी के विकास या परिवर्तन में;

                🎉 वंशानुक्रम🎉

           🌷   (Hereditary)🌷

🌸वंशानुक्रम में जैसे माता-पिता होते हैं वैसे ही उनकी संतानें भी होती हैं;

💥💥(Be like begets like)💥💥

🌸बालक शारीरिक गुण में माता-पिता के अनुरूप होते हैं।

🌸मनोवैज्ञानिक का मत यहां तक है कि बालक अपने माता पिता से केवल शारीरिक गुण ही नहीं, बल्कि मानसिक सामाजिक गुण भी प्राप्त करते हैं।

🌸यदि स्वास्थ्य व विद्वान माता पिता है तो उनके बच्चे भी स्वास्थ्य व विद्वान होते हैं;

किंतु इसके अनेक अपवाद भी हैं

✋जैसे÷कई बार विद्वान व स्वस्थ माता-पिता के बच्चे मंदबुद्धि भी हो जाते हैं 

                        व

✋मंदबुद्धि माता-पिता के बच्चे विद्वान हो जाते हैं, इसका कारण यह है कि शारीरिक, मानसिक गुण केवल माता-पिता से ही नहीं आते बल्कि पूर्वजों से भी आ जाते हैं।

✋कई बार ऐसा भी होता है कि पूर्वजों से आए गुण माता-पिता में सक्रिय नहीं रहते हैं किंतु उनके बच्चों में आकर सक्रिय हो जाते हैं।

🌸पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता पिता के द्वारा ही होता है ना कि की पूर्वजों से सीधे बच्चों में हो जाए;

🗣️वुडवर्थ का कथन÷वंशानुक्रम में सभी बातें आ जाती हैं जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में थी,यह जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के समय जन्म से लगभग ९ माह पूर्व बच्चा पैदा हो जाता है।

🗣️जे जे थॉम्पसन का कथन ÷वंशानुक्रम क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति संबंधी के लिए सुविधाजनक है।

🗣️एच ए पीटरसन का कथन÷वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है।

🗣️पी.जिसबर्ट का कथन÷प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविकीय  या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्तांतरण करता है इस प्रकार का हस्तांतरण विशेषताओं की मिली-जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है।

🗣️डग्लस व हालैंड का कथन÷माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं विशेषताएं क्रिया अथवा क्षमताएं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित रहती हैं।

🥀Written by shikhar pandey 🥀

✴️ वंशानुक्रम और वातावरण✴️

➖️ मनुष्य का विकास इन 2 कारणों से होता है 

जैविक क और सामाजिक कारण

💮जैविक विकास➖️ जैविक विकास का दायित्व माता-पिता से होता है 💮सामाजिक विकास➖️ सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण पर निर्भर करता है

🍀 गर्भ ➖️जो बच्चा गर्भ में होता है तो वंशानुक्रम पर निर्भर होता है

🍀 जन्म ➖️के बाद जब बच्चे का जन्म हो जाता है तो जन्म के बाद वातावरण पर निर्भर हो जाता है

🍀वंशानुक्रम ➖️को प्रकृति भी माना जाता है वातावरण को पोषण भी माना जाता है वंशानुक्रम को प्रकृति और वातावरण को पोषण कह सकते हैं

✏️बुडबर्थ ➖️एक पौधे का वंशानुक्रम उसके बीज मे निहित है उसके पोषण का दायित्व वातावरण पर निर्भर है

जैसे हम किसी के बारे में बोलते हैं कि उसका प्रकृति ही ऐसा ऐसी है मतलब उसका स्वभाव  ही ऐसा है  वंशानुक्रम  पर प्रभाव पड़ता है

🌲वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण की अंतः क्रिया का फल है

मनोविज्ञान मे यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किसका संबंध ज्यादा है हम बता नहीं सकते है और इन दोनों की तुलना नहीं की जा सकती है हर इंसान में अलग-अलग परिवर्तन होते हैं

🌲वंशानुक्रम➖️ वंशानुक्रम का मतलब यह है कि जैसे माता-पिता होते हैं वैसे ही संतान पैदा होती है इन में शारीरिक गुण माता पिता के जैसे ही होते हैं जैसे माता-पिता होंगे वैसे ही बच्चे का शारीरिक गुण होते है जैसे आंख नाक कान हाथ पैर ऊंचाई यह सारे गुण के अंतर्गत आते हैं

