🔆किशोरावस्था के चरण या किशोरावस्था की उपअवस्थाएं➖

किशोरावस्था के निम्न तीन चरण है:-

1 पूर्व किशोरावस्था /प्रारंभिक किशोरावस्था(12 से 14 वर्ष)
2 मूल किशोरावस्था (14 से 16 वर्ष)
3 अंतिम किशोरावस्था (16 से 18 वर्ष)

यह तीनों ही चरण अत्यंत महत्वपूर्ण है और तीनों ही एक दूसरे से अलग भी हैं।

💠1 पूर्व किशोरावस्था/ प्रारंभिक किशोरावस्था (12 से 14 वर्ष) ➖

यह शुरुआती अवस्था का समय है जिसमें बच्चा बड़ा हो रहा होता है अर्थात इस समय बच्चे में होने वाले कई परिवर्तन की शुरुआत इसी अवस्था में होती है।
यह परिवर्तन कई रूप में देखे जा सकते हैं जैसे: –

⚜️ अचानक से शारीरिक विकास में तेजी झलक ने लगती हैं।
⚜️ आवाज में भारीपन या आधार बनने लगता है।

⚜️ पेर व हाथों की लंबी हड्डियों का विकास तीव्रता से होता है।
⚜️ इस अवस्था में किशोर किशोरियों की लंबाई 8 से 9 इंच तक प्रतिवर्ष बढ़ जाती है।
⚜️ इस उम्र में बच्चे अपने समूह में जाने की चेष्टा करने लगते हैं।
⚜️ सामाजिक विकास तीव्र होने लगता है अर्थात बच्चे की जो अपने आसपास के बारे में समझ है वह बढ़ने लगती है।
⚜️ यौन विकास में गतिशीलता आने लगती है।

कई अभिभावक असामान्य व्यवहार को स्वीकार नहीं करते और बच्चे को दोषी ठहराते हैं जिससे इस चरण में बच्चे घबरा जाते हैं परिणाम स्वरूप जो भी सामाजिक सांस्कृतिक सीमा और यौन इच्छाओं में संतुलन व सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते हैं ।

बच्चों में इस अवस्था में होने वाले यह परिवर्तन अत्यंत ही आवश्यक है जोकि होना निश्चित है इन्हें नकारा नहीं जा सकता यह बच्चों के शारीरिक परिवर्तन मानसिक परिवर्तन विकास का ही हिस्सा है विकास में बच्चे के जो भी भाव, विभिन्न प्रकार की सोच या विचार व समझ व नए ज्ञान को जानने की जिज्ञासा भी रहती है जिसे जानना और समझना उनके लिए जरूरी है।
इसीलिए माता पिता को यह ध्यान रखना है कि वह बच्चे का पूरी तरह से और सही तरीके से मार्गदर्शन करें ।अभिभावक समय-समय पर बच्चों का अवलोकन करते रहे और जो भी परिवर्तन या जो भी चुनौतिया आ रही है उन्हे स्वीकारे करे।

💠 2 मूला अवस्था (14 से 16 वर्ष)➖

अब बच्चा पूर्व में प्राप्त हुए सभी परिवर्तनों को आगे लेते हुए बढ़ता है।
इस अवस्था में कई परिवर्तन निम्न रूप में देखे जा सकते हैं।

⚜️ यह चरण बच्चे के शारीरिक ,भावनात्मक, बौद्धिक या मानसिक क्षमता के विकास को दर्शाता है।

⚜️ इस चरण में यौन लक्षणों का विकास जारी रहता है।

⚜️ किशोरो व किशोरियां कई शारीरिक अंगों में परिपक्वता को प्राप्त करने लगता है उनके प्रजनन अंग शुक्राणु उत्पन्न करने में सक्षम होने लगते हैं।

⚜️ इस उम्र में बच्चे अपने आप को अभिभावक या माता-पिता से दूर रखने लगते हैं या उनसे दूरी बना लेते हैं उनको यह लगने लगता है कि उनमें जिस तरह के परिवर्तन हो रहे हैं वह उन परिवर्तनो के बारे में अपनी बातों को नहीं रख पाते हैं।

