“शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रियाए”
(Basic process of teaching and learning)➖

🔅बिना किसी प्रक्रिया के हम कार्य को नहीं सीख सकते हैं।
यदि शिक्षक अपने शिक्षण कार्य को पूरा करते हुए बच्चो को सीखा रहा है और बच्चे उसे पूरी तरह से नहीं सीख पाया है तो शिक्षण का उद्देश्य कभी भी पूरा नहीं होगा।
सभी बच्चो में अधिगम ग्रहण करने की क्षमता या तरीका अलग अलग होता हैं।बच्चे जैसा भी सीखना चाहे उसे समझ आए वैसे ही शिक्षक द्वारा किसी भी तरह से सिखाया जाए।
जब भी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया करवाई जाती है तो उसके द्वारा प्राप्त परिणाम प्रभावी भी होना चाहिए मुख्य रूप से वास्तवीक रूप से teaching कराई जानी चाहिए।
🔅 शिक्षण अधिगम को प्रभावित करने वाले कई मुख्य कारक है जो निम्न प्रकार है➖

1 अनुवांशिकता- यह बहुत ही महत्पूर्ण कारक है क्योंकि बच्चे में कोई चीज आनुवंशिक है तो उसे शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

2.पर्यावरण – इसका भी महत्वपूर्ण योगदान है । जहां पर बच्चा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चारो ओर से घिरा या जुड़ा हुआ है वहीं पर्यावरण कहलाता है ।हमारा पर्यावरण में जो भी चीजे है वो वर्चुअली रूप से हमे किसी न किसी रूप में हमारे कार्य को या हमारी परिस्थिति को सकारात्मक या नकारात्मक रूप से अवश्य ही प्रभावित करती है।

  1. व्यक्तित्व- *यह मुख्य रूप से अनुवांशिकता ओर पर्यावरण पर ही निर्भर करता है इसमें व्यक्तित्व,सोच, चिंतन एवं समझ सब आ जाता हैं,ओर इन्हे पर्यावरण प्रभावित करते है जिससे हमारे व्यक्तित्व में निखार आता है और हमारा व्यक्तित्व ही शिक्षण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • व्यक्तित्व में अनुवांशिकता की भी महत्व पूर्ण भूमिका होती हैं। जैसे यदि हम शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में शामिल लेकिन जब हम मानसिक रूप से किसी और के बारे में सोच रहे हैं तो आपका अधिगम कभी भी पूरा नहीं होगा या आप जी सीखना चाहते है वो कभी भी नहीं सीख पाएंगे।
  1. अनुभव- जब भी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के समय कोई परेशानी या समस्या आती है तो उस समस्या का समाधान हम अपने अनुभव से निकाल लेते है। अनुभव के द्वारा ही हम प्रक्रिया के अच्छे बुरे को समझ सकते है।
  2. प्रशिक्षण- यदि प्रशिक्षण नहीं होगा तो शिक्षण अधिगम भी प्रभावित होगा ।इसलिए शिक्षक को बच्चे की समझ के अनुसार ,नवीन भिभिन प्रयोग या कई तरह के प्रशिक्षण का प्रयोग करके शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी ओर बेहतर बना सकते हैं।
    जैसे –
    ▪️वुडवर्थ के अनुसार – व्यक्ति को नवीन ज्ञान या जो नवीन प्रतिक्रिया है उनको प्राप्त करने की प्रक्रिया ही अधिगम कहलाता है।
    ▪️ क्रो एंड क्रो के अनुसार – अधिगम आदत , अभिवृद्धि और ज्ञान का ही अर्जन है।
    ( यदि हमारे पास कोई ज्ञान है तो हम उस ज्ञान को अपनी अभिवृद्धि या अपनी सोच में रखते है या उस ज्ञान को स्वीकारते है और उस ज्ञान को अपनी आदतों में भी अपनाने लगते है तो वहीं अधिगम अर्जन कहलाता है।
    यदि हम अपने ज्ञान को जानते है और अपनी सोच में भी रखते है लेकिन अपनी आदत में नहीं अपनाते है तो सही अधिगम अर्जन कभी पूरा नहीं होगा।
    सीखना ज्ञानात्मक,प्रभाव आत्मक ओर क्रियात्मक तीनो आधार पर कार्य करता है।
    जिस का हमे ज्ञान होता है वो हमारे सीखने को प्रभावित करता है और उस सीखे हुए ज्ञान को हम अपने कार्य में लेने लगते है।

🔅 व्यक्ति का अधिगम गर्भ से ही शुरू हो जाता हैं ओर बच्चा जैसे ही जन्म ले लेता है तो उसको अधिगम वातावरण के साथ समायोजन करने पर प्राप्त हो जाता हैं।
🔅सीखना➖

