🔆 *प्रासंगिक अंतः बोध परीक्षण, { Thematic appreception Test } ,( T A T)* 🔆 👉 सन् 1935 में मुरे एवं मार्गन ने इस का प्रतिपादन किया है। इस परीक्षण में 30 चित्रों के कई कार्ड होते हैं तथा एक कार्ड खाली रहता है । 👉 सभी चित्र अर्ध निर्देशित होते हैं । 👉 10 पुरुषों के लिए ,10 महिला के लिए, 10 दोनों के लिए होता है। 👉 परीक्षण के समय किसी एक प्रयोज्य पर 👉 20 कार्ड का प्रशासन किया जाता है 👉 दो सत्रों में इसे प्रकाशित किया जाता है 👉 प्रत्येक सत्र में 10 कार्ड का प्रशासन किया जाता है 👉 प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है 👉 प्रत्येक कहानी के लिए 5- 5 मिनट का समय दिया जाता है। 👉 अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रयोज्य से कहानी लिखी जाती है। इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है । कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक मिलती है इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से व्यक्ति अंतर्द्वंद, संवेगात्मक की स्थिति, आवश्यकता ,असामान्य व्यवहार, एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता हैं। 🌀 *बालकों का अंतः बोध परीक्षण (Children Apperception Test ) {C A T}* 🌀 ➡️ T A T का परीक्षण वयस्कों पर किया जाता हैं। वही C A T बालकों के लिए उपयुक्त है। लियोपोल्ड बैलक ने 1948 में इसका प्रतिपादन किया। *भारतीय परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने किया था सन् 1993 में* 👉 यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त हैं। 👉 इसमें कुल 10 चित्र होते हैं। 👉 प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं । 👉 इस चित्र के माध्यम से बालक के – परिवार संबंधी, सफाई संबंधी , प्रशिक्षण इत्यादि समस्या एवं आदतों की जानकारी होती हैं। बुद्धि का स्तर, चिंतन की विशेषताएं, मानसिक द्वंद, सामाजिक संबंध ,अहम की शक्ति इत्यादि विशेषताओं का पता लगाया जा सकता है। 🍀 रोजेनविग P F परीक्षण 🍀 👉 अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे । ◼️ इस परीक्षण के तीन रूप हैं – 1) 4 से 13 वर्ष के बालक के लिए 2) किशोरावस्था के लिए 3) वयस्कता अवस्था के लिए 👉 *उदयपारिक ने*➖ इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया। 👉 इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं। 👉 प्रत्येक चित्र में व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया देता है । इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रमकता ,समूह ,अनुरूपता समायोजन ,कुसामायोजन की जानकारी होती है। 🌀 वाक्य पूर्ति परीक्षण (Sentence completion Test ) 🌀 👉 पाइने और टेण्डलर ने सन् 1930 में इस का प्रतिपादन किया । अधूरे वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए किया जाता है। व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त करवाया जाता है 👉 यह लिखित रूप से होते हैं इसलिए एक शिक्षित व्यक्ति ही इसका परीक्षण दे सकता है इसमें कुल 20 sentence होते हैं। 👉 इच्छा, भय ,आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है । 🌀 शब्द साहचर्य परीक्षण (Word Association Test )🌀 सर्वप्रथम इसका प्रयोग गाल्टन ने 18 79 में किया था।। 👉 75 शब्दों की सूची बनाई। उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र आदि प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती हैं। 👉 इसके बाद युंग (yung) ने 1910 में संवेगात्मक मनो ग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया । युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीकों से विभाजित किया – 1) अहम केंद्रित 2) वर्गोंपरि 3) विरोधी शब्द 4) अन्यान्य 5) बोलने की आदत ✍️✍️ notes by Pragya shukla

💫🔆व्यक्तित्व मापन की विधियां 🔆💫
2. प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण ( Thematic Appreception test) [TAT] ➖
मुरे व मार्गन (1935) में प्रतिपादन किया |
◼ इस परीक्षण में 30 चित्रों के कार्ड होते हैं तथा एक कार्ड खाली रहता है सभी चित्र अर्थ निर्देशित निर्देशित चित्र अर्थ निर्देशित होते हैं |
◼ 10 पुरुषों के लिए 10 महिलाओं के लिए 10 दोनों के लिए परीक्षण के समय किसी एक प्रायोज्य पर |
◼ इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है |
◼ कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक मिलती है |
◼ इस प्रकार निर्मित कहानी की व्यवस्था से व्यक्ति अंतर्द्वंद संवेगात्मक स्थिति आवश्यकता असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है |

3. बालकों का अंतर्बोध परीक्षण (Children Appreception test)[CAT]

◼ TATका परीक्षण वयस्कों पर किया जाता है वही CAT बालकों के लिए उपयुक्त है |

लियोपोल्ड बैलक – 1948 में प्रतिपादन किया |
◼ भारतीय के परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने किया था | 1993 में किया |
◼ यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है |
◼ इसमें कुल 10 चित्र होते हैं |
◼ प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं |
◼ इन चित्र के माध्यम से बालक के :-
▪ परिवार संबंधी
▪ सफाई संबंधी
▪प्रशिक्षण इत्यादि |
समस्या एवं आदतों की जानकारी होती है |
◼ बुद्धि का स्तर चिंतन की विशेषताएं मानसिक द्वंद सामाजिक संबंध अहम की शक्ति इत्यादि |
◼ इसमे विशेषताओं का पता लगाया जाता है |
4. रोजेनविग P.F. परीक्षण ➖
🔸अमेरिका वैज्ञानिक थे |
🔸परीक्षण तीन रूप है |
◼ 4 से 13 वर्ष के बालक के लिए
◼किशोरावस्था के लिए
◼ व्यस्कता अवस्था के लिए
🔸उदयपारिक इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया जाता है |

