✨पुनर्बलन का अर्थ होता हैं आंतरिक बल अर्थात छात्रों में शिक्षण-प्रक्रिया में रुचिपूर्ण भाग लेने के लिए उन्हें बल देना अर्थात उन्हें प्रेरित करना। जिससे छात्र अनुक्रिया कर सकें। इसमें पुनर्बलन उद्दीपन का कार्य करता हैं और इस इस उद्दीपन हेतु छात्र उचित अनुक्रिया करते हैं। पुनर्बलन कौशल द्वारा छात्रों के मनोबल और उनके आत्मविश्वास में वृद्धि करने का कार्य किया जाता हैं। यह छात्रों को आंतरिक रूप से बदलने में उनकी सहायता करता हैं। जिससे वह अपनी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बना सकें। इसके द्वारा छात्रों में सकारात्मक सोच का भी विकास किया जाता हैं।

✨पुनर्बलन कौशल द्वारा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाया जाता हैं और छात्राध्यापकों में इसका विकास कर उनमें कुशल शिक्षक के गुणों का समावेश किया जाता हैं।

✨छात्रों को अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करना पुनर्बलन कौशल कहलाता हैं। इसके द्वारा छात्रों को प्रेरित करने का कार्य किया जाता हैं जिससे वह कक्षा में सक्रिय रहें और पूछे गए उत्तरों का उत्सुकता के साथ जवाब दें सामान्यतः पुनर्बलन छात्रों के मनोबल में वृद्धि करने का उत्तम मार्ग एवं साधन हैं। पुनर्बलन कौशल (Reinforcement Skill) का प्रयोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के निर्माण में सहायता प्रदान करता हैं।

✨पुनर्बलन के प्रकार (Types of Reinforcement)➖
📍1 सकारात्मक पुनर्बलन कौशल
📍2 नकारात्मक पुनर्बलन कौशल

⚜️1 सकारात्मक पुनर्बलन कौशल –

इस प्रकार के पुनर्बलन के प्रयोग से छात्रों में सकारात्मक पक्ष के साथ उनसे अनुक्रिया करवाई जाती हैं। सकारात्मक पुनर्बलन में छात्रों को प्रेरित करने के लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जाता हैं। जिससे वह परिस्थिति दुबारा आने पर वह उचित अनुक्रिया दे सकें। इस उद्दीपन की प्रस्तुति करने से उनके अनुक्रिया देने की उम्मीद में वृद्धि होती हैं। सकारात्मक पुनर्बलन का छात्रों में प्रयोग दो प्रकार से किया जाता है-

🔹1 शाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन कौशल 🔹2 अशाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन कौशल

🌀1 शाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन कौशल➖

🔹छात्रों में अधिगम को स्थाई करने के लिए शिक्षक सकारात्मक कदम उठाता है जिसके लिए वह
शाब्दिक पुनर्बलन में छात्रों को सकारात्मक शब्दों के माध्यम से प्रेरित किया जाता हैं।
जैसे उनके उत्तर देने में उनको शाबासी देना, अच्छा, बहुत अच्छा , उत्तम ,बिल्कुल सही आदि।

🔹शिक्षक द्वारा उत्साहवर्धक शब्दों का प्रयोग करना।

🔹शिक्षक विद्यार्थी के जो सुझाव होते हैं उसका समर्थन करता है।

🌀2अशाब्दिक सकारात्मक पुनर्बलन कौशल ➖

🔹अशाब्दिक पुनर्बलन में छात्रों को बिना शब्द प्रयोग किए उनके मनोबल में वृद्धि की जाती हैं।
जैसे – सही उत्तर देने में छात्र को देखकर मुस्कुराना, उनकी पीठ थप-थपाना, उनके उत्तरों को श्यामपट्ट पर लिखना आदि।

⚜️2 नकारात्मक पुनर्बलन कौशल –

इस प्रकार के पुनर्बलन में छात्रों की ऐसी अनुक्रिया को रोकने का प्रयास किया जाता हैं जो उनके शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के लिए हानिकारक होती हैं। छात्रों का ऐसा व्यवहार जो उनके शिक्षण में उनको हानि पहुचाने का कार्य करता है। इनको दूर करने के लिए नकारात्मक पुनर्बलन का प्रयोग किया जाता हैं।
जैसे- दण्ड देना, गुस्सा करना आदि। नकारात्मक पुनर्बलन भी दो प्रकार के होते हैं।
🔹1 शाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन
🔹2 अशाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन

🌀1 शाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन➖

शाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन में शब्दों के माध्यम से छात्रों पर गुस्सा किया जाता हैं जैसे- मूर्ख कहना, बेवकूफ, गलत बात, अक्ल ही नहीं है आदि। जिससे वह दुबारा वो अनुक्रिया ना करें।

🌀2 अशाब्दिक नकारात्मक पुनर्बलन➖

अशाब्दिक में बिना शब्दो का प्रयोग किए अनुक्रिया को रोकने का प्रयास किया जाता हैं जैसे- आँखे दिखाना, गुस्से से देखना, किताब पटकना , हाथ दिखाकर डंडे देने के इशारे करना, आंखें तिरछी करके देखना आदि।

