💐💐 किशोरावस्था की समस्याएं💐💐

👉 किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था है

👉 इस अवस्था में बच्चों की हड्डियों में दृढ़ता आती है

👉 इस बीच में भूख बहुत अधिक लगती है क्योंकि यह एक शारीरिक परिपक्वता की अवस्था होती है इसलिए हमें अपने शरीर के पोषण के लिए भूख अधिक लगती है

👉 कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है

👉 इसके कारण बच्चों में शरीर में स्थित ग्रंथियों में स्त्राव होता है इससे बहुत सारी यौन क्रियाएं बालक अनायास ही करने लगते हैं

👉 भाव का विकास होता है भाव के अंदर आवेश तीव्र भी होता है

👉 अपनी स्नेह पसंद श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ त्याग करने के लिए तैयार होते हैं

👉 किशोर बालक सदा असाधारण काम करना चाहते हैं वह दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है जब तक वह इस कार्य में सफल हो जाते हैं वह अपने जीवन को सार्थक मानते हैं

👉 ढींगे मारने की प्रगति किशोरावस्था में अत्यधिक होती है( बड़ी-बड़ी बातें करते हैं)

👉 किशोरावस्था में नए नए प्रयोग बच्चे करते रहते हैं

👉 किशोरावस्था में बच्चों को दूर-दूर घूमने की रुचि रहती है( Jaise long drive per Jana )

👉 किशोरावस्था में बच्चों का बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है

👉 बच्चों की चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है इसलिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य देना आवश्यक
है( बच्चों को बच्चों को इस प्रकार के कार्य दिए जाएं जिसमें वह अपनी बुद्धि एवं तर्क का यूज़ करें)

👉 किशोरावस्था में बच्चों को अभिनय करना भाषण देना लेख लिखना इन सबके सहज रुचि होती है इसलिए सिर्फ मां बाप से काम नहीं चलेगा बल्कि कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोर का बौद्धिक विकास अनेक साधनों की सहायता से करना अनिवार्य है

👉 किशोर बालक में सामाजिक भावना प्रबल होती है वह समाज में सम्मान के साथ जीना चाहता है वह अभिभावकों से सम्मान की आशा करता है( जैसे आपने देखा होगा कि बहुत से बच्चे कहते हैं कि उनके पड़ोसी ने उन्हें स्वयं नहीं बोला है इसलिए वह उनके यहां किसी भी फंक्शन में नहीं जाएंगे क्योंकि उन्होंने पापा को बोला है)

👉 लेकिन अगर उनसे आप 8 से 10 साल ke बच्चों की तरह व्यवहार करते हैं तो बच्चे की मानसिक ग्रंथियां उत्पन्न हो जाती हैं आपकी मानसिक और शारीरिक शक्ति का hras होता है अनेक मानसिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं

🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃sapna sahu 🍃🍃🍃🍃🍃🍃

💫🌸 किशोरावस्था की समस्याएं🌸💫

🌻 किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था है।

🌻 इस अवस्था में बच्चों के हड्डियों में दृढ़ता आती है।

🌸 इस उम्र में भूख अधिक लगती है।

🌸कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है।

🌻 इसके कारण बच्चों के शरीर में स्थित ग्रंथियों का स्त्राव होता है इससे बहुत सारे यौन क्रियाएं बालक अनायास ही करने लगता है।

🌻 भाव का विकास होता है भाव के अंदर आवेग तीव्र होता है।

🌻अपने स्नेह ,पसंद, श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार होते है।

🌻 किशोर बालक सदा असाधारण काम करना चाहता है ताकि दूसरों को ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो सके।

🌻 जब तक वह इस कार्य में सफल हो पाता है वह अपने जीवन को सार्थक मानते है।

🌻 डींगे मारने की प्रगति किशोरावस्था में अधिक होती है।

🌻दूर-दूर घूमने की रूचि होती है और अपने हम उम्र के बच्चों के साथ रहना पसंद करते हैं।

🌻 बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है।

🌻उनकी चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है इसलिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कर देना आवश्यक है।

🌻 अभिनव करना ,भाषण देना, लेख लिखना इन सब की सहज रुचि होती है।

🌻इसलिए कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोर के बौद्धिक विकास अनेक साधनों की सहायता से कराना अनिवार्य है।