◼ इस परीक्षण में 24 चित्र होती है प्रत्येक चित्र व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया देता है इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता अनुरूपता समायोजन को कुसमायोजन की जानकारी होती है |

5. वाक्य पूर्ति परीक्षण (Sentence completion test) ➖
पाइने और टेण्डलर – 1930 का प्रतिपादन किया |
◼ व्यक्ति के वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है |
◼ व्यक्ति के गुणों को अवगत करवाया जाता है |
◼ ये लिखित रूप से होते है इसलिए एक अशिक्षित व्यक्ति ही इसका प्रशिक्षण दे सकता है |
◼ इसमें कुल 20 (sentence) होते हैं |
◼ मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि इच्छा भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है |
6. शब्द साहचर्य परीक्षण (Word Association test) ➖
◼ सर्वप्रथम इसका प्रयोग गाल्टन में 1879 में किया था
◼ 75 शब्दों की सूची बनाई |
◼ उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिभाऐ मस्तिष्क में अंकित हो जाती है |
◼ इसके बाद “yung” “युंग” ने 1910 में संवेगात्मक मनोग्रंथियो का पता लगाने के लिए शब्द साहचार्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया |
🔸 युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीके से विभाजित किया :-
१. अहम केंद्रित
२. वर्गोपरि
३. विरोधी शब्द
४. अन्यान्य
५. बोलने की आदत

Notes by :- Ranjana sen

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व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां
(Projective Method of Personality Measurement)
Part 2
__________⭐⭐22 Jan 21 ⭐⭐__
📝प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण
(Thematic Apperception Test :TAT)
🕯️प्रतिपादक : मुरे व मॉर्गन (1935)
↪️यह परीक्षण वयस्कों पर किया जाता है।
↪️इस परीक्षण में 30 चित्रों के कार्ड होते हैं तथा एक कार्ड खाली (कुल 31 कार्ड) रहता है।
↪️सभी चित्र अर्द्धनिर्देशित होते हैं।
↪️जिसमें :-
⏩10 कार्ड पुरुषों के लिए
⏩10 कार्ड महिलाओं के लिए तथा
⏩10 कार्ड दोनों(पुरुष + महिला) के लिए होते हैं।

↪️परीक्षण के समय किसी एक प्रायोज्य पर 20 कार्ड की प्रशासन किया जाता है। यह परीक्षण दो सत्रों में प्रकाशित किया जाता है।
प्रत्येक सत्र में 10 कार्ड का प्रशासन किया जाता है।

↪️प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है। प्रत्येक कहानी के लिए 5 – 5 मिनट का समय दिया जाता है।

↪️ अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रायोज्य से कहानी लिखी जाती है।

↪️इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है। कहानी वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक मिलती है।

↪️इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से व्यक्ति अंतर्द्वंद, संवेगात्मक स्थिति, आवश्यकता, असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है।

🥀🥀

📝बालकों का अन्तर्बोध परीक्षण
(Children Apperception Test :CAT)
🕯️प्रतिपादक : लियोपोल्ड बैलक (1948)

↪️यह परीक्षण बालकों के लिए उपयुक्त है।

↪️भारतीय परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने 1993 में किया था।

↪️यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है।

↪️इसमें कुल 10 चित्र होते हैं प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं।

↪️इन चित्रों के माध्यम से बालक के परिवार संबंधी, सफाई संबंधी, प्रशिक्षण इत्यादि समस्या एवं आदतों की जानकारी होती है।

↪️बुद्धि का स्तर, चिंतन की विशेषताएं, मानसिक द्वंद, सामाजिक संबंध, अहम की शक्ति इत्यादि विशेषताओं का पता लगाया जा सकता है।
🥀🥀

📝रोजेनविग का P.F. परीक्षण

↪️ रोजनविग अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे।
↪️इस परीक्षण के तीन रूप हैं :-
⏩1🥀 4 से 13 वर्ष के बालक के लिए
⏩2🥀 किशोरावस्था के लिए
⏩3🥀 वयस्कता के लिए

↪️ इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन *उदय पारीक* ने किया।

↪️ इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं। प्रत्येक चित्र में व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है।

↪️उत्तर देने वाला एक वाक्य में इसकी प्रतिक्रिया देता है।

↪️इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है। जिसके आधार पर आक्रमकता, समूह अनुरूपता, समायोजन – कुसमयोजन आदि की जानकारी होती है।
🥀🥀

📝वाक्य पूर्ति परीक्षण
(Sentence Completion Test : SCT)
🕯️प्रतिपादक : पाइने और टेण्डलर (1930)

↪️ इस परीक्षण में अधूरे वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है।
↪️ इसमें व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त करवाया जाता है।
↪️यह लिखित रूप से होते हैं इसलिए एक शिक्षित व्यक्ति ही इसका परीक्षण दे सकता है।
↪️इसमें कुल 20 वाक्य (Sentence) होते हैं।

उदाहरणार्थ- मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि……………….।

↪️ इससे व्यक्ति के इच्छा, भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है।
🥀🥀

📝शब्द साहचर्य परीक्षण
(Word Association Test : WAT)
↪️सर्वप्रथम इसका प्रयोग *गाल्टन* ने 1879 ईस्वी में किया था।
↪️ 75 शब्दों की सूची बनाई गई।
↪️ उन्होंने देखा कि *साहचर्य शब्दों* के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती हैं।
↪️ इसके बाद युंग ने 1910 में संवेगात्मक मनोंग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।
↪️युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीके से विभाजित किया है-
⏩1🥀 अहम केंद्रित
⏩2🥀 वर्गोपरि
⏩3🥀 विरोधी शब्द
⏩4🥀 अन्यान्य
⏩5🥀 बोलने की आदत

🥀🥀
🙏🙏

📕📓📗🇮🇳🇮🇳🇮🇳📙📙📘
✍️Notes By Awadhesh Kumar ✍️👁️‍🗨️
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*2.* 🌟 *प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण ( Thermatic apperception test/TET)*🌟