🔹कई बार नकारात्मक पुनर्बलन देने पर उसका प्रभाव सकारात्मक होता है लेकिन दिया गया पुनर्बलन नकारात्मक ही कहलाएगा।

✨पुनर्बलन कौशल के घटक ➖

1 प्रशंसा करना
2 हाव भाव से तारीफ करना
3 विचार के प्रति सहमति
4 सुझाव का समर्थन
5 पुनर्बलन का समुचित प्रयोग करना
6 सही उत्तर को श्यामपट्ट पर लिखना
7 नकारात्मक अशाब्दिक कथन
8 नकारात्मक शाब्दिक कथन
9 सकारात्मक अशाब्दिक कथन
10 सकारात्मक शाब्दिक कथन

✍️ Notes By-'Vaishali Mishra'

शिक्षण कौशल के प्रकार

💫💫💫💫💫💫💫💫 *(Part - 3)*

3. पुनर्बलन कौशल

(Reinforcement skill)

💫💫💫💫💫💫💫

पुनर्बलन कौशल से अभिप्राय ऐसे उद्दीपन से है जिनके प्रस्तुतीकरण से अनुक्रिया होने की आशा बढ़ जाती है। इन उद्दीपन में पुरस्कार, शाबाशी, रोमांच कक्षा इत्यादि आते हैं। शिक्षण प्रक्रिया में पुनर्बलन का तात्पर्य उद्दीपन का प्रयोग करना और उससे अनुक्रिया की संभावना को बढ़ाना है।

पुनर्बलन कौशल दो प्रकार के होते हैं….

  1. सकारात्मक /धनात्मक पुनर्बलन कौशल
  2. नकारात्मक /ऋण आत्मक पुनर्बलन कौशल

1. सकारात्मक/धनात्मक पुनर्बलन कौशल

सकारात्मक पुनर्बलन का प्रयोग छात्रों में सकारात्मक पक्ष के लिए किया जाता है। इसके लिए शिक्षक छात्रों को प्रेरित करने के लिए पुरस्कार से सम्मानित करते हैं जिससे बच्चा दोबारा किसी समस्या का समाधान करने के लिए सकारात्मक अनुक्रिया दे।

सकारात्मक पुनर्बलन का छात्रों में दो प्रकार से प्रयोग किया जाता है…

A . शाब्दिक

इसमें बच्चों को शब्दों के माध्यम से प्रेरित किया जाता है। अधिगम को स्थाई करने के लिए शिक्षक सकारात्मक कदम उठाते हैं। शिक्षक बालकों के सुझाव का समर्थन करते हैं और उत्साहवर्धक शब्दों का प्रयोग करते हैं। जैसे बच्चे ने किसी प्रश्न का उत्तर सही-सही दिया है तो उसको शाबाशी देना, अच्छा, बहुत अच्छा आदि।

B. अशाब्दिक

इसमें संकेतों का प्रयोग करके पुनर्बलन दिया जाता है। जैसे मुस्कुराना, सिर हिलाना, विद्यार्थियों की पीठ को थपथपाना आदि।

2. नकारात्मक /ऋण आत्मक पुनर्बलन कौशल

इस प्रकार के पुनर्बलन में छात्रों की ऐसे अनुक्रिया को रोकने का प्रयास किया जाता है जो उनके शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के लिए हानिकारक होती है। छात्रों में नकारात्मकता को दूर करने के लिए ऋण आत्मक पुनर्बलन का प्रयोग किया जाता है जैसे दंड देना, गुस्सा करना ।

नकारात्मक पुनर्बलन भी दो प्रकार के होते हैं……

A. शाब्दिक

अधिगम को स्थाई करने के लिए नकारात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे मूर्ख, बेवकूफ आदि कहना।

इसमें बच्चों को आलोचना महसूस होती है और यह नकारात्मक है। इस पुनर्बलन का प्रयोग नहीं करने की कोशिश करनी चाहिए।

B. अशाब्दिक

अशाब्दिक पुनर्बलन में गुस्से से देखना, हाथ दिखाकर डंडे से मारने का इशारा करना, आंखें तिरछी करके देखना आदि।

पुनर्बलन कौशल के घटक

💫💫💫💫💫💫💫💫

पुनर्बलन कौशल के निम्नलिखित घटक है…..

  1. प्रशंसा करना।
  2. हाव भाव से तारीफ करना।
  3. विचार के प्रति सहमति।
  4. सुझाव का समर्थन।
  5. पुनर्बलन का समुचित प्रयोग करना।
  6. सही उत्तर श्यामपट्ट पर लिखना।
  7. नकारात्मक अशाब्दिक कथन।
  8. नकारात्मक शाब्दिक कथन।
  9. सकारात्मक अशाब्दिक कथन।
  10. सकारात्मक शाब्दिक कथन।

Notes by Shreya Rai …..✍️🙏

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