⚜️ वह प्राय: आदर्शवादी बनने की कोशिश करते हैं उनमें जो भी आंतरिक व बाह्य परिवर्तन जो होते हैं वह स्वयं ही उसे जानते हैं किसी अन्य को नहीं बताना चाहते है।
यौन विकास को जानने की इच्छा निरंतर उनमें बढ़ती जाती है।

⚜️ यह चरण में बच्चो का साहस व प्रयोग से भरा हुआ होता है।
बच्चे का साहस व प्रयोग किस दिशा में आगे बढ़ेगा यह उसके वातावरण एवं अभिभावक पर निर्भर करता है।

⚜️इस उम्र के प्रत्येक बच्चे में विपरीत लिंग और समवय समूह से संबंध रखना चाहता है।

⚜️ इस चरण में बच्चा अपने अस्तित्व को जानना चाहता है और समाज में अपना योगदान भी किसी ना किसी रूप में देना चाहता है ।

⚜️ बच्चे की मानसिकता और जटिल हो जाती है अर्थात किसी भी कार्य या विषय के बारे में अपनी अमूर्त सोच या उसके बारे में बारीकी से सोचने लग जाते है।
सोच कि यह सकुलता भावनाओ से आती है।

⚜️ उनकी यह भावनाएं और घनिष्ठ वह गहरी हो जाती हैं।

⚜️ किसी भी कार्य या विषय के प्रति स्वयं निर्णय लेने की शक्ति बढ़ जाती है।

💠 3 अंतिम किशोरावस्था/ किशोरावस्था का अंतिम चरण( 16 से 18 वर्ष) ➖
इस चरण में भी कई परिवर्तन दिखाई देते हैं जो कि निम्न है:-

⚜️ यौन लक्षणों का पूरी तरह से विकास हो जाता है।
⚜️ यौन अंग प्रौढ़ कार्यकलाप में पूर्णत:सक्षम हो जाते है।

⚜️ समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने लगते हैं।

⚜️ कई बार उनकी सोच या विचार वास्तविकता या सच्चाई से बिल्कुल परे या अलग होती है।

⚜️ अब बच्चे में मित्रों के चयन की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है वह अपने मित्रों को खुद से चुनने लगते हैं।

⚜️ इस उम्र में बच्चे अपने जीवन के लक्ष्य को समझने लगता है हालांकि वह अभी भी कई वर्षों तक अपने अभिभावक पर निर्भर रहते हैं।

⚜️ अब वह सही गलत की पहचान के अंतर को समझ पाता है अर्थात उन्हें अब नैतिकता का ज्ञान होता है।

⚜️ भविष्य के लिए अभिलाषी हो जाते हैं।

⚜️ अपने कार्य के लिए वह अभिभावकों एवं समाज का पारस्परिक समर्थन चाहते है जिससे उनके कार्य का बेहतर रूप से संपादन हो सके।

✍️
“Notes By-Vaishali Mishra”

किशोरावस्था के तीन चरण या किशोरावस्था की अवस्थाएं

किशोरावस्था को तीन चरणों में बांटा गया है
1.प्रारंभिक या पूर्व किशोरावस्था -12 से 14 वर्ष
2.मूल किशोरावस्था- 14 से 16 वर्ष
3.अंतिम या उत्तर किशोरावस्था या किशोरावस्था का अंतिम चरण -16 से 18 वर्ष

  1. प्रारंभिक किशोरावस्था

यह 12 से 14 वर्ष की अवधि होती है।
इस चरण में शारीरिक विकास अचानक तेज झलकता है यह परिवर्तन अलग-अलग किशोरों में अलग-अलग होता है
पैर और हाथ की लंबी हड्डियों का विकास तीव्रता से होता है।
किशोर की लंबाई 8 से 9 इंच तक प्रति वर्ष बढ़ जाती है।
12 से 14 वर्ष में बच्चे अपने समूह में जाने की चेष्टा करने लगते हैं।
इस अवस्था में तीव्र सामाजिक विकास होता है।
गतिशील यौन विकास होता है।
कुछ अभिभावक इस सामान्य व्यवहार को स्वीकृत नहीं करते हैं और बच्चों को दोषी ठहराते हैं इस चरण में बच्चे घबरा जाते हैं और सामाजिक सांस्कृतिक सीमा और यौन इच्छाओं में संतुलन या समायोजन नहीं कर पाते हैं।