✨ यह परीक्षण “मॉर्गन व मुरे” के द्वारा “1935″में दिया गया था।

👉🏻 इस परीक्षण में कार्डो की कुल संख्या 30 (चित्र के सहित) होती है तथा एक कार्ड खाली ( सादा) रहता है।

👉🏻 सभी चित्र अर्ध निर्देशित होते हैं।

👉🏻 जिसमें 10 पुरुषों के लिए और 10 महिलाओं के लिए तथा 10 दोनों के लिए होता है।

👉🏻 परीक्षण के समय किसी एक पर प्रयोज्य है।

👉🏻 इस परीक्षण में 20 कार्डो का प्रशासन किया जाता है।

👉🏻 दो सत्र में इसे प्रकाशित किया जाता है।

👉🏻 प्रत्येक सत्र में दस कार्ड का प्रकाशन किया जाता है।

👉🏻 प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है।

👉🏻 प्रत्येक कहानी के लिए पांच – पांच मिनट का समय दिया जाता है।

👉🏻 अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रायोज्य से कहानी लिखी जाती है, उसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है। कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक मिलती है।
इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से अंतर्द्वंद, संवेगात्मक की स्थिति, आवश्यकता, असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है

*3.* 🌟 *बालकों का अंतर्बोध परीक्षा(Children apperception test / CAT)* 🌟

👉🏻 *Note :-* TAT परीक्षण वयस्कों पर किया जाता है,वहीं
CAT परीक्षण बालकों के लिए उपयुक्त है।

✨ इस परीक्षण का निर्माण “लियोपोर्ड बैलक” ने “1948″ में इस परीक्षण का प्रतिपादन किया।

👉🏻 *भारतीय परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में “उमा चौधरी”ने सन् “1993″ में किया था।*

👉🏻 यह परीक्षण तीन से ग्यारह वर्ष के आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है।

👉🏻 इसमें कार्डों की कुल 10 संख्या होती है।

👉🏻 प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं।

👉🏻 इस परीक्षण के माध्यम से परिवार संबंधी, सफाई संबंधी, प्रशिक्षण इत्यादि समस्याओं एवं आदतों की जानकारी प्राप्त होती है। तथा बुद्धि का स्तर चिंतन की विशेषताएं मानसिक द्वंद, सामाजिक संबंध, हम की शक्ति इत्यादि विशेषताओं का पता लगाया जा सकता है।

*4.* 🌟 *रोजेनविगा P.F. परीक्षण* 🌟

✨ रोजेनविगा एक अमेरिकी है मनोवैज्ञानिक थे, इन्होंने पूरे तीन परीक्षण दिए–

💫 *(i). चार से तेरह वर्ष के बालक के लिए*

💫 *(ii). किशोरावस्था*

💫 *(iii). वयस्कता*

👉🏻 “उदय पारीक” ने बाल को और वयस्क को के लिए इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया।

👉🏻 इस परीक्षण में चौबीस चित्र होते हैं।

👉🏻 प्रत्येक चित्र में व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है और उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया देता है।

👉🏻 इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषण के द्वारा किया जाता है। जिसके आधार पर आक्रामकता, समूह अनुरूपता, समायोजन, कुरुसमायोजन की जानकारी होती है।

*5.* 🌟 *वाक्य पूर्ति परीक्षण ( Sentence completion test )* 🌟

👉🏻 “पाइने ” एवं “टेण्डलर” ने 1930 में दिया।

👉🏻 इसमें अधूरे वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है ।

👉🏻 व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त कराया जाता है।

👉🏻 यह लिखित रूप से होता है, इसीलिए एक शिक्षित व्यक्ति ही इसका परीक्षण दे सकता है।

👉🏻 इसमें कुल 20 वाक्य (Sentence) होते हैं।

👉🏻 *जैसे:-* “मैं सुख का अनुभव करता हूं, क्योंकि………..।”

👉🏻 इच्छा, भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है।

*6.* 🌟 *शब्द साहचर्य परीक्षण ( Word association test)* 🌟

👉🏻 सर्वप्रथम इनका प्रयोग “गाल्टन” ने “1879″ में किया था।

👉🏻 उन्होंने 75 शब्दों की सूची बनाई।

👉🏻 जिसमें उन्होंने देखा कि “साहचर्य शब्दों” के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती है।

👉🏻 इसके बाद “ युंग(Yong) ” ने “1910″ में संवेगतमक मनोग्रंथियों का पता लगाने के लिए, शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।

👉🏻 युंग ने प्रतिक्रिया शब्द को पांच तरीके से विभाजित किया है–

💫 *(i). अहम केंद्रित*

💫 *(ii). वर्गोपरी*

💫 *(iii). विरोधी*

💫 *(iv). अन्यान्य*

💫 *(v). बोलने की आदत*

✍🏻✍🏻✍🏻 *Notes by–Pooja* ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

2- 💫 प्रासंगिक अंत: बोध परीक्षण (thematic application test) (T.A.T.) 💫

🌸 इस विधि का निर्माण सन 1935 में मरे वह मोर्गन ने किया।

🌸 इस परीक्षण में 30 चित्रों के कार्ड होते हैं। तथा 1 कार्ड खाली रहता है सभी चित्र अर्ध निर्देशित होते हैं।

🌸 10 पुरुषों के लिए, 10 महिलाओं के लिए, 10 दोनों के लिए परीक्षण के समय किसी एक प्रायोज्य पर।

🌸 इसमें एक व्यक्ति को दो बार में 20 चित्र दिखाए जाते हैं तथा उन चित्रों के आधार पर कहानी लिखने के लिए कहा जाता है।

🌸 प्रत्येक कार्ड को देखकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है।

🌸 प्रत्येक कहानी के लिए 5- 5 मिनट का समय दिया जाता है।

🌸 अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय, या प्रयोज्य से कहानी लिखी जाती है।

3. 💫बालकों का अतंर्बोध परीक्षण (children application test) (C.A.T.)

