*🌸किशोरावस्था की समस्या🌸*

  *(problem of adolescence)*

Date-24.february 2021

👉 यह एक संवेदनशील अवधि है जब व्यक्ति में बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं यह परिवर्तन इतने  आकस्मिक और तीव्र होते हैं कि समस्याओं का जन्म हो जाता है. 

👉 किशोर इन परिवर्तनों का अनुभव तो करते हैं लेकिन प्रायः इन परिवर्तनों को समझने में असमर्थ होते हैं. 

👉 इस अवस्था में उनके पास इन परिवर्तनों को समझने का कोई वैज्ञानिक स्त्रोत नहीं रहता, लेकिन इन परिवर्तनों को समझने की जिज्ञासा होती है इसके लिए वह अपने आयु समूह या  समवयस्क की मदद लेते हैं या कई बार गुमराह करने वाले सस्ते साहित्य और वीडियो देखते हैं. 

👉 ऐसी स्थिति में गलत सूचनाएं मिलने के कारण किशोर अक्सर कई भ्रांतियों के शिकार हो जाते हैं  जिसके कारण व्यक्तित्व के विकास पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. 

👉  किशोरों में समस्या इसलिए भी आती है क्योंकि विपरीत लिंग के प्रति जागृत, रुचि को ठीक से नहीं समझ पाते हैं. 

👉1. इस अवस्था में किशोरों में माता-पिता से दूर रहने की प्रवृत्ति पाई जाती है. 

2. सम आयु समूह से गहरा मेल-मिलाप होता है. 

 उपरोक्त दोनों कारण उनके मन में संशय और चिंता पैदा करते हैं। 

 माता-पिता या परिजनों के उचित मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे को समवयस्क समूह की तरफ उन्मुख होना पड़ता है। 

👉 प्रायः देखा गया है कि किशोर सम आयु के दबाव के सामने विवश हो जाते हैं और बिना परिणाम के सोचे अनुचित कार्य करने को मजबूर हो जाते हैं कुछ किशोर गलत आदतें जैसे-सिगरेट, शराब, मादक द्रव्य का सेवन करने लगते हैं और कुछ यौनाचार की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. 

👉 किशोरावस्था को मनुष्य का बसंत काल कहा जाता है क्योंकि इस अवस्था में नई-नई चीजें का अनुभव होता है. 

👉 किशोरावस्था में सभी प्रकार की मानसिक शक्ति का विकास हो जाता है. भाव के विकास के साथ अमूर्त सोच की कल्पना का विकास होता है. 

👉 किशोरों में सभी प्रकार के सौंदर्य की रुचि उत्पन्न होती है. 

👉 किशोर नए-नए व ऊंचे-ऊंचे आदर्श को अपनाने लगते हैं. 

👉 बालक के भविष्य में जो कुछ भी होना होता है उसकी पूरी रूपरेखा किशोरावस्था में बन जाती है जाती है. 

👉अपनी परिस्थिति के अनुसार कई बच्चे धन कमाने लगते हैं. 

👉 इस अवस्था में किशोरों में अलग-अलग कला में रुचि बढ़ती बढ़ती है जैसे-चित्रकारी, खेल, लेखन आदि। 

👉 इस अवस्था में बच्चा सभी क्षेत्रों में महानता प्राप्त करना चाहता है और इन में सफलता प्राप्त करना चाहना जीवन की सफलता मानता है. 

👉 जो बच्चे किशोरावस्था में समाज सुधारक के सपने देखते हैं वह आगे चलकर राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं. 

🌸 कई मनोवैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के आधार पर स्पष्ट किया है कि -” क्योंकि किशोरावस्था कामवासना की अवस्था है तो इसके कारण बच्चा खुद में नई शक्ति का अनुभव करता है वह सौंदर्य, बहादुरी और महानता के कार्य करने की प्रेरणा इस शक्ति से लेता है।”

Notes by Shivee Kumari

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💫🌻 किशोरावस्था की समस्या🌻💫

🪐 एक संवेदनशील अवधि है जो व्यक्ति में बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं ,यह परिवर्तन इतनी आकस्मिक और तीव्र होते हैं कि समस्याओं का जन्म हो जाता है।

🪐 किशोर इन परिवर्तनों का अनुभव  तो करते हैं लेकिन प्राय: इसे समझने में असमर्थ होते हैं।

🪐अभी तक उनके पास इन परिवर्तनों को समझने का कोई वैज्ञानिक स्रोत नहीं रहता है।

🪐 लेकिन जिज्ञासा होती है इस वजह से इसके लिए वह अपने आयु समूह (सम वयस्क) की मदद लेते हैं या कई बार गुमराह किया (भटकने) वाले सस्ते साहित्य या वीडियो देखते हैं।

🪐गलत सूचनाएं मिलने के कारण अक्सर कई भ्रांतियों के शिकार हो जाते हैं व्यक्तित्व के विकास पर कुप्रभाव पड़ता है।

🪐किशोर में समस्या इसलिए भी आती है क्योंकि विपरीत लिंग के प्रति जागृत रुचि को ठीक से नहीं समझ पाते हैं।