मनोवैज्ञानिक का यह मत भी है कि बालक अपने माता पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक गुण भी प्राप्त करता है जिस बच्चे के माता-पिता स्वास्थ्य और बुद्धिमान होते हैं उनका बच्चा भी स्वस्थ और बुद्धिमान होता है

अपवाद ➖️इसमें अपवाद भी हैं अगर माता-पिता विद्वान है तो बच्चे मंदबुद्धि का हो सकता है और मंदबुद्धि माता-पिता की संतान तीव्र बुद्धि की हो सकती है

  इसका प्रमुख कारण यह है कि शारीरिक मानसिक और माता-पिता से प्राप्त ना होकर उनके पूर्वजों से भी प्राप्त हो सकते हैं जैसे दादा-दादी परदादा परदादी नाना नानी से भी हो सकते हैं क्योंकि दादा दादी नाना नानी से माता-पिता में जो गुण आना था वह पूर्ण विकसित नहीं हो पाता है  और बच्चों में हो जाता है वह माता-पिता में ना दिखकर बच्चों में दिख जाता है माता-पिता में पूर्ण तरीके से प्रबल नहीं हो पाता है बालकों में पूर्ण तरीके से प्रबल हो जाता है और यह माता-पिता द्वारा बच्चों में आ जाते हैं

✏️बुडबर्थ ➖️वंशानुक्रम में भी सभी बातें आ जाती है जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थे यह जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के समय जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चा पैदा हो जाता है

✏️j. a.थॉमसन ➖️वंशानुक्रम क्रमबद्ध पीढ़ी के बीच उपस्थित संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है

✏️एच ए पीटशन ➖️वंशानुक्रम को एक प्रकार की परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है

✏️P. Gisbbert ➖️प्रकृति के प्रत्येक कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविकीय या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्तांतरण करना है इस प्रकार है हस्तांतरित विशेषताओं में मिली जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है

 ✏️डग्लस हॉलेंस के अनुसार➖️ माता-पिता  अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त शारीरिक रचनाएं विशेषताएं क्रियाएं और क्षमता व्यक्तियों के वंशानुक्रम से संबंधित है

Notes by sapna yadav

🌼🌼वंशानुक्रम और वातावरण🌼🌼

🌼🌼  मनुष्य का विकास  दो कारकों से हुआ है….

🌼1.जैविक विकास 

 🌼2.सामाजिक विकास

🌼 जैविक विकास का दायित्व माता-पिता से होता है तथा

 🌼सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण से होता है

🌼 गर्भ:- heredity 

🌼 जन्म:-Environment

🌼 वंशानुक्रम :- प्रकृति (nature)

🌼वातावरण :-पोषण (nurture)

🌼🌼 वुड बर्थ के अनुसार :-

“एक पौधा का वंशानुक्रम उसके बीच में निहित है, और उसके पोषण का दायित्व वातावरण पर निर्भर है अतः वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण का अंत:क्रिया का फल है”

 मनोवैज्ञानिक ने यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में कौन सबसे ज्यादा महत्व पूर्ण है अतः इन दोनों को मापा नहीं जा सकता

🌼🌼🌼वंशानुक्रम:-

जैसे माता-पिता होते हैं वैसे संतान होती है बालक शारीरिक गुण में माता-पिता के अनुरूप होते हैं

 🌼मनोवैज्ञानिक का मत यहां तक है, बालक अपने माता पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक गुण प्राप्त करते हैं

 🌼🌼अपवाद:-

 इस मत के अनुसार स्वस्थ एवं विद्वान माता-पिता के बच्चे स्वस्थ एवं विद्वान जन्म लेते हैं l

 कई बार विद्वान माता-पिता के बच्चे मंद- बुद्धि और मंद -बुद्धि माता पिता के बच्चे विद्वान होते हैं

🌼 इसका कारण अन्य पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता के द्वारा ही होता है

अतः  शारीरिक, मानसिक गुण अपने माता-पिता से नहीं ,बल्कि पूर्वजों से भी प्राप्त होता है कुछ ऐसे गुण होते है जो पूर्वजो से माता-पिता को प्राप्त हुए होंगे लेकिन वह प्रबल नहीं थे लेकिन वह गुण जो बच्चों में आया तो वह प्रबल हो गया l

