पूर्व बाल्यावस्था  2 – 6 वर्ष में                          भावनात्मक  विकास

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

पूर्व बाल्यावस्था में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देतीं हैं।

👉   भावनाएं बालकों के जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देतीं हैं।

👉  भावनाएं बालकों के व्यवहार में प्रेरक का काम करते हैं।

👉  भावनाएं बालकों के दैनिक जीवन में खुशियों और दुःख का अनुभव करातीं हैं।

 👉   हमारी भावनायें समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं।

👉  अत्यधिक भावनात्मक स्थिति मनुष्य ( बालकों ) के मानसिक संतुलन को प्रभावित करने के साथ – साथ आपके तर्क और सोच को भी प्रभावित करती है।

👉 भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करतीं हैं।

अर्थात् सामने बाले से हम अपनी बात / मानसिकता को प्रस्तुत करने के लिए भावनाओं का ही सहारा लेते हैं।

🌹   बच्चों में भावना    🌹

💥💥💥💥💥💥💥💥

👉  बच्चों में भावनाएं पैदा होते रहने के साथ – साथ बदलतीं भी रहतीं हैं।

👉   बच्चों में भावनाएं अस्थाई होतीं हैं इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल लेते हैं।

              अर्थात् बच्चे अपनी भावनाओं पर स्थिर नहीं रह पाते हैं क्योंकि बच्चों में चंचलता प्रबल होती है जिसके कारण उनमें भावनाओं की अस्थिरता होती है।

👉    बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद भी उनकी  उत्तेजना में तीव्रता होती है।

👉   बच्चे अपनी भावनाएं छुपाने में असफल होते हैं अतः बो  अप्रत्यक्ष रूप से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करते हैं जैसे   :-

रोकर 

नाखून कुतरकर 

अंगूठा चूस कर 

कुछ बोलकर 

गुस्सा दिखाकर  आदि।

👉   अतः भावनाएं उम्र के साथ मजबूत और कमजोर भी होती हैं।

      अर्थात् पूर्व बाल्यावस्था में भावनाओं में अस्थिरता होती है और प्रकट भी करते हैं वही वयस्कता में व्यक्ति अधिकतर अपनी भावनाओं को लोगों से छुपा लेते हैं, अपनी भावनाओं पर स्थिर रहते हैं चंचलता बहुत कम होती है और वही प्रौढ़ावस्था / वृद्धावस्था में व्यक्ति अपनी भावनाओं पर अत्यधिक नियंत्रण खो देता है , किसी से गुस्सा होना हो , कुछ बात कहनी हो आदि सब बो जाहिर करते हैं।

अतः इसीलिए भावनाएं उम्र के साथ मजबूत और कमजोर होतीं हैं।

🌹✍️Notes by – जूही श्रीवास्तव✍️ 🌹

*पूर्व बाल्यावस्था (2-6years)* 

     *(भावनात्मक विकास)* 

इस उम्र में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देती हैं l

✍️1.भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति को  सामान्य करने के लिए ऊर्जा देती हैं l

✍️2. भावनाएं हमारे व्यवहार में *प्रेरक* का काम करती हैं l

✍️3. भावनाएं हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाते हैं l

✍️4. समाज में समायोजन को भी प्रभावित करता है l

✍️5.अत्यधिक भावनात्मक स्थिति आपके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है और आपके तर्क और सोच को विकसित करती हैं l

✍️6. भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करती हैं l

 *बच्चों में भावना:-* 

😲. बच्चों में भावनाएं पैदा होती रहती हैं और बदलती रहती हैं l

😕. भावनाएं अस्थाई हैं l

😞. बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता होती है l

😭. बच्चे अपनी भावना छुपाने में असफल होते हैं वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं शुरू कर नाखून काट कर अंगूठा चूसकर कुछ बोलकर l

😟. भावनाएं उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है l 

      Notes by Sharad Kumar patkar

🍀🍀 पूर्व बाल्यावस्था 2 से 6 वर्ष🍀🍀

                       🏵️🏵️ भावात्मक विकास🏵️🏵️

✨✨ इस उम्र में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं व्यक्ति और सामाजिक समायोजन में भी योगदान देती हैं।