🌸 इस विधि का निर्माण सन 1948 में लियोपोल्ड बैरक ने किया।

🌸 भारतीय के परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने सन 1993 में किया।

🌸 यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु के बालकों पर प्रशासित किया जा सकता है।

🌸 इसमें कुल 10 चित्र होते हैं।

🌸 प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं जो जानवरों के व्यवहार को प्रदर्शित करता है।

🌸 इन चित्र के माध्यम से बालक के➖

✍🏻 परिवार संबंधी
✍🏻 सफाई संबंधी
✍🏻 प्रशिक्षण इत्यादि

🌸 समस्या एवं आदतों की जानकारी मिलती है

🌸 बुद्धि का स्तर चिंतन की विशेषताएं मानसिक सामाजिक संबंध अहम की शक्ति इत्यादि।

🌸 इसमें विशेषताओं का पता लगाया जाता।

4-💫 रोजेनविग P.F. परीक्षण

🌸 अमेरिका वैज्ञानिक थे

🌸 परीक्षण का तीन रूप है।

🌸 4 से 13 वर्ष के बालकों के लिए किया जाता है।

🌸 यह परीक्षण किशोरावस्था के बालकों में किया जाता है।

🌸 वयस्कता अवस्था के लिए

🌸 उदयपारिक इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया जाता है।

🌸 इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं प्रत्येक चित्र व्यक्ति की कुंठा को दर्शाता है उत्तर देने वाला एक वाक्य मैं उसकी प्रतिक्रिया देता है इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता, अनुरूपता, समायोजन को को समायोजन की जानकारी होती है।

5-💫 वाक्य पूर्ति परीक्षण (sentence complete test)

🌸 इस परीक्षण को पाइन और टेण्डर ने सन 1930 में किया।

🌸 व्यक्ति के वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है।

🌸 व्यक्ति के गुणों को अवगत कराया जाता है।

🌸 यह लिखित रूप से होता है इसलिए एक अशिक्षित व्यक्ति ही इसका प्रशिक्षण दे सकता है।

🌸 इसमें कुल 20 वाक्य होते हैं।

🌸 मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि इच्छा ,भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है।

6-💫 शब्द साहचर्य परीक्षण (Word association Method)

🌸 इसका परीक्षण गाल्टन में सन 18 79 में किया।

🌸 इसमें 75 शब्दों की सूची बनाई जाती है।

🌸उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती हैं।

🌸 इसके बाद युंग ने सन 1910 में संवेगात्मक मनोग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचार्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।

🌸 युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीके से विभाजित किया➖
1-अहम केंद्रित
2-वर्गोपरि
3-विरोधी शब्द
4-अन्यान्य
5-बोलने की आदत

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma📚📚✍🏻

*प्रासंगिक , अंतर्बोध परीक्षण*

*Thermostatic apperception test/ TAT परीक्षण)*
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✨यह परीक्षण मुर्रे एवं मार्गन ने 1935 में दिया था।

✨ इस परीक्षण में 30 चित्रों के cards होते हैं तथा एक कार्ड खाली रहता है।

✨सभी चित्र अर्ध निर्देशित होते हैं जिसमें 10 पुरुषों के लिए 10 महिलाओं के लिए तथा 10 दोनों के लिए होता है।

✨परीक्षण के समय किसी एक पर प्रयोज्य है।इस परीक्षण में 20 कार्डों का प्रशासन किया जाता है।

✨दो सत्रों में इसे प्रकाशित किया जाता है।

✨प्रत्येक सत्र में 10 कार्डों का प्रकाशन किया जाता है।

✨ प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है। प्रत्येक कहानी के लिए पांच-पांच मिनट समय दिया जाता है।

✨अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रायोज्य से कहानी लिखी जाती है। इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है।

✨कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक मिलती है।

✨इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से अन्तर्द्वन्द, संवेगात्मक स्थिति, आवश्यकता, असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है।

*बालकों का अंतर्बोध परीक्षण*
*(Children apperception test/CAT)*
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✨ टी. ए. टी. परीक्षा वयस्कों पर किया जाता है वही सी. ए. टी. परीक्षण बालकों के लिए उपयुक्त है।

✨ इस परीक्षण का निर्माण “लियोपोल्ड बैलक” ने 1948 में किया था।

✨भारतीय परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने किया था 1993 में।

✨यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है।

✨ इसमें कुल 10 cards होते हैं तथा प्रत्येक पर जानवरों के चित्र अंकित होते हैं।

✨इस चित्र के माध्यम से बालक के परिवार संबंधी, सफाई संबंधी, प्रशिक्षण की तैयारी समस्या एवं आदतों की जानकारी होती है।

✨बुद्धि का स्तर, चिंतन की विशेषताएं, मानसिक द्वंद्व, सामाजिक संबंध, अहम की शक्ति आदि विशेषताओं का पता लगाया जाता है।

*रोजेनविगा pf परीक्षण*
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रोजेनविगा एक अमेरिकी वैज्ञानिक थे। इन्होंने पूरे तीन परीक्षण किए-

✨1). 4 से 13 वर्ष के बालकों के लिए

✨2). किशोरावस्था

✨3). वयस्क अवस्था

✨”उदय पारीक” ने बालकों और वयस्कों के लिए इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया।

✨इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं।

✨प्रत्येक चित्र में व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है और उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया देता है।

✨किस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषण के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता, समूह अनुरूपता, समायोजन, कुसमायोजन की जानकारी होती है।

*वाक्य पूर्ति परीक्षण*
*(Sentence completion test)*

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✨”पाइने” एवं “टेंडलर” ने 1930 में यह परीक्षण किया था।

✨इसमें अधूरे वाक्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है ।

✨व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त कराया जाता है।

✨ यह लिखित रूप से होता है। इसलिए एक शिक्षित व्यक्ति की इसका परीक्षण दे सकता है।

✨ इसमें कुल 20 वाक्य होते हैं, जैसे- मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि……….???