🌼🌼  वुडबर्थ के अनुसार:-” वंशानुक्रम में वे सभी बातें आ जाती है जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थे । यह जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के समय जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चा पैदा हो जाता है”

 🌼 J. या. थॉम्पसन:-” वंशानुक्रम,  कर्मवध पीढ़ियों  के बीच उत्पत्ति संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है।”

🌼H. A. पीटरसन:-” वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है”

🌼 P . गिस्वर्ट:-” प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविकीय या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्थानांतरण करना है  इस प्रकार हैं हस्तानांतरित विशेषताओं की मिली जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है”

🌼 डगलस/ हॉलैंड के अनुसार:-” माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं, विशेषताएं, क्रियाएं अथवा क्षमताओं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित हैं”

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

🌼🌼🌼🌼Manjari soni🌼🌼🌼🌼

💫🌻 वंशानुक्रम और वातावरण🌻💫

🤷🏻‍♀️ मनुष्य का विकास इन दो कारकों से हुआ है।

☘️ जैविक विकास

☘️ सामाजिक विकास

☘️ जैविक विकास➖ जैविक विकास का दायित्व माता-पिता से होता है।

☘️ सामाजिक विकास➖ सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण से होता है।

🌼 गर्भ 

🌼 जन्म

🌼 वंशानुक्रम—प्रकृति

🌼 वातावरण—पोषण

☘️🤵🏻‍♂वुडवर्थ  के अनुसार➖”एक पौधे का वंशानुक्रम उसके बीच में निहित हैं और उसके पोषण का दायित्व वातावरण  पर निर्भर करता है”।

अतः वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण का अंत:क्रिया का

 फल है।

☘️🌻 वंशानुक्रम ☘️🌻(Heredity)

कोई भी बालक अपने माता-पिता तथा अन्य पूर्वजों के जो विभिन्न शारीरिक और मानसिक गुण गर्भाधान के समय प्राप्त करते हैं वह उसके वंशानुगत गुण ( heredity traits) कहलाते हैं

मनोवैज्ञानिकों का मत यहां तक है बालक शारीरिक गुण  ही नहीं बल्कि मानसिक सामाजिक गुण प्राप्त करते हैं।

☘️🌼 अपवाद☘️🌼

इस मत के अनुसार स्वस्थ एवं विद्वान माता-पिता के बच्चे स्वस्थ एवं विद्वान जन्म लेते हैं।

कई बार विद्यमान माता-पिता के बच्चे मंदबुद्धि और मंदबुद्धि माता-पिता के बच्चे विद्यमान होते हैं।

इसका कारण अन्य पुरुषों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता के द्वारा ही होता है अतः शारीरिक मानसिक वह अपने माता-पिता से नहीं बल्कि पूर्वजों से भी प्राप्त होता है यह कुछ ऐसे गुण हैं जो आया था माता-पिता से लेकिन वह प्रबल नहीं था लेकिन वह गुण जो बच्चों में आया वह प्रबल हो जाता है।

☘️🤵🏻जे. जे. थाॅम्पसन का कथन➖ “वंशानुक्रम क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति संबंधी  के लिए सुविधाजनक है”।

☘️👨🏻‍🔬एच.ए.पीटरसन➖”व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों की जो भी विशेषताएं प्राप्त होती है उसे वंशानुक्रम कहते हैं”।

☘️🧑🏼‍💼पी. जिसबर्ट का कथन➖”प्रकृति में पीढ़ी का प्रत्येक कार्य कुछ जैविक अथवा मनोवैज्ञानिक विशेषताओं को माता-पिता द्वारा उनके संतानों में हस्तांतरित करना है”।

☘️ 🤵🏻/🤵🏻‍♂डगलस /हालैंड का कथन➖माता-पिता या अन्य पुरुषों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक , संरचनाएं, विशेषताएं, क्रियाएं अथवा क्षमताएं व्यक्ति के वंशज क्रम में सम्मिलित है।

✍🏻📚📚 Notes by,…… Sakshi Sharma📚📚✍🏻

अनुवांशिकता  और  वातावरण

   Heredit  &  Environment

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11 march 2021

मनुष्य का विकास निम्नलिखित दो कारकों से होता है :- 

👉 1. जैविक विकास        ( अनुवांशिकता )