  1. मूल अवस्था-(14-16 वर्ष)

शारीरिक भावनात्मक बौद्धिक क्षमता के विकास को दर्शाता है।
इस चरण में यौन लक्षण का विकास जारी रहता है।
और उनके प्रजनन अंग शुक्राणु उत्पन्न करने में सक्षम होने लगते हैं।
इस उम्र में किशोर अपने आप को माता-पिता से दूर रखने लगते है।
वह प्रायः आदर्शवादी बनते हैं और यौन विकास को जानने की इच्छा निरंतर बढ़ती जाती है।
यह चरण बच्चों के साहस और प्रयोग से भरा होता है।
प्रत्येक किशोर अपने विपरीत लिंग और समवयस्क समूह से संबंध रखना चाहता है।
14 से 16 वर्ष में बच्चा अपने अस्तित्व को जानना चाहता है और समाज में योगदान भी करता है।
बच्चे की मानसिकता जटिल हो जाती है।
इससे उसकी भावना गहरी और घनिष्ठ हो जाती है।
निर्णय लेने की शक्ति आ जाती है।

  1. किशोरावस्था का अंतिम चरण-(16-18 वर्ष)

यौन लक्षण पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं
इनके यौन अंग प्रौढ़ कार्यकलाप में पूर्णतः सक्षम हो जाते हैं।
समाज में अलग पहचान बनाने लगते हैं।
कई बार उनकी यह पहचान वास्तविकता से परे होती है।
अब मित्रों के चयन की प्रवृत्ति होती है।
किशोर अपने जीवन के लक्ष्य को समझने लगता है।
हालांकि अभी भी कहीं वर्षों तक अभिभावक पर ही निर्भर रहता है।
अब वह सही गलत की पहचान कर पाता है
नैतिकता का विकास होता है
भविष्य के लिए अभिलाषी हो जाते हैं।
अपने कार्य के लिए वह अपने अभिभावक एवं समाज का समर्थन चाहते हैं ताकि उनके कार्य का संपादन हो।

Notes by Ravi kushwah

💐 किशोरावस्था के तीन चरण💐

1 पूर्व किशोरावस्था 12 से 14 year
2 मूल किशोरावस्था 14 से 16 year
3 अंतिम किशोरावस्था 16 से 18 year

1 पूर्व किशोरावस्था प्रारंभिक किशोरावस्था 12 से 14 वर्ष👉 इस चरण में शारीरिक विकास अचानक तेज झलकता है अलग-अलग किशोरों में अलग-अलग होता है पैर और हाथ की लंबी हड्डी का विकास तीव्रता से होता है किशोर की लंबाई 8 से 9 इंच तक प्रति वर्ष बढ़ जाती है
इस एज में बच्चे अपने समूह में जाने की चेष्टा करने लगते हैं
तीव्र सामाजिक विकास होता है गतिशील यौन विकास होता है
कुछ अभिभावक इस सामान्य व्यवहार को स्वीकृत नहीं करते हैं और बच्चों को दोषी ठहराते हैं इस चरण में बच्चे घबरा जाते हैं और सामाजिक संस्कृति सीमा और यौन इच्छाओं में संतुलन नहीं कर पाते हैं

2 मूल किशोरावस्था 14 से 16 वर्ष👉 शारीरिक भावनात्मक बौद्धिक क्षमता के विकास में दर्शाता है इस चरण में यौनलक्षण का विकास जारी है और उनके प्रजनन अंग शुक्राणु उत्पन्न करने में सक्षम होने लगते हैं
मूल अवस्था में किशोर अपने आप को माता-पिता से दूर रखने लगता है
वह प्रायः आदर्शवादी बनते हैं और एवं विकास को जानने की इच्छा निरंतर बढ़ती जाती हैं

यह चरण साहस और प्रयोग से भरा होता है
प्रत्येक किशोर अपने विपरीत लिंगी और समवयस्क समूह से संबंध रखना चाहता है
14 से 16 में बच्चा अपने अस्तित्व को जानना चाहता है और समाज में योगदान भी करता है