✨इस परीक्षण से इच्छा, भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है।

*शब्द साहचर्य परीक्षण*
*(World association test)*
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✨सर्वप्रथम इनका प्रयोग “गाल्टन” – 1879 में किया था।

✨उन्होंने 75 शब्दों की सूची बनाई। जिसमें उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती है।

✨इसके बाद युंग ने 1910 में संवेगात्मक मनु ग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।

✨ युंग ने प्रतिक्रिया शब्द को 5 तरीके से विभाजित किया है-

1). अहम केंद्रित

2). वर्गोपरि

3). विरोधी

4). अन्यान्य

5). बोलने की आदत

*Notes by Shreya Rai*✍️

🌹🌹 व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां 🌹🌹

🌹Projective Methods Of Personality🌹

♣️ *हरमन रोर्शाक स्याही धब्बा परीक्षण ♣️*

🎴 ♣️ *Ink – Blot Test* *[ I. B. T. ]* ♣️🎴

प्रतिपादक

स्विट्जरलैंड के मनोचिकित्सक ” हरमन रोर्शाक ”

परीक्षण का प्रतिपादन किया :-

सन् 1921 में

इस परीक्षण का प्रयोग किया जाता है :-

3 – 14 वर्ष के बच्चों पर

इस परीक्षण में प्रयोग किये जाने बाले , गत्ते के कार्डों पर स्याही के धब्बे लगे हुये कुल 10 कार्ड होते हैं , जिसमें से :-

5 कार्डों पर :- काले रंग के स्याही के धब्बे

2 कार्डों पर :- काले व लाल रंग के स्याही के धब्बे तथा

3 कार्डों पर :- अनेक रंगों के स्याही के धब्बे लगे होते हैं।

इन कारणों के माध्यम से व्यक्ति के अचेतन मन की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है।

जिन व्यक्तियों (बच्चों) का व्यक्तित्व मापन करना होता है उन्हें परीक्षण कर्ता एक कार्ड देता और व्यक्ति / बच्चे उसे देखकर कोई विवरण कहानी प्रस्तुत कर देते हैं उस परीक्षण के माध्यम से उसकी बुद्धि सामाजिकता , समायोजन , संवेगात्मक स्थिति , कल्पनाशीलता , अहम की शक्ति आदि पक्षों का अध्ययन किया जाता है।

एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक ही उसका अध्ययन कर सकता है।

*क्रो & क्रो के अनुसार :* –

धब्बों की व्याख्या करके परीक्षार्थी अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण चित्र प्रस्तुत कर देता है।
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

🌺प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण / कथानक बोध परीक्षण
🌺 Thematic Ap perception Test [T.A.T.]🌺

प्रतिपादक :- हेनरी ए मुर्रे एवं क्रिस्टियान डी मार्गन

परीक्षण का प्रतिपादन किया सन् :- 1935

कार्डों की संख्या होती है:-30 + 1

परीक्षण किया जाता है :- 14 वर्ष से अधिक उम्र के ( वयस्कों ) पर

👉 इस परीक्षण में चित्र बने हुए 30 कार्ड होते हैं तथा 1 कार्ड खाली रहता है।

👉 सभी कार्डों पर अर्ध निर्देशित चित्र बने होते हैं।

👉 10 कार्ड पुरुषों के लिए , 10 कार्ड महिलाओं के लिए तथा अन्य 10 कार्ड पुरुषों एवं महिलाओं दोनों के लिए होते हैं।

👉 परीक्षण के समय किसी एक प्रयोज्य पर 20 कार्डों का प्रशासन किया जाता है।

👉 यह परीक्षण दो सत्रों में प्रकाशित किया जाता है।

👉 प्रत्येक सत्र में 10 कार्डों का प्रशासन किया जाता है और प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखी जाती है।

👉 प्रत्येक कहानी के लिए पांच 5 – 5 मिनट का समय निर्धारित किया जाता है।

👉 अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रयोज्य से कहानी लिखी जाती है। इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है।

👉 कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र – चित्रण के विषय से व्यक्तित्व की झलक मिलती है।

👉 इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से व्यक्ति के अंतर्द्वंद , संवेगात्मक स्थिति , आवश्यकता , असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है।

👉 अतः इस परीक्षण के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व की विशेषता की जांच की जाती है।

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🌺 बालकों का अंतर्बोध परीक्षण / बाल सम्प्रत्यक्ष परीक्षण 🌺
🌺 Children Apperception Test [C.A.T. ] 🌺

प्रतिपादक :- लियोपोल्ड बैलक

इस परीक्षण का प्रतिपादन किया सन् :- 1948

इस परीक्षण में चित्रों की संख्या होती है :- 10

इस परीक्षण का प्रयोग किया जाता है :- 3 – 11 वर्ष के बच्चों पर

👉 भारतीय परिस्थिति के लिए इस परीक्षण का संशोधन एवं अनुकूलन ” सन् 1993 में कोलकाता की उमा चौधरी ने किया था । ”

👉 यह परीक्षण 3 – 11 वर्ष की आयु वाले बच्चों के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है।

👉 इसमें कुल 10 कार्ड होते हैं जिन पर जानवरों के चित्र अंकित होते हैं।

👉 इन्हीं चित्रों के माध्यम से बालक के परिवार संबंधी , सफाई संबंधी परीक्षण इत्यादि समस्या एवं आदतों की जानकारी की जाती है।

👉 बुद्धि का स्तर , चिंतन की विशेषताएं , मानसिक द्वंद , सामाजिक संबंध , अहम की शक्ति इत्यादि विशेषताओं का पता लगाया जाता है।