🌻 किशोर बालक में सामाजिक भावना प्रबल होती है वह समाज में सम्मान के साथ जीना चाहता है वह अभिभावकों से सम्मान की आशा करता है जैसे आपने देखा होगा कि बहुत से बच्चे कहते हैं कि उनके यहां किसी भी फंक्शन में नहीं जाएंगे क्योंकि उन्होंने पापा को बोला है।

🌻 लेकिन अगर उनमें आप 8 से 10 साल के बच्चों की तरह व्यवहार करते है तो बच्चे की मानसिक ग्रंथियां उत्पन्न हो जाती हैं आपकी मानसिक और शारीरिक शक्ति का हर्ष होता है और मानसिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚✍🏻

🔆 किशोरावस्था की समस्याएं ➖

🎯 किशोर अवस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था है |

🎯 इस अवस्था में बच्चों की हड्डियों में दृढ़ता आती है |

🎯 इस उम्र में भूख काफी लगती है |

🎯 कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है |

🎯 इसके कारण बच्चों के शरीर में स्थित ग्रंथियों में स्त्राव होने लगता है बहुत सारी यौन क्रियाएँ बच्चा अनायास ही करने लगता है |

🎯 इस उम्र में भाव का विकास होता है और भाव के अंदर बहुत तीव्र होता है | जो उनको चाहिए जिससे उनको प्रेम है या श्रद्धा है वह उसको पाने के लिए आतुर रहता है |

🎯 अपने स्नेह, पसंद ,और श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ त्याग करने के लिए तैयार होते हैं वे अपनी अमूर्त सोच का प्रयोग नहीं कर पाते हैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं |

🎯 किशोर बालक सदैव असाधारण काम करना चाहते हैं वह दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं जब तक वह इस कार्य में सफल हो पाते हैं अपने जीवन को सार्थक मानते हैं ऐसा नहीं होने पर अपने जीवन को निरर्थक लगते हैं |

🎯 डींग मारने की प्रवृत्ति किशोरावस्था में अधिक होती है |

🎯 वह हमेशा नए नए प्रयोग करता है |

🎯 दूर-दूर घूमने की रूचि रहती है |

🎯 बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है |

🎯 उनकी चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है |

🎯 इसलिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य देना आवश्यक है |

🎯 अभिनय करना ,भाषण देना,, लेख लिखना,,इन सब की सहज रूचि होती है |

🎯 इसलिए कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोर के बौद्धिक विकास अनेक साधनों की सहायता से करना अनिवार्य है |

🎯 किशोर बालक में सामाजिक भावना प्रबल होती है समाज में सम्मान के साथ जीना चाहता है | अपने अभिभावकों से भी सम्मान आशा करता है |

🎯 लेकिन अगर उनसे आप 8-10 जैसे बच्चों की तरह समान व्यवहार नहीं करते हैं तो उनमें द्वेष की मानसिक ग्रंथियाँ उत्पन्न हो जाती है आपकी मानसिक और शारीरिक शक्ति की हानि होने लगती है और उसके साथ-साथ मानसिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

🌼🤔🤔🤔🤔🌼🌸🌻🍀🌼🌸🍀🍀🌻🌼🌻🍀🌸🌼🌻🍀🌸🌼

🦹🏻‍♂️🙎🏻‍♂️🔥 किशोरावस्था की समस्याएं🔥🙎🏻‍♂️🦹🏻‍♂️

🔸 किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था है।

🔸 इस अवस्था में बच्चों की हड्डियों में दृढ़ता आती है।

🔸 इस उम्र में भूख काफी लगती है

🔸किशोरावस्था में कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है।

🔸 इसके कारण बच्चों के शरीर में स्थित ग्रंथियों में स्त्राव होता है इससे बहुत सारी यौन क्रियाएं बालक अनायास ही करने लगता है।

🔸 किशोरावस्था में बच्चों में भाव का विकास होता है भाव के अंदर आवेश तीव्र भी होता है।

🔸 किशोरावस्था में बालकों में स्नेह पसंद श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ त्याग करने के लिए तैयार होते हैं।
🔸
किशोर बालक सदैव असाधारण काम करना चाहते हैं अर्थात कुछ अलग हटकर ही करते हैं जिससे वह दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