👉 2. सामाजिक विकास   ( वातावरण / परिवेश )

अतः जैविक विकास का दायित्व माता-पिता अर्थात वंशानुक्रम पर होता है।

सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण पर होता है।

गर्भ में रहने वाले बच्चे पर अपने अनुवांशिकता का प्रभाव होता है। तथा –

जन्म के उपरांत बच्चे पर बाहरी वातावरण / अपने सामाजिक परिवेश का प्रभाव होता है।

अनुवांशिकता के रूप में ( जीन Gene ) के द्वारा बच्चों में अनुवांशिक गुण गर्भाधान के समय से ही आ जाते हैं।  

तथा अन्य सामाजिक गुण बच्चों में जन्मोपरांत अपने वातावरण से आते हैं।

               अतः मानव जीवन में अनुवांशिकता और वातावरण का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है।

🌺  वंशानुक्रम और वातावरण को अन्य नाम से भी जानते हैं जैसे  :-

👉 वंशानुक्रम  —   प्रकृति     ( Nature   )

👉वातावरण  —  पोषण     ( Nurture ) 

💐  वुडवर्थ   के अनुसार  :-

एक पौधे का ‘ वंशानुक्रम ‘ उसके बीज में निहित है , और उसके ‘ पोषण ‘ का दायित्व उसके ‘ वातावरण ‘ पर निर्भर है।

                 वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण की अंतःक्रिया का फल है। 

मनोविज्ञान में यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किस का सहयोग ज्यादा है। 

         अतः वंशानुक्रम और वातावरण से आए हुए लक्षणों को ‘ मापा ‘ नहीं जा सकता है ,  एवं 

वंशानुक्रम से आए हुए लक्षण कभी बदलते नहीं हैं वह हमेशा ‘ स्थिर ‘ रहते हैं।

        🌺  वंशानुक्रम  🌺

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वंशानुक्रम से तात्पर्य है कि बच्चों में उपस्थित ऐसे गुण जो कि उन्हें अपने माता-पिता से जन्म के माध्यम से प्राप्त हुए हैं।

जैसे माता-पिता होते हैं वैसी संतान होती है।

बालक शारीरिक गुणों में अपने माता – पिता के अनुरूप होते हैं।

मनोवैज्ञानिकों का मत यहां तक है कि बालक अपने माता-पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक ,  सामाजिक और संवेगात्मक गुण भी प्राप्त करते हैं।

🌻  यदि माता-पिता स्वस्थ्य और विद्वान हैं तो उनके बच्चे भी स्वस्थ्य और विद्वान होते हैं ।

परंतु इसमें भी कुछ अपवाद हैं जैसे कि :-

👉 स्वस्थ्य और विद्वान माता-पिता के बच्चे :-

अस्वस्थ और मूर्ख / क्षीण बुद्धि के भी हो सकते हैं।

👉 विद्वान माता पिता के बच्चे :-

मंदबुद्धि भी हो सकते हैं।

👉 मंदबुद्धि माता – पिता के बच्चे :-

बुद्धिमान भी हो सकते हैं।

इसका कारण है कि शारीरिक , मानसिक गुण सिर्फ अपने माता-पिता से नहीं बल्कि अपने पूर्वजों से भी प्राप्त होते हैं।

        अतः पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता के माध्यम से ही होता है।

कई बार पूर्वजों के गुण माता-पिता में भले ही सक्रिय ना रहें परन्तु बच्चों में अपने पूर्वजों के गुणों की सक्रियता देखी जाती है।

💐  वुडवर्थ  के अनुसार  :-

वंशानुक्रम में वे सभी बातें आ जाती हैं जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थीं।

            अतः ये जन्म के समय से नहीं बल्कि जन्म से 9 माह पूर्व गर्भाधान के समय ही बच्चों में पैदा हो जाती हैं।

👉  अर्थात्  वंशानुक्रम के लक्षण मनुष्य में जन्म के उपरांत नहीं बल्कि गर्भाधान के समय से ही आ जाते हैं जो कि जीवन पर्यंत मनुष्यों में स्थिर रूप से समाहित रहते हैं। 