▪️सीखना एक प्रक्रिया है जिसके कई चरण से होकर गुजरती है ।
▪️सीखना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसमे हम कहीं पर भी किसी न किसी रूप में कुछ न कुछ मूर्त या अमूर्त रूप से सीखते रहते है।
(जब हम किसी विषय पर सोचते गई है तो हम केवल उस विषय के बारे में विश्लेषण कर रहे होते है।)
▪️ स्थानांतरण- यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है जिसमे हम ज्ञान को किसी न किसी माध्यम से या साधन से या पर्यावरण से प्राप्त ज्ञान को अपने अंदर स्थानांतरित करते है तो सीखते है।
▪️सीखना एक रचनातमकता गैया रचनात्मक प्रक्रिया है।जिसमे हम जब चीजों को सीखते या अपने अंदर समाहित करते है तो उसके लिए कई तरीको गा कई रचनात्मकता का प्रयोग करते है या किसी भी समस्या जा समाधान ढूंढने में भी रचनात्मकता का प्रयोग करते है।
▪️सीखना एक प्रयोजन या एक कारण है।यदि हमारे पास कोई कारण है या कोई प्रयोजन या कोई उद्देश्य है तो हम उसे पूरा करने के लिए हम सीखते है।
▪️सीखना एक अनुकूलन है जब हम सीखते है तो उसे अपनी सोच ,व्यवहार, तौर तरीकों में अनुकूलित या समायोजित करने लगते है और यही सीखना कहलाता है।
▪️सीखना एक विकास है यदि हम किसी कार्य को सीख रहे है तो हमारा विकास हो रहा हैं या हमारे अंदर उस कार्य के गुण विकसित हो रहे है।
▪️सीखना एक परिवर्तन है। जब हम किसी कार्य को सीख रहे है तो हमारे अंदर कोई न कोई परिवर्तन अवश्य होता है।
▪️सीखना सार्वभौमिक है।यदि किसी भी कार्य एक बार सही रूप से सीख लिया जाता है तो वह सार्व भौमिक हो जाता है।सभी जगह ,किसी भी परिस्थिति में अपने सीखे हुए ज्ञान का प्रयोग कर पाते है।


शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रियाएं = इस प्रक्रिया के माध्यम से हम student के development के लिए वो हर चीज जो समझने या समझाने मे सहायक है वही शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रिया हैI

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक

(1) अनु्वाशिकता(Heredity):- उम्र के साथ साथ सबका विकास होता है लेकिन सबका समान विकास नहीं होता है इसमें मुख्य भूमिका अनुवाशिकता की होती है

(2) पर्यावरण(Environment ) जहाँ जहाँ हम अपना समय व्यतीत करते हैं वह हमारा environment है |यह प्रत्यक्ष  एवं अप्रत्यक्ष दोनों होता है जैसे अकैडमी मोबाइल फोन आदि.. (3) व्यक्तित्व (Personality) :- व्यक्तित्व हमारे अधिगम की मूल प्रक्रिया है जो कि पर्यावरण और Heridity से मिलती है हर व्यक्ति की personality अलग अलग होती है जो हमारे जीवन के हर part पर dipend करता है..

(4) अनुभव( Experience) :- Teaching learning हमारे अनुभव में important भूमिका का निरवाह करता है….

(5) प्रशिक्षण (Training) :- Teaching Learning में प्रशिक्षण की भी important भूमिका होती है because best training के हम सब कुछ कर सकते हैं अथवा बिना best training के हम कुछ नहीं कर सकते हैं….

(सीखना या Learning)

वुडवर्थ :- नवीन ज्ञान या नवीन प्रतिक्रिया को प्राप्त करने की प्रक्रिया ही अधिगम है…

क्रो अथवा क्रो :- अधिगम ज्ञान अभिव्रति तथा आदतों का अर्जन है…

अधिगम की विशेषताएं:-

1 सीखना एक process है ..

2 सीखना एक Continues निरतंर चलने वाली प्रक्रिया है..

(3) यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है..

(4) सीखना Transfer हो सकता है जो कि शून्य धनात्मक ऋणात्मक हो सकता है..

(5) सीखना ज्ञानात्मक प्रभावातमक क्रियात्मक होता है…

(6) सीखना रचनात्मक है…

(7) सीखना अपने आप में एक प्रयोजन है…

(8) सीखना (Adaptation) अनुकूलन है… सीखना(Development) विकास है…

(9) सीखना परिवर्तन हैं…


शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रियाऐ

अधिगम प्रक्रिया क्यो आवश्यक है
यदि कोई शिक्षक बच्चों को पढा रहा है तो वह देखता है बच्चो उसका पढाया हुआ कितना सीखा कैसे ग्रहण किया ,यदि बालको ने शिक्षक इनुपुट के आउटपुट दिया तो शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया पूर्ण होती है लेकिन आउटपुट इनपुट के अनुरुप नहीं हुआ तो शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पूर्ण नही होती है

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक

आनुवांशिकता – आनुवांशिकता बालक की अधिगम प्रक्रिया को सकारात्मक और नकारात्मक दोनो प्रकार से प्रभावित करती है। यह आवशयक नही है बालक के माता पिता पढने मे अच्छे है तो बालक पढने मे अच्छा होगा या बालक के माता पिता पढने मे अच्छे नहीं है तो बालक अच्छा नही होगा।