🔸 किशोरावस्था में बालक मारने की डींग मारने की प्रवृत्ति अत्यधिक होती है।
🔸 इस अवस्था में बालक हमेशा कुछ न कुछ नए प्रयोग करते रहता है।

🔸 दूर-दूर घूमने की रुचि रहती है बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है

🔸 उनकी चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है इसीलिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य देना आवश्यक है।

🔸 किशोरावस्था में बालकों को अभिनय करना, भाषण देना, लेख लिखना इन सब की सहज रुचि होती है।
इसीलिए कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोरों के बौद्धिक विकास अन्य साधनों की सहायता से करना अनिवार्य है
उनको उचित मार्गदर्शन की अति आवश्यकता होती है

🔸 किशोर बालकों में सामाजिक भावना प्रबल होती है ।
वह समाज में सम्मान के साथ जीना चाहता है तथा वह अपने अभिभावकों से भी सम्मान की आशा करता है।

🔸 लेकिन अगर आप उनसे 8 या 10 साल के बच्चे जैसे व्यवहार करते हैं तो उनके मन में द्वेष की मानसिक ग्रंथियां उत्पन्न हो जाती हैं जिससे मानसिक और शारीरिक शक्ति का ह्रास होता है जिसके कारण उनमें मानसिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। 🙎🏻‍♂️🦹🏻‍♂️🙎🏻‍♂️🦹🏻‍♂️🙎🏻‍♂️🦹🏻‍♂️🙎🏻‍♂️

🌻🌼Notes by
Shashi chaudhary🌼🌻

किशोरावस्था की समस्याएं

किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था है।
इस अवस्था में बच्चों की हड्डियों में दृढ़ता आती है।
इस उम्र में भूख काफी लगती हैं ।
कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है।
इसके कारण बच्चे के शरीर में स्थित ग्रंथियों में स्त्राव होता है इससे बहुत सारी यौन क्रियाए बालक अनायास ही करने लगता है।
अपने स्नेह पसंद श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ त्याग करने के लिए तैयार होते हैं।
किशोर बालक सदा असाधारण काम करना चाहते हैं वह दूसरों का ध्यान अपनी और आकर्षित करना चाहते हैं जब वह इस कार्य में सफल हो पाते हैं तो वह अपने जीवन को सार्थक मानते हैं।
डींग मारने की प्रवृत्ति किशोरावस्था में अत्यधिक होती है।
वह हमेशा नए नए प्रयोग करता है दूर-दूर तक की रुचि रहती है।
बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है।
उनकी चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है इसलिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य देना चाहिए।
अभिनय करना, भाषण देना ,लेख लिखना इन सब की सहज रुचि होती है।
इसलिए कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोर के बौद्धिक विकास अनेक साधनों की सहायता से करना अनिवार्य है।
किशोर बालक में सामाजिक भावना प्रबल होती है वह समाज में सम्मान के साथ जीना चाहता है वह अभिभावकों से भी सम्मान की आशा करता है।
लेकिन अगर उनसे आप 8 से 10 साल जैसे बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं तो उन्हें द्वेष की सामाजिक ग्रंथियां उत्पन्न हो जाती है उनकी मानसिक और शारीरिक शक्ति का ह्रास होता है।
अनेक मानसिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