✨✨ भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देते हैं।

✨✨ भावनाओं में हमारे व्यवहार में अनेक तरह का काम करती हैं।

✨✨ भावनाएं हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव कराती हैं।

✨✨ समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं।

✨✨ अत्यधिक भावनाएं स्थिति आपके मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करती हैं। अधिकार और कर्तव्य को भी प्रभावित करती हैं।

✨✨ भावनाएं व्यक्ति के भी संचार का काम करती हैं।

                  🏵️🏵️ बच्चों में भावना 🏵️🏵️

 👭 बच्चों में भावनाएं पैदा होती रहती हैं और वह बदलती रहती हैं। -जैसे बच्चा कुछ मांगता है तो रोता 😭है जैसे ही वह चीज मिल जाती हो तो बच्चा हंसने🤗 लगता है।

👭 बच्चों में भावनाएं अस्थायी होती हैं। बच्चा भावनाएं बहुत तेजी से बदलता है।

👭 बच्चों में भावनात्मक  अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता होती है।

👭बच्चे अपनी भावनाओंको छीपाने में असफल होते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं रोकर, नाखून काट कर ,अंगूठा चूस कर ,और कुछ बोल कर,।

👭भावनाए उम्र के साथ मजबूत और कमजोर होती हैं। 

  ✍️✍️  🍃🍃Notes by Laki 🍃🍃✍️✍️

🔆 पूर्व बाल्यावस्था ( 2-6 वर्ष) में भावात्मक विकास ➖ 

इस उम्र में या इस अवस्था में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं सामाजिक समायोजन में योगदान देती है यदि व्यक्ति या बच्चे की भावनाएं उस पर प्रबल रूप से हावी हैं तो यह अच्छी बात नहीं है इससे व्यक्ति का जीवन या तो संवर सकता है या फिर बिगड़ भी सकता है भावनाएं व्यक्ति के सामाजिक ,आर्थिक और व्यक्तिगत रूप से उसके समायोजन या अनुकूलन में योगदान देती हैं जिसके कारण वह अपने आने वाले जीवन के लिए फैसला करता है | 

🎯 भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष परिस्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती है |

🎯 भावनाएं हमारे व्यवहार में प्रेरक का काम करती है जिस प्रकार की हमारी भावनाएं होगीं उसी प्रकार से हम कार्य करेंगे |

🎯 भावनाएं हमारे जीवन में खुशियों का अनुभव  करवाती हैं यदि भावनाएं नहीं होंगी तो व्यक्ति का जीवन निरर्थक हो जाएगा |

 क्योंकि भावनाओं के बिना व्यक्ति का जीवन संभव नहीं है |

🎯 भावनाएं समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं  |

🎯 अत्यधिक भावनात्मक स्थिति व्यक्ति के मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है जो व्यक्ति की सोच और तर्क को विभाजित करती है  |

🎯 भावनाएं व्यक्ति के बीच संचार का काम करती है यदि व्यक्ति की भावनाएं सकारात्मक है तो उसका प्रभाव सकारात्मक होगा  और यदि भावनाएं नकारात्मक है तो उनका प्रभाव भी नकारात्मक होगा |

🛑  बच्चों में भावना ➖ 

⭕ बच्चों में भावनाएं अक्सर उत्पन्न होती रहती है और बदलती रहती है  जैसी परिस्थिति होगी उनकी भावनाएं भी वैसी ही होंगी |

⭕  बच्चों की भावनाएं अस्थाई होती है इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है यदि उसको भूख लगी है तो वह अपनी भावनाओं को रोकर या हंसकर व्यक्त करेगा  |

जैसे यदि बच्चे को भूख लगी है तो वह रोकर व्यक्त करेगा |और

 उसको खाना मिलने के बाद तुरंत ही खुश हो जाता है अर्थात रोने से उसकी भावनाएं खाना मिलने पर तुरंत ही खुशी में बदल जाती हैं |

⭕  पूर्व बाल्यावस्था में बच्चों की भावनाओं में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता होती है |

⭕ बच्चे अपनी भावनाओं को छिपाने में असफल होते हैं वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं जैसे रोकर, नाखून काट कर अंगूठा चूस कर, |