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🌺. रोजेनविग P . F. परीक्षण🌺

प्रतिपादक :- अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रोजेनविग

यह अर्ध प्रक्षेपण परीक्षण है जो कि निम्नलिखित तीन रूपों में है :-

1. 4 – 13 वर्ष के बालकों के लिए
2. किशोरावस्था -किशोरों के लिए
3. वयस्कता – वयस्कों के लिए

👉 ” उदय पारीक ” ने इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया था।

👉 इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं।

👉 प्रत्येक चित्र में व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है।

👉उत्तर देने वाला (परीक्षार्थी) एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया लिख देता है।

👉इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता , समूह अनुरूपता , समायोजन , कुसमायोजन की जानकारी होती है।

👉इस परीक्षण में ऐसे कुंठित (frustration) बाले चित्रों के माध्यम से प्रतिकूल परिस्थितियों को दिखाकर व्यक्ति की सोचने, समझने, निर्णय लेने और विवेकशीलता का पता लगाया जाता है।

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🌺 वाक्य पूर्ति परीक्षण 🌺
🌺 Sentence Completion Test 🌺

प्रतिपादक :- पाइने एवं टेण्डलर

इस परीक्षण का प्रतिपादन किया सन् :- 1930

👉इसमें अधूरे वाक्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए यह परीक्षण किया जाता है।

👉इस परीक्षण के माध्यम से व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त करवाया जाता है।

👉यह लिखित रूप से होता है इसलिए एक शिक्षित व्यक्ति ही इसका परीक्षण दे सकता है।

👉इस परीक्षा में कुल 20 वाक्य निर्धारित किए गए हैं, जैसे :-

*” मैं सुख का अनुभव करती हूं क्योंकि ……… । “*

👉इस परीक्षण से व्यक्ति की इच्छा , भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है।

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🌺 शब्द साहचर्य परीक्षण 🌺🌺Word Association test 🌺

👉इस परीक्षण का सर्वप्रथम प्रयोग ” गॉल्टन “ने सन 1879 में किया था।

👉सर्वप्रथम उन्होंने 75 शब्दों की सूची बनाई थी।

👉उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिमाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती हैं।

👉इसके बाद ( Yung युंग ) ने 1910 में संवेगात्मक मनोग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।

👉युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीके से विभाजित किया है :-

1. अहम केंद्रित
2. वर्गोपरि
3. विरोधी शब्द
4. अन्यान्य
5. बोलने की आदत

👉इसके आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व की विशेषताओं का पता लगाया जाता है।

✍️ Notes by – जूही श्रीवास्तव ✍️

💫🔆व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां :-
2. प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण ( Thematic Apperception test) [TAT] ➖
मुरे व मार्गन (1935) में प्रतिपादन किया |
◼ इस परीक्षण में 30 चित्रों के कार्ड होते हैं तथा एक कार्ड खाली रहता है सभी चित्र अर्थ निर्देशित निर्देशित चित्र अर्थ निर्देशित होते हैं |
◼ 10 पुरुषों के लिए 10 महिलाओं के लिए 10 दोनों के लिए परीक्षण के समय किसी एक प्रायोज्य पर |
◼ इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है |
◼ कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण से विषय के व्यक्तित्व की झलक की झलक मिलती है |
◼ इस प्रकार निर्मित कहानी की व्यवस्था से व्यक्ति अंतर्द्वंद संवेगात्मक स्थिति आवश्यकता असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है |

3. बालकों का अंतर्बोध परीक्षण (Children Apperception test) [CAT] ➖
◼ (TAT) का परीक्षण वयस्कों पर किया जाता है वही जाता है वही (CAT) बालकों के लिए उपयुक्त है |

◼ लियोपोल्ड बैलक – 1948 में प्रतिपादन किया |
◼ भारतीय के परिस्थिति के लिए इसका इसका परिस्थिति के लिए इसका इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता में उमा चौधरी ने किया था | 1993 में
◼ यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चे के व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है |
◼ इसमें कुल 10 चित्र होते हैं |
◼ प्रत्येक पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं |
◼ इन चित्र के माध्यम से बालक के :-
▪ परिवार संबंधी
▪ सफाई संबंधी
▪प्रशिक्षण इत्यादि |
समस्या एवं आदतों की जानकारी होती है |
◼ बुद्धि का स्तर चिंतन की विशेषताएं मानसिक द्वंद सामाजिक संबंध अहम की शक्ति इत्यादि |
◼ इसमे विशेषताओं का पता लगाया जाता है |
4. रोजेनविग P.F. परीक्षण ➖
🔸अमेरिका वैज्ञानिक थे |
🔸परीक्षण तीन रूप है |
◼ 4 से 13 वर्ष के के वर्ष के के 13 वर्ष के के वर्ष के के बालक के लिए
◼किशोरावस्था के लिए
◼ व्यस्कता अवस्था के लिए
🔸उदयपारिक इस परीक्षण का भारतीय परिस्थिति में अनुकूलन किया जाता है |

◼ इस परीक्षण में 24 चित्र होती है प्रत्येक चित्र व्यक्ति की कुंठा प्रत्येक चित्र व्यक्ति की कुंठा व्यक्ति की कुंठा को दर्शाया जाता है उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया देता है इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक के द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता अनुरूपता समायोजन को कुसमायोजन की जानकारी होती है |