बच्चे की मानसिकता जटिल हो जाती है
इससे उसकी भावना गहरी और घनिष्ठ हो जाती है
निर्णय लेने की शक्ति आ जाती है💐किशोरावस्था का अंतिम चरण💐

1 यौन लक्षण पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं
2 इनके यौन अंग प्रौढ़ कार्यकलाप के में पूर्णता सक्षम हो जाते हैं
3 समाज में अलग पहचान बनाने लगते हैं
4 कई बार उनकी यह पहचान वास्तविकता से परे होती हैं
5 अब मित्रों के चयन की प्रवृत्ति होती हैं
6 किशोर जीवन के लक्ष्य को समझने लगते हैं
7 हालांकि अभी भी कई वर्षों तक अभिभावक पर निर्भर रहते हैं
8 अब वह सही गलत की पहचान कर पाते हैं
9 नैतिकता का विकास होता है
10 भविष्य के अभिलाषी हो जाते हैं
11 अपने कार्य के लिए वह अभिभावकों एवं समाज का समर्थन चाहते हैं ताकि उनके कार्य का सम्मान हो

sapna sahu🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃

🏵️ किशोरावस्था के तीन चरण होते हैं 🏵️
1- पूर्व किशोरावस्था-12-14 वर्ष
2-मूल किशोरावस्था-14-16 वर्ष
3-अंतिम किशोरावस्था-16-18
🌺 पूर्व किशोरावस्था/ प्रारंभिक किशोरावस्था 12-14
💫इस चरण में शारीरिक विकास अचानक के झलकता है पर यह परिवर्तन अलग- अलग किशोरों में अलग- अलग होता है।
💫पैर और हाथ की लंबी हड्डियों का विकास तीव्र होता है।
💫किशोर की लंबाई 8.9इंच तक प्रतिवर्ष बढ़ती है, 12 से 14 वर्ष में ज्यादा बढ़ती है।
💫14 वर्ष के बच्चे अपने समूह में जाने के चेष्टा करने लगते हैं।
💫इस अवस्था में तीव्र सामाजिक विकास, गतिशील यौन विकास होता है।
💫इस सामान्य व्यवहार को स्वीकृति नहीं करते हैं और बच्चे को दोषी ठहराने लगते हैं इस चरण में बच्चे घबरा जाते हैं और सामाजिक संस्कृत सीमाऔर यौन इच्छाओ विकास की इच्छा को संतुलन नहीं कर पाते हैं।
❇️❇️मुल किशोरावस्था 14-16❇️❇️
❇️शारीरिक भावात्मक बौद्धिक क्षमता विकास मैं दर्शाता है।
❇️इस चरण में यौन लक्षण का विकास जारी है और इसमें उनसे प्रजनन शुक्राणु उत्पन्न करने में सक्षम होने लगते हैं इस उम्र किशोर अपने माता पिता से दूर रहेंने लगते हैं।
❇️ वह प्रायःआदर्शवादी बनने और यौन विकास के जाने की इच्छा निरंतर बढ़ती जाती है यह चरण साहस और प्रयोग से भरा होता है।
❇️प्रत्येक किशोर अपने विपरीत लिंग और सामान्य समूह से संबंध रखना चाहता है।
❇️14-16 में बच्चा अपने अस्तित्व को जानना चाहता है चाहता है और समाज के योगदान में भीकरते है।
की मानसिकता जटिल हो जाती है निर्णय लेने की शक्ति आ जाती है।

🏵️ किशोरावस्था का अंतिम चरण 16-18वर्ष🏵️
🏵️यौन लक्षण पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं इनके यौन अंग प्रौढ़ कार्य कार्यक्रम में पूर्णतःसक्षम हो जाते हैं।
🏵️कई बार उनकी ये पहचान वास्तविक से परे होते हैं अब उनमें मित्रों का चयन की प्रवृत्ति आती है। किशोरावस्था जीवन के लक्षण को समझने लगते हैं।
हालांकि अभी भी कई वर्षों तक अभिभावक पर निर्भर रहते है।
🏵️नैतिकता का विकास होता है, ऐसी हो जाते हैं अपने कार्य के लिए योजना बनाने लगते हैं।
🙏✍️Notes by Laki ✍️🙏

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.