अर्थात जैसे कि बचपन में मां पिताजी के जेब से पैसे चुराती है या पैसे निकालती है तो बच्चे अपने पिता को बता देते हैं और वही बच्चे बड़े होकर छिपा लेते क्योंकि वह परिपक्व हो जाते हैं |

⭕ कुछ भावनाएं उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है |

नोट्स बाय➖ रश्मि सावले

🌼🍀🌸🌻🌼🍀🌸🌻🌼🍀🌸🌻🌼🍀🌸🌻🌼🍀🌸🌻

*पूर्व बाल्यावस्था 2 से 6 वर्ष तक*

*(भावनात्मक विकास)*➖➖➖⬇️

 पूर्व बाल्यावस्था में भावनाएं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में अहम भूमिका निभाती।

1= भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति को सामान्य करने के लिए ऊर्जा देते हैं।

2=  भावनाएं हमारे व्यवहार में प्रेरक का काम करते हैं।

3= भावना हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाते हैं।

4= हमारी भावनाएं समाज में समायोजन को भी प्रभावित करते हैं।

5= इस अवस्था में अत्यधिक भावनात्मक स्थिति मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है और तर्क और सोच को भी विशेष रूप से प्रभावित करती है ।

6 भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करती है।

  *बच्चों की भावना*⬇️

➖➖➖➖➖➖➖➖

● बच्चों में भावनाएं पैदा होती रहती है और बदलती रहती है।

● भावना का रूप अस्थाई होता है।।

● बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता आती है।

● बच्चे अपनी भावनाएं छुपाने में असफल होते हैं  वह अप्रत्यक्ष रूप से  प्रस्तुत करते हैं।

● भावना  उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है|

➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

😊😊😊😊

✒️✒️ आनंद चौधरी 📋📋

पूर्व संक्रियात्मक अवस्था में भावात्मक विकास

इस उम्र में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देती है।

भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती हैं।

भावनाएं हमारे व्यवहार में प्रेरक का काम करती है।

भावनाएं हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव कराती हैं।

समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती है।

अत्यधिक भावात्मक स्थिति आपके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है और आपके तर्क और सोच को विभाजित करती हैं।

भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करती है।

बच्चों में भावनाएं

बच्चों में भावनाएं पैदा होते रहती हैं और बदलती रहती है।

भावना अस्थाई है इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है।

बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना तीव्रता होती है।

बच्चे अपनी भावना छिपाने में असफल होते हैं वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं जैसे रोककर, नाखून काट कर, अंगूठा चूसकर, कुछ बोल कर।

भावनाएं उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है।

Notes by Ravi kushwah

⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️

पूर्व बाल्यावस्था (2 से 6 वर्ष) में भावनात्मक विकास (Emotional Development in Preoperational Stage)

⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️16.02.2021⚜️⚜️

इस उम्र में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देती हैं।

☯️ भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती हैं। 

☯️भावनाएं हमारे व्यवहार में प्रेरक का काम करती हैं।

☯️ भावना हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाते हैं।

☯️ अत्यधिक भावनात्मक स्थिति आपके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है और आपके तर्क और सोच को विभाजित करती है।

☯️ भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करती हैं।

🚸बच्चों में भावना 

(Emotion in Children)

1️⃣ बच्चों में भावनाएं पैदा होते रहते हैं और बदलते रहते हैं।

2️⃣भावना अस्थाई है इसका मतलब है कि बच्चा अपने भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है।

3️⃣बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता होती है।

4️⃣बच्चे अपनी भावना छुपाने में असफल होते हैं वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत रहते हैं रोकर, नाखून काटकर, अंगूठा चूसकर, उसका कुछ बोलकर

5️⃣ भावनाएं उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है।

🔚

         🙏

📝🥀Notes by Awadhesh Kumar🥀

📕 पूर्व बाल्यावस्था🌟

      ✒️ भावनात्मक विकास✒️

🗓️ भावनाएं जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो कि बच्चों में व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देते हैं।

🔥 भावनाएं हमारे जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती है।

🔥 कामनाएं हमारे व्यवहार के प्रेरक के रूप में कार्य करती है।

🔥 भावनाएं हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाती है अगर भावना ही नहीं होंगी तो जीवन की कल्पना करना भी नहीं कर सकते हैं।