💐  J . A. थॉम्पसन  के अनुसार :-

वंशानुक्रम , क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति संबंधी,  संबंध के लिए सुविधाजनक है।

💐 H . A .  पीटरसन  के अनुसार  :-

वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है , वही वंशानुक्रम है।

💐  P . जिसबर्ट   के अनुसार :-

प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता ,  संतानों में कुछ जैवकीय या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्तांतरण करते हैं , इस प्रकार हस्तांतरित विशेषताओं की मिली-जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है।

💐  डगलस व हॉलैंड   के अनुसार  :-

माता-पिता , अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं , विशेषताएं , क्रियाएं अथवा क्षमताएं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित रहती हैं।

✍️Notes by  – जूही श्रीवास्तव✍️

🔆   वंशानुक्रम और वातावरण ➖

मनुष्य का विकास दो कारको से हुआ है।

1 जैविक कारक / वंशानुक्रम/प्रकृति

2 सामाजिक कारक /वातावरण/पोषण

▪️जैविक विकास का दायित्व माता पिता पर निर्भर करता है जबकि सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण पर निर्भर करता है

▪️जब बच्चा गर्भ में होता है तो केवल उस पर अनुवांशिकता का प्रभाव  पड़ता बल्कि इसके साथ साथ जन्म के पश्चात वातावरण भी  प्रभावित करता है 

🔹वुडवर्थ :-“एक पौधे का वंशानुक्रम उसके बीज में निहित होता है और उसके पोषण का दायित्व उसके वातावरण पर निर्भर करता है वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण की अंतः क्रिया का फल है।”

मनोविज्ञान में यह चर्चा या मतभेद भी रहा है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किसका कितना सहयोग है वंशानुक्रम वातावरण में किसका प्रभाव ज्यादा या कम होगा इसको मात्रात्मक रूप से मापा नहीं जा सकता।

❇️ वंशानुक्रम  जैसे माता-पिता होते हैं वैसे ही संतान होती है बालक शारीरिक उनमें माता-पिता के अनुरूप होते हैं।

मनोविज्ञान का यह मत है कि बालक अपने माता पिता से शारीरिक गुण ही नहीं बल्कि मानसिक व सामाजिक गुणों को भी प्राप्त करते हैं।

▪️इस नियम के अनुसार स्वस्थ् (शारीरिक) एवम् विद्वान (मानसिक) माता पिता के बच्चे भी  स्वस्थ (शारीरिक) एवं विद्वान (मानसिक) होते हैं ।

▪️लेकिन कुछ अपवाद भी हैं यदि माता-पिता विद्वान है तो उनके बच्चे मंदबुद्धि हो जाते हैं और कभी-कभी मंदबुद्धि माता-पिता के बच्चे विद्वान भी हो जाते हैं।

▪️इसका कारण है कि शारीरिक मानसिक गुण अपने माता-पिता से नहीं बल्कि पूर्वजों से मतलब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी से भी प्राप्त होते हैं।

▪️दादा दादी से कई गुना ऐसे होते हैं जो माता-पिता से बच्चों तक स्थानांतरित होते हैं जबकि कुछ बुरे ऐसे भी होते हैं जो दादा दादी से माता-पिता में स्थानांतरित तो होते हैं लेकिन प्रबल नहीं होते कभी-कभी ऐसे गुण माता-पिता के बाद बच्चों में प्रबल रूप से दिखाई देते हैं बच्चों में पूर्वजों के गुणों का स्थानांतरण माता-पिता द्वारा होता है।

▪️वंशानुक्रम के संदर्भ में कुछ मनोवैज्ञानिक कथन :-

▪️वुडवर्थ वंशानुक्रम में सभी बातें आ जाती हैं जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित थी यह जन्म के समय नहीं बल्कि गर्भाधान के साथ जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चा पैदा हो जाता है।

🔹जे. ए. थॉम्पसन :- वंशानुक्रम क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है।

🔹एच. ए. पीटरसन :- वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है।

🔹पी जिसबर्ट :-  प्रकृति में प्रत्येक बीड़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैविक की है या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का स्थानांतरण है इस प्रकार हस्तांतरित विशेषताओं की मिली-जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है।