5. वाक्य पूर्ति परीक्षण (Sentence completion test) ➖
पाइने और टेण्डलर – 1930 का प्रतिपादन किया |
◼ व्यक्ति के वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है |
◼ व्यक्ति के गुणों को अवगत करवाया जाता है |
◼ ये लिखित रूप से होते है इसलिए एक अशिक्षित व्यक्ति ही इसका प्रशिक्षण दे सकता है |
◼ इसमें कुल 20 (sentence) होते हैं |
◼ मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि इच्छा भय आदि संबंधित व्यवहार का पता चलता है |
6. शब्द साहचर्य परीक्षण (Word Association test) ➖
◼ सर्वप्रथम इसका प्रयोग गाल्टन में 1879 में किया था
◼ 75 शब्दों की सूची बनाई |
◼ उन्होंने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिभाऐ मस्तिष्क में अंकित हो जाती है |
◼ इसके बाद “yung” “युंग” ने 1910 में संवेगात्मक मनोग्रंथियो का पता लगाने के लिए शब्द साहचार्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया |
🔸 युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीके से विभाजित विभाजित किया :-
१. अहम केंद्रित
२. वर्गोपरि
३. विरोधी शब्द
४. अन्यान्य
५. बोलने की आदत
Notes by :- Ranjana sen

🔆व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां

🔅प्रासंगिक अंतर बोध परीक्षण [Thematic Appreciation Test] (TAT) ➖

▪️इसका परीक्षण मुर्रे एवम् मॉर्गन ने 1935 में दिया था।
▪️ इस परीक्षण में चित्र वाले 30 कार्ड होते हैं और एक खाली कार्ड होता है।
(30 चित्र वाले कार्ड्स + 1 बिना चित्र वाला कार्ड = 31 कार्ड्स)

▪️ कार्ड में दिए गए चित्र अर्ध निर्देशित मतलब आधा निर्देशित होते हैं। जिसमें से
✓10 पुरुष के लिए कार्ड
✓10 महिलाओं के लिए कार्ड
✓10 कार्ड पुरुष और महिला दोनों के लिए ही होते हैं।

▪️ परीक्षण के समय में केवल 20 कार्ड का प्रयोजन या प्रेजेंटेशन किया जाता है जिसे दो बार या केवल दो सत्र में किया जाता है।
अर्थात एक सत्र में 10 कार्ड से और दूसरे सत्र में बाकी के 10 कार्ड से परीक्षण करते हैं।

▪️प्रत्येक कार्ड को दिखाकर अलग-अलग कहानी लिखवाई जाती है और प्रत्येक कहानी के लिए 5 मिनट का समय दिया जाता है।
और बाकी के अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रयोज्य से कहानी लिखी जाती है।
इसके बाद उसका विश्लेषण किया जाता है।

▪️ कहानी में जो पात्र या कैरेक्टर होते हैं उनके चरित्र चित्रण को देखकर या उनका विश्लेषण करके व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है।
अर्थात कहानी में वर्णित पात्र एवं उनके चरित्र चित्रण के विषय से व्यक्तित्व की झलक मिलती है।

▪️ हर व्यक्ति के अपने परिस्थिति के हिसाब से शब्द होते हैं और इन्हीं शब्दों से प्रयोजन लगाया जाता है कि उन्होंने जो कहानी बताई है या जो कहानी में पात्रों का चरित्र चित्रण किया है उसके आधार पर ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता चलता है।

इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से व्यक्तित्व की अंतर्द्वंद, संवेगात्मक स्थिति, आवश्यकता और सामान्य व असामान्य व्यवहार एवं समस्या के बारे में पता लगाया जा सकता है।

▪️हर व्यक्ति के लिए हर परिस्थिति को देखने का अपना एक नजरिया होता है अर्थात सबका अलग अलग नजरिया होता है इसीलिए इन कार्ड्स को दिखाकर व्यक्ति के सोच का पता किया जा सकता है।

▪️कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय के बारे में अपनी समझ,सोच और अपने संज्ञान के आधार पर ही उस विषय के बारे में बताता है अर्थात् वह अपने व्यक्तित्व के आधार पर ही उस विषय के बारे में बताता है इसे यूनिवर्सल सच्चाई नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर एक व्यक्ति की अपनी सोच ,समझ, संज्ञान तथा उसका अपना अलग एक नजरिया होता है जो व्यक्तित्व के रूप में दिखाई देता है।

🔅बालकों का अंतर बोध परीक्षण
[Children Appreciation Test (CAT)]➖
CAT परीक्षण बालकों के लिए उपयुक्त होता है।

▪️ इस परीक्षण को सर्वप्रथम लियोपोल्ड बैलक ने 1948 में दिया था।
▪️इसमें भारतीय बच्चों की परिस्थितियों के हिसाब से इसका संशोधन व अनुकूलन उमा चौधरी द्वारा कोलकाता में 1993 में किया गया था।

▪️ यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चों के व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए उपयुक्त है।

▪️ परीक्षण में कुल 10 कार्ड होते हैं।
▪️प्रत्येक कार्ड पर जानवर के चित्र अंकित होते हैं।

▪️इन चित्र के माध्यम से बालक के परिवार संबंधी, सफाई संबंधी, प्रशिक्षण इत्यादि संबंधित समस्याओं व आदतों की जानकारी प्राप्त होती है
क्योंकि बच्चा उन चित्रों को देखता है तो वह उस पर अपनी प्रतिक्रिया या अपने तौर तरीके व्यक्त करता है जिसके माध्यम से उस बच्चे के जो भाव, संवेग, मानसिक द्वंद ,चित्रण की विशेषताएं ,बुद्धि स्तर ,सामाजिक संबंध, अहम की शक्ति इत्यादि विशेषताओं के बारे में पता लगाया जा सकता है।

🔅रोजेंविग PF परीक्षण ➖
▪️रोजेनविग अमेरिकी मनोवैज्ञानिक है।
▪️ इन्होंने अपने परीक्षण के तीन रूप बताएं।
1 4 से 13 वर्ष के बालकों के लिए परीक्षण
2 किशोरावस्था के लिए परीक्षण
3 वयस्कता के लिए परीक्षण