🔥 भावनाएं इस समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं।

🔥 अत्याधिक भावनात्मक स्थिति या मानसिक संतुलन को भी परेशान करती हैं और तर्क एवं सोच को विभाजित करती है।

🔥 भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार के मीडिया के रूप में कार्य करते हैं।

✍🏻 बच्चों में निम्नलिखित भावनात्मक विशेषताएं विकसित होती है।

🌺 भावनाएं अक्सर पैदा होती रहती हैं और बदलती रहती है।

🌺 भावनाएं और स्थाई होती है इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है।

 जैसे कि जब कोई बच्चा 3 साल के बच्चे को  अगर आप उसे चॉकलेट ना दें तो बच्चा रोता है और अगर उसे चॉकलेट देते हैं तो वह खुश हो जाता है।

🌺 पूर्व बाल्यावस्था में बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति ओके बावजूद बच्चों में उत्तेजना की तीव्रता होती है ।

🌺 बच्चे अपनी भावनाओं को छुपाने में और सफल होते हैं क्योंकि बच्चे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं, वह अपनी भावनाओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं ,

जैसे :- रो कर।

🌺 भावनाएं उम्र के साथ बच्चों में भी बदलती रहती है।

🌺 कुछ भावनाएं एक उम्र में मजबूत रहती हैं और एक समय के बाद वह भावनाएं बच्चों में कमजोर पड़ने लगती है।

             📕📕📕📕📕

NOTES BY.

            SHASHI CHAUDHARY

🌟🔥🌟🔥🌟🔥🌟🔥🌟

*🔆पूर्व बाल्यावस्था (2-6years) में भावनात्मक विकास*➖

पूर्व बाल्यावस्था में भावनाएं या संवेग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा यह बच्चो के व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देते  हैं। हम इन्हीं भावनाओं की सहायता से ही अपनी अनुभूतियों को व्यक्त कर पाते है।

▪️   भावनाएं बालकों के जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देतीं हैं।

▪️  भावनाएं बालकों के व्यवहार में प्रेरक का काम करते हैं।

▪️  भावनाएं बालकों के दैनिक जीवन में खुशियों और दुःख का अनुभव करातीं हैं।

 ▪️हमारी भावनायें समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं।

▪️अत्यधिक भावनात्मक स्थिति मनुष्य ( बालकों ) के मानसिक संतुलन को प्रभावित करने के साथ – साथ आपके तर्क और सोच को भी प्रभावित करती है।

▪️ भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करतीं हैं।

अर्थात् अन्य किसी से हम अपनी बात को या मानसिकता को प्रस्तुत करने के लिए भावनाओं का ही सहयोग लेते हैं।

🔅बच्चों में भावना 

*बच्चों में भावनाएं पैदा होते रहने के साथ – साथ बदलतीं भी रहतीं हैं।

*  बच्चों में भावनाएं अस्थाई होतीं हैं इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल लेते हैं।

 अर्थात् बच्चे अपनी भावनाओं पर स्थिर नहीं रह पाते हैं क्योंकि बच्चों में चंचलता प्रबल होती है जिसके कारण उनमें भावनाओं की अस्थिरता होती है।

*बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद भी उनकी  उत्तेजना में तीव्रता होती है।

*  बच्चे अपनी भावनाएं छुपाने में असफल होते हैं इसलिए वह अप्रत्यक्ष रूप से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करते हैं जैसे   :-

रोकर,नाखून कुतरकर ,अंगूठा चूस कर 

,कुछ बोलकर ,गुस्सा दिखाकर  आदि।

* अतः भावनाएं उम्र के साथ मजबूत और कमजोर भी होती हैं।

*अर्थात् पूर्व बाल्यावस्था में भावनाओं में अस्थिरता होती है और प्रकट भी करते हैं वही वयस्कता में व्यक्ति अधिकतर अपनी भावनाओं को लोगों से छुपा लेते हैं, अपनी भावनाओं पर स्थिर रहते हैं चंचलता बहुत कम होती है और वही प्रौढ़ावस्था / वृद्धावस्था में व्यक्ति अपनी भावनाओं पर अत्यधिक नियंत्रण खो देता है , किसी से गुस्सा होना हो , कुछ बात कहनी हो आदि सब कुछ जाहिर करते हैं।