🌼 मां बाप से दूर हटने की प्रवृत्ति होने लगती है।

🌼 सब आयु समूह से गहरा मेल मिलाप करने लगते हैं।

🌻लेकिन माता-पिता या परिजनों के उचित मार्गदर्शन के अभाव में बच्चों को संभव एक समूह की तरफ उन्मुख होना ही पड़ता है।

🪐प्राया यह देखा जाता है कि किशोर सम समूह के दबाव के सामने विवश हो जाते हैं और बिना परिणाम के सोचे अनुचित कार्य करने को मजबूर हो जाते हैं, कुछ सिगरेट, शराब, मादक द्रव्य का सेवन करने लगते हैं और कुछ यौनाचार की तरफ आकर्षित हो जाते हैं।

🌻 किशोरावस्था को मनुष्य के जीवन का बसंत काल माना जाता है।🌻

🪐सभी प्रकार के मानसिक शक्ति का विकास हो जाता है भाव के विकास के पास अमूर्त सोच की कल्पना का विकास होता है।

🪐 सभी प्रकार के सौंदर्य की रुचि उत्पन्न होती है नए-नए ऊंचे ऊंचे आदर्शों को अपनाने लगते हैं।

🪐 बालक के भविष्य में जो कुछ भी होना होता है उसकी पूरी रूपरेखा किशोरावस्था में बन जाती हैं।

🪐जो बच्चे किशोरावस्था में समाज सुधारक के सपने देखते हैं वह आगे चलकर राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं।

🪐कई मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है “क्योंकि किशोरावस्था कामवासना की अवस्था है तो इसके कारण बच्चे खुद में नई शक्ति का अनुभव करते हैं वह सुंदर बहादुरी और महानता कार्य करने की प्रेरणा इस शक्ति से लेते हैं।”

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

किशोरावस्था की समस्याएं

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किशोरावस्था एक संवेदनशील अवधि है ।

जब व्यक्ति में इतने महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं तब ये परिवर्तन इतनी आकस्मिक , तीव्र होते हैं कि समस्याओं का जन्म हो ही जाता है।

किशोर इन परिवर्तनों का अनुभव तो करते हैं लेकिन प्रायः इन परिवर्तनों को समझने में असमर्थ रहते हैं।

किशोरावस्था तक उनके पास इन परिवर्तनों को समझने का कोई वैज्ञानिक स्रोत नहीं रहता है लेकिन जिज्ञासा होती है तो इसके लिए वह अपने आयु समूह या   समवयस्क की मदद लेते हैं या कई बार गुमराह करने वाले सस्ते साहित्य या वीडियो देखते हैं जिनसे गलत सूचनाएं मिलने के कारण अकसर कई भ्रांतियों के शिकार हो जाते हैं जिससे उनके व्यक्तित्व विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

किशोरों में समस्या इसलिए भी आती है क्योंकि विपरीत लिंग के प्रति जागृत रुचि को किशोरावस्था में  ठीक से नहीं समझ पाते हैं।

 किशोरावस्था में मां – बाप से दूर हटने की प्रवृत्ति हो जाती है।

किशोरावस्था में सम आयु समूह से गहरा मेल मिलाप बढ़ता है।

ऐसे विचार उनके मन में संशय और चिंता पैदा करते हैं लेकिन माता-पिता या परिजनों की उचित मार्गदर्शन के अभाव में बच्चों को समवयस्क समूह की तरफ उन्मुख होना पड़ता है।

प्रायः देखा गया है कि किशोर सम आयु के दबाव के सामने विवश हो जाते हैं और बिना परिणाम के सोचे समझे अनुचित कार्य करने को मजबूर हो जाते हैं जैसे :-   कुछ सिगरेट , शराब , मादक द्रव्यों का सेवन करने लगते हैं और कुछ यौनाचार की तरफ आकर्षित हो जाते हैं।

🏵️ किशोरावस्था को मनुष्य के जीवन का बसंत काल माना जाता है। 🏵️

किशोरावस्था में सभी प्रकार की मानसिक शक्तियों का विकास हो जाता है , मन के विकास के साथ अमूर्त सोच की कल्पना का विकास हो जाता है।

सभी प्रकार के,  सौंदर्य के प्रति रुचि उत्पन्न हो जाती है।

किशोरावस्था में बच्चे नई-नई , ऊंचे – ऊंचे आदर्शों को अपनाते हैं।

बालक के भविष्य में जो कुछ भी होता है उसकी पूरी रूपरेखा किशोरावस्था में बन जाती है।

किशोरावस्था में ही कई बच्चे धन / आय कमाने लगते हैं।

किशोरावस्था में अलग-अलग कक्षा में रुचि बढ़ती है और इन सभी में महानता प्राप्त करना चाहता है तथा इन सब  में सफलता प्राप्त करना वह जीवन भर की सफलता मानता है।

जो बच्चे किशोरावस्था में समाज सुधारक के सपने देखते हैं वह आगे चलकर समाज सुधारक / राजनीति के क्षेत्र में आते हैं।

कई में मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है कि क्योंकि,  किशोरावस्था कामवासना की अवस्था है तो इसके कारण बच्चे खुद में नई शक्ति का अनुभव करता है। वह सुंदर ,  बहादुरी और महानता के कार्य करने की प्रेरणा इस शक्ति से लेता है।

✍️ Notes by –  जूही श्रीवास्तव✍️

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