Notes by Ravi kushwah

✨ किशोरावस्था की समस्या ✨
❇️किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता कि अवस्था है।
इस अवस्था में बच्चों के हड्डियों में दृढ़ता आती है।
इस उम्र में भूख अधिक लगती है।
❇️कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है।
❇️इसके कारण बच्चों के शरीर में स्थित ग्रंथियों मिश्रा होता है बहुत सारी यौन क्रिया बालक अनायास ही करने लगता है।
❇️भाव का विकास होता है भाव के अंदर आवेग तीव्र होता है।
❇️अपने स्नेह, पसंद और श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार रहता है।
❇️सदा असाधारण काम करना चाहता है ताकि दूसरों की ध्यान उसके और आकर्षित हो।
❇️जब वह इस कार्य में सफल हो पाता है तब वह अपने जीवन को सार्थक मानते हैं ।
❇️डींगे की मरने की प्रवृत्ति की किशोरो में अधिक होती है।
❇️दूर -दूर घूमने की रूची होती है और अपने हम उम्र के बच्चों के साथ रहना पसंद करते हैं।
❇️बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है।उनको उनके बौद्धिक विकास के अनुसार ही कार्य देनी चाहिए। किशोरों को बच्चे ना समझे और और ना ही अधिक समझदार, अधिक परिपक्व।
❇️उनकी चिंतन शक्ति अच्छी हो जाती है। इस लिए उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य देना आवश्यक है।
❇️अभिनय करना भाषण देना ,लेख लिखना इन सब की सहज रूचि होती है।
❇️इसलिए प्रसन्न शिक्षकों के द्वारा किशोर के बौद्धिक विकास उनके शंन संसाधनों की सहायता करना अनिवार्य है।
❇️किशोर बालक में सामाजिक भावना प्रबल होती है वह समाज के सम्मान के साथ देना चाहते हैं। और वह अपने अभिभावक के साथ भी सम्मान की आशा करते हैं।
❇️लेकिन अगर उनसे आप 8 – 10 जैसे बच्चों की तरह व्यवहार करते हैं द्वेष की मानसिक ग्रंथियां है जो उत्पन्न हो जाती हैं और मानसिक आदर्श शक्ति शारीरिक शक्ति का हार्ष होता है और मानसिक रोग उत्पन्न हो जाता है।
📓📓✍️ Notes by Laki 🍃✍️🙏

किशोरावस्था की समस्या

💥💥💥💥💥💥💥💥

👉 किशोरावस्था शारीरिक परिपक्वता की अवस्था होती है।

👉 इस अवस्था में बच्चों की हड्डियों में दृढ़ता आती है।

👉 इस उम्र में बच्चों को भूख काफी लगती है।

👉 कामुकता की अनुभूति बच्चों में 13 साल में होने लगती है अतः जिसके कारण बच्चों के शरीर में स्थित ग्रंथियों में स्राव होता है जिससे बहुत सारी यौन क्रियाएं बच्चे अनायास ( बिना सोचे - समझे ) ही करने लगते हैं।

👉 इस अवस्था में भाव का विकास होता है और भाव के अंदर आवेग की तीव्रता भी होती है।

👉 इस अवस्था में बच्चे अपने स्नेह / प्रेम , पसंद , श्रद्धा की चीजों को पाने के लिए सब कुछ त्याग करने को तत्पर रहते हैं।

👉 किशोर बच्चे सदा असाधारण काम करना चाहते हैं , और दूसरों का ध्यान भी अपनी और आकर्षित करना चाहते हैं अतः जब तक वह इस कार्य में सफल होते हैं वह अपने जीवन को सार्थक मानते हैं।

👉 डींग मारना / बड़ी-बड़ी बातें करना या दिखावा करने की प्रवृत्ति किशोरावस्था में अत्यधिक होती है।

👉 किशोर बच्चे हमेशा नए – नए प्रयोग करते रहते हैं।

👉 इस अवस्था में बच्चों को दूर-दूर घूमने की रुचि होती है।

👉 किशोरावस्था में बौद्धिक विकास पर्याप्त होता है।

👉 किशोरावस्था में बच्चों की चिंतन शक्ति अच्छी / तीव्र हो जाती है। अतः चिंतन शक्ति तीव्र विकसित होने की विशेषता में ही उन्हें पर्याप्त बौद्धिक कार्य आवश्य देने चाहिये।

👉 इस उम्र में बच्चों में अभिनय करना , भाषण देना , लेख- लिखना आदि इन सब की सहज रुचि होती है। इसलिए कुशल शिक्षकों के द्वारा किशोरों का बौद्धिक विकास अनेक साधनों के सहयोग से करना अनिवार्यतः होना चाहिए।

👉 किशोर बच्चों में सामाजिक भावना प्रबल होती है और वह समाज में अपने एक अलग सम्मान के साथ जीना चाहते हैं तथा अपने अभिभावकों से भी सम्मान पाने की आशा करते हैं।

👉 लेकिन किशोरावस्था में यदि बच्चों से आप 8 – 10 साल के बच्चों की तरह व्यवहार करते हैं तो उनमें द्वेष की मानसिक ग्रंथियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और वह अपनी मानसिक एवं शारीरिक शक्ति का ह्रास कर देते हैं

अंततः उनमें शारीरिक के साथ-साथ अनेक मानसिक रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं।

🌺✍️Notes by – जूही श्रीवास्तव✍️🌺

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.