अतः इसीलिए भावनाएं उम्र के साथ मजबूत और कमजोर होतीं हैं।

✍️

Notes By-Vaishali Mishra

⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️

पूर्व बाल्यावस्था (2 से 6 वर्ष) में भावनात्मक विकास (Emotional Development in Preoperational Stage)

⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️16.02.2021⚜️⚜️

इस उम्र में भावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देती हैं।

☯️ भावनाएं हमें जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती हैं। 

☯️भावनाएं हमारे व्यवहार में प्रेरक का काम करती हैं।

☯️ भावना हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाते हैं।

☯️ अत्यधिक भावनात्मक स्थिति आपके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है और आपके तर्क और सोच को विभाजित करती है।

☯️ भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार का काम करती हैं।

🚸बच्चों में भावना 

(Emotion in Children)

1️⃣ बच्चों में भावनाएं पैदा होते रहते हैं और बदलते रहते हैं।

2️⃣भावना अस्थाई है इसका मतलब है कि बच्चा अपने भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है।

3️⃣बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के बावजूद उत्तेजना में तीव्रता होती है।

4️⃣बच्चे अपनी भावना छुपाने में असफल होते हैं वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत रहते हैं रोकर, नाखून काटकर, अंगूठा चूसकर, उसका कुछ बोलकर

5️⃣ भावनाएं उम्र के साथ मजबूत या कमजोर होती है।

🔚

         🙏

📝🥀Notes by Awadhesh Kumar🥀

📕 पूर्व बाल्यावस्था🌟

      ✒️ भावनात्मक विकास✒️

🗓️ भावनाएं जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो कि बच्चों में व्यक्तिगत और सामाजिक समायोजन में योगदान देते हैं।

🔥 भावनाएं हमारे जीवन में किसी विशेष स्थिति का सामना करने के लिए ऊर्जा देती है।

🔥 कामनाएं हमारे व्यवहार के प्रेरक के रूप में कार्य करती है।

🔥 भावनाएं हमारे दैनिक जीवन में खुशियों का अनुभव करवाती है अगर भावना ही नहीं होंगी तो जीवन की कल्पना करना भी नहीं कर सकते हैं।

🔥 भावनाएं इस समाज में समायोजन को भी प्रभावित करती हैं।

🔥 अत्याधिक भावनात्मक स्थिति या मानसिक संतुलन को भी परेशान करती हैं और तर्क एवं सोच को विभाजित करती है।

🔥 भावनाएं व्यक्तियों के बीच संचार के मीडिया के रूप में कार्य करते हैं।

✍🏻 बच्चों में निम्नलिखित भावनात्मक विशेषताएं विकसित होती है।

🌺 भावनाएं अक्सर पैदा होती रहती हैं और बदलती रहती है।

🌺 भावनाएं और स्थाई होती है इसका मतलब है कि बच्चा अपनी भावनाओं को बहुत तेजी से बदल देता है।

 जैसे कि जब कोई बच्चा 3 साल के बच्चे को  अगर आप उसे चॉकलेट ना दें तो बच्चा रोता है और अगर उसे चॉकलेट देते हैं तो वह खुश हो जाता है।

🌺 पूर्व बाल्यावस्था में बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति ओके बावजूद बच्चों में उत्तेजना की तीव्रता होती है ।

🌺 बच्चे अपनी भावनाओं को छुपाने में और सफल होते हैं क्योंकि बच्चे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं, वह अपनी भावनाओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करते हैं ,

जैसे :- रो कर।

🌺 भावनाएं उम्र के साथ बच्चों में भी बदलती रहती है।

🌺 कुछ भावनाएं एक उम्र में मजबूत रहती हैं और एक समय के बाद वह भावनाएं बच्चों में कमजोर पड़ने लगती है।

             📕📕📕📕📕

NOTES BY.

            SHASHI CHAUDHARY

🌟🔥🌟🔥🌟🔥🌟🔥🌟

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.