वातावरण – वातावरण बालक की अधिगम प्रक्रिया को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। यदि बालक अच्छे वातावरण मे होगा तो अधिगम प्रक्रिया अच्छी होगी या बुरे वातावरण मे होगा अधिगम प्रक्रिया खराब हो सकती है वर्तमान समय मे वर्चुअल वातावरण बालक की अधिगम प्रक्रिया को हर पल प्रभावित करती है

व्यक्तित्व – सभी की रुचि ,कार्य करने का तरीका अलग अलग होती हैं । इससे अधिगम प्रक्रिया प्रभावित होती है ।

अनुभव – अनुभव अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
यदि कोई व्यक्ति पहली बार किसी कार्य को करता है तो उसे पता नहीं रहता है कैसे करना है क्या करना है परन्तु यदि व्यक्ति ने पहले उस कार्य का अनुभव है तो उसे समस्या कम आती है

प्रशिक्षण – प्रशिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सकारात्मक और नकारात्मक दोनो प्रकार से प्रभावित करता है। यदि आपका प्रशिक्षण अच्छे से हुआ है तो आप उस कार्य को अच्छे से कर सकते हैं यदि अच्छे नही हुआ है तो आपको बहुत सारी परेशानीयो का सामना करना पड़ता हैI

अधिगम प्रक्रिया गर्भावस्था से ही प्रारम्भ हो जाती है लेकिन जन्म लेने के बाद बालक उसको वातावरण से समायोजित कर लेता है

वुडवर्थ के अनुसार नवीन ज्ञान, नवीन प्रतिक्रिया प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिगम है।

क्रो एण्ड क्रो के अनुसार अधिगम आदतो, ज्ञान और अभिवृत्ति का अर्जन है ।

सीखना एक प्रक्रिया है। अर्थात् सीखना एक चरणबद्ध प्रकिया हैं जैसे हम अन अकेडमी पर पढने के लिए पहले एप इनस्टाल फिर आईडी लगाते हैं फिर टीचर को देखते हैं कौनसै टीचर क्या पढाते है
सीखना निरन्तर चलता है। (यह हर समय, हर स्थान, हर परिस्थिति मे चलता रहता है)
सीखना स्थानान्तरित होता रहता है
सीखना ज्ञानात्मक, प्रभावात्मक और क्रियात्मक है (जैसे हमे पहले अन अकेडमी के बारे मे पता चला (ज्ञान हुआ) फिर उसका प्रभाव देखा और बाद मे उससे पढने लगे )

सीखना रचनात्मक हैं।
सीखना एक प्रायोजन /कारण /उद्देश्य है।
सीखना अनुकूलन है
सीखना विकास है
सीखना परिवर्तन है
सीखना सार्वभौमिक है


【अधिगम】

●अधिगम शब्द का शाब्दिक अर्थ सीखना है ।

◆ अधिगम की परिभाषा –

  1. ” सीखना व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया है” …..स्कीनर
    2.” अधिगम आदतों , ज्ञान और अभिवृत्तियों का अर्जन है” …… क्रोएण्ड क्रो”
    3.सीखना अनुभव के परिणाम स्वरूप प्रकट होता है”…क्रैन बैक
    4.” अभ्यास और अनुभूति से व्यवहार में होने वाला परिवर्तन अधिगम है “….. लेविस
    5.” नवीन ज्ञान और नवीन प्रक्रियाओं को प्राप्त करने की क्रिया को अधिगम कहते हैं ”…. वुडवर्थ
    6.” अनुभव और प्रशिक्षण के द्वारा व्यवहार में होने वाले परिवर्तन को अधिगम कहते हैं …. गेट्स
    7.” व्यवहार के कारण व्यवहार में होने वाले परिवर्तन को अधिगम कहते है” …..गिल्फोर्ड

【वंशानुकम】
वंशानुकम की परिभाषा –

  1. ” वंशानुकम व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है ” . .बी.एन.झाँ
    2.” माता – पिता की शारीरिक एवं मानसिक विशेषताओं का हस्तानान्तरण होना ही आनुवांशिकता है ” ….. जेम्स ड्रेवर
    3.” वंशानुकम माता पिता से संतान को प्राप्त होने वाले गुणों का नाम है ” ….. रूथ
  2. “ वंशनुक्रम में वे सभी बातें सम्मिलित हैं जिनसे व्यक्ति का जीवन आरम्भ हुआ है ” …. वुडवर्थ
    5.“ वंशानुक्रम कमबद्ध पीढ़ियों के बीच उत्पत्ति सम्बन्धी सुविधा जनक शब्द है ” …. थामसन

【वातावरण】
वातावरण की परिभाषा –

  1. ” पर्यावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है ” ….. रॉस
    2.” पर्यावरण वह हर चीज है जो व्यक्ति के जीने के अलावा उसे प्रभावित करती है ” ….. एनास्टैसी
    3.” वातावरण में वे सभी तत्व आते हैं जिन्हे व्यक्ति को जीवन आरम्भ करने के लिए समय से प्रभावित किया है ” …. वुडवर्थ
    4.” व्यक्ति का वातावरण उन सभी उत्तेजनाओं का योग है जिसको वह जन्म से लेकर मृत्यु तक ग्रहण करता है ” …. बोरिंग

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