🔹डग्लस व हॉलैंड :- माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त शारीरिक रचनाएं विशेषताएं क्रियाएं अथवा क्षमताएं व्यक्ति के वंशानुक्रम में सम्मिलित रहती हैं।

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Notes By-‘Vaishali Mishra’

🏵 Heridity  and Environment  🏵

🎗वंशानुक्रम  और वातावरण 🎗

 मनुष्य का विकास दो बातों पर निर्भर होता है  

🔸जैविक विकास पर और   

          🔸सामाजिक विकास पर 

💧 जैविक विकास का दायित्व माता-पिता पर होता है। सामाजिक विकास का दायित्व वातावरण पर होता है।

🔹जब बच्चा गर्भ में आता है याजन्म से पूर्व की जो अवस्था होती है उस समय उसके विकास में उसके वंशानुक्रम का प्रभाव होता है। 

🔹और जन्म के बाद उसके विकास में वातावरण का योगदान होता है।

 वंशानुक्रम  = प्रकृति  (नेचर)

 वातावरण  = पोषण  ( नर्चर )

🌳 वुडवर्थ का कथन 

एक पौधे का वंशानुक्रम उसके बीज  में निहित है और उसके पोषण का दायित्व उसके वातावरण पर निर्भर है ।

 वंशानुक्रम तथा वातावरण का अध्ययन प्राणी के विकास तथा वातावरण की अंतः क्रिया का फल है ।

 मनोविज्ञानिकों में यह चर्चा और मतभेद रहता है कि वंशानुक्रम और वातावरण में किस का सहयोग ज्यादा है।

 क्योंकि कुछ मैंनोवैज्ञानिकों का मानना होता है कि वंशानुक्रम ज्यादा महत्वपूर्ण है और वातावरण कम और कुछ मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं कि वातावरण का योगदान कम है लेकिन यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वातावरण का या वंशानुक्रम का किसका कितना कितना योगदान है ।

🌟    Heridity 

 🌟   वंशानुक्रम 

 * जैसे  माता-पिता होते हैं वैसे ही संतान होती है । 

* बालक शारीरिक गुण में माता-पिता के अनुरूप होते हैं ।

 मनोवैज्ञानिको का मत यहां तक है कि बालक अपने माता पिता से सारे गुण ही नहीं बल्कि मानसिक सामाजिक गुण भी प्राप्त करते   हैं।

 माता-पिता स्वस्थ / विद्वान होंगे तो बच्चे भी स्वस्थ और विद्वान  होंगे ।

 कुछ अपवाद भी है -:

 जैसे –

: विद्वान माता-पिता के मंदबुद्धि बालक और 

मंदबुद्धि माता-पिता के बुद्धिमान बालक

* इसका कारण यह है कि शारीरिक मानसिक गुण अपने माता-पिता से ही नहीं बल्कि पूर्वजों से भी प्राप्त होता है ।

🍁 विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा वंशानुक्रम के लिए दिए गए कथन

🫐  वुडवर्थ 

वंशानुक्रम में वे सभी बातें आ जाती हैं जो जीवन का आरंभ करते समय व्यक्ति में उपस्थित 

थी। 

यह जन्म के समय नहीं बल्कि  गर्भाधान के समय जन्म से लगभग 9 माह पूर्व बच्चों में पैदा हो जाती है।

☀ जे. ए.  थॉम्पसन 

 वंशानुक्रम क्रमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति संबंधी संबंध के लिए सुविधाजनक है ।

🌟 एच. ए. पीटरसन 

वंशानुक्रम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि व्यक्ति अपने माता-पिता के माध्यम से पूर्वजों के जो कुछ गुण प्राप्त करता है वही वंशानुक्रम है।

🫐 पी जिसबर्ट 

 प्रकृति में प्रत्येक पीढ़ी का कार्य माता-पिता संतानों में कुछ जैवकिय  या मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का हस्तानांतरण  करना है, इस प्रकार हस्तानांतरित विशेषताओं की मिली जुली गठरी को वंशानुक्रम के नाम से पुकारा जाता है।

 🍀 डग्लस / हॉलैंड

 माता-पिता या अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त समस्त  रचनाएं, विशेषताएं, क्रियाएं अथवा  क्षमताएं व्यक्ति के वंशानुक्रम में  सम्मिलित रहती हैं।

 धन्यवाद

 वंदना शुक्ला

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