▪️ भारतीय परिस्थिति में इसका अनुकूलन “उदय पारीक” द्वारा किया गया था।
(भारतीय पारिस्थितिकी मतलब वयस्क की अवस्था में जो हमारी सोच, व्यक्तित्व है ,जो हमारा नजरिया है वह उस वातावरण में परिस्थिति के अनुसार होता है ठीक इसी प्रकार भारत के निवासियों की सोच, व्यक्तित्व व व्यवहार भी वैसा ही होगा जैसे भारत की परिस्थिति है।

▪️इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं और प्रत्येक चित्र में एक व्यक्ति की कुंठा या हीन भावना या कमी को बताने वाला या क्षीणता को उत्पन्न करने वाला वाक्य होता है और इस चित्र को देखकर उत्तर देने वाला एक वाक्य में अपनी प्रतिक्रिया दे देता है और इस तरह से हर प्रतिक्रिया का या वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रमकता, कुसमायोजन, समूह अनुरूपता इत्यादि की जानकारी मिलती है।

▪️चित्र में कुछ ऐसी बातें लिखी होती हैं जिसे देखने वाले व्यक्ति में कुंठा उत्पन्न होती है अर्थात इस परीक्षण से यह पता किया जाता है कि व्यक्ति किस प्रकार कुंठा (विपरीत परिस्थिति) के उत्पन्न होने पर कैसा सोचते हैं यह कैसा व्यवहार करते हैं इस ओर से ही व्यक्ति के बेहतर व्यक्तित्व का पता किया जा सकता है।

🔅 वाक्य पूर्ति परीक्षण
[Sentence Completion Test (SCT)]➖

▪️ यह परीक्षण पाईने एवम् टैण्डलर ने 1930 में प्रतिपादित किया।

▪️ इसमें अधूरे वाक्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा जाता है।

▪️यदि हम कोई भी अधूरे वाक्य को शीघ्र पूरा करना चाहते हैं तो हमारी जो अभिव्यक्ति है जिसकी मदद से हम वाक्य पूरा करते हैं तो वहीं अभिव्यक्ति हमारी सोच को दिखाती है।

▪️इस प्रकार की अभिव्यक्ति केवल वही व्यक्ति कर पाएंगे जिनके पास उस दिए गए वाक्य को समझने की समझ या उस वाक्य के बारे में जानकारी है।

▪️इसमें व्यक्ति के गुणों को अभिव्यक्त किया जाता है यह लिखित रूप में होता है चूंकि यह लिखित रूप में होता है इसीलिए एक शिक्षित व्यक्ति पर ही इसका परीक्षण किया जा सकता है ।

▪️ इस परीक्षण में कुल 20 वाक्य होते हैं जिसमें से एक-
मैं सुख का अनुभव करती हूं क्योंकि…………..।

▪️ इस परीक्षण के माध्यम से व्यक्ति की अभिव्यक्ति के द्वारा व्यक्ति की इच्छाएं,भय आदि संबंधी व्यवहार का पता चलता है।

🔅 शब्द साहचर्य परीक्षण
(Word Association Test)➖

▪️ सर्वप्रथम इसका प्रयोग गार्डन 1879 में किया था।

▪️ जिसमें उन्होंने 75 शब्दों की सूची बनाई।

▪️शब्द साहचर्य परीक्षण में साहचर्य से तात्पर्य है जो मैत्री है या बंधुत्व है यह एक दूसरे से जुड़े या मिले हुए शब्द होते हैं उन शब्दों के स्मरण से हमारी कुछ मानसिक प्रतिभा या चित्र हमारे दिमाग में अंकित हो जाते हैं।

जैसे जब हमें कोई चीज पता होती है तो उस पता हुई चीज से जोड़कर ही हम किसी दूसरी बात को अपने दिमाग में याद रख पाते हैं।

▪️ अर्थात गाल्टन ने देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र और प्रतिभा मस्तिष्क में अंकित हो जाती हैं।

▪️ साहचर्य शब्द मतलब ऐसा कुछ जो किसी कारण से हमारे किसी ना किसी परिस्थिति से जुड़ा हुआ होता है।
अर्थात शब्द का शब्द से मिलन तो होता ही है लेकिन साथ ही 7 शब्द का परिस्थिति से भी मिलन होता है

इस परीक्षण में यह बोला गया कि उस शब्द से हमें क्या याद है इससे हमारे माइंड सेट के बारे में पता चलता है।

किसी भी शब्द को बोलने के बाद उससे सुनने पर हमारे मस्तिष्क में तुरंत क्या आता है उसकी अभिव्यक्ति से ही व्यक्ति के सोच का या व्यक्तित्व का या माइंडसेट का पता चलता है।

▪️युंग ने 1910 में संवेगात्मक मनो ग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण रूप से विकसित कर दिया।

▪️ युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को 5 तरीकों से विभाजित किया
1 अहम केंद्रित
2 वर्गो परि
3 विरोधी शब्द
4 अन्यान्य
5 बोलने की आदत

1 अहम केंद्रित – ऐसी प्रतिक्रिया जो केवल अपने ऊपर अपने बारे में जैसे- मैं ,मेरा, मुझसे, मेरा वाला इत्यादि

2 वर्गो परि -व्यक्ति चीजों को अलग-अलग तौर तरीके से सोचते हैं या उसको अलग-अलग रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं या उस चीज के निश्चित वर्ग या निश्चित क्षेत्र या उसके निश्चित सेक्शन के बारे में क्या सोचते हैं।

3 विरोधी शब्द – जिस भी विषय पर बात करते हैं उस विषय पर अपनी विरोधी प्रतिक्रिया देते हैं।

4 अन्यान्य – किसी भी अन्य विषय या विषय से हटकर उस विषय पर अन्य प्रकार से प्रतिक्रिया देते हैं।

5 बोलने की आदत – कुछ विषय में इसीलिए प्रतिक्रिया देते हैं कि उसे विषय में बोलने की आदत या उस विषय में कॉमन या हमेशा एक ही तरह के शब्द बोलने की आदत होती है।

✍🏻
Notes By-Vaishali Mishra

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