रोर्शा स्याही धब्ब परीक्षण (Rorschach test), जिसका प्रतिपादन स्विट्जरलैण्‍ड के मनोवैज्ञानिक

हरमन रॉर्शोक ने सन् 1921 में किया।

1. इस परीक्षण में 10 कार्ड पर स्याही के धब्बे बने होते है।

2. 7 कार्डों पर काले व सफेद तथा बाकी 3 कार्डों पर विभिन्न रंगों के धब्बे बने होते है।

3. हरमन रॉर्शोक ने कार्डों पर चित्रों का वर्णन इस प्रकार किया है—5 कार्ड बिल्कुल काले, 2 कार्ड काले + सफेद, 3 कार्ड अनेक रंगों के।

4. यह परीक्षण व्यक्तिगत रूप से किसी भी आयु वर्ग पर प्रयोग किया जा सकता है। 

रॉर्शोक स्याही धब्बा परीक्षण पर दी गई अनुक्रियाओं का विश्‍लेषण →

W अनुक्रिया → तीव्र बुद्धि तथा अमूर्त चिन्‍तन का बोध

D अनुक्रिया → स्‍पष्‍ट रूप से देखने व समझने की क्षमता का बोध 

S अनुक्रिया → नकारात्‍मक प्रवृत्ति तथा आत्‍म-हठधर्मी का बोध

F अनुक्रिया → चिन्‍तन के समय एकाग्रता का बोध

A अनुक्रिया → बौद्धिक संकीर्णन तथा सांवेगिक असंतुलन का बोध

P अनुक्रिया → रूढिगत चिन्‍तन एवं सृजनात्‍मकता का बोध

Z अनुक्रिया → उच्‍च बुद्धि, सृजनात्‍मकता तथा निपुणता का बोध

The Rorschach test, which was presented in 1921 by psychologist  Hermann Rorschach of Switzerland.

1. In this test, ink spots are made on 10 cards.

2. Black and white are made on 7 cards and different color spots are made on the remaining 3 cards.

3.H. Rorschach  has described the pictures on the cards in this way – 5 cards absolutely black, 2 cards black + white, 3 cards of multi colors.  

4. This test can be used individually on any age group.

Analysis of responses given on Rorschach inkblot test →

W Response → Sharp intelligence and sense of abstract thinking

D Response → Realization of the ability to see and understand clearly

S Response → Negative tendency and sense of self-belief

F Response → Realization of concentration at the time of thinking

A Response → Intellectual narrowing and sense of emotional imbalance

P Response → Conformed Thinking and Creativity

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